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  • सुनेत्रा डिप्टी CM की रेस में? शरद पवार बोले– मुझे नहीं पता, NCP विलय पर दिया अहम संकेत

    सुनेत्रा डिप्टी CM की रेस में? शरद पवार बोले– मुझे नहीं पता, NCP विलय पर दिया अहम संकेत

    मुंबई 

    NCP प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को आज महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी. अब सुनेत्रा के डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने पर शरद पवार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. साथ ही उन्होंने दोनों एनसीपी पार्टियों के विलय को लेकर भी बड़ा बयान दिया है.

    शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या सुनेत्रा आज शपथ लेंगी तो उन्होंने कहा, 'मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. ये फैसला उनकी पार्टी ने ही लिया होगा, क्योंकि कुछ नाम सामने आ रहे हैं- जैसे प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे, संभव है कि इन्हीं लोगों ने ये तय किया हो. पार्टी के स्तर पर कोई आंतरिक निर्णय लिया गया होगा.'

    'दोनों NCP का हो विलय'

    शरद पवार ने दोनों एनसीपी की मिलने की बात करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सभी को ये ध्यान रखना होगा कि हालात का सामना कैसे किया जाए. किसी न किसी को आगे आना ही पड़ेगा. पिछले चार महीनों से दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के एक होने को लेकर चर्चा चल रही है. इस प्रक्रिया का नेतृत्व अजित पवार और जयंत पाटिल कर रहे थे. अब ये होगा या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. दोनों दल साथ आएं यही अजित की इच्छा थी.

    'मुझे नहीं है जानकारी….'

    उन्होंने ये भी कहा कि एनसीपी को आगे क्या करना है, ये उनका फैसला है. ये मैं तय नहीं करूंगा. मेरी सुनेत्रा पवार के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. मुझे लगता है कि सुनील तटकरे, छगन भुजबल और प्रफुल पटेल ने पहल कर मुख्यमंत्री से इस बारे में चर्चा की होगी. आज सुबह मैंने अखबार में पढ़ा कि प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने मुख्यमंत्री से चर्चा की है, लेकिन इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी.

    बारामती के गोविंद बाग में हुई थी बैठक

    वहीं, दोनों पार्टियों के विलय को लेकर शरद और अजित पवार के बीच बारामती के गोविंद बाग में बैठक हुई थी. ये बैठक 17 जनवरी को हुई थी और 12 फरवरी को दोनों पार्टियों के विलय पर अंतिम मोहर लगाई जानी थी.

    मुंबई पहुंचीं सुनेत्रा पवार

    दूसरी ओर बताया जा रहा है कि सुनेत्रा पवार मुंबई पहुंच चुकी हैं. दोपहर को एनसीपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें उन्हें विधायक दल का नेता चुना जाएगा. इसके बाद शाम लगभग 5 बजे राज भवन या लोक भवन में  शपथ ग्रहण समारोह होगा.

    सूत्रों का ये भी कहना है कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने सुनेत्रा पवार के नाम को स्वीकार कर लिया है और सुनेत्रा को अजित पवार के पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. हालांकि, पोर्टफोलियो का वितरण बाद में हो सकता है. उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव लड़ना होगा.

    एक पार्टी नेता ने कहा, 'ये फैसला पार्टी स्तर पर लिया गया है. प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने मुख्यमंत्री से चर्चा की होगी. सुनेत्रा पवार के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई, लेकिन पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए किसी को आगे आना जरूरी था.'

  • गोल्ड-सिल्वर में हड़कंप: चांदी ₹1 लाख गिरी, सोना 33 हजार रुपये फिसला

    गोल्ड-सिल्वर में हड़कंप: चांदी ₹1 लाख गिरी, सोना 33 हजार रुपये फिसला

     नई दिल्ली

    सोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट (Gold-Silver Price Crash) देखने को मिली है. एक ही दिन में जहां चांदी का भाव 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गया है, तो वहीं सोना भी एक झटके में 33000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है. न सिर्फ वायदा कारोबार में, बल्कि घरेलू मार्केट में भी इन कीमती धातुओं के दाम में अचानक तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्सपर्ट पहले से ही ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे थे और हुआ भी कुछ ऐसा है. आइए जानते हैं गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश के पीछे के बड़े कारणों के बारे में… 

    देखते ही देखते फूटा चांदी का बुलबुला
    एक्सपर्ट्स के अनुमान सच साबित हुए हैं और आखिर चांदी का बुलबुला फूट गया (Silver Bubble Burst) है. जी हां, सिर्फ एक ही दिन में 1 Kg Silver Price एक लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते गुरुवार को तूफानी तेजी के साथ उछाल भरते हुए अपना नया हाई लेवल छूने के बाद अंत में 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई थी, वहीं शुक्रवार को वायदा कारोबार बंद होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट क्रैश (Silver Price Crash) हो गया और ये तेजी से गिरते हुए 2,91,922 रुपये पर आ गई. यानी एक झटके में ये 1,07,971 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई. 

    हाई से इतना टूटा चांदी का भाव 
    इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चांदी की कीमतों ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और ये 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंच गई थी. लेकिन झटके में बुलंदियों पर पहुंची चांदी ने अचानक ही निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और इस हाई लेवल से 1,28,126 रुपये महज एक दिन में ही सस्ती हो गई. 

    Silver ही नहीं, Gold भी धड़ाम
    न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का बुलबुला भी फूटा है. 10 Gram 24 Karat Gold Rate में सिर्फ एक कारोबारी दिन में ही 33,113 रुपये की बड़ी गिरावट आई है. सिल्वर प्राइस बुरी तरह फिसलने के साथ-साथ गोल्ड रेट भी क्रैश हो गया. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को क्लोजिंग तक ये फिसलकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. 

    अगर सोने के हाई लेवल से इसकी कीमत में आई गिरावट पर गौर करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate भी चांदी की तरह ताबड़तोड़ तेजी लेकर 1,93,096 रुपये के अपने लाइफ टाइम हाई पर पहुंचे थे और फिर अचानक इसमें ऐसी गिरावट आई कि सोना इस हाई से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया. 

    अचानक क्यों आई ये बड़ी गिरावट? 
    सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल के बीच एक्सपर्ट्स पहले सी ही अनुमान जता रहे थे कि ये इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेजी से फिसल भी सकता है और उनके अनुमान शुक्रवार को सच भी साबित हो गए. अगर इन कीमती धातुओं के भाव में आई गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई वजह नजर आती हैं. 

    Gold-Silver Crash का एक बड़ा कारण मुनाफासूली रही, ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी और बिकवाली के दबाव में झटके में दोनों के दाम बिखर गए. न सिर्फ सोना-चांदी, बल्कि इनके ईटीएफ (Gold-Silver ETF Crash) भी बिखरे हुए नजर आए. इसमें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी का भी बड़ा रोल रहा. आमतौर पर जब US  Dollar मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए गोल्ड- सिल्वर खरीदना महंगा पड़ता है और इनकी डिमांड घट जाती है, जिससे कीमतें भी कम होती है.

    डॉलर के साथ ही US Treasury की यील्ड भी बढ़ी है और निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न नजर आने लगा है, जिससे ये बिकवाली देखने को मिली. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन में कमी और US Fed में जेरोम पॉवेल की जगह उनके पसंदीदा व्यक्ति केविन वार्श की एंट्री से जुड़ी खबरों ने भी सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है. 

  • सीरीज का क्लाइमेक्स मैच: सैमसन की लय और अक्षर की सेहत तय करेगी भारत की रणनीति

    सीरीज का क्लाइमेक्स मैच: सैमसन की लय और अक्षर की सेहत तय करेगी भारत की रणनीति

    तिरुवनंतपुरम
    खिताब का प्रबल दावेदार भारत टी20 विश्व कप से पहले शनिवार को यहां जब न्यूजीलैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में खेलने के लिए उतरेगा तो उसे उम्मीद रहेगी कि संजू सैमसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने फॉर्म में वापसी करने और अक्षर पटेल फिटनेस हासिल करने में सफल रहेंगे।

    विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत ने प्रयोग करते हुए पांच मुख्य गेंदबाजों को ही खिलाया तथा ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और शिवम दुबे से गेंदबाजी नहीं करवाई। भारत यह मैच हार गया था लेकिन इससे श्रृंखला के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा क्योंकि भारतीय टीम पहले ही इसे अपने नाम कर चुकी थी।

    जैसा कि श्रृंखला के पिछले मैचों में देखा गया, भारत अपने गेंदबाजी विभाग में एक बार फिर फेरबदल कर सकता है। भारतीय टीम प्रबंधन पिछले दो मैचों में आराम देने के बाद मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को मौका दे सकता है।

    बल्लेबाजी विभाग में शायद ज्यादा बदलाव न हों, लेकिन टीम प्रबंधन सैमसन पर नजर रखेगा। अपनी निर्भीक बल्लेबाजी के लिए मशहूर सैमसन इस श्रृंखला में रन बनाने के लिए जूझ रहे हैं। उनकी फॉर्म के बजाय उनकी तकनीकी कमजोरी चिंता का विषय है जिससे उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया है। वह सात फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप से पहले बड़ी पारी खेलने के लिए बेताब होंगे।

    सैमसन अब अपनी गृह नगर में खेलेंगे और यहां के अपने समर्थकों के सामने शायद वह अपनी खोई हुई लय को फिर से प्राप्त कर लें। टीम के आगमन के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो से यह स्पष्ट हो गया कि वह देश के इस हिस्से में सुपरस्टार हैं।

    कप्तान सूर्यकुमार यादव को हवाई अड्डे के निकास द्वार पर अपने ‘चेट्टा’ (बड़े भाई) के लिए मजाक में रास्ता साफ करते हुए देखा गया, जहां सैकड़ों प्रशंसक सैमसन और उनके साथियों की एक झलक पाने के लिए कतार में खड़े थे।

    ईशान किशन के रूप में भारतीय टीम के पास सैमसन का मजबूत विकल्प मौजूद है। उन्होंने इस श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन इस विकेटकीपर बल्लेबाज को अज्ञात चोट के कारण पिछले मैच से बाहर बैठना पड़ा था।

    ऑलराउंडर अक्षर भी नागपुर में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उंगली में चोट लगने के बाद से नहीं खेले हैं। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे मैच से पहले नेट पर गेंदबाजी की थी।

    भारत टी20 विश्व कप में अपना पहला मैच सात फरवरी को मुंबई में खेलेगा और वह उससे पहले जीत हासिल करना चाहेगा। इस तरह से देखा जाए तो भारत इस मैच को औपचारिकता नहीं मानेगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ 4-1 की शानदार जीत से शैली, ताकत और गहराई से भरपूर टीम का आत्मविश्वास और भी बढ़ेगा।

    न्यूजीलैंड की टीम बिल्कुल यह नहीं चाहेगी कि ऐसा हो। उसकी टीम पहले तीन मैचों में वे भारत के आक्रामक रवैये के सामने बेबस नजर आई, लेकिन विशाखापत्तनम में उन्होंने भारत के प्रमुख बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में कामयाबी हासिल की।

    अभिषेक शर्मा और सूर्यकुमार यादव को आउट करने के बाद, न्यूजीलैंड के गेंदबाज शिवम दुबे की तूफानी बल्लेबाजी के बावजूद बाकी बल्लेबाजों को रोकने में सफल रहे। अब उन्हें पता चल गया है कि यह भारतीय टीम अजेय नहीं है और 3-2 का अंतर उन्हें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले मानसिक रूप से मजबूत करेगा।

    ग्रीनफील्ड स्टेडियम में ढेरों रन बनते रहे हैं। भारत ने यहां खेले गए अपने चार टी20 मैचों में से तीन जीते हैं, जिसमें 2017 में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीता गया एक मैच भी शामिल है। लेकिन जैसा कि कप्तान मिचेल सैंटनर ने कहा, कीवी टीम अब जानती है कि भारत को हराने के लिए क्या करना जरूरी है। ऐसे में यहां एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

    सलामी बल्लेबाज टिम सीफर्ट के टीम में शामिल होने से न्यूजीलैंड के शीर्ष क्रम को काफी मजबूती मिली है। न्यूजीलैंड की टीम हालांकि गेंदबाजी में सुधार की उम्मीद कर रही होगी। उसके प्रमुख तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन टीम में शामिल है लेकिन वह अंतिम एकादश में जगह बना पाते हैं या नहीं, यह उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा।

    टीम इस प्रकार हैं:
    भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल (उप-कप्तान), रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, ईशान किशन (विकेटकीपर), रवि बिश्नोई।

    न्यूजीलैंड: मिचेल सैंटनर (कप्तान), माइकल ब्रैसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे (विकेटकीपर), जैकब डफी, जैक फाक्स, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, बेवन जैकब्स, डैरिल मिचेल, जेम्स नीशम, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रविंद्र, ईश सोढ़ी, लॉकी फर्ग्यूसन।

    मैच शाम सात बजे शुरू होगा।

     

  • भारतीय DRDO तैयार कर रहा ऐसा सिस्टम, S-400 पुरानी बात, जेट जैसे JF-17, J-10 होंगे बेअसर

    भारतीय DRDO तैयार कर रहा ऐसा सिस्टम, S-400 पुरानी बात, जेट जैसे JF-17, J-10 होंगे बेअसर

    बेंगलुरु 

    भारत डिफेंस सेक्‍टर में खुद को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. मिसाइल, तोप-टैंक, फाइटर जेट, एंटी मिसाइल सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम भी डेवलप किया जा रहा है. 21वीं सदी में टेक्‍नोलॉजी ने बड़ी छलांग लगाई है. रक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. तकनीक ने युद्ध और सशस्‍त्र संघर्ष के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है. अब ड्रोन वॉरफेयर का समय आ गया है. इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है. सामरिक तौर पर भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. हमारी देश की सीमाएं एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती हैं. इस्‍लामाबाद और बीजिंग की नीतियों से हर कोई वाकिफ है, ऐसे में भारत के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन-पाकिस्‍तान की युगलबंदी देखने को मिली थी.

    चीनी फाइटर जेट और मिसाइल के साथ ही तुर्की निर्मित ड्रोन का इस्‍तेमाल भारत पर अटैक करने में किया गया था. इन सब सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके पूरी तरह से अस्तित्‍व में आने के बाद देश के हर हिस्‍से को किसी भी एरियल थ्रेट से सुरक्षित रखा जा सकेगा. मिशन सुदर्शन चक्र के तहत प्रोजेक्‍ट कुश (Project Kusha) पर काम चल रहा है. बताया जा रहा है कि प्रोजेक्‍ट कुश इस तक पावरफुल होगा कि कई मायनों में रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम भी इसके सामने बौना पड़ जाएगा.

    भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत चल रहा प्रोजेक्ट कुश देश के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल बनकर उभर रहा है. आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकथि राजू ने इस कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली विकसित करना है, जिसकी क्षमता रूस के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी बेहतर होगी. प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है. ये तीनों मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और हाई-वैल्यू एयरबोर्न एसेट्स जैसे खतरों से देश की सुरक्षा करने में सक्षम होगी. यह प्रणाली भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

     

    इतना खास क्‍यों है प्रोजेक्‍ट कुश?
    डिफेंस प्रोग्राम की पहली कड़ी M1 इंटरसेप्टर मिसाइल होगी, जिसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तय की गई है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोट के अनुसार, यह रेंज मौजूदा कई मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों से अधिक है. उदाहरण के तौर पर S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम में इस्‍तेमाल की जाने वाली 9M96E2 मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 120 किलोमीटर मानी जाती है. ऐसे में M1 न केवल दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी, बल्कि हाई-प्रिसिजन और इंस्‍टेंट रिएक्‍शन समय के साथ हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. दूसरी मिसाइल M2 को 250 किलोमीटर की रेंज के साथ विकसित किया जा रहा है. यह क्षमता इसे S-400 प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली 48N6DM और 48N6E3 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की श्रेणी में खड़ा करती है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, M2 प्रोजेक्ट कुश की रीढ़ साबित होगी, क्योंकि यह हाई-स्‍पीड और हाई-अल्‍टीट्यूड पर उड़ रहे टार्गेट को भी प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम होगी. इससे इंडियन एयर डिफेंस नेटवर्क की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों में बड़ा इजाफा होगा.

    सबसे महत्वाकांक्षी घटक M3 इंटरसेप्टर है, जिसकी वर्तमान रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि, पहले सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके दायरे को 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर भी काम चल रहा है. यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह मिसाइल रूस की S-400 प्रणाली में इस्‍तेमाल 40N6E मिसाइल के बराबर पहुंच प्रदान करेगी. इतनी लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता भारत को दुश्मन के हवाई क्षेत्र के भीतर गहराई तक निगरानी और प्रतिरोध का अवसर देगी, जिससे सामरिक बढ़त और डेटरेंस पावर दोनों में इजाफा होगा. DRDO अधिकारियों के अनुसार, M3 इंटरसेप्टर का पहला परीक्षण 2028 तक किए जाने की संभावना है. इस अवधि में इसके प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस तकनीक और रडार इंटीग्रेशन को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि यह मिसाइल अपने तय प्रदर्शन मानकों को पूरा कर सके या उनसे आगे निकल सके. विशेषज्ञों का मानना है कि जब M3 का पहला परीक्षण होगा, तब तक इसकी क्षमताएं लगभग 400 किलोमीटर की रेंज के आसपास पहुंच सकती हैं.

    चीन-पाकिस्‍तान का हमला होगा बेकार

    प्रोजेक्ट कुश केवल तकनीकी उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करता है. अब तक भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा के लिए काफी हद तक इंपोर्टेड सिस्‍टम्‍स पर निर्भर रहना पड़ा है. प्रोजेक्‍ट कुश के सफल होने से न केवल विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई तकनीक, रोजगार और निर्यात के अवसर मिलेंगे. रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह परियोजना भारत के मल्‍टी-लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को और सशक्त बनाएगी. M1, M2 और M3 की संयुक्त तैनाती से देश को मध्यम, लंबी और लंबी दूरी तक व्यापक सुरक्षा कवच मिलेगा. इससे सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी संभावित हवाई खतरे के खिलाफ त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रोजेक्ट कुश भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमताओं और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है. यदि यह कार्यक्रम तय समयसीमा और लक्ष्यों के अनुरूप सफल होता है, तो भारत न केवल अपनी जरूरतों को स्वदेशी तकनीक से पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है. प्रोजेक्‍ट कुश के तहत डेवलप इंटरसेप्‍टर मिसाइल्‍स चीन और पाकिस्‍तान के हर हमले को नाकाम करने में सक्षम होंगी.