Category: देश

  • Gold-Silver Rate Today: एक घंटे में ₹3,500 तक टूटे दाम, निवेशकों को झटका; चेक करें 18 अगस्त के नए रेट

    Gold-Silver Rate Today: एक घंटे में ₹3,500 तक टूटे दाम, निवेशकों को झटका; चेक करें 18 अगस्त के नए रेट

    इंदौर 

     सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट है. मंगलवार 18 अगस्‍त को बाजार खुलते ही सोने के भाव करीब 1,000 रुपये तक नीचे आ गए, जबकि चांदी में 2,600 रुपये तक की गिरावट देखी जा रही है. सोमवार को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में 1,800 रुपये तक की बढ़त देखी गई थी, लेकिन मंगलवार को सुबह एक घंटे के भीतर सोने-चांदी के दाम करीब 3,500 रुपये तक गिर गए। 

    घरेलू मार्केट MCX पर सुबह करीब 9:50 बजे 5 अक्टूबर की डिलीवरी वाला सोना करीब 870 रुपये की गिरावट के साथ 1,55,070 रुपये/10 ग्राम के भाव पर ट्रेड करता दिखा. वहीं 4 सितंबर की डिलीवरी वाली चांदी में 1 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट देखी जा रही है. सुबह करीब 9:50 बजे चांदी 1.09% या 2,598 रुपये की गिरावट के साथ 2,35,450 रुपये/किलो के भाव पर ट्रेड करता दिखा। 

    सर्राफा बाजार में आज सोने-चांदी के दाम 
    सर्राफा मार्केट में आज 18 अगस्त को 24 कैरेट सोना 15,589 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 14,290 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,692 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है. वहीं, चांदी का भाव 250 रुपये प्रति ग्राम और 2.50 रुपये लाख प्रति किलोग्राम है। 

    देश के अलग-अलग शहरों में 10 ग्राम 24k सोने की कीमत?

        अहमदाबाद में 24K सोने की कीमत 1,55,580 रुपये प्रति ग्राम है। 
        अमृतसर में 24K सोने की कीमत 1,55,680 रुपये प्रति ग्राम है। 
        बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,530 रुपये प्रति ग्राम है। 
        चेन्नई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,530 रुपये प्रति ग्राम है। 
        दिल्ली में 24K सोने की कीमत 1,55,680 रुपये प्रति ग्राम है। 
        हैदराबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,530 रुपये प्रति ग्राम है। 
        जयपुर में 24K सोने की कीमत 1,55,680 रुपये प्रति ग्राम है। 
        कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,530 रुपये प्रति ग्राम है। 
        लखनऊ में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,680 रुपये प्रति ग्राम है। 
        मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,55,530 रुपये प्रति ग्राम है। 

    देश के अलग-अलग शहरों में 1 किलो चांदी की कीमत
        दिल्ली में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम
        जयपुर की बात करें, तो यहां आज चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
        कोलकाता में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
        मुंबई में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
        चेन्नई में चांदी 254,100 रुपये प्रति किलो है। 
        हैदराबाद में चांदी की कीमत 254,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
        अहमदाबाद में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलो है। 
        अमृतसर में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
        बेंगलुरु में चांदी की कीमत 249,100 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

  • कर्नाटक KPSC भर्ती पर ED की सख्ती, 21 जगहों पर तलाशी से मचा हड़कंप; ₹80 लाख में नौकरी के आरोपों से जुड़ा मामला

    कर्नाटक KPSC भर्ती पर ED की सख्ती, 21 जगहों पर तलाशी से मचा हड़कंप; ₹80 लाख में नौकरी के आरोपों से जुड़ा मामला

     बेंगलुरु
       कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती को लेकर बड़ा विवाद बढ़ता जा रहा है. कथित भ्रष्टाचार के मामले में ED ने 21 जगहों पर छापेमारी की है। 

    KPSC भर्ती मामले में ED ने जिन 21 ठिकानों पर छापेमारी की है, उसमें KPSC कार्यालय, सस्पेंड किए गए चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, KPSC सदस्य शांता होसमनी के घर और कथित बिचौलियों के ठिकानें शामिल हैं. ED की टीमें इन जगहों पर तलाशी ले रही है। इसके अलावा, परीक्षा की डिजिट कॉपियां जांचने वाली कंपनी एडुस्टेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटड के कार्यालय और वेटरनरी ऑफिसर पद के लिए चुने गए कुछ उम्मीदवारों के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है. कर्नाटक के कई शहरों के साथ ही अहमदाबाद में भी यह छापेमारियां की जा रही हैं। 

    ED ने KPSC भर्ती में कथित भ्रष्टाचार को लेकर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. मामले में कथित बिचौलियों के रूप में पहचाने गए अली और सिकंदर के घरों की भी तलाशी ली जा रही है। 

    ये छापेमारियां 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत की जा रही हैं. शिवशंकरप्पा साहूकार द्वारा जमानत के लिए हाई कोर्ट जाने के एक बाद यह कार्रवाई शुरू हुई है। 

    क्या है KPSC भर्ती विवाद
    कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है. 400 पदों पर भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अभ्यर्थियों का आरोप है कि फाइनल लिस्ट में नाम शामिल करने के ऐवज में कथित बिचौलियों ने 80 लाख रुपये तक की मांग की है। 

    इन आरोपों के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे. उम्मीदवारों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में एजेंटों के जरिए हेरफेर किया गया और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ। 

    जानकारी के मुताबिक, KPSC ने 342 नियमित (Regular) और 58 बैकलॉग (Backlog) पदों समेत कुल 400 वेटरिनरी ऑफिसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। 

    आरोप है कि इस भर्ती में कुछ कथित बिचौलियों के माध्यम से चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई. अभ्यर्थियों का दावा है कि अंतिम चयन सूची में जगह दिलाने के नाम पर भारी रकम की मांग की गई। 

    उम्मीदवारों के मुताबिक, कुछ लोगों ने कथित तौर पर 80 लाख रुपये तक की मांग की और उन्हें भरोसा दिलाया कि पैसे देने पर उनका चयन हो जाएगा। 

  • कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् पर सियासी घमासान, सोनिया-राहुल के खिलाफ FIR की मांग; BJP का माफी पर जोर

    कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् पर सियासी घमासान, सोनिया-राहुल के खिलाफ FIR की मांग; BJP का माफी पर जोर

    नई दिल्ली

     15 अगस्त को कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में अधिवक्ता शुभ शर्मा ने नई दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर व्यवधान डाला गया। अधिवक्ता शुभ शर्मा ने इस कथित घटना को लेकर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    क्या जानबूझकर व्यवधान डाला गया?
    शिकायत के मुताबिक, 15 अगस्त 2026 को एआईसीसी मुख्यालय में कांग्रेस का स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान जानबूझकर बाधा या व्यवधान पैदा किया गया। इसी आरोप को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ था।

    वैसे इस मामले को लेकर बीजेपी भी कांग्रेस पर हमलावर है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ मिलकर चित्तौड़गढ़ में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण करने गए थे.  इस मौके पर जनसभा को संबोधि‍त करते हुए उन्‍होंने कांग्रेस पर जमकर न‍िशाना साधा. वंदे मातरम व‍िवाद पर अमित शाह ने कहा, "इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए. कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था. चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही. हम सब टीवी पर देखते रह गए। 

    अमित शाह ने कहा, "कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया था. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वो अमर कृति, एक गान के दो शब्द, वंदे मातरम, 'भारत माता की मैं वंदना करता हूं' ये बोलते हुए हजारों-लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे. वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम के भुला दिया था. यह 150वां साल है वंदे मातरम के प्राकट्य का। 

    कर्नाटक में भी केस दर्ज
    इससे पहले कर्नाटक के मंगलूरू में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ उरवा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को गाने के दौरान सोनिया गांधी के हाव-भाव को लेकर हुए विवाद के बाद की गई है।

    भाजपा नेता ने क्या कहा?
    मंगलुरु में भाजपा नेता विकास पुत्तुर ने कहा कि कल कांग्रेस पार्टी की हरकतों को पूरे भारत ने देखा है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से वंदे मातरम का विरोध करती रही है। कल कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में ध्वजारोहण कार्यक्रम हो रहा था। इसी दौरान वंदे मातरम बजाया गया। तब सोनिया गांधी ने कार्यक्रम में रुकावट डाली। हमने और पूरे देश ने देखा कि वह अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम रोकने के लिए कह रही थीं और उन्हें निर्देश दे रही थीं। 

     

  • E20 से पुराने वाहनों की चिंता के बीच बड़ा सुझाव, E10 पेट्रोल फिर शुरू करने की मांग; CEA ने गिनाए कारण

    E20 से पुराने वाहनों की चिंता के बीच बड़ा सुझाव, E10 पेट्रोल फिर शुरू करने की मांग; CEA ने गिनाए कारण

       नई दिल्ली
       
    E20 पेट्रोल को लेकर देश भर में घमासान मचा हुआ है. सड़क से लेकर संसद और सोशल मीडिया तक इस बात की चर्चा हो रही है कि, इस फ्यूल के चलते वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, गाड़ियों के कंपोनेंट खराब हो रहे हैं. तमाम लोग लो इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल जैसे E5 और E10 पेट्रोल के ऑप्शन की मांग कर रहे हैं. इस बीच पहली बार सरकार में बैठे किसी व्यक्ति ने E10 फ्यूल की वापसी की बात की है। 

    E20 को लेकर अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आपकी गाड़ी का इंजन चलेगा या नहीं, सवाल यह है कि पेट्रोल बचाने की इस मुहिम में कहीं देश की खेती, पानी और खाने का हिसाब तो नहीं बिगड़ रहा. और इस सवाल को हल्के में इसलिए नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसे उठाने वाले कोई सोशल मीडिया का आलोचक नहीं, बल्कि भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) हैं। 

    नागेश्वरन ने छपे अपने लेख में E20 से आगे E27 या E30 की तरफ बढ़ने से पहले साफ तौर पर 'फूड-वर्सेस-फ्यूल ट्रेड ऑफ', यानी खाने और फ्यूल के बीच होने जंग का पूरा हिसाब लगाने की जरूरत बताई है. यानी जिस E20 को अब तक पेट्रोल का विकल्प, तेल आयात घटाने का हथियार और पर्यावरण के फायदे की कहानी के तौर पर देखा जा रहा था, उससे आगे बढ़ाने से पहले विचार करना जरूरी है. असल सवाल यह है कि मक्का पेट्रोल की टंकी भरेगा या फिर लोगों का पेट. क्योंकि इंजन की बहस के बीच असली लड़ाई उस जमीन और पानी की है, जिसे एक बार फ्यूल की तरफ मोड़ दिया तो वापस खाने की तरफ लाना इतना आसान नहीं होगा। 

    अनंत नागेश्वरन की सलाह है कि, सरकार को पुराने वाहनों के लिए E10 फ्यूल को वापस लाना चाहिए. जिसमें 90 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल और 10 प्रतिशत इथेनॉल की ब्लेंडिंग हो. लेकिन इससे पहले वो E20 फ्यूल को लेकर फैले डर की भी बात करते हैं. उनका कहना है कि, इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है एक डर तेजी से फैल रहा है. दावा किया जा रहा है कि इससे माइलेज कम हो रहा है और गाड़ियों के कंपोनेंट खराब हो रहे हैं. हालांकि, ये सभी दावे पूरी तरह सही नहीं हैं. इसके पीछे वो कुछ टेस्ट का हवाला देते हैं। 

    क्या E20 से इंजन खराब हो रहा है?
    नागेश्वरन के अनुसार, इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले एनर्जी कम होती है. एक लीटर इथेनॉल से मिलने वाली ऊर्जा पेट्रोल की करीब दो-तिहाई होती है. इसलिए E20 से गाड़ी एक लीटर फ्यूल में थोड़ी कम दूरी तय कर सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंजन में खराबी आ गई है. चूंकि E20 में इथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी होती है, इसलिए कुल एनर्जी में कमी करीब 6 से 7 फीसदी के आसपास रहती है. सोशल मीडिया पर बताए जा रहे 30 फीसदी तक के आंकड़े सही नहीं हैं। 

    दिलचस्प बात यह है कि E20 के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जला हाइड्रोकार्बन जैसे पॉल्यूटेड पाटिकल्स कम हो सकते हैं. इंजन की लाइफ और सस्टेनेबिलिटी को लेकर भी अब तक टेस्ट में कुछ भी डराने वाली बात सामने नहीं है. अमेरिका में ओक रिज़ नेशनल लेबोरेटरी ने उन 86 वाहनों को E20 ब्लेंडेड फ्यूल के साथ तकरीबन 1 करोड़ किलोमीटर तक चलाकर टेस्ट किया जो E20 फ्यूल के कम्प्लायंट नहीं थें. हैरानी की बात है कि, इस टेस्ट में किसी भी वाहनों के कंपोनेंट में कोई एक्स्ट्रा वियर एंड टियर यानी घिसावट देखने को नहीं मिली. भारत में भी ARAI, पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और Indian Oil के टेस्ट से मोटे तौर पर यही नतीजा सामने आए हैं. इसलिए हर E20 वाहन में इंजन खराब होने का दावा आंकड़ों से साबित नहीं होता। 

    पुराने दोपहिया वाहनों की चिंता असल वजह
    यहां एक बड़ा अपवाद जरूर है. भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन ऐसे हैं, जो BS4  स्टैंडर्ड से पहले के हैं और इनमें कार्ब्युरेटर का इस्तेमाल होता है. पुराने कार्ब्युरेटर इथेनॉल ब्लेंड में मौजूद एक्स्ट्रा ऑक्सीजन के हिसाब से फ्यूल की मात्रा को अपने आप एडजस्ट नहीं कर सकते. ऐसे में इंजन को जरूरत के मुकाबले कम फ्यूल मिल सकता है जिससे इंजन गर्म हो सकता है। 

    पुराने वाहनों में लगे रबर सील भी एक अलग समस्या हैं. अगर ये सील इथेनॉल के लिए तैयार नहीं हैं, तो लंबे समय तक इथेनॉल के संपर्क में आने पर खराब हो सकते हैं. हालांकि इन्हें इथेनॉल-फ्रेंडली सील से बदलना बहुत महंगा काम नहीं है. समस्या यह है कि भारत में 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहनों को एक-एक करके अपग्रेड करना आसान नहीं होगा. अगर आज से काम शुरू भी हो जाए, तो पूरे बेड़े को बदलने में कई साल लग सकते हैं। 

    पुराने वाहनों के लिए E10 क्यों जरूरी है
    नागेश्वरन के अनुसार, मूल नीति में इस समस्या का रास्ता भी रखा गया था और पुराने वाहनों के लिए कम इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध रखने की बात कही गई थी. लेकिन धीरे-धीरे लो इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पेट्रोल पंपों से गायब हो गया. ऐसे में E20 के साथ E10 जैसे कम ब्लेंड वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इससे पुराने वाहन मालिकों को राहत मिलेगी और लोगों के बीच E20 को लेकर बना डर भी कम होगा. खास बात यह है कि इससे कुल इथेनॉल की खपत बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. पुराने वाहनों के लिए कम ब्लेंडेड फ्यूल वाला विकल्प रखा जा सकता है और दूसरी तरफ नए वाहनों में E20 का इस्तेमाल भी जारी रखा जा सकता है। 

  • ‘मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं’: आशीष बनर्जी के कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा

    ‘मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं’: आशीष बनर्जी के कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा

    पश्चिम बंगाल
    पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक दफ्तर में रविवार सुबह फंदे से लटका मिला। रामपुरहाट में बनर्जी के घर के पास स्थित पार्टी कार्यालय से एक कथित 'सुसाइड नोट' भी बरामद हुआ है। पुलिस उनके इस सुसाइड नोट का परीक्षण कर रही है।

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता निलंजन दास ने बनर्जी का हाथों से से लिखा यह सुसाइड नोट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने TMC नेता का सुसाइड नोट के हवाले से लिखा, "भ्रष्टाचार से मेरा कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी मुझे बदनाम करने के लिए ये सभी पूरी तरह से झूठे आरोप लगाए गए हैं।"

    आशीष बनर्जी के सुसाइड नोट में क्या लिखा?
    5 बार के पूर्व विधायक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, "मैं छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ा रहा हूं, लेकिन मैंने कभी किसी तरह का भ्रष्टाचार नहीं किया। बर्दवान यूनिवर्सिटी छात्र संघ के महासचिव रहते हुए भी मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया

    उन्होंने लिखा, "राजनीतिक काम में व्यस्तता रही, लेकिन मैंने कभी कोई पद लेने की इच्छा नहीं रखी। पार्टी की तरफ से कई बार अनुरोध आए, जिन्हें मैंने रोकने की कोशिश की, लेकिन हमेशा ऐसा कर पाना संभव नहीं हुआ।

    "मैंने अपनी पूरी जिंदगी में बिना किसी शर्त या बदले के किसी से एक पैसा तक नहीं लिया। यहां तक कि जब मेरे लड़के अटेंडेंट के तौर पर काम करते थे, तब भी मैंने उनसे कभी किसी मेहमान का खर्च नहीं लिया। आर्थिक भ्रष्टाचार में मेरा कभी कोई हाथ नहीं रहा।"

    "TRDA में जनरल मीटिंग होती थीं और उनके रजिस्टर रखे जाते थे। मैं टेंडर कमेटी में नहीं था। मेरे पास चेक जारी करने की शक्ति नहीं थी। मैंने न तो कोई प्लान पास किया और न ही कोई NOC जारी किया। इन मामलों पर ग्रुप चैंबर में मेरे सामने चर्चा जरूर होती थी, लेकिन इन कामों में मेरी कोई भूमिका या जानकारी नहीं थी।"

    "मुझे नहीं पता कि मुझे बदनाम करने के लिए मेरे खिलाफ कौन-कौन से खेल खेले गए। आने वाले दिनों में राजनीति एक जंग का मैदान है। मैं अपने कॉलेज के बच्चों से कहना चाहता हूं कि वे राजनीति में न पड़ें। अपने-अपने क्षेत्र में रहें, शांति और अनुशासन बनाए रखें और अच्छे इंसान बनें।"

    "मैंने पूरी जिंदगी पढ़ाया है। मैंने कभी क्लास नहीं छोड़ी। मैंने स्पेशल क्लास भी लीं और कई छात्रों को बिना फीस लिए पढ़ाया। बदले में मुझे अपने छात्रों से बहुत प्यार मिला।"

    "अब विदा लेने का समय आ गया है। बेवजह के शक और आरोपों से परेशान हुए बिना मैं बहुत सावधानी से अपना यह घोंसला समेट रहा हूं।"

    "बिशन, रानी, सौम्या, देबप्रिय, बिथी, रिरी, बरनहा, मेघदा, चैतती, दीपा, झूला, मिमी- तुम सभी को मेरा दिल से प्यार। बड़ों को मेरा प्यार देना। दादा और सौम्या, शांत रहना। पूरी जिंदगी सच और हिम्मत के साथ जीना। अपने बच्चों से जुड़े मामले और विवाद आपस में खुद सुलझाना।"
    "मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।"

    कौन थे आशीष बनर्जी?
    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बनर्जी 2001 से 2026 तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे। वह विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में स्कूली शिक्षा और कृषि समेत अलग-अलग विभागों के मंत्री भी रहे।

    उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ध्रुव साहा से 24,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए थे।

  • रेल हादसों का डरावना आंकड़ा आया सामने: 26 साल में 4,000+ दुर्घटनाएं, हजारों लोगों ने गंवाई जान

    रेल हादसों का डरावना आंकड़ा आया सामने: 26 साल में 4,000+ दुर्घटनाएं, हजारों लोगों ने गंवाई जान

     नई दिल्ली

    भारतीय रेलवे में बीते ढाई दशकों के दौरान हादसों की रफ्तार भले ही थमी हो, लेकिन जब-जब पटरियों पर ट्रेनें पटरी से उतरी हैं, तब-तब जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. 'इंडिया टुडे ग्रुप' द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से लेकर जुलाई 2026 तक देश में 4,003 बड़े रेल हादसे दर्ज किए गए. इन दुर्घटनाओं में कम से कम 3,594 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि 6,900 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 

    आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हादसों की संख्या घटने के बावजूद भीषण हादसों में होने वाली मौतों और घायलों का आंकड़ा लगातार चिंताजनक बना हुआ है। 

    असल में मौतों और घायलों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि रेलवे के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) के पास शुरुआती चार वर्षों (2000-01 से 2003-04) के जान-माल के नुकसान का डेटा उपलब्ध नहीं था। 

    यह रिपोर्ट दो बड़े रुझान दर्शाती है कि बीते 26 वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में तो भारी कमी आई है, लेकिन जब भी कोई बड़ा हादसा हुआ, उसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। 

    हादसे कम हुए, लेकिन जानलेवा साबित हुए
    आंकड़ों से पता चलता है कि दुर्घटनाओं की संख्या घटने का मतलब यह नहीं रहा कि मौतों और घायलों की संख्या में भी उसी अनुपात में कमी आई हो। 

    सबसे दर्दनाक साल (2010-11): उपलब्ध रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा 381 मौतें 2010-11 में दर्ज की गईं, जबकि उस साल 141 बड़े हादसे हुए थे। 

    2011-12 और 2014-15: साल 2011-12 में 131 हादसों में 319 लोगों की मौत हुई और 716 घायल हुए, वहीं 2014-15 में 135 हादसों में 292 लोगों ने जान गंवाई। 

    हादसे कम, नुकसान ज्यादा (2023-24): इसका सबसे ताजा उदाहरण 2023-24 में देखने को मिला. हालांकि इस दौरान सिर्फ 40 हादसे हुए, लेकिन इनमें 320 लोगों की मौत हुई और 749 लोग घायल हुए. घायलों का यह आंकड़ा पूरे रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा था. इसका मुख्य कारण जून 2023 में ओडिशा के बालासोर में हुआ ट्रिपल-ट्रेन हादसा था, जो हाल के दशकों की सबसे भीषण रेल दुर्घटनाओं में से एक था। 

    समय के साथ बदला हादसों का आंकड़ा
    2004-05 से 2008-09:
    बड़े हादसों की संख्या 234 से घटकर 177 पर आई, लेकिन मौतों का सालाना आंकड़ा 191 से 315 के बीच बना रहा। 

    2017-18 से 2020-21 (सुधार का दौर): इस दौरान सुरक्षा में बड़ा सुधार देखा गया। हादसों की संख्या 73 से घटकर 22 रह गई और मौतों का आंकड़ा 58 से घटकर मात्र 4 पर आ गया। 

    2024-25 और 2025-26: बालासोर हादसे के बाद स्थिति में सुधार हुआ और मौतों का आंकड़ा घटकर क्रमशः 18 और 17 पर आ गया। 

    2026-27 (31 जुलाई 2026 तक): इस अवधि में कुल 3 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 5 लोगों की मौत हुई और 4 लोग घायल हुए। 

    कई सरकारों और रेल मंत्रियों का कार्यकाल
    बीते 26 वर्षों का यह डेटा ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, दिनेश त्रिवेदी, मुकुल रॉय, सी.पी. जोशी, पवन कुमार बंसल, मल्लिकार्जुन खड़गे, डी.वी. सदानंद गौड़ा, सुरेश प्रभु, पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव जैसे कई रेल मंत्रियों के कार्यकाल को कवर करता है। 

    लंबे समय के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि रेल दुर्घटनाओं की कुल संख्या में तो बड़ी गिरावट आई है, लेकिन हादसों की कम संख्या हमेशा कम मौतों की गारंटी नहीं देती, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण 2023-24 का साल रहा। 

  • BrahMos से और ताकतवर होगी इंडियन नेवी, 2030 तक अधिकांश युद्धपोतों को मिलेगा सुपरसोनिक मिसाइल कवच

    BrahMos से और ताकतवर होगी इंडियन नेवी, 2030 तक अधिकांश युद्धपोतों को मिलेगा सुपरसोनिक मिसाइल कवच

    नई दिल्ली
    भारतीय नौसेना अपने फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लगाने की प्रक्रिया को तेज कर रही है. लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बेड़े के बड़े हिस्से में इस मिसाइल को एकीकृत किया जाए. सूत्रों के अनुसार नौसेना 2030 तक प्रमुख युद्धपोतों पर ब्रह्मोस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

    पिछले एक साल में छह से ज्यादा ब्रह्मोस सक्षम युद्धपोत बेड़े में शामिल हुए हैं जिससे कुल संख्या लगभग 20 पहुंच गई है. सभी नए कमीशन होने वाली जहाजें ब्रह्मोस सिस्टम से लैस होती हैं. मौजूदा जहाजों पर भी काम चल रहा है. यह मिसाइल समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत बनाने वाला प्रमुख हथियार बन चुका है। 

    ब्रह्मोस की प्रासंगिकता ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बढ़ गई जब यह भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख स्ट्राइक सिस्टम में शामिल रहा. इस अभियान में मिसाइल ने अपनी सटीकता और प्रभावी रही. इसके बाद नौसेना ने इसे व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया है। 

    ब्रह्मोस अब केवल परीक्षण या अभ्यास तक सीमित नहीं रह गया बल्कि वास्तविक संचालन में अपनी उपयोगिता दिखा चुका है. इसकी सुपरसोनिक गति और लंबी दूरी की मारक क्षमता दुश्मन के जहाजों या तटीय लक्ष्यों पर तेजी से हमला करने में मदद करती है। 

    नए जहाजों में डिजाइन स्तर पर इंटीग्रेशन 
    नवीनतम पीढ़ी के भारतीय युद्धपोत ब्रह्मोस क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जा रहे हैं. नीलगिरी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स जैसे आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस महेंद्रगिरि में आठ वर्टिकली लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई गई हैं. ये जहाजें स्वदेशी डिजाइन और निर्माण का हिस्सा हैं जिनमें उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 

    विध्वंसक जहाजों में कुछ नए मॉडल 16 वर्टिकल लॉन्चर तक ले जा सकते हैं जबकि पुराने मॉडल में आठ की व्यवस्था है. इस तरह नौसेना अपने बेड़े की मारक क्षमता को लगातार बढ़ा रही है. फरवरी 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए 220 से ज्यादा ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी।  

    इसके बाद 2025 में अतिरिक्त फायर कंट्रोल सिस्टम और वर्टिकल लॉन्चर की मंजूरी मिली ताकि बेड़े में मिसाइल की मौजूदगी और बढ़ सके. ब्रह्मोस कार्यक्रम रेंज और प्लेटफॉर्म अनुकूलता के मामले में काफी विकसित हो चुका है. एक्सटेंडेड रेंज वेरिएंट ज्यादा स्टैंड-ऑफ क्षमता देते हैं. मिसाइल पहले से ही भूमि, समुद्र और हवा से लॉन्च होने वाले वर्जन हैं। 

    नौसेना का लंबा उद्देश्य पुराने जहाज पर एंटी-सरफेस मिसाइल सिस्टम को ब्रह्मोस से बदलना है. अगले चार वर्षों में ज्यादातर युद्धपोतों पर ब्रह्मोस एकीकरण का काम आगे बढ़ाया जा रहा है. 2030 तक प्रमुख सतह कॉम्बैटेंट्स पर ब्रह्मोस उपलब्ध होने की उम्मीद है जिससे भारत की लंबी दूरी की समुद्री स्ट्राइक क्षमता काफी मजबूत होगी. नौसेना एक साथ नए युद्धपोत जोड़ रही है. मौजूदा प्लेटफॉर्म को रेट्रोफिट कर रही है. इससे दशक के अंत तक ब्रह्मोस की पहुंच तेजी से बढ़ेगी। 

    स्वदेशीकरण और भविष्य की दृष्टि
    भारतीय नौसेना अपने बेड़े को तेजी से मजबूत कर रही है. नए युद्धपोतों की कमीशनिंग तेज गति से हो रही है. लक्ष्य 2047 तक शत-प्रतिशत स्वदेशी होना है. ब्रह्मोस भारत-रूस संयुक्त उद्यम का उत्पाद है लेकिन इसमें स्वदेशी सामग्री और तकनीक का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। 

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं ताकि घरेलू जरूरत और निर्यात दोनों पूरे हो सकें. यह मिसाइल न केवल नौसेना बल्कि भारतीय थलसेना और भारतीय वायु सेना के प्लेटफॉर्म पर भी तैनात है. ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी डेटरेंस क्षमता बढ़ाएगी। 

    सुपरसोनिक गति के कारण दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल होता है. सैचुरेशन स्ट्राइक यानी एक साथ कई मिसाइलें दागने की क्षमता दुश्मन की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे सकती है. नए फ्रिगेट और विध्वंसक जहाजों के साथ मिलकर यह बेड़ा बहुआयामी खतरों का सामना करने में सक्षम बनेगा। 

    बेड़े के विस्तार के साथ मिसाइलों की संख्या, रखरखाव, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स की जरूरत भी बढ़ेगी. एक्सटेंडेड रेंज और भविष्य के हाइपरसोनिक वर्जन पर काम जारी है. नौसेना को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी प्लेटफॉर्म पर एकीकरण सुचारू रहे और ऑपरेशनल तैयारियां बनी रहें. कुल मिलाकर ब्रह्मोस नौसेना की समुद्री शक्ति का केंद्रबिंदु बनता जा रहा है। 

  • ऐप के जरिए चल रहा था ‘कपड़े उतारो-पैसे कमाओ’ का खेल, 10वीं पास युवक ने ऐसे खड़ा किया पूरा नेटवर्क

    ऐप के जरिए चल रहा था ‘कपड़े उतारो-पैसे कमाओ’ का खेल, 10वीं पास युवक ने ऐसे खड़ा किया पूरा नेटवर्क

    वडोदरा

    वडोदरा में पुलिस एक ऐसे फ्लैट तक पहुंची, जहां बाहर से सबकुछ बिल्कुल सामान्य दिख रहा था. लेकिन अंदर ऑनलाइन न्यूड वीडियो कॉल का धंधा चल रहा था. ग्राहक ऑनलाइन आते थे, पैसे रिचार्ज करते थे और फिर वीडियो कॉल पर युवतियां दिखाई देती थीं. जितनी देर कॉल, उतने ज्यादा कॉइन्स खर्च होते थे. पुलिस ने इस मामले में मनीष पढियार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया है। 

    पुलिस के मुताबिक, मनीष ने करीब 11 लाख रुपये में फ्लैट खरीदा था और वहीं से ये पूरा नेटवर्क चल रहा था. मामला वडोदरा के मांजलपुर इलाके के प्रकृति फ्लैट्स का है.  मांजलपुर पुलिस को सूचना मिली कि एक रिहायशी फ्लैट में कुछ युवतियों को रखकर ऑनलाइन आपत्तिजनक गतिविधियां कराई जा रही हैं। 

    पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लिया और फ्लैट पर छापा मारा. जांच आगे बढ़ी तो ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग का नेटवर्क सामने आया. आरोप है कि युवतियां एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों से जुड़ती थीं और उनकी मांग के मुताबिक आपत्तिजनक गतिविधियां करती थीं. इस मामले में पुलिस ने मनीष पढियार को गिरफ्तार कर लिया है। 

    पहले ग्राहक पैसे डालता, फिर शुरू होती थी कॉल
    पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में StripChat नाम के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था. ग्राहक पहले अकाउंट में पैसे डालते थे. इसके बदले उन्हें कॉइन्स मिलते थे. फिर वीडियो कॉल शुरू होती. कॉल जितनी देर चलती, ग्राहक के अकाउंट से उतने ज्यादा कॉइन्स कटते जाते. यानी पूरा सिस्टम कुछ ऐसा था कि पहले रिचार्ज, फिर कॉइन्स और उसके बाद वीडियो कॉल। 

    पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में कितना पैसा आया और किस-किस खाते में ट्रांसफर हुआ. पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट में होने वाली कमाई का 50-50 प्रतिशत हिस्सा बांटा जाता था. ग्राहकों से मिलने वाली रकम आरोपी के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी. इसके बाद आरोपी अपना हिस्सा रखता था और बाकी रकम युवतियों को दी जाती थी. पुलिस के मुताबिक, मनीष पहले कॉल सेंटर चलाता था. इसी दौरान उसके संपर्क में आई एक युवती भी कथित तौर पर इस काम से जुड़ी. अब पुलिस ये पता कर रही है कि इस नेटवर्क में कुल कितनी युवतियां और कितने दूसरे लोग शामिल थे। 

    पुलिस के मुताबिक, मनीष ने करीब 11 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा था. यही फ्लैट इस पूरे मामले में सबसे अहम जगह बन गया. बाहर से ये एक सामान्य रिहायशी फ्लैट था. लेकिन पुलिस का आरोप है कि अंदर से इसका इस्तेमाल ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए पैसे कमाने के लिए किया जा रहा था. अब पुलिस आरोपी के बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन की जांच कर रही है. साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। 

    गाजियाबाद की युवती से भी पूछताछ
    जांच के दौरान पुलिस को गाजियाबाद की रहने वाली एक युवती के बारे में भी जानकारी मिली है. पुलिस के मुताबिक, ये युवती एयर होस्टेस बनने की पढ़ाई कर रही है और कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ी थी. फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। 

    ACP विमल गामित के मुताबिक, पुलिस ये भी पता लगाएगी कि कहीं इस नेटवर्क के जरिए ग्राहकों को ब्लैकमेल तो नहीं किया गया? किसी के साथ धोखाधड़ी हुई या नहीं? फिलहाल पुलिस के सामने ब्लैकमेलिंग का कोई मामला नहीं आया है. लेकिन ऑनलाइन वीडियो कॉल और आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े मामलों में ब्लैकमेलिंग का खतरा रहता है, इसलिए पुलिस इस एंगल को भी जांच रही है. इस मामले में आरोपी मनीष के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 

    अब पुलिस के सामने कई सवाल हैं. ये नेटवर्क कितने समय से चल रहा था?कितने ग्राहक इससे जुड़े थे? कितने लोगों को इसमें शामिल किया गया था?कुल कितने पैसे का लेनदेन हुआ? और क्या इस नेटवर्क का इस्तेमाल किसी को ठगने या ब्लैकमेल करने के लिए भी किया गया? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच के बाद सामने आएंगे। 

  • JP Nadda Health Update: तबीयत बिगड़ने के बाद AIIMS पहुंचे नड्डा, हालत स्थिर; कार्डियोलॉजी में एडमिट

    JP Nadda Health Update: तबीयत बिगड़ने के बाद AIIMS पहुंचे नड्डा, हालत स्थिर; कार्डियोलॉजी में एडमिट

    नई दिल्ली

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक उन्हें बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद एम्स में उनकी एंजियोग्राफी की गई है। यह जांच नसों में खून के ब्लॉकेज के लिए किया जाता है। AIIMS की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन में बताया गया है कि उनकी हालत स्थिर है। फिलहाल उन्हें कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

    जेपी नड्डा भारत सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हैं। इसके अलावा संगठन में भी उनकी अच्छी पकड़ है। वह बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। नितिन नबीव को कमान मिलने से पहले बीजेपी की कमान उनके ही पास थी। एम्स के बयान के मुताबिक उन्हें गुरुवार यानी 13 अगस्त की शाम को ही बेचैनी की शिकायत हुई थी। इसके बाद उनका इलाज चल रहा है।

    विभाजन विभीषिका दिवस पर साझा किया अपना संदेश
    नड्डी की तबीयत को लेकर उनके समर्थकों और साथियों ने चिंता व्यक्त की है। जेपी नड्डा ने 14 अगस्त को भी 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सोशल' मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि यह दिन उन लाखों लोगों के दर्द और बलिदान की याद दिलाता है जो कि विभाजन के दौरान कठिन परिस्थितियों से गुजरे और बहुत सारे लोगों की जान चली गई।

    जेपी नड्डाराज्यसभा में सदन के नेता हैं। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान वह ना केवल सदन में मौजूद रहते थे बल्कि विपक्ष को करारा जवाब भी देते थे। दो दिन पहले ही जब मल्लिकार्जुन खरगे ने अमित शाह की अनुपस्थिति का मामला उठाया तो जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं और चर्चा से भागना चाहते हैं।

    खरगे ने सदन में गृह मंत्री शाह की लगातार अनुपस्थित पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कहा, "प्रस्ताव जिसके नाम है उसे रखने को कहा जाए।… उन्हें आप बुलाइये।" उनके इस वक्तव्य को श्री हरिवंश ने खारिज करते हुए सदन के नेता श्री नड्डा को बोलने के लिए कहा। नड्डा ने कहा, "वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। आप सदन में बहस से भागते हैं।"

  • अहमदाबाद जलभराव पर एक्शन में अमित शाह, भूपेंद्र पटेल से बोले- बार-बार पानी भरने की समस्या का निकालें स्थायी हल

    अहमदाबाद जलभराव पर एक्शन में अमित शाह, भूपेंद्र पटेल से बोले- बार-बार पानी भरने की समस्या का निकालें स्थायी हल

     गांधीनगर

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर के तहत आने वाले अहमदाबाद के इलाकों में जलभराव की समस्या पर चिंता जताई है. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, अहमदाबाद के महापौर और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर इसका स्थायी और सुनियोजित समाधान करने का आग्रह किया है। 

    केंद्रीय गृह मंत्री कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अमित शाह ने अहमदाबाद के नए शहरी इलाके- बोपाल, अंबली, घुमा और शेला में भारी बारिश के बाद पैदा होने वाली जलभराव की समस्या को गंभीरता से लिया है। 

    अमित शाह के संसदीय क्षेत्र गांधीनगर के तमाम इलाकों में बारिश में जलभराव से लोग जूझ रहे हैं. इसलिए अमित शाह ने सीएम के साथ नगर निगम के मेयर और  नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर बार-बार होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। 

    अहमदाबाद में जलभराव की समस्या
    अहमदाबाद में भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई. हाल में हुई बारिश के दौरान करीब 18 इंच पानी बरसा था. भारी बारिश के कारण अंबली-बोपाल-घुमा-शेला इलाके में जलभराव हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 

    बता दें कि इन सभी इलाकों को साल  2021 में अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की सीमा में शामिल किया गया था. भौगोलिक स्थिति और पुरानी जल निकासी व्यवस्था बेहतर न होने के कारण भारी बारिश के दौरान यहां पानी भरने की समस्या बार-बार सामने आती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से इसके स्थायी समाधान की मांग की है। 

    जलभराव की समस्या का परमानेंट सॉल्युशन
    विज्ञप्ति के मुताबिक, अमित शाह के निर्देश पर अहमदाबाद नगर निगम ने पूरे इलाके का सर्वेक्षण कराया और क्षेत्रवार वर्षाजल निकासी का मास्टर प्लान तैयार किया. इसके तहत उन इलाकों में जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने की योजना बनाई गई, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। 

    अहमदाबाद नगर निगम ने इस पूरे इलाके का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया और ज़ोन-वार स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया है. अहमदाबाद नगर निगम ने भी बताया कि इसके अलावा जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर वहां जरूरी उपाय किए जाएंगे। 

    एक्शन में नगर निगम

    नया ड्रेनेज नेटवर्क- जिन इलाकों में जल निकासी का बुनियादी ढांचा नहीं है, वहां नया स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क बनाया जाएगा.

    जलवर्षा पाइपलाइन– बारिश के पानी की तेजी से निकासी के लिए आपस में जुड़ी नालियों, नई पाइपलाइनों और निकास मार्गों की व्यवस्था की जाएगी.

    दीर्घकालिक उपाय- बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए गोटा-गोधावी नहर और साबरमती नदी के किनारे ड्रेनेज सिस्टम को जोड़ने की योजना शामिल की गई है.

    विभाग के अनुसार, अमित शाह के निर्देशों पर एएमसी द्वारा की जा रही इस नियोजित और समयबद्ध कार्रवाई से आने वाले वर्षों में बोपाल, अंबली, घुमा और शेला के निवासियों को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।