Category: देश

  • नक्सल मोर्चे के हीरो सुंदरराज पी की NIA में एंट्री, अब आतंकवाद के खिलाफ संभालेंगे कमान

    नक्सल मोर्चे के हीरो सुंदरराज पी की NIA में एंट्री, अब आतंकवाद के खिलाफ संभालेंगे कमान

     नई दिल्ली
    केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों को लीड करने वाले सीनियर आईपीएस अफसर सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र जारी कर उनके प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) की जानकारी दी। 

    गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सुंदरराज पी की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद NIA में की गई है. मंत्रालय ने राज्य सरकार से उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने को कहा है, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें। 

    बस्तर में लंबे समय तक की है सर्विस

    46 वर्षीय सुंदरराज पी को बस्तर क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईपीएस अधिकारियों में गिना जाता है. उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर संभाग में करीब 12 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. इनमें से लगभग सात वर्ष उन्होंने लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) या पुलिस प्रमुख के रूप में बिताए. बस्तर रेंज में दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिले शामिल हैं, जो लंबे समय तक देश में नक्सल हिंसा के सबसे बड़े केंद्र माने जाते रहे हैं। 

    कई नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की
    अपने कार्यकाल के दौरान सुंदरराज पी ने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की. उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने और कई शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ सफल अभियानों में उनका योगदान अहम रहा। 

    पिछले कुछ वर्षों में जब भी सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली या किसी अभियान में नुकसान हुआ, तब मीडिया से संवाद करने के लिए सुंदरराज पी ही प्रमुख चेहरा रहे. बस्तर में सुरक्षा स्थिति, अभियान और रणनीति से जुड़ी जानकारी अक्सर उन्हीं के माध्यम से साझा की जाती थी। 

    तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं सुंदरराज पी
    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य तय किया था. अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में बस्तर क्षेत्र में मिली सफलताओं में सुंदरराज पी के नेतृत्व और रणनीतिक भूमिका का बड़ा योगदान रहा है. इसी कारण उनकी सेवाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। 

    पीटीआई से बातचीत में एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने सुंदरराज पी को NIA में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए विशेष सिफारिश की है. अधिकारी के अनुसार, यह फैसला बस्तर में माओवादियों के खिलाफ अभियानों में उनके नेतृत्व, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के प्रति सम्मान स्वरूप लिया गया है। 

    तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सुंदरराज पी ने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया. अब NIA में IG के रूप में उनकी नियुक्ति को नक्सल विरोधी अभियानों में उनके अनुभव और विशेषज्ञता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी नेटवर्क और आतंकी गतिविधियों से निपटने के उनके व्यापक अनुभव का लाभ अब देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी NIA को भी मिलेगा। 

  • 2 महीने का संकट खत्म! US-Iran Peace Deal के बाद होर्मुज से निकला पहला ईरानी तेल खेप

    2 महीने का संकट खत्म! US-Iran Peace Deal के बाद होर्मुज से निकला पहला ईरानी तेल खेप

    नई दिल्ली

    मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है। 

    4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला
    टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं। 

    बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला। 

    एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर
    रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी। 

    मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था। 

    डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल 
    गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है। 

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है। 

     

  • RE-NEET के बीच सरकार सख्त, टेलीग्राम पर अस्थाई बैन लगाने का निर्णय

    RE-NEET के बीच सरकार सख्त, टेलीग्राम पर अस्थाई बैन लगाने का निर्णय

    नई दिल्ली

    National Testing Agency यानी NTA ने भारत में टेलीग्राम (Telegram) प्लेटफॉर्म को लेकर जारी किए गए सरकारी निर्देशों का स्वागत किया है. NTA के अनुसार उसकी सिफारिश पर भारत सरकार ने Telegram के खिलाफ दो अहम निर्देश जारी किए हैं. पहला निर्देश Information Technology Act 2000 की धारा 69A के तहत जारी किया गया है, जिसके तहत भारत में Telegram App पर 22 जून 2026 तक अस्थायी रोक लगाई गई है. दूसरा निर्देश Telegram को भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के Message Editing Feature को 30 जून 2026 तक बंद करने के लिए दिया गया है. NTA ने कहा कि यह कदम छात्रों के हित में उठाया गया है. फैसला NEET की परीक्षा के मद्देनजर लिया गया है। 

    Telegram पर पहला निर्देश
    NTA के अनुसार Information Technology Act 2000 की धारा 69A के तहत Telegram प्लेटफॉर्म तक भारत में पहुंच को सीमित करने का निर्देश जारी किया गया है. यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक लागू रहेगा. इस अवधि में NEET UG 2026 Re-Examination का दिन और उसके तुरंत बाद का समय शामिल है। 

    Message Editing Feature पर भी निर्देश
    सरकार ने Telegram को भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के Message Editing Feature को 30 जून 2026 तक बंद करने का निर्देश दिया है. NTA के अनुसार यह कदम उस विशेष फीचर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिसके जरिए राष्ट्रीय परीक्षाओं में घटना के बाद फर्जी Paper Leak के सबूत तैयार किए गए। 

    '30 जून तक बंद रहेगा मैसेज एडिटिंग फीचर'
    एजेंसी ने आगे कहा, "निर्देश में प्लेटफॉर्म से कहा गया है कि वह भारत में पहले से पोस्ट किए गए मैसेज के लिए 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर को एक तय समय (30 जून 2026) तक बंद कर दे। यह कदम उस खास फीचर को ध्यान में रखकर उठाया गया है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय परीक्षाओं के संबंध में घटना के बाद 'पेपर लीक' के सबूत गढ़ने के लिए किया जाता रहा है।"

    एनटीए ने छात्रों से की ये अपील
    एनटीए ने कहा कि मैसेज एडिट करने पर रोक का मकसद यह था कि यूजर्स पुराने मैसेज में बदलाव करके और ओरिजिनल टाइमस्टैम्प बनाए रखकर पेपर लीक के झूठे सबूत न बना सकें।

    एजेंसी ने माना कि इन पाबंदियों से टेलीग्राम के असली यूजर्स को परेशानी होगी, लेकिन कहा कि ये उपाय कुछ समय के लिए ही हैं और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। एजेंसी ने फिर से कहा कि NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा तय समय के अनुसार 21 जून को ही होगी और उम्मीदवारों से अपील की कि वे अपडेट के लिए सिर्फ एनटीए के आधिकारिक चैनलों पर ही भरोसा करें।

    एनटीए ने बताया किस वजह से टेलीग्राम पर लगाई गई रोक
    एनटीए का मानना है कि परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्रों, अफवाहों, फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोकने में यह फैसला मददगार साबित होगा। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनटीए के अनुसार, हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से गलत सूचनाओं और परीक्षा सामग्री के कथित प्रसार की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे में एहतियाती कदम के तौर पर यह फैसला लिया गया है। पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से एनटीए ने अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत सूचना माध्यमों पर ही भरोसा करें तथा किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह से बचें।

    टेलीग्राम की संदेश संपादित करने की सुविधा पर 30 जून तक रहेगी रोक
    एनटीए द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई है और यह रोक 22 जून 2026 तक जारी रहेगी। एक अन्य आदेश के तहत टेलीग्राम को भारत में पहले से भेजे गए संदेशों को संपादित (Edit) करने की सुविधा 30 जून 2026 तक बंद करनी होगी। इसका उद्देश्य उस सुविधा का दुरुपयोग रोकना है, जिसके जरिए राष्ट्रीय परीक्षाओं के बाद नकली पेपर लीक के सबूत तैयार किए जाते थे। इन दोनों कदमों का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और उन संगठित गिरोहों पर रोक लगाना है जो NEET (UG) 2026 की पुनः परीक्षा देने वाले छात्रों को धोखा देने के लिए टेलीग्राम का उपयोग कर रहे थे। 

    NTA ने क्या कहा
    NTA ने कहा कि दोनों कदम Public Order के हित में उठाए गए हैं. NTA के अनुसार NEET UG 2026 Re-Examination में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए संगठित Cheating Rackets द्वारा Telegram प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। 

    NTA ने मंत्रालय का जताया आभार
    NTA ने Ministry of Electronics and Information Technology का धन्यवाद किया. NTA ने कहा कि छात्रों के हित में उठाया गया यह समय पर लिया गया कदम 21 जून 2026 को NEET UG 2026 Re-Examination को सुरक्षित और संरक्षित तरीके से आयोजित करने में मदद करेगा। 

  • LPG कारोबार पर बड़ा असर! नए सरकारी आदेश के बाद गैस एजेंसियों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

    LPG कारोबार पर बड़ा असर! नए सरकारी आदेश के बाद गैस एजेंसियों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

     रामपुर
     सरकार एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के बजाय अब पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा दे रही है। जिले में भी तेजी से पीएनजी के उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। अब शासन ने आदेश दिए हैं कि एलपीजी इस्तेमाल करने वाले शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों तक पीएनजी पहुंचाई जाए।

    इसके बाद पीएनजी अपनाने वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। इससे भले ही उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन गैस एजेंसी पर बंदी का संकट आ जाएगा। साथ ही वहां काम करने वाले सैकड़ों स्टाफ और डिलीवरीमैन भी बेरोजगार हो जाएंगे।

    अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर चल रहे युद्ध का सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ा है। एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण सरकार का पूरा जोर अब पीएनजी पर है।

    मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन एसपी गोयल ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजा है, जिसमें एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्विच कराने के आदेश दिए गए हैं।

    पत्र में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरु मध्य क्षेत्र में हाल की घटनाओं के कारण एलपीजी पर निर्भरता कम करने और खाना पकाने के ईंधन के रूप में पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    इसके लिए जिला प्रशासन को अपने जिले में संचालित गैस एजेंसियों संचालकों एवं प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए उपलब्धता के आधार पर एलपीजी उपभोक्ताओं को शत-प्रतिशत पीएनजी पर स्विच कराने के लिए तत्काल कार्रवाई को कहा गया है।

    गैस एजेंसी संचालकों की पीड़ा
    गैस एजेंसी का काम अब फायदे वाला नहीं रह गया है। कई साल से एजेंसियों का कमीशन तक नहीं बढ़ा है। पीएनजी आने से एजेंसियों पर संकट मंडराने लगा है। हम इसका विरोध नहीं करते हैं, लेकिन एक एजेंसी से कई परिवार जुड़े हैं। सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए। – राजेंद्र प्रसाद, राजेंद्र गैस एजेंसी।

    धीरे-धीरे एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में तब्दील हो जाएंगे तो गैस एजेंसी संचालकों के पास आजीविका की समस्या खड़ी हो जाएगी। गैस एजेंसी से संचालक के अलावा 20 से 25 लोगों का परिवार पलता है। सरकार को इनके विषय में भी विचार करना चाहिए। – अमित दिवाकर, अध्यक्ष रामपुर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन।

    पीएनजी की व्यवस्था महानगरों में पहले से व्यवहार में थी, लेकिन केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में स्पष्ट कानूनी प्रविधान के रूप में लागू कर दिया है। अब एलपीजी वालों को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। – अंकित जैन, टांडा गैस सर्विस।

    सरकार का जोर अब पीएनजी पर है। जिले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी द्वारा पीएनजी का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप तेजी से काम किया जा रहा है। पीएनजी के करीब दो हजार कनेक्शन हो चुके हैं। – नीरज कुमार, एरिया मैनेजर एचपी।

  • AI की दुनिया में भूचाल! अमेरिका ने लगाए कड़े प्रतिबंध, भारत को नफा ज्यादा होगा या नुकसान?

    AI की दुनिया में भूचाल! अमेरिका ने लगाए कड़े प्रतिबंध, भारत को नफा ज्यादा होगा या नुकसान?

     नई दिल्ली/वाशिंगटन

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और दुनियाभर की सरकारों को चौंका दिया है। अमेरिका ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए मशहूर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे पावरफुल एआई मॉडल्स- क्लॉड फैबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5) का एक्सेस भारतीयों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए तुरंत रोक दे। इस सरकारी आदेश के बाद कंपनी को मजबूरन ग्लोबल लेवल पर इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है।

    अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है और गैर अमेरिकियों के लिए पावरफुल AI मॉडल के एक्सेस को बैन कर दिया है. यह नियम एंथ्रोपिक के सबसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 पर लागू होगा. अमेरिका ने एंथ्रोपिक के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश दिए हैं, जो इन मॉडल्स पर लागू होंगे। 

    दरअसल, अमेरिकी सरकार के एक विभाग ने पावरफुल एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 के ग्लोबल एक्सेस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसकी जानकारी शनिवार को मिली. यह बैन अमेरिका के बाहर के सभी यूजर्स, जिसमें एंथ्रोपिक के विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं। 

    अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के मुताबिक, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां हैं, जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं. हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। 

    अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
    AI जगत में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने सीधे AI सॉफ्टवेयर की पहुंच पर रोक लगाई है। यह कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक संकेत है कि दुनिया में एआई को लेकर नियम कितनी तेजी से बदल रहे हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं:

        12 जून को अमेरिकी प्रशासन ने एंथ्रोपिक को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक (चाहे वह अमेरिका के अंदर हो या बाहर) इन नए मॉडल्स का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश इतना व्यापक था कि इसमें कंपनी के अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल थे। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एंथ्रोपिक के पास इन दोनों मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। हालांकि, यूजर्स कंपनी के अन्य पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल पहले की तरह कर सकेंगे।

        वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के दौरान फैबल 5 (Fable 5) मॉडल में कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ साझा की गई। अमेरिकी अधिकारियों को यह डर सताने लगा कि इस सिस्टम के सुरक्षा घेरे को आसानी से तोड़ा जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो इसका इस्तेमाल सरकारी नेटवर्क्स, बैंकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर खतरनाक साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।

        कंपनी ने सरकार के इस फैसले को असंगत बताया है। एंथ्रोपिक का तर्क है कि जिन कमजोरियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से ज्ञात हैं और बाजार में मौजूद अन्य एआई मॉडल्स भी उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लॉन्च से पहले अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन मॉडल्स की हफ्तों तक कड़ी टेस्टिंग की थी। एंथ्रोपिक इसे एक 'गलतफहमी' मान रही है और अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की कोशिशों में जुटी है।

        यह बैन रातों-रात नहीं लगा है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने पहले अपने एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और स्वचालित हथियारों के लिए करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को "सप्लाई-चेन रिस्क" तक घोषित कर दिया था। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

    विदेशी यूजर्स के लिए सेवा पूरी तरह बंद
    रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक के पास ऐसा कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है जिससे हर उपयोगकर्ता की राष्ट्रीयता की सटीक पहचान की जा सके। इसी कारण कंपनी को अमेरिका के बाहर के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इन मॉडलों की पहुंच बंद करनी पड़ी है।

    इस फैसले को सोशल मीडिया पर टेक उद्योग का ‘9/11’ तक कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक एआई इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी कंपनी के अत्याधुनिक और खुले बाजार में उपलब्ध मॉडल को अचानक वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है।

    साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ जैसे उन्नत मॉडल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का विश्लेषण करने, मालवेयर जांचने, सैन्य रणनीति और जैविक अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग किए जा सकते हैं।

    यदि कोई एआई मॉडल सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने और सिस्टम को तोड़ने के तरीके सुझाने में सक्षम हो जाए, तो वह साइबर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया है।

    भारत के लिए दो बड़े सबक
    कोरोवर. एआई के फाउंडर और सीईओ अंकुश सभरवाल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस फैसले से सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान खुद एंथ्रोपिक और अमेरिका को होगा। उनका कहना है कि जब किसी कंपनी का सबसे उन्नत सॉफ्टवेयर वैश्विक बाजार में उपलब्ध नहीं रहेगा, तो उसके व्यापार और निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक उद्योग में बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और अन्य एशियाई मूल के डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे में पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौती भी है। अंकुश सभरवाल के अनुसार, भारत के लिए इससे दो महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। पहला, भारतीय स्टार्टअप्स को केवल विदेशी एआई एपीआई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि भविष्य में जियो-ब्लॉकिंग या एक्सपोर्ट बैन लागू होते हैं, तो भारतीय कंपनियों का काम प्रभावित हो सकता है।

    दूसरा, भारत को केवल विदेशी एआई तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय अपना स्वदेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसके लिए ‘इंडिया एआई मिशन’, घरेलू एलएलएम और स्वदेशी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई गई है।

    जोहो फाउंडर ने दी चेतावनी
    अब तक अमेरिका सिर्फ एआई चिप्स और हार्डवेयर (जैसे सेमीकंडक्टर) के निर्यात को रोकता था, लेकिन यह पहली बार है जब सीधे 'एआई सॉफ्टवेयर' पर रोक लगाई गई है। जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इसे भारत के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है।" वेम्बू का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। अब वक्त आ गया है कि देश अपनी खुद की सॉवरेन एआई (Sovereign AI) क्षमताएं विकसित करे और घरेलू रिसर्च व ओपन-सोर्स मॉडल्स पर भारी निवेश करे।

    आगे क्या होगा?
    फिलहाल, एंथ्रोपिक सरकारी आदेश का पालन कर रही है। लेकिन इस घटना ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में एआई को सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की तरह एक 'रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा माना जाएगा। ऐसे में, जो देश अपनी खुद की एआई तकनीक विकसित नहीं करेंगे, वे भविष्य की डिजिटल दौड़ में बहुत पीछे छूट सकते हैं। 

  • ‘वंदे मातरम्’ की गूंज और रोटी-नमक की परंपरा, स्लोवाकिया में PM मोदी ने बढ़ाए भारत-यूरोप संबंधों के कदम

    ‘वंदे मातरम्’ की गूंज और रोटी-नमक की परंपरा, स्लोवाकिया में PM मोदी ने बढ़ाए भारत-यूरोप संबंधों के कदम

    नई दिल्ली/ ब्रैटिस्लावा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बाद अब स्लोवाकिया के दौरे पर पहुंच गए हैं. स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारतीय प्रधानमंत्री का शानदार स्वागत किया गया. स्लोवाकिया के गठन के बाद, वहां का दौरा करने वाले पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. ब्रातिस्लावा पहुंचने पर स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया. पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार उन्हें ‘रोटी और नमक’ भेंट किया गया, जो वहां सम्मान, सद्भावना और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है। 

    पीएम मोदी आज स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. इसके बाद पीएम मोदी ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे. इसके अलावा वह डेन्यूब नदी पर आयोजित विशेष हाई-टी कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी आज शाम राष्ट्रपति भवन में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति के साथ बेहद अहम बैठक करने वाले हैं, जबकि दिन का समापन राष्ट्रपति की ओर से आयोजित राजकीय रात्रिभोज के साथ होगा। 

    प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को और खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. उनके इस दौरे को लेकर स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में भी काफी उत्साह है. पीएम मोदी के स्लोवाकिया पहुंचते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया. लोगों ने मोदी-मोदी..वंदे मातरम..और भारत माता की जय के नारे लगाए। 

    स्लोवाकिया दौरे के बाद फिर फ्रांस लौटेंगे पीएम मोदी, करेंगे G-7 नेताओं से बात
    स्लोवाकिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर फ्रांस लौटेंगे, जहां वे 16-17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ सीधी बात करेंगे. इस दौरे के अंतिम चरण में मोदी 18 जून को पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कार्यक्रम ‘वीवाटेक 2026’ में भी शामिल होंगे। 

    पीएम मोदी के दौरे से स्लोवाकिया संग रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान
    पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, नवाचार, ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे क्षेत्र और नई प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. भारत और स्लोवाकिया हाल के वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं. अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्लोवाकिया यात्रा और फरवरी 2026 में स्लोवाक राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद यह दौरा संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। 

    'सचमुच बहुत खास… ' ब्रातिस्लावा में मिले स्वागत पर बोले पीएम मोदी
    प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को नई ऊंचाई देने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश का अवसर है. उन्होंने राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ होने वाली बैठकों को लेकर उत्साह भी जताया. पीएम मोदी ने आज सुबह एक्स पोस्ट में लिखा, ‘कल शाम ब्रातिस्लावा में मिला स्वागत सचमुच बहुत खास था. मैं भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता के लिए उनका आभारी हूं. ऐसे भाव उन मज़बूत रिश्तों को दर्शाते हैं जो हमारे लोगों को जोड़ते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत बनाते हैं। 

     वंदे मातरम्, महादेव कीर्तन… पीएम मोदी की स्लोवाकिया यात्रा की बेहद खास शुरुआत
    प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को बेहद खास बनाने के लिए प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह लुसनिका एन्सेम्बल ने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी. इस दौरान भारतीय संस्कृति और स्लोवाक लोक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रधानमंत्री ने कलाकारों से मुलाकात भी की और उनकी प्रस्तुति की सराहना की. समूह के कलाकारों ने इसे अपने जीवन का यादगार क्षण बताया। 

    पीएम मोदी ने ब्रातिस्लावा में स्लोवाक संगीत समूह ‘महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट’ की आध्यात्मिक प्रस्तुति भी देखी. इसके अलावा प्रसिद्ध बाल लोकनृत्य दल ‘कोपानिचियारिक’ ने पारंपरिक स्लोवाक नृत्य प्रस्तुत कर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बढ़ती नजदीकियों की झलक भी दिखाई दी। 

  • आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर प्रदर्शन तेज, विकासनगर में बुलडोजर कार्रवाई शुरू

    आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर प्रदर्शन तेज, विकासनगर में बुलडोजर कार्रवाई शुरू

    उत्तराखंड
    उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है.

    इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है.

    इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है.

    वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं.

    इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए.

    घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई.

    गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

    स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली.

    घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक
    घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया.

    अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है.

    घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा?
    इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

  • पीएफ खाते में जल्द आएगा ब्याज का पैसा! EPFO ने इंटरेस्ट क्रेडिट को लेकर दी बड़ी जानकारी

    पीएफ खाते में जल्द आएगा ब्याज का पैसा! EPFO ने इंटरेस्ट क्रेडिट को लेकर दी बड़ी जानकारी

    नई दिल्ली

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के सदस्य अपने पीए खाते में ब्याज का पैसा जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. FY2025-26 के लिए पीएफ की ब्याज दर (PF Interest Rate) को यथावत रखा गया है, जो 8.25% है. इसे स्थिर रखने का फैसला लिए गए दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसा ईपीएफओ सदस्यों के खाते में जमा नहीं हुआ है. अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 

    बीते मार्च 2026 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 2 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीटी ने सिफारिश की कि ब्याज को सदस्यों के ईपीएफ खाते में वित्तीय वर्ष के लिए जमा किया जाए। 
     
    कब तक PF खाते में जमा होगा पैसा? 
    EPFO Interest के खाते में जमा करने का इंतजार कर रहे सदस्यों के लिए बता दें कि अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है और न ही कोई संभावित तारीख घोषित की गई है. लेकिन अगर, पीएफ में ब्याज का पैसा आने के पिछले रुझानों पर नजर डालें, तो संकेत मिल रहा है कि ये जून और सितंबर के बीच किसी भी समय डाला जा सकता है। 

    ब्याज की राशि ईपीएफओ सदस्यों के खातों में तभी जमा की जाती है जब केंद्र सरकार से सिफारिश को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है और इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए राशि जमा करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। 

    पिछले वर्ष, कई ग्राहकों को जून और जुलाई में खाते में ब्याज मिला था. हालांकि, इसे लेकर सटीक समय अलग-अलग हो सकता है. सदस्यों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि पीएफ ब्याज की जानकारी सभी ईपीएफ पासबुक में एक साथ दिखाई नहीं देती है, मतलब कुछ सदस्यों को यह अपडेट दूसरों की तुलना में पहले दिखाई दे सकता है और कुछ को बाद में। 

    क्या देरी से ब्याज पर असर पड़ेगा?
    इस उत्तर है नहीं, पासबुक अपडेट में देरी होने पर भी, ग्राहकों को उनका पूरा ब्याज मिलता है. EPF Scheme 1952 के अनुच्छेद 60 के तहत पीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक चालू शेष पर होती है, जिसपर सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है. इसलिए, पासबुक में ब्याज दर्शाने में किसी भी प्रशासनिक देरी से सदस्यों को मिलने वाली रकम पर कोई असर नहीं पड़ता है। 

    PF खाते में आया ब्याज, ऐके करें चेक
    EPFO द्वारा अपने सदस्यों को कई ऑप्शन दिए गए हैं, जिनके जरिए वे अपने पीएफ खाते में ब्याज की रकम आने पर इसे आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) या एसएमएस सुविधाएं (EPFO SMS Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं। 

     

  • भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच नया खतरा, ईरान के ड्रोन से दहशत; होर्मुज में कॉमर्शियल शिप्स बने टारगेट

    भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच नया खतरा, ईरान के ड्रोन से दहशत; होर्मुज में कॉमर्शियल शिप्स बने टारगेट

     नई दिल्ली
    भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कई ड्रोन दागे हैं. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी "वन-वे अटैक ड्रोन" मार गिराए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने ही होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर भी ड्रोन अटैक की कोशिश की थी। 

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए कई अटैक ड्रोन लॉन्च किए थे. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने इन सभी ड्रोन को मार गिराया. बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह अहम समुद्री गलियारा पूरी तरह खुला हुआ है और जहाजों की आवाजाही जारी है। 

    रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया. अधिकारी के मुताबिक, ये ड्रोन कॉमर्शियल समुद्री यातायात के लिए खतरा बन सकते थे। 

    ईरान कर रहा भारतीय जहाजों पर हमले
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं के बीच अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर किया गया ड्रोन हमला "पूरी तरह अस्वीकार्य" है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे जल्द अपने रवैये में बदलाव करना होगा। 

    हालांकि, भारत या ईरान की तरफ से गुरुवार रात या उसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास किसी भारतीय ध्वज वाले जहाज पर ड्रोन हमले की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. दोनों देशों की तरफ से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। 

    भारतीय जहाजों पर हमला और US राजनयिक तलब
    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ने इसी सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया. भारत ने ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले तीन व्यापारी जहाजों पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया है, इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. इसको लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात भी की है और विरोध दर्ज किया है। 

  • गोद में 6 माह की मासूम, छठी मंजिल से कूदी इंजीनियर मां; हैदराबाद की घटना ने सबको किया हैरान

    गोद में 6 माह की मासूम, छठी मंजिल से कूदी इंजीनियर मां; हैदराबाद की घटना ने सबको किया हैरान

     हैदराबाद

    हैदराबाद के मियापुर इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक बहुमंजिला इमारत की छठी मंजिल से कूदने के कारण 37 साल की महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई. इस आत्मघाती कदम को उठाते वक्त महिला की गोद में उसकी 6 महीने की मासूम बच्ची भी थी. लेकिन जैसे ही उसने छलांग लगाई, बच्ची महिला की गोद से छिटक कर दूर जा गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। 

    यह पूरी घटना मियापुर के मयूरी नगर में मौजूद 'लक्ष्मी प्रेस्टीज अपार्टमेंट' की है. मृत महिला की पहचान ईशा साहू के रूप में हुई है, जो पेशे से एक आईटी इंजीनियर थीं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ईशा अपनी 6 महीने की बेटी को सीने से लगाए हुए अचानक अपार्टमेंट की छठी मंजिल से नीचे कूद गईं. हालांकि, नीचे गिरते वक्त हवा में ही बच्ची अचानक मां के हाथों से फिसल गई. यही वजह रही कि ईशा की तो मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन मासूम बच्ची को सिर्फ मामूली चोटें आईं. हादसे के तुरंत बाद आस-पास के लोग मौके पर दौड़े और बच्ची को केपीएचबी के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। 

    इस कदम के पीछे की जो वजह सामने आ रही है, वह मानसिक तनाव से जुड़ी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ईशा पिछले कई महीनों से इंसोमनिया यानी नींद न आने की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. वह रात-रात भर सो नहीं पाती थीं. जांच अधिकारियों का अनुमान है कि लंबे समय तक नींद न पूरी होने की वजह से वह गहरे डिप्रेशन में चली गईं, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। 

    फिलहाल मियापुर थाना पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. पुलिस अपार्टमेंट के लोगों और परिवार से पूछताछ कर रही है,ताकि घटना की असली वजह का पता लगाया जा सके।