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  • माता वैष्णो देवी यात्रा फिलहाल बंद, खराब मौसम के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, सुरक्षा को दी प्राथमिकता

    माता वैष्णो देवी यात्रा फिलहाल बंद, खराब मौसम के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, सुरक्षा को दी प्राथमिकता

    कटड़ा
    जम्मू-कश्मीर में मौसम ने करवट बदल ली है। भारी बारिश से जहां लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली है वहीं कटड़ा आने वाले माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार खराब मौसम के चलते आज माता वैष्णो देवी की यात्रा स्थगित कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का दौर जारी है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने माता वैष्णो देवी की यात्रा को स्थगित करने का फैसला किया है। खराब मौसम के चलते मां वैष्णो देवी की यात्रा सोमवार को भी अस्थाई रूप से स्थगित कर दी गई है। इसके चलते मां भगवती के दर्शनों के लिए आए हुए श्रद्धालुओं में निराशा लग रही है। लेकिन इसके साथ ही श्रद्धालु खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन के इस लिए गए फैसले की सराहना भी कर रहे हैं। 

    अमरनाथ यात्रा निलंबित

    जम्मू-कश्मीर में बारिश की चेतावनी के कारण बालटाल रूट से अमरनाथ यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। तीर्थयात्रियों से कहा गया है कि वे अगले आदेश तक बालटाल बेस कैंप और आस-पास के लंगरों में ही रुकें। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से निलंबित रहेगी। बालटाल और नूनवान/चंदनवाड़ी आधार शिविरों से श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारी बारिश के चलते वैष्णो देवी की यात्रा भी ऐहतियातन अगले आदेशों तक रोक दी गई है।

    कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने एक बयान में कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भलाई के लिए एहतियाती कदम के तौर पर 19 जुलाई, 2026 से पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से श्री अमरनाथजी यात्रा अस्थायी रूप से निलंबित रहेगी।

    4 लाख श्रद्धालु कर चुके हैं अमरनाथ के दर्शन
    अंशुल गर्ग ने कहा कि मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मौसम की स्थिति का व्यापक आकलन करने के बाद यात्रा फिर से शुरू करने के संबंध में उचित समय पर सूचना जारी की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा श्री अमरनाथजी यात्रा के दौरान अब तक 3.76 लाख से अधिक श्रद्धालु गुफा मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।

    तीर्थयात्री फंसे
    अमरनाथ यात्रा को एहतियात के तौर पर रोके जाने पर एक तीर्थयात्री ने कहा कि हम अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू आए हैं। हमें पता चला कि यहां भारी बारिश होने की संभावना है, इसलिए सरकार ने तीन दिनों के लिए यात्रा रोक दी है। यात्रा फिर से शुरू करने से पहले प्रशासन मौसम का जायजा लेगा। प्रशासन का यह बहुत अच्छा फैसला है। अगर आगे भारी बारिश होती है, तो तीर्थयात्रियों को जहां वे हैं वहीं सुरक्षित रहना चाहिए, मौसम पर नजर रखनी चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

    क्या बोले श्रद्धालु
    अमरनाथ यात्रा रोके जाने पर
    एक और तीर्थयात्री ने कहा कि हम कल यहां पहुंचे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण यात्रा तीन दिनों के लिए रोक दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है और हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। श्रद्धालु ने आगे कहा कि अगर मौसम और ज्यादा खराब हो और आगे भी यात्रा रोकी जाती है तो भी हम रुकेंगे, जब आए हैं तो अमरनाथ जी के दर्शन करके ही जाएंगे। श्रद्धालु की ओर से यात्रा के लिए आने वाले लोगों से अपील की गई कि जो लोग अब आने वाले हैं, वे बच्चों और बुजुर्गों को साथ न ले आएं, नहीं तो परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    यूपी के प्रतापगढ़ से पहुंचे एक श्रद्धालु ने कहा कि हमारी सुरक्षा के लिए यात्रा रोकी गई है। रास्ते में भूस्खलन की आशंका रहती है, इस वजह से यात्रा रोकी जाती है। अमरनाथ यात्रा पर 14 बार हम आ चुके हैं, यह भी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर से निकलने से पहले समय और मौसम को जांच लेना चाहिए। अभी तीन दिनों के लिए यात्रा रोकी गई है। इसके बार फिर यात्रा चालू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी सुरक्षा के लिए कदम उठाती है। एक-एक यात्री की सुरक्षा सरकार के लिए जरूरी है।

    मौसम की चेतावनी के चलते वैष्णो देवी के दर्शन बंद
    माता वैष्णो देवी की यात्रा को भी अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरफ से बताया कि जम्मू-कश्मीर में लगातार खराब मौसम और भारी बारिश का दौर जारी है। ऐसे में खराब मौसम की चेतावनी के बीच प्रशासन ने इस यात्रा को 19 जुलाई से अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है। इससे पहले 8 जुलाई को श्री माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग भूस्खलन से प्रभावित हुआ, लेकिन यात्रा अप्रभावित रही। अधिकारियों ने बताया कि रियासी जिले के कटरा कस्बे में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मार्ग पर बारिश के कारण भूस्खलन हुआ।

    भूस्खलन के कारण बैटरी कार सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा, लेकिन मंदिर की यात्रा अप्रभावित रही और सैकड़ों तीर्थयात्री भूस्खलन के बावजूद अपनी यात्रा जारी रखते रहे। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद मंदिर की ओर जाने वाले नए मार्ग पर हिमकोटी के पास भूस्खलन हुआ। उन्होंने बताया कि मंदिर बोर्ड ने तुरंत मलबे को मार्ग से हटाने के लिए कर्मचारियों और मशीनों को भेजा।

  • राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ बिल पेश करेंगे अमित शाह, संसद के मानसून सत्र में इन 7 बड़े मुद्दों पर रहेगी नजर

    राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ बिल पेश करेंगे अमित शाह, संसद के मानसून सत्र में इन 7 बड़े मुद्दों पर रहेगी नजर

    नई दिल्ली 
      
    संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी है. केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान या उसे गाने में बाधा डालने को एक आपराधिक अपराध बनाने के लिए राज्यसभा में सोमवार को एक नया बिल पेश करने जा रही है। 

    सोमवार को संसद सत्र की शुरुआत के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को सदन के पटल पर रखेंगे. संसद के एजेंडे के मुताबिक, इस विधेयक का नाम 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' है। 

    ये नया विधेयक 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' में संशोधन करेगा. अब इस नए संशोधन विधेयक के जरिए सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह ही समान कानूनी और वैधानिक संरक्षण देना चाहती है। 

    'वंदे मातरम' का अपमान करने पर होगी सजा
    'वंदे मातरम' के मौजूदा 1971 के कानून के तहत देश के राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे- राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) का अनादर या अपमान करना एक बड़ा अपराध है. इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। 

    अपमान या बाधा डालने पर क्या हैं नए नियम?
    इस विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक, अब से अगर कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गाए जाने के दौरान किसी भी तरह की रुकावट पैदा करता है, तो उसे सजा दी जाएगी. इसके अलावा, किसी भी रूप में राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या उसका अनादर करने वाले को भी अपराधी माना जाएगा। 

    वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर बड़ा फैसला
    सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की ये पहल ऐसे समय में हो रही है, जब देश भर में 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोह मनाए जा रहे हैं। 

    इससे पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया था. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक पत्र लिखा था. इस पत्र के जरिए उन सभी आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को बजाना या गाना अनिवार्य कर दिया गया था, जहां राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया जाता है. अब इस नए कानून के आने के बाद राष्ट्रीय गीत का सम्मान न करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। 

    परिसीमन और राम मंदिर विवाद सहित 7 अहम बिल एजेंडे में, सरकार के सामने विपक्ष की कड़ी परीक्षा

    संसद में आज सोमवार से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं क्योंकि जहां एक ओर सरकार पूर्व सत्र में पारित न हो पाए परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है. परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को हालांकि अभी तक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। 

    कुछ विपक्षी दलों में टूट के कारण बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच संसद का नया सत्र शुरू होने जा रहा है. यह सत्र कई बड़े और विवादित मुद्दों के साये में शुरू होगा. सूत्रों के अनुसार, सरकार के भी ‘आक्रामक रुख’ अपनाने की संभावना है और मानसून सत्र के दौरान उसकी ‘प्राथमिकता’ विधेयकों को पारित कराने की होगी। 

    परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर टकराव की स्थिति बन गई है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए पत्र लिखा था. भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के रणनीतिकार महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को लागू करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के प्रयास में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इसके लिए एक आक्रामक रणनीति बनाने की योजना बना रही है। 

    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को हालांकि भरोसा है कि ‘इंडिया’ गठबंधन के दल इस विधेयक का विरोध जारी रखेंगे, लेकिन राकांपा (शप) और शिवसेना (उबाठा) समेत कई विपक्षी दल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि मसौदा कानून में राज्यों के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान किए जाते हैं, तो वे सरकार के इस कदम के लिए तैयार हो सकते हैं. अप्रैल में हुए विशेष सत्र में खारिज हुए 131वें संविधान संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करने वाले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने भी कहा है कि वह नये मसौदे की समीक्षा करने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगी. इस पार्टी ने कांग्रेस से अपना रास्ता अलग कर लिया है और बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की है। 

    राजनीतिक समीकरणों में हालांकि कुछ और बदलाव भी आए हैं, खासकर पिछले विधानसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के क्षेत्रीय आधार वाले प्रमुख दलों की करारी हार के बाद. सूत्रों का कहना है कि सरकार 2026 के 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने और पारित कराने का एक और प्रयास करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करने और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग लोकसभा में एक अलग गुट बनाने के मामले में फैसला लेना है। 

    तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने एक अलग याचिका के माध्यम से इस विलय को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चुनौती दी है. बिरला को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के एक अन्य दावे पर भी अपना निर्णय लेना है, जिन्होंने लोकसभा में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है. यदि लोकसभा अध्यक्ष दोनों दलों के बागी सांसदों के पक्ष में फैसला देते हैं, तो लोकसभा में राजग की संख्या बढ़ जाएगी. हालांकि, इसके बावजूद वह दो-तिहाई बहुमत से पीछे रहेगा, जो वर्तमान में 540 सदस्यों वाली सदन में 360 सांसदों का है जबकि तीन सीट रिक्त हैं। 

    राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए राजग के पास कुछ सीट की कमी है और कुछ सदस्यों के मतदान से दूर रहने से उच्च सदन में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में मदद मिल सकती है. संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. मानसून सत्र में विचार और पारित करने के लिए सरकार ने जिन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, उनमें एफसीआरए संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भी शामिल हैं। 

    कांग्रेस अध्यक्ष खरगे पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए संस्थानों पर कब्जे, राजनीतिक दलों को तोड़ने, घोटालों और भ्रष्टाचार, महंगाई, विदेश नीति की विफलताओं और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दों को उठाएगी. विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को भी उठाएगा. सूत्रों का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर यह कह सकती है कि यह मामला “राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है”. उन्होंने कहा कि सरकार की ‘प्राथमिकता’ मानसून सत्र के दौरान विधेयकों को पारित कराने की होगी। 

  • भारी बारिश से पहाड़ों में संकट, पुंछ-चंबा में भूस्खलन और बाढ़ का कहर

    भारी बारिश से पहाड़ों में संकट, पुंछ-चंबा में भूस्खलन और बाढ़ का कहर

    पुंछ
     जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भयानक तबाही मचा दी है. मौतों का आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया है. सबसे ज्यादा नुकसान सुरनकोट में हुआ है, जहां एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत 9 लोगों की जान चली गई. हवेली में एक व्यक्ति की मौत हुई. कई लोग अभी भी लापता हैं.

    बचाव अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं, जहां पूरा पहाड़ सड़क पर गिर गया. केंद्र सरकार ने पूरे मामले पर नजर रखते हुए मदद का भरोसा दिया है.

    पुंछ जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों को तबाह कर दिया. सुरनकोट क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 9 लोगों की मौत हो गई. इनमें एक परिवार के 6 सदस्य शामिल हैं. हवेली इलाके में भी एक मौत हुई और कम से कम 7 घर क्षतिग्रस्त हो गए. मंडी क्षेत्र में भी संपत्ति का नुकसान हुआ है.

    प्रशासन का कहना है कि कई इलाकों से अभी भी लोग लापता बताए जा रहे हैं. इसलिए मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है. निचले इलाकों में पानी भर गया है. कई घरों को नुकसान पहुंचा और सड़कें जलमग्न हो गईं. SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. लापता लोगों की तलाश में बोट और हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

    चंबा में दिल दहला देने वाला भूस्खलन
    हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भटियात क्षेत्र में लाहडू-सिंहुंता सड़क मार्ग पर भारी भूस्खलन हुआ. लगातार भारी बारिश के बीच कुछ ही पलों में पूरा पहाड़ भरभराकर सड़क पर आ गिरा. सड़क पूरी तरह बंद हो गई. गनीमत रही कि उस समय कोई वाहन या राहगीर वहां से गुजर नहीं रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था.

    यह मार्ग धर्मशाला, चंबा और डलहौजी के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. रोजाना बड़ी संख्या में वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं. मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था, जिसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं.

    केंद्र सरकार का त्वरित जवाब
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला से फोन पर बात की. उन्होंने भारी बारिश से हुई स्थिति की जानकारी ली. केंद्र सरकार की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया. केंद्र की एजेंसियां पहले से ही राज्य सरकार के साथ मिलकर राहत कार्य में लगी हुई हैं.

    इस आपदा में घायलों का इलाज, लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज की जा रही है. केंद्र ने अतिरिक्त फंड और संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया है.
     
    मौसम की स्थिति और चेतावनी
    पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश हो रही है. पुंछ में 77 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. पहाड़ी इलाकों में बादल फटने और तेज पानी की धार ने फ्लैश फ्लड पैदा किए. नदियां उफान पर हैं और कई जगहों पर खतरे का निशान पार कर चुकी हैं.

    मौसम विभाग ने इन राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है. चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी समेत कई जिलों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है. लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करें, नदियों और पहाड़ी रास्तों से दूर रहें.

    बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं. लापता लोगों को ढूंढने के लिए ड्रोन और विशेष टीमें भेजी गई हैं. प्रभावित इलाकों में खाने-पीने का सामान, दवाइयां और जरूरी चीजें पहुंचाई जा रही हैं. कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर बनाए हैं.

    जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियां
    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न बदल रहा है. कभी सूखा तो कभी अचानक भारी बारिश और बादल फटना आम हो गया है. अनियोजित निर्माण, जंगलों की कटाई और कमजोर ढांचागत सुविधाएं नुकसान को बढ़ाती हैं.

    पुंछ और चंबा की यह आपदा एक बार फिर प्रकृति की शक्ति की याद दिलाती है. 10 लोगों की मौत और कई लापता लोगों की स्थिति बेहद दुखद है. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राहत कार्य चला रही हैं. लोगों को सतर्क रहना चाहिए और प्रशासन का सहयोग करना चाहिए.

     

  • रिपोर्ट: भारतीय गृहिणियों का 22 लाख करोड़ रुपये का अनपेड वर्क, अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान

    रिपोर्ट: भारतीय गृहिणियों का 22 लाख करोड़ रुपये का अनपेड वर्क, अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान

    नई दिल्ली

    भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं। इन घरेलू कार्यों का यदि वेतन दिया जाए तो लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये की रकम होगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली बार गृहिणियों (होममेकर्स) द्वारा बिना पैसे के किए जाने वाले घरेलू कामकाज के महत्व को स्वीकारा था। शीर्ष अदालत ने घरेलू महिलाओं को ‘राष्ट्र निर्माता’ भी कहा था। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘टाइम-यूज सर्वे’ (जनवरी-दिसंबर 2024) की रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू कामकाज और देखरेख पर रोजाना 7 घंटे खर्च करती है।

    महिलाओं का कार्य समय
    रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं (महज 6 साल और उससे अधिक उम्र की) बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज जैसे साफ-सफाई, खाना बनाना, कपड़े धोना, जैसे कामों पर रोजाना 289 मिनट खर्च करती हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों की देखरेख पर 137 मिनट लगाती हैं, लेकिन इन कामों के बदले उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता है। एक शोध के मुताबिक भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार के देखभाल करती हैं। यदि महिलाओं को इन कार्यों के बदले वेतन देना पड़े तो यह लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो कि देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.5 फीसदी है। भारतीय स्टेट बैंक की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं द्वारा किए जाने वाले बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल के कामों की सालाना आर्थिक कीमत का अनुमान ₹22.7 लाख करोड़ लगाया गया है।

    देशभर में यह रकम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है

    दुनिया भर में अवैतनिक कार्य

    ऑक्सफैम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि दुनिया भर में 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाएं हर दिन बिना पैसे वाले देखभाल के कामों में 12.5 अरब घंटे बिताती हैं, जिसकी सालाना कीमत कम से कम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है।

    महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी करते हैं बिना पैसे वाले काम

    पुरुषों का योगदान

    मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी बिना वेतन वाले घरेलू काम करते हैं, लेकिन महिलाओं की तुलना में काफी कम। रिपोर्ट मुताबिक घरेलू कामकाज में पुरुष महज 88 मिनट बिताते हैं, जबकि बच्चों-बुजुर्गों की देखरेख में 75 मिनट बिताते हैं।

    उम्र का प्रभाव
    रिपोर्ट के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं पर बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज और बच्चों-बुजुर्गों की देखभाल के कामों का बोझ बढ़ता जाता है। आंकड़ों के मुताबिक 15 से 59 साल की उम्र की महिलाएं ऐसे कामों में रोजाना 305 मिनट बिताती हैं। 2019 में यह समय 315 मिनट था, अब इसमें थोड़ी कमी आई है। इसी उम्र समूह के 41 फीसदी महिलाएं घर के सदस्यों की देखभाल में शामिल थीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा महज 21.4 फीसदी था।

    सामान्य प्रश्न

    ✦भारत में कितनी महिलाएं बिना वेतन घरेलू काम करती हैं?−

    भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं।

    ✦महिलाएं घरेलू कामों में रोजाना कितना समय बिताती हैं?+

    ✦महिलाओं द्वारा घरेलू कार्यों की आर्थिक कीमत क्या है?+

  • हैदराबाद से अंतरिक्ष तक उड़ान, स्काईरूट ने बदली लॉन्चिंग की तस्वीर

    हैदराबाद से अंतरिक्ष तक उड़ान, स्काईरूट ने बदली लॉन्चिंग की तस्वीर

    हैदराबाद
     कई दशकों तक, भारत में स्पेस एक्सप्लोरेशन का काम सिर्फ सरकारी संस्था ISRO ही करती थी। लंबी वोटिंग लिस्ट और ज्यादा लागत की वजह से कमर्शियल सैटैलाइट लॉन्चिंग कई लोगों की पहुंच से बाहर थी।

    हालांकि, अब एक शांत क्रांति हो रही है, जिसे ISRO के दो पूर्व वैज्ञानिकों ने शुरू किया है। उन्होंने स्पेस सेक्टर के सबके लिए सुलभ बनाने के मकसद से सरकारी एजेंसी से निकलने का फैसला किया।

    2018 में, पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाके ने हैदराबाद में 'स्काईरूट एयरोस्पेस' की शुरुआत की। उनका मकसद सरल लेकिन साहसी थाष सैटेलाइट लॉन्चिंग को कमर्शियल फ्लाइट बुक करने जितना ही आसान और सस्ता बनाना।

    रॉकेट 'विक्रम-S' का सफल लॉन्च
    आज, चंदाना CEO और डाका COO के तौर पर 1,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की टीम को लीड कर रहे हैं। इन दोनों ने पारंपरिक भारतीय स्पेस विरासत और स्टार्टअप की तेजी के बीच के अंतर को सफलतापूर्वक कम किया है।

    2022 में 'मिशन प्रारंभ' के साथ रचा इतिहास
    इस कंपनी ने 2022 में 'मिशन प्रारंभ' के साथ इतिहास रचा और भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट 'विक्रम-S' सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस कामयाबी ने साबित कर दिया कि देश की प्राइवेट कंपनियां भरोसेमंद एयरोस्पेस हार्डवेयर बना और लॉन्च कर सकती हैं।

    इस अहम उपलब्धि से पहले ही, स्काईरूट ने 2020 में भारत के पहले प्राइवेट रॉकेट इंजन 'रमन-1' और 2021 में क्रायोजेनिक इंजन 'धवन-1' का सफल परीक्षण करके सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। तकनीकी रफ्तार बनी हुई है और कंपनी ने हाल ही में अपने मुख्य ऑर्बिटल व्हीकल 'विक्रम-1' के लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए हैं।

    स्काईरूट की वैल्यूएशन 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर
    इस तकनीकी कामयाबी ने बड़े ग्लोबल निवेशकों को आकर्षित किया है। स्काईरूट ने GIC और टेमासेक जैसे बड़े इंटरनेशनल निवेशकों से 160 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं, जिससे इस स्टार्टअप की वैल्यूएशन 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।

    जैसे-जैसे भारत अपने स्पेस सेक्टर को कमर्शियल कंपनियों के लिए खोल रहा है, चंदाना और डाका यह साबित कर रहे हैं कि देश कम लागत वाली सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए एक प्रमुख ग्लोबल हब बन सकता है, जिससे ग्लोबल स्पेस रेस हमेशा के लिए बदल जाएगी।

  • भोजशाला नमाज विवाद बढ़ा, मुस्लिम पक्ष फिर पहुंच सकता है सुप्रीम कोर्ट

    भोजशाला नमाज विवाद बढ़ा, मुस्लिम पक्ष फिर पहुंच सकता है सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देश के बाद भी मध्यप्रदेश सरकार धार में स्थित भोजशाला के करीब खुले स्थान पर जुमे की नमाज नहीं करवा सकी। हालांकि प्रशासन ने भोजशाला परिसर के पास नमाज नहीं करवा पाने से जुड़ी किसी विशेष वजह का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इसके पीछे सर्वोच्च न्यायालय का विस्तृत आदेश देर से उपलब्ध होना तथा आदेश के अनुरूप नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तत्काल निर्धारित नहीं हो पाना प्रमुख कारण रहे। इसके चलते मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र की मस्जिदों में जुम्मे की नमाज अदा की। हालांकि मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जताई है और निर्णय के खिलाफ एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय जाने की बात कही है।

    उधर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद प्रशासन ने शहर में एक स्थान को हर शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए निर्धारित कर दिया। इस दौरान प्रशासन ने मालीवाड़ा स्थित 'चालीसा पीर परिसर' को प्रत्येक शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किए जाने की जानकारी दी।

    SC के आदेश के बाद प्रशासन ने की थी अहम बैठक
    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा की मौजूदगी में पुलिस एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर काजी वकार सादिक सहित मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    'चालीसा पीर दरगाह' के पास की जगह नमाज के लिए दी
    प्रशासन ने बैठक में प्रतिनिधियों को बताया कि सुरक्षा, सुगम आवागमन और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ग्राम मालीवाड़ा के सर्वे क्रमांक 664 स्थित 'चालीसा पीर दरगाह' के निकट खाली भूमि को जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किया गया है। प्रशासन के अनुसार अब प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच इस स्थान पर जुम्मे की नमाज अदा की जा सकेगी।

    प्रशासन के फैसले से भड़का मुस्लिम पक्ष
    उधर मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने आरोप लगाया है कि भोजशाला परिसर के करीब नमाज की व्यवस्था के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्थानीय प्रशासन ने पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्णय के खिलाफ वे एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

    'सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटी जगह कहा था'
    अब्दुल समद ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में भोजशाला परिसर से सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का उल्लेख किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम राहत का मुख्य वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी आधार पर मुस्लिम पक्ष प्रशासन की तरफ से आयोजित बैठक में शामिल हुआ था, ताकि नमाज की व्यवस्था पुनः शुरू हो सके।

    'नमाज के लिए भोजशाला से 2 किमी दूर जगह दी'
    अब्दुल समद का आरोप है कि प्रशासन ने करीब तीन घंटे तक चर्चा के बाद लिखित आदेश सौंपते हुए नमाज के लिए भोजशाला परिसर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थान चिन्हित कर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज करा दी है और उनका मानना है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा उनके अधिकारों का हनन हुआ है।

    हिंदू पक्ष ने की थी भोजशाला से 300 मीटर बाहर की जगह देने की मांग
    इससे पहले भोजशाला परिसर के समीप नमाज की व्यवस्था को लेकर हिंदू पक्ष ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए नमाज की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर की जाए। हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने इस बारे में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि 'उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर बताया गया है तथा परिसर में नमाज की अनुमति नहीं है।'

    शर्मा का कहना था कि 'सर्वोच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर के निकट खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के अनुसार भोजशाला के 100 मीटर क्षेत्र को संरक्षित तथा 200 मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को विनियमित माना गया है। ऐसे में नमाज़ की व्यवस्था इस पूरे 300 मीटर के दायरे से बाहर की जानी चाहिए।'

  • UNSC चुनाव में भारत की दावेदारी, चीन की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक चर्चा

    UNSC चुनाव में भारत की दावेदारी, चीन की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक चर्चा

    नई दिल्ली
    UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं। चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।

    क्या बोला चीन
    चीन ने गुरुवार को कहा कि उसने 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने की भारत की घोषणा पर चीन के रुख के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है।'

    क्या बोले जयशंकर
    विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने' पर आधारित है। उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत के संभावित कार्यकाल की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया था।

    चीन नहीं करता भारत का समर्थन
    चीन सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है लेकिन उसने अभी तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है। इसके विपरीत, पांच स्थायी सदस्यों में शामिल अन्य चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस-सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं।

    किस देश से है मुकाबला
    सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। इसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

    भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था। यह संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में भारत का आठवां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।

    सुरक्षा परिषद में नहीं हुआ खास सुधार
    भारत का कहना है कि UNSC का 80 साल पुराना ढांचा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। और इसी वजह से यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी साबित नहीं हुई। भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए।

    स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा, 'हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों में सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर पाई है।'

  • तमिल राजनीति में नया बवाल, सरकार बनने के 2 महीने बाद थलपति विजय पर क्यों उठे सवाल?

    तमिल राजनीति में नया बवाल, सरकार बनने के 2 महीने बाद थलपति विजय पर क्यों उठे सवाल?

    चेन्नई 

    तमिलनाडु में बीते मई महीने में चुनाव जीतकर थलपति विजय ने राजनीति मे धांसू एंट्री मारी थी। हालांकि अब 2 महीने के भीतर ही TVK सरकार मुश्किलों में घिर गई है। इसके पीछे की वजह है राज्य में हाल ही में हुई एक सनसनीखेज घटना। दरअसल तमिलनाडु के नागरकोइल से बीते दिनों एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई थी। यहां की एक जेल में एक दिव्यांग कैदी की हिरासत में मौत हो गई। मामला सामने आते ही राज्य में भारी सियासी बवाल मच गया है। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने विजय की सरकार पर तीखा हमला बोला है।

    इससे पहले नागरकोइल के एथनकाडु के रहने वाले 35 वर्षीय दिव्यांग एस. सबरी वर्मन की संदिग्ध परिस्थितियों में न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सबरी वर्मन को 9 जुलाई को थेंथमराईकुलम पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जहां उसकी दुकान से करीब 200 ग्राम प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद जब्त किए गए थे। शुरुआत में इस मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आते ही हड़कंप मच गया। रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कोहनी, घुटनों, बांहों और पैरों समेत 19 अलग-अलग जगह पर चोटों के निशान पाए गए।

    जानकारी के मुताबिक 13 जुलाई की आधी रात को सबरी वर्मन और बैरक में बंद दूसरे साथी कैदियों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद बीच-बचाव करने पहुंचे जेल स्टाफ ने भी कथित तौर पर दिव्यांग कैदी को बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी जान चली गई। बवाल बढ़ने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर एक चीफ वार्डन सहित तीन जेल कर्मचारियों को सस्पेंड करके गिरफ्तार कर लिया है। वहीं जेल के 8 साथी कैदियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

    तमाशा देख रही विजय सरकार- DMK
    इस घटना के बाद तमिलनाडु में भारी राजनीतिक आक्रोश देखने को मिल रहा है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने बुधवार रात पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और पुलिस व प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में विजय को भी घेरा। उन्होंने लिखा, “हिरासत में हुई इस मौत के तीन दिन बाद भी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या बयान नहीं आया है। सरकार का कोई भी मंत्री पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। इस सरकार ने प्रभावित परिवार को कोई राहत राशि देने की पहल तक नहीं की है। कुल मिलाकर, हमेशा की तरह टीवीके सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय सिर्फ तमाशा देख रही है।”

    सीबीआई जांच की मांग
    इधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इसे एक भयावह घटना करार दिया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिस तरह पिछली सरकार में कस्टडी में मौतें होती थी, वही अब मौजूदा प्रशासन के अंदर भी जारी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। वहीं PMK नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की है।

  • ISRO का बड़ा कदम, ब्रेन ड्रेन रोकने की तैयारी; वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS पर नई नीति

    ISRO का बड़ा कदम, ब्रेन ड्रेन रोकने की तैयारी; वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS पर नई नीति

    बेंगलुरु 

    भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश के अन्य महत्वपूर्ण कामों से जुड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर इस्तीफा नहीं दे सकते और न ही जल्दी रिटायर हो सकते हैं. ऐसी अर्जी आने पर उसे सीधे ऊपर विभाग को भेजना होगा. यह खबर इसरो की बड़ी समस्या को सामने लाती है. इसरो एक समय सपनों का संस्थान था, लेकिन अब यहां से अच्छे लोग जा रहे हैं। 

    सरकार का नया आदेश क्या कहता है?
    सरकार ने सभी इसरो केंद्रों को निर्देश दिया है कि गगनयान और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स के वैज्ञानिकों की इस्तीफे या रिटायरमेंट की अर्जियां सीधे स्वीकार न करें. हर केस को अंतरिक्ष विभाग को भेजो, वहां से फैसला होगा. सरकार ने खुद माना है कि ऐसे कई मामले आ रहे हैं जिससे देश के बड़े मिशन प्रभावित हो रहे हैं. यह आदेश दिखाता है कि समस्या छोटी नहीं है। 

    इसरो पहले देश के सबसे होशियार युवाओं को खींचता था. यहां काम करने वाले लोग देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे. लेकिन अब कई युवा वैज्ञानिक बाहर जा रहे हैं. कारण सरल हैं – बाहर ज्यादा सैलरी, तेज प्रमोशन, अच्छा माहौल, कम दफ्तरशाही और अच्छा वर्क-लाइफ बैलेंस। 

    निजी स्पेस कंपनियां अच्छे पैकेज दे रही हैं. इसरो में कुछ लोगों को लगता है कि नई सोच को जगह नहीं मिल रही, फैसले में देरी होती है और उनकी मेहनत पूरी तरह सराही नहीं जाती. जब मन नहीं लगता तो लोग चले जाते हैं। 

    अंतरिक्ष क्षेत्र में नई बदलाव और मुश्किल
    सरकार ने इन-स्पेस बनाकर निजी कंपनियों को अंतरिक्ष में काम करने की इजाजत दी. यह अच्छी बात है. निजी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट और सर्विसेस बना रही हैं. लेकिन इसरो मजबूत रहे तभी यह सब काम करेगा. अगर इसरो के अनुभवी लोग चले गए तो नई टेक्नोलॉजी कौन बनाएगा? गगनयान मिशन में इंसान को अंतरिक्ष भेजना है. इसमें बहुत सावधानी और कुशल लोग चाहिए. अगर वे जा रहे हैं तो मिशन मुश्किल हो जाएगा। 

    इसरो की सफलता का राज था – यहां वैज्ञानिकों को आजादी थी, गलती से सीखते थे और टीम में काम करते थे. विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे बड़े लोग यहां संस्कृति बनाकर गए. लोग इसलिए रुकते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वे देश के बड़े काम में हिस्सा हैं. अब कुछ लोग कहते हैं कि संस्थान में संस्कृति बदल गई है. नेतृत्व, फैसले लेने का तरीका और युवाओं को मौके कम मिल रहे हैं. यही वजह है कि रोकने वाला आदेश निकाला गया। 

    गगनयान मिशन पर खतरा
    गगनयान भारत का पहला इंसानी अंतरिक्ष मिशन है. इसमें बहुत ऊंची तकनीक लगती है. अगर इससे जुड़े वैज्ञानिक चले गए तो काम प्रभावित होगा. सरकार ने सही पहचाना कि यह समस्या है, इसलिए आदेश जारी किया. लेकिन यह सिर्फ तुरंत का उपाय है. लंबे समय तक रोककर समस्या नहीं सुलझेगी। 

    निजी कंपनियां इसरो की पुरानी तकनीक और ज्ञान पर काम कर रही हैं. देश के टैक्स का पैसा दशकों से लगाकर इसरो ने बुनियाद बनाई. अगर इसरो कमजोर हुआ तो निजी क्षेत्र भी प्रभावित होगा. दोनों को साथ चलना चाहिए. इसरो बड़े-बड़े रिसर्च और नए मिशन पर ध्यान दे, निजी कंपनियां व्यापार करें. लेकिन इसके लिए इसरो को आकर्षक जगह बनाना जरूरी है। 

    सरकार को क्या करना चाहिए?
    यह आदेश समस्या दिखाता है लेकिन हल नहीं है. सरकार को वैज्ञानिकों से बात करनी चाहिए. उनकी शिकायतें सुननी चाहिए. सैलरी बढ़ानी चाहिए, प्रमोशन आसान बनाना चाहिए, रिसर्च के लिए पैसे देने चाहिए और अच्छा काम का माहौल बनाना चाहिए. युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के मौके देने चाहिए. तभी वे खुशी से रहेंगे। 

    भारत 2040 तक बड़ा अंतरिक्ष देश बनना चाहता है. इसके लिए इसरो को फिर से सपनों का केंद्र बनाना होगा. जहां लोग खुद आना चाहें और रहना चाहें. सिर्फ आदेश से नहीं, बल्कि अच्छे माहौल, अच्छी सैलरी और सही नेतृत्व से काम चलेगा. देश के वैज्ञानिक अभी भी इसरो में योगदान देना चाहते हैं. उन्हें सही मौका और प्रोत्साहन चाहिए। 

    इसरो का यह नया आदेश बताता है कि अच्छे वैज्ञानिक जा रहे हैं. गगनयान और देश के सपनों के लिए इसे गंभीरता से लेना होगा. रोक-टोक अस्थाई है. असली हल है – इसरो को फिर से आकर्षक और मजबूत बनाना. अगर आज ध्यान दिया तो कल भारत अंतरिक्ष में और आगे निकल जाएगा. वैज्ञानिकों को रोकने के लिए नियम नहीं, बल्कि सपना और प्रेरणा चाहिए। 

  • रेल टिकट बुकिंग का बदला अनुभव, IRCTC की नई BETA वेबसाइट में क्या-क्या है खास?

    रेल टिकट बुकिंग का बदला अनुभव, IRCTC की नई BETA वेबसाइट में क्या-क्या है खास?

    नई दिल्ली
    अगर आप ट्रेन टिकट बुक करने के लिए IRCTC की वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. रेलवे ने नई IRCTC वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है। 

    इस नए वर्जन को आम लोगों के लिए टेस्टिंग के तौर पर जारी किया जा रहा है ताकि यूजर्स इसका इस्तेमाल करें और अपने फीडबैक दे सकें. रेलवे का कहना है कि लोगों के फीडबैक के बाद इसमें और सुधार किए जाएंगे. बाद में यही नया पोर्टल सभी यूजर्स के लिए लॉन्च होगा। 

    2002 से चल रही वेबसाइट अब बदलेगी

    IRCTC की वेबसाइट पहली बार साल 2002 में शुरू हुई थी. आज यह हर दिन औसतन 14.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग हैंडल है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लोग हर महीने टिकट बुक करते हैं। 

    IRCTC वेबसाइट का नया लुक
    अब करीब 24 साल बाद इसकी डिजाइन और काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया जा रहा है ताकि टिकट बुक करना आसान और तेज हो सके। 

    क्लीन और आसान यूजर इंटरफेस
    रेल मंत्रालय के मुताबिक नई वेबसाइट का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया डिजाइन है. वेबसाइट पहले के मुकाबले ज्यादा क्लीन दिखेगी. स्क्रीन पर बेवजह के पॉप-अप, चमकती हुई चीजें और ध्यान भटकाने वाले एलिमेंट नहीं होंगे. इससे यूजर जरूरी जानकारी पर आसानी से ध्यान दे पाएंगे और टिकट बुकिंग का अनुभव बेहतर होगा.

    बार-बार Captcha भरने की परेशानी होगी कम
    नई वेबसाइट में सबसे बड़ा बदलाव Captcha को लेकर किया गया है. टिकट बुक करते समय कई बार यूजर्स को बार-बार कैप्चा भरना पड़ता था, जिससे बुकिंग में समय लगता था। 

    नए बीटा वर्जन में इस परेशानी को काफी हद तक कम किया गया है. इससे खासकर तत्काल टिकट बुक करने वाले लोगों को राहत मिल सकती है। 

    सभी क्लास की सीट एक साथ दिखेंगी
    नई वेबसाइट में सीट उपलब्धता देखने का तरीका भी बदला गया है. अब अलग-अलग क्लास में सीट देखने के लिए बार-बार बदलने की जरूरत नहीं होगी. यूजर एक ही जगह पर अलग-अलग क्लास की सीट उपलब्धता देख सकेंगे. इससे सही विकल्प चुनना पहले से आसान होगा। 

    IRCTC ने चेकआउट प्रोसेस को भी आसान बनाया है. पहले टिकट बुक करते समय कई स्क्रीन और कई स्टेप पूरे करने पड़ते थे. नई वेबसाइट में इन्हें कम किया गया है. यानी टिकट बुक करने में कम समय लगेगा और पूरी प्रक्रिया पहले से तेज होगी। 

    बार-बार पैसेंजर्स की जानकारी भरने की जरूरत नहीं
    अगर आप अक्सर एक ही लोगों के लिए टिकट बुक करते हैं, तो नई वेबसाइट में यह काम भी आसान हो जाएगा. इसमें सेव किए गए यात्री की जानकारी दोबारा इस्तेमाल की जा सकेगी. हर बार नाम, उम्र और दूसरी जानकारी फिर से भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

    रेल मंत्रालय ने बताया कि इस नई वेबसाइट के डिजाइन में मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) जयपुर के छात्रों के सुझाव भी शामिल किए गए हैं. छात्रों ने वेबसाइट को ज्यादा आसान और यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे. उन्हीं सुझावों के आधार पर यह नया बीटा वर्जन तैयार किया गया है। 

    अभी सिर्फ बीटा वर्जन, बाद में होगा पूरा लॉन्च
    सरकार का कहना है कि फिलहाल यह सिर्फ बीटा वर्जन है. इसका मकसद यूजर्स से फीडबैक लेना है. लोगों के सुझाव मिलने के बाद वेबसाइट में और सुधार किए जाएंगे. इसके बाद कुछ ही हफ्तों में नया IRCTC पोर्टल पूरी तरह लॉन्च किया जाएगा। 

    नए पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन से भी जुड़ेगी वेबसाइट
    रेल मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि नई वेबसाइट को जल्द ही नए पैसेंजर रिजर्वेशन (PRS) से जोड़ा जाएगा. यही सिस्टम पूरे देश में रेलवे टिकट बुकिंग को संभालता है. इस सिस्टम को भी मॉडर्न बनाया जा रहा है ताकि ज्यादा ट्रैफिक के दौरान भी वेबसाइट बेहतर तरीके से काम कर सके। 

    बीटा वेबसाइट कहां मिलेगी?
    नई बीटा वेबसाइट को https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर इस्तेमाल कर सकेंगे. मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर भी बीटा वर्जन का लिंक दिया जाएगा, ताकि लोग आसानी से नई वेबसाइट को आजमा सकें। 

    नई वेबसाइट का मकसद सिर्फ नया लुक देना नहीं है, बल्कि टिकट बुकिंग को तेज, आसान और कम परेशानी वाला बनाना है. अगर बीटा टेस्टिंग सफल रहती है, तो आने वाले हफ्तों में करोड़ों रेलवे यात्रियों को यही नया IRCTC पोर्टल इस्तेमाल करने को मिलेगा।