Category: देश

  • Monsoon Rain in Mumbai: मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, जलभराव और ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

    Monsoon Rain in Mumbai: मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, जलभराव और ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

    मुंबई

    मुंबई में मॉनसून की जोरदार बारिश ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। 

    रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा। 

    बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है। 

    शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है। 

    एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। 

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था। 

  • तेल संकट के बीच भारत की बड़ी कामयाबी, रणनीतिक तैयारी से बची अर्थव्यवस्था

    तेल संकट के बीच भारत की बड़ी कामयाबी, रणनीतिक तैयारी से बची अर्थव्यवस्था

    नई दिल्ली
     मिडिल ईस्ट में संघर्ष और होर्मुज के बंद होने के कारण पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ था। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भी भारत सीना तान खड़ा रहा है और अपनी कुशल रणनीति और पूर्व तैयारी के बल पर ईंधन संकट को पूरी तरह टाल लिया। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग के चार महीने तक बंद रहने के बावजूद देश में पेट्रोल पंपों पर कोई लंबी कतारें नहीं लगीं, घरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी नहीं हुई और आर्थिक गतिविधियां लगभग सामान्य रहीं। सरकार के दूरदर्शी बुनियादी ढांचा विकास, आपूर्ति विविधीकरण और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने इस अभूतपूर्व चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।

    दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर दिया। यह समुद्री जल मार्ग विश्व के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। बंदी के तुरंत बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया और कीमतों में आग लग गई।

    यहां आपको बता दें कि भारत अपने कच्चे तेल का करीब 90 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है, विशेष रूप से प्रभावित होने वाला देश था। देश के कुल तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत और एलपीजी आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता था। संकट लगभग चार महीने तक चला। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश होने के कारण इस संकट का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका थी।

    कीमतों में भारी उछाल
    संकट लंबा खिंचने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गईं। भारतीय कच्चे तेल की कीमतें संकट से पहले के 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर चार सप्ताह के अंदर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गईं। ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्चतम स्तर को छू गया। सऊदी अरब में एलपीजी अनुबंध मूल्य में फरवरी से जून के बीच करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की आयात लागत 1600 रुपये से ऊपर पहुंच गई। युद्ध-जोखिम बीमा दरों में कई गुना वृद्धि हुई, जिससे आयात और महंगा हो गया।

    भारत की सफल रणनीति
    सरकार ने संकट शुरू होते ही कुछ ही दिनों में सख्त नियंत्रण आदेश जारी कर दिए। रणनीति के तहत सरकार ने घरेलू उत्पादन में तीव्र वृद्धि की। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में छूट, आक्रामक आपूर्ति स्रोत विविधीकरण और सक्रिय ऊर्जा कूटनीति पर जो दिया। सरकार ने मांग प्रबंधन पर जोर दिया और फैसला लिया कि लागत का बोझ आम परिवारों पर न डाला जाए, बल्कि इसे सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनियों के माध्यम से वहन किया जाए। इस फैसले से ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनी रही।

    पिछले दस वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए भारी निवेश ने संकट के समय काम किया। एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या 2014 में 11 से बढ़कर वर्तमान में 22 हो गई है। आयात क्षमता भी 12 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष पहुंच गई।

    कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ। 2014 में 27 देशों से आयात करने वाला भारत अब 2026 में 41 देशों से तेल खरीद रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए आपूर्तिकर्ता जुड़े, जबकि अमेरिका और रूस से आयात में खासी बढ़ोतरी हुई। परिणामस्वरूप, होर्मुज पर निर्भरता पहले की तुलना में काफी कम हो गई। वहीं, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के विस्तार से भी हर साल कच्चे तेल के आयात में बड़ी बचत हो रही है, जो संरचनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुआ।

    आर्थिक प्रभाव और सरकार का खर्च
    दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के बाद विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। फिलहाल तेल कंपनियां प्रतिदिन करीब 650 करोड़ रुपये की वसूली में असफल हो रही हैं, जो पहले 1000 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर थी। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, जिससे राजस्व में लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस तिमाही में तेल और गैस कंपनियों को 1 लाख से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि, सरकार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और होर्मुज के फिर से खुलने से आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों में गिरावट आएगी।

    अन्य देशों की तुलना में भारत का बेहतर प्रदर्शन
    होर्मुज संकट से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। कई एशियाई आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ा। श्रीलंका ने दो सप्ताह में पेट्रोल राशनिंग लागू कर दी और सरकारी कामकाज को चार दिन के सप्ताह में सीमित कर दिया। पाकिस्तान ने स्कूल बंद किए और कार्य सप्ताह छोटा किया। म्यांमार ने विषम-सम ड्राइविंग और क्यूआर कोड आधारित राशनिंग लागू की। बांग्लादेश ने तेल भंडारों पर सेना तैनात कर दी, जबकि इथियोपिया ने कुछ क्षेत्रों में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह रोक दी।

    धनी देशों ने भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का इस्तेमाल किया। जापान ने भंडार कम किए और सब्सिडी दी, दक्षिण कोरिया ने 30 वर्षों में पहली बार कीमतों पर नियंत्रण लगाया। यूरोपीय संघ के 22 सदस्य देशों ने अप्रैल के मध्य तक 9 अरब यूरो से अधिक की राहत पैकेज घोषित किए। इसके विपरीत, भारत ने न तो आपातकाल घोषित किया, न राशनिंग लगाई और न ही स्कूल या कार्य घंटे कम किए। केवल व्यावसायिक और थोक एलपीजी, डीजल तथा एविएशन ईंधन के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए, ताकि घरेलू जरूरतें पूरी हो सकें।

    आर्थिक स्थिरता बरकरार
    संकट के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया और पूरे संकट काल में स्थिर रहा। जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही। चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहा और खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के लक्ष्य के अंदर रही।

    होर्मुज खुलने के बाद अब क्या?
    जून में अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज फिर से खुल गया। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटा ली। भारतीय ध्वज वाला पहला एलएनजी वाहक पोत 'दिशा' लगभग 62,000 टन माल लेकर तीन महीने बाद सुरक्षित लौट आया। कच्चे तेल की कीमतें अब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं और आगे और गिरने की संभावना है। हालांकि, बारूदी सुरंग हटाने और फंसे जहाजों को निकालने में कुछ समय लगेगा।

    भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का दो महीने का भंडार है। आईएसपीआरएल के तहत 5.33 मिलियन टन रणनीतिक भंडार उपलब्ध है, जो करीब तीन सप्ताह के लिए पर्याप्त है। चांदीखोल और पादुर विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यह क्षमता 21 दिनों तक बढ़ जाएगी। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस संकट प्रबंधन की सफलता न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य के किसी भी संकट के लिए देश को बेहतर तैयार करेगी।

  • मुहर्रम जुलूस पर साजिश का खुलासा: 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद, पुलिस जांच में जुटी

    मुहर्रम जुलूस पर साजिश का खुलासा: 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद, पुलिस जांच में जुटी

    मुंबई
    मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के 'दर्द से राहत' के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए.

    डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, 'बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.' पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था.

    फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था
    डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, 'पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.' पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया.

    जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज
    भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है.

    आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया
    फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था.

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

  • 8th Pay Commission लागू होने में अभी वक्त, लेकिन कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

    8th Pay Commission लागू होने में अभी वक्त, लेकिन कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

     नई दिल्‍ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है। 

    जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। 

    क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद? 
    दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है। 

    अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा। 

    नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है? 
    आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है। 

    फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई। 

    कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है। 

    अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है? 
    केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।  

    अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा? 
    जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप: रुबियो

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप: रुबियो

    नई दिल्ली/ वॉशिंगटन
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसको लेकर बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की दिशा में काम चल रहा है और उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में यह दौरा हो सकेगा. IANS की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन डीसी में भारत-अमेरिका संबंधों पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते शानदार दौर में हैं. उन्होंने बताया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छी मुलाकात हुई थी. दोनों देश अब व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। 

    रुबियो ने कहा, ‘हम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने से बस कुछ कदम दूर हैं. बातचीत बेहद सकारात्मक रही है. जल्द ही क्वाड की अगली बैठक भी होगी. मैं खुद इस साल के अंत से पहले भारत जाने की उम्मीद करता हूं और अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी करूंगा.’ यदि ट्रंप अगले साल भारत आते हैं तो दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। 

    रुबियो ने कहा- इस साल के अंत में वे भी भारत का दौरा करेंगे
    व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, मैं साल के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे की तैयारियों के सिलसिले में भारत की यात्रा करूंगा। भारत-अमेरिका के संबंधों को लेकर रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत स्थिति में हैं और जी7 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई हालिया मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बेहतरी हुई है।    

    फरवरी 2020 में ट्रंप ने किया था भारत दौरा
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता से पहले अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली को भी संबोधित किया था। साल 2024 में अमेरिकी सत्ता में दोबारा लौटने के बाद भी ट्रंप ने भारत के साथ बेहतर संबंधों को बढ़ावा दिया है और दोनों देश व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ा रहे हैं। 

    राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी में कई समानताएं
    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका को असीमित संभावनाओं वाले स्वाभाविक साझेदार बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी व्यक्तिगत संबंधों से भी मजबूती मिल रही है। व्हाइट हाउस में आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में गोर ने भारत में अपने पहले छह महीनों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश की विविधता, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अमेरिका के साथ मजबूत होती साझेदारी ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर उनके विश्वास को और मजबूत किया है। 

    अमेरिकी राजदूत ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच करीबी कार्य संबंधों की भी तारीफ करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव बताया। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में गोर ने कहा, 'वे बेहद ऊर्जावान हैं, हर काम में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते हैं और परिणाम देने पर जोर देते हैं। मुझे उनमें और राष्ट्रपति ट्रंप में कई समानताएं दिखाई देती हैं, क्योंकि दोनों ही खुद नेतृत्व करते हुए काम पूरा कराने में विश्वास रखते हैं।' उन्होंने कहा, 'दोनों की सोच काफी हद तक एक जैसी है और दोनों परिणाम देना चाहते हैं।' भविष्य की प्राथमिकताओं पर गोर ने कहा कि उनका ध्यान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने, रक्षा सहयोग का विस्तार करने और पैक्स सिलिका जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर रहेगा। 

    भारत दौरे पर क्या बोले रुबियो?
    जब उनसे ट्रंप के संभावित भारत दौरे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति भारत जाएंगे. भारत अमेरिका का बेहद करीबी साझेदार और सहयोगी है.’ रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच जितनी करीबी है, उससे ज्यादा शायद ही किसी और नेता के साथ हो. कूटनीति में ऐसे रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। 

    ट्रेड डील पर भी जल्द हो सकता है फैसला
    रुबियो के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. अगर यह समझौता पूरा होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई तेजी मिलेगी। 

    मोदी से ट्रंप के अच्छे संबंध
    मार्को रूबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच बहुत जल्द ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। मैं राष्ट्रपति की यात्रा को अंतिम रूप देने के लिए भारत जा रहा हूं। रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।

    हम साथ मिलकर कर रहें काम
    भारत, अमेरिका और वेनेजुएला से बातचीत कर रहा है। हम सप्लाई बढ़ाने के लिए बहुत मिलकर काम कर रहे हैं। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके पास भारी कच्चे तेल (heavy crude) को रिफाइन करने की क्षमता है। उन्होंने खुद को पीएम मोदी का प्रशंसक बताते हुए कहा कि मोदी ने भारत को ग्लोबल पावर बनाया है।

    ट्रंप आखिरी बार कब आए थे भारत?
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत की यात्रा की थी। जब ट्रंप ने अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाग लिया था, जिसके बाद दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय चर्चा की थी।

     

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए Good News! 8वें वेतन आयोग से पहले एक और DA बढ़ोतरी की उम्मीद

    सरकारी कर्मचारियों के लिए Good News! 8वें वेतन आयोग से पहले एक और DA बढ़ोतरी की उम्मीद

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनसे जुड़े सभी हितधारक इस समय दो बड़े फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। पहला, महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन की घोषणा और दूसरा, 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रही प्रगति। चूंकि 8वां वेतन आयोग अभी विचार-विमर्श के दौर में है, इसलिए मौजूदा 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत जल्द ही एक और डीए में इजाफे की घोषणा हो सकती है। डीए में बढ़ोतरी सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स को साल में दो बार दी जाती है। आइए, 26 जून 2026 तक के सबसे ताजा अपडेट को समझते हैं…

    DA की चर्चा क्यों हो रही है?
    महंगाई भत्ते में संशोधन साल में दो बार किया जाता है, एक बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में। ऐसा बढ़ती जीवन लागत की भरपाई के लिए किया जाता है और सरकार इसे केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लाभ के लिए प्रदान करती है। यह संशोधन अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है।

    चूंकि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हुई हैं, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत ही डीए संशोधन मिलता रहेगा। जुलाई 2026 के डीए संशोधन की आज व्यापक चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि महंगाई और CPI-IW के ट्रेंड एक और इजाफे की ओर इशारा कर रहे हैं।

    महंगाई के लेटेस्ट आंकड़े क्या बताते हैं?
    सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़े साफ दिखाते हैं कि खुदरा महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें अब भी अहम वजह बनी हुई हैं। मई 2026 में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 की तुलना में बढ़ गई। समग्र सीपीआई मुद्रास्फीति मई में 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 3.48 प्रतिशत से अधिक है।

    ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 3.74 प्रतिशत से बढ़कर 4.25 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी महंगाई 3.16 प्रतिशत से उछलकर 3.53 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य महंगाई भी अप्रैल के 4.20 प्रतिशत के मुकाबले मई में 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई।

    महंगाई में खासकर खाने-पीने की कीमतों में आई यह तेजी इस उम्मीद को बल देती है कि सरकार जल्द ही डीए में एक और संशोधन और समायोजन पर विचार कर सकती है। हालांकि, अंतिम वृद्धि का निर्णय सीपीआई-आईडब्ल्यू के आंकड़ों और कैबिनेट की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।

    अभी कितना महंगाई भत्ता मिल रहा है और कितना बढ़ सकता है?
    सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस समय नवीनतम संशोधन के बाद मूल वेतन का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। जुलाई 2026 की डीए वृद्धि की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जबकि महीना शुरू होने में बस कुछ ही दिन बाकी हैं।

    मुद्रास्फीति के रुझानों और CPI-IW की गतिविधियों के आधार पर 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद बन रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ा आधिकारिक गणना और केंद्र सरकार के अपडेट के बाद ही तय होगा। यह लाभ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

    8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों की क्या मांगें हैं?
    पिछले कुछ महीनों से कर्मचारी संघों, स्टेक होल्डर ग्रुप्स और विभिन्न संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें महंगाई से निपटने के लिए उच्च न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने, भत्तों में संशोधन और भुगतान ढांचे में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी एवं कामगार परिसंघ ने ज्यादा न्यूनतम वेतन, बेहतर पेंशन लाभ और भत्तों की समीक्षा की बात रखी है।

    ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने सैलरी स्ट्रक्चर में संशोधन, विसंगतियों को दूर करने और बेहतर सेवा लाभों की मांग की है। वहीं, नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) से जुड़े समूह बेहतर फिटमेंट फैक्टर, वेतन असमानताओं में सुधार और कर्मचारी-हितैषी सुधारों पर जोर दे रहे हैं।

    कर्मचारी समूहों का मानना है कि अगली वेतन संरचना तय करते समय बढ़ती लागत, लगातार बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों का मनोबल, उनकी आजीविका का भविष्य और जीवन-यापन के खर्चों में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर ताजा अपडेट
    8वां वेतन आयोग अब विचार-विमर्श के चरण में प्रवेश कर चुका है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद से इसे सात महीने पूरे हो चुके हैं। आयोग सिफारिशें तैयार करने से पहले फीडबैक जुटाने के लिए दिल्ली, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों से मुलाकात कर रहा है।

    हाल ही में 22-23 जून 2026 को लखनऊ में बैठकें हुईं, जिनमें कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों और वेतन संबंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। आयोग के ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी विचार-विमर्श जारी रखने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है और फिटमेंट फैक्टर, संशोधित सैलरी मैट्रिक्स, पेंशन सुधार या लागू होने की तारीख को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

  • Passport Fee Hike: अब पासपोर्ट बनवाने पर ₹2,000 तक ज्यादा खर्च, 1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम

    Passport Fee Hike: अब पासपोर्ट बनवाने पर ₹2,000 तक ज्यादा खर्च, 1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम

     नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सर्विस की फीस में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण माने जाने को लेकर बहस चल रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए इसे अगले महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए हैं। 

    साल 2012 में आखिरी बार हुआ था फीस में बदलाव
    नए नियमों के तहत 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट के नए शुल्क लागू होंगे. इस बदलाव के तहत अब पासपोर्ट बनवाना दो हजार रुपये तक महंगा पड़ सकता है. इससे पहले साल 2012 में आखिरी बार पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ाई गई थी. इस तरह ये बदलाव 14 साल बाद हुआ है। 

    सरकार ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद नया पासपोर्ट बनवाने, पासपोर्ट रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क देना होगा. इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को हटाकर नई शुल्क सूची लागू कर दी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 से सभी पासपोर्ट सेवाओं पर नए शुल्क लागू होंगे। 

    फीस में कितना हुआ बदलाव

    1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में बदलाव, जानिए अब कितना देना होगा
     
    36 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
    पहले: ₹1,500 → अब: ₹2,500 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,500 → अब: ₹5,000 (तत्काल)

    60 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
    पहले: ₹2,000 → अब: ₹3,500 (नॉर्मल)
    पहले: ₹4,000 → अब: ₹6,000 (तत्काल)

    36 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,500 → अब: ₹5,000 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,500 → अब: ₹7,500 (तत्काल)

    60 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹2,000 → अब: ₹6,000 (नॉर्मल)
    पहले: ₹4,000 → अब: ₹8,500 (तत्काल)

    18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पेज का पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,000 → अब: ₹1,750 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,000 → अब: ₹4,250 (तत्काल)

    नाबालिगों का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,000 → अब: ₹4,250 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,000 → अब: ₹6,750 (तत्काल)

  • Hormuz Strait Crisis: ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर संकट, ईरान से बढ़ा समुद्री तनाव

    Hormuz Strait Crisis: ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर संकट, ईरान से बढ़ा समुद्री तनाव

     नई दिल्ली

    होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. यह हमला तब हुआ जब यूनाइटेड नेशन की टीम इस क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान में जुटी थी. ओमान के तट के पास एक कार्गो शिप पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने इस रेस्क्यू अभियान को रोक दिया है. इस फैसले से करीब 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों पर मौजूद हैं। 

    पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों की मदद से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहा था. इस मिशन का मकसद उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था, जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से कई दिनों से फंसे हुए थे। 

    इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप एवर लवली पर ड्रोन हमला हो गया. हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा. हालांकि किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है. इसके तुरंत बाद IMO ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पूरे रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया। 

    UN ने रेस्क्यू क्यों रोक दिया?
    IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. हालांकि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह UN के रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था. लेकिन घटना ने यह साफ कर दिया कि समुद्री रास्ता अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। 

    IMO के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 20 हजार से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं. इनमें से लगभग 11 हजार नाविकों को निकालने के लिए विशेष इवैक्युएशन प्लान तैयार किया गया था. अब रेस्क्यू अभियान रुकने के बाद ये नाविक फिर से बीच समंदर में फंस गए हैं. उन्हें नहीं पता कि वे कब सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर पाएंगे। 

    यूनाइटेड नेशन ने पहले ही जहाजों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि बिना इजाजत किसी भी तरह की आवाजाही न करें. इसके साथ ही IMO ने भी चेतावनी दी थी कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. जहाजों की आवाजाही तभी शुरू की जानी थी, जब IMO, UKMTO और MICA सेंटर के कोऑर्डिनेटेड सिस्टम के जरिए सभी वेसल्स से संपर्क स्थापित हो जाए. इसके बाद संबंधित कोस्टल लाइन्स से बातचीत के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत थी। 

    ईरान ने हमला क्यों किया?
    ईरान ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि उसकी इजाजत के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तैयार किए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल न करे. ड्रोन हमले के कुछ घंटों बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने बयान जारी कर कहा कि जो जहाज ईरान द्वारा तय किए गए आधिकारिक रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग का इस्तेमाल करेंगे, उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी। 

    होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए ईरान की तरफ से एक समुद्री कॉरिडोर तय किया गया है. जहाजों को सिर्फ लारक आईलैंड (Larak Island) के पास बनाए गए आधिकारिक मार्ग से ही गुजरने की इजाजत दी गई है. इस रूट के अलावा किसी भी रूट से गुजरने पर सख्त चेतावनी दी गई थी. ईरान ने एक नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा था कि, किसी भी उल्लंघन की स्थिति में होने वाले नुकसान, जुर्माने या दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जहाज के मालिक और कप्तान (मास्टर) की होगी। 

    यानी ईरान साफ संदेश देना चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को उसके नियम मानने होंगे. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ओमान की तरफ से दक्षिणी रास्ते को खतरनाक बताकर खारिज कर दिया था और जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे सिर्फ तेहरान से मंजूर रास्तों का ही इस्तेमाल करें। 

    आखिर विवाद किस रास्ते को लेकर है?
    इस समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर मौजूद हैं. पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस मार्ग पर जहाजों को ईरान की नई एजेंसी PGSA से पहले इजाजत लेनी होती है. बिना परमिट किसी जहाज को प्रवेश नहीं दिया जाता. ईरान का कहना है कि सिर्फ एक यही रूट ही जिससे जहाज को सुरक्षित पासेज दिया जाएगा। 

    दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसी मार्ग को संयुक्त राष्ट्र और ओमान मिलकर सुरक्षित निकासी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. दर्जनों जहाजों को इस रास्ते से पार भी कराया गया है. 24 जून को ही 60 से ज्यादा विमानों को पार कराया गया था. ईरान का कहना है कि उसके तय रास्ते को छोड़कर दूसरे कॉरिडोर का इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है। 

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है. दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी-एलपीजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं. अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। 

    अब आगे क्या होगा?
    फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य सदस्य देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू की जा सके. IMO ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक हजारों नाविक समुद्र में फंसे रह सकते हैं. यानी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हुए ड्रोन हमले ने पूरी वैश्विक शिपिंग व्यवस्था और हजारों नाविकों की सुरक्षा को फिर से संकट में डाल दिया है. अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो इसका असर सिर्फ समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतों पर भी पड़ सकता है। 

  • केरल हाईकोर्ट का फैसला, संविधान के तहत निर्धारित प्रारूप में ही ली जा सकेगी शपथ

    केरल हाईकोर्ट का फैसला, संविधान के तहत निर्धारित प्रारूप में ही ली जा सकेगी शपथ

    तिरुवनंतपुरम
    केरल हाई कोर्ट ने शपथ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि स्थानीय निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि शपथ लेते समय कानून में तय शब्दों से बाहर नहीं जा सकते. यानी शपथ  ईश्वर के नाम पर ली जा सकती है या फिर बिना ईश्वर का नाम लिए सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा की जा सकती है. उसमें देवी-देवताओं, भारत माता, किसी संगठन, राजनीतिक शहीद या किसी व्यक्ति का नाम जोड़ना मान्य नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ पार्षदों की शपथ को अवैध माना. कोर्ट ने कहा कि अपनी तरफ से कोई भी नया शब्द जोड़ना पूरी तरह गलत माना जाएगा। 

    यह मामला तब अदालत पहुंचा जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने शपथ लेते समय अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं, 'भारतम्बा', 'भारत माता', गुरुदेव, अपने राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम लिए. इसी से जुड़ी एक दूसरी याचिका पलक्कड़ जिले के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य की शपथ को लेकर भी थी. उस सदस्य ने 'ईश्वर की कृपा से उम्मन चांडी के नाम पर' शपथ ली थी. इन दोनों मामलों को देखते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या कानून शपथ के तय प्रारूप से बाहर जाने की इजाजत देता है। 

    कोर्ट ने क्या कहा?

    न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट (नगरपालिका अधिनियम), केरल पंचायत राज एक्ट के तहत शपथ का सिर्फ दो ही तरीका है. पहला, ईश्वर के नाम पर शपथ लेना. दूसरा, ईश्वर का नाम लिए बिना सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करना. अदालत ने साफ कहा कि ईश्वर शब्द का दायरा बढ़ाकर किसी खास देवी-देवता, भारत माता, राजनीतिक शहीद, संगठन या व्यक्ति का नाम जोड़ना कानून के खिलाफ है। 

    कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह जनता के प्रति एक गंभीर वादा है कि चुना हुआ प्रतिनिधि संविधान का पालन करेगा, कानून के मुताबिक काम करेगा, ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा. इसलिए शपथ वही मानी जाएगी जो कानून में लिखे तरीके से ली गई हो। 

    पार्षदों की सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
    हाई कोर्ट ने कहा कि शपथ गलत तरीके से ली गई थी, इसलिए वह वैध नहीं मानी जा सकती. लेकिन सिर्फ इस वजह से चुने हुए प्रतिनिधियों का जनादेश खत्म नहीं किया जाएगा. अदालत ने आदेश दिया है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद, वडक्कनचेरी पंचायत सदस्य चार हफ्ते के भीतर दोबारा सही तरीके से शपथ लें. अदालत ने यह भी माना कि इन लोगों ने शायद यह सोचकर ऐसा किया कि उनका तरीका कानूनी रूप से सही है, इसलिए उन पर कोई सजा या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। 

    तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों के मामले में अदालत ने राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि अब तक उनके द्वारा किए गए काम केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 531 के तहत सुरक्षित रहेंगे. यानी उनकी अब तक की कार्रवाई सिर्फ शपथ की गलती के आधार पर रद्द नहीं होगी. लेकिन वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के मामले में तस्वीर अलग है. कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज एक्ट में ऐसी सुरक्षा का प्रावधान नहीं है, इसलिए उस सदस्य ने अब तक जो काम किए, वे अमान्य माने जाएंगे. हालांकि उसे भी दोबारा शपथ लेने का मौका दिया गया है। 

    फैसले में नारायण गुरु की सीख और संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता का जिक्र करते हुए कहा गया कि लोग भगवान को भले ही अलग-अलग नामों से पुकारें, लेकिन कानूनन शपथ सिर्फ ईश्वर के नाम पर या सत्यनिष्ठा से ही ली जा सकती है. इसमें अपनी तरफ से कोई भी नाम जोड़ना ठीक नहीं है। 

     

  • लव ट्रायंगल या धोखा? चेतन-केतन और सिया की कहानी पर टीवी एक्ट्रेस ने की कार्रवाई की मांग

    लव ट्रायंगल या धोखा? चेतन-केतन और सिया की कहानी पर टीवी एक्ट्रेस ने की कार्रवाई की मांग

     पुणे

    पुणे के चर्चित लोहगढ़ हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच में अब मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके परिवार की पृष्ठभूमि को भी खंगाला जा रहा है. जानकारी के अनुसार, सिया गोयल पुणे के गंगाधाम इलाके स्थित न्यू एरा सोसायटी में अपने परिवार के साथ रहती थी. उसके परिवार में माता-पिता और एक भाई शामिल हैं। 

    जांच में यह भी पता चला है कि सिया और चेतन की पहली मुलाकात पिछले साल दिवाली के दौरान आयोजित एक पार्टी में हुई थी. इसी मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया. पुलिस अब दोनों के रिश्तों, कॉल रिकॉर्ड, मुलाकातों और आपसी संवाद से जुड़ी जानकारियों को खंगाल रही है। 

    फूटा टीवी एक्ट्रेस का गुस्सा, सिया पर एक्शन की डिमांड
     केतन अग्रवाल की मौत ने सनसनी मचाई हुई है. 26 साल के लड़के की मौत लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान हुई. वो पहाड़ी से नीचे गिर पड़े, जिसमें उनकी जान चली गई. पहले इसे महज एक हादसा बताया जा रहा था. लेकिन फिर ये बात सामने आई कि उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने लवर चेतन चौधरी के साथ केतन को पहाड़ी से नीचे धक्का दिया। 

    इस घटना ने हर किसी को हैरानी में डाल दिया है. सभी सिया से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया है. टीवी सेलेब्स भी अपनी नाराजगी बयां करते दिख रहे हैं. हिना खान के बाद अब आंचल खुराना ने केतन अग्रवाल के साथ जो कुछ हुआ, उसपर दुख जताया है. आंचल ने सिया को लेकर भी बड़ी बात कह डाली है। 

    रोडीज विनर ने जताई नाराजगी
    अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करके आंचल खुराना ने कहा- केतन अग्रवाल सिर्फ 26 साल का लड़का था. एक करोड़पति बाप के बेटे की एक करोड़पति बाप की बेटी से अरेंज मैरिज फिक्स होती है. दोनों परिवार एक-दूसरे के करीबी हैं, तो वो अपने बच्चों की भी शादी तय कर लेते हैं. लेकिन जो बेटी है उसका चेतन के साथ अफेयर चल रहा होता है. आप ये बात अपने पेरेंट्स से कह सकती थीं, आप अपने मंगेतर को ये बात बता सकती थीं. लेकिन उसने केतन को पहाड़ी से नीचे फेंकना सही समझा। 

    'यार ये सिर्फ लड़का या लड़की की बात नहीं है. मैं ये कहना चाह रही हूं कि इस पीढ़ी को हो क्या गया है? हमें किसी पर भी अत्याचार नहीं करना चाहिए. सिया के अंदर केतन को मारने की हिम्मत आई, लेकिन अपने माता-पिता को अफेयर का सच बताने की हिम्मत नहीं थी. क्या तुम सीरियस हो? तुम उसके घर से भाग सकती थी, कुछ और कर सकती थी. किसी को मारने की क्या जरूरत थी? ये आखिर हो क्या रहा है? मेरे हिसाब से उस लड़की को भी उसी खाई से धक्का दे देना चाहिए. इस मामले में कोई कोर्ट केस भी नहीं होना चाहिए। 

     सिया आखिर चाहती क्या थी? 
     पुणे के बहुचर्चित लोहगढ़ किला केस का सबसे चर्चित नाम. एक ऐसी लड़की, जिसकी जिंदगी में एक तरफ केतन अग्रवाल था, जिससे कुछ महीनों बाद उसकी शादी होने वाली थी, तो दूसरी तरफ चेतन था, जिसके साथ उसके अफेयर की बात पुलिस जांच का हिस्सा बन चुकी है। 

    पुणे के गंगाधाम इलाके की न्यू एरा सोसायटी में रहने वाली सिया एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती है. उसके पिता प्रवीण गोयल ड्राय फ्रूट और मसालों के कारोबार से जुड़े हैं. परिवार की छवि समाज में सम्मानित मानी जाती है जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले साल दिवाली के दौरान आयोजित एक पार्टी में सिया की मुलाकात केतन से हुई थी. बताया जाता है कि पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता चला गया. वहीं दूसरी ओर पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पिछले छह महीनों में सिया और चेतन के बीच 2,004 कॉल हुईं और कुल मिलाकर लगभग 238 घंटे बातचीत हुई. कुछ कॉल दो से तीन घंटे तक लगातार चली थीं. पुलिस का मानना है कि यह लंबी बातचीत कथित साजिश की तैयारी का भी हिस्सा हो सकती है।  

    11 फरवरी को हुई मुलाकात, 19 को रोका 
    दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान सिया के परिवार ने उसके लिए जीवनसाथी की तलाश भी शुरू कर दी थी. इसी क्रम में अग्रवाल परिवार से रिश्ता तय हुआ. 11 फरवरी को दोनों परिवारों की मुलाकात हुई, 19 फरवरी को रोका सम्पन्न हुआ और 25 नवंबर को शादी की तारीख भी तय कर दी गई. घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. भविष्य के सपने बुने जा रहे थे. परिवार का कहना है कि सिया केवल नाम की होने वाली बहू नहीं थी, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुकी थी. वह कई बार उनके घर आई. होली के अवसर पर आई, पूजा-पाठ में शामिल हुई, पूरा दिन परिवार के साथ बिताया. बातचीत में अपनापन दिखाती थी. किसी को यह आभास तक नहीं हुआ कि उसके मन में कुछ और भी चल रहा है। 

    केतन की मां ने मान लिया था बहू 
    केतन की मां आज भी इसी बात को याद कर भावुक हो जाती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने सिया को बहू मान लिया था. वह घर आती थी, परिवार के साथ घुल-मिलकर रहती थी, इसलिए कभी शक नहीं हुआ. उनका आरोप है कि यदि रिश्तों की वास्तविक स्थिति पहले बता दी जाती तो शायद आज उनका बेटा जिंदा होता. एक तरफ शादी की तैयारियां चल रही थीं, दूसरी तरफ पुलिस जांच में सामने आया कि सिया और चेतन लगातार संपर्क में थे. जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता था. परिजनों का दावा है कि दोनों की मुलाकातें होती थीं और वे एक-दूसरे के काफी करीब थे. सोशल मीडिया और जांच से जुड़े कुछ वीडियो भी चर्चा में हैं, जिनमें दोनों को साथ देखा गया है.  इसी बीच केतन के परिवार ने एक और गंभीर दावा किया है. उनका आरोप है कि 14 जून को भी सिया, केतन को लेकर लोहगढ़ किले गई थी. वहां कथित रूप से एक ऐसी घटना हुई, जिसे परिवार हत्या की पहली कोशिश मान रहा है। 

    ड्राई फ्रूट का कारोबार करते हैं सिया के पिता
    बताया जा रहा है कि सिया के पिता प्रवीण गोयल शहर में ड्राई फ्रूट और मसालों के कारोबार से जुड़े हुए हैं और उनका अपना व्यापारिक प्रतिष्ठान भी है. जांच एजेंसियां परिवार से जुड़े तथ्यों और मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। 

    वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए चेतन के बारे में भी कई जानकारियां सामने आई हैं. सूत्रों के मुताबिक चेतन भी ड्राई फ्रूट के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था. उसने बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी. फिलहाल पुलिस उसके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। 

    अधिकारियों का मानना है कि मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए दोनों के बीच संबंधों की प्रकृति और घटनाओं के क्रम को समझना बेहद जरूरी है. इसी वजह से जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी सबूतों की मदद से पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी हैं. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और मामले से जुड़े हर तथ्य को सत्यापित करने का प्रयास किया जा रहा है। 

    साबित हुआ आखिर सफर 
    परिवार के मुताबिक, उस दिन किले के एक हिस्से में खड़े होने के दौरान केतन को पीछे की ओर धक्का लगा था. वह नीचे की ओर खिसक गया, लेकिन झाड़ियों में हाथ फंस जाने के कारण उसकी जान बच गई. परिवार का कहना है कि बाद में सिया ने सांप आया… सांप आया कहकर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की.  परिजनों के अनुसार, 19 जून को सिया का जन्मदिन था. जन्मदिन मनाने की बात कहकर उसने 18 जून को केतन को लोहगढ़ किले चलने के लिए कहा. सुबह करीब साढ़े आठ बजे दोनों वहां के लिए निकले. परिवार को लगा कि होने वाले पति-पत्नी घूमने जा रहे हैं. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर केतन की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा. करीब 10:45 बजे फोन आया कि केतन किले की घाटी में गिर गया है. परिवार तुरंत मौके के लिए रवाना हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. केतन की मौत हो चुकी थी। 

    सिया के चेहरे पर नहीं थी सिकन 
    केतन के पिता विशाल अग्रवाल का कहना है कि शुरुआत से ही उन्हें यह घटना हादसा नहीं लगी. उनका आरोप है कि घटनास्थल की परिस्थितियां और बाद की परिस्थितियां कई सवाल खड़े करती हैं. परिवार का दावा है कि जब उन्होंने केतन का शव देखा, तब भी सिया के चेहरे पर वैसा दुख दिखाई नहीं दिया. केतन की मां कहती हैं कि जिस बेटे को उन्होंने लाड़-प्यार से बड़ा किया, जिसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं, वह अचानक उनसे छिन गया. उनकी आवाज में दर्द साफ झलकता है. वह कहती हैं कि केतन हर बात उनसे साझा करता था, लेकिन शायद वह भी नहीं समझ पाया कि उसके आसपास क्या चल रहा है। 

    उधर पुलिस तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच में जुटी है. कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल का पुनर्निर्माण और संबंधित लोगों से पूछताछ लगातार जारी है. जांच एजेंसियां हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जो इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई तक पहुंचा सके. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है, जो लाखों लोगों के मन में घूम रहा है. अगर सिया की जिंदगी में चेतन था, जिससे वो प्यार करती थी तो केतन से शादी को क्यों तैयार  हो गई. पुलिस अब यह जांच कर  रही है कि आखिर वह चाहती क्या थी? वैसे तो इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. जवाब शायद जांच पूरी होने के बाद मिलेगा।