Category: देश

  • मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    मानसून का प्रहार: केरल बाढ़ से बेहाल, कर्नाटक में भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

    नई दिल्ली
     दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वहीं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के शिवमोगा में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई है।

    केरल में बारिश से 8 की मौत
    केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य लापता हैं। इसके अलावा 13 लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए राज्यभर में 5,792 लोगों को सुरक्षित निकालते हुए 209 राहत शिविरों में भेजा गया है।

    आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन राज्य में बारिश की स्थिति को लेकर विभिन्न जिलों के प्रभारी मंत्रियों और जिला प्रशासनों के लगातार संपर्क में हैं।

    पिछले दिन की तुलना में बारिश में थोड़ी कमी आई है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिली है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। आपदा में 27 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

    सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए चेतावनी
    राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ-साथ बेघर हुए और अपनी फसलें व आजीविका खोने वाले लोगों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इस बीच, त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने 2 और 3 अगस्त को निरपुथरी के अवसर पर सबरीमाला जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। भारी बारिश, पंपा नदी में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

    कर्नाटक में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत
    कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण शिवमोगा जिले के इंदिरा नगर इलाके में रविवार तड़के करीब 2:30 बजे भूस्खलन हुआ। इस हादसे में एक अस्थायी शेड मलबे में दब गया, जिससे उसमें रह रहे एक प्रवासी मजदूर परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और उनके तीन वर्षीय बेटे के रूप में हुई है। यह परिवार कोप्पल जिले के गंगावती तालुक स्थित कोक्करेगारू गांव का रहने वाला था और पिछले दो वर्षों से इस शेड में रह रहा था।

    पुलिस और अग्निशमन व आपातकालीन सेवा विभाग ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों शवों को मलबे से बाहर निकाला। पास के शेड में रहने वाला एक अन्य मजदूर इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे तीर्थहल्ली के जयचामराजेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के जोखिम को उजागर कर दिया है।

  • नशे से दूर रहें, पीएम मोदी ने युवाओं को किया जागरूक

    नशे से दूर रहें, पीएम मोदी ने युवाओं को किया जागरूक

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को  'नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान' कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं. देश के 1 करोड़ से ज्यादा युवा इस कार्यक्रम में शामिल जुड़ने वाले हैं. यह कार्यक्रम देश भर में 28,000 से ज़्यादा जगहों पर आयोजित किया जा रहा है. इस लॉन्च कार्यक्रम में कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी हिस्सा ले रहे हैं.

    यह कार्यक्रम 125 से ज़्यादा आध्यात्मिक संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों, सार्वजनिक संगठनों और औद्योगिक संघों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. इसमें ब्रह्माकुमारीज़, इस्कॉन, चिन्मय मिशन और ऑरोविले के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

    प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि ड्रग्स जैसी घातक आदतों से दूर रहें, यही इस अभियान का संकल्प है. उन्होंने कहा, "हमें संकल्प लेना है कि हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझें. हर तरह से जागरूक रहें और उससे दूर रहें. इस संकल्प में अब राष्ट्रीय नशामुक्ति अभियान की शुरूआत हुई."

    प्रधानमंत्री ने इस बात की खुशी जताई कि काशी से पिछले साल इस अभियान के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. उन्होंने कहा, "काशी से इस अभियान का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ इसलिए वैज्ञानिक पद्धता के साथ ही इसमें अध्यात्मिक ऊर्जा भी है. इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है. यही वजह से है कि देश के 125 से अधिक अध्यात्मिक संगठन देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ रहे हैं. सामाजिक संगठन, NGO ने इस दिशा में संकल्प लिया. सबने मिलकर काशी डिक्येरेशन के जरिए रोडमैप तैयार किया है."

    उन्होंने आगे कहा, "काशी से उठा वह कल्याणकारी विचार नेशनल प्रोजेक्ट बन गया है. आज से देश भर में नशामुक्त युवा अभियान शुरू हो रहा है. यह अभियान हर युवा वर्ग को जोड़ने वाला है. लाखों युवाओं ने थोड़ी देर पहले नशामुक्ति की शपथ ली है. यह संकल्प आने वाले 100 हफ्ते तक चलेगा. हर रविवार कला, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां नशामुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा. आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे."

    पीएम ने नशामुक्ति के लिए युवाओं को जागरूक करते हुए कहा कि नशा एक मां के सपने को चूर-चूर कर देता है, नशा एक बहन को उसके भाई से दूर कर देता हैं. पीएम ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.

  • 2029 Lok Sabha Election: Gen Z की बढ़ेगी राजनीतिक ताकत, हर चौथा वोटर होगा युवा; बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

    2029 Lok Sabha Election: Gen Z की बढ़ेगी राजनीतिक ताकत, हर चौथा वोटर होगा युवा; बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

    नई दिल्ली

    छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की लहर, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, ने एक राजनीतिक वास्तविकता को और मजबूत कर दिया है जिसे सरकारें अब नजरअंदाज नहीं कर सकतीं: भारत की जेनरेशन जेड देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक समूहों में से एक के रूप में उभर रही है।

    NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही पारदर्शिता, जवाबदेही और भारत की शिक्षा प्रणाली के भविष्य पर एक व्यापक चर्चा में तब्दील हो गया। इस आंदोलन ने यह भी उजागर किया कि डिजिटल रूप से तेजी से जुड़ चुके युवा भारतीय किस प्रकार राष्ट्रीय विमर्श को आकार दे सकते हैं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

    ये विरोध प्रदर्शन एक बहुत बड़े राजनीतिक बदलाव की झलक साबित हो सकते हैं। 2029 के आम चुनाव तक, जेनरेशन Z देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन चुकी होगी, जिससे यह एक ऐसी चुनावी ताकत बन जाएगी जिसे कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता।

    भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी
    2029 तक, 18 से 32 साल की उम्र वाले 'Gen Z' की आबादी लगभग 38 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें लगभग 19.9 करोड़ पुरुष और 18.1 करोड़ महिलाएं शामिल होंगी। यह उन्हें भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बना देगा, जो 'मिलेनियल्स' (Millennials) से आगे निकल जाएगी, जिनकी आबादी निकल जाएगी, जिसकी आबादी लगभग 35.7 करोड़ होने का अनुमान है।

    इस बदलाव का महत्व केवल आबादी के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। 'Gen Z'देश में छात्रों, पहली बार वोट देने वालों, करियर की शुरुआत करने वाले पेशेवरों और युवा परिवारों का सबसे बड़ा समूह होगा। इसलिए, रोजगार, शिक्षा, खर्च की क्षमता, आवास, जलवायु परिवर्तन और शासन जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    इनके पीछे 'जेन अल्फा' (Generation Alpha) की और भी बड़ी पीढ़ी तैयार हो रही है। हालांकि, 2029 में इसके सदस्य वोट देने की उम्र से कम होंगे, लेकिन उनकी आबादी 41.7 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है, जो कुल मिलाकर भारत की सबसे बड़ी पीढ़ी होगी।

    हिस्सा कम, लेकिन वोट ज्यादा प्रभावशाली
    भले ही 'Gen Z'की भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन रही है, लेकिन वोटरों में युवाओं की कुल हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है क्योंकि भारत की आबादी धीरे-धीरे बूढ़ी हो रही है। 1988 में भारत की वोट देने लायक आबादी में 18 से 29 साल के लोगों की हिस्सेदारी 38.3 प्रतिशत थी। 2024 तक यह हिस्सा घटकर 30.1 प्रतिशत हो गया और यूएन के अनुमान बताते हैं कि 2019 तक यह और घटकर 27.8 प्रतिशत हो जाएगी।

    दूसरे शब्दों में, इस दशक के आखिर तक हर चार योग्य वोटर में लगभग एक वोटर 18-29 साल की उम्र का होगा।

    लेकिन सिर्फ संख्या ही राजनीतिक असर तय नहीं करती। 'Gen Z' में बड़ी संख्या के साथ-साथ जबरदस्त डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर शिक्षा की चाहत और सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोगों को एकजुट करने की क्षमता भी है। हाल के छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने दिखाया है कि युवाओं पर असर डालने वाले मुद्दे कितनी तेजी से राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडे पर छा सकते हैं।

    राजनीतिक पार्टियों के लिए, 'Gen Z' का समर्थन हासिल करना उतना ही जरूरी हो सकता है जितना कि बुजुर्ग वोटरों का समर्थन बनाए रखना।

    बूढ़ी हो रही भारत की आबादी
    'Gen Z' का उभार एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव के साथ-साथ हो रहा है। भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, बच्चों की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है, जबकि ज्यादा उम्र वाले लोगों की आबादी में हिस्सेदारी बढ़ रही है।

    पुरुषों में, 18 साल से कम उम्र वालों की हिस्सेदारी 1989 में 45.2 प्रतिशत से घटकर 2029 में 27.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। महिलाओं में, इसी दौरान यह 44.8 प्रतिशत से घटकर 27.3 होने की उम्मीद है।

    वहीं, 46 से 61 साल की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ है। पुरुषों में यह 10.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.3 प्रतिशत और महिलाओं में 11.3 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई है।

    62 साल और उससे ज्यादा उम्र की आबादी और भी तेजी से बढ़ी है। पुरुषों में इस ग्रुर की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 9.9 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि महिलाओं में इसके 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो महिलाओं की ज्यादा उम्र तक जीने की क्षमताओं को दिखाता है।

    जैसे-जैसे भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, युवा आबादी से मिलने वाला डेमोग्राफिर डिविडेंड धीरे-धीरे कम होता जाएगा। इसलिए अभी का समय बहुत अहम है। 'Gen Z' ऐसे समय में वयस्क हो रही है, जब यह देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी, सबसे ज्यादा डिजिटल रूप से जुड़ी और सबसे ज्यादा जागरूक पीढ़ी बन रही है।

    NEET विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को शायद सिर्फ एक परीक्षा से जुड़े आंदोलन के तौर पर नहीं, बल्कि इस पीढ़ी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के शुरुआती प्रदर्शन के तौर पर याद किया जाएगा।

  • Vande Bharat बनी लाइफलाइन! सूरत से अहमदाबाद ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव हार्ट, देश में पहली बार हुआ ऐसा

    Vande Bharat बनी लाइफलाइन! सूरत से अहमदाबाद ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव हार्ट, देश में पहली बार हुआ ऐसा

    भारत में पहली बार ट्रेन से लाइव हार्ट का परिवहन, वंदे भारत एक्सप्रेस से सूरत से अहमदाबाद पहुंचा जीवित हृदय

    भारतीय रेल ने रचा इतिहास, यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट में होगा प्रत्यारोपण

    अहमदाबाद

    भारतीय रेल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से जीवित हृदय (Live Heart) का सफलतापूर्वक परिवहन किया। सूरत से अहमदाबाद तक हृदय को ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से सुरक्षित एवं निर्धारित समय में पहुंचाया गया। इस हृदय का प्रत्यारोपण यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में किया जाएगा।

    यह अत्यंत संवेदनशील और समयबद्ध जीवनरक्षक अभियान भारतीय रेल, गुजरात राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) तथा चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण रहा।

    हृदय को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए RPF और गुजरात राज्य पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके माध्यम से अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।

    मंडल रेल प्रबंधक, अहमदाबाद, श्री वेद प्रकाश ने कहा, “यह भारतीय रेल के लिए अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से एक जीवित हृदय को सूरत से अहमदाबाद तक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया गया। ऐसे जीवनरक्षक मिशन में समय का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेल, RPF, गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाया। किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में भारतीय रेल की भूमिका निभाना हमारे लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सर्वोच्च दायित्व है।”

    वंदे भारत एक्सप्रेस की गति, समयपालन और विश्वसनीयता ने इस जीवनरक्षक अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय रेल केवल यात्रियों और माल के परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभा रही है।

    इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता में भारतीय रेल के विभिन्न विभागों, RPF, गुजरात राज्य पुलिस, चिकित्सकों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों तथा सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी एजेंसियों के बीच प्रभावी एवं त्वरित समन्वय के कारण यह चुनौतीपूर्ण जीवनरक्षक अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

    यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रेल की त्वरित, सुरक्षित और विश्वसनीय सेवाओं के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

  • विवाद के बाद बदले सुर! पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली रुचिका ने मांगी माफी, वीडियो हुआ वायरल

    विवाद के बाद बदले सुर! पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली रुचिका ने मांगी माफी, वीडियो हुआ वायरल

    नई दिल्ली

    दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आरोपी रुचिका सिंह का एक माफी वाला वीडियो सामने आया है. वायरल वीडियो में वह खुद को 15 साल की बताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांग रही है. उसका कहना है कि वह कनॉट प्लेस घूमने के बाद दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थी और वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर उसने ऐसी बातें कहीं. इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है। 

    वीडियो में रुचिका कहती है कि वह उन लोगों के प्रभाव में आ गई थी और उसने जो कुछ भी कहा वह माफी के लायक नहीं था. उसने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए पूरे देश से माफी मांगी और कहा कि उसे खुद पर शर्म आ रही है। 

    यह वीडियो पीएम मोदी के उस बयान के कुछ घंटों बाद सामने आया जिसमें उन्होंने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान उन्हें गाली देने वाले छात्रों को माफ कर दिया है. मोदी ने कहा कि उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्द उन्हें परेशान करने वाले थे, लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए। 

    इससे पहले 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी. आरोप है कि उसने पीएम के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई और जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जिसे बाद में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने भेज दिया गया। 

    जानकारी के अनुसार रुचिका अपनी मां के साथ नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी. उसका फ्लैट फिलहाल बंद है और सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक वह प्रदर्शन के बाद से वापस नहीं लौटी है. पुलिस भी सोसाइटी पहुंचकर वहां के लोगों से पूछताछ कर चुकी है। 

    इस एफआईआर पर प्रदर्शन आयोजित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने आपत्ति जताई है. पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी बातों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से बोलने की आजादी पर बुरा असर पड़ सकता है. उनका सुझाव था कि पीड़ित पक्ष को मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहिए, आपराधिक कार्रवाई का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। 

  • भिवंडी में दर्दनाक हादसा! 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

    भिवंडी में दर्दनाक हादसा! 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

    मुंबई
     महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में इमारत का हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया है। नारपोली स्थित भंडारी कंपाउंड में एक चार मंजिला कोहिनूर इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई।

    मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, नगर निगम की टीम और एनडीआरएफ (एडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है।

    जर्जर घोषित थी इमारत, ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम
    भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह नारपोली के भंडारी कंपाउंड स्थित कोहिनूर इमारत है।नगर निगम ने पहले ही इस इमारत को 'सी-कैटेगरी' (बेहद खतरनाक और जर्जर) घोषित कर दिया था, जिसके बाद इसे खाली करा लिया गया था।हालांकि, इमारत खाली होने के बावजूद इसके ग्राउंड फ्लोर पर कुछ मजदूर काम कर रहे थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि मलबे में अभी भी कुछ मजदूर दबे हो सकते हैं।

    जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई की देर रात बिल्डिंग थोड़ी झुक गई, जिसके बाद कई दूसरे मजदूर बिल्डिंग से बाहर भाग गए. बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम चल रहा था, इसलिए घटना के वक्त इमारत के अंदर कोई नहीं था। NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं. मलबा हटाए जाने का काम जारी है। 

    नींव कमजोर होने के चलते गिरी इमारत!
    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि पिछले कुछ दिनों से इस पुरानी इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था. ठेकेदार और मजदूरों ने मरम्मत के दौरान इमारत के 3 पिलर तोड़ दिए थे. पिलर टूटने की वजह से इमारत की नींव कमजोर हो गई और वो अपना संतुलन खोकर पूरी तरह जमींदोज हो गई। 

    समय रहते बाहर निकले ज्यादातर लोग
    इस भीषण हादसे के बीच राहत की बात ये रही कि इमारत ढहने से ठीक पहले कुछ सुगबुगाहट और आवाज हुई थी. खतरा भांपते ही ज्यादातर रहवासी समय रहते इमारत से बाहर भाग निकले, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। 

    हालांकि, पहली मंजिल पर रहने वाले कुछ लोग और वहां काम कर रहे मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं. जिला प्रशासन और आपातकालीन टीमों की पहली प्राथमिकता मलबे को साफ कर सभी फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की है। 

    लोगों से सहयोग की अपील…

    हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई रुकावट न आए, इसके लिए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इलाके में भीड़ न लगाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें. घटना में घायल या मरने वालों की सही तादाद के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। 

    NDRF ने महिला को सुरक्षित निकाला बाहर
    राहत और बचाव कार्य के बीच एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। मलबे के नीचे से एक महिला को जीवित और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महिला को तुरंत इलाज के लिए पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

     

  • केदारनाथ यात्रा पर मौसम की मार! उत्तराखंड में फ्लैश फ्लड की चेतावनी, 850 श्रद्धालु रास्ते में फंसे

    केदारनाथ यात्रा पर मौसम की मार! उत्तराखंड में फ्लैश फ्लड की चेतावनी, 850 श्रद्धालु रास्ते में फंसे

    देहरादून/रुद्रप्रयाग

    उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी बारिश के बाद नाले के तेज बहाव में दो सगी बहनें बह गईं। उनके शव बरामद हुए हैं। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में फ्लैश फ्लड और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली समेत कुछ जिलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    केदारनाथ हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण गुरुवार को केदारनाथ यात्रा रोक दी गई। भारी बारिश के बीच प्रशासन ने केदारनाथ से वापस आने वाले करीब 600 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया। केदारनाथ जाने वाले करीब 250 यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया। बारिश से उत्तराखंड में कुल 91 सड़कें बंद हुईं।

    मुनकटिया में आया मलबा
    केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में मलबा आने से बंद है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग में भी छौड़ी, जंगलचट्टी और चीरबासा के पास कई जगहों पर मलबा बोल्डर गिर रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही मार्ग खुलने की स्थिति में यात्रियों की आवाजाही करा दी जाएगी। उधर, कुमाऊं में बारिश के कारण तवाघाट-लिपुलेख हाईवे पर मल्लघाट के पास भूस्खलन हो गया। नौ घंटे बाद इसको खोला जा सका।

    आज 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    शुक्रवार को भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्दनेजर आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के डीएम को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।

    कई घरों में घुसा मलबा
    लगातार हो रही बारिश के कारण ज्योतिर्मठ के दूरस्थ गांव किमाणा के 7 आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। लगातर पहाड़ी से बह कर आ रही गाद लोगों के घरों में घुसने लगी है। पहाड़ी से बह कर आ रहे मलबे और बोल्डरों से गांव के संपर्क और काश्तकारी मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं पेयजल लाईन टूटने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। बता दें कि किमाणा गांव की सरहद से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी भारी बरसात के कारण बुधवार देर रात से लगातर दरकती रही। पहाडी से टूटकर लगातार बडे़ बडे़ बोल्डर बरसाती नाले में बहकर गाद गांव तक पहुंच रही है। इस मलबे की चपेट में आने से गांव की शीर्ष में स्थित चंडिका मंदिर की भोग मंडी और सभी सुरक्षा दीवारें पूरी तरह से टूट गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मुकेश सेमवाल ने बताया कि पूरा गांव दहशत में है और गांव के 7 मकानों में लगातार बह कर आ रहा मलबा घुस रहा है। इन घरों के आंगन भी मलबे से भर चुके हैं, जिस कारण से इन परिवारों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।

    हरिद्वार में दो कार बहीं, यमुनोत्री हाईवे पर गिरे पेड़
    हरिद्वार में मूसलाधार बारिश के चलते खड़खड़ी स्थित सूखी नदी उफान पर आ गई। इससे नदी के बीच रपटे पर खड़ी दो कार बह गईं। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। बहाव कम होने के बाद कारों को नदी से बाहर निकला गया। उधर, स्याना चट्टी और राना चट्टी के बीच भू-धंसाव होने से कई पेड़ यमुनोत्री हाईवे पर गिर गए। पेड़ों के गिरने से कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बाधित हो गया।

    देहरादून में दो बहनों की दर्दनाक मौत
    इधर, देहरादून के क्लेमनटाउन क्षेत्र की नई बस्ती में बारिश से उफनाई नाली में बहने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई। सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के शवों को रैंप के नीचे से निकाला गया। बच्चियों के पिता रुदल सदा और मां रीना कुमारी यहां नई बस्ती में किराये पर रहकर मजदूरी करते हैं। रुदल सदा किसी काम से अपने गांव गए हुए हैं। बच्चियों की मां रीना ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब एक बजे दोनों बहनें खेलने गई थीं।

  • एंटी-पेपर लीक बिल पर आज राज्यसभा की नजर, NDA के पास कितने सांसद? समझिए पूरा गणित

    एंटी-पेपर लीक बिल पर आज राज्यसभा की नजर, NDA के पास कितने सांसद? समझिए पूरा गणित

    नई दिल्ली

    लोकसभा में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' राज्यसभा में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

    बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बावजूद सरकार ने इसे लोकसभा से ध्वनि मत से पारित करा लिया। अब सवाल यह है कि क्या उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई अड़चन आएगी? आइए समझते हैं राज्यसभा का ताजा 'नंबर गेम'।

    राज्यसभा का नंबर गेम: क्या आसानी से पास होगा बिल?
     कुल संख्या 245 है, हालांकि अभी 242 सांसद हैं। अभी खास बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत है। वहीं साधारण बहुमत का आंकड़ा 123 है। एंटी-पेपर लीक वाले इस बिल के लिए साधारण बहुमत की ही जरूरत है।

    गठबंधन / दल    सांसदों की संख्या                      बहुमत का आंकड़ा (123) से तुलना
    NDA (सत्ता पक्ष)       152                                           बहुमत से 29 सांसद ज्यादा
    INDIA (विपक्ष)            63    –
    अन्य दल                    29    –
    रिक्त सीट                    1    –
    कुल    245    –

    राज्यसभा में NDA के पास अपने दम पर 152 सांसदों का मजबूत आंकड़ा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से काफी ज्यादा है। ऐसे में 'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026' को उच्च सदन से पास कराने में सरकार को कोई खास मुश्किल नहीं होगी, भले ही विपक्ष कितना भी हंगामा क्यों न करे।

    इस कानून का मकसद लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।

    'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026' में नया क्या है?
    साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए इस 2026 के संशोधन विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।

    •     संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह, संस्थानों या अधिकारियों को अब 10 साल तक की सख्त कैद होगी (पहले यह अधिकतम 5 साल थी)।
    •     पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
    •     इन मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए हर राज्य में 'स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट' बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी।
    •     किसी भी पेपर लीक मामले की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

    लोकसभा में खूब हुआ हंगामा
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर ढाई बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।

    क्यों मची है संसद में रार?
    इस बिल के लोकसभा में पास होने के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। हाल ही में हुए NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में 36 दिनों तक छात्रों का प्रदर्शन चला था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा।

    बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

  • Rain Alert Uttarakhand: गंगा खतरे के करीब, बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन; बारिश से जनजीवन प्रभावित

    Rain Alert Uttarakhand: गंगा खतरे के करीब, बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन; बारिश से जनजीवन प्रभावित

    देहरादून

    उत्तराखंड में मॉनसून का कहर जारी है। भारी बारिश और भूस्खलन लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। मौसम विभाग ने आज के लिए देहरादून समेत पांच जिलों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बदरीनाथ हाईवे के पास पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ है। वहीं, मंगलवार से भूस्खलन के कारण बंद पड़ा यमुनोत्री हाईवे अब खुल गया है। पहाड़ी इलाकों में बारिश की वजह से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे लोगों में दहशत बनी हुई है।

    आज कहां-कहां अलर्ट
    उत्तराखंड के दस जिलों में गुरुवार को भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरकाशी, देहरादून, चमोली, पौड़ी, टिहरी और ऊधमसिंह नगर के लिए येलो अलर्ट है।

    इससे पहले बुधवार को सुबह तेज धूप निकलने से उमस और गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया, लेकिन दोपहर बाद मूसलाधार बारिश शुरू होने से मौसम सुहावना हो गया। 24 घंटे के दौरान दून का अधिकतम तापमान करीब तीन डिग्री बढ़कर 32.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। दून जिले में सबसे अधिक 39.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    देहरादून में जगह-जगह जलभराव
    वहीं, दूसरी और बारिश से वाहन चालकों, राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दून अस्पताल के बाहर, तहसील चौक, हरिद्वार रोड, सहस्रधारा रोड, डीएल रोड और राजपुर रोड सहित कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात बाधित रहा और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर निगम के कंट्रोल रूम में सुंदरवाला, डालनवाला, नेहरू कॉलोनी, नवादा समेत छह क्षेत्रों से जलभराव की शिकायतें प्राप्त हुईं। नगर आयुक्त ने सभी को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

    गंगा और गौना के उफान से सहमी तटीय आबादी
    ऋषिकेश। पहाड़ी इलाकों में बारिश की वजह से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को गंगा चेतावनी निशान को छूकर बही, जिससे तटीय इलाकों पर बसे लोग सहमे हुए हैं। वहीं, विकासनगर के रुद्रपुर क्षेत्र से होकर बहने वाली बरसाती गौना नदी भी बुधवार को उफान पर आ गई, जिससे एक बस समेत कई दुपहिया वाहन तेज बहाव में फंस गए।

    पेट्रोल पंप के पास कार पर गिरा बोल्डर
    अगस्त्यमुनि। अगस्त्यमुनि कस्बे में पेट्रोल पंप के पास दोपहर में पहाड़ी से एक बोल्डर गिरने से नीचे खड़ी कार क्षतिग्रस्त हो गई। शुक्र रहा कि कार में कोई नहीं था और जनहानि नहीं हुई। लोगों के अनुसार, लगातार बारिश के चलते बुधवार दोपहर में अचानक पहाड़ी से बड़ा बोल्डर हाईवे पर गिर गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं हुआ।

    बदरीनाथ हाईवे जोड़ने वाली सुरंग के बाहर पहाड़ी पर भूस्खलन
    रुद्रप्रयाग जनपद में हो रही लगातार बारिश के चलते बदरीनाथ हाईवे को केदारनाथ हाईवे से जोड़ने वाली सुरंग के बाहरी पहाड़ी पर भूस्खलन से एनएच के प्रशासनिक भवन के एक कक्ष को क्षति पहुंची है। हालांकि सुरंग पूरी तरह सुरक्षित है, अंदर किसी तरह की दिक्कत नहीं है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बुधवार को सुरंग के बाहर क्षतिग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तकनीकी टीम के साथ ही भूगर्भीय टीम ने इसका निरीक्षण कराने के निर्देश दिए।

    पाली गाड़ के पास खुला यमुनोत्री हाईवे
    बड़कोट: पाली गाड़ के निकट मंगलवार सुबह से बंद पड़ा यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार दोपहर करीब दो बजे यातायात के लिए खोल दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग की टीम ने लगातार राहत एवं मलबा हटाने का कार्य कर मार्ग को सुचारु किया, जिसके बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई।

  • NEET पेपर लीक मामला: CBI की चार्जशीट में NTA के 3 एक्सपर्ट भी आरोपी, 13 लोगों पर शिकंजा

    NEET पेपर लीक मामला: CBI की चार्जशीट में NTA के 3 एक्सपर्ट भी आरोपी, 13 लोगों पर शिकंजा

     नई दिल्ली

    NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने मंगलवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से दाखिल की गई है. CBI सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट को आगे की सुनवाई के लिए पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 

    CBI ने जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं. CBI ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूतों को शामिल किया है. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाया गया है। 

    चार्जशीट में इन 13 आरोपियों के नाम हैं…

    1)  मनीषा मंधारे – NTA बायोलॉजी विशेषज्ञ

    2)  प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी – NTA केमिस्ट्री विशेषज्ञ

    3)  मनीषा संजय हवालदार – NTA फिजिक्स विशेषज्ञ

    4)  मनीषा संजय वाघमारे – बिचौलिया

    5)  धनंजय निवृत्ति लोखंडे – बिचौलिया

    6)  शुभम माधुकर खैरनार – बिचौलिया

    7)  यश यादव – बिचौलिया

    8)  मंगलिलाल बिवाल – बिचौलिया

    9)  विकास बिवाल – बिचौलिया

    10)  दिनेश बिवाल – बिचौलिया

    11)  डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे – बिचौलिया

    12)  शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर – RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक

    13)  तेजस हर्षदकुमार शाह – APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO

    चार्जशीट में शामिल किए गए 360 गवाह और 43 अहम सबूत
    एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र के स्रोत और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की गई है. CBI के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है. इस मामले में BNS 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(a) के तहत भी कार्रवाई की गई है। 

    वहीं पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 10 के साथ धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. 12 मई को दर्ज हुई थी FIR CBI के मुताबिक, यह मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद सामने आया था. इसके बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को CBI को शिकायत दी थी. इसी शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई. जांच के लिए CBI ने 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें बनाई थीं। 

    आरोपियों के बैंक खाते और डीमैट खाते किए गए फ्रीज
    एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 जगहों पर छापेमारी की. छापेमारी के दौरान CBI ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए. इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई गई. 13 लोगों की हुई गिरफ्तारी CBI के मुताबिक, इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA से जुड़े केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। 

    जांच में कई बिचौलियों की पहचान हुई है. आरोप है कि इन लोगों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. CBI ने दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया है. इन पर लीक पेपर खरीदने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है. डिजिटल सबूतों की हुई जांच CBI ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है. एजेंसी को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिली है. CBI का कहना है कि इन रिपोर्टों से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था। 

    फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे भी हो सकती है कार्रवाई
    CBI ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है. एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक विश्लेषण और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।