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  • उड़ते विमान में बम की सूचना से कोहराम, लखनऊ-बेंगलुरु रूट पर मचा हड़कंप

    उड़ते विमान में बम की सूचना से कोहराम, लखनऊ-बेंगलुरु रूट पर मचा हड़कंप

    बेंगलुरु 
    लखनऊ से बेंगलुरु आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E231 को बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया. सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट के बेंगलुरु एयरपोर्ट पर अंतिम अप्रोच के दौरान क्रू को विमान में बम होने की धमकी के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद पायलट और क्रू ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जरूरी कदम उठाए। 

    फ्लाइट ने सुबह करीब 9:40 बजे बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान के सुरक्षित उतरने के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों को बम की धमकी के बारे में जानकारी दी गई. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और एयरपोर्ट अधिकारियों ने विमान की जांच शुरू कर दी। 

    बम धमकी की सूचना मिलते ही बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड, CISF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। विमान की गहन तलाशी और सुरक्षा जांच की गई।प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि धमकी वाला पत्र विमान में सवार किसी यात्री ने रखा हो सकता है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

    क्रू ने तत्काल इसकी जानकारी पायलट को दी, जिसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को धमकी की सूचना दी। इसके बाद विमान को सुरक्षा जांच के लिए रनवे के पास एक निर्धारित स्थान पर ले जाकर पार्क किया गया और सभी यात्रियों को विमान से उतार दिया गया।

    अधिकारियों की तरफ से SOP के तहत विमान की पूरी तरह से तलाशी ली जा रही है. विमान के अंदर के हिस्सों के साथ-साथ सामान और अन्य जरूरी स्थानों की भी जांच की जा रही है। 

    सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर बम की धमकी को होक्स यानी फर्जी होने की आशंका है. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं और विस्तृत जांच पूरी होने तक सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। 

    फिलहाल विमान सुरक्षित है और जांच जारी है. अधिकारियों की विस्तृत जांच के बाद ही यह साफ होगा कि धमकी का स्रोत क्या था और यह वास्तविक थी या महज अफवाह. यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है। 

  • रक्षाबंधन ऐड विवाद: कृति सेनन वाला विज्ञापन हटाने पर GIVA ने दी सफाई

    रक्षाबंधन ऐड विवाद: कृति सेनन वाला विज्ञापन हटाने पर GIVA ने दी सफाई

    मुंबई 

    ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने बुधवार को एक्ट्रेस कृति सेनन के विवादास्पद रक्षाबंधन विज्ञापन को हटा दिया है। विज्ञापन में कृति ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहने थीं। वे कुत्ते को भी राखी बांधती नजर आ रही थीं।

    इस पहनावे को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। GIVA ने आज कहा कि विज्ञापन हटाने का फैसला भारतीय संस्कृति और परंपराओं के सम्मान में लिया गया है। किसी की भावनाएं आहत करना हमारा इरादा नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति का समर्थन किया था।

    बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन की विवादित रक्षा बंधन एड को सोशल मीडिया से हटा दिया गया है। दरअसल, ज्वैलरी ब्रांड GIVA की ओर से यह विज्ञापन पोस्ट किए जाने के बाद से ही एक्ट्र्रेस ट्रोल्स के निशाने पर थीं। लोग GIVA के प्रोडक्ट पर ध्यान देने की बजाए, विज्ञापन में कृति के कपड़ों पर आपत्ति जता रहे थे। वहीं, एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत ने भी इस एड में कृति के आउटफिट की आलोचना की थी।

    GIVA ने पोस्ट में क्या लिखा?
    बुधवार को इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक बयान में ब्रांड ने कहा, ‘हम भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का बहुत सम्मान करते हैं। एक ब्रांड के तौर पर, हम हमेशा पूरे परिवार के साथ इन खुशियों भरे पलों को मनाने में विश्वास रखते हैं और इस बार हम अपने पालतू जानवरों तक भी यह प्यार और जश्न पहुंचाना चाहते थे। अगर हमारे हालिया विज्ञापन से अनजाने में समाज के कुछ वर्गों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो हमारा ऐसा कोई इरादा बिल्कुल नहीं था। सम्मान के तौर पर, हमने उस विज्ञापन को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। इस त्योहार के मौसम में आप सभी को ढेर सारा प्यार और पॉजिटिविटी मिले।’

    राखी की एड का विरोध क्यों हुआ?
    यह विज्ञापन 20 जुलाई को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था। इसके बाद से ही कमेंट सेक्शन में लोग इस पर आपत्ति जताने लगे थे। कई यूजर्स ने विज्ञापन में कृति के कपड़ों को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने कमेंट किया, ‘बिकिनी पहनकर भाई को राखी कौन बांधता है?’ वहीं, कुछ लोगों ने इसे हिंदू परंपराओं का मजाक उड़ाने वाला विज्ञापन बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘अलग-अलग तरह के कपड़े पहनना ठीक है, लेकिन हिंदू त्योहार पर नहीं। मैं इस विज्ञापन से बिल्कुल सहमत नहीं हूं।’

    कंगना रनौत ने इस एड पर क्या कहा था?
    इस विवाद में कंगना रनौत ने भी कृति सेनन का नाम लिए बिना उन पर तंज कसा था। उन्होंने लिखा था, ‘हमारी अलमारियां तरह-तरह के कपड़ों से भरी हैं, आज की महिला ग्लोबल महिला है। कॉकटेल ड्रेस से लेकर लहंगा-चोली, जींस से लेकर साड़ी, बिकिनी से लेकर सलवार-कमीज तक, आज हमारे पास इतने सारे ऑप्शन हैं, तो फिर आप बिकिनी/अंडरगारमेंट्स पहनकर अपने भाई को राखी क्यों बांधेंगी? आपके स्टाइलिंग ऑप्शन कहां गए? हा हा, यह विज्ञापन जानबूझकर अजीब और डरावना लगता है!’

    कृति सेनन ने दिया था जवाब
    विज्ञापन को लेकर बढ़ते विवाद के बीच कृति सेनन ने भी ट्रोल करने वालों को जवाब दिया था। उन्होंने मंगलवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लिखा था, ‘त्योहारों का असली मतलब आपके पहने हुए कपड़ों में नहीं, बल्कि परंपराओं के प्रति आपकी भावनाओं और उनके महत्व में होता है। रक्षाबंधन सुरक्षा का बंधन है। मैं और मेरी बहन एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे की सुरक्षा वैसे ही कर सकते हैं जैसे कोई भाई करता। हम एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं। हम यह प्रार्थना और वादा हमारे डॉग्स के लिए भी करते हैं! आखिर, वे भी तो परिवार का हिस्सा हैं! साथ ही, हम महिलाओं को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए? एथनिक फैशन में समय के साथ काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी किसी महिला के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को सिर्फ उसके कपड़ों से ही आंका जाता है!! संस्कृति और परंपराएं उसके दिल में होती हैं, न कि उसके कपड़ों की नेकलाइन में!’

  • भारत के इस वेपन से कांप उठा था किराना हिल, जानें कितना विध्वंसक है यह हथियार

    भारत के इस वेपन से कांप उठा था किराना हिल, जानें कितना विध्वंसक है यह हथियार

     नई दिल्ली

    मई 2025 में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया. इसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इस दौरान भारतीय वायु सेना और सशस्त्र बलों ने कई लोइटरिंग म्यूनिशन यानी सुसाइड ड्रोन भेजे. ये ड्रोन आसमान में घूमते हुए टारगेट ढूंढते हैं. फिर उससे टकराकर विस्फोट करते हैं। 

    एक साल बाद पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में एक कार्यक्रम में इस घटना का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि सरगोधा एयरबेस के आसपास रडार सिस्टम तलाशने के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे।  

    किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में है. इनमें से एक म्यूनिशन लगभग दो घंटे तक आसमान में घूमने के बाद फ्यूल खत्म होने के बाद पहाड़ी से जा टकराया. पाकिस्तानी मीडिया में उस समय किराना हिल्स से धुएं के चित्र दिखे थे, जिसकी वजह से अटकलें तेज हो गईं। 

    जनरल चौहान ने साफ कहा कि भारत ने जानबूझकर किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया. पहले भी एयर मार्शल एके भारती (तब डायरेक्टर जनरल ऑफ एयर ऑपरेशंस) ने मई 2025 में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया. हमें वहां परमाणु सुविधा होने की जानकारी भी नहीं थी। 

    चौहान ने भारती के बयान का समर्थन करते हुए समझाया कि लोइटरिंग म्यूनिशन की उम्र सीमित होती है. यह दो घंटे तक उड़ सकता है. अगर इस दौरान रडार या अन्य लक्ष्य नहीं मिलता तो फ्यूल खत्म होने पर वह कहीं भी गिरकर धमाका कर देता है. यही किराना हिल्स के किसी हिस्से में हुआ होगा। 

    किराना हिल्स क्यों महत्वपूर्ण है?
    किराना हिल्स पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा के पास स्थित पहाड़ियों का समूह है. लंबे समय से इसे परमाणु सुविधाओं और अंडरग्राउंड भंडारण स्थलों से जोड़ा जाता रहा है. कुछ रिपोर्टों में इसे परमाणु हथियारों के भंडारण या संबंधित सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का स्थान बताया गया है। 

    इसी वजह से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वहां धुएं के दृश्य देखकर यह अटकलें लगाई गईं कि भारत ने परमाणु केंद्र पर हमला किया है. लेकिन भारतीय पक्ष का रुख हमेशा यही रहा कि जानबूझकर ऐसे सेंसिटिव टारगेट पर हमला नहीं किया गया. जनरल चौहान के बयान से यह स्पष्ट होता है कि घटना आकस्मिक थी. मुख्य उद्देश्य रडार सिस्टम को निष्क्रिय करना था, ताकि भारतीय हमलों के दौरान पाकिस्तानी वायु रक्षा कमजोर रहे। 

    लोइटरिंग म्यूनिशन क्या है और कैसे काम करता है?
    लोइटरिंग म्यूनिशन पारंपरिक मिसाइल और ड्रोन का मिश्रण है. इसे आसमान में छोड़ने के बाद यह लंबे समय तक एक क्षेत्र में घूमता रहता है. लक्ष्य की खोज करता है. ऑपरेटर के आदेश या स्वचालित तरीके से उस पर टकराकर विस्फोट करता है. ये हथियार दुश्मन की वायु रक्षा रडार को विशेष रूप से निशाना बना सकते हैं क्योंकि कुछ वर्जन रडार की रेडिएशन सिग्नल को पकड़कर होमिंग कर लेते हैं. ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इन्हें मुख्य रूप से रडार और सैन्य ठिकानों के खिलाफ इस्तेमाल किया। 

    हथियार: हारोप या कोई और सुसाइड ड्रोन था
    जनरल चौहान ने हथियार का नाम नहीं लिया, लेकिन कई रिपोर्टों और एनालिस्ट के अनुसार यह संभवतः इजरायली डिजाइन का IAI Harop (हारोप) लोइटरिंग म्यूनिशन था. भारत ने कई साल पहले हारोप सिस्टम खरीदे थे. हारोप एंटी-रेडिएशन क्षमता वाला है. यह दुश्मन के रडार सिग्नल को पकड़कर उस पर हमला कर सकता है। 

    इसकी उड़ान क्षमता कई घंटों तक हो सकती है, लेकिन उस मिशन में इस्तेमाल किए गए संस्करण या परिस्थिति में लगभग दो घंटे की सीमा बताई गई. पाकिस्तान ने ऑपरेशन के दौरान दर्जनों हारोप ड्रोन गिराने का दावा भी किया था. अन्य संभावित लोइटरिंग म्यूनिशन में इजरायली-भारतीय सहयोग से बने SkyStriker (स्काईस्ट्राइकर), स्वदेशी Nagastra-1, पोलिश Warmate और कुछ अन्य स्वदेशी सिस्टम शामिल हो सकते हैं। 

    लेकिन रडार-खोज मिशन और सरगोधा जैसे क्षेत्र के लिए हारोप सबसे उपयुक्त और रिपोर्टों में सबसे ज्यादा मेंशन किया गया हथियार है. हारोप में लगभग 23 किलोग्राम का वॉरहेड होता है, जो रडार या छोटे सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। 

    आकस्मिक घटना या रणनीतिक संदेश?

    यह घटना आधुनिक युद्ध की जटिलता को दिखाती है. लोइटरिंग म्यूनिशन सटीक और कम जोखिम वाले हथियार हैं, लेकिन उनकी सीमित उड़ान समय की वजह से कभी-कभी अनजान जगह पर भी गिर सकते हैं. भारत ने जानबूझकर परमाणु सुविधा को नहीं छुआ, जिससे संघर्ष को सीमित रखने की नीति साफ झलकती है। 

    रडार सिस्टम को निशाना बनाकर पाकिस्तान की वायु रक्षा को कमजोर करने की रणनीति सफल रही. किराना हिल्स जैसी संवेदनशील जगह के पास भी भारतीय ड्रोन पहुंचने की क्षमता साबित हुई. पाकिस्तानी मीडिया में धुएं के चित्रों ने अटकलों को बढ़ावा दिया, लेकिन सैटेलाइट चित्रों से आकस्मिक टकराव की पुष्टि होती दिखती है। 

    यह खुलासा ऑपरेशन सिंदूर की एक साल बाद की समीक्षा का हिस्सा है. जनरल चौहान ने अन्य बातें भी बताईं, जैसे स्कर्दू पर हमले की मंजूरी लेकिन खराब मौसम की वजह से लक्ष्य बदलना. कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि भारत की ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन क्षमता आधुनिक युद्ध में कितनी प्रभावी हो गई है, साथ ही संयम भी बनाए रखा गया। 

  • पहाड़ों में सफर होगा आसान! केदारनाथ से मसूरी तक 8 रोपवे प्रोजेक्ट, जानें पूरी लिस्ट

    पहाड़ों में सफर होगा आसान! केदारनाथ से मसूरी तक 8 रोपवे प्रोजेक्ट, जानें पूरी लिस्ट

    देहरादून

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में रोपवे कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को राहत मिलेगी, बल्कि सड़क मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा। केदारनाथ से मसूरी तक कुल 8 रोपवे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सोमवार को सीएम धामी ने अधिकारियों को कार्य पूरा करने की डेडलाइन दे दी।

    मुख्यमंत्री ने अपने कैंप कार्यालय में राज्य के प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट की समीक्षा की। रोपवे निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के लिए लक्ष्य तय कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट वाले जिलों के डीएम प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें। इनके निर्माण में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का हल निकालने के लिए समन्वय से काम करें।

    रोपवे के साथ पार्किंग सुविधा पर भी जोर
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को समेकित योजना का हिस्सा बनाएं। साथ ही निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लाइसेंसिंग एवं अनुमोदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी बनाया जाए।

    सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट राज्य में कनेक्टिविटी के लिए बेहतर विकल्प हैं। इनकी मदद से पर्यटक और श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधा मिलेगी। जल्द से जल्द सभी प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा।

    9 नवंबर वाली डेडलाइन और 15 दिन के भीतर काम दिखे
    मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि नौ नवंबर तक सभी रोपवे के कार्य धरातल पर प्रमुखता से होते दिखाई देने चाहिए। इसके साथ ही सभी निर्माण एजेंसियां पंद्रह दिन के भीतर अब तक की प्रगति की रिपोर्ट को मुख्य सचिव को सौंपेंगी। मुख्यमंत्री इन प्रोजेक्ट की नियमित रूप से समीक्षा करेंगे।

    सुरक्षा-पर्यावरण का रहे विशेष ध्यान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले पर्यटन और कनेक्टिविटी से जुड़े हर प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। रोपवे परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। निर्माण कार्य में पर्यावरण संरक्षण के मानकों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ा जाए। उत्तराखंड इकोनामी के साथ साथ इकोलॉजी को भी बराबर महत्व देते हुए आगे बढ़ रहा है। इसका संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

    राज्य के प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट

    ● सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ-12.90 किमी

    ● गोविंद घाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब 12.40 किमी

    ● काठगोदाम बस स्टैंड-हनुमान गढ़ी मंदिर-14.90 किलोमीटर

    ● जोशीमठ-औली-गौरसौं -6.92 किलोमीटर

    ● गौंडार-श्रीमदमहेश्वर-6.5 किलोमीटर

    ● देहरादून-पुरकुल-मसूरी 5.5 किलोमीटर

    ● यमुनोत्री प्रोजेक्ट-जानकीचट्टी- यमुनोत्री मंदिर-3.39 किमी

    ● तपोवन-कुंजापुरी रेापवे प्रोजेक्ट-4.84 किलोमीटर

  • अंतरिक्ष से दिखा मॉनसून का खौफनाक नजारा! सैटेलाइट फोटो में बादलों ने बनाया विशाल घेरा

    अंतरिक्ष से दिखा मॉनसून का खौफनाक नजारा! सैटेलाइट फोटो में बादलों ने बनाया विशाल घेरा

     नई दिल्ली
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और इसरो के INSAT-3डीएस सैटेलाइट से हाल ही में ली गई थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीर ने देश के बड़े हिस्से पर मॉनसूनी बादलों का विशाल जमावड़ा कैद किया है. यह तस्वीर मध्य भारत, गंगा के मैदान और पूर्वी राज्यों के ऊपर घने, चमकीले बादलों की मोटी चादर दिखाती है। 

    ये बादल गहरी संवहन प्रक्रिया से जुड़े हैं, यानी हवा तेजी से ऊपर उठकर भारी बारिश और गरज-चमक वाले तूफान पैदा कर सकती है. वैज्ञानिक दृष्टि से यह संकेत है कि मॉनसून अभी सक्रिय है, लेकिन इसकी तीव्रता और फैलाव अब पहले जैसी समान नहीं रही। 

    सैटेलाइट छवि में बादलों की मोटी पट्टी मध्य भारत से शुरू होकर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक फैली दिखती है. मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी बादली गतिविधि साफ नजर आ रही है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह पैटर्न निम्न दबाव के क्षेत्रों और मॉनसून धाराओं के आपसी मेल से बनता है। 

    सितंबर के पहले दो हफ्तों तक पूर्वी भारत में मध्यम से भारी बारिश के कई दौर आ सकते हैं. इन दिनों निम्न दबाव के सिस्टम जहां-जहां सक्रिय होंगे, वहां स्थानीय स्तर पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं. इससे बाढ़ या जलभराव का खतरा उन जिलों में बढ़ सकता है जहां पहले से मिट्टी गीली है। 

    असमान बारिश का बदलता स्वरूप
    मॉनसून अब पूरे देश में एक जैसा सक्रिय नहीं रह र
    हा. पूर्वी हिस्से में बारिश जारी रहने का अनुमान है, जबकि उत्तर-पश्चिम, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्से अपेक्षाकृत सूखे रह सकते हैं. यह असमानता जलवायु परिवर्तन और मौसमी हवाओं के दिशा बदलने का नतीजा हो सकती है। 

    जहां पूर्व में नदियों का जल स्तर बढ़ सकता है, वहीं पश्चिम और दक्षिण में किसान सूखे की चिंता से जूझ सकते हैं. मौसम मॉडल बताते हैं कि यह प्रवृत्ति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर कृषि, जल प्रबंधन और शहरी जीवन पर अलग-अलग असर पड़ेगा। 

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए भी ताजा छिटपुट बारिश का संकेत है. दिन भर में बनने वाले बादल और स्थानीय संवहन गतिविधि शाम या देर दोपहर में बौछारें और गरज के साथ बारिश ला सकते हैं. ये बारिशें बहुत स्थानीय होती हैं- एक इलाके में तेज पानी गिर सकता है, तो पास वाले इलाके में केवल बादल छाए रह सकते हैं. दिल्ली-NCR के निवासियों को सलाह है कि वे मौसम अपडेट पर नजर रखें और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें। 

    अंतरिक्ष से ली गई यह तस्वीर भारत के बदलते मॉनसून का जीवंत दस्तावेज है. पूर्वी आधे हिस्से पर बादलों का जमावड़ा जारी रहने से वहां और बारिश की उम्मीद है, जबकि बाकी हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शांत रह सकता है. किसानों, शहरवासियों और आपदा प्रबंधन टीमों को क्षेत्रीय पूर्वानुमानों पर ध्यान देना चाहिए. मॉनसून की यह असमानता हमें याद दिलाती है कि जलवायु अब अधिक अनिश्चित हो गई है और समय रहते तैयारी जरूरी है। 

  • PM मोदी की तारीफ, किसानों के लिए बड़ी गुड न्यूज! जयशंकर के सामने पुतिन ने किया बड़ा ऐलान

    PM मोदी की तारीफ, किसानों के लिए बड़ी गुड न्यूज! जयशंकर के सामने पुतिन ने किया बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने  भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान भारत और रूस के रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की. पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में पीएम मोदी की व्यक्तिगत दिलचस्पी की बड़ी भूमिका है. उन्होंने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी को अपना गर्मजोशी भरा अभिवादन पहुंचाने को भी कहा। 

    पुतिन ने इस मुलाकात के दौरान भारत के किसानों के लिए रूस से खाद की सप्लाई बढ़ाने का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है कि भारतीय कृषि क्षेत्र को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिलता रहे। 

    ‘भारत-रूस व्यापार में फिर दिख रही रिकवरी’
    पुतिन ने कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में गिरावट आई थी, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं. उन्होंने इस रफ्तार के पीछे कई कारणों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को खास तौर पर रेखांकित किया। 

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक संबंधों में दोबारा तेजी आने का एक बड़ा कारण पीएम मोदी का भारत-रूस संबंधों के विकास पर व्यक्तिगत ध्यान देना है। 

    पुतिन ने जयशंकर से कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हो सकती है. पुतिन ने यह भी कहा कि कार्यक्रम और समय-सारिणी के हिसाब से इस साल के अंत में भी दोनों नेताओं की मुलाकात संभव है। 

    भारतीय किसानों के लिए रूस का बड़ा भरोसा
    इस बैठक में खाद की सप्लाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. पुतिन ने कहा कि तेल-गैस की सप्लाई के साथ-साथ उर्वरक की उपलब्धता भी दोनों देशों के सहयोग का अहम हिस्सा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरक की सप्लाई बढ़ा रहा है और आगे भी इसे जारी रखने के लिए तैयार है। 

    भारत के लिए यह आश्वासन इसलिए अहम है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सीधे किसानों की उत्पादन क्षमता और लागत से जुड़ी होती है। 

    किन-किन क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग
    पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग केवल ऊर्जा और खाद तक सीमित नहीं है. परमाणु ऊर्जा, हाईटेक सेक्टर और दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं। 

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीकी क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है. मौजूदा दौर में दोनों देश आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहे हैं। 

    जयशंकर के साथ पुतिन की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब नई दिल्ली और मॉस्को अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को नए आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में पुतिन का मोदी की तारीफ करना और भारत को खाद की सप्लाई बढ़ाने का भरोसा देना दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंधों का संकेत माना जा रहा है। 

  • उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    नई दिल्ली

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. मंत्रालय सभी पायलटों का साल में एक बार अनिवार्य डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ाने वाले पायलट किसी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी पर न हों। 

    इस प्रस्ताव को लेकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा कर रहा है. अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सभी पायलटों का सालाना 100 फीसदी डोप टेस्ट कराना कितना व्यावहारिक होगा।

    इसके साथ ही प्रस्तावित व्यवस्था का एयरलाइन ऑपरेशंस पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जा रहा है. अधिकारियों का फोकस यह तय करने पर है कि डोप टेस्ट की प्रक्रिया लागू होने के बावजूद उड़ानों के संचालन में किसी तरह की परेशानी न आए. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पायलटों की नियमित जांच के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

    एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त
    एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे गिरने की घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने विमान सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे. मामले की जांच के दौरान पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है और तकनीकी गड़बड़ियों के साथ-साथ क्रू के मेडिकल टेस्ट की भी जांच की जा रही है। 

    घटना के बाद कराए गए कन्फर्मेटरी मेडिकल टेस्ट में विमान के कैप्टन के मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा फ्लाइट के अचानक ऊंचाई खोने से पहले हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़े कई तकनीकी अलर्ट भी दर्ज हुए थे. DGCA अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। 

    DGCA लगातार एक्शन मोड में
    इस घटना ने विमान उड़ाने वाले पायलट की नियमित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. इसी के बाद DGCA कमर्शियल एयरलाइंस में साइकोएक्टिव और नशीले पदार्थों की जांच के नियमों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 

    नए नियमों के तहत पायलटों और अन्य फ्लाइट क्रू की रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है. DGCA यह भी देख रहा है कि ड्रग टेस्टिंग को ज्यादा प्रभावी और नियमित कैसे बनाया जाए, ताकि किसी भी तरह के नशे के प्रभाव में कोई क्रू सदस्य विमान संचालन का हिस्सा न बन सके। 

    यानी एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA अब सिर्फ इस मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की तैयारी में है. मकसद साफ है- पायलटों की फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे। 

     

  • एनएमडीसी ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 आयोजन के अधीन आरंभ किया त्रैमासिक अभियान

    हैदराबाद

     केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, एनएमडीसीलिमिटेड ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के पूर्वाभ्यास के रूप में त्रैमासिक अभियानआरंभ किया । इस अभियान का उद्देश्य पूरे संगठन में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, ईमानदारीऔर सुशासन के मूल्यों को बढ़ावा देना और जागरूकता को मजबूत करना है।एनएमडीसी के सतर्कता विभाग ने इस अभियान के भाग के रूप में एनएमडीसी मुख्यालय,हैदराबाद में दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम केंद्रीयसतर्कता आयोग द्वारा पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों में कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाने औरक्षमता निर्माण के लिए आयोजित किया गया ।

    इस सत्र में  अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), एनएमडीसी और  सी. नीलकंठ रेड्डी ,मुख्य सतर्कताअधिकारी, एनएमडीसी विशेष रूप से उपस्थित रहे। निदेशक (वित्त) ने अपनेसंबोधन में, सतर्कता और वित्त कार्यों में गहरे तालमेल पर बल दिया। उन्होंने पारदर्शिता,जवाबदेही और सही निर्णय लेने को सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक फाइलों पर स्पष्ट,विशिष्ट और तर्कसंगत स्पष्टीकरण व औचित्य दर्ज करने के महत्व पर भी बल दिया।

     सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने समापन सत्र के दौरान, प्रतिभागियों कोसंबोधित करते हुए सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के विषय — "समृद्धि के लिएईमानदारी&quot(Probity for Prosperity) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी संगठनात्मक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, नैतिकताऔर जवाबदेही के मूल मूल्यों को विकसित करने की आवश्यकता परबल दिया। 
    उन्होंने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के लिए एनएमडीसी की तैयारियों कोसशक्त और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपनी सक्रीय भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

    एनएमडीसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी  सी. नीलकंठ रेड्डी ने अभियान के महत्व औरपूरे संगठन में सतर्कता कार्यप्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों केप्रख्यातवक्ताओं और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया,जिन्होंने आईटी और साइबर सुरक्षा व साइबर स्वच्छता,जीएफआर-2017 के तहत जीईएम- न्यू फीचर्स एण्ड फंक्शनेलिटी तथा कंडक्ट रुल्स एण्ड कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरस्ट जैसेमहत्वपूर्ण विषयों पर अपना अगाध ज्ञान और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किया।

    पहले दिन के सत्र में मती के इंद्र्वेणी , वैज्ञानिक-एफ एवं संबद्ध निदेशक, सी-डैक नेसाइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता तथा  डी. ब्रह्मा रेड्डी ,दिल्ली विश्वविद्यालय केसंबद्ध प्रोफेसर तथा आईएसटीएम ,नई दिल्ली के पूर्व संकाय ने पब्लिक प्रक्यूरमेंट ऑफगूडस सर्विस अंडर जीएफआर-2017 पर सत्र आयोजित किए।दूसरे दिन  कार्तिकेय दत्ता ,उप मुख्य सामग्री प्रबंधक (सामान्य) आईआरएसएस नेप्रक्यूरमेंट फ्रेमवर्क ,बेस्ट पैक्टिस एण्ड रीसेंट डेवलपमेंट इन जीईम, तथा कर्नूल क्षेत्र केपोस्टमास्टर जनरल और बीडीएल ,मिधानि एवं एचएसएल के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारीडॉ. उपेंदर वेन्नम ने मॉडल सीडीए रुलस एण्ड कनफ्लिक्ट ऑफ इंटर्स्ट विषय पर सत्र संचालित किए।

    इन सत्रों ने प्रतिभागियों को अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन में सतर्कता जागरूकता,पारदर्शिता, अनुपालन और नैतिक निर्णय लेने को मजबूत करने पर मूल्यवान दृष्टिकोणप्रदान किए।

    यह अभियान सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 तथा सम्पूर्ण अभियान की अवधि के दौरानविभिन्न जागरूकता और क्षमता निर्माण पहलों के साथ जारी रहेगा।

    एनएमडीसी ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के तहत "समृद्धि के लिएईमानदारी"विषय पर त्रैमासिक अभियान के रूप में, क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संगठन में सतर्कता, पारदर्शिता, अनुपालन, नैतिक आचरण और सुशासन को मजबूत करने के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करेगा ।

  • मिसाइलों की कमी नहीं होने देंगे! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारतीय कंपनियों को मिलेगी DRDO टेक्नोलॉजी

    मिसाइलों की कमी नहीं होने देंगे! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारतीय कंपनियों को मिलेगी DRDO टेक्नोलॉजी

    नई दिल्ली

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उन्होंने DRDO यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक देसी इंडस्ट्री को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है. यह ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी प्रक्रिया देश में ही इन मिसाइलों के उत्पादन का रास्ता खोलेगी। 

    पहले ये तकनीकें मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों तक सीमित थीं. अब निजी कंपनियां भी इनका निर्माण कर सकेंगी. यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है. इस फैसले से भारतीय कंपनियां एडवांस मिसाइल सिस्टम का उत्पादन देश के अंदर ही कर पाएंगी. उत्पादन लागू योग्यताओं, प्रमाणपत्रों और नियामक आवश्यकताओं के अधीन होगा. यानी कंपनियों को जरूरी मानक पूरे करने होंगे। 

    डीआरडीओ अब मिसाइल विकास से औद्योगिक उत्पादन की ओर बढ़ेगा. वह घरेलू उद्योग की क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करेगा. इससे मिसाइल निर्माण की पूरी श्रृंखला देश के अंदर मजबूत होगी. छोटे और मझोले उद्यम यानी MSME तथा अन्य तकनीक साझेदार भी सप्लाई चेन में शामिल हो सकेंगे. उन्हें नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। 

    इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
    इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाना है. साथ ही भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करना और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है. अभी कई एडवांस हथियार प्रणालियों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है. अब जब तकनीक भारतीय कंपनियों को दी जाएगी तो देश अपनी जरूरत की मिसाइलें खुद बना सकेगा। 

    इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचेगी बल्कि आपात स्थिति में आपूर्ति भी सुनिश्चित रहेगी. रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से नवाचार और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. यह फैसला डीआरडीओ की उस नीति का हिस्सा है जिसमें वह विकसित तकनीकों को उद्योग तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है। 

    पारंपरिक मिसाइल सिस्टम में कई तरह की मिसाइलें शामिल हो सकती हैं जो पहले से विकसित हो चुकी हैं. इनके उत्पादन से भारतीय सशस्त्र बलों को तेजी से आधुनिक हथियार मिल सकेंगे. MSME को मिसाइल सप्लाई चेन में जगह मिलने से पूरे क्षेत्र में कौशल विकास होगा. कंपनियां नई तकनीक सीखेंगी और वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना सकेंगी। 

    देश की कंपनियों को करना होगा ये काम
    अब कंपनियों को जरूरी योग्यताएं और प्रमाणपत्र हासिल करने होंगे. उसके बाद ही उत्पादन शुरू हो सकेगा. यह प्रक्रिया रक्षा क्षेत्र को और अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी बनाएगी. लंबे समय में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि मिसाइल तकनीक का निर्यात भी कर सकेगा. राजनाथ सिंह का यह फैसला आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है. इससे देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी और रक्षा उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी. भारतीय कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है जिसे वे सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। 

  • ‘नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए’, नितिन गडकरी के बयान ने कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को दी हवा

    ‘नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए’, नितिन गडकरी के बयान ने कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को दी हवा

     नागपुर

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कह दिया है कि अब वे पहले जितना काम नहीं कर सकते और अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएं. नागपुर के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि हाल-फिलहाल में सार्वजनिक कार्यों में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम हो गई है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को मौका दिया जाए। 

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे हैं और अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दी जानी चाहिए। नागपुर के 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' के कार्यक्रम में गडकरी ने यह बात कही।

    गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में कयास लगने शुरू हो गई है। बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यही वजह है कि गडकरी के इस बयान को भावी राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    खास बात यह है कि नितिन गडकरी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. गडकरी ने बताया कि कैसे रोजमर्रा के कामों में अब उनकी भागीदारी कम हो गई है. उनका कहना है कि अब नई पीढ़ी को काम सौंप कर पुरानी पीढ़ी को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। 

    नितन गडकरी ने कहा, "मैं पिछले 30 सालों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं. इस दौरान मैंने कई उतार-चढ़ाव भी देखे, कई बार पुरस्कृत भी हुआ. लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता. मुझे लगता है कि अब नई पीढ़ी को काम करने का मौका देना चाहिए। 

    हालांकि, गडकरी ने इसके तुरंत बाद विकास कार्यों की बात करना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में विकास का दायरा और बढ़ेगा. उनका लक्ष्य है कि महाराष्ट्र का कोई आदिवासी गांव बिजली से वंचित न रहे और राज्य में विकास साफ दिखाई दे। 

    कोरोना के बाद सेहत सुधारने पर दिया ध्यान
    गडकरी ने अपने पुराने दिनों का एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया, 'जवानी के दिनों में मेरी जीवनशैली बहुत ही अनियंत्रित थी। पार्टी का काम करते समय शाम को समोसा खाकर सो जाता था। लेकिन कोविड के बाद मैंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया है।' युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ‘अब मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। आप सभी को भी रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करना चाहिए।’

    4 लोग एक स्कूटर पर बैठकर जाते थे, नंबर प्लेट पर हाथ रखते थे
    राजनीतिक सफर के शुरुआती यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा जीवन पहले बहुत अनियमित था। हम भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे।

    उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हो सके, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।' उन्होंने फिर मुस्कुराते हुए कहा, 'मेरे पास एक लूना थी, जो 'कू-कू' की आवाज करती थी। उस पर दो लोग बैठकर जाते थे। बाद में विजय स्कूटर आया, जिस पर हम चार-चार लोग बैठ जाते थे। पुलिस से बचने के लिए हम पीछे बैठे-बैठे नंबर प्लेट पर हाथ रख लेते थे।'

    आदिवासी इलाकों में कोई गांव अंधेरे में न रहे
    कार्यक्रम में गडकरी ने 'एकलव्य एकल विद्यालय' संस्था के सामाजिक कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा का दीप जलाना जरूरी है।

    गडकरी के मुताबिक, ‘एक दिन यह अभियान इतना बड़ा बनेगा कि राज्य का कोई भी आदिवासी गांव अंधेरे में नहीं रहेगा। हर घर में शिक्षा का उजाला पहुंचेगा।’

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में हलचल
    गडकरी के इस बयान को हाल ही में चल रही उन चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी कारण गडकरी का 'नई पीढ़ी को जिम्मेदारी' वाला बयान अहम माना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान बीजेपी में बड़े संगठनात्मक बदलाव के कुछ दिनों बाद आया है. पिछले हफ्ते ही पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम बनी है. खास बात तो ये है कि 65 सदस्यों वाली इस टीम में 51 नए चेहरे हैं. इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा था. 2015 में अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद इसे पार्टी के स्तर पर हुए सबसे बड़े बदलाव के रूप में दर्शाया जा रहा है.  और अब नितिन गडकरी का यह बयान आगे और बड़े बदलाव का इशारा कर रहा है। 

    बीजेपी संगठन में हुए इस बड़े बदलाव के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय कैबिनेट में भी फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।