Category: देश

  • चीनी की जमाखोरी पर सरकार का शिकंजा, स्टॉक लिमिट घटाई; कीमतें काबू करने के लिए ड्यूटी-फ्री आयात को भी मंजूरी

    चीनी की जमाखोरी पर सरकार का शिकंजा, स्टॉक लिमिट घटाई; कीमतें काबू करने के लिए ड्यूटी-फ्री आयात को भी मंजूरी

    नई दिल्ली

    त्योहारी सीजन से पहले ही चीनी की बेलगाम होती कीमतों (Sugar Price Hike) को कंट्रोल में लाने के लिए सरकार ने तगड़ा एक्शन लिया है और कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव (Rule Change From Today) किया किया है. सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया गया, इसके तहत चीनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 2 महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री अनिवार्य की। 

    चीनी पर ये नियम किया लागू 
    चीनी की कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने सोमवार को आयात की शर्तों में संशोधन किया और टैरिफ रेट्स कोटा (TRQ) के तहत देश में लाई गई कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर सफेद/रिफाइंड चीनी में परिवर्तित करके घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। 

    इससे पहले के नियमों को देखें, तो आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा के भीतर और पर्याप्त समय पूर्व संसाधित करना जरूरी था, जिससे इसे 31 अक्टूबर, 2026 तक घरेलू बाजार में बेचा जा सके. अब संशोधित नियमों के तहत प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए दो महीने की डेडलाइन तय कर दी गई है। 

    जमाखोरी पर लगाम लगाने वाला एक्शन
    चीनी आयात से जुड़े नियमों में बदलाव (Sugar Import Rule Change) की अधिसूचना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी की गई है. इसका उद्देश्य आयातित कच्ची चीनी के भंडारण यानी जमाखोरी को रोकना है. इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि आयात से उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द राहत मिल सके. सरकार के इस कदम से चीनी की बढ़ती कीमतों पर कंट्रोल की उम्मीद बढ़ी है। 

    सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दे दी है और कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम निर्माताओं और इससे जुड़े व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट सेट कर दी है. देश के तमाम राज्यों की ओर से केंद्र से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ एक्शन लेने का आग्रह किया गया था। 

    महीनेभर में इतनी महंगी हुई चीनी
    सरकारी आंकड़ों को देखें, तो सोमवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम से 29 फीसदी अधिक है. अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम था. फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने कहा कि मिल से प्राप्त चीनी की कीमतें महज 7 से दस दिनों में 47-48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं और ये चौकाने वाला उछाल है। 

    चीनी महंगी होने की वजह क्या? 
    Sugar Price Hike के पीछे के कारणों की बात करें, तो इसे लेकर इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने कहा है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. कीमतें बढ़ने के पीछे मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर और यूपी में किस्मों से जुड़ी समस्याएं हैं। 

    इसके अलावा त्योहारी सीजन के चलते डिमांड तेज होना और ऐसे में ब्राजील ने आपूर्ति कम किए जाने के साथ ही चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी भी बड़ी वजह है. थोक खरीदारों ने स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे चीनी बाजार से हट गई है और इसकी कमी पैदा होने से कीमतों में इजाफा हो रहा है। 

  • बैंक हड़ताल से बढ़ सकती हैं मुश्किलें! 4 दिन तक बंद या प्रभावित रह सकती हैं सेवाएं

    बैंक हड़ताल से बढ़ सकती हैं मुश्किलें! 4 दिन तक बंद या प्रभावित रह सकती हैं सेवाएं

    नई दिल्ली

    बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की संयुक्त संस्था यानी यूएफबीयू (UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल की मुख्य वजह सप्ताह में पांच दिन बैंक खोलने के फैसले में लगातार हो रही देरी, PLI को लेकर गहरे मतभेद और पेंशन से जुड़ी कई लंबित मांगों का अभी तक हल न होना है।

    अगर यह हड़ताल होती है तो देश के कई हिस्सों में बैंकिंग सर्विसेज खासकर सरकारी बैंकों की, लगातार चार दिनों तक प्रभावित रह सकती हैं। दरअसल, 11 सितंबर शुक्रवार को पड़ रहा है और उसके बाद शनिवार-रविवार की छुट्टी है। इसके साथ ही 14 सितंबर को कई राज्यों में गणेश चतुर्थी की छुट्टी होने के कारण बैंक बंद रहेंगे।

    आने वाले दिनों में और भी बड़ी हड़ताल की चेतावनी
    यूएफबीयू ने इतना ही नहीं कहा है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि अगर सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे 28 सितंबर से तीन दिनों की लगातार हड़ताल पर चले जाएंगे। खास बात यह है कि यह तारीख छमाही लेखा-जोखा के समय पड़ रही है, जिससे बैंकों के कामकाज पर बहुत गहरा असर पड़ सकता है।

    इसके अलावा, अगर तब भी उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का भी संकेत दिया गया है। रविवार को हुई बैठक में यह फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि संघों के अनुसार, सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों के प्रति 'नकारात्मक रवैया' अपनाया हुआ है।

    सप्ताह में पांच दिन बैंक खोलने का मुद्दा क्या है?
    संघों का कहना है कि भारतीय बैंक संघ (IBA) ने 8 मार्च 2024 को 12वें द्विवार्षिक समझौते के तहत सप्ताह में पाँच दिन बैंक खोलने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी। इसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक काम के घंटों में 40 मिनट की बढ़ोतरी करने की बात तय हुई थी।

    IBA ने इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेज दिया था, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद यह फाइल अभी भी अटकी पड़ी है, जिससे कर्मचारियों में काफी निराशा है।

    PLI को लेकर क्या है बड़ा विवाद?
    दूसरा बड़ा विवाद PLI को लेकर खड़ा हो गया है। सरकार ने स्केल IV और उससे ऊपर के बैंक अधिकारियों के लिए एक अलग PLI योजना बनाई है, जिसके तहत उन्हें अपने निजी प्रदर्शन के आधार पर मूल वेतन के 365 दिनों के बराबर बड़ा इनाम मिल सकता है। जबकि, आम कर्मचारियों और स्केल III तक के अधिकारियों को इस योजना के तहत अधिकतम 15 दिनों का मूल वेतन और महंगाई भत्ता ही दिया जाएगा।

    संघों का आरोप है कि यह IBA के साथ पहले की गई सहमति के बिल्कुल खिलाफ है, क्योंकि उस सहमति में यह तय हुआ था कि इनाम पूरे बैंक के समग्र प्रदर्शन पर आधारित होगा और स्केल VII तक के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए यह एक समान होगा।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका का बड़ा युद्धाभ्यास, दोनों मोर्चों पर दुश्मनों को मिलेगा कड़ा संदेश

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका का बड़ा युद्धाभ्यास, दोनों मोर्चों पर दुश्मनों को मिलेगा कड़ा संदेश

    नई दिल्ली

    भारत और अमेरिका सितंबर 2026 में अपने ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज 'युद्ध अभ्यास' का 22वां संस्करण करने जा रहे हैं. यह अभ्यास दो अलग-अलग जगहों पर होगा- उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में. दोनों देशों से करीब 350-350 सैनिक तीन सप्ताह तक इसमें भाग लेंगे। 

    यह अभ्यास भारत की दो सबसे संवेदनशील सैन्य सीमाओं- चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और पाकिस्तान की ओर पश्चिमी मोर्चे- के नजदीक होगा. इससे ज्वाइंट ट्रेनिंग की जटिलता और वास्तविक परिस्थितियों के करीब होने का अंदाजा लगता है। 

    औली में एलएसी से करीब 95 किलोमीटर दूर है. यहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध की तैयारियां की जाएंगी. हाल के हिमालयी तैनातियों और पहाड़ी मुकाबले के अनुभवों से सीख लेकर यहां हाई-अल्टीट्यूड वॉरफेयर ड्रिल्स होंगी। 

    राजस्थान का महाजन रेंज पाकिस्तान सीमा के नजदीक भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में से एक है. यहां लाइव-फायर अभ्यास, मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस, आर्टिलरी फायरिंग और एयर-ग्राउंड इंटीग्रेशन ड्रिल्स होंगी। 

    दोनों जगहों पर सैनिक सटीक हमलों, क्लोज-एयर सपोर्ट, युद्धक्षेत्र समन्वय और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. पहाड़ी और रेगिस्तानी दोनों तरह की चुनौतीपूर्ण जमीनों पर काम होगा। 

    पहली बार अपाचे हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के हथियार
    इस मिलिट्री ड्रिल में पहली बार एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के सटीक हथियारों को शामिल किया जाएगा. इससे संयुक्त हथियार युद्ध क्षमता मजबूत होगी. सैनिक मिलकर सटीक हमले, करीबी हवाई सहायता और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. यह अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में होने वाला पहला बड़ा भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास है. इससे पहले 2025 का संस्करण अलास्का में हुआ था। 

    2004 में शुरू हुए युद्ध अभ्यास ने अब काफी विकास कर लिया है. शुरू में यह मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभ्यास था, लेकिन अब इसमें ऊंचाई वाले युद्ध, पारंपरिक ऑपरेशंस, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कई पहलू शामिल हो गए हैं. यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाता है। 

    दोनों देश इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर काम करने की क्षमता, ऑपरेशनल समन्वय और तैयारियों को लगातार बढ़ा रहे हैं. इसका उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे की उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटना है।  

    युद्ध अभ्यास 2026 का दो संवेदनशील मोर्चों के पास होना सिर्फ प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है. चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं के नजदीक अभ्यास करके भारत अपनी तैयारियों और सहयोगियों के साथ तालमेल को मजबूत कर रहा है. अपाचे हेलीकॉप्टर और सटीक हथियारों का पहली बार शामिल होना आधुनिक युद्ध की जरूरतों को दर्शाता है। 

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह अभ्यास भारत की रक्षा तैयारियों और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देता है. लंबे समय में इससे दोनों सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ेगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर यह अभ्यास भारत की बहुआयामी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है।  

  • होम-कार लोन वालों के लिए झटका? SBI रिसर्च ने जताई अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना

    होम-कार लोन वालों के लिए झटका? SBI रिसर्च ने जताई अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना

    नई दिल्ली
     भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताजा 'इकोवैप' रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सदस्यों का रुख बेहद सख्त हो गया है. हालांकि, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा अभी भी सतर्क और फूंक-फूंक कर कदम उठाने की नीति अपना रहे हैं. नीति निर्माताओं के बीच के इस मतभेद ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसे रिपोर्ट में 'चॉक और चीज' की दुविधा कहा गया है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, एमपीसी के मिनट को खंगालने पर पता चलता है कि महंगाई को लेकर समिति के अंदर चिंता काफी बढ़ गई है. जून 2026 में जहां सख्ती का सूचकांक 1.76 था, वहीं अगस्त 2026 में यह बढ़कर 1.82 पर पहुंच गया है. इसके चलते अक्टूबर की नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ने की खिड़की पूरी तरह खुल गई है। 

    कमजोर मानसून और महंगाई का डबल अटैक
    ब्याज दरें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह देश में मानसून की बेहद खराब स्थिति है. अगस्त महीने तक देश में सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. बिहार, आंध्र प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक जैसे प्रमुख अनाज उत्पादक राज्य सूखे जैसे संकट से जूझ रहे हैं. देश के 741 जिलों में से 351 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं. स्काईमेट ने भी साल 2026 के मानसून अनुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत का 85 फीसदी कर दिया है, जिससे अल नीनो का खतरा गहरा गया है। 

    एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इस सूखे के चलते अक्टूबर और नवंबर 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर (CPI) 6 प्रतिशत के पार जा सकती है. इसके बाद ही चौथी तिमाही में इसके 5 प्रतिशत तक आने की उम्मीद है। 

    वैश्विक चुनौतियां और सरकारी नीतियां
    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती है, लेकिन वहां रोजगार के कमजोर आंकड़े और ऊंची ब्याज दरें जोखिम बनी हुई हैं. इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव (पश्चिम एशिया संकट) महंगाई को और भड़का सकते हैं. रिपोर्ट का मानना है कि सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद कम है। 

    घरेलू मोर्चे पर, सरकार की नई ग्रामीण योजना 'VB-G RAM G' के तहत रोजगार सृजन में जुलाई-अगस्त के दौरान करीब 60 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. एसबीआई रिसर्च का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जहां एक तरफ सरकार को वित्तीय मदद बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ आरबीआई द्वारा ब्याज दरें बढ़ाना अर्थव्यवस्था के लिए एक विरोधाभास खड़ा कर सकता है. ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने आर्थिक रफ्तार को थामने और महंगाई को काबू करने की दोहरी चुनौती है। 

  • चुनावी वादों की झड़ी! CM विजय ने हर साल 3 फ्री सिलेंडर समेत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सौगात दी

    चुनावी वादों की झड़ी! CM विजय ने हर साल 3 फ्री सिलेंडर समेत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सौगात दी

    चेन्नई
     तमिलनाडु की सियासत और जन-कल्याणकारी नीतियों में एक नया मोड़ लाते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा के पटल पर जनता के लिए बड़े चुनावी वादों और राहत पैकेज की घोषणा कर दी है. राज्य सरकार ने आम परिवारों और गृहणियों को महंगाई के मोर्चे पर सीधी राहत देने के लिए साल में तीन रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर पूरी तरह मुफ्त देने का बड़ा निर्णय लिया है. इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पात्र लाभार्थियों को किसी कतार में नहीं लगना होगा, बल्कि तीन सिलेंडरों की पूरी सब्सिडी राशि सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजी जाएगी। 

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं की सार्वजनिक आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए राज्य की मौजूदा फ्री बस यात्रा योजना का दायरा बढ़ाते हुए ‘वेट्री पयनम’ योजना शुरू करने की घोषणा की है. इस नए कदम के तहत अब राज्य भर की लाखों महिलाओं को सरकारी बसों में बिना किसी किराए के मुफ्त सफर की सुविधा और अधिक व्यापक रूप से मिलेगी. विधानसभा में इन बड़े कल्याणकारी कदमों का एलान करते हुए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि उसका पूरा फोकस जमीनी स्तर पर महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवारों के घरेलू बजट को सुरक्षित करने पर केंद्रित है। 

    1.30 करोड़ परिवारों को फायदा
    योजना के तहत सरकार सिलेंडर खरीदने पर खर्च की गई राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर करेगी। इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवारों को फायदा मिलने का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक विजय सरकार इस योजना पर हर साल करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। ऐसे में सरकार जनता से किया गया वादा पूरा करते हुए यह राहत दे रही है।

    विजय ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसी परिस्थितियों और रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए, वित्तीय चुनौतियों के बावजूद जनता का बोझ कम करने, उनके कल्याण की रक्षा करने और लोगों से किया गया वादा पूरा करने के लिए सरकार ने रसोई गैस सिलेंडर पर होने वाला खर्च वहन करने का फैसला किया है।"

    सीएम विजय ने विधानसभा में क्या कहा?
    विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना में वे परिवार शामिल होंगे जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है, साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, छोटे और सीमांत किसानों के परिवार और दिव्यांग व्यक्तियों के परिवार भी इसमें शामिल होंगे। तेल मार्केटिंग कंपनियों की आधिकारिक बिलिंग के आधार पर बुकिंग और डिलीवरी होने पर कुकिंग गैस सिलेंडर की लागत का पैसा वापस किया जाएगा और सीधे परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा।

    राहत उपाय की जरूरत पैदा करने वाली आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्षों के कारण ग्लोबल सप्लाई में रुकावट और कीमतों में बढ़ोतरी से पिछले चार महीनों में परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है, जिससे कई परिवार वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ने को मजबूर हुए हैं।

    'तीन साल तक महिलाओं को दिए जाएंगे मुफ्त सिलिंडर'
    मुख्यमंत्री ने कहा, "आर्थिक तंगी के बावजूद हमारी सरकार ने जनता पर आर्थिक बोझ कम करने, उनके कल्याण की रक्षा करने और उनसे किए गए वादे को पूरा करने के मकसद से गैस सिलेंडर पर होने वाले खर्च की राशि उन्हें उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसलिए परिवारों की महिला मुखियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए पहले चरण में अन्नपूर्णी सुपर 6 योजना के तहत हर साल तीन मुफ्त गैस सिलिंडर दिए जाएंगे। तैयारी का काम शुरू हो गया है और यह योजना जनवरी में आने वाले पोंगल त्योहार से लागू की जाएगी, जिसके लिए सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।"

    महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर की महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक प्रगति और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई खास योजनाओं जैसे सिंगा पेन स्पेशल टास्क फोर्स, थाईमामन थंगमोथिरम, वेट्री मगलीर अडुगल वलार्प्पु और अन्नानिन सीर के लिए जरूरी बजट पहले ही आवंटित किया जा चुका है।

    महिलाओं और ट्रांसजेंडरों के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा
    सामाजिक सुरक्षा और आवाजाही को और मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री ने वेत्री पयनम योजना की घोषणा की। यह योजना महात्मा गांधी की जयंती, यानी 2 अक्टूबर से महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए मुफ्त बस यात्रा के दायरे को काफी बढ़ाती है।

    विस्तारित ट्रांसपोर्ट स्कीम के तहत महिलाएं और ट्रांसजेंडर मेट्रोपॉलिटन और शहरी इलाकों में चलने वाली एक्सप्रेस, लिमिटेड स्टॉप सर्विस (LSS) और डीलक्स सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। जिलों के बीच आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए यह सुविधा ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में चलने वाली सामान्य किराए वाली बसों में भी मिलेगी।

    वेत्री पयनम योजना को लागू करने पर राज्य के खजाने पर सालाना लगभग 6,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सरकार ने यह भी साफ किया कि यह योजना बिना किसी आय सीमा या यात्राओं की संख्या पर रोक के चलाई जाएगी।

    महिलाओं और ट्रांसजेंडर को तोहफा
    विजय सरकार ने महिलाओं की 'वेट्री पयानम' योजना का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब महिलाएं सिर्फ साधारण बसों में ही नहीं, बल्कि एक्सप्रेस, एलएसएस (LSS), डीलक्स और इंटर-डिस्ट्रिक्ट सरकारी बसों में भी मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। इस योजना का लाभ ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी उठा सकेंगे।

    विजय ने कहा है कि यह योजना 2 अक्टूबर से लागू होगी। CM विजय ने अपने संबोधन में कहा, "महिलाओं की यात्रा की आजादी उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार की प्रगति की नींव है। तमिलनाडु की किसी भी महिला को सिर्फ यात्रा खर्च की वजह से अवसरों से वंचित नहीं होना चाहिए।"

    इस स्कीम के तहत, महिलाओं को मेट्रोपॉलिटन और शहरी इलाकों में चलने वाली सरकारी एक्सप्रेस, LSS और डीलक्स बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा मिलेगी. जिलों के बीच यात्रा के लिए, यह फायदा ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में चलने वाली सामान्य किराए वाली सरकारी बसों पर भी लागू होगा. यह स्कीम 2 अक्टूबर से लागू होगी, जो महात्मा गांधी की जयंती का दिन है. विजय ने कहा कि इस प्रोग्राम के तहत यात्राओं की संख्या या आय की कोई सीमा नहीं होगी. ट्रांसजेंडर लोग भी मुफ्त यात्रा के लिए पात्र होंगे। 

     

  • क्या महिला आरक्षण बिल पर अब भी हो सकती है चर्चा? Sine Die और Prorogue के फर्क से समझें पूरा मामला

    क्या महिला आरक्षण बिल पर अब भी हो सकती है चर्चा? Sine Die और Prorogue के फर्क से समझें पूरा मामला

    नई दिल्ली

    महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को लेकर सरकार ने अभी रास्ता बंद नहीं किया है. बीते मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन में कोई खास कामकाज नहीं हुआ. पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार ने इन दोनों विधेयकों के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल कर लिया है और वह इन्हें पास करवा लेगी. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. फिर सदन अनिश्चित काल से लिए स्थगित हो गया. लेकिन, अब रिपोर्ट आ रही है कि सरकार ने अभी सभी रास्ते बंद नहीं किए हैं. कहा तो यह भी जा रहा था कि अगर तुरंत इन विधेयकों मंजूरी नहीं दिलाई गई तो 2029 के लोकसभा चुनाव में इसको प्रभावी बनाने लगभग असंभव हो जाएगा। 

    अब रिपोर्ट है कि राष्ट्रपति ने संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही औपचारिक तौर पर खत्म नहीं की है. इसके लिए अंग्रेजी में Prorogue शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब होता है एक पूरे सत्र की समाप्ति. यानी सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को Prorogue करने की घोषणा नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष ने 13 अगस्त को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल (Sine Die) तक स्थगित करने की घोषणा की थी. Sine Die का मतलब सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना होता है. इसमें सदन की अगली बैठक की कोई तारीख नहीं बताई जाती. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं होता कि सत्र खत्म हो गया है. यही तकनीकी चीज है जिसके आधार पर माना जा रहा है कि सरकार ने सदन को Prorogue करने की घोषणा न कर दोनों अहम विधेयकों को पास कराने का रास्ता खुला रखा है. आमतौर पर सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के साथ उसे Prorogue कर दिया जाता है. यानी सत्र की समाप्ति की घोषणा भी कर दी जाती है, लेकिन बीते मानसून सत्र के साथ ऐसा नहीं किया गया है। 

    10 दिन बाद भी क्यों नहीं हुआ Prorogue?
    लोकसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को Sine Die हुई थी. इसके बाद 23 अगस्त तक भी सदन को Prorogue नहीं किया गया. इस देरी ने राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इसी को लेकर सरकार पर सवाल उठाया है. जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के 10 दिन बाद भी उसका सत्रावसान नहीं हुआ है. उन्होंने इस देरी को असामान्य बताते हुए सवाल किया कि क्या सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटाने की कोशिश में हैं. हालांकि, यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक सवाल है. सरकार की ओर से इस देरी को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। 

    Sine Die और Prorogue में क्या अंतर है?
    संसद की कार्यवाही में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल अक्सर होता है. लेकिन, दोनों का मतलब बिल्कुल अलग है. Sine Die का मतलब है सदन की बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना. इसमें यह तय नहीं किया जाता कि सदन अगली बार कब बैठेगा. लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति इसकी घोषणा कर सकते हैं. वहीं Prorogue का मतलब पूरे संसदीय सत्र को औपचारिक तौर पर खत्म करना है. यह राष्ट्रपति करते हैं. इसके लिए केंद्र सरकार की सलाह जरूरी होती है. यानी आसान भाषा में समझें तो Sine Die सदन की बैठक रोकता है, जबकि Prorogue पूरे सत्र को खत्म करता है. इसका मतलब यह हुआ कि 13 अगस्त को लोकसभा की बैठक जरूर अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई, लेकिन जब तक राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की घोषणा नहीं होती, तकनीकी तौर पर मानसून सत्र समाप्त नहीं माना जाता। 

    क्या इसी वजह से विधेयकों का रास्ता खुला है?
    यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है. सरकार ने अभी तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है. ऐसे में यह संभावना बनी हुई है कि जरूरत पड़ने पर इसी सत्र से जुड़ी संसदीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, केवल सत्रावसान न होने से यह तय नहीं हो जाता कि महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक तुरंत लाए ही जाएंगे. इन विधेयकों के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत होगी. ऐसे विधेयक को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पास कराना पड़ता है. इसलिए सरकार के लिए संख्या बल बेहद अहम है. महिला आरक्षण से जुड़ा प्रावधान परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है. सरकार अगर इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करना चाहती है तो समय का सवाल भी महत्वपूर्ण है। 

    पहले भी हुई है ऐसी देरी
    कांग्रेस ने लोकसभा के सत्रावसान में हुई देरी को असामान्य बताया है. हालांकि, उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक ऐसा पहली बार नहीं है जब Sine Die के बाद Prorogue होने में कई दिन लगे हों. जयराम रमेश ने खुद बताया कि 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन का रहा था. 2021 में भी Sine Die के बाद सत्रावसान में 20 दिन लगे थे. इसलिए केवल देरी को आधार बनाकर यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार निश्चित तौर पर महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. लेकिन, मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस देरी ने अटकलों को जरूर बढ़ा दिया है। 

  • CJI सूर्यकांत ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दी प्रतिक्रिया, यौन उत्पीड़न के आरोपों की पहले जांच के निर्देश

    CJI सूर्यकांत ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दी प्रतिक्रिया, यौन उत्पीड़न के आरोपों की पहले जांच के निर्देश

    नई दिल्ली

    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि जमंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर बनाई गई उच्चस्तरीय जांच कमेटी से कहा गया है कि महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि सेक्शुअल असॉल्ट को लेकर कमेटी जल्द ही अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी।

    ऐडवोकेट ने की थी स्वतः संज्ञान की मांग
    ऐडवोकेट शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न पर कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिालओं के साथ पुलिसवालों ने छेड़छाड़ की। लड़कियों का कहना है कि उनके साथ गलत हरकतें की गईं। सोशल मीडिया पर भी छात्राओं ने ऐसी बातें बताई हैं।

    उच्च स्तरीय समिति देगी प्राथमिकता
    जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इसी बात को लेकर एक अलग से रिट पिटिशन फाइल की गई थी। वहीं हाई पावर्ड जांच कमेटी को इस मामले की भी जांच करने को कहा गया है। हालांकि ऐडवोकेट ने कहा कि सेक्शुअल असॉल्ट की जांच अलग से होनी चाहिए। इसके लिए किसी जिला जज की नियुक्ति होनी चाहिए जिनेका पास पीड़िताएं सीधे शिकायत दर्ज करवा सकें। वहीं सीजेाई ने कहा कि इस मुद्दे का बार-बार जिक्र किया गया है और कमेटी से ऐसे ममलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। सीजेआई ने कहा कि कमेटी के चेयरपर्सन को नोडल ऑफिसर नियुक्त करने की भी छूट दी गई है जिनके पास शिकायतें दी जा सकती है।

    आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। यह समिति 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच करेगी। ये छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। जस्टिस रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई सदस्य के तौर पर शामिल हैं।

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' आह्वान पर छात्र और उनके समर्थक जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। न्यायालय ने समिति से कहा कि वह कुछ मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान दे, जिनमें सबसे अहम मुद्दा लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ छेड़छाड़ की कथित घटनाओं से जुड़ा है, और इन मुद्दों से जुड़ी संवेदनशीलता का भी ध्यान रखे।

  • नया SIM लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव! 9 मोबाइल नंबर के बाद नया कनेक्शन नहीं, जानें नए नियम

    नया SIM लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव! 9 मोबाइल नंबर के बाद नया कनेक्शन नहीं, जानें नए नियम

     नई दिल्ली
    SIM Card New Rules: आज 24 अगस्त से मोबाइल SIM कार्ड से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा बदलाव लागू हो गया है. हालांकि एक बात साफ कर दें कि 9 SIM कार्ड की लिमिट नई नहीं है, लेकिन अब सरकार इस नियम को ज्यादा सख्ती से लागू करने जा रही है. अगर आपके नाम पर पहले से तय सीमा तक मोबाइल कनेक्शन हैं, तो आपको नया नंबर नहीं मिलेगा। 

    अगर आप नया SIM कार्ड लेने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. दूरसंचार विभाग यानी DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को आज, 24 अगस्त 2026 से नए निर्देश लागू करने को कहा है. अब कंपनियों को नया मोबाइल कनेक्शन देने से पहले यह पता लगाना होगा कि ग्राहक के नाम पर पहले से कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं। 

    सबसे जरूरी बात यह है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन हो सकते हैं. यह गिनती सिर्फ एक कंपनी के SIM कार्ड की नहीं होगी. यानी आपके पास Jio, Airtel, Vodafone Idea या किसी दूसरी कंपनी के नंबर हों, सभी को मिलाकर कुल संख्या देखी जाएगी. जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में यह लिमिट 6 मोबाइल कनेक्शन की है। 

    एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ 9 सिम
    नए नियमों में सबसे बड़ी बात सिम कार्ड की संख्या को लेकर है. अब एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड ही रख सकता है. यह सीमा सभी टेलीकॉम कंपनियों को मिलाकर होगी. यानी अगर आपके नाम पर अलग-अलग कंपनियों के सिम हैं, तब भी सभी को मिलाकर संख्या 9 से ज्यादा नहीं हो सकती। 

    वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा और कम है. यहां एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 6 सिम कार्ड ही रखे जा सकेंगे। 

    इससे ज्यादा सिम किसी एक व्यक्ति के नाम पर जारी नहीं किए जाएंगे. अगर आपके नाम पर जरूरत से ज्यादा सिम हैं, तो उन्हें बंद कराना बेहतर होगा। 

    नया सिम लेने के लिए बायोमेट्रिक जरूरी
    अब नया सिम कार्ड लेना पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और जांच वाला प्रोसेस होगा. ग्राहक की पहचान का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा. आधार से जुड़े ग्राहकों के लिए ई-केवाईसी की सुविधा रहेगी. कुछ मामलों में डी-केवाईसी की प्रक्रिया भी लागू होगी। 

    सिम लेते समय ग्राहक की लाइव फोटो ली जाएगी. साथ ही दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जांच की जाएगी. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सिम लेने वाला व्यक्ति असली है या किसी और की पहचान का इस्तेमाल कर रहा है। 

    फर्जी दस्तावेज मिले तो FIR
    अगर सिम लेने के दौरान फर्जी दस्तावेज पाए जाते हैं या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल किया जाता है, तो मामला गंभीर हो सकता है। 

    ऐसी स्थिति में टेलीकॉम कंपनी पुलिस या संबंधित कानून लागू करने वाली एजेंसी को जानकारी देगी. इसके बाद FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. इसलिए सिम कार्ड लेने के लिए हमेशा अपने सही और वैध दस्तावेज ही लेकर जाएं। 

    सिम बदलने और नाम ट्रांसफर कराने पर भी जांच
    नए नियम सिर्फ नया सिम लेने तक सीमित नहीं हैं. अगर आप अपना सिम बदल रहे हैं या नंबर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर रहे हैं, तो भी पहचान की जांच जरूरी होगी. नाम, जेंडर या जन्म तारीख जैसी जानकारी अपडेट कराने के समय भी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करना पड़ सकता है। 

    अगर कोई मोबाइल नंबर एक व्यक्ति के नाम से दूसरे व्यक्ति के नाम पर करना है, तो पुराने और नए दोनों यूजर की बायोमेट्रिक जांच होगी. इसके अलावा पुराने यूजर की लिखित सहमति भी जरूरी होगी। 

    किसी व्यक्ति की मौत के बाद नंबर ट्रांसफर करने का नियम
    अगर सिम कार्ड के पुराने मालिक की मौत हो चुकी है और नंबर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर करना है, तो इसके लिए डेथ सर्टिफिकेट देना होगा. इसके साथ नए यूजर की बायोमेट्रिक जांच भी की जाएगी. यानी अब किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर नंबर ट्रांसफर करना पहले की तरह आसान नहीं होगा। 

    कंपनी बदलने पर भी वेरिफिकेशन जरूरी
    अगर आप मोबाइल कंपनी बदलते हैं, तो पहचान से जुड़े नियमों का पालन करना होगा. जरूरी वेरिफिकेशन नहीं होने पर कनेक्शन को सस्पेंड किया जा सकता है. इसका मतलब है कि मोबाइल नंबर पोर्ट कराने या कंपनी बदलने की प्रक्रिया में भी ग्राहकों को अपनी पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज और वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।

    सिम बंद कराने के लिए भी पहचान जरूरी
    अब सिम कार्ड बंद कराने के लिए भी पहचान की जांच की जाएगी. जब कोई ग्राहक अपना नंबर बंद कराने का अनुरोध करेगा, तो उसकी पहचान को बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से मिलाया जा सकता है। 

    अगर जांच के दौरान गलत दस्तावेज, फर्जी जानकारी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल सामने आता है, तो टेलीकॉम कंपनी इसकी जानकारी पुलिस या संबंधित एजेंसी को दे सकती है. इसके बाद FIR की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। 

    डिजिटल एक्टिवेशन के लिए आधिकारिक पोर्टल
    सरकार ने डिजिटल एक्टिवेशन के लिए टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल को आधिकारिक पोर्टल घोषित किया है. टेलीकॉम कंपनियों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है. जरूरत पड़ने पर यह समय आगे भी बढ़ाया जा सकता है। 

    सिर्फ मोबाइल सिम पर नहीं लागू होंगे नियम
    ये नए नियम केवल मोबाइल सिम कार्ड तक सीमित नहीं हैं. इनका दायरा लैंडलाइन, वायरलेस और इंटरनेट टेलीफोनी सेवाओं तक भी है. केंद्र सरकार ने फर्जी पहचान और गलत तरीके से लिए गए कनेक्शन पर रोक लगाने के लिए Telecommunication Subscriber Identity Rules 2026 लागू किए हैं। 

    फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड पर लगेगी रोक
    सरकार का मुख्य मकसद फर्जी पहचान के आधार पर लिए जाने वाले सिम कार्ड को रोकना है. पहले कई मामलों में लोग दूसरे लोगों के नाम पर कनेक्शन चला लेते थे या एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड ले लिए जाते थे। 
    अब बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज जांच से ऐसे मामलों को रोकने की कोशिश की जा रही है। 

    सरकार ने क्यों बदले ये नियम?
    सरकार का कहना है कि इस तरह की सख्त व्यवस्था से लोगों की पहचान सुरक्षित रखने और साइबर अपराध को कम करने में मदद मिलेगी. टेलीकॉम कंपनियों को भी अब ग्राहकों की पहचान और दस्तावेजों की जांच से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। 

    लिमिट से ज्यादा कनेक्शन है तो बंद होगा नंबर
    अगर आपके नाम पर पहले से 9 नंबर हैं और आप 10वां SIM लेने पहुंचते हैं, तो कंपनी को आपको नया कनेक्शन देने से मना करना होगा. इसके लिए टेलीकॉम कंपनियां सरकार के Digital Intelligence Platform यानी DIP का इस्तेमाल करेंगी. इस प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों से जुड़े ग्राहकों के कनेक्शन की जानकारी को मिलाकर जांच की जा सकेगी। 

    इस बार पहचान की प्रक्रिया को भी ज्यादा मजबूत किया गया है. DoT के निर्देश के मुताबिक, तय सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की प्रतिनिधि तस्वीर DIP पर उपलब्ध कराई जा रही है. टेलीकॉम कंपनियां इसका इस्तेमाल ऐसे लोगों की पहचान के लिए करेंगी, जो पहले से तय संख्या में SIM कार्ड रखते हैं और एक नया कनेक्शन लेने की कोशिश कर रहे हैं। 

    शुरुआत में यह जांच पूरी तरह रियल टाइम में नहीं होगी. टेलीकॉम कंपनियों को पहले टंप्ररी तौर पर बाद में जांच करने की व्यवस्था की अनुमति दी गई है. हालांकि 30 नवंबर 2026 तक उन्हें इस पूरे प्रोसेस को रियल टाइम एनरोलमेंट और एक्टिवेशन सिस्टम से जोड़ना होगा। 

    अगर इस बीच किसी तकनीकी वजह से तय लिमिट से ज्यादा SIM एक्टिव हो जाता है, तो उस कनेक्शन को मामले के समाधान तक तुरंत सस्पेंड किया जा सकता है।  

  • Sugar Price Hike: क्यों महंगी हुई चीनी? सरकार ने अल नीनो और रेड रॉट को बताया बड़ा कारण

    Sugar Price Hike: क्यों महंगी हुई चीनी? सरकार ने अल नीनो और रेड रॉट को बताया बड़ा कारण

     नई दिल्ली

    भारत में त्योहारी सीजन चल रहा है और मिठाई की मिठास को चीनी की बढ़ती कीमतें (Sugar Price Hike) बेस्वाद करती नजर आ रही हैं. देश में चीनी की कीमतों में ताबड़तोड़ उछाल जारी है. रिटेल मार्केट में 1 किलो चीनी की कीमत (1Kg Silver Price) 65 रुपये या कहीं-कहीं इससे भी ज्यादा पहुंच चुकी है. इसे लेकर राजनीतिय गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है और ये विपक्ष का प्रमुख मुद्दा बना हुआ नजर आ रहा है। 

    Sugar Price Hike को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच अब सरकार की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसके साथ ही उन्होंने चीनी के दाम बेलगाम होने के पीछे की एक नहीं, बल्कि दो वजह बताई हैं। 

    सरकार बोली- इथेनॉल का रोल नहीं
    चीनी की कीमतों को लेकर जारी राजनीतिक घमासान में जहां विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से देश में चीनी की सप्लाई कम हो रही है और उसके चलते कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे इथेनॉल का कोई हाथ नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है, जिसमें कच्चे चीनी का अस्थायी आयात भी शामिल है। 

    मंत्री ने बताईं दो वजह 
    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे की दो वजह बताई हैं. उन्होंने कहा कि रेड रॉट बीमारी और अल नीनो की स्थितियों के कारण चीनी उत्पादन में गिरावट आई है, जिससे भारत और दुनिया भर में कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'रेड रॉट बीमारी (जिसकी उम्मीद नहीं थी) और अल नीनो के कारण, न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी समेत कुल एग्रीकल्चर प्रोडक्शन में कमी आई है। 

    उन्होंने आगे कहा कि हम देश में चीनी के बढ़ते दाम को लेकर बहुत चिंतित हैं, इसलिए हमने तुरंत कई कदम उठाए हैं. भारत की जरूरत लगभग 280 लाख टन है, और आज की तारीख में हमारे पास पर्याप्त सरप्लस चीनी का स्टॉक है। 

    देश में चीनी की कोई कमी नहीं
    प्रह्लाद जोशी ने सरकार की ओर से साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है. देश को लगभग 280 लाख टन चीनी की ज़रूरत है और अभी स्टॉक में लगभग 36 लाख टन चीनी है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चीनी की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रही है और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध स्टॉक को बाजार में लाने में मदद करें, ताकि उपभोक्ताओं को पुरानी कीमतों पर चीनी मिल सके। 

    इसके अलावा उन्होंने कहा कि त्योहारों का मौसम आ रहा है और कई बड़े त्योहार हैं, इसलिए आयात के उपाय किए जा रहे हैं, हमने पहले ही कई कदम उठाए हैं, जिसमें अस्थायी उपाय के तौर पर कच्ची चीनी का आयात भी शामिल है 

    क्या होने वाली है चीनी की भारी कमी? 
    रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो से शुगर प्रोडक्शन पर खतरा है और दुनिया भर में चीनी की कमी की आशंका गहरा रही है. भारत और दुनिया भर में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. अल नीनो से जुड़े मौसम के हालात मुख्य उत्पादक देशों में गन्ने के उत्पादन पर असर डालने वाले एक अहम कारक के तौर पर उभर रहे हैं. इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि खराब मौसम का वैश्विक उत्पादन पर असर, भारतीय चीनी उत्पादन, कीमतों और निर्यात पर दबाव डालते हुए इसकी दुनियाभर में बड़ी कमी का कारण बन सकता है। 

     

  • कोलकाता में राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, युद्धपोत और तेल टैंकर बनाएगा भारत; बनेगा शिप बिल्डिंग हब

    कोलकाता में राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, युद्धपोत और तेल टैंकर बनाएगा भारत; बनेगा शिप बिल्डिंग हब

     कोलकाता

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत वैश्विक जहाज निर्माण का बड़ा केंद्र बनने में पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों में पैदा हुए एक तरह के खालीपन का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के लिए सुनहरा मौका है. यह बयान उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और यंत्र इंडिया लिमिटेड के पांच प्रोजेक्ट्स का वर्चुअल शिलान्यास करने के बाद दिया. इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत करीब 3500 करोड़ रुपये है. सिंह के साथ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।  

    दुनिया भर में युद्धपोतों, तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों की मांग बढ़ रही है, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देश पिछले कुछ दशकों में अपनी क्षमता धीरे-धीरे कम कर रहे हैं. इसका मुख्य कारण ऊंची श्रम लागत और पुराने शिपयार्ड्स का आधुनिकीकरण न होना बताया जाता है। 

    राजनाथ सिंह ने कहा कि इस स्थिति में भारत अपनी बड़ी कामगार शक्ति, इस्पात कंपनियों और नई तकनीकों को अपनाने की इच्छाशक्ति के बल पर इस अवसर को पकड़ सकता है. उन्होंने डिजाइन, निर्माण और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) तीन क्षेत्रों पर खास जोर दिया. भारत में इंजीनियरिंग और आईटी प्रतिभाओं की भरमार है. इन सबके सहारे देश विश्व स्तरीय जहाज डिजाइन हब भी बन सकता है। 

    पश्चिम बंगाल में नए प्रोजेक्ट्स और क्षमता विस्तार
    शिलान्यास किए गए 5 ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स में जीआरएसई के 3 और यंत्र इंडिया के 2 सुविधाएं शामिल हैं. जीआरएसई ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता के साथ 2 छोटे शिपयार्ड्स और रायचक में 32 एकड़ की नदी किनारे की जमीन का लीज समझौता किया है।
     
    रायचक सुविधा को जहाज निर्माण हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें 2500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा. यहां 200 मीटर लंबे युद्धपोत बनाए जा सकेंगे, जिससे जीआरएसई अगली पीढ़ी के डिस्ट्रॉयर्स के लिए बोली लगाने में सक्षम होगा। 

    यंत्र इंडिया के मेटल एंड स्टील फैक्ट्री इशपोर में दो सुविधाओं पर 750 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा, जो स्वदेशी धातुकर्म और रक्षा विनिर्माण को मजबूत करेगा. ये प्रोजेक्ट्स जीआरएसई की क्षमता बढ़ाएंगे, पश्चिम बंगाल के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करेंगे, रोजगार पैदा करेंगे और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देंगे। 

    राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत के स्वदेशी हथियार प्रणालियों की ताकत देख ली है. भविष्य में भी रक्षा जरूरतों को स्वदेशी तरीके से पूरा करने की पहल जारी रहेगी. ये प्रोजेक्ट्स मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड नीतियों को मजबूती देंगे। 

    उन्होंने पश्चिम बंगाल में बदलाव और विकास की बात करते हुए कहा कि राज्य में फैक्टरियों के बंद होने की खबरें अब नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत से बदल गई हैं. अधिकारी ने भी पिछले सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर राज्य के विकास के लिए काम नहीं किया. सीमा सुरक्षा बल को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 1100 एकड़ जमीन का हस्तांतरण भी इस नई सरकार की उपलब्धि के रूप में बताया गया। 

    अवसर, चुनौतियां और आगे की राह
    राजनाथ सिंह का यह बयान सिर्फ औपचारिक भाषण नहीं बल्कि भारत की औद्योगिक और रक्षा रणनीति का हिस्सा लगता है. वैश्विक जहाज निर्माण बाजार में चीन जैसे देशों का दबदबा है, लेकिन श्रम लागत और भू-राजनीतिक कारणों से कुछ पारंपरिक उत्पादक पीछे हट रहे हैं। 

    भारत के पास युवा आबादी, इंजीनियरिंग टैलेंट और सरकारी प्रोत्साहन है, लेकिन वास्तविक चुनौतियां भी हैं जैसे आधुनिक तकनीक का तेजी से अपनाना, निजी क्षेत्र का ज्यादा निवेश, समय पर प्रोजेक्ट पूरे करना और गुणवत्ता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना. पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में औद्योगिक पुनर्जागरण की बात सही दिशा में है, क्योंकि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक केंद्र रहा है। 
    अगर रायचक जैसी सुविधाएं समय पर तैयार हो जाएं और एमएसएमई को जोड़ा जाए तो रोजगार और सहायक उद्योगों को बड़ा फायदा हो सकता है. कुल मिलाकर यह भारत के लिए रक्षा आत्मनिर्भरता और निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर है, बशर्ते नीतियां और क्रियान्वयन दोनों मजबूत रहें।