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  • 50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

    50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

    नई दिल्ली.

    आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था।

    घरेलू एलपीजी के रेट
    भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है।

    बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड
    इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं।
    2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था।
    2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के।
    2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था।
    2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

  • सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    नई दिल्ली

    हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे?

    SJ-100 समझौता: एक नया मोड़

    भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है।
    क्या बोले रूसी अधिकारी?

    खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।
    Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा

    Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे-

    स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है।

    सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता।

    हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं।
    भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम)

    आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:

        इंजन की तकनीक में कमी।
        स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।
        लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे।

    क्या अब पासा पलट रहा है?

    SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-

        नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।
        युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।
        चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है।

    चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत'

    भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है।

    रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है।

    कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

  • सिंगापुर मामले में नया मोड़: आरोपी महिला ने जुबीन को लेकर किया चौंकाने वाला दावा

    सिंगापुर मामले में नया मोड़: आरोपी महिला ने जुबीन को लेकर किया चौंकाने वाला दावा

    गुवाहाटी
    संगीत जगत के दिग्गज जुबीन गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई रहस्यमयी मौत के मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। शुक्रवार को गुवाहाटी सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी संगीतकार अमृतप्रभा महंता और जुबीन के दो व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSOs) की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    सत्र न्यायाधीश ने अमृतप्रभा महंता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के तर्क प्रथम दृष्टया यह दर्शाते हैं कि महंता ने अन्य मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची, जिसने जुबीन गर्ग की मृत्यु की राह आसान कर दी।

    महंता उन चार लोगों में से एक हैं जिन पर पुलिस ने सितंबर 2025 में सिंगापुर में गर्ग की मौत के सिलसिले में हत्या का आरोप लगाया है। गर्ग वहां नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले थे। बाकी तीन लोग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल सिंगापुर के ऑर्गनाइज़र श्यामकानु महंता, गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और एक और साथी म्यूज़िशियन शेखर ज्योति गोस्वामी हैं।

    अपनी बेल याचिका में महंता के वकील ने कहा कि उन्होंने असम और उसके बाहर गर्ग के साथ परफॉर्म किया था और उनके कहने पर वह सिंगापुर में फेस्टिवल के लिए उनके साथ गई थीं। वह 29 साल की महंता के लिए पिता जैसे थे। इसमें कहा गया है कि पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि उन्हें गर्ग के साथ वही कमरा दिया गया है और वह विदेश में कमरे के इस अलॉटमेंट पर कोई आपत्ति नहीं कर सकती थीं और क्योंकि उन्हें अपने पिता जैसे व्यक्ति के साथ उसी कमरे में रहने के लिए कहा गया था, इसलिए वह उसी कमरे में रहीं। उन्हें पिछले दिन तक यॉट राइड के बारे में पता नहीं था।
    क्या हैं आरोप?

    असम पुलिस की चार्जशीट में अमृतप्रभा महंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सिंगापुर के होटल रूम में जुबीन को अत्यधिक शराब पीने के लिए उकसाया। उन्होंने जुबीन के स्वास्थ्य और नींद की कमी के बारे में उनके मैनेजर या पत्नी को सूचित नहीं किया। उन्होंने जुबीन को उस गंभीर नशे की हालत में बिना लाइफ जैकेट के समुद्र में तैरने के लिए प्रोत्साहित किया।

    दूसरी ओर, जुबीन के दो पीएसओ नंदेश्वर बोराह और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात (पैसे के दुरुपयोग) का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने उस पैसे का गबन किया जो जुबीन का था, जो कि समाज पर बुरा असर डालने वाला एक गंभीर अपराध है।
    सिंगापुर और भारत के बीच कानूनी पेच

    जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजरस द्वीप पर एक यॉट यात्रा के दौरान हुई थी। सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में जांच के दौरान पुलिस ने बताया कि जुबीन अत्यधिक नशे में थे और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। वहां की पुलिस इसे एक दुर्घटना (डूबने से मौत) के रूप में देख रही है। वहीं, भारत में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इसे हत्या और साजिश का मामला मानते हुए 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
    जुबीन की पत्नी की अपील

    जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले के लिए एक विशेष अदालत और त्वरित सुनवाई की मांग की है। गरिमा का कहना है कि जब तक मुकदमा पूरा नहीं हो जाता, किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी 2026 की तारीख तय की है।

  • भारतीय DRDO तैयार कर रहा ऐसा सिस्टम, S-400 पुरानी बात, जेट जैसे JF-17, J-10 होंगे बेअसर

    भारतीय DRDO तैयार कर रहा ऐसा सिस्टम, S-400 पुरानी बात, जेट जैसे JF-17, J-10 होंगे बेअसर

    बेंगलुरु 

    भारत डिफेंस सेक्‍टर में खुद को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. मिसाइल, तोप-टैंक, फाइटर जेट, एंटी मिसाइल सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम भी डेवलप किया जा रहा है. 21वीं सदी में टेक्‍नोलॉजी ने बड़ी छलांग लगाई है. रक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. तकनीक ने युद्ध और सशस्‍त्र संघर्ष के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है. अब ड्रोन वॉरफेयर का समय आ गया है. इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है. सामरिक तौर पर भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. हमारी देश की सीमाएं एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती हैं. इस्‍लामाबाद और बीजिंग की नीतियों से हर कोई वाकिफ है, ऐसे में भारत के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन-पाकिस्‍तान की युगलबंदी देखने को मिली थी.

    चीनी फाइटर जेट और मिसाइल के साथ ही तुर्की निर्मित ड्रोन का इस्‍तेमाल भारत पर अटैक करने में किया गया था. इन सब सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके पूरी तरह से अस्तित्‍व में आने के बाद देश के हर हिस्‍से को किसी भी एरियल थ्रेट से सुरक्षित रखा जा सकेगा. मिशन सुदर्शन चक्र के तहत प्रोजेक्‍ट कुश (Project Kusha) पर काम चल रहा है. बताया जा रहा है कि प्रोजेक्‍ट कुश इस तक पावरफुल होगा कि कई मायनों में रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम भी इसके सामने बौना पड़ जाएगा.

    भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत चल रहा प्रोजेक्ट कुश देश के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल बनकर उभर रहा है. आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकथि राजू ने इस कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली विकसित करना है, जिसकी क्षमता रूस के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी बेहतर होगी. प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है. ये तीनों मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और हाई-वैल्यू एयरबोर्न एसेट्स जैसे खतरों से देश की सुरक्षा करने में सक्षम होगी. यह प्रणाली भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

     

    इतना खास क्‍यों है प्रोजेक्‍ट कुश?
    डिफेंस प्रोग्राम की पहली कड़ी M1 इंटरसेप्टर मिसाइल होगी, जिसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तय की गई है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोट के अनुसार, यह रेंज मौजूदा कई मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों से अधिक है. उदाहरण के तौर पर S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम में इस्‍तेमाल की जाने वाली 9M96E2 मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 120 किलोमीटर मानी जाती है. ऐसे में M1 न केवल दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी, बल्कि हाई-प्रिसिजन और इंस्‍टेंट रिएक्‍शन समय के साथ हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. दूसरी मिसाइल M2 को 250 किलोमीटर की रेंज के साथ विकसित किया जा रहा है. यह क्षमता इसे S-400 प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली 48N6DM और 48N6E3 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की श्रेणी में खड़ा करती है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, M2 प्रोजेक्ट कुश की रीढ़ साबित होगी, क्योंकि यह हाई-स्‍पीड और हाई-अल्‍टीट्यूड पर उड़ रहे टार्गेट को भी प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम होगी. इससे इंडियन एयर डिफेंस नेटवर्क की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों में बड़ा इजाफा होगा.

    सबसे महत्वाकांक्षी घटक M3 इंटरसेप्टर है, जिसकी वर्तमान रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि, पहले सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके दायरे को 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर भी काम चल रहा है. यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह मिसाइल रूस की S-400 प्रणाली में इस्‍तेमाल 40N6E मिसाइल के बराबर पहुंच प्रदान करेगी. इतनी लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता भारत को दुश्मन के हवाई क्षेत्र के भीतर गहराई तक निगरानी और प्रतिरोध का अवसर देगी, जिससे सामरिक बढ़त और डेटरेंस पावर दोनों में इजाफा होगा. DRDO अधिकारियों के अनुसार, M3 इंटरसेप्टर का पहला परीक्षण 2028 तक किए जाने की संभावना है. इस अवधि में इसके प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस तकनीक और रडार इंटीग्रेशन को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि यह मिसाइल अपने तय प्रदर्शन मानकों को पूरा कर सके या उनसे आगे निकल सके. विशेषज्ञों का मानना है कि जब M3 का पहला परीक्षण होगा, तब तक इसकी क्षमताएं लगभग 400 किलोमीटर की रेंज के आसपास पहुंच सकती हैं.

    चीन-पाकिस्‍तान का हमला होगा बेकार

    प्रोजेक्ट कुश केवल तकनीकी उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करता है. अब तक भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा के लिए काफी हद तक इंपोर्टेड सिस्‍टम्‍स पर निर्भर रहना पड़ा है. प्रोजेक्‍ट कुश के सफल होने से न केवल विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई तकनीक, रोजगार और निर्यात के अवसर मिलेंगे. रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह परियोजना भारत के मल्‍टी-लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को और सशक्त बनाएगी. M1, M2 और M3 की संयुक्त तैनाती से देश को मध्यम, लंबी और लंबी दूरी तक व्यापक सुरक्षा कवच मिलेगा. इससे सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी संभावित हवाई खतरे के खिलाफ त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रोजेक्ट कुश भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमताओं और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है. यदि यह कार्यक्रम तय समयसीमा और लक्ष्यों के अनुरूप सफल होता है, तो भारत न केवल अपनी जरूरतों को स्वदेशी तकनीक से पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है. प्रोजेक्‍ट कुश के तहत डेवलप इंटरसेप्‍टर मिसाइल्‍स चीन और पाकिस्‍तान के हर हमले को नाकाम करने में सक्षम होंगी.