Tag: featured

  • MP में श्रमिकों को राहत, 50 लाख कामगारों का बढ़ा DA; उद्योगों और सरकारी विभागों में मिलेगा लाभ

    MP में श्रमिकों को राहत, 50 लाख कामगारों का बढ़ा DA; उद्योगों और सरकारी विभागों में मिलेगा लाभ

    भोपाल 

    प्रदेश के सरकारी और निजी सेक्टर में काम करने वाले करीब 50 लाख श्रमिकों को एक अक्टूबर से 6 रुपए प्रतिदिन के मान से बढ़ा हुआ परिवर्तनशील महंगाई भत्ता दिया जाएगा।श्रम विभाग ने प्रदेश के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन दरों में बदलाव कर दिया है। 27 मार्च 2027 तक लागू रहने वाली इन नई दरों में बदलाव में सरकारी क्षेत्रों के 10 लाख और निजी सेक्टर खासतौर पर उद्योगों में काम कने वाले करीब 40 लाख श्रमिकों को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत यह लाभ मिलेगा, इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ता भी शामिल है।

    श्रमायुक्त ने यह बदलाव महंगाई सूचकांक के आधार पर किया है। श्रमायुक्त शीतला पटले द्वारा जारी आदेश में नई न्यूनतम वेतन दरें प्रतिदिन श्रम के आधार पर तय की गई हैं, जिसमें 67 सामान्य नियोजन में काम करने वाले श्रमिकों को 26 दिन के आधार पर न्यूनतम वेतन इस तरह दिया जाएगा।

    इन 67 कैटेगरी में काम करने वालों को इसी आधार पर आने वाले समय में वेतन मिलेगा। अकुशल श्रमिक को महीने में 12575, अर्द्धकुशल श्रमिक को 13571, कुशल श्रमिक को 15294 और उच्च कुशल श्रमिक को 16919 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलेगा जो 26 दिन के मान से दिया जाएगा।

    मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) और कृषि सेक्टर में काम करने वालों का वेतन
    लिपिकीय वर्ग में अकुशल श्रमिक को ₹484, श्रेणी 1 को ₹588, श्रेणी 2 को ₹522 रुपए 26 दिन के मान से मासिक वेतन मिलेगा। उच्च कुशल श्रमिक को ₹651 मिलेंगे और इसमें भी श्रेणी एक को 648 रुपए, श्रेणी दो के श्रमिक को 634 और श्रेणी तीन के श्रमिक को 588 रुपए मिलेंगे। अर्द्धकुशल कैटेगरी में श्रेणी एक के श्रमिक को 588 और श्रेणी दो के श्रमिक को 522 रुपए प्रति दिन मिलेंगे।

    अगरबत्ती श्रमिकों के लिए नई दरें:

    अगरबत्ती रोलिंग (1000 अगरबत्ती रोल करने पर)- कुल ₹74.75

    सुगंधित (सेंटेड) स्टिक- कुल ₹75

    छह माह पहले बढ़ाए थे 9 रुपए प्रतिदिन
    श्रम विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम वेतन दरें लागू की थीं। इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के कारण श्रमिकों के वेतन में औसतन ₹9 प्रतिदिन यानी करीब ₹234 मासिक की बढ़ोतरी हुई थी। इसका फायदा सरकारी विभागों के करीब 10 लाख और निजी सेक्टर व उद्योगों के लगभग 40 लाख श्रमिकों को हुआ था।

  • साइबर अपराध से माफिया नेटवर्क तक यूपी पुलिस की कार्रवाई, 23 हजार से ज्यादा इनामी गिरफ्तार

    साइबर अपराध से माफिया नेटवर्क तक यूपी पुलिस की कार्रवाई, 23 हजार से ज्यादा इनामी गिरफ्तार

    योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

    साइबर अपराध पर कार्रवाई से लेकर माफिया की संपत्ति जब्ती तक, यूपी पुलिस का दिखा एक्शन मोड

    साइबर अपराध की रोकथाम में यूपी सबसे आगे निकला, 874.58 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कराई

    इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क पर प्रहार, बीमारू से सुरक्षित प्रदेश बना यूपी

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। वहीं 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    साइबर अपराध पर कार्रवाई में देश में पहला स्थान
    यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश, देश में पहले स्थान पर रहा।

    अपराधियों पर कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा
    20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक (यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये) मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    चिह्नित माफिया और गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई
    प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • भोपाल में बनेंगे वंदे भारत के मोटर, BHEL को 80 ट्रेनों का ऑर्डर; 176 किमी/घंटा होगी स्पीड

    भोपाल में बनेंगे वंदे भारत के मोटर, BHEL को 80 ट्रेनों का ऑर्डर; 176 किमी/घंटा होगी स्पीड

    भोपाल
    देश में अर्ध-तेज गति वाली रेल सेवाओं के विस्तार में भोपाल की भूमिका अब और ज्यादा मजबूत होने जा रही है। भारतीय रेल नेटवर्क पर दौड़ने वाली आधुनिक ट्रेनों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। BHEL-टीटागढ़ वैगन्स लिमिटेड (Titagarh Wagons Ltd) समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के निर्माण के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम ऑर्डर मिला है। इस मेगा प्रोजेक्ट में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ अगले 35 साल तक उनके रखरखाव की बड़ी जिम्मेदारी भी शामिल है।

    भोपाल यूनिट तैयार करेगी ट्रेनों का मोटर और विद्युत तंत्र
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना में BHEL की भोपाल इकाई मुख्य रूप से ट्रेनों के मोटर तैयार करने का काम करेगी। इसके अलावा, कंपनी की भोपाल, बेंगलुरु और झांसी इकाइयां मिलकर इन आधुनिक ट्रेनों के लिए जरूरी प्रणोदन और विद्युत तंत्र का निर्माण करेंगी। ये सभी प्रणालियां ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी होती हैं। यही तंत्र ट्रेन में बिजली की आपूर्ति और उसे तेज गति प्रदान करने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें तकनीकी रूप से ट्रेन का 'इलेक्ट्रिक हार्ट' भी कहा जा सकता है।

    बड़ा प्रोजेक्ट और लंबी जिम्मेदारी
    BHEL-टीटागढ़ वैगन्स समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर मिला है। इस अनुबंध में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ 35 साल तक का लंबा रखरखाव भी शामिल है।

    176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए तैयार होंगी ट्रेनें
    नई पीढ़ी की इन वंदे भारत ट्रेनों को अधिकतम 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया जाएगा, जबकि इनका नियमित परिचालन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल ट्रेन डिब्बों का निर्माण ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके एकीकरण, परीक्षण और दीर्घकालिक रखरखाव का जिम्मा भी संयुक्त रूप से उठाया जाएगा।

    तीन इकाइयों की विशेषज्ञता का होगा इस्तेमाल
    इस परियोजना के जरिए BHEL अपनी अलग-अलग निर्माण इकाइयों की विशेषज्ञता का पूरा इस्तेमाल करेगा। भोपाल के साथ-साथ बेंगलुरु और झांसी की यूनिट्स भी मिलकर काम करेंगी। ट्रेनसेट पूरी तरह तैयार होने के बाद उनके परीक्षण और मेंटेनेंस का काम दोनों कंपनियां मिलकर संभालेंगी, जिससे रेलवे सफर को और अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सके।

  • सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, पंजाब में 3602 स्कूलों के लिए 80.45 करोड़ रुपये जारी

    सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, पंजाब में 3602 स्कूलों के लिए 80.45 करोड़ रुपये जारी

    चंडीगढ़
     पंजाब के सरकारी स्कूल अब एक जैसे तय रंगों में नजर आएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 3602 सरकारी स्कूलों में व्हाइटवाश, पेंट और कलर कोडिंग कराने के लिए 80 करोड़ 45 लाख 40 हजार रुपये की राशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    खास बात यह है कि विभाग ने केवल रंग-रोगन कराने तक ही निर्देश सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि स्कूल की हर दीवार पर कौन सा रंग होगा, कितनी परतें लगेंगी और सामग्री की खरीद से लेकर भुगतान तक का हिसाब कैसे रखा जाएगा, यह भी तय कर दिया है।

    एक अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार यह राशि ईडीएस-53 ‘कन्वर्टिंग गवर्नमेंट स्कूल्स इनटू स्मार्ट स्कूल’ योजना के तहत दी जा रही है। इसके तहत 764 सीनियर सेकेंडरी, 411 हाई, 1895 मिडिल और 532 प्राइमरी स्कूलों में काम होगा। कुल 67.04 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में व्हाइटवाश और पेंट कराया जाएगा। विभाग ने प्रति वर्ग फुट 12 रुपये की दर से खर्च का अनुमान लगाया है।

    अमृतसर में सबसे ज्यादा स्कूल, लुधियाना में सबसे ज्यादा राशि
    जिलेवार देखें तो अमृतसर में 334 स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है। यहां करीब 6.13 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लुधियाना के 261 स्कूलों के लिए सबसे अधिक 7.50 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

    गुरदासपुर के 240 स्कूलों पर 5.89 करोड़, जालंधर के 231 स्कूलों पर 6.05 करोड़ और होशियारपुर के 236 स्कूलों पर 5.23 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पटियाला के 326 स्कूलों के लिए 4.88 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

    सिर्फ सफेदी नहीं, रंग भी सरकार ने तय किया
    विभाग ने स्कूलों के लिए रंगों की पूरी कोडिंग तय की है। कमरों के अंदर तीन फुट तक एनामेल पेंट ब्रॉन्ज मिस्ट और इसके ऊपर सेन ओट्स रंग कराया जाएगा।

    बरामदे, कोरिडोर और गलियारे में तीन फुट तक रैप्सोडी और ऊपर एग कस्टर्ड रंग होगा। दरवाजों और खिड़कियों पर गोल्डन ब्राउन पेंट के कम से कम दो कोट करने होंगे। बाहरी दीवारों पर वेदर प्रूफ पेंट लगाने के निर्देश हैं।

    पुरानी दरार और लीकेज पहले ठीक होगी
    विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेंटिंग से पहले दीवारों की दरारें भरने और लीकेज ठीक करने का काम होगा। पुराने रंग को रगड़कर साफ करने, पुट्टी और प्राइमर लगाने के बाद कम से कम दो कोट पेंट करने होंगे। आईएसआई मार्क वाली सामग्री खरीदना अनिवार्य किया गया है।

    एसएमसी प्रस्ताव के बिना काम नहीं
    काम शुरू करने से पहले जेई से संपर्क और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का प्रस्ताव जरूरी होगा। खरीदी गई सामग्री का स्टाक रजिस्टर, अकाउंट रजिस्टर, लेजर और कैशबुक अपडेट करनी होगी।

    विभाग ने साफ किया है कि जारी राशि का इस्तेमाल केवल व्हाइटवाश और पेंटिंग के लिए ही किया जाए। जिस स्कूल में पहले से यह काम हो चुका है, वहां की राशि मुख्यालय की मंजूरी के बाद दूसरे जरूरतमंद स्कूल को दी जा सकती है। निर्माण कार्य चल रहे स्कूलों में सिविल वर्क पूरा होने के बाद ही रंग-रोगन शुरू होगा।

     

  • Asian Games 2026: भारत ने पाकिस्तान को दी मात, तिलक वर्मा की फिफ्टी और अभिषेक के 61 रन से गोल्ड

    Asian Games 2026: भारत ने पाकिस्तान को दी मात, तिलक वर्मा की फिफ्टी और अभिषेक के 61 रन से गोल्ड

     नई दिल्ली
     एशियन गेम्स 2026 के मेन्स क्रिकेट फाइनल में भारत और पाकिस्तान की शन‍िवार को टक्कर हुई, दोनों ही टीमों के बीच रोमांचक टक्कर देखने को म‍िली. लेकिन भारतीय टीम ने लगातार बैक टू बैक एश‍ियन गेम्स में दूसरा गोल्ड मेडल पक्का किया.

    भारतीय टीम ने पहले खेलते 211/6 का बड़ा स्कोर बनाया. जो भारतीय टीम का पहले खेलते हुए पाकिस्तान के ख‍िलाफ सबसे बड़ा स्कोर रहा. अभ‍िषेक शर्मा, त‍िलक वर्मा और श‍िवम दुबे ने शानदार पार‍ियां खेलीं.  जबाव में पाकिस्तान की टीम टारगेट से दूर रह गई. मुकाबला शन‍िवार (3 अक्टूबर) को न‍िश‍िन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हुआ.

    भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराया, जबकि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 6 व‍िकेट से मात देकर फाइनल में जगह बनाई. मुकाबले में टॉस भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का निर्णय लिया है.

    भारत की नजर अपने खिताब का बचाव करने पर है, जबकि पाकिस्तान पुरुष क्रिकेट में एशियन गेम्स का अपना पहला गोल्ड जीतना चाहेगा. वहीं क्रिकेट का ब्रॉन्ज मेडल शन‍िवार को हुआ, जिसे श्रीलंका की टीम ने 63 रनों से जीता और बांग्लादेश को मात दी.

    पाकिस्तानी बैटिंग की हाइलाइट्स
    रनचेज में पाकिस्तानी टीम को पहला झटका वॉशिंगटन सुंदर ने दिया. सुंदर ने कप्तान साहिबजादा फरहान (10 रन) को पवेलियन रवाना किया. उस समय पाकिस्तान का स्कोर 33/1 था. फिर अक्षर पटेल ने विकेटकीपर बल्लेबाज उस्मान खान को चलता किया, जो केवल 3 रन बना सके. अक्षर ने इसके बाद शानदार बैटिंग कर रहे माज सदाकत (23 रन) को भी अपनी फिरकी में फंसाया.

    इसके बाद शिवम दुबे ने पहली ही गेंद पर सैम अयूब (29) को आउट कर भारत को चौथी सफलता दिलाई. वॉशिंगटन सुंदर ने उनका कैच पकड़ा. इसके बाद  वॉशिंगटन सुंदर ने अब्दुल समद को आउट कर भारत को पांचवीं सफलता दिलाई. समद ने तेज गेंद पर बिना ज्यादा फुटवर्क के बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद हवा में ज्यादा ऊंची चली गई. लॉन्ग-ऑन पर आसान कैच लिया गया.

    ऐसी रही भारत की बल्लेबाजी
    भारतीय टीम को वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ने तूफानी शुरुआत दी. हालांकि वैभव अपनी इनिंग्स को ज्यादा बड़ा नहीं कर पाए. वैभव को सैम अयूब ने विकेटकीपर उस्मान खान के हाथों कैच आउट कराया. वैभव ने 2 छक्के की मदद से 9 बॉल पर 15 रन बनाए. वैभव के आउट होने के समय स्कोर 28/1 था. संजू सैमसन ने इस मैच में भी निराश किया और 2 रनों के निजी स्कोर पर अहमद दानियाल का शिकार बने.

    इसी बीच भारतीय ओपनर अभिषेक शर्मा ने 20 गेंदों में हाफ सेंचुरी पूरी की. जो उनका इस फॉर्मेट में 13वां पचासा रहा. वहीं इसके कुछ देर बाद अभ‍िषेक की पारी 61 रनों पर समाप्त हो गई. अभ‍िषेक ने अपनी पारी में 28 गेंदें खेलीं, उन्होंने 3 चौके और 7 छक्के जड़े. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 217 प्लस रहा. अभ‍िषेक को अराफात मिन्हास ने आउट किया, वो उस्मान खान द्वारा स्टम्प किए गए.

    वहीं भारत को चौथा झटका ईशान किशन के रूप में लगा. उनको अराफात मिन्हास ने बोल्ड कर दिया. ईशान 18 गेंदों में 20 रन बनाकर आउट हुए. उनकी पारी में 3 चौके शामिल रहे. इसके बाद अबरार अहमद ने श्रेयस अय्यर को कैच आउट करा दिया. श्रेयस 24 गेंदों में 21 रन बनाकर पवेलियन लौटे. उनकी पारी में 2 चौके शामिल रहे. साहिबजादा फरहान ने उनका कैच पकड़ा. श्रेयस आउट होने वाले पांचवें ख‍िलाड़ी रहे.

    वहीं अंत‍िम ओवर्स में भारतीय टीम के लिए श‍िवम दुबे और त‍िलक वर्मा ने तेज पारी खेली.  अहमद दानियाल ने शिवम दुबे को कैच आउट करा दिया. दुबे ने 15 गेंदों में 27 रन बनाए, जिसमें 2 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. माज सदाकत ने उनका कैच पकड़ा. त‍िलक वर्मा ने 22 गेंदों पर 51 रनों की शानदार पारी खेली.

    म‍िड‍िल ओवर्स में फ‍िसली, फ‍िर आख‍िरी 4 ओवर्स में  69 रन बनाए  
    खास बात यह रही कि भारतीय टीम के अभ‍िषेक शर्मा जब आउट हुए तो स्कोर 7.5 ओवर्स में 93 रनों पर 3 विकेट हो गया. इसके बाद जब श्रेयस जब 14.1 ओवर्स में आउट हुए तो टीम इंड‍िया का स्कोर 133/5 हो गया. वहीं आख‍िरी के 4 ओवर्स में भारतीय टीम ने 69 रन बनाए.

    भारत-पाकिस्तान T20I में सबसे बड़े फर्स्ट इनिंग स्कोर
        211/6 – भारत, निस्शिन, 2026
        192/5 – भारत, अहमदाबाद, 2012
        181/7 – भारत, दुबई, 2022
        175/7 – भारत, कोलंबो RPS, 2026
        171/5 – पाकिस्तान, दुबई, 2025
        159/8 – पाकिस्तान, मेलबर्न, 2022

    कैसी है प्लेइंग 11
    भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपने-अपने सेमीफाइनल जीते हैं. ऐसे में फाइनल में दोनों टीमों ने अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किए. दोनों ही टीमों ने ओल्ड फॉर्मूला अपनाया.

    एश‍ियन गेम्स फाइनल में टीम इंड‍िया की प्लेइंग 11: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई और जसप्रीत बुमराह.

    एश‍ियन गेम्स के फाइनल में पाकिस्तान की प्लेइंग 11: साहिबजादा फरहान (कप्तान), सैम अयूब, उस्मान खान (विकेटकीपर), माज सदाकत, हसन नवाज, अब्दुल समद, अराफात मिन्हास, अहमद दानियाल, मोहम्मद वसीम जूनियर, अबरार अहमद और सुफियान मुकीम.

    भारत-पाकिस्तान का हालिया रिकॉर्ड
    दोनों टीमों के बीच पिछले 5 मुकाबलों में भारत का पलड़ा भारी रहा है. भारत ने 15 फरवरी 2026 को 61 रनों से जीत दर्ज की थी. इससे पहले 28 सितंबर 2025 को 5 विकेट, 21 सितंबर को 6 विकेट, 14 सितंबर को 7 विकेट और 9 जून 2024 को 6 रन से भारत ने पाकिस्तान को हराया था.

    भारत और पाकिस्तान का हेड टू हेड (टी20 में)
        कुल मैच 17
        भारत जीता 14
        पाकिस्तान जीता 3

    भारत कैसे एश‍ियन गेम्स के फाइनल में पहुंचा
    भारत को 28 सितंबर को अफगानिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल खेलना था, लेकिन बारिश के कारण एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी. बेहतर रैंकिंग के आधार पर भारत सेमीफाइनल में पहुंचा और वहां श्रीलंका को हराया.

    पाकिस्तान का क्वार्टर फाइनल हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ था. यह मैच भी बारिश के कारण बिना गेंद फेंके रद्द हुआ और बेहतर रैंकिंग के आधार पर पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचा, जहां उसने बांग्लादेश को हराकर फाइनल का टिकट कटाया.

    पाकिस्तान ने कैसे बनाई फाइनल में जगह
    दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मात दी. बारिश के कारण मुकाबला 13-13 ओवर का हुआ. बांग्लादेश ने 13 ओवर में 111/7 रन बनाए. सुफियान मोकीम ने तीन विकेट लिए.

    लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की हालत एक समय 53/4 थी, लेकिन अब्दुल समद ने 15 गेंदों में नाबाद 30 रन और हसन नवाज ने नाबाद 27 रन बनाकर 59 रन की मैच जिताऊ साझेदारी की. पाकिस्तान ने 11.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया.

    एशियन गेम्स में क्रिकेट का इतिहास
    2018 को छोड़कर क्रिकेट 2010 से एशियन गेम्स का हिस्सा रहा है. भारत 2022 में अफगानिस्तान को हराकर पुरुष क्रिकेट का बना था और मौजूदा डिफेंडिंग चैम्प‍ियन है. बांग्लादेश पुरुष क्रिकेट में पहला एशियन गेम्स चैम्प‍ियन बना था, जबकि 2014 में श्रीलंका ने गोल्ड जीता. अफगानिस्तान तीनों मौकों पर रनर-अप रहा. भारत ने 2010 और 2014 में हिस्सा नहीं लिया था.

    महिला क्रिकेट में पाकिस्तान ने शुरुआती दो खिताब जीते, जबकि 2022 और 2026 में भारत ने गोल्ड जीता. खराब मौसम के कारण टूर्नामेंट में लगातार छह मुकाबले रद्द होने के बाद अब फाइनल पर भी मौसम की नजर रहेगी.

     

  • भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भारत की 4 ऐतिहासिक धरोहरों की अनोखी कहानी, पत्थरों में छिपे रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

    भोपाल
     मध्यप्रदेश की सदियों पुरानी विरासत अब दुनिया के सामने अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। UNESCO की आधिकारिक Tentative List में प्रदेश के चार नए ऐतिहासिक स्थल शामिल किए गए हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    इन चारों स्थलों को UNESCO की सूची में 8 जुलाई 2026 को जोड़ा गया। यह अंतिम विश्व धरोहर सूची नहीं है, बल्कि आगे World Heritage Site के संभावित नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।

    क्यों खास हैं ये चार विरासत स्थल?
    गिन्नौरगढ़ किला सीहोर जिले की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन बौद्ध गुफाओं और भित्तिचित्रों के लिए जानी जाती हैं। UNESCO के अनुसार बाघ की गुफाओं में संरक्षित चित्र प्राचीन बौद्ध म्यूरल परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हैं।

    चंबल घाटी के मंदिर समूह में बेटेश्वर, पदावली और ककनमठ जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। वहीं विदिशा की उदयगिरि गुफाएं भी मध्यप्रदेश की प्राचीन धार्मिक और स्थापत्य विरासत को सामने रखती हैं। UNESCO की सूची में इन सभी को अलग-अलग प्रस्तावों के रूप में दर्ज किया गया है।

    पर्यटन और स्थानीय रोजगार की उम्मीद
    UNESCO की Tentative List में शामिल होना इन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, होम-स्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं और आगे की UNESCO प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    विरासत संरक्षण पर भी बढ़ेगा फोकस
    चारों स्थलों को वैश्विक विरासत की संभावित सूची में जगह मिलने के बाद इनके संरक्षण और प्रस्तुतीकरण पर भी ध्यान बढ़ने की उम्मीद है। मध्यप्रदेश में पहले से कई ऐतिहासिक स्थल UNESCO की Tentative List में हैं और नए चार नाम जुड़ने से प्रदेश की विरासत सूची और विस्तृत हुई है। अब मध्यप्रदेश की इन चार धरोहरों की कहानी सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हें विश्व धरोहर की दौड़ में आगे बढ़ाने का अगला चरण शुरू होगा।

  • बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट में 400 करोड़ के कामों का प्रस्ताव, स्वास्थ्य के साथ सड़क और पानी पर भी सरकार का फोकस

    बालाघाट 
     केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन बालाघाट में विकास कार्यों का लेखा जोखा पेश करेगी. इसके लिए राज्य सरकार ने बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 400 करोड़ से अधिक की योजना तैयार की है. इस विकास योजना का खाका आज केन्द्रीय गृहमंत्री के सामने रखा जाएगा। 

    बालाघाट क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के साथ ही पेयजल, सड़क बिजली आदि की व्यवस्था बेहतर करने जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार अगले एक साल में करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि खर्च करेगी.हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी बालाघाट पहुंचे थे और उन्होंने आदिवासी जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर सवाल खड़े किए थे। 

    बालाघाट के 5 ब्लॉक में होंगे 1500 काम
    आदिवासी जिले बालाघाट में सड़क, स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए राज्य शासन ने करीबन 400 करोड़ रुपए की राशि से कई काम कराने का निर्णय किया है. इसके लिए मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने तमाम कामों को स्वीकृति दे दी है. इस पूरे प्लान को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने राज्य शासन द्वारा रखा जाएगा। 

    इसके तहत राज्य शासन बालाघाट जिले के परसवाड़ा, बैहर, लांजी, बिरसा और किरनापुर में करीबन 1500 कामों को किया जाएगा. वहीं, विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले इन कामों के लिए जनजतीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सभी विभागों के बीच समन्वय का काम करेंगे। 

    सड़कों के निर्माण पर खर्च होंगे 269 करोड़ रुपये
    योजना के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से सबसे अधिक राशि खर्च की जाएगी। पांचों विकासखंडों में 151 सड़क और सीसी रोड के निर्माण पर 268.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपये तथा 60 स्टॉप डैम के लिए 35.97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों का होगा निर्माण
    आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी तैयार किए जाएंगे। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।

    बच्चों की मौत वाले गांवों पर विशेष ध्यान
    जिले के डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। अब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    पेयजल व्यवस्था भी होगी मजबूत
    पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है। वहीं, जिन गांवों में नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं होते, वहां पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

    बालाघाट में क्या-क्या काम होंगे?
    राज्य शासन बालाघाट में 400 करोड़ के विकास कार्यों को 13 विभागों के साथ मिलकर पूरा करेगी. इसके तहत 151 सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके. इस पर 268 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी. जिले के सभी ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए 20 से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य केन्द्र खोले जाएंगे. इसके अलावा सामुदायिक और स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन बनाए जाएंगे. इनके निर्माण पर 3.11 करोड़ की राशि खर्च होगी। 

    देर रात 12 बजे भोपाल पहुंचे अमित शाह, मध्य प्रदेश गौपालक सम्मेलन में होंगे शामिल
    इसके अलावा अनाज वितरण की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए राशन दुकान और गोदाम का निर्माण किया जाएगा. इस पर 6.87 करोड की राशि खर्च होगी. बालाघाट में पेयजल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पांच ब्लॉक में नल जल योजना के कामों को तेजी से पूरा कराया जाएगा. जिन स्थालों पर पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां दूसरे विकल्पों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। 

     

  • पंजाब को मिलेगी अपनी फिल्म सिटी, न्यू चंडीगढ़ के पास 300 एकड़ तक जमीन का ऐलान

    पंजाब को मिलेगी अपनी फिल्म सिटी, न्यू चंडीगढ़ के पास 300 एकड़ तक जमीन का ऐलान

    चंडीगढ़
    पंजाब के कला, संस्कृति और सिनेमा जगत के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने मनोरंजन उद्योग को एक नया आयाम देने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लुधियाना में आयोजित एक प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव के दौरान यह घोषणा की है कि जल्द ही न्यू चंडीगढ़ के पास 200 से 300 एकड़ के विशाल क्षेत्र में एक आधुनिक फिल्म सिटी का निर्माण किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए न केवल पंजाबी सिनेमा को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को एक ही छत के नीचे शूटिंग से लेकर पोस्ट-प्रोडक्शन तक की तमाम विश्वस्तरीय सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

    न्यू चंडीगढ़ में बनेगी हाई-टेक फिल्म सिटी, कई प्रोड्यूसर्स से हो चुकी है बात
    लुधियाना के सिनेपोलिस एमबीडी मॉल में आयोजित फिल्म महोत्सव के भव्य शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में इस महत्वकांक्षी परियोजना का खाका सबके सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म सिटी को बसाने को लेकर सरकार की कई नामी-गिरामी फिल्म प्रोड्यूसर्स और स्टूडियो के साथ गंभीर चर्चाएं हो चुकी हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य पंजाब को फिल्म निर्माण का एक बड़ा हब बनाना है, ताकि मुंबई या दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योगों की तरह पंजाब में भी फिल्मों के निर्माण के लिए तमाम आधुनिक संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की आबोहवा, संस्कृति और भौगोलिक बनावट हमेशा से ही फिल्म निर्माताओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए देश भर के निर्देशक उत्सुक रहते हैं। इस नई फिल्म सिटी के बन जाने से फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए दूर-दराज भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे एक ही परिसर में अपनी फिल्मों से जुड़े सभी कार्य आसानी से पूरे कर सकेंगे।

    क्यों खास है पंजाब का लोकेशन? शूटिंग के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में पंजाब की भूमि का एक खास और सुनहरा स्थान रहा है। फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से पंजाब के पास विविध प्रकार के लोकेशन्स मौजूद हैं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में खास तौर पर किया:

        सरसों के खेत और हरियाली: पंजाबी संस्कृति और बॉलीवुड के रोमांटिक दृश्यों की पहचान रहे सरसों के पीले खेत और लहलहाती फसलें हमेशा से निर्देशकों की पहली पसंद रहे हैं।
        भाखड़ा बांध की झीलें
    : पानी के विशाल जलस्त्रोत और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर भाखड़ा बांध की झीलें किसी भी फिल्म के दृश्यों में चार चांद लगा देती हैं।
        ऐतिहासिक और पारंपरिक घर: अबोहर, फाजिल्का और ग्रामीण इलाकों में मौजूद पुराने व पारंपरिक पंजाबी घर अपनी खास वास्तुकला के कारण पीरियड फिल्मों या ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित कहानियों के लिए एकदम उपयुक्त हैं।
        कंडी क्षेत्र की वादियां: कंडी एरिया की प्राकृतिक हरियाली और पहाड़ी नज़ारे किसी भी एक्शन या थ्रिलर फिल्म की शूटिंग के लिए बेहतरीन माहौल प्रदान करते हैं।

    शूटिंग के साथ पोस्ट-प्रोडक्शन का काम भी होगा अब पंजाब में ही
    अभी तक की सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि पंजाब में फिल्मों की शूटिंग तो बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन एडिटिंग, साउंड डिजाइनिंग, वीएफएक्स (VFX), कलर ग्रेडिंग और डबिंग जैसे पोस्ट-प्रोडक्शन के काम के लिए यूनिट्स को वापस मुंबई या अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता था। इस नई फिल्म सिटी के निर्माण के बाद यह सारी प्रक्रियाएं पंजाब के भीतर ही पूरी हो सकेंगी।

    इससे न केवल समय और लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। एडिटिंग स्टूडियोज, विजुअल इफेक्ट्स हब और साउंड रिकॉर्डिंग स्टेज के बन जाने से पंजाब का स्थानीय तकनीशियन वर्ग भी मजबूत होगा।

    फिल्म महोत्सव की सराहना और सिनेमा का बढ़ता दायरा
    इस दौरान मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव के आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आम जनता को सिनेमा की बेहतरीन कला से जोड़ने का एक अनूठा और सराहनीय प्रयास हैं। एक ही छत के नीचे हिंदी, पंजाबी, दक्षिण भारतीय (साउथ) और यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों को देखने का मौका मिलना दर्शकों के लिए एक अनमोल अनुभव है।

    उन्होंने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह समाज का दर्पण होती हैं। सिनेमा के माध्यम से इंसानी जिंदगी के अनछुए पहलुओं को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इस तरह के आयोजनों से कला और संस्कृति के प्रति युवाओं का रुझान और अधिक बढ़ता है।

    एक पुराना दिलचस्प किस्सा: जब सीएम मान ने साझा की पुरानी यादें
    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पुराने दिनों का एक मजेदार और दिलचस्प किस्सा भी साझा किया, जिसने वहां मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने याद करते हुए बताया कि जब वे एक कलाकार और कॉमेडियन के रूप में सक्रिय थे, तब वे गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने के लिए फीस (पैसे) लेकर जाते थे।

    हंसते हुए मुख्यमंत्री ने बरनाला के एक गांव का वाकया सुनाया जब वे हाल ही में वहां बतौर सीएम गए थे। उन्होंने बताया कि वहां के बुजुर्गों और ग्रामीणों ने उनका पूरा हिसाब-किताब लगा रखा था। ग्रामीणों ने उनसे कहा कि 1998 में वे एक टूर्नामेंट में कार्यक्रम करने के एवज में दो लाख रुपये लेकर आए थे, और आज यदि उस पर ब्याज जोड़ दिया जाए तो वह रकम काफी बड़ी बनती है। इस पर चुटकी लेते हुए सीएम मान ने कहा कि अब वे कलाकार की भूमिका में नहीं हैं, बल्कि जनता द्वारा सौंपी गई एक बड़ी और पवित्र जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं।

    दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
    लुधियाना के इस भव्य आयोजन में राज्यभर से कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। इस दौरान पर्यावरणविद् एवं राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल, कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां, लुधियाना की मेयर इंदरजीत कौर, विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू, एडवोकेट परमवीर सिंह और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक समागम में कला जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शिरकत कर रही हैं, जिससे पंजाब के सांस्कृतिक गलियारों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

    पंजाबी सिनेमा के सुनहरे भविष्य की ओर एक बड़ा कदम
    पिछले कुछ वर्षों में पंजाबी सिनेमा (पॉलीवुड) ने बॉक्स ऑफिस पर न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। पंजाबी फिल्मों के बजट, उनकी विषयवस्तु (Content) और अभिनय के स्तर में अभूतपूर्व सुधार देखा गया है। ऐसे में न्यू चंडीगढ़ में स्थापित होने वाली यह फिल्म सिटी पंजाबी फिल्म उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

    सरकार की इस दूरदर्शी सोच से यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में पंजाब केवल कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म जगत के सबसे चमकते हुए केंद्रों में से एक के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करने जा रहा है। न्यू चंडीगढ़ की यह फिल्म सिटी पंजाबी कलाकारों और निर्देशकों के सपनों को एक नया और मुकम्मल आसमान देने का काम करेगी।

  • राजा वडिंग की जगह परगट सिंह बने पंजाब कांग्रेस चीफ, पूर्व हॉकी कप्तान को मिली नई कमान

    राजा वडिंग की जगह परगट सिंह बने पंजाब कांग्रेस चीफ, पूर्व हॉकी कप्तान को मिली नई कमान

    चंडीगढ़ 

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद उनकी जगह जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह लेंगे। नेतृत्व में यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले और वडिंग के इस्तीफे के बाद हुआ है।

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह
    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद उनकी जगह जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह लेंगे। नेतृत्व में यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले और वडिंग के इस्तीफे के बाद हुआ है।

    पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया है। वह अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह लेंगे, जिन्होंने शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह पंजाब पुलिस में एसपी भी रहे हैं और चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    कांग्रेस पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है और इसी बीच नेतृत्व में यह बदलाव में हुआ है। राजा वडिंग ने पद छोड़ने के बाद पंजाब के कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट पर अपनी विदाई के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। इसके कुछ ही घंटों बाद परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया।

    62 वर्षीय परगट सिंह राजनीति में आने से पहले भारतीय हॉकी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। वह तीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और दो ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी भी की। खेल के मैदान के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस, हॉकी प्रशासन और राजनीति में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं।

    पंजाब की सियासत में बड़ा फेरबदल
    इसके साथ ही करीब तीन महीने से प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा गुट की दोनों ही मांगें अब पूरी हो गई हैं।

    हाईकमान ने पहले बघेल को हटाकर सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी और अब प्रदेश प्रधान की जिम्मेदारी परगट सिंह को सौंप दी है। वे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के करीबी माने जाते हैं।

    उन्हें एक गंभीर राजनीतिज्ञ भी माना जाता है। परगट की नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 1 जुलाई को घोषित विभिन्न चुनाव संबंधी समितियों में कोई बदलाव नहीं होगा।

    परगट के लिए चुनौती
    पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार विजेता व पूर्व पुलिस अधिकारी परगट सिंह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के विभिन्न धड़ों को एकजुट कर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना होगी। गुटबाजी के कारण ही वड़िंग को एक जुलाई को हाईकमान की ओर से उन्हें प्रदेश प्रधान बनाए रखने के बावजूद पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

    कौन हैं परगट सिंह?
    परगट सिंह का जन्म जालंधर के मिठापुर गांव में हुआ था। यह गांव हॉकी खिलाड़ियों के लिए जाना जाता है। परगट सिंह भारतीय हॉकी टीम में फुल-बैक यानी डिफेंडर की भूमिका निभाते थे। अपने दौर में उन्हें भारत के प्रमुख रक्षात्मक खिलाड़ियों में गिना जाता था।

    उन्होंने 1988 के सियोल, 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बार्सिलोना और अटलांटा ओलंपिक में वह भारतीय टीम के कप्तान थे। अटलांटा ओलंपिक 1996 के उद्घाटन समारोह में उन्हें भारत का ध्वजवाहक बनने का सम्मान भी मिला था।

    खेल में उनकी उपलब्धियाँ
        1986 एशियाई खेल: सियोल में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक।
        1990 एशियाई खेल: बीजिंग में भारतीय टीम के साथ रजत पदक।
        1989: खेल के क्षेत्र में योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार।
        1998: पद्मश्री से सम्मानित।

    खिलाड़ी के रूप में करियर समाप्त होने के बाद परगट सिंह ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच के रूप में भी काम किया। इसके अलावा वह पंजाब में हॉकी प्रशासन से जुड़े रहे। 2017 में वह हॉकी पंजाब के महासचिव भी बने।

    2012 में राजनीति में आए
    राजनीति में आने से पहले परगट सिंह पंजाब पुलिस में अधिकारी थे। उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए पुलिस अधीक्षक यानी एसपी का पद हासिल किया। बाद में उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2012 में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार जगबीर सिंह बराड़ को हराया और पहली बार विधायक बने थे।

    पाठकों की पसन्द
    हालांकि, अकाली दल में उनका राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं चला। जुलाई 2016 में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया। परगट सिंह ने उस समय अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर मतदाताओं के भरोसे को तोड़ने का आरोप लगाया था।
    नवजोत सिंह सिद्धू के साथ बनाया था मोर्चा

    अकाली दल छोड़ने के बाद परगट सिंह नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस बंधुओं के साथ ‘आवाज-ए-पंजाब’ नाम के राजनीतिक मोर्चे से जुड़े। इस मोर्चे ने खुद को उन ताकतों के विरोध में खड़ा बताया था, जिन्हें उसके नेता पंजाब के हितों के लिए नुकसानदेह मानते थे। यह राजनीतिक मोर्चा ज्यादा समय तक सक्रिय नहीं रहा। इसके बाद परगट सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए।

    2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जालंधर कैंट सीट से फिर जीत हासिल की। इस तरह वह लगातार दूसरी बार इस सीट से विधायक बने, हालांकि इस बार पार्टी बदल चुकी थी।

    चन्नी सरकार में शिक्षा और खेल मंत्री रहे
    पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद परगट सिंह को कैबिनेट में जगह मिली। उन्होंने 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक मंत्री के रूप में काम किया। चन्नी सरकार में उनके पास स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामले और प्रवासी भारतीय मामलों जैसे विभाग थे।

    इस जिम्मेदारी के दौरान परगट सिंह को शिक्षा और खेल से जुड़े मुद्दों पर काम करने का अवसर मिला। हॉकी खिलाड़ी और कोच के रूप में उनकी पृष्ठभूमि के कारण खेल विभाग की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

    AAP की लहर में भी बचाई थी अपनी सीट
    पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को बड़ा जनादेश मिला था। इस चुनाव में कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी, लेकिन परगट सिंह अपनी जालंधर कैंट सीट बचाने में सफल रहे। उन्होंने पूर्व हॉकी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सुरिंदर सिंह सोढ़ी को लगभग 5800 वोटों से हराया।

    इस जीत के साथ परगट सिंह ने जालंधर कैंट से लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीता। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनके सामने केवल अपनी विधानसभा सीट तक सीमित रहने के बजाय पूरे राज्य में पार्टी संगठन को संभालने की जिम्मेदारी होगी।

    2027 के चुनाव से पहले बड़ी चुनौती
    परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस की कमान ऐसे समय मिली है जब पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी है। उनके सामने संगठन को मजबूत करने, पार्टी नेताओं के बीच तालमेल बनाने और मतदाताओं के बीच कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर काम करने की चुनौती होगी।

    राजा वडिंग के इस्तीफे और सचिन पायलट पर उनके आरोपों के बाद नेतृत्व परिवर्तन ने प्रदेश कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक सवालों को भी सामने ला दिया है। नए अध्यक्ष के लिए पार्टी के अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण होगा। परगट सिंह का राजनीतिक अनुभव, तीन बार विधायक रहना और चन्नी सरकार में मंत्री के रूप में काम करना उनकी नई जिम्मेदारी का आधार है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका का दायरा पहले से कहीं बड़ा होगा।

     

  • MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे।

    वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे।

    विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री

    68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।

    पटवारियों ने कहा-
    अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे।

    सरकार का दावा-
    बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है।

    जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार
    जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती।

    5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार
    नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया।

    मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे।

    विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल
        जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?
        यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?
        जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?
        अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?