Category: देश

  • डीजल बिक्री के नियम बदले, अब तय मात्रा से ज्यादा नहीं खरीद सकेंगे ग्राहक; जानें पूरी डिटेल

    डीजल बिक्री के नियम बदले, अब तय मात्रा से ज्यादा नहीं खरीद सकेंगे ग्राहक; जानें पूरी डिटेल

    नई दिल्ली

    होर्मुज संकट के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. देश में डीजल की कोई कमी नहीं है. मगर ईरान युद्ध के चलते लोगों में एक डर बना हुआ है. इस पैनिक माहौल का जमाखोर फायदा उठाने में लगे हैं. यही कारण है कि डीजल की जमाखोरी रोकने के लिए मोदी सरकार ने सख्ती दिखाई है. जी हां, पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने डीजल बिक्री की सीमा तय कर दी है. अब एक आदमी को 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिल सकेगा। 

    दरअसल, सरकार ने आज यानी शुक्रवार को खुदरा पेट्रोल पंपों पर हाई स्पीड डीजल (HSD) की बिक्री को सीमित करने का आदेश जारी किया है. नए नियम के अनुसार, अब किसी भी ग्राहक को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेचा जा सकेगा. इसका मतलब है कि अब एक ग्राहक को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही मिलेगा। 

    सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
    सरकार का कहना है कि यह फैसला डीजल की जमाखोरी, अनावश्यक भंडारण और संभावित कालाबाजारी को रोकने के मकसद से लिया गया है. हाल के दिनों में कुछ इलाकों में ईंधन की अतिरिक्त खरीदारी और स्टॉक जमा करने की आशंकाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। 

    बिजनेस वालों को क्या करना होगा
    आदेश के मुताबिक, व्यावसायिक और औद्योगिक जरूरतों वाले ग्राहकों को अपनी अधिकृत सुविधाओं, डिपो या निर्धारित पंपों से ही ईंधन खरीदना होगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदने वाले उपभोक्ता खुदरा नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव न डालें। 

    आदेश में और क्या?
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है और इसकी अवधि अधिकतम 90 दिनों तक होगी. जरूरत पड़ने पर स्थिति की समीक्षा के बाद इसमें बदलाव किया जा सकता है. संबंधित तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और पेट्रोल पंप संचालकों को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    सरकार का मानना है कि इस कदम से आम उपभोक्ताओं, परिवहन सेवाओं, कृषि क्षेत्र और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए डीजल की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.अगर बड़ी मात्रा में ईंधन की खरीद और भंडारण पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम कमी पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है। 

    प्वाइंटर्स में जानिए सरकार के फैसले की अहम बातें:
        भारत सरकार ने खुदरा पेट्रोल पंपों पर हाई स्पीड डीजल (HSD) की बिक्री सीमित की.
        अब एक ग्राहक को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही मिलेगा
        व्यावसायिक ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल अपनी अधिकृत सुविधाओं/पंपों से लेना होगा
        सरकार ने पेट्रोल-डीजल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आदेश जारी किया
        यह अस्थायी आदेश अधिकतम 90 दिनों तक प्रभावी रहेगा
        तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश
        सरकार का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन उपलब्धता बनाए रखना है

     

  • बॉर्डर पर हाई वोल्टेज ड्रामा! घुसपैठ रोकने गई BSF पर पत्थरबाजी, BGB के साथ भी हुई तीखी नोकझोंक

    बॉर्डर पर हाई वोल्टेज ड्रामा! घुसपैठ रोकने गई BSF पर पत्थरबाजी, BGB के साथ भी हुई तीखी नोकझोंक

    कलकत्ता

    पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को बवाल हो गया. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा कथित रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने की कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव की घटनाएं सामने आईं. घटना मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के महेंद्रगंज क्षेत्र स्थित नंदिर चार सीमा इलाके की बताई जा रही है। 

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद BSF ने उसे बांग्लादेश की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि मामला उस समय उलझ गया जब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और सीमा पार मौजूद स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

    बताया जा रहा है कि BGB के इनकार के बाद वह व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच फेंसिंग के पास ही फंस गया. इससे इलाके में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से उसे अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया गया. घटना की खबर फैलते ही सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते सैकड़ों लोग सीमा के पास पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। 

    दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सीमा पर जुटी भीड़ के बीच कहासुनी के बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी बाड़ के आर-पार पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई. हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. BSF और BGB दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। 

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
    घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे हैं. इन वीडियो में सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। 

    हालात पर नजर, बातचीत से समाधान की कोशिश
    सूत्रों के मुताबिक, मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत बातचीत की संभावना है. BSF और BGB के अधिकारी स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल नंदिर चार सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक सीमा प्रबंधन की व्यवस्था रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों की एजेंसियां बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल लेंगी और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल हो जाएगी। 

  • रक्षा मोर्चे पर भारत का बड़ा कदम, परमाणु क्षमता और युद्ध नीति में बदलाव से वैश्विक हलकों में हलचल

    रक्षा मोर्चे पर भारत का बड़ा कदम, परमाणु क्षमता और युद्ध नीति में बदलाव से वैश्विक हलकों में हलचल

    बेंगलुरु 

    भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है. अगर यह आकलन सही साबित होता है तो इसे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। 

    रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब SIPRI ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर एक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो चुकी है. भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य आधुनिकीकरण और हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने के कारण परमाणु जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। 

    भारत ने बदली परमाणु नीति?
    SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 180 बताई गई थी. रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से करीब 12 परमाणु वारहेड अब ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात हो सकते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि भारत शांति काल में अपने परमाणु हथियार और मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग रखता है, ताकि किसी भी परमाणु कार्रवाई पर अंतिम नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के पास रहे । 

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संख्या में वारहेड की तैनाती भारत की अधिक तेज और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है. खासकर तब, जब भारत अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। 

    आक्रमण नहीं, हिफाजत के लिए परमाणु हथियार
    भारत की परमाणु नीति लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ और ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ यानी विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता के सिद्धांत पर आधारित रही है. इसका मतलब यह है कि भारत परमाणु हथियारों को आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को हमले से रोकने के लिए रखता है. SIPRI की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत दिया गया है कि रणनीतिक बलों की तैयारियों का स्तर पहले से अधिक मजबूत हुआ है। 

    चीन भी तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा
    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा प्रभाव चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता का है. SIPRI के मुताबिक चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है. इसी वजह से भारत ने ऐसी नई मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं जो चीन के भीतर दूर तक स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक सोच अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है। 

    हालांकि पाकिस्तान भी भारत की सुरक्षा गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. पिछले एक दशक में दोनों देशों ने नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु हथियारों को ले जाने वाले प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ऐसे में दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत की प्राथमिकता बना हुआ है। 

    दुनियाभर में कितने परमाणु हथियार?
    वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. SIPRI के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वारहेड हैं. इनमें से लगभग सभी देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण में जुटे हुए हैं. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया धीरे-धीरे एक नए न्यूक्लियर आर्म्स रेस की ओर बढ़ रही है। 

    इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य में भारत की कथित ऑपरेशनल तैनाती को भी देखा जा रहा है. भले ही इसकी संख्या सीमित हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रतिरोध क्षमता को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है. खासकर ऐसे दौर में जब चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। 

  • भारत की सैन्य ताकत को नया बूस्ट, 23,000 करोड़ की डील से चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी कड़ी निगरानी और जवाबी क्षमता मजबूत

    भारत की सैन्य ताकत को नया बूस्ट, 23,000 करोड़ की डील से चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी कड़ी निगरानी और जवाबी क्षमता मजबूत

    नई दिल्ली

    भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 

    पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है। 

    रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी। 

    K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है। 

    K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। 

    भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। 

    K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

  • राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा जमावड़ा, PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शामिल होंगे 75 नेता, तय होगा आगे का एजेंडा

    राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा जमावड़ा, PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शामिल होंगे 75 नेता, तय होगा आगे का एजेंडा

     नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं.देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मोदी तोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड आजादी के बाद निर्वाचित सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का है. पंडित नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे जबकि नरेंद्र मोदी का बतौर पीएम का 4399वां दिन है। 

    पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर पूरे देश में जश्न का माहौल है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को बीजेपी लोगों के सामने रख रही है और उपलब्धियों का जश्न भी मना रही है. इस मौके पर दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सभी सहयोगी दल के नेता दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे। 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड बनाने उपलक्ष्य में भारत मंडपम में हो रही बैठक में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित प्रमुख नेता शामिल होंगे. एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा। 

    35 दल के 75 नेता करेंगे शिरकत
    पीएम मोदी ने 1952 के आमचुनावों के बाद चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा लिया है जबकि जवाहर लाल नेहरू  4,398 दिन तक पीएम रहे थे. इस तरह से नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। 

    मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक जश्न रखा गया है,  जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेता हिस्सा लेंगे. बैठक में एनडीए के 22 शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता शिरकत करेंगे। 

    बैठक में एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह,जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

    वहीं, एनडीएमें शामिल पार्टियों के केंद्रीय मंत्रियों में टीडीपी से के राम मोहन नायडू, जेडीयू से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह,जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी और अपना दल-सोनेलाल से अनुप्रिया पटेल इस बैठक में शामिल होंगी. इसके अलावा राज्यों के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत करेंगे। 

    एनडीए की बैठक का एजेंडा क्या होगा
    एनडीए बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों सहित मोदी सरकार के 12 पूरे होने पर चर्चा होने की संभावना है. एनडीए के नेता और केंद्र और राज्य सरकारों के नेता 'विकसित भारत' के  सपने को साकार करने के लिए और सुधार लाने के तरीकों पर अपने विचार रखेंगे। 

    मोदी की अगुवाई में होने वाली बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर एनडीए नेता अपनी बात रख सकते हैं. बैठक में राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी सरकार के विजन की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने डंबल इंजन की सरकार चल रही, उन राज्यों में विकास योजनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। 

    पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों को लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में काम करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन 2026 में भविष्य के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि इस पर विस्तार के चर्चा हो सकती है। 

    बैठक में मोदी के लिए आएगा प्रस्ताव
    एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू एक विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो करेंगे। 

    एनडीए के तरफ से लाए जाने वाले विशेष प्रस्ताव में 12 साल तक निर्वाचित रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी जाएगी और उनके नेतृत्व के लिए एनडीएका आभार जताया जाएगा  प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने से पहले गठबंधन के नेता चर्चा में हिस्सा लें. प्रस्ताव पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को संबोधित कर सकते हैं। 

    एनडीए की बैठक को मोदी करेंगे संबोधित
     दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली एनडीए बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. बैठक में मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धि पर चर्चा किए जाने के साथ ये बैठक करीब 3 घंटे तकतक चलेगी. मोदी सरकार के कामकाज पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पीएम मोदी एनडीए नेताओं को संबोधित करेंगे। 

  • NDA का विस्तार और मोदी का कीर्तिमान, 22 राज्यों में सत्ता के बीच टूटा नेहरू का पुराना रिकॉर्ड

    NDA का विस्तार और मोदी का कीर्तिमान, 22 राज्यों में सत्ता के बीच टूटा नेहरू का पुराना रिकॉर्ड

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर बने रहने के नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. वो देश के सबसे लंबे कार्यकाल तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. 9 जून 2024 को ही उन्होंने एनडीए के तीसरे कार्यकाल में पीएम पद की शपथ ली थी और उनके सत्ता में रहने के 12 साल भी आज पूरे हो रहे हैं. पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और आज 9 जून 2026 तक उनके कार्यकाल के 4398 दिन पूरे हो गए हैं. अब वो सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। 

    एनडीए 10 जून को दिखाएगा ताकत 
    एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की 10 जून को बैठक होगी और इसमें एकजुटता के साथ शक्ति प्रदर्शन होगा.आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू रखेंगे प्रस्ताव. अन्य सहयोगी दलों के नेता प्रस्ताव का करेंगे समर्थन. प्रस्ताव में बतौर प्रधानमंत्री पिछले बारह साल की उपलब्धियों का ज़िक्र किया जाएगा। 

    पंडित नेहरू का 12 साल का रिकॉर्ड
    भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 13 मई 1952 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. नेहरू लगातार 4397 दिन यानी 12 साल 14 दिन तक प्रधानमंत्री रहे थे. पीएम मोदी ने 9 जून को सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री का नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 4398 दिन यानी 12 साल 15 दिन पूरे कर लिए हैं. नेहरू हालांकि 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने थे लेकिन 1952 में लोकसभा चुनाव के पहले तक वो पांच साल अंतरिम सरकार के प्रमुख थे. नेहरू तब तक चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे। 

    मोदी सरकार के 12 वर्ष और 22 राज्यों में NDA शासन

    संगठनात्मक विस्तार पर चर्चा
    भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बैठक दोपहर में शुरू हुई. शाम देर तक चली. उन्होंने बताया कि यह बैठक पीएम मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की सफलताओं और एनडीए के 22 राज्यों में शासन को रेखांकित करने के लिए बुलाई गई थी, जो संगठन के व्यापक विस्तार का प्रतीक है।

    युवा, महिला और वंचित वर्गों पर फोकस
    भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि नितिन नबिन की अध्यक्षता में हुई भाजपा की बैठक में संगठनात्मक विस्तार, युवाओं को जोड़ने, महिलाओं के सशक्तिकरण और एससी/एसटी समुदायों के विकास पर चर्चा हुई. बैठक में पार्टी के संगठन को मजबूत करने, युवा वर्ग को मुख्यधारा में लाने, महिला सशक्तिकरण और अनुसूचित जाति/जनजाति के उत्थान जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया। 

    आगामी चुनावों की रणनीति
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में 26 मई 2026 तक मोदी सरकार के 12 वर्षों के उपलक्ष्य में जन-संपर्क अभियान तेज करने और आगामी विधानसभा व राज्यसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने पर मंथन हुआ. संगठनात्मक समन्वय बढ़ाने के लिए 10 जून को एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की एक हाई-प्रोफाइल बैठक प्रस्तावित है, जिसमें भावी राजनीतिक एजेंडे पर चर्चा होगी। 

    नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद  पर रहे. ऐसे में नेहरू का पूरा टाइम तो 6130 दिन होता है. लेकिन इसमें से करीब 5 साल वो अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री रहे. पीएम मोदी ने 25 जुलाई 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 4077 दिनों के प्रधानमंत्री के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। 

    शासन में सबसे लंबे वक्त का रिकॉर्ड
    पीएम मोदी ने मार्च 2026 में एक बड़ा इतिहास बनाया था. गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री रहने के दोनों कार्यकालों को मिला दें तो वह 8931 दिनों से अधिक समय तक सत्ता में रहने वाले भारत के पहले नेता बन गए थे. उन्होंने तब सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग (8930 दिन) के रिकॉर्ड को तोड़ा था। 

    सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री
    पीएम मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी हैं. वो गैर कांग्रेसी सरकार के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार चलाई और अब तीसरी बार एनडीए सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। 

    लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले दूसरे प्रधानमंत्री
    पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद 2024 में नरेंद्र मोदी देश के दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री बने थे, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में अपने नेतृत्व में गठबंधन या पार्टी को जीत दिलाकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. वो भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म देश की आजादी के बाद (17 सितंबर 1950) हुआ. इस तरह वो आजाद भारत में जन्मे पहले पीएम है. उनसे पहले के सभी प्रधानमंत्री 1947 से पहले जन्मे थे। 

    मोदी सरकार में लोगों को मिले कौन-कौन से लाभ?
    प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रही है और उसका प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से पीछे छूट गए हैं।

    पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह खुशी की बात है कि गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में प्रौद्योगिकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहायता सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंच रही है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, कार्यकुशलता बढ़ी है और शासन में विश्वास मजबूत हुआ है।

    इसी तरह गरीब कल्याण को आगे बढ़ाने का सफर मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के हमारे सपने को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन बन गया है।

    केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को वित्तीय सुरक्षा मिली: शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास और जन-धन जैसी केंद्रीय योजनाओं ने करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं और वित्तीय सुरक्षा से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष के समापन पर एक संदेश में शाह ने कहा कि गरीब कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास, जन-धन, मुद्रा ऋण और प्रधानमंत्री स्वनिधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं, वित्तीय सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा है।

  • UNSC में गूंजा भारत का जवाब, पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी; कहा- ‘पाखंड की हद’

    UNSC में गूंजा भारत का जवाब, पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी; कहा- ‘पाखंड की हद’

     नई दिल्ली

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा हुई. चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान को जमकर घेरा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए अफगानिस्तान में घुसकर किए गए उसके हमले को नरसंहार करार दिया. भारत के प्रतिनिधि ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन किया है। 

    भारत ने यूएनएससी में कहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर हमले किए, जिसमें आम नागरिक मारे गए. पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है. यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने इसे पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि नरसंहार करने वाला उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे दे, तो ऐसा करने वाला उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। 

    यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 372 आम नागरिक वहां मारे जा चुके हैं. अधिकतर लोग रमजान के पाक महीने में मारे गए थे. उन्होंने अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान उसके व्यापार मार्गों में भी बाधाएं डाल रहा है। 

    पी हरीश ने यूएनएससी में कहा कि अफगानिस्तान के सामान पर प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है. उन्होंने भारत की ओर से अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया और कहा कि साल 2021 के बाद 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, 40 हजार लीटर कीटनाशक वहां भेजे जा चुके  हैं। 

    यूएनएससी में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि इस साल अप्रैल महीने में ही बाढ़ राहत के लिए जरूरी सामान और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी. नई दिल्ली ने मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान में सभी 34 प्रदेश के विकास के लिए भी बहुत मदद दी है. अफगानिस्तान में भारत की करीब 500 से ज्यादा परियोजनाएं चल रही हैं. पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिक का निर्माण भारत ने कराया है। 

    पी हरीश ने कहा कि काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन कराने के साथ ही ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण भारत ने कराया है. उन्होंने कहा कि भारत द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की मेजबानी कर रहा है. पी हरीश ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मानते हैं कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं। 

  • भारत में LPG की कीमत बढ़ी, फिर भी पड़ोसियों से बेहतर हाल! पाकिस्तान से श्रीलंका तक सिलेंडर के रेट जानिए

    भारत में LPG की कीमत बढ़ी, फिर भी पड़ोसियों से बेहतर हाल! पाकिस्तान से श्रीलंका तक सिलेंडर के रेट जानिए

    नई दिल्ली
    भारत में घरेलू इस्तेमाल वाला एलपीजी सिलेंडर और महंगा हो गया है. इसकी कीमत में सीधे 29 रुपये का इजाफा किया गया है, जो रसोई के बजट को बढ़ाने वाला है. तीन महीने में एलपीजी की कीमत पर महंगाई का ये दूसरा बम फूटा है और अब 14 किलोग्राम वाला गैस सिलेंडर 913 रुपये की जगह 942 रुपये का हो गया है। 

    गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी के बाद सरकार का बयान भी आ गया है. एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में नई बढ़ोतरी को जायज ठहराते हुए पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस बढ़ोतरी के पीछे का कारण बताया गया है और दावा किया गया है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद भी भारत में कुकिंग गैस की कीमत पड़ोसी देशों ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम विकसित देशों की तुलना में भी सबसे कम है। 

    7 मार्च के बाद 7 जून को महंगाई का बम
    देश में एलपीजी प्राइस हाइक का बम तीन महीने में दूसरी बार फूटा है. मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते गहराए तेल-गैस संकट के बीच बीते 7 मार्च को 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद 7 जून को एक बार फिर गैस की कीमतों पर महंगाई का बम फोड़ा गया और एलपीजी गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा होकर 942 रुपये का हो गया, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 642 रुपये का है। 

    सिलेंडर महंगा होने पर सरकार ने क्या कहा? 
    अब बताते हैं कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार की ओर से जारी किए गए बयान पर गौर करें, तो इसमें कहा गया है कि न सिर्फ भारत में सिलेंडर किसी भी पड़ोसी देश के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों के मुकाबले काफी सस्ता है। 

    सरकार की ओर से कहा गया कि बीते कई सालों से लगभग सभी भारतीय ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों से बहुत कम कीमत पर मिल रही है, और भारतीय परिवार अभी भी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के परिवारों की तुलना में कम कीमत चुका रहे हैं। 

    इन देशों में भारत से ज्यादा है कीमत
    सरकार की ओर से कुछ देशों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों के आंकड़े भी शेयर किए गए हैं, जिनसे साफ की भारत में तीन महीने में दो बढ़ोतरी के बाद भी एलपीजी सिलेंडर सस्ता मिल रहा है। 

    देश                                 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत (रुपये में)
    भारत                               (उज्ज्वला सब्सिडी वाला)      642 रुपये
    भारत (बिना सब्सिडी)       942 रुपये
    पाकिस्तान                       1046 रुपये
    नेपाल                               1207 रुपये
    बांग्लादेश                           करीब 1225 रुपये
    श्रीलंका                            1241 रुपये
    अमेरिका                        करीब 1755 रुपये
    ऑस्ट्रेलिया                    करीब 1765 रुपये
    कनाडा                        करीब 2411 रुपये

    हर सिलेंडर पर 700 रुपये का घाटा
    सरकार के बयान पर गौर करें, तो एक सिलेंडर की सप्लाई की लागत 1,600 रुपये से ज्यादा हो चुकी है, जिससे हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है. फरवरी और जून 2026 के बीच LPG के लिए सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) बेंचमार्क में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि होर्मुज में रुकावट से खाड़ी देशों से सप्लाई कम हुई और इससे 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की सप्लाई कॉस्ट काफी बढ़ गई. ये बड़ा कारण है कि  और इसके चलते आम ग्राहकों के लिए रिटेल कीमत बदलकर 942 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया है। 

    केंद्र ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी पर होने वाली 'अंडर-रिकवरी' सब्सिडी से अलग है. यह अंतरराष्ट्रीय लागत और उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर होता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ पिछले वर्ष लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि उससे एक वर्ष पहले यह 41,338 करोड़ रुपये था। 

  • फरार TMC नेता जहांगीर खान का आखिर हुआ अरेस्ट, नेपाल सीमा के पास STF ने दबोचा

    फरार TMC नेता जहांगीर खान का आखिर हुआ अरेस्ट, नेपाल सीमा के पास STF ने दबोचा

    कोलकत्ता 
    फालता से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को राज्य पुलिस की STF ने गिरफ्तार किया है। उन्हें आज सुबह नेपाल बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। काफी दिनों से फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

    जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप
    बंगाल के चुनावी नतीजे आने के बाद से जहांगीर फरार था। उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार आज एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ को प्रभावित करने और मृतकों के नाम सूची में जोड़ने का आरोप था।

    जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था। 

    पश्चिम बंगाल पुलिस और एसटीएफ को कई मामलों में जहांगीर खान की तलाश थी. जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं. एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई। 

    लोगों को धमकाने का भी आरोप
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में धमकाने के आरोप भी लगे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था।

    बता दें कि दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से जहांगीर खान टीएमसी के उम्मीदवार थे। चुनाव के वक्त उनपर हिंसा और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था। चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर दोबारा चुनाव हुआ और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। वहीं जहांगीर खान पहले ही हथियार डाल चुके थे। चुनाव में भी वह चौथे नंबर पर खिसक गए। उनपर फलता थाने में धमकी देने, जबरन वसूली, हिंसा, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने समेत सात केस दर्ज हुए थे। वह चुनाव के बाद से ही फरार थे। वहीं एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी थी।

  • कीमतें बढ़ीं फिर भी भारत में सबसे सस्ती रसोई गैस, उज्ज्वला उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    कीमतें बढ़ीं फिर भी भारत में सबसे सस्ती रसोई गैस, उज्ज्वला उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    नई दिल्ली
    14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई है। इससे हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है, जिसे सरकार और पब्लिक सेक्टर की मार्केटिंग कंपनियां उठाती हैं।

    कीमतों में यह बढ़ोतरी इंटरनेशनल बेंचमार्क में हुई तेज वृद्धि के कारण हुई है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की वजह से फरवरी से सऊदी अरामको की एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है।

    होर्मुज में सख्ती के बाद बढ़ी कीमत
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, रुकावट से पहले फरवरी में प्रोपेन-ब्यूटेन के 50:50 मिक्स के लिए ब्लेंडेड सऊदी CP 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था। होर्मुज में मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती के बाद अप्रैल का कॉन्ट्रैक्ट बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया और जून में यह और बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया।

    इसी दौरान प्रोपेन CP में 39 प्रतिशत और ब्यूटेन में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही इम्पोर्ट किए गए मॉलिक्यूल की लैंडेड कॉस्ट भी बढ़ गई, जिससे घरेलू सिलेंडर की इम्पोर्ट-लिंक्ड सप्लाई कॉस्ट 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई।

    दुनिया भर से समसे कम कीमत भारत में
    कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस की कीमतें दुनिया भर में सबसे कम हैं। दिल्ली में आम ग्राहक प्रति सिलिंडर 942 रुपये चुकाते हैं, जो बाजार से जुड़ी कीमत से लगभग 700 रुपये कम है।

    PMUY उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलता है, जिससे उन्हें असल में 642 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यह उज्ज्वला योजना वाले परिवार की सालाना औसत खपत के बराबर है। 942 रुपये की कीमत पर भी वे अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 45% कम भुगतान करते हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 642 रुपये की प्रभावी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 60% कम है।

    एक बार फिर बढ़ीं कीमतें
    वेस्ट एशिया संकट की वजह से लागत बढ़ने के कारण, रविवार से घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय ने बताया कि घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर तक 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी।

    केंद्रीय कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उज्ज्वला ग्राहकों के लिए 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी इस अंडर-रिकवरी के अलावा है और यह 10.58 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन तक पहुंचती है।

    होर्मुज में रुकावट के बावजूद सप्लाई सुरक्षित बनी रही। भारत उन कुछ देशों में से एक था जिन्होंने एनर्जी कार्गो की सप्लाई जारी रखी। इम्पोर्ट में कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG प्रोडक्शन को 60% से ज्यादा बढ़ाकर 52 TMT कर दिया गया।

    सप्लाई के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों को भी शामिल किया गया। साथ ही, सब्सिडी वाली घरेलू LPG की कमर्शियल मार्केट में लीकेज को रोकने के लिए OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन और डायवर्जन-रोधी उपायों को लगभग 90% तक बढ़ाया गया।

    अन्य देशों में गैस सिलिंडर के दाम
    नतीजतन, भारत में सिलेंडर की कीमतें पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं। पाकिस्तान 1,046 रुपये, नेपाल 1,207 रुपये, बांग्लादेश 1,225 रुपये, श्रीलंका 1,241 रुपये, अमेरिका 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया 1,765 रुपये, कनाडा 2,411 रुपये। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सब्सिडी वाले इस संसाधन को बचाने के लिए खाना पकाने के ऐसे तरीकों को अपनाने का आग्रह किया जो ऊर्जा की बचत करते हों।