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  • SIR में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मिलने के बाद एक्शन, बंगाल में पांच साल के सभी सर्टिफिकेट खंगाले जाएंगे

    SIR में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मिलने के बाद एक्शन, बंगाल में पांच साल के सभी सर्टिफिकेट खंगाले जाएंगे

    कोलकाता
    तृणमूल कांग्रेस के शासन के अंतिम पांच वर्षों के दौरान जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आएंगे। बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जनवरी, 2021 से दिसंबर, 2025 तक आफलाइन अथवा ऑनलाइन माध्यम से जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच करने का निर्देश जारी किया है।

    राज्य सचिवालय की ओर से कहा गया कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फर्जी जन्म प्रमाणपत्र सामने आए हैं। इसी के मद्देनजर सरकार ने पिछले पांच वर्षों में जारी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कराने का निर्णय लिया है।

    इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
    ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाणपत्रों की जांच की जिम्मेदारी बीडीओ की होगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में एसडीओ इसकी जांच करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर दोनों अधिकारी जांच टीम भी गठित कर सकते हैं। विलंब से किए गए जन्म पंजीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    प्रमाणपत्र जारी करने के दौरान किन दस्तावेजों की जांच की गई थी और निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी विस्तार से पड़ताल की जाएगी। किन-किन दस्तावेजों की जांच की गई और उसका परिणाम क्या रहा, इसकी जानकारी ‘जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल’ पर अपलोड करनी होगी। प्रत्येक जन्म प्रमाणपत्र के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। ॉ

    यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित प्रमाणपत्र असली, फर्जी या त्रुटिपूर्ण है। इसकी भी जांच की जाएगी कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास ऐसा करने का अधिकार था या नहीं। यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी या गैरकानूनी पाया जाता है, तो उसके पीछे के कारण को भी रिपोर्ट में दर्ज करना होगा। सरकार ने सितंबर के भीतर जांच प्रक्रिया पूरा करने का निर्देश दिया है।

    डिप्टी मजिस्ट्रेट या डिप्टी कलेक्टर के पद से नीचे के किसी अधिकारी को जांच टीम में शामिल नहीं किया जा सकेगा। इससे पहले राज्य सरकार ने कहा था कि अब नगरपालिकाओं के अध्यक्ष और पंचायत प्रधान अपने स्तर पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकेंगे। यह अधिकार केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों के पास रहेगा।

  • डिग्री के बाद भी रोजगार का संकट, 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में; नीति आयोग ने सुझाया समाधान

    डिग्री के बाद भी रोजगार का संकट, 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में; नीति आयोग ने सुझाया समाधान

    नई दिल्ली
    नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक खुलासे किए हैं। भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न कोई नौकरी कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार का ट्रेनिंग ले रहे हैं। ऐसे युवाओं को NEET (Not in Education, Employment, and Training) श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट में आयोग ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय मांग के अनुसार ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमान वर्ष 2021 में आयोजित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

    कौशल विकास योजनाओं का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए नीति आयोग ने भारत के कार्यबल और शिक्षार्थियों को 5 प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक और अनौपचारिक कार्य, NEET श्रेणी के युवा, महिलाएं और कमाई के साथ पढ़ाई करने वाले लोग। रिपोर्ट में कहा गया है कि NEET श्रेणी के युवा आय की कमी और पिछली शिक्षा पर हुए खर्च के वित्तीय बोझ से दबे होते हैं। ऐसे में छात्र अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति के बीच भारी शुल्क वाले स्किल ट्रेनिंग कोर्स का खर्च नहीं उठा सकते।

    नीति आयोग के अनुसार, कमजोर वित्तीय स्थिति वाले NEET युवाओं और महिलाओं को किफायती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ-साथ वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। रिपोर्ट में इस बात जोर दिया गया है कि सभी श्रेणियों के लिए सीखने के साथ कमाने का अवसर देना सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

    डिग्री के बाद भी रोजगार का संकट
    रिपोर्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि भारत में केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं। आयोग ने कहा है कि कम आय वाले परिवारों के छात्र पहले से ही कॉलेज फीस और ट्यूशन के खर्चों से परेशान रहते हैं। पारंपरिक डिग्री के साथ अलग से पैसे देकर स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग में निवेश करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता है। इसकी वजह से कई ग्रैजुएट युवाओं को पढ़ाई के बाद परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए कम वेतन वाली ही नौकरी क्यों नहीं मिलती है वह उसे स्वीकार कर लेते हैं। यहां ऐसे युवाओं की संख्या भी काफी है जो काम हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं और अंततः NEET श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।

    विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
    नीति आयोग ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के नागरिकों को निरंतर सीखने, कमाने और आगे बढ़ने के योग्य बनाना आवश्यक है। इसमें कौशल विकास की भूमिका प्रमुख है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

  • गुजरात से जम्मू-कश्मीर तक बदली नागरिकता प्रक्रिया, DM को मिला बड़ा अधिकार

    गुजरात से जम्मू-कश्मीर तक बदली नागरिकता प्रक्रिया, DM को मिला बड़ा अधिकार

    नई दिल्ली
    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को गुजरात, राजस्थान, पंजाब, बंगाल, असम व त्रिपुरा (आदिवासी इलाकों को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में जिलाधिकारियों (डीएम) को भारत के बाहर जन्मे उन पात्र एवं उपयुक्त आवेदकों को नागरिकता देने का अधिकार दिया, जो आम तौर पर इन क्षेत्रों में रह रहे हैं।

    सरकार ने बुधवार को नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की, जिसमें उक्त इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारियों को पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के जरिये नागरिकता चाहने वाले आवेदनों पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।

    अधिसूचित नियमों में कहा गया है, "जिलाधिकारी, आवेदक की उपयुक्तता से संतुष्ट होने यानी यह तय करने पर कि वह पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के लिए एक पात्र व उपयुक्त व्यक्ति है, उसे भारत की नागरिकता प्रदान करेगा।"

    इन राज्यों में जिलाधिकारी उन अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों की जगह लेंगे, जिनके पास पहले ये अधिकार थे।

    सरकार ने निर्देश दिया है कि निर्दिष्ट क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास वर्तमान में लंबित सभी आवेदनों को तुरंत संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए। नए नियमों में आवेदकों के लिए खुद पेश होने की सख्त शर्तें रखी गई हैं।

    नियमों में कहा गया है, "अगर कोई आवेदक उचित मौके दिए जाने के बावजूद आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद पेश नहीं होता है, तो कलेक्टर आवेदन को खारिज कर देगा।"

    सरकार ने पिछले आदेशों को भी रद कर दिया है, सिवाय उन कामों के जो रद्दीकरण आदेश से पहले किए गए थे या नहीं किए गए थे।

     

  • बांग्लादेश के ‘मुस्लिम NATO’ वाले कदम से बढ़ी हलचल, तारिक रहमान की भारत यात्रा पर भी असमंजस

    बांग्लादेश के ‘मुस्लिम NATO’ वाले कदम से बढ़ी हलचल, तारिक रहमान की भारत यात्रा पर भी असमंजस

    नई दिल्ली
    पश्चिम एशिया में हो रही हर गतिविधि पर भारत की पैनी नजर है। विदेश मंत्रालय ने यह बयान देकर बांग्लादेश को एक तरह से आगाह करने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा पर कभी हां और कभी ना हो रही है।

    'पश्चिम एशिया की गतिविधियों पर भारत की नजर'
    भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ किया है कि पश्चिम एशिया में इस समय जो भी जियोपॉलिटिक्स चल रही है, वह उसकी नजरों से दूर नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जो कुछ कहा है, वह बांग्लादेश के लिए कड़ा संदेश माना जा सकता है।

    पश्चिम एशिया में हर गतिविधियों पर हम लगातार नजदीकी निगाहें बनाए हुए हैं। इस समय मुझे सिर्फ इतना ही कहना है।

    बांग्लादेश के मुस्लिम नाटो में शामिल होने का सवाल
    दरअसल, शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में रणधीर जायसवाल से यह सवाल पूछा गया था कि बांग्लादेश कह रहा है कि वह सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के मक्का समझौते (मुस्लिम नाटो) में शामिल होने पर विचार करने के लिए तैयार है।

    बांग्लादेश के पीएम की भारत यात्रा पर संदेह बरकरार
    विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान इस घटना के थोड़े ही देर बाद आया, जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा से संबंधित राष्ट्रपति भवन को अपना पहला बयान वापस लेकर दूसरा बयान जारी करना पड़ा। पहले बयान में उनके आने का स्पष्ट संकेत दिया गया था, लेकिन दूसरे बयान में यह बात वापस ले ली गई। आमतौर पर राष्ट्रपति भवन के लिए यह बहुत ही असामान्य घटना है।

    तारिक रहमान की भारत यात्रा पर अपडेट नहीं
    जब, रणधीर जायसवाल से यह प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'जहां तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से जुड़ा सवाल है, मुझे इस मसले पर कुछ नहीं कहना है। अगर मुझे कोई अपडेट मिलेगा तो मैं उसे आपके साथ साझा करूंगा।'

    मुस्लिम नाटो का हिस्सा बनने का मंसूबा देख रहा बांग्लादेश

    • दरअसल, एक दिन पहले ही बांग्लादेश में इसके विदेश मामलों के सलाहकर हुमायूं कबीर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका देश मक्का समझौते का हिस्सा बनने की सोच सकता है।
    • सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच मक्का समझौता, जिसे मुस्लिम नाटो या सुन्नी नाटो भी बताया जा रहा है, उसका मूल प्रावधान ये है कि ये तीनों देश किसी एक पर भी होने वाले सशस्त्र हमले को सब पर हुआ हमला मानेंगे।
    • दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार है। लेकिन, जिस तरह से वहां दो साल पहले कट्टरपंथी ताकतों ने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को ताकत के दम पर उखाड़ फेंका, उसके बाद मौजूदा पीएम तारिक रहमान की विदेश नीति ढुलमुल हो चुकी है।
    • बांग्लादेश की कूटनीति की ढुलमुल नीति का सबसे बड़ा उदाहरण उसके पीएम की भारत यात्रा को लेकर हो रहा संकोच है।
  • चीन से बातचीत जरूरी, लेकिन सैन्य ताकत भी मजबूत रखे भारत: जनरल नरवणे

    चीन से बातचीत जरूरी, लेकिन सैन्य ताकत भी मजबूत रखे भारत: जनरल नरवणे

    नई दिल्ली
    पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे ने गुरुवार को कहा कि आतंकवाद के लगातार खतरे के कारण भारत का ध्यान काफी हद तक पाकिस्तान पर केंद्रित रहा है, लेकिन दीर्घकाल में चीन कई क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। चीन के संदर्भ में 'शत्रु' शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए नरवणे ने कहा कि भारत को बीजिंग के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ-साथ मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की जरूरत है।

    अपनी नई पुस्तक 'द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड : अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज' के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान और चीन, दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों के साथ सीमाओं का विवाद अभी अनसुलझा है। उन्होंने कहा कि हालांकि, दोनों देश अलग-अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं।

    चीन और पाकिस्तान रडार पर
    उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से अलग हैं। हमने दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं। हमारी सीमाएं को लेकर विवाद अनसुलझे हैं। इसलिए वे हमेशा खतरे और चुनौती के रूप में हमारे रडार पर रहेंगे।' नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल खतरा मुख्य रूप से आतंकवाद के लगातार बने रहने के कारण है, जबकि आने वाले वर्षों में चीन के भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है।

    उन्होंने कहा, 'हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं और आतंकवाद को उसके लगातार समर्थन के कारण हमारा ध्यान पश्चिमी सीमा पर रहता है। लेकिन मुझे लगता है कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आने वाले वर्षों में और दीर्घकाल में चीन हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। और मैं जानबूझकर 'प्रतिस्पर्धी' शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, 'शत्रु' का नहीं।'

    यहां होगा कॉम्पिटिशन
    नरवणे ने कहा कि चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य मामलों सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक सेना अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत को ताकत का इस्तेमाल करने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से चीन के साथ मतभेद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने कहा, 'बल प्रयोग का सहारा लेना हमेशा आखिरी प्राथमिकता होनी चाहिए।' साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए विश्वसनीय सैन्य तैयारी बनाए रखनी चाहिए।

    खास बात है कि भारत और चीन के बीच जून 2020 में हुई गलवान घाटी में झड़प के बाद से ही तनाव है। हालांकि, अब हालात सुधरते नजर आ रहे हैं। जबकि, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल समझौता रद्द करने समेत कई कार्रवाइयां की हैं।

  • ‘भारत को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार’, पोलैंड के राजदूत ने पहलगाम का भी किया जिक्र

    ‘भारत को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार’, पोलैंड के राजदूत ने पहलगाम का भी किया जिक्र

    नई दिल्ली
    भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को लेकर यूरोपीय देश पोलैंड के राजदूत पियोत्र एंटोनी स्विताल्स्की का एक बयान चर्चा में है। भारत में पोलैंड के राजदूत ने पाकिस्तान के साथ पोलैंड के पुराने सैन्य संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान की वायुसेना को खड़ा करने में पोलिश पायलटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पोलैंड भारत के साथ खड़ा है और भारत को आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारतीय सेना ने पोलिश टैंकों का इस्तेमाल किया था।

    ‘पाकिस्तान की एयरफोर्स बनाने में पोलिश पायलटों ने मदद की’
    पाकिस्तान के साथ पोलैंड के संबंधों के बारे में पूछे जाने पर स्विताल्स्की ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध हैं और कुछ आर्थिक हित भी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिमी यूरोप के कई अन्य देशों की तुलना में पाकिस्तान के साथ पोलैंड का आर्थिक जुड़ाव काफी सीमित है।

    इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान की वायुसेना के शुरुआती दौर का जिक्र किया। राजदूत के मुताबिक, बंटवारे के बाद कई पोलिश पायलटों के पास नौकरी नहीं थी और पाकिस्तान ने उन्हें अपने यहां काम दिया। इन पायलटों ने पाकिस्तान की एयरफोर्स के शुरुआती निर्माण और ट्रेनिंग में योगदान दिया।

    ‘पोलिश टैंकों से भारत ने बांग्लादेश को आजाद कराया’
    पोलिश राजदूत ने इसके साथ ही भारत के साथ अपने देश के पुराने सैन्य संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत के संघर्षों के दौरान पोलैंड भारत के पक्ष में रहा है। उन्होंने खास तौर पर 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश की मुक्ति में भारतीय सेना द्वारा पोलिश टैंकों का इस्तेमाल किया गया था। यह भारत-पोलैंड के रक्षा संबंधों के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। स्विताल्स्की ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता को लेकर भी पोलैंड की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जब 1971 में बांग्लादेश आजाद हुआ तो पोलैंड उसे मान्यता देने वाला तीसरा देश था।

    ऑपरेशन सिंदूर में पोलिश ड्रोन का जिक्र
    राजदूत स्विताल्स्की ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पोलिश ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए पोलैंड में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में पोलिश निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल किया और इनके प्रदर्शन के बाद भारत ने ऐसे सिस्टम के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट भी किए हैं। राजदूत ने कहा कि भारत को पोलैंड से हमलावर ड्रोन और टोही ड्रोन दोनों की सप्लाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन में युद्ध के दौरान परीक्षण से पोलिश ड्रोन की क्षमताओं को मजबूती मिली है।

    ‘पोलैंड और पाकिस्तान के बीच आतंकियों को लेकर कोई कनेक्शन नहीं’
    पाकिस्तान के संदर्भ में पोलिश ड्रोन का मुद्दा उठने पर स्विताल्स्की ने एक बेहद अहम बात कही। उनका कहना था कि पोलैंड और पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे के बीच कोई संबंध नहीं है। अगर कोई संबंध है तो वह इतना है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने के लिए पोलिश ड्रोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इन ड्रोन का इस्तेमाल किया और उनके प्रदर्शन के बाद नए ऑर्डर दिए गए। इससे भारत-पोलैंड रक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व का संकेत मिलता है।

    आतंकवाद पर भारत के साथ खड़ा है पोलैंड
    राजदूत का सबसे स्पष्ट संदेश आतंकवाद को लेकर था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पोलैंड भारत के साथ है और भारत को आतंकवादियों का पीछा करने तथा जहां वे मौजूद हों, वहां उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पोलैंड खुद भी आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत ने जिन आतंकवादी हमलों का सामना किया है, उनकी तुलना पोलैंड के अनुभव से नहीं की जा सकती। स्विताल्स्की ने जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए भारत के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि पोलैंड आतंकवाद की बिना किसी शर्त निंदा करता है।

    पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए बोले- यह मेरे लिए व्यक्तिगत है
    पोलिश राजदूत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकवादी हमले का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि वह हमले से ठीक एक रात पहले श्रीनगर में थे और संयोग से पहलगाम नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि इस वजह से भारत में आतंकवादी हमले को लेकर जो भावनाएं हैं, उन्हें वह व्यक्तिगत तौर पर महसूस करते हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राजदूत ने कहा कि वह पहलगाम जाने वाले थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वहां नहीं जा पाए।

    पाकिस्तान के साथ संयुक्त बयान पर भी दी सफाई
    भारत-पोलैंड संबंधों में पिछले दिनों पाकिस्तान को लेकर कुछ गलतफहमियां भी सामने आई थीं। अक्टूबर 2025 में पोलैंड और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में कश्मीर समेत विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप हल करने की बात कही गई थी।

    भारत की नीति लंबे समय से यह रही है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय तरीके से सुलझाए जाने चाहिए। ऐसे में उस बयान को लेकर भारत में सवाल उठे थे। स्विताल्स्की ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि पोलैंड के रुख को गलत समझा गया। उनका कहना था कि भारत और आतंकवाद के मुद्दे पर पोलैंड के बीच कोई वास्तविक मतभेद नहीं है।

  • ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा खुलासा, पायलट ने बताया कैसे खुली रही 22 मिनट की विंडो

    ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा खुलासा, पायलट ने बताया कैसे खुली रही 22 मिनट की विंडो

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और वायु सेना द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण अभियान चर्चा में है. इस मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने सटीक और तेज हमले किए. एक भारतीय वायुसेना पायलट, जो उस मिशन का हिस्सा था, उन्होंने हाल ही में बताया कि पाकिस्तानी वायुसेना का रिएक्शन धीमी रही. उनके अनुसार लॉन्च विंडो करीब 22 मिनट तक खुला रहा.

    इस दौरान भारतीय विमानों ने अपना मिशन पूरा किया. सुरक्षित वापस लौट आए, जबकि पाकिस्तान प्रभावी जवाब नहीं दे पाया. यह बयान ऑपरेशन की सफलता और भारतीय वायुसेना की तैयारियों को रेखांकित करता है. Su-30MKI भारत की वायुसेना का प्रमुख मल्टीरोल फाइटर है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों भूमिकाओं में सक्षम है. इसकी लंबी रेंज, आधुनिक रडार और हथियार सिस्टम ने इसे ऐसे ऑपरेशन के लिए बनाया है.

    पायलट के अनुसार भारतीय विमानों ने हमला किया, लक्ष्य पर निशाना साधा और वापस लौटने लगे, तब तक पाकिस्तानी वायुसेना पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई थी. यह 22 मिनट का समय भारतीय पक्ष के लिए निर्णायक साबित हुआ. आधुनिक हवाई युद्ध में प्रतिक्रिया का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है.

    रडार डिटेक्शन, अलर्ट जारी करना, विमानों को एयरबॉर्न करना और इंटरसेप्ट मिशन शुरू करना- ये सभी प्रक्रियाएं तेजी से होनी चाहिए. यदि प्रतिक्रिया में देरी हो जाए तो हमलावर विमान अपना काम पूरा कर सुरक्षित क्षेत्र में पहुंच जाते हैं. इस मामले में पाकिस्तानी वायुसेना की धीमी प्रतिक्रिया कई कारणों से जुड़ी हो सकती है.

    इनमें रडार कवरेज की सीमाएं, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में देरी या उस समय की ऑपरेशनल तैयारियां शामिल हो सकती हैं. भारतीय पक्ष ने शायद इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर या सरप्राइज एलिमेंट का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सिस्टम को अस्थाई रूप से प्रभावित किया हो. हालांकि आधिकारिक पुष्टि के बिना ये अनुमान ही रह जाते हैं.

    Su-30MKI की क्षमताएं और मिशन की सफलता
    Su-30MKI भारतीय वायुसेना का वर्कहॉर्स माना जाता है. इसमें थ्रस्ट वेक्टरिंग, लंबी दूरी की मिसाइलें और ए़डवांस एवियोनिक्स हैं जो इसे जटिल मिशनों के लिए सक्षम बनाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान में इन विमानों ने सटीक स्ट्राइक की क्षमता का प्रदर्शन किया.

    पायलट के बयान से पता चलता है कि भारतीय विमानों ने लक्ष्य को निशाना बनाया. बिना किसी प्रभावी जवाबी कार्रवाई के वापस लौट आए. यह न सिर्फ विमानों की क्षमता बल्कि पायलटों के प्रशिक्षण, मिशन प्लानिंग और खुफिया जानकारी की गुणवत्ता को भी दर्शाता है.

    भारतीय वायु सेना ने पिछले वर्षों में कई अभ्यासों और वास्तविक अभियानों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाई है. इस घटना से यह भी साफ होता है कि समय पर सही जानकारी और तेज फैसला कितना महत्वपूर्ण है. यदि पाकिस्तानी पक्ष समय पर प्रतिक्रिया देता तो स्थिति अलग हो सकती थी.

    हवाई जंग में वक्त बेहद जरूरी
    आधुनिक हवाई संघर्ष में टाइम-टू-रिस्पॉन्स जीत-हार तय कर सकता है. जब एक पक्ष के विमान दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो दूसरे पक्ष को तुरंत अलर्ट होना चाहिए. रडार सिस्टम को लक्ष्य ट्रैक करना चाहिए, ग्राउंड कंट्रोल को आदेश जारी करने चाहिए और इंटरसेप्टर विमानों को उड़ान भरनी चाहिए.

    22 मिनट का समय आधुनिक मानकों से काफी लंबा माना जा सकता है. इस दौरान भारतीय विमान न सिर्फ हमला कर सकते थे बल्कि सुरक्षित वापसी का रास्ता भी तय कर सकते थे. यह घटना दोनों पक्षों की तैयारियों के बीच के अंतर को उजागर करती है.

    भारतीय वायुसेना ने संभवतः बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस और मिशन प्लानिंग का इस्तेमाल किया. पाकिस्तानी वायुसेना के पास भी एडवांस विमान और सिस्टम हैं, लेकिन उस विशेष समय पर उनका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया. ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाएं भारत-पाक सीमा और हवाई क्षेत्र की जटिलताओं को रेखांकित करती हैं.

    दोनों देशों के बीच तनाव के दौर में हवाई क्षमताएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. भारतीय पक्ष के लिए यह सफलता आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, जबकि पाकिस्तानी पक्ष के लिए यह समीक्षा का विषय बन सकती है. ऐसे अभियानों से सीखने योग्य कई बातें निकलती हैं.

        पहली, खुफिया जानकारी और रियल-टाइम सर्विलांस कितनी जरूरी है.
        दूसरी, कमांड सिस्टम की गति और समन्वय.
        तीसरी, पायलटों का प्रशिक्षण और विमानों का रखरखाव.

    भारतीय वायुसेना लगातार अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है. नए सिस्टम शामिल कर रही है. Su-30MKI के साथ अन्य प्लेटफॉर्म भी भविष्य के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

    पायलट के बयान के अनुसार सुखोई-30 एमकेआई विमान आए, हमला किया और वापस लौट गए, जबकि पाकिस्तानी वायुसेना अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई थी. यह 22 मिनट का विंडो ऑपरेशन की सफलता का मुख्य कारण बना. यह घटना बताती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ हथियार काफी नहीं, बल्कि उनकी सही समय पर सही इस्तेमाल की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

  • चीन बॉर्डर पर बढ़ी PLA की हलचल! किरेन रिजिजू ने बताई असली स्थिति, अतिक्रमण के दावों पर चेताया

    चीन बॉर्डर पर बढ़ी PLA की हलचल! किरेन रिजिजू ने बताई असली स्थिति, अतिक्रमण के दावों पर चेताया

    नई दिल्ली
    अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर चीन की सेना के अतिक्रमण के दावों को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत-चीन सीमा का मुद्दा एक गंभीर विषय है, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे पर फर्जी दावे न करें। उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की तस्वीर साफ करते हुए आगाह किया है कि हम पिछली गलतियों को दोहराना नहीं चाहते।

    'संवेदनशील मामले में गलत दावे न करें'
    किरेन रिजिजू ने एक न्यूज एजेंसी को इंटरव्यू दिया है, जिसका कुछ हिस्सा उन्होंने अपने एक्स पर पोस्ट करके शेयर किया है। वीडियो के साथ केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री ने लिखा है,'भारत-चीन सीमा मु्द्दा एक गंभीर विषय है। ऐसे संवेदनशील मामले में गलत दावे न करें। हम अतीत की भूल नहीं दोहराना चाहते। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान करेगी और भारतीय क्षेत्र की रक्षा करेगी।'

    'सीमाएं रेखांकित नहीं हैं, वहां पिलर्स नहीं हैं'
    उन्होंने कहा कि 'यह दावा किया जा रहा है कि चीन 60 किलोमीटर घुस गया, तो ऐसे दावे नहीं करना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में चीन-भारत के बीच में बड़ी लंबी सीमा है। जिस सीमा को रेखांकित नहीं किया गया है, वहां पिलर्स नहीं हैं। बॉर्डर डिफाइन नहीं है। यह अभी का मुद्दा नहीं है।'

    बॉर्डर में प्रॉब्लेम है। हमारे अरुणाचल के गांवों के कुछ लोग बॉर्डर प्रॉब्लेम को लेकर जो चिंता जाहिर की है वो सही है।

    कांग्रेस सरकार की नीतियों पर निशाना साधा
    किरेन रिजिजू अरुणाचल प्रदेश से ही बीजेपी के लोकसभा सांसद हैं। उनका कहना है कि सीमा रेखांखित नहीं होने के चलते भारत और चीन के बीच तनाव होता रहता है। मेन प्रॉब्लेम ये है कि चीन ने पहले से रास्ता बनाना शुरू किया, हाइवे बनाए। इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए। उनके मुताबिक 'कांग्रेस के समय में जो डिफेंस मिनिस्टर थे एंटनी साहब, उन्होंने पार्लियामेंट में ये बयान दिया कि भारत सरकार की यह पॉलिसी है कि अरुणाचल प्रदेश में बॉर्डर साइड में रास्ता नहीं बनाना है, इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाना है। और चाइना बनाता आ रहा है। हमारा रास्ता बनाने का काम तो 2014 के बाद शुरू हुआ। मोदी जी ने पॉलिसी को चेंज किया। अब हमारा भी रास्ता बन रहा है।'

    सीमाएं तय नहीं होने की वजह से फायदा उठाया
    उन्होंने कहा कि 'ऊंचे इलाकों में पहले रास्ता बना लेने के चलते चीन ने कुछ क्षेत्रों को कब्जे में लिया। ऐसा नहीं है कि वह हमारे गांवों में आ गए हैं। डिमार्केशन नहीं होने की वजह से उन्होंने कब्जा जमा रखा है। हमारे लोगों का मानना है कि हमारी जमीन आगे तक है। उस तरफ के लोगों का कहना है कि उनकी जमीन इधर अंदर तक है।'

    'ऊंचाई वाले क्षेत्र में चाइनीज आर्मी की एक्टिविटी बढ़ी'
    रिजिजू ने कहा, 'लोंगजू से आगे एक वैली है, नदी है…वहां पीएलए ने कुछ स्ट्रक्चर बनाया, कुछ बिल्डिंग बनाए, उस जमीन पर 1959 में कब्जा किया । हमारे असम राइफल्स के जवान मारे गए थे।…अभी हमारा जो बॉर्डर प्वाइंट है, वहां हमारा पोस्ट है। वहां 1962 से भारत-चीन आना-जाना बंद है।'

    लेकिन जो टॉप रीच है, वहां जरूर चाइनीज आर्मी की एक्टिविटी बढ़ गई है, उसी को लेकर के हमारे गांव के लोगों ने चिंता जाहिर की, वो ठीक है, इसे हमें बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। लेकिन, ऐसे झूठ बोलना कि 60 किलोमीटर अंदर घुस गया, और इधर जहां तहां बांग्लादेश का फोटो डाल के कि चीन की आर्मी 60 किलोमीटर अंदर घुस गई, ऐसी बातें फैलाने से वहां जो आर्मी जवान हैं, हमारी फोर्सेज के लोग हैं, उनका मोरल डाउन होगा और देश में भ्रम फैलाते हैं, यह ठीक बात नहीं है।

  • ऑपरेशन सिंदूर की डॉक्यूमेंट्री पर पाकिस्तान का विरोध, भारत के सैन्य दावों को बताया गलत

    ऑपरेशन सिंदूर की डॉक्यूमेंट्री पर पाकिस्तान का विरोध, भारत के सैन्य दावों को बताया गलत

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर पर बनी भारतीय डॉक्यूमेंट्री को देखकर पाकिस्तानियों को मिर्ची लगी है। पाकिस्तान की ओर से मंगलवार को कहा गया कि इसमें ऑपरेशन सिंदूर का एकतरफा ब्योरा दिया गया है और लड़ाई की जमीनी हकीकत की अनदेखी की गई है। डिस्कवरी चैनल की डॉक्युसीरीज 'डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के जवाब में पाक सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि इस डॉक्यूमेंट्री में घटना का बहुत ज्यादा नाटकीय और भारत को रास आने वाले तौर-तरीके से चित्रण किया गया है।

    पाक सेना ने डॉक्यूमेंट्री में इस अभियान को सैन्य सफलता बताने के भारत के दावे पर सवाल उठाए हैं। इस सीरीज में भारत के सीनियर राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व ने 88 घंटे तक चले संघर्ष से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया है। 2 हिस्सों वाली डॉक्यूसीरीज में बात करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा, 'भारत की उदारता और सहनशीलता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि देश जोखिम उठा सकता है और कड़ा प्रहार कर सकता है, चाहे नतीजा कुछ भी हो।

    अजीत डोभाल ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मकसद दुश्मन के शिविरों को नष्ट करना था, खासकर उन ठिकानों को जो पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे क्योंकि इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। पिछले साल 7 मई की तड़के ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, जिसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

    आतंकी ठिकानों पर भारत का सटीक हमला
    22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने इस अभियान के तहत कुल 9 आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। इन ठिकानों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए किया जाता था। कार्रवाई को सीमित और टारगेटेड बताया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की कोशिश की गई। भारत ने अपने वायु रक्षा और प्रतिरोधी ड्रोन तंत्र के जरिए कई खतरों को नाकाम किया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के कुछ सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया। अभियान ने भारत की खुफिया क्षमता, सटीक मारक क्षमता, ड्रोन तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को सामने रखा। इस अभियान ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की रणनीति में भी बदलाव का संकेत दिया, जिसमें सीमित अवधि में सटीक सैन्य कार्रवाई के जरिए आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर जोर रहा।

  • Flight Fare Hike पर सरकार सख्त, दिवाली-छठ में मनमाना किराया वसूली पर लगेगी लगाम; DGCA को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    Flight Fare Hike पर सरकार सख्त, दिवाली-छठ में मनमाना किराया वसूली पर लगेगी लगाम; DGCA को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली

    फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में फ्लाइट के टिकट के दाम अप्रतयाशित रूप से न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र के मुताबिक, एयर फेयर यानी हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसे तैयार होने में 3 हफ्ते का समय लग सकता है. इन नियमों में हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल होंगे, जिनसे हवाई यात्रियों को राहत मिलेगी. दरअसल, फ्लाइट्स टिकटों के दाम अचानक बढ़ने को लेकर एयर पैसेंजर्स लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं. जैसे कि नॉर्मल डेज यानी सामान्‍य दिनों में दिल्‍ली में मुंबई का किराया 6,000 रुपये है तो गर्मी की छुट्टियों या फिर दिवाली जैसे फेस्टिवल के टाइम यही टिकट 12 से 14 हजार रुपये का हो जाता है। 

    ऐसे मामलों की एक शिकायती याचिका पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के पास और फिर कोर्ट ने सख्‍ती दिखाते हुए सरकार से रुख स्‍पष्‍ट करने को कहा. कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि सरकार इस पर नियम बना रही है। 

    नियम नहीं मानें एयरलाइंस तो फ्लाइट्स रोक दें: सुप्रीम कोर्ट 
    सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्‍ती से कहा है कि एयरलाइंस अगर नियम नहीं मानतें तो उनकी उड़ाने रोक दी जाएं. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की. उन्‍होंने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। 

    याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते. पिछली सुनवाई में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए। 

    7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आ सकता है नियम 
    कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसे पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि अंतिम रूप में तैयार नियमों को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है। 

    सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की जरूरत है।