Category: देश

  • देश के विदेशी मुद्रा भंडार को झटका, गोल्ड रिजर्व में भारी गिरावट; जानें कितनी आई कमी

    देश के विदेशी मुद्रा भंडार को झटका, गोल्ड रिजर्व में भारी गिरावट; जानें कितनी आई कमी

     नई दिल्‍ली

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्‍ड रिजर्व में भारी कटौती हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए आंकडों के अनुसार, 26 जून 2026 को समाप्‍त सप्‍ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर रह गया, जबकि इससे पहले के सप्‍ताह के फॉरेन एक्‍सचेंज 963 मिलियन डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। 

    आरबीआई ने बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े हिस्‍से फॉरेन करेंसी असेट्स में 150 मिलियन डॉलर की गिरावट आई है और यह 541.067 अरब डॉलर पर आ चुका है. विदेशी मुद्रा असेट में यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन अमेरिकी करेंसी की वैल्‍यू में उतार-चढ़ाव का भी असर विदेशी मुद्रा भंडार में हुआ है। 

    गोल्‍ड रिजर्व में भारी गिरावट
    इसके अलावा, एक सप्‍ताह में गोल्‍ड रिजर्व में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोने के भंडार 5.394 अरब डॉलर घटकर 102.536 अरब डॉलर पर आ गया. वहीं स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) की वैल्‍यू 89 मिलियन डॉलर घट गई और 18.558 अरब डॉलर रह गई. इतना ही नहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 21 मिलियन डॉलर घटकर 4.7772 अरब डॉलर रह गई है। 

    फरवरी में रिकॉर्ड हाई पर था विदेशी रिजर्व 
    गौर करने वाली बात है कि 27 फरवरी 2026 की सप्‍ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर था. हालांकि, इसके बाद वेस्‍ट एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष के कारण रुपये में लगाता दबाव बना रहा है, जिसके बाद रुपये की गिरावट को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई ने कई उपाय किए, उसमें डॉलर की बिक्री भी शामिल थी. जिस कारण विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली है।  

    क्‍यों आई गोल्‍ड रिजर्व में कटौती? 
    इसके अलावा, पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में संकट को कम करने के लिए 11 मई को लोगों से अपील की कि वे विदेशी यात्राएं कम करें. पेट्रोल और डीजल वाहनों का उपयोग कम करें और सोने की खरीद भी बंद करें, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा विदेशी खर्च को कम किया जा सके और आयात लागत को घटाया जा सके. इसके बाद सोने के आयात शुल्‍क में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई, जिस कारण सोने का आयात घट गया और गोल्‍ड के रिजर्व में कटौती देखी गई है। 

  • भारत ने रोका सिंधु का पानी तो चीन क्यों बना पाकिस्तान की उम्मीद? Indus Water Treaty पर समझिए पूरा मामला

    भारत ने रोका सिंधु का पानी तो चीन क्यों बना पाकिस्तान की उम्मीद? Indus Water Treaty पर समझिए पूरा मामला

    नई दिल्ली

     पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है। 

    दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा?

    पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है?
    सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है। 

    पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है?
    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है। 

    चीन का नाम क्यों लिया?
    अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने। 

    पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद
    यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है। 

    चीन क्यों नहीं देगा दखल
    भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है। 

    पाकिस्तान को किस बात का डर?
    पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता। 

    सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है?
    सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह चुका है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार सिंधु जल संधि की समीक्षा करने का अधिकार रखता है। 

  • Himachal Weather: मॉनसून बना आफत, 9 लोगों की जान गई, 49 सड़कें बंद; कई इलाकों में भूस्खलन

    Himachal Weather: मॉनसून बना आफत, 9 लोगों की जान गई, 49 सड़कें बंद; कई इलाकों में भूस्खलन

     शिमला

    हिमाचल प्रदेश में मॉनसून जहां राहत लेकर आया है तो वहीं भारी बारिश और भूस्खलन से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित है. कई सड़कें बंद हो गई हैं. प्रदेश में अब तक मॉनसून से जुड़े अलग-अलग हादसों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों के लिए बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। 

    हिमाचल प्रदेश में 30 जून को मॉनसून ने दस्तक थी. हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण की ओर से जारी एक रिपोर्ट में 30 जून से 2 जून तक कुल 11 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है. जिनमें मॉनसून संबंधित घटनाओं में 9 लोगों की जान गई है, जबकि 2 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। 

    मॉनसून में हिमाचल के किन जिलों में हुई मौतें?
    आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चंबा में 1, कुल्लू में 1, कांगड़ा में 3, जिला मंडी में 1 और शिमला में 2 लोगों की जान गई है. वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में जिला कांगड़ा और लाहौल स्पीति में 1-1 व्यक्ति की जान गई है. इसके साथ ही 30 जून से अब तक मॉनसून में 12 लोग घायल हुए हैं. हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की शुरुआत से अब तक 69.65 लाख का नुकसान हुआ है। 

    हिमाचल में 46 सड़कें बंद, ऑरेंज अलर्ट जारी
    हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भारी बारिश के कारण राज्य भर में 46 सड़कें वाहनों के लिए बंद हो गई हैं. मौसम विभाग ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। 

    शिमला मौसम केंद्र ने 5 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. हालांकि, 3 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, सबसे ज्यादा कुल्लू जिले में 18 सड़कें बंद हैं. मंडी में 15, सिरमौर में 9, लाहौल-स्पीति और ऊना में 2-2 सड़कें बंद हैं। 

    इसके अलावा बारिश से बिजली और पानी की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है. पूरे राज्य में 181 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हो गए हैं और 6 पानी की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 

    सबसे ज्यादा बारिश कहां हुई?
    पोंटा साहिब में सबसे ज्यादा 100.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इसके बाद कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टों बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पचहड़ में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी बारिश हुई है। 

  • हैदराबाद: होटल के कमरे में 26 वर्षीय युवती की संदिग्ध मौत, साथी फारूक के बयान के बाद जांच तेज

    हैदराबाद: होटल के कमरे में 26 वर्षीय युवती की संदिग्ध मौत, साथी फारूक के बयान के बाद जांच तेज

     हैदराबाद

    हैदराबाद के लंगर हौज थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में 26 साल की युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार, युवती एक परिचित युवक के साथ होटल में ठहरी थी. कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो गई, जिसे लेकर अब हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है। 

    मृतका की पहचान अलवाल निवासी 26 साल की रेनुका के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, रेनुका की पहचान गोलकोंडा निवासी 34 साल के फारूक से थी. दोनों रात लंगर हौज इलाके में स्थित होटल ग्रैंड लॉज पहुंचे और एक कमरा लिया. इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। 

    फारूक ने पुलिस को बताया कि वह कुछ देर के लिए होटल से बाहर गया था. लौटने पर उसने कमरे के अंदर रेनुका को फंदे से लटका हुआ देखा. उसने तत्काल होटल प्रबंधन और पुलिस को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का निरीक्षण किया।

    हालांकि, रेनुका के परिजनों ने फारूक के इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है. परिजनों ने फारूक की भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। 

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. साथ ही होटल के कमरे से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है. फारूक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है ताकि घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट हो सकें। 

    जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवती की मौत आत्महत्या थी या उसके साथ कोई आपराधिक घटना हुई. पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

     

  • Partition Remark: मोहन भागवत ने कहा- सोच-समझकर भारत आए थे लोग, उन्हें शरणार्थी नहीं योद्धा कहें

    Partition Remark: मोहन भागवत ने कहा- सोच-समझकर भारत आए थे लोग, उन्हें शरणार्थी नहीं योद्धा कहें

    नागपुर

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना। 

    भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें। 

    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे।

    'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति'
    मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं।

    जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

    भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो।

    उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय। 

    भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना। 

    RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं। 

    वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

  • अमरनाथ यात्रा 2026 का पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

    अमरनाथ यात्रा 2026 का पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

     जम्मू
     जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा।

    अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

    ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’

    पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। 

    जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
    यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। 

    कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला
    यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया। 

    ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी
    इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं। 

    हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़
    प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं। 

    उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की।

    जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।

    अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है।

    इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।

    भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाएंगे।

  • Mumbai Weather Today: भारी बारिश से मुंबई बेहाल, अंधेरी सबवे बंद, ठाणे समेत इन इलाकों में IMD का अलर्ट

    Mumbai Weather Today: भारी बारिश से मुंबई बेहाल, अंधेरी सबवे बंद, ठाणे समेत इन इलाकों में IMD का अलर्ट

    मुंबई 

    मुंबई में मॉनसून पूरी तरह एक्टिव है. पिछले कई दिनों से लगातार मुंबई में दिन की शुरुआत बारिश के साथ हो रही है. बारिश से हुए जलभराव के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ी है. हालांकि, लोकल ट्रेन सामान्य रूप से चल रही हैं. भारत मौसम विभाग (IMD) ने अंधेरी, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और मुंबई के कई हिस्सों में बारिश को लेकर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 

    मुंबई में जारी बारिश की वजह से कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है. सड़कें तालाब बन गई हैं और कई इलाकों में जलभराव की वजह से ट्रैफिक ठप है. वहीं, कुछ जगहों पर बारिश की वजह से सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार सुस्त है। 

    लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे, मालाड, जोगेश्वरी, कुरला, मुलुंड और कांजुरमार्ग जैसे इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने जलभराव वाले इलाकों से बचने की सलाह दी है। 

    वहीं, अंधेरी सबवे (अंडरपास) में फिर इतना पानी भर गया है कि आज सुबह 8 बजे के करीब उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं लेकिन मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में इतना जलजमाव होता है कि इसे बंद करना पड़ता है। 

    मौसम विभाग ने बुधवार, 1 जुलाई को भी मुंबई समेत महाराष्ट्र के अधिकतर इलाकों में मध्यम से बारिश की अनुमान जताया है. आसमान में बादल छाए हैं और कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो रही है. IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मौसम की यही स्थिति बनी रह सकती है। 

    1 जुलाई के लिए मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 
     

    बता दें कि मुंबई में इस बार मॉनसून सामान्य तारीख से 13 दिन देर से आया, लेकिन अब पूरी तरह एक्टिव है. शहर के जलाशयों में पानी की भरपाई हो रही है, जो अच्छी खबर है लेकिन भारी बारिश से आम जनजीवन प्रभावित है. मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 5 से 6 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। 

  • Petrol Diesel Price Today: 2 साल बाद घटे पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता

    Petrol Diesel Price Today: 2 साल बाद घटे पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता

    नई दिल्ली

    प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देश के आम नागरिकों को राहत देते हुए रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. नई दरें बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं।  अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए पर आ गया है। नायरा के देशभर में 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं।

    इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कम की गईं कीमतें पूरे देश में नयारा (Nayara) के 7000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों  पर लागू होगी.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और दूसरे लोकल टैक्स में अंतर के कारण पंप की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर दिख सकता है। 

    आज प्राइवेट रिटेलर ने भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. ये तीनों कंपनियां मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों को संभालती हैं। 

    प्रमुख शहरों में अनुमानित कीमतें
    शहर            पेट्रोल की अनुमानित कीमत     डीजल की अनुमानित कीमत     सरकारी तेल कंपनियों के रेट
    दिल्ली            97.12 रुपये                                          92.20 रुपये            102.12 और 95.20 रुपये
    नोएडा            96.96 रुपये                                          87.03 रुपये           101.96 और 90.03 रुपये
    मुंबई              106.21 रुपये                                       91.50 रुपये            111.21 और 94.50 रुपये

    7000 पेट्रोल पंपों पर सस्ता पेट्रोल-डीजल
    Nayara Energy रूस की रोसनेफ्ट समर्थित फ्यूल कंपनी है. इसने हाल ही  भारत में अपने पेट्रोल पंप की संख्या 7,000 के पार पहुंचाई है और इसके साथ ही ये प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेल सेलर के रूप में उभरी है. तेल की कीमतों पर बीते कुछ समय में महंगाई की मार से इस कंपनी ने अब अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल प्राइस में 5 रुपये और डीजल प्राइस में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का तोहफा दिया है। 

    इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नायरा के 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं. यहां ध्यान रहे कि विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर Petrol-Diesel Price अलग-अलग हो सकती हैं, जो लोकल टैक्स जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) पर निर्भर करती हैं। 

    सरकारी तेल कंपनियों की कीमतें स्थिर
    एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करते हुए लोगों को राहत दी है, तो वहीं सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने अपनी कीमतों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL),  जो मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल-पंपों में से 90 फीसदी से ज्यादा का संचालन करती हैं, इनपर फ्यूल प्राइस यथावत बने हुए हैं. राजधानी दिल्ली में, IOC आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। 

    जितनी बढ़ोतरी, उतनी ही की कटौती
    गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran War) से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस में तेज उछाल देखने को मिला था. इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करने के मामले में पहली फ्यूल रिटेलर्स में नायरा एनर्जी भी शामिल थी. बीते 26 मार्च को कंपनी ने अपने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब इतनी ही कटौती भी की है। 

    नायरा के बाद करीब चार साल तक स्थिर रखने के बाद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम फोड़ते हुए देशवासियों को झटका दिया था. इंडियन ऑयल से बीपी, एचपी तक ने मई महीने में एक के बाद एक कई बार Petrol-Diesel Price में बढ़ोतरी की थी और इनकी कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके पीछे कंपनियों ने मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से बढ़ती लागत का हवाला दिया था। 

    युद्ध थमने, क्रूड सस्ता होने का असर
    नायारा एनर्जी गुजरात के वाडिनार में हर साल 20 मिलियन टन क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद की गई है. समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है। 

     

     

  • हाईकोर्ट ने नहीं दी तत्काल राहत, TMC के बैंक अकाउंट फ्रीज मामले में ममता बनर्जी को झटका

    हाईकोर्ट ने नहीं दी तत्काल राहत, TMC के बैंक अकाउंट फ्रीज मामले में ममता बनर्जी को झटका

    कलकत्ता

    कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर अर्जेंट सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य कर रहे हैं. उन्होंने ममता गुट की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी, यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार सुनवाई की जाएगी। ममता गुट के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट को बताया कि टीएमसी के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट और लेन-देन नहीं हो पा रहा है. वकील ने कहा कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी रकम फंसी हुई है. उन्होंने इस संकट को देखते हुए कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की, लेकिन अदालत ने उनकी ये मांग मानने से साफ इनकार कर दिया।

    बैंक खातों में 440 करोड़ जमा
    तृणमूल कांग्रेस के जिन तीन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कुछ विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।विधायकों ने अपनी शिकायत में बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए सभी लेन-देन की जांच कराने की मांग की।

    उन्होंने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का आग्रह किया कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, जैसे 'कट मनी' की वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों से अर्जित रकम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि फलता के चुनाव के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें लोगों को कटमनी वापस की गई थी। दरअसल सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए वसूला गया धन कट मनी कहा जाता है। आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार में धड़ल्ले से लोगों से कटमनी वसूली जाती थी।

    तय समय से होगी सुनवाई
    सोमवार को मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग किये जाने पर अदालत ने बैंक, पुलिस और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फिर से त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. न्यायमूर्ति ने दोहराया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी. इस मामले में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि त्वरित सुनवाई संभव नहीं है, तो कम से कम गुरुवार को पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया जाये। 

    बागी विधायकों की शिकायत पर हुई कार्रवाई
    टीएमसी के इन बैंक खातों पर ये कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है. इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। 

    इन बागी विधायकों ने खातों में जमा करोड़ों रुपयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पैसे के सोर्स की जांच की जाए. वे पता लगाना चाहते हैं कि ये पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत काम से आया है. उन्हें शक है कि ये पैसा कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी और किसी बड़े घोटाले का हो सकता है। 

  • 100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून, एल-नीनो के असर से मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी

    100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून, एल-नीनो के असर से मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी

    नई दिल्ली
     प्रशांत महासागर में सक्रिय एल-नीनो का असर भारत में इस साल साफ-साफ देखने को मिल रहा है। साल 1927 से 2026 तक यह तीसरा ऐसा मौका है, जब जून का महीना सबेस सूखा साबित होने जा रहा है। महीने के अंत होने में कुछ घंटे शेष है और देश भर में 42% बारिश की कमी देखने को मिल रही है।

    दरअसल, जून में अब तक देश भर में औसतन केवल 92.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए था। अगर आज यानी मंगलवार को जून महीने के आखिरी दिन अच्छी बारिश होती है तो कुल मिलाकर लगभग 100 मिमी बारिश होने की संभावना है।

    पिछले 100 सालों में कब-कब सूखा रहा जून का महीना?
    जून का महीना पिछले 100 सालों में तीन बार सूखा रहा है। मौसम इतिहास में जून महीने में इससे कम बारिश पिछले 100 सालों में सिर्फ 2009 (87.5 मिमी) और 2014 (92.1 मिमी) दर्ज की गई थी। यह दोनों साल 20 वर्षों के भीतर के ही हैं।

    राहत की बात यह है कि जून में जहां देश के अधिकांश हिस्सों, विशेष रूप से मध्य भारत में जहां अब तक मानसून की सबसे अधिक कमी रही है, वहां अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। IMD के अनुसार, जुलाई के पहले हफ्ते से मध्य भारत सहित देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून रफ्तार पकड़ेगा और अच्छी बारिश होगी।

    बारिश की भारी कमी
    बता दें कि जून के महीने में मध्य भारत में अब तक भारी वर्षा हुई है, लेकिन यह 54% तक कम है। इसके बाद पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में 41%, उत्तर-पश्चिमी भारत में 30% और दक्षिणी भारत में 28% की कमी देखी गई है। देश के चारों तरफ इतनी भारी मात्रा में बारिश की कमी शायद इस बात का संकेत है कि एल-नीनो का प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ना शुरू हो गया है।

    क्या अल नीनो लाएगा सूखा, महंगाई और पानी का संकट?

     जून में  देश में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 16 राज्यों में मानसून की रफ्तार थम गई है। 

    सवाल है कि क्या इस साल मानसून कमजोर पड़ रहा है? क्या अल नीनो इसकी वजह है? अगर बारिश कम हुई तो क्या होगा, क्या महंगाई बढ़ेगी? क्या फसलें प्रभावित होंगी और आखिर वैज्ञानिक क्यों कह रहे हैं कि आने वाले महीने बेहद अहम हैं?

    आखिर मानसून क्यों थम गया? 

    इस समय मानसून तेलंगाना के भद्राचलम इलाके के आसपास अटका हुआ है. मानसूनी हवाएं आगे बढ़ने की बजाय कमजोर पड़ गई हैं. 15 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल गायब दिखाई दिए. IMD के मुताबिक 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई केवल 19.2 मिलीमीटर यानी बारिश में 64 प्रतिशत की कमी. इसी वजह से मौसम वैज्ञानिक लगातार एक शब्द दोहरा रहे हैं- अल नीनो। 

    क्या है अल नीनो?
    भारत में बारिश कम हो रही है, लेकिन इसकी कहानी हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर से शुरू होती है. सामान्य परिस्थितियों में, पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली ट्रेड विंड्स गर्म समुद्री पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं. यही गर्म पानी बादलों को जन्म देता है और यही सिस्टम भारतीय मानसून को ऊर्जा देता है, लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं तो समुद्र का संतुलन बिगड़ जाता है और गर्म पानी वापस मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर फैलने लगता है. समुद्र का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसी स्थिति को वैज्ञानिक अल नीनो कहते हैं। 

    अल नीनो सिर्फ समुद्र का तापमान नहीं बढ़ाता. ये पूरी पृथ्वी के मौसम तंत्र को प्रभावित करता है. समुद्र गर्म होता है, उसके ऊपर की हवा गर्म होती है. बादलों का पैटर्न बदलता है. हवाओं की दिशा बदलती है और मानसून कमजोर पड़ सकता है. IMD के मुताबिक, अल नीनो के वर्षों में भारत में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बढ़ जाती है। 

    एल-नीनो का प्रभाव
    अमेरिकी एजेंसी इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी के अनुसार, प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गर्मी से एल-नीनो मध्यम तीव्रता के करीब पहुंच चुका है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की आशंका है।

    एल-नीनो प्रशांत महासागर के पानी का गर्म कर देते है, जिसे वैश्विक मौसम प्रभावित होता है। यह हवाओं का रुख बदलकर भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी के कारण 4 जून को केरलम पहुंचे मानसून की रफ्तार अभी तक सुस्त है और जून में देश की दैनिक वर्षा महज एक ही दिन सामान्य से अधिक रही है।