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  • स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा दांव! चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की घोषणा की

    स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा दांव! चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की घोषणा की

     देहरादून

    उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सभी तरह की जांचें निशुल्क होने जा रही हैं।

    दरअसल, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में हर दिन औसतन 50 हजार मरीज आते हैं। तकरीबन 15 हजार मरीज किसी न किसी पैथोलॉजी या फिर दूसरी जांच से गुजरते हैं। अभी इसके लिए तय शुल्क देना पड़ता है, पर सरकार अब राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों का इलाज निजी सेंटर की तुलना में सस्ता है, लेकिन कई बार पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच पर 500 से 1000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

    जल्द आ रही नई व्यवस्था
    जल्द नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह खर्च भी मरीजों को नहीं उठाना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक, सरकार जल्द ही इस योजना का औपचारिक ऐलान कर सकती है। बता दें कि, उत्तराखंड के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में पैथोलॉजी की 200 से अधिक प्रकार की जांचें होती हैं।

    उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आम मरीजों को राहत देने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में होने वाली इन-हाउस जांच को निशुक्ल करने का फैसला लिया जा रहा है। जल्द ही इस योजना का ऐलान किया जाएगा।

    15 हजार को रोज लाभ
    सरकार की योजना लागू होने के बाद हर दिन औसतन पंद्रह हजार मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सुविधा 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज, 13 जिला अस्पतालों के साथ ही 95 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारी है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग ने जिला, उप जिला और कुछ सामुदायिक अस्पतालों में मुफ्त जांच को निजी लैब से समझाैता किया है। इन अस्पतालों में इस लैब के काउंटर भी चल रहे हैं, जहां मरीजों से जांच का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, अधिकांश मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे शुल्क जमा कराकर जांच कराते हैं।

    विपक्ष को सद् बुद्धि दें भोलेनाथ : धामी
    हरिद्वार: इस बीच हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सनातन परंपरा और संत समाज भारतीय संस्कृति की मूल धारा हैं। इनके सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सांसद पप्पू यादव और उनके सहयोगियों पर सनातन परंपरा और संतों का उपहास उड़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह भोलेनाथ और मां गंगा से उन्हें सद् बुद्धि देने की प्रार्थना करते हैं।

    अटूट आस्था को कोई डिगा नहीं सकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग सनातन और आस्था के मार्ग में बाधाएं खड़ी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन करोड़ों लोगों की अटूट श्रद्धा को कोई डिगा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि संत समाज ने अपना पूरा जीवन धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया है। ऐसे में संतों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांवड़ यात्रा में संयम और मर्यादा बनाए रखें भक्त
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए कांवड़ यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। उन्होंने भक्तों से संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि होटल-ढाबों में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार मुहिम चला रहा है। उन्होंने माना कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ घटनाएं हुई हैं, मगर अधिकांश भक्त पूरी श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं।

    हेलीकॉप्टर के जरिये की गई पुष्प वर्षा
    मुख्यमंत्री मंगलवार को हरिद्वार स्थित अलकनंदा घाट पर कांवड़ियों के अभिनंदन समारोह में पहुंचे। उन्होंने पांच कांवड़ियों का ‘चरण प्रक्षालन’ किया। कांवड़ियों के बीच अपने हाथों से भोजन भी परोसा। वहीं, हरकी पैड़ी से कांवड़ यात्रा मार्ग तक हेलीकॉप्टर के जरिये फूल बरसाकर भक्तों का स्वागत किया गया।

    सामाजिक सद्भाव की प्रतीक है कांवड़ यात्रा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, समर्पण और सामाजिक सद्भाव की प्रतीक भी है। भगवान शिव अपने भक्तों पर सहज कृपा करते हैं और श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी भक्तों के कष्ट हरने का माध्यम बनता है। उन्होंने बताया, इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक भक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर जा चुके हैं।

    कांवड़ यात्रा मार्गों पर भी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया। विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में अब तक 48 हजार श्रद्धालुओं का उपचार किया जा चुका है।

  • तृषा पर विवादित टिप्पणी पड़ी भारी! पूर्व डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार

    तृषा पर विवादित टिप्पणी पड़ी भारी! पूर्व डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार

    चेन्नई 

    कावेरी जल विवाद को लेकर सीएम विजय थलपति पर निशाना साधते-साधते एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने अभिनेत्री तृषा को लेकर विवाद टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने 'तृषा, तृषा' के नारे लगाए। उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘डबल मीनिंग’ अश्लील टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। उदयनिधि ने कहा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा था और ना ही किसी का नाम लिया था। अब कोर्ट ही सही गलत का फैसला करेगा। स्टालिन ने यह भी कहा कि इसका परिणाम भुगतने के लिए वह तैयार हैं।

    बीजेपी ने भी उदयनिधि की टिप्पणी की निंदा की
    तमिलनाडु की भाजपा इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुप
    ति ने 'एक्स' पर कहा कि उदयनिधि की कथित 'डबल मीनिंग' टिप्पणी ‘घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक’ है। भाजपा नेता ने कहा, ''सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।' उन्होंने कहा था कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए।

    तिरुपति ने कहा, ‘इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (द्रमुक विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।’ टीवीके विधायक रेवंत चरण ने भी इस बयान को घटिया बताया था और कहा थि कि जानबूझकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब कावेरी मामले में उनके प्रोटेस्ट को सपोर्ट नहीं मिला तो वह घटिया भाषा का इस्तेमाल करने लगे।

    बता दें कि यह विवाद तब सामने आया है जब कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु सरकार कर्नाटक सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। विजय सरकार का आरोप है कि कर्नाटक, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनिमयन समिति के निर्देश के बाद भी उसके हिस्सा के पानी नहीं छोड़ रहा है। वहीं उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला।

    TVK ने DMK नेता की आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की थी. NDTV से बात करते हुए TVK के अमेरिका नारायणन ने बदले की भावना के आरोप को खारिज करते हुए कहा, उदयनिधि स्टालिन को मुख्यमंत्री विजय या TVK के खिलाफ बोलने के लिए नहीं, बल्कि एक महिला का अपमान करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। 

    TVK नेता ने उदयनिधि पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपना नाम बदलकर "वल्गर-निधि कर लेना चाहिए. सोमवार को तंजावुर में कावेरी विवाद को लेकर एक विरोध प्रदर्शनमें उदयनिधि ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला, जबकि मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर बेपरवाह बने रहे हैं। 

    यह रैली तब विवादों में घिर गई जब भीड़ में से किसी ने 'त्रिशा, त्रिशा' के नारे लगाए. उदयनिधि ने अपना भाषण रोककर एक कुटिल मुस्कान के साथ आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की. उनकी इस टिप्पणी के बाद भारी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। 

    इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखा और DMK नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पार्टी ने उदयनिधि के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है. TVK ने NCW को दी गई अपनी शिकायत में कहा है, भीड़ के नारों से प्रेरित होकर, उदयनिधि स्टालिन ने एक सेलेब्रिटी को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक दोहरे अर्थ वाली और अश्लील टिप्पणियां कीं. शिकायत में आगे कहा गया है कि एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को वस्तु समझने और उनके मौखिक उत्पीड़न को सामान्य बनाता है। 

  • टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर! लोकसभा में पेश होगा इनकम टैक्स संशोधन बिल, बैंकिंग सेक्टर पर भी हो सकते हैं अहम फैसले

    टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर! लोकसभा में पेश होगा इनकम टैक्स संशोधन बिल, बैंकिंग सेक्टर पर भी हो सकते हैं अहम फैसले

    नई दिल्ली

    संसद में आज टैक्स से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक कई बड़े फैसलों की तैयारी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में कई अहम बिल पेश करने वाली हैं.  संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान लोगों की नजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर रहेगी, जो टैक्स और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेंगी. बताया जा रहा है कि सबसे पहले वित्त मंत्री Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश करेंगी. इस बिल के जरिए पेमेंट सिस्टम, इनकम टैक्स और फाइनेंस एक्ट से जुड़े कुछ कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव है। 

    सरकार का कहना है कि बदलती जरूरतों और नई व्यवस्था के मुताबिक इन कानूनों को अपडेट करना जरूरी है. वित्त मंत्री सदन में ये भी बताएंगी कि सरकार को Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 क्यों लाना पड़ा और इसे तुरंत लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। 

    बैंकिंग रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन से जुड़ा बिल 
    आज लोकसभा में सदन में Bankers' Books Evidence Bill, 2026 पर भी चर्चा होगी. इस बिल का मकसद बैंकों के रिकॉर्ड से जुड़े पुराने कानूनों को डिजिटल दौर के हिसाब से बदलना है. इससे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े दस्तावेजों को कानूनी प्रक्रिया में और स्पष्ट तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। 

    बजट से ज्‍यादा खर्च… मिल सकती है कानूनी मंजूरी 
    इसके अलावा साल 2022-23 के अतिरिक्त सरकारी खर्च (Excess Grants) पर भी चर्चा होगी. इसका मतलब है कि सरकार ने कुछ मदों में संसद से मंजूर राशि से ज्यादा खर्च किया था. अब उस अतिरिक्त खर्च को संसद से मंजूरी दिलाने के लिए चर्चा होगी. इसके बाद सरकार Appropriation (No. 3) Bill, 2026 भी पेश करेगी, ताकि उस अतिरिक्त खर्च को कानूनी मंजूरी मिल सके। 

    MSME पर लाए गए बिल पर भी चर्चा 
    लोकसभा में आज राज्यसभा से पारित MSME Development (Amendment) Bill, 2026 का संदेश भी रखा जाएगा. इसके अलावा लोक लेखा समिति (PAC), सरकारी आश्वासन समिति और आवासन एवं शहरी कार्य संबंधी संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेंगी। 

    सदन में वाणिज्य, ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समितियों की सिफारिशों पर सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है, इसकी जानकारी भी संबंधित मंत्री देंगे। 

  • IMD Weather Alert: 3 अगस्त को कई राज्यों में झमाझम बारिश के आसार, यूपी-बिहार से कश्मीर तक मौसम रहेगा बिगड़ा

    IMD Weather Alert: 3 अगस्त को कई राज्यों में झमाझम बारिश के आसार, यूपी-बिहार से कश्मीर तक मौसम रहेगा बिगड़ा

    नई दिल्ली

    उत्तर भारत में कुछ समय के मॉनसूनी ब्रेक के बाद एक बार फिर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, उत्तर, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के राज्यों में 7 अगस्त तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके अलावा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश कम होगी। अगले पांच दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 3 अगस्त से 7 या 8 अगस्त तक पहाड़ों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। ऐसे में पर्यटकों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।

    16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघायलट, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, सिक्किम, मणिपुर और मध्य प्रेदश में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा ज्यादातर राज्यों में 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का भी अलर्ट जारी किया गया है।

    यूपी-बिहार का मौसम
    मौसम विभाग ने 3 से 8 अगस्त तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश का दौर पूरे रराज्यमें ही जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि 3 अगस्त को लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, देविरिया, बलिया, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, संत कबीरनगर, आंबेडकर नगर, अयोध्या, बस्ती और अन्य पूर्वी जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग ने बिहार में भी 3 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताी है। यहां अधिकतर जिले में 3 से 5 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहगा। इसके अलावा हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रह सकती है।

    दिल्ली में हो सकती बारिश
    मौसम विभाग ने दिल्ली में 4 से 7 अगस्त तक मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं 3 अगस्त को हल्की बारिश हो सकती है। राजधानी का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रह सकता है। वहीं दिल्ली एनसीआर में बादल छाए रहेंगे।

    पहाड़ों में भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 3 से 8 अगस्त तक कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसमें चंबा, हमीरपुर, किन्नौर, कांगड़ा, लाहौल, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, शिमला और सोलन जिले शामिल हैं। वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, देहरादून, उत्तर काशी, रूद्रप्रयाग जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर में बारिश से बुरा हाल है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिनों तक जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश जारी रहेगी। कश्मीर में कहीं पहाड़ दड़क रहे हैं तो कहीं बादल फट रहे हैं। ऐसे में अनंतनाग, कुलगाम, बारामूला समेत कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। कश्मीर की नदियां उफान पर हैं और जन-जीवन अस्तव्यस्त हो गया है।

    पंजाब और हरियाणा का मौसम
    मौसम विभाग ने पंजाब और हरियाणा में भी 3 और 4 अगस्त को व्यापक बारिश की संभावना जताई है। इसके बाद 5 और 6 तारीख को भी अलग-अलग जगहों पर बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं 8 अगस्त को हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही राजस्थान में भी 3 से 8 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा। हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है।

  • मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    नई दिल्ली
     दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वहीं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के शिवमोगा में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई है।

    केरल में बारिश से 8 की मौत
    केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य लापता हैं। इसके अलावा 13 लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए राज्यभर में 5,792 लोगों को सुरक्षित निकालते हुए 209 राहत शिविरों में भेजा गया है।

    आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन राज्य में बारिश की स्थिति को लेकर विभिन्न जिलों के प्रभारी मंत्रियों और जिला प्रशासनों के लगातार संपर्क में हैं।

    पिछले दिन की तुलना में बारिश में थोड़ी कमी आई है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिली है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। आपदा में 27 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

    सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए चेतावनी
    राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ-साथ बेघर हुए और अपनी फसलें व आजीविका खोने वाले लोगों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इस बीच, त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने 2 और 3 अगस्त को निरपुथरी के अवसर पर सबरीमाला जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। भारी बारिश, पंपा नदी में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

    कर्नाटक में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत
    कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण शिवमोगा जिले के इंदिरा नगर इलाके में रविवार तड़के करीब 2:30 बजे भूस्खलन हुआ। इस हादसे में एक अस्थायी शेड मलबे में दब गया, जिससे उसमें रह रहे एक प्रवासी मजदूर परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और उनके तीन वर्षीय बेटे के रूप में हुई है। यह परिवार कोप्पल जिले के गंगावती तालुक स्थित कोक्करेगारू गांव का रहने वाला था और पिछले दो वर्षों से इस शेड में रह रहा था।

    पुलिस और अग्निशमन व आपातकालीन सेवा विभाग ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों शवों को मलबे से बाहर निकाला। पास के शेड में रहने वाला एक अन्य मजदूर इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे तीर्थहल्ली के जयचामराजेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के जोखिम को उजागर कर दिया है।

  • नशे से दूर रहें, पीएम मोदी ने युवाओं को किया जागरूक

    नशे से दूर रहें, पीएम मोदी ने युवाओं को किया जागरूक

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को  'नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान' कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं. देश के 1 करोड़ से ज्यादा युवा इस कार्यक्रम में शामिल जुड़ने वाले हैं. यह कार्यक्रम देश भर में 28,000 से ज़्यादा जगहों पर आयोजित किया जा रहा है. इस लॉन्च कार्यक्रम में कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी हिस्सा ले रहे हैं.

    यह कार्यक्रम 125 से ज़्यादा आध्यात्मिक संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों, सार्वजनिक संगठनों और औद्योगिक संघों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. इसमें ब्रह्माकुमारीज़, इस्कॉन, चिन्मय मिशन और ऑरोविले के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

    प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि ड्रग्स जैसी घातक आदतों से दूर रहें, यही इस अभियान का संकल्प है. उन्होंने कहा, "हमें संकल्प लेना है कि हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझें. हर तरह से जागरूक रहें और उससे दूर रहें. इस संकल्प में अब राष्ट्रीय नशामुक्ति अभियान की शुरूआत हुई."

    प्रधानमंत्री ने इस बात की खुशी जताई कि काशी से पिछले साल इस अभियान के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. उन्होंने कहा, "काशी से इस अभियान का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ इसलिए वैज्ञानिक पद्धता के साथ ही इसमें अध्यात्मिक ऊर्जा भी है. इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है. यही वजह से है कि देश के 125 से अधिक अध्यात्मिक संगठन देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ रहे हैं. सामाजिक संगठन, NGO ने इस दिशा में संकल्प लिया. सबने मिलकर काशी डिक्येरेशन के जरिए रोडमैप तैयार किया है."

    उन्होंने आगे कहा, "काशी से उठा वह कल्याणकारी विचार नेशनल प्रोजेक्ट बन गया है. आज से देश भर में नशामुक्त युवा अभियान शुरू हो रहा है. यह अभियान हर युवा वर्ग को जोड़ने वाला है. लाखों युवाओं ने थोड़ी देर पहले नशामुक्ति की शपथ ली है. यह संकल्प आने वाले 100 हफ्ते तक चलेगा. हर रविवार कला, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां नशामुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा. आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे."

    पीएम ने नशामुक्ति के लिए युवाओं को जागरूक करते हुए कहा कि नशा एक मां के सपने को चूर-चूर कर देता है, नशा एक बहन को उसके भाई से दूर कर देता हैं. पीएम ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.

  • 2029 Lok Sabha Election: Gen Z की बढ़ेगी राजनीतिक ताकत, हर चौथा वोटर होगा युवा; बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

    2029 Lok Sabha Election: Gen Z की बढ़ेगी राजनीतिक ताकत, हर चौथा वोटर होगा युवा; बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

    नई दिल्ली

    छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की लहर, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, ने एक राजनीतिक वास्तविकता को और मजबूत कर दिया है जिसे सरकारें अब नजरअंदाज नहीं कर सकतीं: भारत की जेनरेशन जेड देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक समूहों में से एक के रूप में उभर रही है।

    NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही पारदर्शिता, जवाबदेही और भारत की शिक्षा प्रणाली के भविष्य पर एक व्यापक चर्चा में तब्दील हो गया। इस आंदोलन ने यह भी उजागर किया कि डिजिटल रूप से तेजी से जुड़ चुके युवा भारतीय किस प्रकार राष्ट्रीय विमर्श को आकार दे सकते हैं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

    ये विरोध प्रदर्शन एक बहुत बड़े राजनीतिक बदलाव की झलक साबित हो सकते हैं। 2029 के आम चुनाव तक, जेनरेशन Z देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन चुकी होगी, जिससे यह एक ऐसी चुनावी ताकत बन जाएगी जिसे कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता।

    भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी
    2029 तक, 18 से 32 साल की उम्र वाले 'Gen Z' की आबादी लगभग 38 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें लगभग 19.9 करोड़ पुरुष और 18.1 करोड़ महिलाएं शामिल होंगी। यह उन्हें भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बना देगा, जो 'मिलेनियल्स' (Millennials) से आगे निकल जाएगी, जिनकी आबादी निकल जाएगी, जिसकी आबादी लगभग 35.7 करोड़ होने का अनुमान है।

    इस बदलाव का महत्व केवल आबादी के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। 'Gen Z'देश में छात्रों, पहली बार वोट देने वालों, करियर की शुरुआत करने वाले पेशेवरों और युवा परिवारों का सबसे बड़ा समूह होगा। इसलिए, रोजगार, शिक्षा, खर्च की क्षमता, आवास, जलवायु परिवर्तन और शासन जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    इनके पीछे 'जेन अल्फा' (Generation Alpha) की और भी बड़ी पीढ़ी तैयार हो रही है। हालांकि, 2029 में इसके सदस्य वोट देने की उम्र से कम होंगे, लेकिन उनकी आबादी 41.7 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है, जो कुल मिलाकर भारत की सबसे बड़ी पीढ़ी होगी।

    हिस्सा कम, लेकिन वोट ज्यादा प्रभावशाली
    भले ही 'Gen Z'की भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन रही है, लेकिन वोटरों में युवाओं की कुल हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है क्योंकि भारत की आबादी धीरे-धीरे बूढ़ी हो रही है। 1988 में भारत की वोट देने लायक आबादी में 18 से 29 साल के लोगों की हिस्सेदारी 38.3 प्रतिशत थी। 2024 तक यह हिस्सा घटकर 30.1 प्रतिशत हो गया और यूएन के अनुमान बताते हैं कि 2019 तक यह और घटकर 27.8 प्रतिशत हो जाएगी।

    दूसरे शब्दों में, इस दशक के आखिर तक हर चार योग्य वोटर में लगभग एक वोटर 18-29 साल की उम्र का होगा।

    लेकिन सिर्फ संख्या ही राजनीतिक असर तय नहीं करती। 'Gen Z' में बड़ी संख्या के साथ-साथ जबरदस्त डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर शिक्षा की चाहत और सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोगों को एकजुट करने की क्षमता भी है। हाल के छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने दिखाया है कि युवाओं पर असर डालने वाले मुद्दे कितनी तेजी से राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडे पर छा सकते हैं।

    राजनीतिक पार्टियों के लिए, 'Gen Z' का समर्थन हासिल करना उतना ही जरूरी हो सकता है जितना कि बुजुर्ग वोटरों का समर्थन बनाए रखना।

    बूढ़ी हो रही भारत की आबादी
    'Gen Z' का उभार एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव के साथ-साथ हो रहा है। भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, बच्चों की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है, जबकि ज्यादा उम्र वाले लोगों की आबादी में हिस्सेदारी बढ़ रही है।

    पुरुषों में, 18 साल से कम उम्र वालों की हिस्सेदारी 1989 में 45.2 प्रतिशत से घटकर 2029 में 27.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। महिलाओं में, इसी दौरान यह 44.8 प्रतिशत से घटकर 27.3 होने की उम्मीद है।

    वहीं, 46 से 61 साल की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ है। पुरुषों में यह 10.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.3 प्रतिशत और महिलाओं में 11.3 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई है।

    62 साल और उससे ज्यादा उम्र की आबादी और भी तेजी से बढ़ी है। पुरुषों में इस ग्रुर की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 9.9 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि महिलाओं में इसके 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो महिलाओं की ज्यादा उम्र तक जीने की क्षमताओं को दिखाता है।

    जैसे-जैसे भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, युवा आबादी से मिलने वाला डेमोग्राफिर डिविडेंड धीरे-धीरे कम होता जाएगा। इसलिए अभी का समय बहुत अहम है। 'Gen Z' ऐसे समय में वयस्क हो रही है, जब यह देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी, सबसे ज्यादा डिजिटल रूप से जुड़ी और सबसे ज्यादा जागरूक पीढ़ी बन रही है।

    NEET विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को शायद सिर्फ एक परीक्षा से जुड़े आंदोलन के तौर पर नहीं, बल्कि इस पीढ़ी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के शुरुआती प्रदर्शन के तौर पर याद किया जाएगा।

  • Vande Bharat बनी लाइफलाइन! सूरत से अहमदाबाद ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव हार्ट, देश में पहली बार हुआ ऐसा

    Vande Bharat बनी लाइफलाइन! सूरत से अहमदाबाद ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव हार्ट, देश में पहली बार हुआ ऐसा

    भारत में पहली बार ट्रेन से लाइव हार्ट का परिवहन, वंदे भारत एक्सप्रेस से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा जीवित हृदय

    भारतीय रेल ने रचा इतिहास, यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट में होगा प्रत्यारोपण

    अहमदाबाद

    भारतीय रेल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से जीवित हृदय (Live Heart) का सफलतापूर्वक परिवहन किया। सूरत से अहमदाबाद तक हृदय को ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से सुरक्षित एवं निर्धारित समय में पहुंचाया गया। इस हृदय का प्रत्यारोपण यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में किया जाएगा।

    यह अत्यंत संवेदनशील और समयबद्ध जीवनरक्षक अभियान भारतीय रेल, गुजरात राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) तथा चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण रहा।

    हृदय को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए RPF और गुजरात राज्य पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके माध्यम से अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।

    मंडल रेल प्रबंधक, अहमदाबाद, श्री वेद प्रकाश ने कहा, “यह भारतीय रेल के लिए अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से एक जीवित हृदय को सूरत से अहमदाबाद तक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया गया। ऐसे जीवनरक्षक मिशन में समय का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेल, RPF, गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया। किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में भारतीय रेल की भूमिका निभाना हमारे लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सर्वोच्च दायित्व है।”

    वंदे भारत एक्सप्रेस की गति, समयपालन और विश्वसनीयता ने इस जीवनरक्षक अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय रेल केवल यात्रियों और माल के परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभा रही है।

    इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता में भारतीय रेल के विभिन्न विभागों, RPF, गुजरात राज्य पुलिस, चिकित्सकों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों तथा सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी एजेंसियों के बीच प्रभावी एवं त्वरित समन्वय के कारण यह चुनौतीपूर्ण जीवनरक्षक अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

    यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रेल की त्वरित, सुरक्षित और विश्वसनीय सेवाओं के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

  • विवाद के बाद बदले सुर! पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली रुचिका ने मांगी माफी, वीडियो हुआ वायरल

    विवाद के बाद बदले सुर! पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली रुचिका ने मांगी माफी, वीडियो हुआ वायरल

    नई दिल्ली

    दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आरोपी रुचिका सिंह का एक माफी वाला वीडियो सामने आया है. वायरल वीडियो में वह खुद को 15 साल की बताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांग रही है. उसका कहना है कि वह कनॉट प्लेस घूमने के बाद दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थी और वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर उसने ऐसी बातें कहीं. इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है। 

    वीडियो में रुचिका कहती है कि वह उन लोगों के प्रभाव में आ गई थी और उसने जो कुछ भी कहा वह माफी के लायक नहीं था. उसने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए पूरे देश से माफी मांगी और कहा कि उसे खुद पर शर्म आ रही है। 

    यह वीडियो पीएम मोदी के उस बयान के कुछ घंटों बाद सामने आया जिसमें उन्होंने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान उन्हें गाली देने वाले छात्रों को माफ कर दिया है. मोदी ने कहा कि उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्द उन्हें परेशान करने वाले थे, लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए। 

    इससे पहले 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी. आरोप है कि उसने पीएम के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई और जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जिसे बाद में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने भेज दिया गया। 

    जानकारी के अनुसार रुचिका अपनी मां के साथ नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी. उसका फ्लैट फिलहाल बंद है और सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक वह प्रदर्शन के बाद से वापस नहीं लौटी है. पुलिस भी सोसाइटी पहुंचकर वहां के लोगों से पूछताछ कर चुकी है। 

    इस एफआईआर पर प्रदर्शन आयोजित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने आपत्ति जताई है. पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी बातों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से बोलने की आजादी पर बुरा असर पड़ सकता है. उनका सुझाव था कि पीड़ित पक्ष को मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहिए, आपराधिक कार्रवाई का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। 

  • भिवंडी में दर्दनाक हादसा! 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

    भिवंडी में दर्दनाक हादसा! 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

    मुंबई
     महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में इमारत का हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया है। नारपोली स्थित भंडारी कंपाउंड में एक चार मंजिला कोहिनूर इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई।

    मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, नगर निगम की टीम और एनडीआरएफ (एडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है।

    जर्जर घोषित थी इमारत, ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम
    भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह नारपोली के भंडारी कंपाउंड स्थित कोहिनूर इमारत है।नगर निगम ने पहले ही इस इमारत को 'सी-कैटेगरी' (बेहद खतरनाक और जर्जर) घोषित कर दिया था, जिसके बाद इसे खाली करा लिया गया था।हालांकि, इमारत खाली होने के बावजूद इसके ग्राउंड फ्लोर पर कुछ मजदूर काम कर रहे थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि मलबे में अभी भी कुछ मजदूर दबे हो सकते हैं।

    जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई की देर रात बिल्डिंग थोड़ी झुक गई, जिसके बाद कई दूसरे मजदूर बिल्डिंग से बाहर भाग गए. बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम चल रहा था, इसलिए घटना के वक्त इमारत के अंदर कोई नहीं था। NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं. मलबा हटाए जाने का काम जारी है। 

    नींव कमजोर होने के चलते गिरी इमारत!
    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि पिछले कुछ दिनों से इस पुरानी इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था. ठेकेदार और मजदूरों ने मरम्मत के दौरान इमारत के 3 पिलर तोड़ दिए थे. पिलर टूटने की वजह से इमारत की नींव कमजोर हो गई और वो अपना संतुलन खोकर पूरी तरह जमींदोज हो गई। 

    समय रहते बाहर निकले ज्यादातर लोग
    इस भीषण हादसे के बीच राहत की बात ये रही कि इमारत ढहने से ठीक पहले कुछ सुगबुगाहट और आवाज हुई थी. खतरा भांपते ही ज्यादातर रहवासी समय रहते इमारत से बाहर भाग निकले, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। 

    हालांकि, पहली मंजिल पर रहने वाले कुछ लोग और वहां काम कर रहे मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं. जिला प्रशासन और आपातकालीन टीमों की पहली प्राथमिकता मलबे को साफ कर सभी फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की है। 

    लोगों से सहयोग की अपील…

    हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई रुकावट न आए, इसके लिए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इलाके में भीड़ न लगाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें. घटना में घायल या मरने वालों की सही तादाद के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। 

    NDRF ने महिला को सुरक्षित निकाला बाहर
    राहत और बचाव कार्य के बीच एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। मलबे के नीचे से एक महिला को जीवित और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महिला को तुरंत इलाज के लिए पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।