Category: देश

  • JP Nadda Health Update: तबीयत बिगड़ने के बाद AIIMS पहुंचे नड्डा, हालत स्थिर; कार्डियोलॉजी में एडमिट

    JP Nadda Health Update: तबीयत बिगड़ने के बाद AIIMS पहुंचे नड्डा, हालत स्थिर; कार्डियोलॉजी में एडमिट

    नई दिल्ली

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक उन्हें बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद एम्स में उनकी एंजियोग्राफी की गई है। यह जांच नसों में खून के ब्लॉकेज के लिए किया जाता है। AIIMS की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन में बताया गया है कि उनकी हालत स्थिर है। फिलहाल उन्हें कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

    जेपी नड्डा भारत सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हैं। इसके अलावा संगठन में भी उनकी अच्छी पकड़ है। वह बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। नितिन नबीव को कमान मिलने से पहले बीजेपी की कमान उनके ही पास थी। एम्स के बयान के मुताबिक उन्हें गुरुवार यानी 13 अगस्त की शाम को ही बेचैनी की शिकायत हुई थी। इसके बाद उनका इलाज चल रहा है।

    विभाजन विभीषिका दिवस पर साझा किया अपना संदेश
    नड्डी की तबीयत को लेकर उनके समर्थकों और साथियों ने चिंता व्यक्त की है। जेपी नड्डा ने 14 अगस्त को भी 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सोशल' मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि यह दिन उन लाखों लोगों के दर्द और बलिदान की याद दिलाता है जो कि विभाजन के दौरान कठिन परिस्थितियों से गुजरे और बहुत सारे लोगों की जान चली गई।

    जेपी नड्डाराज्यसभा में सदन के नेता हैं। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान वह ना केवल सदन में मौजूद रहते थे बल्कि विपक्ष को करारा जवाब भी देते थे। दो दिन पहले ही जब मल्लिकार्जुन खरगे ने अमित शाह की अनुपस्थिति का मामला उठाया तो जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं और चर्चा से भागना चाहते हैं।

    खरगे ने सदन में गृह मंत्री शाह की लगातार अनुपस्थित पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कहा, "प्रस्ताव जिसके नाम है उसे रखने को कहा जाए।… उन्हें आप बुलाइये।" उनके इस वक्तव्य को श्री हरिवंश ने खारिज करते हुए सदन के नेता श्री नड्डा को बोलने के लिए कहा। नड्डा ने कहा, "वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। आप सदन में बहस से भागते हैं।"

  • अहमदाबाद जलभराव पर एक्शन में अमित शाह, भूपेंद्र पटेल से बोले- बार-बार पानी भरने की समस्या का निकालें स्थायी हल

    अहमदाबाद जलभराव पर एक्शन में अमित शाह, भूपेंद्र पटेल से बोले- बार-बार पानी भरने की समस्या का निकालें स्थायी हल

     गांधीनगर

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर के तहत आने वाले अहमदाबाद के इलाकों में जलभराव की समस्या पर चिंता जताई है. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, अहमदाबाद के महापौर और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर इसका स्थायी और सुनियोजित समाधान करने का आग्रह किया है। 

    केंद्रीय गृह मंत्री कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अमित शाह ने अहमदाबाद के नए शहरी इलाके- बोपाल, अंबली, घुमा और शेला में भारी बारिश के बाद पैदा होने वाली जलभराव की समस्या को गंभीरता से लिया है। 

    अमित शाह के संसदीय क्षेत्र गांधीनगर के तमाम इलाकों में बारिश में जलभराव से लोग जूझ रहे हैं. इसलिए अमित शाह ने सीएम के साथ नगर निगम के मेयर और  नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर बार-बार होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। 

    अहमदाबाद में जलभराव की समस्या
    अहमदाबाद में भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई. हाल में हुई बारिश के दौरान करीब 18 इंच पानी बरसा था. भारी बारिश के कारण अंबली-बोपाल-घुमा-शेला इलाके में जलभराव हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 

    बता दें कि इन सभी इलाकों को साल  2021 में अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की सीमा में शामिल किया गया था. भौगोलिक स्थिति और पुरानी जल निकासी व्यवस्था बेहतर न होने के कारण भारी बारिश के दौरान यहां पानी भरने की समस्या बार-बार सामने आती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से इसके स्थायी समाधान की मांग की है। 

    जलभराव की समस्या का परमानेंट सॉल्युशन
    विज्ञप्ति के मुताबिक, अमित शाह के निर्देश पर अहमदाबाद नगर निगम ने पूरे इलाके का सर्वेक्षण कराया और क्षेत्रवार वर्षाजल निकासी का मास्टर प्लान तैयार किया. इसके तहत उन इलाकों में जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने की योजना बनाई गई, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। 

    अहमदाबाद नगर निगम ने इस पूरे इलाके का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया और ज़ोन-वार स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया है. अहमदाबाद नगर निगम ने भी बताया कि इसके अलावा जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर वहां जरूरी उपाय किए जाएंगे। 

    एक्शन में नगर निगम

    नया ड्रेनेज नेटवर्क- जिन इलाकों में जल निकासी का बुनियादी ढांचा नहीं है, वहां नया स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क बनाया जाएगा.

    जलवर्षा पाइपलाइन– बारिश के पानी की तेजी से निकासी के लिए आपस में जुड़ी नालियों, नई पाइपलाइनों और निकास मार्गों की व्यवस्था की जाएगी.

    दीर्घकालिक उपाय- बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए गोटा-गोधावी नहर और साबरमती नदी के किनारे ड्रेनेज सिस्टम को जोड़ने की योजना शामिल की गई है.

    विभाग के अनुसार, अमित शाह के निर्देशों पर एएमसी द्वारा की जा रही इस नियोजित और समयबद्ध कार्रवाई से आने वाले वर्षों में बोपाल, अंबली, घुमा और शेला के निवासियों को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी। 

  • महाराष्ट्र में ड्राइविंग लाइसेंस पर मराठी की शर्त? उत्तर भारतीयों के लिए खड़ी हुई बड़ी मुश्किल

    महाराष्ट्र में ड्राइविंग लाइसेंस पर मराठी की शर्त? उत्तर भारतीयों के लिए खड़ी हुई बड़ी मुश्किल

    मुंबई

    महाराष्ट्र सरकार ने यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से राज्य भर में सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जो शर्त रखी है, वह ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी लागू होगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार (12 अगस्त) को यह साफ किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के ज़रिए गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों को राज्य के भाषा नियमों से कोई छूट नहीं मिलेगी।

    मराठी नहीं जानने वाले ऑटो, कैब ड्राइवर्स के लाइसेंस 18 अगस्त से 3 महीने तक के लिए सस्पेंड हो जाएंगे। वहीं, अगर ऐसा बार-बार होता है तो उनके लाइसेंस कैंसिल हो सकते हैं।

    यानी 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026' के तहत ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सी और ओला-उबर जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर ड्राइवरों को अब स्थानीय भाषा (मराठी) में व्यावहारिक बातचीत की क्षमता साबित करनी होगी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1989 के नियमों में किए गए इस संशोधन का पालन न करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। राज्य सरकार के इस फैसले से वैसे उत्तर भारतीयों के रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जो लंबे समय से वहां कैब सर्विस मुहैया करा रहा थे।

    परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार
    नए नियम के तहत प्रादेशिक परिवहन कार्यालयों को पहली बार नियम का उल्लंघन करने पर ड्राइवरों के लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित करने और बार-बार उल्लंघन करने पर परमिट स्थायी रूप से रद्द करने के अधिकार दिए गए हैं। यह नियम चालकों के साथ-साथ परमिट धारकों और नए परमिट आवेदन/नवीनीकरण कराने वालों पर भी समान रूप से लागू होगा। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में इस नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे चालकों के सामने जल्द से जल्द मराठी सीखने या फिर आजीविका गंवाने का दबाव बन गया है।

    ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी नियम लागू
    'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, पब्लिक सर्विस गाड़ियां चलाने के लिए मंज़ूरी से जुड़े संशोधित नियम 4(4), परमिट से जुड़े नियम 78 और परमिट रिन्यूअल से जुड़े नियम 85 में अब जरूरी शर्तों में मराठी भाषा की जानकारी होना भी शामिल है। यह शर्त इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली गाड़ियां चलाने वाले ऐप-बेस्ड मोटर कैब ड्राइवरों पर भी लागू होती है। प्रावधान 22(3A) के तहत, जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाएंगे, उनके ख़िलाफ नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई हो सकती है।

    ड्राइवरों के लिए मराठी की ट्रेनिंग
    इस बीच, महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसे साहित्यिक संगठनों के सहयोग से यात्री वाहन ड्राइवरों के लिए मराठी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है। 105 दिन का यह प्रोग्राम रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस और भाषा ट्रेनिंग सेंटरों के ज़रिए चलाया जा रहा है, जिसका मकसद ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी में कामकाजी दक्षता हासिल करने में मदद करना है। विभाग के अनुसार, 1.10 लाख से ज़्यादा गैर-मराठी भाषी यात्री वाहन ड्राइवरों ने चार घंटे का ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर लिया है। ड्राइवरों को 17 अगस्त को ठाणे में एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सर्टिफिकेट मिलने हैं। उम्मीद है कि ट्रेनिंग की यह पहल ड्राइवरों को परिवहन विभाग द्वारा तय 15 अगस्त की समय सीमा से पहले भाषा संबंधी शर्त को पूरा करने में मदद करेगी।

  • महिलाओं के लिए खुशखबरी! इस राज्य में फ्री बस यात्रा की तैयारी, भाजपा सरकार ने बनाया प्लान

    महिलाओं के लिए खुशखबरी! इस राज्य में फ्री बस यात्रा की तैयारी, भाजपा सरकार ने बनाया प्लान

    देहरादून

    उत्तराखंड की महिलाओं को स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा तोहफा मिल सकता है। पुष्कर सिंह धामी सरकार उत्तराखंड रोडवेज की साधारण बसों में महिलाओं को फ्री सफर की सुविधा देने का ऐलान कर सकती है। रोडवेज प्रबंधन ने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

    उत्तराखंड रोडवेज की लगभग 900 बसें रोजाना सड़कों पर दौड़ती हैं। इनमें औसतन सवा लाख यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। दैनिक यात्रियों में करीब 50 हजार छात्राएं और महिलाएं होती हैं। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की मांग कर रही है। परिषद ने इसे लेकर हाल में सीएम से मुलाकात की थी। इसके चलते शासन की ओर से सुझाव मांगने पर रोडवेज प्रबंधन ने बुधवार को प्रस्ताव सौंप दिया।

    वित्तीय स्थिति सुधरने की उम्मीद
    रोडवेज का मानना है कि इस कदम से न केवल महिला सशक्तीकरण को मजबूती मिलेगी, बल्कि घाटे से जूझ रहे रोडवेज की वित्तीय स्थिति भी सुधरेगी। उधर, यूपी की बसों में जल्द ही महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा देने की तैयारी है। इससे आय के मामले में उत्तराखंड को यूपी रोडवेज से चुनौती मिलती।

    इन राज्यों में भी मुफ्त सफर की सुविधा
    कर्नाटक में महिलाओं को मुफ्त सफर के लिए शक्ति योजना, तेलंगाना में स्त्री शक्ति योजना, केरल में प्रियदर्शनी और आंध्र प्रदेश में स्त्री शक्ति योजना चलाई जा रही है। इसके अलावा पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर व दिल्ली में भी महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा दी जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार स्वतंत्रता दिवस से 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मुफ्त बस सफर की सुविधा देने जा रही है।

    रोडवेज की 'आमदनी अठन्नी- खर्चा रुपया’
    वर्तमान में उत्तराखंड रोडवेज भारी वित्तीय संकट से गुजर रहा है। रोडवेज पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियां हैं। रोडवेज की दैनिक आय लगभग 1.5 करोड़ रुपये है, जबकि दैनिक खर्च 2.20 करोड़ रुपये से भी अधिक है। कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।

    उत्तराखंड रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सरकार को महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा देने का सुझाव दिया था। स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा के लिए सुझाव मांगे जाने पर हमने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यह व्यवस्था लागू होने से रोडवेज को लाभ ही होगा, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं अकेले सफर नहीं करतीं, उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा करते हैं, जिससे हमारी बसों में यात्री संख्या बढ़ेगी।

  • CJI के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBI को भेजा नोटिस

    CJI के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBI को भेजा नोटिस

    नई दिल्ली

    सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है। यह मामला चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की तीन महीने पुरानी 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को चालाकी से एडिट करके इस टिप्पणी का व्यावसायिक फायदा उठाया गया और इसे ऐसा मतलब दे दिया गया जो कभी कहा ही नहीं गया था।

    क्या है पूरा मामला?
    15 मई को CJI के नेतृत्व वाली बेंच 'संजय दुबे बनाम रजिस्ट्रार जनरल, दिल्ली हाईकोर्ट' याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान CJI ने अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग और वकालत के गिरते मानकों पर चिंता जताते हुए, खास तौर पर फर्जी वकीलों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था।

    विवाद और CJP का जन्म
    CJI की इस टिप्पणी के बाद खासा बवाल खड़ा हुआ और इसी बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) वजूद में आई। इस पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जेन-जी के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

    मीम्स बनाकर मुनाफा कमाने का आरोप
    याचिकाकर्ता और पेशे से वकील राजा चौधरी ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने अपनी दलीलें रखीं। करीब आधे घंटे चली बहस के दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि 15 मई की घटना के बाद से अदालती कार्यवाही के चुनिंदा और एडिटेड क्लिप्स शेयर करने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

    अदालती टिप्पणियों के अर्थ को तोड़-मरोड़ कर मीम्स में बदला जा रहा है और सोशल मीडिया पर मुनाफे के लिए इसे सर्कुलेट किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि जजों की छवि खराब करने और न्यायपालिका से जनता का भरोसा कम करने वाली इन साजिशों को रोकने के लिए फिलहाल कोई तंत्र मौजूद नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट से क्या की गई है मांग?
    याचिकाकर्ता ने इस बात की गहरी जांच की मांग की है कि कैसे एक अलग संदर्भ में इस्तेमाल किए गए शब्द को चुनकर, एडिट करके संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। PIL में मुख्य रूप से कई मांगें रखी गई हैं, जैसे-

    अधिकारियों को उन व्यक्तियों और संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए, जो अदालती टिप्पणियों का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल और कमाई कर रहे हैं। याचिका में CJP की गतिविधियों सहित ऐसे शब्दों के ट्रेडमार्क के तौर पर इस्तेमाल पर भी एक्शन की मांग की गई है।

  • Plastic Currency in India: ATM से निकलेंगे Polymer Notes? RBI ने शुरू की तैयारी, जानें कब आएंगे नए नोट

    Plastic Currency in India: ATM से निकलेंगे Polymer Notes? RBI ने शुरू की तैयारी, जानें कब आएंगे नए नोट

    नई दिल्ली

    अगर सबकुछ ठीक रहा तो नए साल में आप प्लास्टिक या पॉलिमर नोट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक एक्शन मोड में आ चुका है। हालांकि, इसे लागू करने लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    बदलना होगा कैश रखने वाला कैसेट
    एक बड़े सरकारी बैंक के सीनियर अधिकारी ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिमर नोट लाने के प्लान में काफी खर्च आएगा, क्योंकि ATM में कैश रखने वाली कैसेट को बदलना होगा। बैंकर ने कहा कि कैसेट बदले बिना मौजूदा ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (ATM) में पॉलिमर नोट नहीं डाले जा सकते। इसका मतलब बैंकों के लिए अतिरिक्त खर्च होगा। हालांकि, बैंकों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि इस पर कितना खर्च आएगा।

    कितना खर्च करना होगा?
    नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले बैंकर ने कहा कि ATM बदलने का खर्च लगभग ₹2 लाख है। वहीं, कैसेट बदलने के खर्च की बात करें तो इससे कम होगा। बैंकर ने कहा, "जहां तक ​​हमें पता है, भारत में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो ये कैसेट बनाती हो, इसलिए इन्हें कहां से मंगाया जाए, इस पर चर्चा करनी होगी।" बैंकर के मुताबिक लंबे समय में पॉलिमर नोटों को शुरुआती दौर में अपनाने में बहुत खर्च आता है। जब पहले नोटों का साइज बदला गया था, तो बैंकों को ATM में कैसेट बदलने में लगभग एक साल लग गया था ताकि वे नए नोट निकाल सकें।" बता दें कि कैसेट वे बॉक्स होते हैं जिनमें ATM में अलग-अलग मूल्य के नोट रखे जाते हैं। हर ATM में हर मूल्य के नोट के लिए अलग-अलग कैसेट होती हैं।

    100 और 500 के नोट भी आएंगे
    आरबीआई गवर्नर ने साफ संकेत दिया है कि 10 और 20 के पॉलीमर नोटों की सफलता के बाद 100 और 500 के नोट भी लॉन्च किए जाएंगे. इससे पहले आरबीआई ने साल 2009 में भी पॉलीमर के नोट लॉन्च करने की मंशा जताई थी, लेकिन तक इसमें सफलता नहीं मिली थी. पॉलीमर के नोट नमी से बचे रहते हैं और जल्दी गंदे भी नहीं होते. इनके कटने-फटने का भी कम चांस रहता है और लंबे समय तक सर्कुलेशन में बने रह सकते हैं। 

    इन नोटों की 25 फीसदी हिस्सेदारी
    आरबीआई ने 10 और 20 के नोटों को ही पॉलीमर में पहले लॉन्च करने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि इन नोटों की सर्कुलेशन में हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है. हालांकि, वैल्यू के लिहाज से महज 1.4 फीसदी हिस्सा है. यही वजह है कि आरबीआई ने इसे अपने पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया. इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिये आरबीआई सर्कुलेशन में पॉलीमर के नोटों की पहुंच को सुनिश्चित करेगी. गवर्नर ने संकेत दिया है कि 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट तैयार होने के बाद इसे बैंक की शाखाओं और एटीएम के जरिये सर्कुलेशन में पहुंचाया जाएगा और मौजूदा कागज की नोटों के साथ ही चलन में रखा जाएगा। 

    आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा था?
    सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले वित्त वर्ष के आरंभ तक प्लास्टिक के नोट लोगों के हाथों में होंगे। बीते दिनों आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि शुरुआत में इन नोटों को पायलट परीक्षण के लिए लाया जाएगा। यदि पायलट में सबकुछ ठीक रहा तो इसका आगे विस्तार किया जाएगा। संजय मल्होत्रा ने कहा, "यदि सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो हमने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इसे लाने का लक्ष्य रखा है।" उन्होंने बताया कि अभी पॉलिमर के कागज के लिए निविदा आमंत्रित की है। उसके आने के बाद उस पर परीक्षण किए जाएंगे, सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां मिलेंगी, कई चरण हैं, कई सिक्योरिटी फीचर हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी।

    पॉलिमर के नोट लाने के दो उद्देश्य हैं। पहला, इससे नोट का जीवनकाल बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से कम मूल्य के नोटों पर अधिक लागू होता है जिनका हस्तांतरण एक हाथ से दूसरे हाथ में अधिक होता है जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं। कई देशों में 30 साल से इन नोटों का इस्तेमाल हो रहा है। वहां यह पाया गया है कि ये नोट कागज के नोटों की तुलना में तीन-चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। इसके अलावा, इससे आरबीआई की क्षमता बढ़ जाती है। अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार के साथ क्षमता बढ़ाना जरूरी है। 

    प्लास्टिक नोटों का होगा ट्रायल
    दरअसल हाल ही में सरकार ने 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने से पहले ट्रायल करने के लिए मंजूरी दे दी है. इसके तहत दोनों नोटों के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट तैयार किए जाएंगे. राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे लेकर लिखित जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूरी जानकारी दी है। 

  • E20 पर छिड़ी बहस: एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से खाद्य संकट का डर? सरकार को मिली बड़ी चेतावनी

    E20 पर छिड़ी बहस: एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से खाद्य संकट का डर? सरकार को मिली बड़ी चेतावनी

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल की नीति पर कई विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से न केवल पर्यावरण और भूजल स्तर पर गहरा असर पड़ेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि एथेनॉल वाले पेट्रोल की कीमतें कम की जानी चाहिए, क्योंकि इससे गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और इंजनों के कलपुर्जों के जल्दी खराब होने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

    सोमवार को 'इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इन अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। इस परिचर्चा में दिल्ली साइंस फोरम के वैज्ञानिक व सामाजिक कार्यकर्ता डी रघुनंदन, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के पूर्व सचिव सिराज हुसैन, और नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद शामिल थे।

    'भोजन' की बजाय 'ईंधन' वाली खेती की ओर बढ़ रहा देश
    दिल्ली साइंस फोरम के डी रघुनंदन ने कहा कि एथेनॉल फ्यूल नीति ने भारतीय कृषि क्षेत्र की दिशा ही बदल दी है। अब हमारी खेती 'भोजन-उन्मुख' से 'ईंधन-उन्मुख' हो गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एथेनॉल बनाने के लिए मक्के का भारी इस्तेमाल हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि जो भारत पहले दुनिया को मक्के का निर्यात करता था, आज उसे अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए मक्के का आयात करना पड़ रहा है। रघुनंदन ने इसे एक "विघटनकारी नीति" करार दिया, जो पानी के अत्यधिक दोहन और कृषि के पारंपरिक पैटर्न को बिगाड़ रही है।

    चावल-चीनी के सरप्लस से निपटने की कोशिश
    नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने बताया कि हाल के वर्षों में सरकार ने चावल और चीनी के सरप्लस (जरूरत से ज्यादा) उत्पादन से निपटने के लिए ही एथेनॉल फ्यूल को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चावल और चीनी की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की है, जो अंतरराष्ट्रीय और खुले बाजार की कीमतों से ज्यादा है। ऐसे में यह बचा हुआ स्टॉक न तो देश के अंदर खप पा रहा है और न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदा जा रहा है।

    चंद ने जोर देकर कहा कि देश में धान की खेती वाले एक बड़े हिस्से को मक्के की खेती से रिप्लेस करने की सख्त जरूरत है। धान की खेती में बहुत ज्यादा पानी लगता है और इससे मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस भी भारी मात्रा में निकलती है।

    भारत की तुलना ब्राजील से करना गलत
    पूर्व सचिव सिराज हुसैन ने स्पष्ट किया कि भारत के एथेनॉल प्रोग्राम की तुलना ब्राजील से नहीं की जा सकती। ब्राजील सालाना 45 मिलियन टन चीनी का उत्पादन करता है और उसमें से 36 मिलियन टन एक्सपोर्ट कर देता है। वहां की आबादी काफी कम है और खेती के लिए जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा मौजूद है।

    हुसैन ने चेतावनी देते हुए कहा, "कई स्टडीज बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में भारत के कृषि उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, इसलिए ब्राजील से हमारी तुलना करना बिल्कुल गलत है।"

    E20 फ्यूल बंद करने की उठी मांग
    रघुनंदन ने सरकार को सुझाव दिया कि उसे 20% एथेनॉल वाले 'E20' फ्यूल का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए और वापस 'E10' (10% एथेनॉल) पर लौट जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि वर्तमान में एथेनॉल के इस्तेमाल का खामियाजा सिर्फ पर्यावरण और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है, जबकि किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। अगर E20 बंद होता है, तो नुकसान सिर्फ उन लगभग 400 डिस्टिलरीज को होगा जिन्होंने एथेनॉल बनाने का सेटअप लगाया है। सरकार चाहे तो उन्हें आसानी से इसका मुआवजा दे सकती है।

  • ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित और प्रोत्साहित

    ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित और प्रोत्साहित

    ​चेन्नई

    महिला उद्यमियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को पहचान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, शक्ति मसाला पिछले नौ वर्षों से प्रतिष्ठित ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है। इसी पहल के तहत, इस वर्ष का पुरस्कार समारोह चेन्नई के चेटपट स्थिति आंडाल ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया।​शक्ति मसाला द्वारा आयोजित इस पुरस्कार समारोह में तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन और वित्त मंत्री मारिया विल्सन ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर सांसद प्रवीण चक्रवर्ती और प्रसिद्ध अभिनेता सूरी भी उपस्थित रहे।

    ​कार्यक्रम की अध्यक्षता शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी और निदेशक शांति दुरैसामी ने की। इस कार्यक्रम में विधायक सौम्या अन्बुमणि और अभिनेत्री उर्वशी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा, खाद्य, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    ​समारोह को संबोधित करते हुए विधायक सौम्या अन्बुमणि ने कहा कि उनके मायके और ससुराल दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। डॉ. अन्बुमणि रामदास के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान की गई पहलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे।

    ​उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उसी अवधि के दौरान 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई थी और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम (सांप के जहर की दवा) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए थे।
    ​उन्होंने कहा, "मुझे धर्मपुरी के हर गांव का दौरा करना और लोगों से मिलना बहुत पसंद है। लोग ही मेरी प्रेरणा हैं। उन्हें देखकर मुझे खुशी होती है, और मुझे विश्वास है कि जब वे मुझे देखते हैं तो वे भी खुश होते हैं।"

    ​शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी ने अपने संबोधन में सौम्या अन्बुमणि के व्यक्तित्व और बात करने की शैली की सराहना की।
    ​उन्होंने कहा, "सौम्या अन्बुमणि के भाषण रचनात्मक और सटीक होते हैं। वह एक उत्कृष्ट व्यक्तित्व के रूप में उभरी हैं। डॉ. अन्बुमणि रामदास इस कहावत का एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि हर सफल महिला के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है। मैं भी इसका एक उदाहरण हूँ।"​विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करने वाले इस पुरस्कार समारोह को प्रतिभागियों और अतिथियों से काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली।

  • छात्र आंदोलन पर संसद में घमासान के बीच सरकार तैयार, गृह मंत्री रखेंगे जवाब; विपक्ष ने की थी मांग

    छात्र आंदोलन पर संसद में घमासान के बीच सरकार तैयार, गृह मंत्री रखेंगे जवाब; विपक्ष ने की थी मांग

    नई दिल्ली
       संसद के मॉनसून सत्र के बीच छात्र आंदोलन को लेकर सरकार ने बड़ा रुख साफ किया है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में पूरी और विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन बिंदुओं को उठाना चाहता है, सरकार उन सभी का जवाब देगी और गृह मंत्री इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से जवाब देंगे. हालिया NEET पेपर लीक और छात्र प्रदर्शन को लेकर संसद में विपक्ष लगातार चर्चा की मांग करता रहा है। 

    किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि जब छात्र आंदोलन पर चर्चा हो तो सदन में हंगामा न किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. सरकार का कहना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे बेहद अहम हैं और संसद में इन पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। 

    BAC बैठक में सरकार ने रखा चर्चा का प्रस्ताव
    बिजनेस एडवाइजरी कमेटी यानी BAC की बैठक में सरकार की ओर से छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई. हालांकि विपक्ष ने इस दौरान अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी के मामले पर भी चर्चा की मांग रखी. ऐसे में सदन में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आई हैं। 

    सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि छात्र आंदोलन पर चर्चा के दौरान सरकार जवाब देने को तैयार है. रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देंगे और विपक्ष को चर्चा के दौरान हंगामा करने के बजाय अपनी बात सदन में रखनी चाहिए। 

    FCRA और परिसीमन बिल पर चर्चा नहीं
    BAC में प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है. सरकार की प्राथमिकता में इस समय छात्र आंदोलन और उससे जुड़े परीक्षा सुधार के मुद्दे शामिल हैं। 

    इससे पहले सरकार लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश कर चुकी है. यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ा है. सरकार ने विपक्ष से इस पर भी विस्तृत चर्चा में शामिल होने की अपील की थी। 

    विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी
    छात्र आंदोलन को लेकर संसद के बाहर और अंदर सियासी टकराव लगातार बना हुआ है. विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि छात्रों के हित में कानून और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं. अब सरकार के चर्चा के लिए तैयार होने के बाद नजर इस बात पर है कि सदन में चर्चा कब शुरू होती है और विपक्ष किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है। 

  • राज्य का नाम बदलने की तैयारी से संसद में बढ़ेगा सियासी पारा, कई बिलों पर विपक्ष के हंगामे के आसार

    राज्य का नाम बदलने की तैयारी से संसद में बढ़ेगा सियासी पारा, कई बिलों पर विपक्ष के हंगामे के आसार

    नई दिल्ली
    संसद के मानसून सत्र में सोमवार को एक बार फिर हंगामे के आसार हैं। विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब की मांग पर अड़ा है। वहीं, सरकार लोकसभा में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) का भी संसद में पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है।

    छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर अड़ी कांग्रेस
    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने  कहा कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गृह मंत्री ने इस पर एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि बच्चों पर लाठी और पैलेट गन चलाए जाने की कार्रवाई की जवाबदेही तय करनी होगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि गृह मंत्री को संसद में इसका जवाब देना ही पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी माफी मांगने के बजाय ‘क्षमा’ बांटने की बात कर रहे हैं।

    FCRA विधेयक का होगा विरोध
    इस बीच, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केरल के अलाप्पुझा में कहा कि केंद्र सरकार ने अगर एफसीआरए संशोधन विधेयक संसद में पेश किया तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल उसका पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को निशाना बनाने वाला है। वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि जब छात्र पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को यह बताना चाहिए कि लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। वेणुगोपाल ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर भी आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा कि इसका उन राज्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।

    कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी
    कांग्रेस एक ओर गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग कर रही है तो दूसरी ओर केंद्र सोमवार को संसद में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित केरल नाम परिवर्तन विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयेक कार्यसूची में शामिल हैं। वहीं, राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी एक विधेयक पेश करेंगी।

    छात्रों के साथ पूरी ताकत से खड़ा हूं: राहुल गांधी
    एनसीपी (एसपी) के सांसद सोमवार को पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले की अगुवाई में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। सुले के मुताबिक, यह मुलाकात महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर है। हालांकि, पार्टी ने एफसीआरए बिल पर रुख साफ कर दिया। कहा, विधेयक का मौजूदा स्वरूप पार्टी के विचारों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए कहा, वह पूरी ताकत से उनके साथ खड़े हैं। प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में मिले एक छात्र की बात का जिक्र करते हुए कहा, यह सिर्फ उसकी नहीं, पूरी व्यवस्था की हार है।