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  • राजगढ़ में प्रसूता की मौत पर हंगामा, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल; SDM ने जांच के दिए निर्देश

    राजगढ़ में प्रसूता की मौत पर हंगामा, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल; SDM ने जांच के दिए निर्देश

    राजगढ़.

    प्रसव के बाद जिला अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाए कि प्रसूता को न डॉक्टर ने देखा, न नर्स ने। जानकारी लगने के बाद एसडीएम, तहसीलदार व टीआई मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाया।

    उधर पूर्व विधायक बापूसिंह भी पहुंचे व काफी देर तक परिसर में धरने पर बैठे रहे। जानकारी के मुताबिक प्रसूता अमेरपुरा निवासी अमरीबाई पति दिनेश तंवर (19) को शनिवार रात को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद वह ठीक थी, लेकिन बाद में ब्लीडिंग होने लगी। स्टाफ ने परिजनों को बताया तो उन्होंने कहा की कपड़े बदल दो, लेकिन ब्लीडिंग नहीं रुकी। जब दोबारा स्टाफ से कहा तो उन्होंने सुनने से इंकार कर दिया। डॉक्टर व नर्स ने देखा तक नहीं। सास सहित परिजन रातभर स्टाफ से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। रविवार अलसुबह करीब 3 बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया।

    बच्चे को जन्म देने के बाद बिगड़ी तबीयत
    जानकारी के मुताबिक अमरीबाई को शनिवार रात को प्रसव लिए जिला अस्पताल लाया गया था। यह उसका पहला प्रसव था। आधी रात के बाद उसका सामान्य प्रसव हुआ और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया। परिजन के मुताबिक कुछ देर बाद अमरीबाई को तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। सास धापूबाई का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया गया। हालत बिगड़ने के बाद स्टाफ सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सास धापूबाई ने ड्यूटी नर्स पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि रक्तस्राव के कारण बहू के कपड़े भीग रहे थे। नर्सिंग स्टाफ को स्थिति बताई, लेकिन उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। उल्टा मुझे डांटकर भगा दिया। कहा की 'खून ही तो बह रहा है। ' इस बात को लेकर महिला काफी आहत हुई लेकिन रिश्वत ले चुके नर्सिंग स्टाफ ने जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। परिजन का आरोप है कि लगातार रक्तस्राव के बावजूद प्रसूता को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई।

    नर्स बोली – 'बार-बार मत आना, मुझे सोने दो'
    प्रसूता की सास धापूबाई ने बताया की वह दो-तीन बार नर्सिंग स्टाफ को बता चुकी थीं कि बहू का रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा है। लेकिन स्टॉफ सुबह देखने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। सास का आरोप है कि नर्स ने उन्हें बार-बार परेशान नहीं करने और वापस नहीं आने की बात कही। कहा की यहां बार बार मत आना, मुझे सोने दो।

    रुपए लेकर की सामान्य डिलिवरी
    हंगामे के दौरान परिजनो ने रुपए लेने के भी आरोप लगाए । उनका कहना है कि नर्स ने 1500 रुपए और सफाईकर्मी ने 500 रुपए मांगे। रुपए देने के बाद ही प्रसव कराया गया। परिजन ने बच्चे की स्थिति को लेकर भी प्रसव से पहले अलग-अलग बातें बताए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बच्चा टेढ़ा है, उल्टा है, गले में नाल निपटी हुई है, लेकिन जैसे ही रुपए दिए तो सब बहाने खत्म हो गए और सामान्य प्रसव करा दिया

    अस्पताल में हंगामा, पति रास्ते से लौटा
    घटना की जानकारी लगते ही पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर व हेमराज कल्पोनी भी जिला अस्पताल जा पहुंचे थे। वह परिजनों के साथ अस्पताल में धरने पर बैठ गए। काफी देर तक परिजनों नाराज लोग हंगामा करते रहे। अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही के आरोप लगाते रहे। वह पीएम करने को तैयार नहीं थे, बाद में बमुश्किल प्रशासन की समझाइश के बाद मामला शांत हो सका। उधर अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। सामान्य प्रसव की जानकारी मिलने के बाद वह रात की बस से रवाना हो गया था। बाद में पत्नी की हालत बिगड़ने की सूचना मिली तो परिजन ने उसे रास्ते से वापस बुलाया।

    एसडीएम ने दिया जांच के निर्देश
    हंगामे की सूचना पर तहसीलदार विनीत गोयल और कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया मौके पर पहुंचीं। परिजन एसडीएम को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम निधि भारद्वाज अस्पताल पहुंचीं व परिजन से चर्चा की। एसडीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रेडक्रॉस से सहायता राशि देने की बात कही गई। आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद प्रसूता का पोस्टमॉर्टम कराया गया और शव परिजन को सौंप दिया गया।

  • कॉकपिट में पहुंचे दो ‘गुमनाम हीरो’ तो यात्रियों में बढ़ा डर, लगा कहीं फ्लाईदुबई विमान हाईजैक तो नहीं हुआ

    कॉकपिट में पहुंचे दो ‘गुमनाम हीरो’ तो यात्रियों में बढ़ा डर, लगा कहीं फ्लाईदुबई विमान हाईजैक तो नहीं हुआ

    दुबई
    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुए खौफनाक हमले और 17,000 फीट की अचानक गिरावट के बाद जहां पूरी दुनिया भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार और इजरायली यात्रियों के अदम्य साहस को सलाम कर रही है, वहीं इस चमत्कार के पीछे दो ऐसे गुमनाम 'हीरो' भी शामिल हैं, जिनकी पहचान घटना के 4 दिन बाद भी रहस्य बनी हुई है।

    ये दो पायलट यात्री के रूप में विमान में ही सफर कर रहे थे। जब कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन पर हमला कर विमान को क्रैश कराने की कोशिश की, तब इन दोनों जांबाज पायलटों ने छलांग लगाकर कॉकपिट में प्रवेश किया और बेकाबू हो चुके बोइंग 737 को सुरक्षित संभाला।

    'यात्रियों की भीड़ के ऊपर से छलांग लगाकर पहुंचे कॉकपिट'
    एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिए इंटरव्यू में विमान की दूसरी पंक्ति में बैठे इजरायली यात्री डैनियल श्लिचटर ने उस रोमांचक और डरावने मंजर को याद करते हुए बताया, "कॉकपिट के भीतर जब खूनी जंग छिड़ी और कैप्टन स्मित मच्छार ने किसी तरह दरवाजा खोला, तो यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को खींचकर बाहर निकाला। उसी वक्त यात्री के रूप में सफर कर रहे एक पायलट ने हमलावर को दबोचने वाले यात्रियों की भीड़ के ऊपर से कूदकर सीधे कॉकपिट के कंट्रोल पैनल तक छलांग लगा दी।"

    श्लिचटर ने बताया कि तुरंत ही उनका दूसरा साथी (दूसरा रिजर्व पायलट) भी कॉकपिट में घुसा और उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ताकि कोई और अंदर न आ सके।

    क्या होता है 'डेडहेडिंग'
    कई लोगों के मन में सवाल था कि आखिर एक ही विमान में दो अतिरिक्त पायलट क्यों सफर कर रहे थे?

    विमानन विशेषज्ञों और यात्री डैनियल श्लिचटर के अनुसार, यह कोई संयोग नहीं बल्कि एविएशन इंडस्ट्री में अपनाई जाने वाली एक प्रक्रिया है जिसे 'डेडहेडिंग' कहा जाता है।

    ये दोनों पायलट ड्यूटी पर थे और उन्हें तेल अवीव से दुबई लौटने वाली रिटर्न फ्लाइट को उड़ाना था। सामान्य उड़ानों में एक्स्ट्रा पायलट नहीं होते, लेकिन इस विमान में उनका मौजूद होना किसी 'चमत्कार' से कम नहीं था।

    'कहीं ये प्लेन ईरान तो नहीं ले जा रहे?' 45 मिनट का खौफनाक सस्पेंस
    हमलावर को-पायलट को काबू में किए जाने के बाद जब दो नए पायलटों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया, तो शुरुआत में केबिन में बैठे यात्री घबरा गए थे

    हमले के कारण विमान के टेल सेक्शन (रडर) को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे प्लेन को हवा में स्थिर करने में नए पायलटों को 10 से 15 मिनट का समय लगा।

    श्लिचटर ने बताया, "शुरुआत में कॉकपिट से कोई एनाउंसमेंट नहीं हुआ। हमें लगा कि कहीं ये दोनों भी तो आतंकवादी नहीं हैं? कहीं ये प्लेन को ईरान या किसी अनजान जगह तो नहीं हाईजैक करके ले जा रहे? क्योंकि हम उस इलाके के बहुत करीब थे।"

    करीब 45 मिनट के सस्पेंस के बाद पायलटों ने अनाउंसमेंट कर बताया कि विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारा जा रहा है और सब कुछ ठीक है। तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।

    एयरलाइन ने साधी चुप्पी, क्यों छिपाई जा रही है पहचान?
    फ्लाईदुबई ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि केबिन में मौजूद 'ऑन-ड्यूटी क्रू मेंबर्स' ने ही विमान को लैंड कराया, लेकिन सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों का हवाला देते हुए उनके नामों और नागरिकता का खुलासा करने से इनकार कर दिया है।

    डैनियल श्लिचटर ने कहा, "जिन्होंने कॉकपिट में घुसकर तुरंत मोर्चा संभाला, वे सच्चे हीरो हैं। हम अपनी जिंदगी के लिए उनके उतने ही आभारी हैं जितने कि उन यात्रियों के जिन्होंने हमलावर को दबोचा था।"

  • अस्पताल में 6 घंटे बिजली गुल, मरीज परेशान; ग्वालियर में 7 ऑपरेशन टले, एक्स-रे-CT जांच भी प्रभावित

    अस्पताल में 6 घंटे बिजली गुल, मरीज परेशान; ग्वालियर में 7 ऑपरेशन टले, एक्स-रे-CT जांच भी प्रभावित

    ग्वालियर.

    जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा।

    नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए।

    बिना बिजली मरीज रहे परेशान
    जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे। आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा।

    ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा
    बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा।

    रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच
    अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।

  • ओमानी पायलट की हरकत से मचा हड़कंप, इजरायल ने माना- विदेशी उड़ानें 100% सुरक्षित होने की गारंटी नहीं

    ओमानी पायलट की हरकत से मचा हड़कंप, इजरायल ने माना- विदेशी उड़ानें 100% सुरक्षित होने की गारंटी नहीं

     तेल अवीव
     दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी सह-पायलट द्वारा कैप्टन मच्छर पर जानलेवा हमले की जांच के दौरान इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में आने वाले विदेशी विमानों के पायलटों की बैकग्राउंड चेक करना उसका काम नहीं है, ऐसी उड़ानें कभी भी 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं हो सकतीं

    इजरायली ब्राडकास्टर कान के अनुसार, परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने कहा कि चालक दल के सदस्यों की पहचान और उनकी जांच करने का काम सुरक्षा अधिकारियों का है, न कि परिवहन मंत्रालय का। मंत्रालय के सुरक्षा विभाग ने मीडिया को बताया कि विदेशों में उनके अपने कर्मचारी तैनात नहीं होते जो हर व्यक्ति की जांच कर सकें।

    विभाग के एक प्रतिनिधि के अनुसार, सुरक्षा के मामले में कुछ भी 100 प्रतिशत तय नहीं होता और मंत्रालय यह गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी या विदेशी एयरलाइनों की उड़ानें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।

    इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के आरोप
    इजरायली मीडिया आउटलेट चैनल 12 के अनुसार, इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट पर उन देशों के पायलटों के प्रवेश पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।

    अब्राहम समझौते के तहत ऐसे देशों के पायलटों के इजरायल में उड़ान भरने पर प्रतिबंध है जिन्होंने यहूदियों के देश को औपचारिक मान्यता नहीं दी है।

    ओमान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी जांच में यह खुलासा हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलट फ्लाईदुबई की उड़ानों से तेल अवीव आ चुके थे, क्योंकि इजरायल ने इसकी निगरानी का जिम्मा खुद संभालने के बजाय एयरलाइनों के भरोसे छोड़ दिया था।

    फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हवा में क्या हुआ था?
    दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने भारतीय मूल के मुख्य कैप्टन स्मित मछार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। विमान पर कब्जा करने की कोशिश के दौरान बोइंग 737 विमान 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया था।

    आवाज सुनकर यात्रियों और केबिन क्रू ने कॉकपिट में घुसकर आरोपी सह-पायलट पर काबू पाया। इसके बाद उसी विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दूसरे पायलटों ने 170 से अधिक यात्रियों और चालक दल से भरे विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस मामले की आतंकी हमले के रूप में जांच कर रहा है।

  • AGRATHON 4.0: रायपुर में दिखा रनिंग का जुनून, देशभर से पहुंचे धावकों ने लगाई दौड़

    AGRATHON 4.0: रायपुर में दिखा रनिंग का जुनून, देशभर से पहुंचे धावकों ने लगाई दौड़

    रायपुर.

    राजधानी रायपुर में रविवार को सर्वसमाज के लिए AGRATHON 4.0 – “Vande Mataram – Run For Nation” का आयोजन किया गया. अग्रवाल सभा रायपुर एवं अग्रवाल युवा मंडल रायपुर की ओर से आयोजित इस मैराथन में करीब 3500 से 4000 लोगों ने हिस्सा लिया.

    राष्ट्रप्रेम, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता के संदेश के साथ आयोजित इस दौड़ में युवाओं के साथ महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया. AGRATHON में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, नोएडा सहित देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी पहुंचे. सुबह से ही मरीन ड्राइव पर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे और पूरा परिसर उत्साह से सराबोर नजर आया. दौड़ की शुरुआत तेलीबांधा तालाब परिसर स्थित मरीन ड्राइव से सुबह करीब 6 बजे हुई. प्रतिभागी खालसा स्कूल से होते हुए केनाल रोड पहुंचे और निर्धारित मार्ग से वापस तेलीबांधा तालाब स्थित मरीन ड्राइव पहुंचे. आयोजन में विजेताओं के लिए विभिन्न पुरस्कार भी रखे गए.
    कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. वहीं रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, बेमेतरा SP-IPS त्रिलोकी बंसल सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सहयोगी संस्थानों और स्वयंसेवकों का भी विशेष योगदान रहा.

    इस अवसर पर अग्रवाल सभा रायपुर के अध्यक्ष विजय अग्रवाल ने कहा कि इस बार सर्वसमाज के लिए AGRATHON – “Vande Mataram – Run For Nation” थीम पर आयोजन किया गया है. इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे. अग्रवाल युवा मंडल के अध्यक्ष CA सौरभ अग्रवाल ने कहा कि कई वर्षों से AGRATHON दौड़ का आयोजन किया जा रहा है. इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इसमें शामिल होने पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार की दौड़ बेहद खास और ऐतिहासिक होने वाली है. इस अवसर पर My Bharat की ओर से अग्रवाल युवा मंडल का सम्मान भी किया गया. आयोजन में समाज एवं युवा मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई.

    मीडिया प्रभारी उदित अग्रवाल ने कहा कि AGRATHON 4.0 को मिली प्रतिक्रिया से यह साबित हुआ है कि स्वास्थ्य, राष्ट्रप्रेम और समाजहित जैसे उद्देश्यों के लिए पूरा समाज एकजुट होकर आगे आ सकता है. देश के विभिन्न राज्यों से लोगों का रायपुर पहुंचकर आयोजन में शामिल होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि AGRATHON अब केवल रायपुर तक सीमित आयोजन नहीं रहा, बल्कि देशभर के लोगों को जोड़ने वाला मंच बन रहा है. कार्यक्रम में मनमोहन अग्रवाल, रेमचंद अग्रवाल, किसन अग्रवाल, जे.पी. अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, संजय चौधरी, संजय अग्रवाल, राजेश हैलीवाल, शैलेश अग्रवाल, राम अग्रवाल, दीपक गुप्ता सहित अग्रवाल समाज एवं युवा मंडल के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

  • रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत का शांति प्रस्ताव सबसे व्यापक, यूक्रेनी विदेश मंत्री ने दिया बयान

    रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत का शांति प्रस्ताव सबसे व्यापक, यूक्रेनी विदेश मंत्री ने दिया बयान

    कीव
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में भारत ने यु्द्धविराम का प्रस्ताव दिया है। पिछले लगभग साढ़े चार साल से रूस के साथ उलझे यूक्रेन ने भी इस प्रस्ताव के मिलने की पुष्टि की है। जेलेंस्की के खास और यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत द्वारा दिए गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को सबसे सही और व्यापक करार दिया है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस बात का जिक्र किया था कि पीएम मोदी लगातार युद्ध को खत्म करने की बात करते हैं।

    यूरोपियन प्रावदा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युद्धविराम के लिए उन्हें चार देशों से प्रस्ताव मिले हैं। इसमें भारत, तुर्किए, मिस्त्र और अमेरिका से युद्धविराम प्रस्ताव मिले हैं। इसमें से भारत का प्रस्ताव 'सबसे व्यापक' है। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि वह इन सभी प्रस्तावों पर अलग-अलग तरीकों से विचार करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, प्रमुख रूप से युद्धविराम तभी हो पाएगा, जब इसमें एनर्जी सेंटरों और पोर्ट्स पर हमलों को बंद करना और काला सागर की स्थिति को भी शामिल किया जाएगा।

    यूक्रेनी विदेश मंत्री ने भारत के प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक
    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस पूरे मामले में भारत के प्रस्ताव को सबसे व्यापक करार दिया। उन्होंने कहा, "हमें जो चार प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। हम एनर्जी सेक्टर और ब्लैक सी (काला सागर) से जुड़े युद्धविराम के लिए तैयार हैं। लेकिन इसी संयोजन में। यह पूरी तरह से ऊर्जा से जुड़ा युद्धविराम होना चाहिए, इसमें बंदरगाह के इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित सभी एनर्जी सेंटरों पर हमलों को रोका जाए।

    उन्होंने तुर्किए और मिस्त्र द्वारा आए प्रस्ताव पर भी बात की। सिबिहा ने कहा कि तुर्की और मिस्र ने भी ऐसे ही प्रस्ताव दिए हैं, जिनमें यूक्रेन से अनाज का एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने के लिए ब्लैक सी में युद्धविराम का सुझाव दिया गया था। इसके अलावा अमेरिका का प्रस्ताव इस बात पर जोर देता है कि यूक्रेन और रूस एनर्जी से जुड़े युद्धविराम पर सहमत हों।

    जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के लिए तैयार यूक्रेन- सिबिहा
    यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली बैठक का नतीजा युद्धविराम भी हो सकता है। यूक्रेन इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के नतीजों में से युद्धविराम एक हो सकता है। हम युद्धविराम के अलग-अलग तरीकों के लिए तैयार हैं, जिसमें कॉन्टैक्ट लाइन पर बिना किसी शर्त वाला युद्धविराम भी शामिल है।"

    रूस और यूक्रेन युद्ध खत्म कराने पर जोर देता रहा है भारत
    भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि रूस और यूक्रेन का युद्ध जल्द से जल्द बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाए। इसके अलावा भारत शुरुआत से ही दोनों पक्षों से भी इस बात को कहता हुआ आया है कि वह युद्ध खत्म करने में मदद करने को तैयार है। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि इस युद्ध का असर खाने-पीने की चीजों, ईंधन और फर्टिलाइजर की सुरक्षा पर पड़ा है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों पर।

    आंद्री सिबिहा की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन ने भी शांति को लेकर पीएम मोदी के विचारों की तारीफ की थी। एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी हर मुलाकात के दौरान युक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने कहा, "वह इस मामले में गहरी दिलचस्पी लेते हैं और उनके पास आपसी सहमति वाले समाधान खोजने के लिए बेहतरीन विचार हैं। इस लिहाज से, निश्चित रूप से निष्पक्ष रुख अपनाते हैं और साथ ही संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

  • दुबई-इजरायल फ्लाइट में को-पायलट का हमला नाकाम करने वाले भारतीय कैप्टन स्मित की हो रही तारीफ

    दुबई-इजरायल फ्लाइट में को-पायलट का हमला नाकाम करने वाले भारतीय कैप्टन स्मित की हो रही तारीफ

     यरुशलम
     दुबई से इजरायल जा रही 'फ्लाईदुबई' फ्लाइट में हुए जानलेवा हमले को अपनी बहादुरी और सूझबूझ से टालने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की चारों तरफ तारीफ हो रही है।

    इस बहादुरी से प्रभावित होकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को 'दुनिया का हीरो' बताया है। साथ ही उन्हें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। बता दें कि इससे पहले इजरायली पीएम ने शनिवार को अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय कैप्टन स्मित से फोन पर बात की और उनका हालचाल जाना।

    जानिए कॉकपिट की खौफनाक कहानी?
    बुधवार को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 174 यात्रियों को लेकर इजरायल जा रही थी। विमान में ओमान का नागरिक हमम अल-हम्मामी को-पायलट के तौर पर मौजूद था।

    कैप्टन स्मित ने सुनाई पूरी कहानी
    कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू को बातचीत के दौरान बताया कि हमले से ठीक पहले को-पायलट ने दुआ करने की इच्छा जताई थी। सम्मानस्वरूप कैप्टन स्मित ने सामने की तरफ देखना शुरू कर दिया और को-पायलट दुआ करने लगा।

    कैप्टन ने बताया कि करीब 4-5 मिनट बाद अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोर का प्रहार हुआ। पहले कैप्टन को लगा कि विमान में कोई बहुत बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन जब लगातार वार होने लगे तब उन्हें समझ आया कि हमला विमान पर नहीं, बल्कि कॉकपिट के अंदर उनके अपने साथी द्वारा किया जा रहा है। को-पायलट ने कॉकपिट में रखे इमरजेंसी 'क्रैश एक्स' से उन पर हमला किया था।

    कैप्टन स्मित ने दिखाया था गजब का संयम
    इस हमले के बीच भी कैप्टन स्मित ने गजब का संयम दिखाया। विमान का आपातकालीन सिग्नल एक्टिवेट किया गया और विमान ने 34,000 फीट की ऊंचाई से अचानक 17,000 फीट से ज्यादा की तेजी से नीचे उतरते हुए सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग की। इस दौरान विमान का रडर भी क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन यात्रियों की जान बच गई।

     

  • CG SET 2026: 6622 परीक्षार्थियों की आज परीक्षा, दो पालियों में होगा एग्जाम

    CG SET 2026: 6622 परीक्षार्थियों की आज परीक्षा, दो पालियों में होगा एग्जाम

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (SET) आज दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी. Paper-I सुबह 10 बजे से 11:15 बजे तक, जबकि Paper-II दोपहर 2 बजे से शाम 4:15 बजे तक होगा.

    परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज परीक्षा केंद्र, जिला और शिफ्ट की टाइमिंग को ध्यान से जरूर जांच लें. परीक्षा के संचालन हेतु डिप्टी कलेक्टर आस्था बोरकर को नोडल अधिकारी और सहायक संचालक शिक्षा लक्ष्मण कावड़े को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। परीक्षा के लिए पीजी कॉलेज कांकेर, कन्या कॉलेज भीरावाही, सेजस मॉडल कॉलेज, कृषि रिसर्च सेंटर सिंगारभाट, नरहरदेव स्कूल, शहीद गैंदसिंह कॉलेज चारामा, डाइट कांकेर, शासकीय महिला आईटीआई सहित सिंगारभाट, बरदेभाठा, ईमलीपारा, लखनपुरी, चारामा, पोटगांव, कोदागांव व धनेलीकन्हार के विभिन्न हायर सेकेंडरी व हाई स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।

    प्रशासन ने सभी केंद्रों पर समय पर उपस्थिति और जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। व्यापमं द्वारा परीक्षार्थियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें परीक्षार्थी को 2 घंटे पहले अपने केंद्र पहुंचना होगा। परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के पहले तक प्रवेश मिलेगा।

  • मक्का समझौते पर मिस्र का साफ रुख: भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को दी प्राथमिकता

    मक्का समझौते पर मिस्र का साफ रुख: भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को दी प्राथमिकता

    नई दिल्ली
     तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मक्का पैक्ट में मिस्र के भी शामिल होने को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही थीं। हालांकि, अब मिस्र ने इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ब्रिक्स समिट के दौरान जब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, तो मक्का समझौते, उसके क्षेत्रीय और व्यापक असर पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इस दौरान मिस्र ने तुर्की को भारत के लिए ठेंगा दिखा दिया।

    मक्का पैक्ट से मिस्र क्यों बना रहा दूरी?
    मिस्र ने भारत की चिंताओं और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते में शामिल न होने का फैसला किया था। जानकारों ने बताया कि नई दिल्ली और काहिरा अरब दुनिया के एक अहम स्तंभ के तौर पर मिस्र के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मिस्र ब्रिक्स का सदस्य है और 2024 में इस समूह में शामिल हुआ था।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    तुर्की के बार-बार सुझावों के बावजूद मिस्र अब तक मक्का समझौते में शामिल होने से दूर रहा है। ऐसा उसने किसी का पक्ष न लेने की अपनी रणनीति और भारत के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण किया है। पश्चिम एशिया के जानकारों का कहना है कि मक्का समझौते की उपयोगिता सीमित है क्योंकि नाटो या पुराने वारसा समझौते के विपरीत, इन तीनों देशों का कोई साझा दुश्मन या एक नेता नहीं है। इस बात की भी संभावना कम है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब सैन्य मदद के जरिए पाकिस्तान की सहायता के लिए आगे आएगा।

    मिस्र हमेशा अरब देशों की गुटबाजी से रहा दूर
    अरब देशों में सबसे शक्तिशाली सेना वाला मिस्र ऐतिहासिक रूप से गुटबाजी की राजनीति से दूर रहा है। उत्तरी और पूर्वोत्तर अफ्रीका में स्थिरता के स्तंभ के तौर पर अपनी भूमिका निभाता रहा है। काहिरा के पड़ोसी देश इजरायल के साथ जटिल संबंध हैं। जिसके साथ उसके राजनयिक रिश्ते हैं। वह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। इस तरह से मिस्र ने भारत के साथ अपने बढ़ते रिश्तों की वजह से मक्का समझौते पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया।

     

  • सस्ती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगी ‘ज्वाला’, स्वदेशी काउंटर-ड्रोन मिसाइल की टेस्टिंग सफल

    सस्ती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगी ‘ज्वाला’, स्वदेशी काउंटर-ड्रोन मिसाइल की टेस्टिंग सफल

     नई दिल्ली

    भारत की निजी रक्षा कंपनी आईजी डिफेंस ने अपने ज्वाला माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम के तहत दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण 3 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब चार बजे किया गया. यह उपलब्धि कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है. ज्वाला भारत का पहला स्वदेशी निजी माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम है जो हार्ड-किल काउंटर-यूएएस यानी ड्रोन को नष्ट करने वाला सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। 

    आधुनिक युद्धों में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल वायु रक्षा के लिए नई चुनौती बन गया है. सस्ते और बड़ी संख्या में ड्रोन भेजने की क्षमता ने किफायती जवाबी उपायों की जरूरत बढ़ा दी है. ज्वाला इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है ताकि मौजूदा वायु रक्षा परतों के साथ मिलकर ड्रोन खतरों से बड़े पैमाने पर निपटा जा सके। 

    आज के संघर्षों में ड्रोन झुंड आम हो गए हैं. ये सस्ते होने के साथ प्रभावी भी साबित हो रहे हैं. महंगी मिसाइलों से हर ड्रोन को मार गिराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है. इसलिए सस्ती और बड़ी संख्या में उत्पादित की जा सकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग बढ़ी है। 

    आईजी डिफेंस के एवीपी विंग कमांडर अनूप शर्मा ने कहा कि ड्रोन खतरा तेजी से बदल रहा है और काउंटर-यूएएस सिस्टम को भी उसी गति से विकसित होना चाहिए. ज्वाला ठीक इसी सोच के साथ बनाई जा रही है. सफल प्रोपल्शन टेस्ट इस स्वदेशी हार्ड-किल क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह मिसाइल न सिर्फ सस्ती होगी बल्कि बड़े पैमाने पर तैनात की जा सकेगी जिससे मिसाइल भंडार की गहराई भी बढ़ेगी।  

    ग्रिड सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड आर्किटेक्चर  
    ज्वाला को अकेले मिसाइल के रूप में नहीं बल्कि आईजी डिफेंस के व्यापक ग्रिड इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है. ग्रिड डिफेंड एक एआई आधारित बैटल मैनेजमेंट सिस्टम है जो सेंसर, इफेक्टर्स और कमांड सिस्टम को जोड़ता है. यह सिस्टम डिटेक्शन, पहचान, ट्रैकिंग, खतरे का आकलन और एंगेजमेंट मैनेजमेंट को एक साथ लाता है. ग्रिड कई सेंसरों से जानकारी लेकर साझा तस्वीर बनाता है, हवाई खतरों को ट्रैक करता है और उपलब्ध हथियारों को निर्देशित करता है। 

    इस तरह सेंसर से शूटर तक का पूरा आर्किटेक्चर तैयार होता है जिसमें ज्वाला हार्ड-किल इंटरसेप्टर का काम करती है और ग्रिड बुद्धिमत्ता व मिशन मैनेजमेंट उपलब्ध कराता है. कंपनी के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्त्व संघप्रिय ने कहा कि वे ज्वाला को बुद्धिमान रक्षा आर्किटेक्चर का हिस्सा बना रहे हैं ताकि डिटेक्शन से लेकर एंगेजमेंट तक अधिकृत मिशन स्वायत्त तरीके से पूरे हो सकें। 

    यह विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी दर्शाता है. आईजी डिफेंस स्वदेशी प्रोपल्शन, इंटरसेप्टर और काउंटर-यूएएस तकनीकों पर काम कर रही है. सफल परीक्षण के बाद कंपनी सिस्टम की परिपक्वता, विश्वसनीयता, विनिर्माण क्षमता और स्केलेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित करेगी। 

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरे के खिलाफ सस्ती और प्रभावी प्रणाली तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ज्वाला और ग्रिड का संयोजन महंगी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल रक्षा तकनीकों में भी आगे बढ़ रही हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं।