Category: देश

  • घर के विरोध को पार कर NEET प्रदर्शन में पहुंचे युवाओं की संघर्ष भरी कहानी

    घर के विरोध को पार कर NEET प्रदर्शन में पहुंचे युवाओं की संघर्ष भरी कहानी

    नई दिल्ली
    NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे कई Gen Z युवाओं के लिए पहली लड़ाई दिल्ली में नहीं, बल्कि उनके अपने घरों में लड़ी गई थी. पटना साहिब से आए 21 वर्षीय ऋषभ और उनके साथियों ने अपने बीजेपी समर्थक परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद दिल्ली का रुख किया.

    20 जुलाई के पुलिस लाठीचार्ज के बाद उग्र हुए इस आंदोलन ने हजारों युवाओं को आकर्षित किया, जिनमें से कई ने अपने परिवारों की राजनीतिक विचारधारा से अलग हटकर अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.

    बीजेपी समर्थक पिता से विवाद
    बिहार के पटना साहिब के रहने वाले 21 वर्षीय ऋषभ जब जंतर-मंतर पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी. उन्होंने बताया कि ये चोट पुलिस कार्रवाई में नहीं, बल्कि उनके पिता के साथ हुए झगड़े में लगी थी. उनके पिता भारतीय जनता पार्टी के कट्टर समर्थक हैं और वो ऋषभ के दिल्ली जाने के पूरी तरह खिलाफ थे. पिता के धकेलने पर ऋषभ को चोट लगी, लेकिन वह अपने तीन चचेरे भाइयों शिवम, संकेत और निशांत के साथ दिल्ली आ गए.

    ऋषभ के चचेरे भाई शिवम ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि उनके परिवारों में बीजेपी सिर्फ एक राजनीतिक पसंद नहीं, बल्कि परिवार की पहचान का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थक यानी 'भक्त' हैं. दूसरी ओर, लल्लनटॉप के कार्यकारी संपादक कुलदीप मिश्रा ने भी 'नेतानगरी' शो में जिक्र किया था कि एक बीजेपी विधायक की बेटी ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर की थी, जिसे बाद में हटा दिया गया था.

    पुलिस नहीं परिवार के डर से पहना मास्क
    प्रदर्शन स्थल पर बिहार के 22 वर्षीय बीसीए स्नातक आनंद जैसे कई छात्र मास्क पहनकर शामिल हुए. आनंद ने बताया कि वो पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने बीजेपी समर्थक माता-पिता की पहचान से बचने के लिए मास्क पहन रहे थे. आनंद के माता-पिता लगातार फोन करके उन्हें जंतर-मंतर से दूर रहने की हिदायत दे रहे थे, लेकिन आनंद का मानना था कि ये लड़ाई उनके अपने भविष्य से जुड़ी है.

    परिवार से छिपकर प्रदर्शन में पहुंचे
    दिल्ली के रहने वाले हिमांशु शर्मा ने भी अपने परिवार से छिपकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता कट्टर बीजेपी समर्थक हैं और उन्होंने घर पर बताए बिना यहां कदम रखा है. हिमांशु ने कहा कि उनके माता-पिता के गलत पार्टी को समर्थन देने के फैसले की वजह से ही आज उन्हें सडकों पर उतरना पड़ा है. वहीं, उनके दोस्तों अंकित और साकिब ने बताया कि उनके परिवारों को उनके प्रदर्शन में शामिल होने से कोई आपत्ति नहीं थी.

    जंतर-मंतर पर हर कहानी सिर्फ टकराव की नहीं थी. दिल्ली के बाइपास इलाके की रहने वाली अर्पणा के पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हैं. अर्पणा को लगा था कि उन्हें अनुमति नहीं मिलेगी, लेकिन उनके पिता ने कहा कि विरोध करना उनका अधिकार है और उन्हें सुरक्षित रहकर अपनी बात रखनी चाहिए. वहीं, दूसरी ओर 19 वर्षीय सुहानी ने बताया कि पीएम मोदी को पसंद करने वाले उनके परिवार को बिना बताए ही वो इस आंदोलन का हिस्सा बनी हैं.

    दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी से उपजे कॉकरोच जनता पार्टी संगठन ने अभिजीत दिपके के नेतृत्व में ये आंदोलन शुरू किया था. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों के अनशन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद छात्रों का गुस्सा बेहद बढ़ गया और जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जमा हो गई.

    जंतर-मंतर पर जुटे हजारों युवाओं की अपनी-अपनी कहानियां थीं. कोई घर की लड़ाई के निशान लेकर पहुंचा था तो कोई TV रिपोर्टों और रील्स में पहचाने जाने के डर से चेहरे पर मास्क लगाए हुए था. कइयों के फोन घर से लगातार बज रहे थे. इन सभी युवाओं के लिए सबसे बड़ी परीक्षा जंतर-मंतर पर नहीं, बल्कि अपने ही घरों में अपने 'भक्त' परिजनों के खिलाफ जाकर अपनी आवाज बुलंद करने की थी.

  • मोहन भागवत ने क्यों कहा ‘नई पीढ़ी से संवाद जरूरी’? CJP प्रदर्शन के बीच बयान बना चर्चा का विषय

    मोहन भागवत ने क्यों कहा ‘नई पीढ़ी से संवाद जरूरी’? CJP प्रदर्शन के बीच बयान बना चर्चा का विषय

    नई दिल्ली

    दिल्‍ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुआई में विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. NEET पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे की मांग तेज हो गई है. CJP के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत हुई थी. इस वार्ता में CJP की तरफ से सरकार के प्रतिनिधियों के समक्ष कुछ मांगें रखी गईं. बाद में मीडिया से बात करते हुए CJP के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान जब तक इस्‍तीफा नहीं देंगे, CJP का प्रदर्शन यूं ही चलता रहेगा. युवाओं और छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन के बीच अब राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्‍होंने कहा कि नई पीढ़ी हर बात पर सवाल पूछती है और उन्‍हें तर्क से समझाना पड़ता है. मोहन भागवत ने कहा कि बच्चों और युवाओं को अधिक अपनापन, समय और संवाद की जरूरत है। 

    आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि आज के समय में परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने की है. उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि वे बच्चों को पर्याप्त समय दें, उनकी जिज्ञासाओं का धैर्यपूर्वक समाधान करें और अपने व्यवहार से उन्हें संस्कार दें, क्योंकि बच्चे केवल उपदेश से नहीं बल्कि माता-पिता के आचरण से अधिक सीखते हैं. मोहन भागवत शुक्रवार को अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विश्वमांगल्य सभा की ओर से आयोजित ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर जागरूकता सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मां ही मनुष्य के जीवन की पहली गुरु होती है और वही जीवनभर भावनात्मक संबल प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है. सृष्टि का निर्माण, पालन-पोषण और उसके निरंतर विकास में मातृत्व की केंद्रीय भूमिका है। 

    बच्चों के प्रश्नों का जवाब और मार्गदर्शन जरूरी
    मोहन भागवत ने कहा कि समय और परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन मातृत्व के मूल मूल्य कभी नहीं बदलते. मातृत्व का आधार प्रेम, त्याग, करुणा और संस्कार है, जो हर युग में समान रूप से प्रासंगिक रहते हैं. उन्होंने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक विकास की भी है. इसके लिए माता-पिता को स्वयं भी निरंतर सीखते रहना चाहिए ताकि वे बच्चों के प्रश्नों और बदलते समय की चुनौतियों का सही मार्गदर्शन कर सकें. आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार व्यवस्था और मातृत्व को हमेशा विशेष महत्व दिया गया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विचारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने मातृत्व और भारतीय जीवन मूल्यों की महत्ता को अपने विचारों में प्रमुख स्थान दिया है। 

    ‘भारतीय संस्‍कृति के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है’
    मोहन भागवत ने कहा कि समाज में कई बार भारतीय संस्कृति और परंपराओं को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है, जबकि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और सशक्त है. उन्होंने लोगों से अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास बनाए रखने का आग्रह किया. साथ ही कहा कि भारत की सबसे बड़ी पहचान विविधता में एकता है और देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय संस्कृति तथा जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने विदेशी जीवनशैली की अंधी नकल से बचने और भारतीय परिवार व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. विश्वमांगल्य सभा ने 23 और 24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र में उत्तर भारत का राष्ट्रीय जागरूकता सम्मेलन आयोजित किया था. सम्मेलन में लगभग 280 महिलाओं ने भाग लिया, जबकि समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की 900 से अधिक प्रमुख महिलाएं उपस्थित रहीं. ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर आयोजित इस संवाद के लिए करीब 2,000 से 2,500 महिलाओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया था। 

    23 प्रांत में अधिवेशन
    संगठन के अनुसार, वर्ष 2026 में देश के 23 प्रांतों में आयोजित अधिवेशनों में लगभग 37 हजार महिलाओं ने भाग लिया. विश्वमांगल्य सभा वर्तमान में 33 प्रांतों में सक्रिय है और उसके साथ करीब छह लाख महिलाएं जुड़ी हैं. भारत के अलावा संगठन की गतिविधियां अमेरिका और नीदरलैंड सहित 14 देशों में संचालित हो रही हैं. संगठन का उद्देश्य महिलाओं में मातृत्व, संस्कार, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित कर परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाना है। 

  • NTA पर बड़ी गाज! 47 अफसर बर्खास्त, बिहार से पकड़ा गया पेपर लीक का मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता

    NTA पर बड़ी गाज! 47 अफसर बर्खास्त, बिहार से पकड़ा गया पेपर लीक का मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता

     नई दिल्ली
       महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. लंबे समय से फरार चल रहे कथित पेपर लीक माफिया बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है. उसके साथ एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है। 

    महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक, बिजेंद्र गुप्ता कई महीनों से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था. उसे पकड़ने के लिए बिहार समेत कई राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही थी.आखिरकार पुलिस ने उसे बिहार से गिरफ्तार कर लिया। 

    बिजेंद्र गुप्ता का नाम देश के कई चर्चित पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका है. साल 2024 में NEET पेपर लीक विवाद के बाद स्टिंग ऑपरेशन में उसने कथित तौर पर पेपर लीक सिंडिकेट के काम करने के तरीके और NTA की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को लेकर कई दावे किए थे। 

    NTA के 47 अफसर बर्खास्त

    एजुकेशन सिस्टम और एग्जाम आदि में बड़े सुधार की दिशा में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ा कदम उठाया है. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, NTA ने 47 अधिकारियों को टर्मिनेट कर दिया है. इसके साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। 

    सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई NTA में बड़े सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए शुरू किए गए बड़े अभियान का हिस्सा है. मंत्रालय का कहना है कि आने वाले दिनों में एजेंसी में सुधार से जुड़े और भी कई अहम कदम उठाए जाएंगे. गौरतलब है कि हाल के समय में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर NTA लगातार विवादों में रही है। 

    ऐसे में एजेंसी के ढांचे और कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई NTA के संपूर्ण पुनर्गठन (ओवरहॉल) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया जा सके। 

    बिजेंद्र गुप्ता चकमा देकर पुलिस से बचता रहा
    जांच एजेंसियों के मुताबिक, महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में इससे पहले बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि, बिजेंद्र खुद लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था. उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। 

    अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस को उम्मीद है कि पेपर लीक नेटवर्क, उससे जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे सिंडिकेट के संचालन को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं. पुलिस उससे पूछताछ कर मामले की आगे की जांच कर रही है। 

    छात्र आंदोलन के बीच बिजेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी अहम
    बिजेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के कई हिस्सों में NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र आंदोलन जारी है. CJP के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्र लगातार पेपर लीक सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र TET पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

    NTA में केवल 39 स्थायी कर्मचारी
    केंद्र सरकार ने राज्यसभा में NTA के स्टाफ से जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए बताया कि एजेंसी में केवल 39 स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 73 कर्मचारी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर नियुक्त हैं. शिक्षा मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में कहा कि NTA का काम केवल स्थायी और संविदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी आउटसोर्स स्टाफ और अल्पकालिक आधार पर नियुक्त कर्मियों पर भी काफी हद तक निर्भर रहती है। 

    मंत्रालय के अनुसार, परीक्षा की प्रकृति के आधार पर NTA देशभर में विभिन्न परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए ऑब्जर्वर, सिटी कोऑर्डिनेटर, सेंटर सुपरवाइजर, राज्य स्तरीय समन्वय समितियों (SLCC) और जिला स्तरीय समन्वय समितियों (DLCC) के सदस्यों की सेवाएं लेती है. सरकार ने बताया कि इन कर्मियों की तैनाती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, केंद्रीय वित्तपोषित उच्च शिक्षण संस्थानों तथा नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय जैसे सरकारी स्कूलों के सहयोग से असाइनमेंट के आधार पर की जाती ह.। इनकी मदद से देशभर में बड़े पैमाने पर परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न कार्य संपन्न कराए जाते हैं। 

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेगी सरकार!
    इससे पहले सूत्रों के हवाले से सामने आया था कि सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेगी. नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी। 

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे और सरकार इसे समस्या का समाधान नहीं मानती. सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि इस्तीफा देना और जिम्मेदारी से पीछे हट जाना सबसे आसान रास्ता है. जनता ने सरकार को जनादेश दिया है और सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए व्यवस्था में सुधार करेगी. पूरी पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी है। 

    NTA ने शुरू की भर्ती प्रक्रिया, निकाली वैकेंसी
    वहीं दूसरी ओर खबर सामने आई है कि, NTA ने अपने संस्थागत पुनर्गठन (Institutional Restructuring) के तहत बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था NTA ने चार वरिष्ठ जनरल मैनेजर (General Manager) के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है. इसके अलावा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के प्रतिभा सेतु (Pratibha Setu) पोर्टल के माध्यम से 16 यंग प्रोफेशनल्स के आवेदन भी आमंत्रित किए गए हैं। 

    यह भर्ती प्रक्रिया प्रो. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Committee of Experts) की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही है. यह समिति राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के संचालन को लेकर उठे सवालों और विवादों के बाद गठित की गई थी। 

     

  • जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन

    जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन

     नई दिल्ली

    सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मुलाकात के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है. सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर थे.

    सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बैठक के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है। 

    सोनम वांगचुक ने दी जानकारी
     सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह व लेह-लद्दाख की 'एपेक्स बॉडी' के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त किया। 
     
    वागंचुक ने आगे बताया कि इससे पहले, अलग-अलग राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था. यह कदम विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. मैं बहुत जल्द एक अलग वीडियो में इन शर्तों के बारे में विस्तार से बताऊंगा. इस बीच, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि कहीं भी किसी भी तरह की हिंसा न होने देने को लेकर बहुत सतर्क रहें। 

    अनशन का अंत… जवाबदेही की शुरुआत…!" देखिए सोनम वांगचुक ने क्या कहा?

    26 दिनों के उपवास के बाद सोनम वांगचुक ने सबसे पहले बातचीत और सहयोग की प्रक्रिया के प्रति आभार जताया. इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में वांगचुक ने लिखा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के अलावा लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था। 

    प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कोई कार्रवाई
    वांगचुक ने कहा कि सरकार ने लिखित आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं तथा 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर, कानूनी कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।

    मृत छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
    उन्होंने बताया कि कथित पेपर लीक प्रकरण से जुड़े जिन 20 से अधिक छात्रों की मौत हुई, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने इस मांग पर भी लिखित सहमति दी है।

    संसद में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा
    वांगचुक ने कहा कि सरकार ने संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने का भी लिखित आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और जिम्मेदारी तय हो।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं मिला आश्वासन
    वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण तीन मांगें थीं, जिन पर लिखित सहमति मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला किया।

    इस बीच, PM मोदी ने एक्स पर कहा कि मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें। 
     
    बता दें, सोनम वांगचुक को पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया था. वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कोर्ट से मांग की थी कि वांगचुक को इलाज के लिए मेदांता भेजा जाए. दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार निगरानी जरूरी है। 

    वहीं अब जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात की, जहां अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेडिकल निगरानी के लिए भर्ती कराया गया था। 

    केंद्र सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा
    केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के लिए चार औपचारिक प्रस्ताव भेजे हैं. सरकार सभी मुद्दों पर किसी भी समय चर्चा करने को तैयार है. डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बातचीत जेपी नड्डा के कार्यालय या आवास पर भी हो सकती है और वे स्वयं तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इसमें शामिल होंगे. उन्होंने इसे छात्रों और युवाओं के हित में सरकार द्वारा उठाए जा रहे निरंतर कदमों का हिस्सा बताया. संवाद और चर्चा के माध्यम से हम धीरे-धीरे समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे. मैं विनम्रतापूर्वक आप सभी से आग्रह करता हूं कि आइए और बातचीत कीजिए। 

    परिवार और समर्थकों का किया धन्यवाद
    अनशन समाप्त करने के दौरान वांगचुक ने अपने परिवार, समर्थकों, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेताओं का विशेष रूप से आभार जताया. उन्होंने कहा कि कठिन समय में परिवार ने उन्हें लगातार ताकत और समर्थन दिया. डॉक्टरों ने भी बताया कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। 

    PM मोदी ने की स्वस्थ रहने की अपील
    सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी. PM ने कहा, "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ कि वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें. मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें." प्रधानमंत्री के इस संदेश को आंदोलन के बाद एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 

    पेपर लीक पर PM का बड़ा संदेश
    इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक मामलों पर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य विषय नहीं है और इससे लाखों छात्रों तथा उनके परिवारों को पीड़ा पहुंचती है. PM ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में दोषियों की गिरफ्तारी समेत कई कदम उठाए गए हैं. सरकार की प्राथमिकता थी कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में दोबारा परीक्षा कराई गई और 22 लाख छात्रों के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की गई. उन्होंने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधानों वाला मसौदा तैयार हो चुका है और इसे कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा. इसके बाद संसद में जल्द कानून लाने का प्रयास किया जाएगा। 

     

  • PM Modi on Paper Leak: छात्रों के नाम वीडियो संदेश में बोले- परीक्षा प्रणाली को बनाएंगे और मजबूत

    PM Modi on Paper Leak: छात्रों के नाम वीडियो संदेश में बोले- परीक्षा प्रणाली को बनाएंगे और मजबूत

      नई दिल्ली
    जंतर मंतर पर जारी आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी किया. PM मोदी ने कहा, पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि आज इस मामले में और भी बड़ी और कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह भी कहा कि पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कार्रवाई के लिए कल कैबिनेट में चर्चा भी होगी। 

    पीएम मोदी ने क्या कहा?
    प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ' फ्रेंड्स पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. इससे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को बेहद पीड़ा होती है. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक की घटनाओं के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। 

    उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह थी कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो. इसलिए कम से कम समय में करीब 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने की व्यवस्था की गई. प्रधानमंत्री ने कहा कि 19 तारीख को परीक्षा के नतीजे भी जारी कर दिए गए हैं और देशभर से सफल विद्यार्थियों की खुशी की खबरें सामने आ रही हैं। 

    फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रस्ताव

    पीएम मोदी ने कहा कि 'सरकार केवल इतनी कार्रवाई से संतुष्ट होने वाली नहीं है. उन्होंने बताया कि आज उन्होंने संबंधित विभागों को पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे. विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात इसका मसौदा तैयार कर उन्हें सौंप दिया है। 

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव में फास्ट ट्रैक कोर्ट के साथ दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. इस मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी और मंत्रियों के सुझाव के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सोमवार से संसद के दूसरे सप्ताह की कार्यवाही शुरू हो रही है और सरकार जल्द से जल्द इस विधेयक को सदन में पारित कराने का प्रयास करेगी। 

    बता दें, इस बीच केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के पद पर बड़ा बदलाव किया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है. वहीं, उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है। 

  • PMO के बाहर बैठने पर उठे सवाल, सोनम वांगचुक की पत्नी ने राहुल गांधी को दी नसीहत

    PMO के बाहर बैठने पर उठे सवाल, सोनम वांगचुक की पत्नी ने राहुल गांधी को दी नसीहत

    नई दिल्ली

    NEET पेपर लीक के खिलाफ लगातार अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बाहर जाकर धरना देना ठीक नहीं था। उन्हें जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ आकर बैठना चाहिए था। उनके इस कदम की आलोचना करते हुए आंग्मो ने इसे एक नॉन सिंसियर कदम बताया है।

    इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अब वे लोगों को बहलाने-फुसलाने या भ्रमित करने का काम नहीं कर सकते हैं। वीडियो शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी ने भी राहुल के इस कदम की निंदा की है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने एक्स पर शेयर किए इस वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'पीएम आवास के बाहर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह बनावटी था। अगर छात्रों के लिए नीयत साफ होती तो राहुल गांधी को जंतर मंतर पर छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए था। जनता अब ऐसे हथकंडों में फंसने वाली नहीं है।''

    गीतांजलि आंग्मो ने क्या कहा?
    एक सवाल के जवाब में आंग्मो ने कहा, 'हम हर उस पार्टी और व्यक्ति के साथ हैं जो भारत के बेहतर भविष्य की चिंता कर रहे हैं। जहां तक पीएमओ के बाहर हुए धरना-प्रदर्शन का सवाल है तो सभी ने एक बात गौर किया कि इसमें ईमानदारी की कमी थी। अगर वह इस मुद्दे पर ईमानदार होते तो जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ खड़े होते। लोगों को आप मूर्ख नहीं बना सकते हैं। यह जागा हुआ भारत है। उन्हें इस मामले पर ईमानदारी से साथ देना चाहिए।'

    नड्डा ने भी राहुल गांधी को घेरा
    वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार रात को प्रेस कांफ्रेस कर सरकार की स्थिति तो साफ की ही साथ ही विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। दरअसल मंगलवार लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर धरना प्रदर्शन के बाद सरकार व विपक्ष में टकराव बढ़ा है। बुधवार को विपक्ष के तीखे तेवरों पर सरकार ने भी पलटवार किया। संसद में भी और संसद के बाहर भी। इस बीच सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह ने अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनसे अनशन तोड़ने का आग्रह भी किया।

    सारे घटनाक्रम के बीच नड्डा ने प्रेस कांफ्रेस में विपक्ष खासकर राहुल गांधी को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने पेपर लीक का जो मुद्दा उठाया है, हमें इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। इसका राजनीतिक लाभ भी नहीं लेना चाहिए। यह गहन चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 150 पेपर लीक की चर्चा की है। निश्चित रूप से यह जांच का विषय है और जिम्मेदार सरकार होने के नाते हर बात का जवाब देंगे। जनता के सामने दूध का दूध पानी का पानी आएगा।

    नड्डा ने लगभग एक दर्जन कांग्रेस, उसके सहयोग व समर्थन वाली विभिन्न सरकारों के समय हुए पेपर लीक के मुद्दे गिनाए और कहा कि इसकी लंबी सूची है। इस पर भी चर्चा चाहेंगे, लेकिन राहुल गांधी सिलेक्टिव क्यों है क्या उनकी, यूपीए की व अन्य सहयोग वाली सरकारों के समय हुए पेपर लीक पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। वह खुद को क्यों अलग रख रहे हैं। दरअसल उनका उद्देश्य छात्रों का हित नहीं है। छात्रों को लाभ मिले, शिक्षा बेहतर हो इसमें उनकी रुचि नहीं है। वह राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

  • पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस, PM मोदी ने सुनाए 5 बड़े फैसले, दोषियों पर कसेगा शिकंजा

    पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस, PM मोदी ने सुनाए 5 बड़े फैसले, दोषियों पर कसेगा शिकंजा

    नई दिल्ली

    NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेगी. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। 

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिया जाएगा. इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा." उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए गए हैं। 

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार लगातार फैसले ले रही है और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने दोहराया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

    प्रधानमंत्री मोदी के 5 बड़े संदेश

    1. देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
    2. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाई जाएगी.
    3. ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा.
    4. संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं.
    5. विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार फैसले ले रही है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

    NEET पेपर लीक पर छात्रों का आंदोलन जारी
    प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है. सरकार पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 

    प्रधानमंत्री के बयान के कुछ ही मिनट बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पलटवार किया. उन्होंने कहा, "देश के युवाओं का भविष्य सबसे ज्यादा आपने ही खराब किया है. आपने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद होने दिया और इसके जिम्मेदार लोगों को बचाया।

     राहुल गांधी ने भी उठाई छात्रों की मांग
    राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त किया जाए, छात्रों से माफी मांगी जाए और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। 

    प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब संसद के भीतर और बाहर NEET-UG पेपर लीक को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

    पीएम मोदी के ऐलान पर सीजेपी की प्रतिक्रिया
    पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद छात्र आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अभी भी अपने स्टैंड पर कायम है. सीजेपी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की अपनी मांग दोहराई, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रधान पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के रास्ते खुले हुए हैं., केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर अब जंतर-मंतर आने का हवाला दिया है। 

    राहुल गांधी भी अपने स्टैंड पर पूरी तरह कायम
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा  कि हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा व्यवस्था पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, बल्कि उसे बढ़ावा भी दिया। इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। 

    विपक्ष के नेता
    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें बिल्कुल साफ हैं, उन्होंने तीन मांगें फिर दोहराईं, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी मांगन और छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। 

    कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री में संसद में खड़े होकर बोलने और गंभीर बहस में शामिल होने का साहस नहीं है, जैसा कि उनके सभी पूर्ववर्तियों ने जरूरत पड़ने पर किया था। 

    पीएम मोदी के बयान पर सपा ने उठाए सवाल
    पीएम नरेंद्र मोदी के नीट पेपर विवाद पर आए बयान के बाद सपा के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि इनके(भाजपा) कार्यकाल में कितने पेपर लीक हुए हैं और कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है? अभी तक किसी को कोई सजा हुई है? आप सत्ता में बैठे हैं और जनता आपसे जवाब चाहती है. ये प्रदर्शन कर रहे बच्चे कोई किराए पर लाए नहीं गए हैं… यह तरीका ठीक नहीं है. जो लोग सिविल कपड़ों में बच्चों पर लाठियां बरसा रहे थे, वे लोग कौन थे?

    सरकार से छात्रों का भरोसा टूट गया है-प्रियंका गांधी
    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांध ने कहा कि बच्चों और छात्रों का सिस्टम से भरोसा टूट गया है, जब भरोसा ही नहीं रहा, तो उसी सिस्टम का दिया हुआ समाधान बच्चे कैसे स्वीकार करेंगे? यह बात हर मां-बाप समझते हैं और हमारे प्रधानमंत्री और सरकार को भी समझनी चाहिए, अगर सरकार समाधान चाहती है, तो पहले बच्चों की बात सुने और उनकी मांगें पूरी करे। 

    उन्होंने कहा कि आज देश के हजारों छात्र सड़कों पर हैं, इंडिया गेट पर हैं, जंतर-मंतर पर हैं और पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, ऐसे समय में नेताओं को अपना डर छोड़कर जनता की बात सुननी पड़ेगी. प्रियंका ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, कई घायल हुए। कल रात उन्हें पीटा गया और सुबह ट्वीट करके कहा गया कि बच्चों की चिंता है. अगर सच में चिंता है, तो लाठी क्यों चली? आंसू गैस क्यों छोड़ी गई? 

    प्रियंका ने कहा कि बच्चों को बुलाइए, उनसे बात कीजिए और उनकी बात सुनिए. अगर सरकार भरोसा वापस लाना चाहती है, तो सिस्टम से बाहर निकलकर कुछ ठोस कदम उठाने होंगे. पहला कदम शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। 

  • उत्तराखंड में येलो, हिमाचल में रेड अलर्ट, चारधाम मार्ग प्रभावित, कांगड़ा फ्लैश फ्लड ने मचाई तबाही

    उत्तराखंड में येलो, हिमाचल में रेड अलर्ट, चारधाम मार्ग प्रभावित, कांगड़ा फ्लैश फ्लड ने मचाई तबाही

    देहरादून/ कांगड़ा

    उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से 142 सड़कें बंद हो गई। इस वजह से पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देहरादूनवासियों को मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश ने गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

    142 सड़कें बंद
    लोक निर्माण विभाग के अनुसार मंगलवार सुबह राज्य में बारिश से बंद सड़कों की संख्या 135 थी। दिन में बंद सड़कों की संख्या बढ़कर 142 तक पहुंच गई। हालांकि देर सांय तक 54 सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद अब बंद सड़कों की संख्या 88 रह गई है। लोनिवि की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को सर्वाधिक 37 सड़कें चमोली जिले में बंद हुई। इसके अलावा उत्तरकाशी में 27, टिहरी में 17, पौड़ी में 29 सड़कें बंद थी।

    दून में झमाझम बारिश, गर्मी और उमस से मिली राहत
    देहरादून। दूनवासियों को मंगलवार रात हुई झमाझम बारिश ने गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी है। सुबह के समय शहर के कई इलाकों में हल्की धूप खिली हुई थी, जिससे दिनभर लोगों को चिपचिपी गर्मी का अहसास हो रहा था। हालांकि, रात होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली और आसमान से राहत की बूंदें झमाझम बरसने लगीं। इस तेज बारिश के बाद पूरे इलाके का मौसम सुहाना और काफी ठंडा हो गया है। बारिश की वजह से शहर के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।

    दून समेत सात जिलों में तीव्र बारिश, छह में येलो अलर्ट
    राजधानी दून में मंगलवार सुबह हल्की बूंदाबांदी के बाद मौसम साफ हो गया और धूप निकलने से उमस बढ़ गई। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि दून का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

    बीते 24 घंटे में मसूरी में नौ मिमी और पिथौरागढ़ में 1.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। चकराता में 4.5 मिमी बारिश हुई। वहीं मालदेवता, मसूरी, हाथीबड़कला, मोहकमपुर और कालसी में भी हल्की वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    सुबह बूंदाबांदी, दिन में धूप, रात को बारिश हुई खूब
    शहर के डीएल रोड, रायपुर, राजपुर रोड समेत विभिन्न क्षेत्रों में मंगलवार शाम हुई तेज बारिश से राहगीरों को भी आवाजाही के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, गलियां नालों में तब्दील हो गईं और यहांं कई वाहन तेज बहाव की चपेट में आने से बहने लगे।

    कई इलाकों में बारिश का पानी इतना ज्यादा भर गया कि लोगों के घरों के भीतर घुस गया। लोग बहते वाहनों को बचाने के साथ खुद को भी बचाते दिखे। इससे चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। उधर, मेयर सौरभ थपलियाल ने नगर निगम की क्विक रिस्पॉन्स टीमों को अलर्ट रहने और जलभराव और अन्य समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से जलधाराओं के पास न जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।

    ग्राम्य विकास विभाग की दीवार गिरी, पानी घुसा
    देहरादून। बारिश के कारण सिंचाई विभाग के नाले का पानी बढ़ने से आईटी पार्क के समीप ग्राम्य विकास विभाग की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। इससे पानी ग्र्राम्य विकास विभाग परिसर में घुस गया। पानी के साथ मिट्टी भी परिसर में घुस गई। खुले परिसर में मिट्टी का ढेर लग गया। तीन फीट तक पानी भर गया जो सरकारी कार्यालयों में घुस गया। ग्राउंड फ्लोर में मंगलवार की सुबह कर्मचारियों ने गंदगी को बाहर निकाला। वाइपर व झाड़ू से सफाई की गई। इसके बाद भी कर्मचारियों ने अंदर प्रवेश किया।

    घर और स्कूल बहा, हिमाचल में रेड अलर्ट

    हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश अब तबाही का रूप ले चुकी है. मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच मंगलवार को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए. इस बीच कांगड़ा जिले की बोह घाटी में फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है. यहां 18 मकान, 9 गौशालाएं और एक प्राथमिक स्कूल भवन बह गया. हादसे में तीन महिलाएं घायल हुई हैं. कई जिलों में भूस्खलन से सड़कें बंद हैं और प्रशासन ने लोगों से गैरजरूरी यात्रा नहीं करने की अपील की है। 

    कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी के स्पैदा और गढ़गून गांवों में तेज बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड से भारी नुकसान हुआ है. शुरुआती जानकारी के अनुसार 18 मकान पूरी तरह बह गए हैं. इसके अलावा 9 गौशालाएं और एक प्राथमिक स्कूल भवन भी बाढ़ की चपेट में आ गया. बाढ़ के पानी में आठ मवेशी भी बह गए. घटना में तीन महिलाएं घायल हुई हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। 

    राहत और बचाव अभियान जारी

    जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है. शाहपुर के एसडीएम डॉ. गणेश ठाकुर ने बताया कि वह स्वयं प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना हो गए हैं. हालांकि डिब्बा और मानेड़ नाले के पास बड़े भूस्खलन होने के कारण घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कत आ रही है. मौसम विभाग के रेड अलर्ट को देखते हुए कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा शिमला जिले के ठियोग, चंबा के सलूणी और कुल्लू के निरमंड क्षेत्र में भी लगातार बारिश के कारण सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। 

    किन्नौर जिले में भूस्खलन के कारण पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत रोड यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. शलखर के पास पहाड़ी से अचानक मलबा आने और समदो के पास चट्टानें गिरने से सड़क बंद हो गई है. इसके कारण काजा, स्पीति, पूह और रिकांग पिओ के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया है. प्रशासन ने लोगों से केवल जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। 

    भूस्खलन से बंद हुआ हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग
    बारिश और भूस्खलन के कारण नूरपुर-लाहरू रोड, चुवाड़ी-डलहौजी मार्ग, शाहपुर-सिहुंता-चुवाड़ी रोड और पंजाब से भरमौर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-154ए चक्की मार्ग भी बंद हो गया है. सोमवार शाम से कांगड़ा, चंबा और सिरमौर के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 136.4 मिलीमीटर बारिश पालमपुर में हुई. ददाहू में 105.6 मिलीमीटर, जत्तों बैराज में 103.6 मिलीमीटर, पांवटा साहिब में 79.8 मिलीमीटर, नाहन में 79.2 मिलीमीटर, धर्मशाला में 75.4 मिलीमीटर और भटियात में 71 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। 

    कांगड़ा, पच्छाद, संगड़ाह और धौलाकुआं में भी 60 से 68 मिलीमीटर के बीच बारिश हुई. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर में बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में 36 सड़कें बंद हैं. इनमें 11 सड़कें मंडी और 10 चंबा जिले में हैं. इसके अलावा 43 पेयजल योजनाएं और पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। 

    फ्लैश फ्लड का अलर्ट, 36 सड़कें बंद
    सभी जिलाधिकारियों को जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने लोगों से नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने, गैरजरूरी यात्रा से बचने और केवल आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है. किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 और जिला हेल्पलाइन 1077 पर संपर्क करने को कहा गया है.

  • बिना पंजीकरण नहीं चलेगी दुकान, कांवड़ मेले में कारोबार से पहले जान लें ये 3 अहम नियम

    बिना पंजीकरण नहीं चलेगी दुकान, कांवड़ मेले में कारोबार से पहले जान लें ये 3 अहम नियम

    हरिद्वार

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। सीएम धामी ने मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांवड़ियों के स्वागत और सुगम सफर के लिए सभी इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कांवड़ मेले में दुकान लगाने के लिए पंजीकरण जरूरी है। साथ ही धामी ने बताया कि किसी तरह की गंदगी, मिलावट और नाम बदलकर दुकान चलाने वाले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा, धर्मनगरी के लोग, साधु-संत और सभी स्टेक होल्डर मिलकर शिवभक्तों का स्वागत करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने कांवड़ियों से भी कांवड़ यात्रा के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की। कांवड़ मेले में दुकान लगाने वालों के पास पंजीकरण और वैध प्रमाणपत्र होना चाहिए। किसी भी तरह की गंदगी, खाद्य मिलावट या संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नाम बदलकर दुकानें चलाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने यह बात कही।

    हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के 4 प्रोजेक्ट का शिलान्यास
    सीएम धामी ने अलकनंदा होटल में हुए कार्यक्रम में हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के तहत करीब 235 करोड़ के चार प्रमुख प्रोजेक्ट का भूमि पूजन और शिलान्यास किया।

    चार कौन से प्रोजेक्ट
    मंगलवार को अलकनंदा होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत करीब 235 करोड़ रुपये की चार प्रमुख परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इनमें 43.25 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमि पूजन, जबकि 66.76 करोड़ रुपये की लागत से हरकी पैड़ी और सुभाष घाट के पुनरुद्धार, 66.34 करोड़ रुपये की लागत से हरकी पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास तथा 58.84 करोड़ रुपये की लागत से रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं आगामी महाकुंभ-2027 और हर वर्ष आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं व कांवड़ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी।

    देश पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा
    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के साथ केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर और विवेकानंद कॉरिडोर जैसी योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है।

    महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य होगा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य, भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन बनाने के लिए सरकार युद्धस्तर पर तैयारियां कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

  • समुद्र में बड़ा हमला! यूक्रेन के करीब MV Golden पर मिसाइल गिरी, 4 भारतीयों की गई जान

    समुद्र में बड़ा हमला! यूक्रेन के करीब MV Golden पर मिसाइल गिरी, 4 भारतीयों की गई जान

     नई दिल्ली

    समंदर में एक जहाज पर हुए हमले में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के ओडेशा बंदरगाह से निकल रहा था. तभी इस पर हमला हुआ। 

    भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV GOLDEN LEO नाम के एक जहाज पर हमला हुआ. यूक्रेन का दावा है कि ये हमला रूस ने मिसाइलों से किया है. घटना के समय जहाज़ पर 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे. इनमें से 4 भारतीयों की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। 

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में हमारा मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्रालय हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करते हैं। 

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष आम नागरिकों (क्रू सदस्यों) की जान जोखिम में डालना या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। 

    ये जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहा था. तभी इसे निशाना बनाया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत समुद्र में चल रहा था। 

    मरने वालों में एक शख्स केरल का
    भारतीयों में मरने वालों में एक शख्स केरल का था. 26 साल के इस शख्स का नाम अखिल जोयन है. जो कासरगोड ज़िले के वेल्लारिक्कुंडु के रहने वाले जोयन और सैली का इकलौता बेटा था। 

    बलाल ग्राम पंचायत के वेल्लारिक्कुंडु वार्ड के सदस्य शोबी जोसेफ ने पीटीआई को बताया कि परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी से अखिल की मौत के बारे में एक ईमेल मिला।  

    जहाज पर मिसाइलों से हुआ हमला
    यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक रविवार को ओडेसा से निकलने के कुछ ही देर बाद मक्का ले जा रहे कार्गो जहाज़ 'गोल्डन लियो' पर रूस की तीन क्रूज़ मिसाइलें गिरीं। 

    यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार तट के पास एक जहाज़ से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में 'गोल्डन लियो' के तौर पर हुई. इसके क्रू में भारत और सीरिया के सदस्य शामिल थे। 

    यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण ने बताया कि रात भर खोज और बचाव अभियान चलता रहा. इस हमले में नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हो गई, जबकि 17 क्रू सदस्यों में से आठ को बचा लिया गया। 

    LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, 'गोल्डन लियो' मुंबई स्थित 'ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड' का है. इस जहाज़ का प्रबंधन 'फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी SA' करती है। 

    काला सागर फिर से लड़ाई का मुख्य केंद्र बना
    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन काला सागर और आज़ोव सागर में सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहे हैं, जिससे कमर्शियल शिपिंग और अनाज के निर्यात पर लगातार खतरा बढ़ रहा है। 

    2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद काला सागर इस संघर्ष के सबसे ज़्यादा विवादित इलाकों में से एक बन गया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से कुछ समय के लिए अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ग्लोबल फ़ूड मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिली थी, लेकिन फिर से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे व्यस्त एग्रीकल्चरल शिपिंग रूट में से एक को फिर से बाधित कर दिया है। 

    यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाया है, जबकि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, फ़्यूल फ़ैसिलिटीज़ और कार्गो जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं।