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  • उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    नई दिल्ली

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. मंत्रालय सभी पायलटों का साल में एक बार अनिवार्य डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ाने वाले पायलट किसी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी पर न हों। 

    इस प्रस्ताव को लेकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा कर रहा है. अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सभी पायलटों का सालाना 100 फीसदी डोप टेस्ट कराना कितना व्यावहारिक होगा।

    इसके साथ ही प्रस्तावित व्यवस्था का एयरलाइन ऑपरेशंस पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जा रहा है. अधिकारियों का फोकस यह तय करने पर है कि डोप टेस्ट की प्रक्रिया लागू होने के बावजूद उड़ानों के संचालन में किसी तरह की परेशानी न आए. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पायलटों की नियमित जांच के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

    एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त
    एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे गिरने की घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने विमान सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे. मामले की जांच के दौरान पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है और तकनीकी गड़बड़ियों के साथ-साथ क्रू के मेडिकल टेस्ट की भी जांच की जा रही है। 

    घटना के बाद कराए गए कन्फर्मेटरी मेडिकल टेस्ट में विमान के कैप्टन के मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा फ्लाइट के अचानक ऊंचाई खोने से पहले हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़े कई तकनीकी अलर्ट भी दर्ज हुए थे. DGCA अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। 

    DGCA लगातार एक्शन मोड में
    इस घटना ने विमान उड़ाने वाले पायलट की नियमित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. इसी के बाद DGCA कमर्शियल एयरलाइंस में साइकोएक्टिव और नशीले पदार्थों की जांच के नियमों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 

    नए नियमों के तहत पायलटों और अन्य फ्लाइट क्रू की रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है. DGCA यह भी देख रहा है कि ड्रग टेस्टिंग को ज्यादा प्रभावी और नियमित कैसे बनाया जाए, ताकि किसी भी तरह के नशे के प्रभाव में कोई क्रू सदस्य विमान संचालन का हिस्सा न बन सके। 

    यानी एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA अब सिर्फ इस मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की तैयारी में है. मकसद साफ है- पायलटों की फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे। 

     

  • एनएमडीसी ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 आयोजन के अधीन आरंभ किया त्रैमासिक अभियान

    हैदराबाद

     केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, एनएमडीसीलिमिटेड ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के पूर्वाभ्यास के रूप में त्रैमासिक अभियानआरंभ किया । इस अभियान का उद्देश्य पूरे संगठन में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, ईमानदारीऔर सुशासन के मूल्यों को बढ़ावा देना और जागरूकता को मजबूत करना है।एनएमडीसी के सतर्कता विभाग ने इस अभियान के भाग के रूप में एनएमडीसी मुख्यालय,हैदराबाद में दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम केंद्रीयसतर्कता आयोग द्वारा पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों में कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाने औरक्षमता निर्माण के लिए आयोजित किया गया ।

    इस सत्र में  अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), एनएमडीसी और  सी. नीलकंठ रेड्डी ,मुख्य सतर्कताअधिकारी, एनएमडीसी विशेष रूप से उपस्थित रहे। निदेशक (वित्त) ने अपनेसंबोधन में, सतर्कता और वित्त कार्यों में गहरे तालमेल पर बल दिया। उन्होंने पारदर्शिता,जवाबदेही और सही निर्णय लेने को सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक फाइलों पर स्पष्ट,विशिष्ट और तर्कसंगत स्पष्टीकरण व औचित्य दर्ज करने के महत्व पर भी बल दिया।

     सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने समापन सत्र के दौरान, प्रतिभागियों कोसंबोधित करते हुए सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के विषय — "समृद्धि के लिएईमानदारी&quot(Probity for Prosperity) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी संगठनात्मक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, नैतिकताऔर जवाबदेही के मूल मूल्यों को विकसित करने की आवश्यकता परबल दिया। 
    उन्होंने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के लिए एनएमडीसी की तैयारियों कोसशक्त और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपनी सक्रीय भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

    एनएमडीसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी  सी. नीलकंठ रेड्डी ने अभियान के महत्व औरपूरे संगठन में सतर्कता कार्यप्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों केप्रख्यातवक्ताओं और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया,जिन्होंने आईटी और साइबर सुरक्षा व साइबर स्वच्छता,जीएफआर-2017 के तहत जीईएम- न्यू फीचर्स एण्ड फंक्शनेलिटी तथा कंडक्ट रुल्स एण्ड कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरस्ट जैसेमहत्वपूर्ण विषयों पर अपना अगाध ज्ञान और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किया।

    पहले दिन के सत्र में मती के इंद्र्वेणी , वैज्ञानिक-एफ एवं संबद्ध निदेशक, सी-डैक नेसाइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता तथा  डी. ब्रह्मा रेड्डी ,दिल्ली विश्वविद्यालय केसंबद्ध प्रोफेसर तथा आईएसटीएम ,नई दिल्ली के पूर्व संकाय ने पब्लिक प्रक्यूरमेंट ऑफगूडस सर्विस अंडर जीएफआर-2017 पर सत्र आयोजित किए।दूसरे दिन  कार्तिकेय दत्ता ,उप मुख्य सामग्री प्रबंधक (सामान्य) आईआरएसएस नेप्रक्यूरमेंट फ्रेमवर्क ,बेस्ट पैक्टिस एण्ड रीसेंट डेवलपमेंट इन जीईम, तथा कर्नूल क्षेत्र केपोस्टमास्टर जनरल और बीडीएल ,मिधानि एवं एचएसएल के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारीडॉ. उपेंदर वेन्नम ने मॉडल सीडीए रुलस एण्ड कनफ्लिक्ट ऑफ इंटर्स्ट विषय पर सत्र संचालित किए।

    इन सत्रों ने प्रतिभागियों को अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन में सतर्कता जागरूकता,पारदर्शिता, अनुपालन और नैतिक निर्णय लेने को मजबूत करने पर मूल्यवान दृष्टिकोणप्रदान किए।

    यह अभियान सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 तथा सम्पूर्ण अभियान की अवधि के दौरानविभिन्न जागरूकता और क्षमता निर्माण पहलों के साथ जारी रहेगा।

    एनएमडीसी ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के तहत "समृद्धि के लिएईमानदारी"विषय पर त्रैमासिक अभियान के रूप में, क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संगठन में सतर्कता, पारदर्शिता, अनुपालन, नैतिक आचरण और सुशासन को मजबूत करने के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करेगा ।

  • मिसाइलों की कमी नहीं होने देंगे! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारतीय कंपनियों को मिलेगी DRDO टेक्नोलॉजी

    मिसाइलों की कमी नहीं होने देंगे! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारतीय कंपनियों को मिलेगी DRDO टेक्नोलॉजी

    नई दिल्ली

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उन्होंने DRDO यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक देसी इंडस्ट्री को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है. यह ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी प्रक्रिया देश में ही इन मिसाइलों के उत्पादन का रास्ता खोलेगी। 

    पहले ये तकनीकें मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों तक सीमित थीं. अब निजी कंपनियां भी इनका निर्माण कर सकेंगी. यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है. इस फैसले से भारतीय कंपनियां एडवांस मिसाइल सिस्टम का उत्पादन देश के अंदर ही कर पाएंगी. उत्पादन लागू योग्यताओं, प्रमाणपत्रों और नियामक आवश्यकताओं के अधीन होगा. यानी कंपनियों को जरूरी मानक पूरे करने होंगे। 

    डीआरडीओ अब मिसाइल विकास से औद्योगिक उत्पादन की ओर बढ़ेगा. वह घरेलू उद्योग की क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करेगा. इससे मिसाइल निर्माण की पूरी श्रृंखला देश के अंदर मजबूत होगी. छोटे और मझोले उद्यम यानी MSME तथा अन्य तकनीक साझेदार भी सप्लाई चेन में शामिल हो सकेंगे. उन्हें नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। 

    इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
    इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाना है. साथ ही भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करना और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है. अभी कई एडवांस हथियार प्रणालियों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है. अब जब तकनीक भारतीय कंपनियों को दी जाएगी तो देश अपनी जरूरत की मिसाइलें खुद बना सकेगा। 

    इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचेगी बल्कि आपात स्थिति में आपूर्ति भी सुनिश्चित रहेगी. रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से नवाचार और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. यह फैसला डीआरडीओ की उस नीति का हिस्सा है जिसमें वह विकसित तकनीकों को उद्योग तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है। 

    पारंपरिक मिसाइल सिस्टम में कई तरह की मिसाइलें शामिल हो सकती हैं जो पहले से विकसित हो चुकी हैं. इनके उत्पादन से भारतीय सशस्त्र बलों को तेजी से आधुनिक हथियार मिल सकेंगे. MSME को मिसाइल सप्लाई चेन में जगह मिलने से पूरे क्षेत्र में कौशल विकास होगा. कंपनियां नई तकनीक सीखेंगी और वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना सकेंगी। 

    देश की कंपनियों को करना होगा ये काम
    अब कंपनियों को जरूरी योग्यताएं और प्रमाणपत्र हासिल करने होंगे. उसके बाद ही उत्पादन शुरू हो सकेगा. यह प्रक्रिया रक्षा क्षेत्र को और अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी बनाएगी. लंबे समय में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि मिसाइल तकनीक का निर्यात भी कर सकेगा. राजनाथ सिंह का यह फैसला आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है. इससे देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी और रक्षा उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी. भारतीय कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है जिसे वे सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। 

  • ‘नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए’, नितिन गडकरी के बयान ने कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को दी हवा

    ‘नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए’, नितिन गडकरी के बयान ने कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को दी हवा

     नागपुर

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कह दिया है कि अब वे पहले जितना काम नहीं कर सकते और अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएं. नागपुर के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि हाल-फिलहाल में सार्वजनिक कार्यों में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम हो गई है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को मौका दिया जाए। 

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे हैं और अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दी जानी चाहिए। नागपुर के 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' के कार्यक्रम में गडकरी ने यह बात कही।

    गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में कयास लगने शुरू हो गई है। बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यही वजह है कि गडकरी के इस बयान को भावी राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    खास बात यह है कि नितिन गडकरी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. गडकरी ने बताया कि कैसे रोजमर्रा के कामों में अब उनकी भागीदारी कम हो गई है. उनका कहना है कि अब नई पीढ़ी को काम सौंप कर पुरानी पीढ़ी को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। 

    नितन गडकरी ने कहा, "मैं पिछले 30 सालों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं. इस दौरान मैंने कई उतार-चढ़ाव भी देखे, कई बार पुरस्कृत भी हुआ. लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता. मुझे लगता है कि अब नई पीढ़ी को काम करने का मौका देना चाहिए। 

    हालांकि, गडकरी ने इसके तुरंत बाद विकास कार्यों की बात करना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में विकास का दायरा और बढ़ेगा. उनका लक्ष्य है कि महाराष्ट्र का कोई आदिवासी गांव बिजली से वंचित न रहे और राज्य में विकास साफ दिखाई दे। 

    कोरोना के बाद सेहत सुधारने पर दिया ध्यान
    गडकरी ने अपने पुराने दिनों का एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया, 'जवानी के दिनों में मेरी जीवनशैली बहुत ही अनियंत्रित थी। पार्टी का काम करते समय शाम को समोसा खाकर सो जाता था। लेकिन कोविड के बाद मैंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया है।' युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ‘अब मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। आप सभी को भी रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करना चाहिए।’

    4 लोग एक स्कूटर पर बैठकर जाते थे, नंबर प्लेट पर हाथ रखते थे
    राजनीतिक सफर के शुरुआती यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा जीवन पहले बहुत अनियमित था। हम भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे।

    उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हो सके, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।' उन्होंने फिर मुस्कुराते हुए कहा, 'मेरे पास एक लूना थी, जो 'कू-कू' की आवाज करती थी। उस पर दो लोग बैठकर जाते थे। बाद में विजय स्कूटर आया, जिस पर हम चार-चार लोग बैठ जाते थे। पुलिस से बचने के लिए हम पीछे बैठे-बैठे नंबर प्लेट पर हाथ रख लेते थे।'

    आदिवासी इलाकों में कोई गांव अंधेरे में न रहे
    कार्यक्रम में गडकरी ने 'एकलव्य एकल विद्यालय' संस्था के सामाजिक कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा का दीप जलाना जरूरी है।

    गडकरी के मुताबिक, ‘एक दिन यह अभियान इतना बड़ा बनेगा कि राज्य का कोई भी आदिवासी गांव अंधेरे में नहीं रहेगा। हर घर में शिक्षा का उजाला पहुंचेगा।’

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में हलचल
    गडकरी के इस बयान को हाल ही में चल रही उन चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी कारण गडकरी का 'नई पीढ़ी को जिम्मेदारी' वाला बयान अहम माना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान बीजेपी में बड़े संगठनात्मक बदलाव के कुछ दिनों बाद आया है. पिछले हफ्ते ही पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम बनी है. खास बात तो ये है कि 65 सदस्यों वाली इस टीम में 51 नए चेहरे हैं. इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा था. 2015 में अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद इसे पार्टी के स्तर पर हुए सबसे बड़े बदलाव के रूप में दर्शाया जा रहा है.  और अब नितिन गडकरी का यह बयान आगे और बड़े बदलाव का इशारा कर रहा है। 

    बीजेपी संगठन में हुए इस बड़े बदलाव के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय कैबिनेट में भी फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। 

  • भारत में निवेश पर गोयल का भरोसा, जापानी निवेशकों से बोले- यहां आप जैक मा की तरह गायब नहीं होंगे

    भारत में निवेश पर गोयल का भरोसा, जापानी निवेशकों से बोले- यहां आप जैक मा की तरह गायब नहीं होंगे

    नई दिल्ली
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जापान में निवेशकों को भरोसा दिया है कि भारत में अगर वे पैसा कमाते हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी. उन्होंने चीन का नाम लिए बिना अलीबाबा कंपनी के फाउंडर जैक मा की ओर इशारा किया और कहा कि निवेशकों को इस बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है कि वे एक दिन गायब हो जाएंगे और बाद में किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर के तौर पर सामने आएंगे। 

    गोयल ने कहा, "भारत में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया जाता है. आपको इस बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है कि अगर आप भारत में पैसा कमाते हैं या एक सफल बिज़नेसमैन बनते हैं, तो आप एक दिन गायब हो सकते हैं और किसी जापानी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर बनकर सामने आ सकते हैं. भारत में ऐसा कोई जोखिम नहीं है। 

    हालांकि गोयल ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था। 

    क्या पीयूष गोयल ने जैक मा मामले का ज़िक्र किया?

    केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने अलीबाबा के संस्थापक जैक मा की ओर इशारा किया. 2020 में चीनी रेगुलेटर्स की आलोचना करने के बाद यह चर्चित और बेबाक बिज़नेसमैन कई महीनों तक लोगों की नज़रों से दूर रहे थे। 

    जब चीन ने मा के बिज़नेस साम्राज्य पर सख्ती शुरू की, तो उनके एंट (Ant) ग्रुप का ज़बरदस्त IPO रद्द कर दिया गया. यह दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी स्टॉक पेशकश होने वाली थी. एंटी-ट्रस्ट नियमों का उल्लंघन करने के लिए अलीबाबा ग्रुप पर 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया। 

    यह चीन द्वारा प्राइवेट सेक्टर पर की गई अभूतपूर्व रेगुलेटरी सख्ती की शुरुआत भर थी। तब से मा अपने बिज़नेस से दूर हो गए. वे बहुत कम लोगों के सामने आए और ज़्यादातर समय विदेश में, खासकर जापान में बिताया. ऐसी अटकलें भी थीं कि मा को शायद नज़रबंद कर दिया गया था या कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। 

    वे 2023 में सार्वजनिक रूप से सामने आए जब उन्होंने टोक्यो यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर अपना पहला लेक्चर दिया. वे हांगकांग यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्कूल से भी जुड़े हुए हैं। 

    जैक मा का उदाहरण देते हुए गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में अपना निवेश बढ़ाने के लिए मनाने की कोशिश की. खासकर सेमीकंडक्टर, AI, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में.  केंद्रीय मंत्री गोयल जो जापान की चार दिन की यात्रा पर हैं, 200 से ज़्यादा भारतीय बिजनेस लीडर्स के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 

    पीयूष गोयल की यह यात्रा महत्वपूर्ण है. जापान भारत में पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है. 2000 और 2026 के बीच भारत को जापान से 48.14 अरब डॉलर का FDI मिला. पिछले साल जापान ने अगले दशक में भारत में लगभग 60,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा था. हालांकि भारी व्यापार घाटा चिंता का विषय है। 

    भारत में आपका डेटा कभी चोरी नहीं होगा
    मंगलवार को गोयल ने भारत में जापानी कारोबारियों का भरोसा जीतने पर ज़ोर दिया. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत बाज़ार में उत्पाद लाने के लिए न तो टेक्नोलॉजी चुराता है और न ही इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की नकल करता है। 

    उन्होंने कहा, "आपका डेटा कभी चोरी नहीं होगा. आप भरोसा कर सकते हैं कि आपकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा. भारत में IPR का सम्मान किया जाता है. भारत में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया जाता है."

    यह बताते हुए कि भारत निवेश के लिए अपने दरवाज़े 24X7 खोलने को तैयार है, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ऐसा अपने हितों की कीमत पर या इंडस्ट्री की शर्तों पर नहीं किया जाएगा। 

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को सिर्फ़ चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही कंपनियों के लिए एक और विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि अपने आप में एक अहम डेस्टिनेशन के तौर पर देखा जाना चाहिए। 

    गोयल ने कहा, "भारत कोई 'प्लस वन' देश नहीं है। 

    बता दें कि इस समय ग्लोबल कंपनियां चीन से हटकर अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को अलग-अलग जगहों पर फैलाने की कोशिश कर रही हैं। 

  • धरती के ‘रिंग ऑफ फायर’ में लगातार भूकंप! 7 दिनों में 187 झटकों ने बढ़ाई चिंता

    धरती के ‘रिंग ऑफ फायर’ में लगातार भूकंप! 7 दिनों में 187 झटकों ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली

    प्रशांत महासागर के आसपास का इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप वाले क्षेत्रों में गिना जाता है. पिछले एक हफ्ते में जापान, इंडोनेशिया, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों समेत कई जगहों पर भूकंप दर्ज किए गए. इसी दौरान 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के कुल 187 भूकंप दर्ज हुए, जिनमें इंडोनेशिया के पास आया 7.7 तीव्रता का भूकंप सबसे बड़ा रहा। 

    इन भूकंपों के बीच 'रिंग ऑफ फायर' एक बार फिर चर्चा में है. हालांकि, 187 भूकंपों का आंकड़ा सिर्फ रिंग ऑफ फायर का नहीं है. यह पूरी दुनिया में एक हफ्ते के दौरान आए 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों का आंकड़ा है. इसलिए इस संख्या को किसी बड़े भूकंप की सीधी चेतावनी मानना सही नहीं होगा। 

    क्या है रिंग ऑफ फायर?
    रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों तरफ फैला एक बड़ा इलाका है. इसकी लंबाई करीब 40 हजार किलोमीटर है. इस इलाके में धरती की कई बड़ी प्लेटें एक-दूसरे के पास आती हैं और लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। 

    इसी प्लेटों की हलचल के कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखी ज्यादा आते हैं. जापान, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्से इसी इलाके से जुड़े हैं. दुनिया के करीब 90 फीसदी भूकंप इसी इलाके के आसपास आते हैं। 

    एक हफ्ते में आए कई बड़े भूकंप
    पिछले एक हफ्ते में सबसे बड़ा भूकंप इंडोनेशिया के पास आया. इसकी तीव्रता 7.7 रही. इसके बाद उत्तरी इंडोनेशिया में 6.9 और दक्षिणी पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसके अलावा जापान, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में भी 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के कई भूकंप आए. बड़े भूकंप के बाद छोटे झटके आना आम बात है. इन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है। 

    क्या 187 भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत हैं?
    सिर्फ भूकंपों की संख्या देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि जल्द कोई बड़ा भूकंप आने वाला है. वैज्ञानिक अभी किसी भूकंप की सही तारीख, जगह और तीव्रता पहले से नहीं बता सकते. कैलिफोर्निया और तुर्की जैसे इलाकों में भूकंप का खतरा जरूर बना रहता है, क्योंकि ये भी एक्टिव भूकंपीय क्षेत्रों में आते हैं। 

    187 भूकंपों के आंकड़े को इन जगहों पर आने वाले किसी बड़े भूकंप से जोड़ने का कोई पक्का वैज्ञानिक आधार नहीं है. दुनिया में हर दिन छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं. इसलिए सात दिनों में 187 भूकंपों का आंकड़ा ध्यान खींचता जरूर है, लेकिन सिर्फ इस आंकड़े से किसी बड़ी आपदा की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। 

     

  • तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को झटका, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

    तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को झटका, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

    नई दिल्ली

    तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है. तेजपाल ने कोर्ट में सरेंडर से छूट देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया. अब उन्हें 22 सितंबर तक सरेंडर कर उसका सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा करना होगा. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी। 

    तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरेंडर से छूट देने वाली इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन को 31 अगस्त को सूचीबद्ध करने की मांग की थी. उनकी दलील थी कि जब तक इस आवेदन पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक तेजपाल को सरेंडर करने से राहत दी जाए। 

    दो हफ्ते में तरुण तेजपाल को करना होगा सरेंडर
    गोवा सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नियमों और पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दोषी को पहले सरेंडर करना होगा. अगर उसने सरेंडर नहीं किया है तो उसकी अपील को तब तक सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक उसके साथ सरेंडर से छूट की अर्जी न हो. कोर्ट ने मेहता की दलीलों को स्वीकार करते हुए तेजपाल को दो हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। 

    तरुण तेजपाल का क्या है पूरा मामला?
    2013 के रेप केस में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था. इसके खिलाफ गोवा सरकार ने अपील की. 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 

    इसके बाद तेजपाल ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सरेंडर से छूट की मांग की. वहीं, गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है. हालांकि, सरकार ने उनकी दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी है। 

    अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद तेजपाल को तय समय में आत्मसमर्पण करना होगा. 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा किए जाने के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ होगा। 

  • नया स्ट्रेन नहीं फिर भी Swine Flu के केस बढ़े, इम्यूनिटी और बदलते मौसम का कितना असर?

    नया स्ट्रेन नहीं फिर भी Swine Flu के केस बढ़े, इम्यूनिटी और बदलते मौसम का कितना असर?

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (HINI) के केस बढ़ने लगे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं. दिल्ली में 1700 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि क्या इस बार स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन आ गया है? लेकिन इस मामले में ICMR ने स्पष्ट कहा है कि भारत में H1N1 (स्वाइन फ्लू) का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है। 

    पुराना स्ट्रेन ही लोगों को संक्रमित कर रहा है. अब सवाल उठता है कि जब कोई नया स्ट्रेन नहीं है तो भी फिर केस क्यों बढ़ रहे हैं.कब तक ये केस कम होने की उम्मीद है? स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने का एक बड़ा कारण मौसम में बदलाव तो है ही,लेकिन दूसरी वजह शरीर की इम्यूनिटी भी है. इसको समझने के लिए आपको साल 2009 में जाना होगा। 

    मई 2009 में स्वाइन फ्लू का देश में पहला मामला सामने आया था. इसके बाद सर्दियों के मौसम (दिसंबर 2009 से मार्च 2010) में फिर केस बढ़ने लगे. तब देश में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे. उसके बाद धीरे- धीरे केस कम होने लगे थे.  फिर 2014 और 2015 के बीच  देश में स्वाइन फ्लू का आउटब्रेक हुआ और हजारों लोग संक्रमित हुए थे. फिर 2019 में बहुत केस बढ़े,उसके बाद अब साल 2026 में अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। 

    हर कुछ सालों में क्यों बढ़ जाते हैं केस, इम्यूनिटी का क्या है रोल
    सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर ने इस बारे में बताया है. डॉ किशोर कहते हैं कि भारत में हर कुछ सालों के बाद स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते है. यह पैटर्न बताता है कि H1N1 वायरस कभी खत्म नहीं हुआ था.यह लोगों के बीच मौजूद रहा और समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे. डॉ किशोर बताते हैं कि जब भी किसी वायरस से लोग बड़ी संख्या में संक्रमित हो जाते हैं तो उसके खिलाफ  इम्यूनिटी बन जाती है. यह सालों तक रहती है. इस वजह से फिर केस बढ़ते नहीं हैं. थोड़े बहुत मामले आते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में केस नहीं रिपोर्ट होते हैं. लेकिन फिर जब कुल सालों में धीरे- धीरे शरीर में  इम्यूनिटी कम होने लगती है तो केस फिर से बढ़ने लगते हैं. ऐसा हर कुछ सालों में होता ही रहता है. यही कारण है कि इस बार फिर से स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। 

    इसको ऐसे समझें, मान लीजिए किसी इलाके में पहले बहुत से लोगों को स्वाइन फ्लू हो चुका था, उनके शरीर में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बन गई. ऐसे में अगले कुछ साल तक संक्रमण कम रहा और केस नहीं बढ़े, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में उस वायरस से लड़ने की ताकत कम होती रही, जिससेफिर से केस बढ़ने लगे.डॉ. किशोर कहते हैं कि कोई भी वायरस हमेशा के लिए खत्म नहीं होता है. जब इम्यूनिटी कम होती तो वायरस लोगों को संक्रमित करना शुरू कर देता,जिससे केस बढ़ने लगते हैं। 
     
    मौसम भी करता है खेल
    बारिश और मौसम में बदलाव के समय फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं. कभी गर्मी, कभी बारिश और फिर उमस. ऐसे मौसम में वायरस को फैलने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा लोग ऑफिस, स्कूल, मेट्रो और दूसरे बंद स्थानों पर एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं. अगर किसी को फ्लू है, तो खांसने या छींकने के दौरान निकले छोटे कणों से संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। 

    केस कब तक कम होने की उम्मीद
    डॉ किशोर कहते हैं कि जब तक पूरे समुदाय में पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं होती, तब तक मामले आते रहेंगे. इसका मतलब यह है कि जब अधिकतर आबादी संक्रमित हो जाएगी और लोगों में स्वाइन फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बन जाएगी तो केस अपने आप कम होने लगेंगे. वायरस के मामलों के कम होने का यही पैटर्न भी है, हालांकि इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है. अधिकतर लोगों में हल्के ही लक्षण ही हैं और होंगे भी. स्वाइन फ्लू किसी महामारी का रूप नहीं लेगा. लोगों को यह भी सलाह है कि डॉक्टर से सलाह लेकर फ्लू से बचाव की वैक्सीन भी लगवा लें।  

  • इंफाल पूर्व में पुलिस और सेना का संयुक्त एक्शन, भारी हथियारों समेत 3 उग्रवादी दबोचे

    इंफाल पूर्व में पुलिस और सेना का संयुक्त एक्शन, भारी हथियारों समेत 3 उग्रवादी दबोचे

    तेजपुर 
     मणिपुर के इंफाल ईस्ट जिले में दो अलग-अलग सर्च ऑपरेशन के दौरान सोमवार को सुरक्षा बलों ने हथियारों, गोला-बारूद और सुरक्षा उपकरण का जखीरा बरामद किया. RPF/PLA के एक सक्रिय कैडर को भी गिरफ्तार किया गया है। 

    पुलिस के मुताबिक, पहले ऑपरेशन में, भरोसेमंद खुफिया जानकारी के आधार पर, इंफाल ईस्ट के चीफ ऑफ डिफेंस ऑपरेशंस (CDO) और 28 असम राइफल्स की संयुक्त टीम ने सागोलमांग पुलिस स्टेशन के तहत सिनम कोम गांव की तलहटी में सर्च ऑपरेशन किया. ऑपरेशन में एक 7.62 mm एसएलआर राइफल मैगजीन के साथ, एक 5.56 mm INSAS राइफल दो मैगजीन के साथ और एक 9 mm पिस्टल मैगजीन के साथ बरामद हुई। 

    पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा कर्मियों ने एक पोम्पी गन, एक देसी लीथल गन, दो सिंगल-बैरल गन, तीन हैंड ग्रेनेड और एक MG2 मोर्टार शेल भी बरामद किया. इसके अलावा, 45 राउंड अलग-अलग तरह के जिंदा कारतूस, चार BP प्लेट, आठ BP जैकेट और दो हेलमेट मिले। 

    पुलिस ने बताया कि सोमवार को कियामगेई अवांग लीकाई में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के एक सक्रिय कैडर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार उग्रवादी की पहचान एन संजू मेइती के रूप में हुई है। उसके कब्जे से एक एके राइफल, एक एसएमजी कार्बाइन, 9 मैगजीन और 737 कारतूस बरामद किए गए। 

    बयान में कहा गया है कि एक अलग अभियान में प्रतिबंधित संगठन एसओआरईपीए के दो सक्रिय कैडरों को 28 असम राइफल्स से मिली विश्वसनीय और पुष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर खुराई थांगजाम लीकाई से गिरफ्तार किया गया। दोनों की पहचान 37 वर्षीय एल रॉकी सिंह और 36 वर्षीय पी कुमारजीत सिंह के रूप में हुई है। 

    पुलिस ने बताया कि दोनों कथित तौर पर जबरन वसूली की रकम लेने के लिए इलाके में आए थे। उनके पास से एक हस्तलिखित वसूली पर्ची बरामद की गई जिस पर एक मोबाइल फोन नंबर और एसओआरईपीए नाम लिखा था।

    एक अलग ऑपरेशन में, CDO-काकचिंग ने इंफाल ईस्ट जिले के इरिलबुंग थाना अंतर्गत कियामगेई अवांग लेइकाई में सर्च ऑपरेशन चलाया. इस दौरान, सुरक्षाकर्मियों ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF/PLA) के एक सक्रिय कैडर को कियामगेई अवांग लेइकाई में उसके घर से गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान नामीराकपम संजू मैतेई उर्फ ​​नगनबा (35) के रूप में हुई. उसके पास से एक AK राइफल, एक SMG कार्बाइन और अलग-अलग हथियारों की नौ मैगजीन बरामद हुईं. सुरक्षा टीम ने अलग-अलग कैलिबर के 737 राउंड कारतूस, तीन BP प्लेट और तीन BP जैकेट भी बरामद किए। 

    पुलिस ने बताया कि बरामद हथियारों और गिरफ्तार व्यक्ति की गतिविधियों की आगे की जांच चल रही है। 

  • मराठी भाषा परीक्षा बनी हड़ताल की वजह? मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों ने शुरू किया तीन दिवसीय आंदोलन

    मराठी भाषा परीक्षा बनी हड़ताल की वजह? मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों ने शुरू किया तीन दिवसीय आंदोलन

    मुंबई
     गैर-मराठी ऑटोरिक्शा चालकों के एक वर्ग की हड़ताल के कारण सोमवार को सुबह की व्यस्तता के दौरान मुंबई भर में हजारों यात्रियों को यात्रा में व्यवधान का सामना करना पड़ा।

    इसका असर पश्चिमी उपनगरों में सबसे अधिक दिखाई दिया, जहां कार्यालय जाने वालों, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे स्टेशनों और कार्यस्थलों तक परिवहन खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

    'मराठी भाषा सीखना जरूरी'
    काली पीली टैक्सियों और एग्रीगेटर कैब के ड्राइवरों का एक वर्ग भी सड़कों से गायब रहा। यह आंदोलन ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए राज्य की मराठी भाषा की आवश्यकता को लेकर अशांति से उपजा है, जिसमें 20 अगस्त से ऑन-रोड परीक्षण शुरू किए गए हैं और परीक्षण पास नहीं करने वालों को अनुपालन के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

    तीन दिनों तक जारी रह सकती है हड़ताल
    उपनगरों में ड्राइवरों के एक समूह ने चेतावनी दी कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो हड़ताल तीन दिनों तक जारी रह सकती है। कांदिवली में ड्राइवरों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने कहा कि यातायात की आवाजाही जारी रही और 7-8 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

    जबकि परिवहन अधिकारियों ने कहा कि प्रवर्तन कानून के अनुरूप था और महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों के अनुसार मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य था। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महायुति सरकार ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए अधिक समय देने को तैयार है।

    उन्होंने कहा कि किसी के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, ''उन्हें मराठी में विशेषज्ञ बनने के लिए नहीं कहा जा रहा है। उनसे यह उम्मीद करना गलत नहीं है कि उन्हें भाषा का कामकाजी ज्ञान होगा और वे भाषा में बोलने में सक्षम होंगे।''

    चालकों का आरोप, सवाल ट्रेनिंग से बाहर
    इस पूरे मामले पर टैक्सी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने में कोई परेशानी नहीं है. उनका विरोध जांच के तरीके को लेकर है. उनका आरोप है कि आरटीओ अधिकारी ऐसे सवाल पूछ रहे हैं, जो उन्हें दी गई ट्रेनिंग में शामिल नहीं थे। 

    कांदिवली के टैक्सी ड्राइवर किसुन यादव ने कहा कि कई चालक कम पढ़े-लिखे हैं. कुछ चालक तो बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं हैं. ऐसे लोगों के लिए कम समय में नई भाषा सीखना मुश्किल है। 

    चालकों का यह भी कहना है कि मराठी की कक्षाओं में जाने से उनकी कमाई का नुकसान होता है. कई चालक रोज की कमाई पर निर्भर हैं. ऐसे में काम छोड़कर क्लास करना उनके लिए आसान नहीं है। 

    वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि यह नियम अचानक नहीं बनाया गया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि व्यावहारिक मराठी का ज्ञान रखने की शर्त महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है. हालांकि इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था. अब 2026 में नियमों में बदलाव के बाद इसे लागू किया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार हिंदी बोलने वाले लोगों को मराठी का स्पेशलिस्ट नहीं बनाना चाहती. चालकों को सिर्फ काम चलाने लायक मराठी आनी चाहिए. करीब 1.65 लाख चालकों को मराठी की ट्रेनिंग दी जा चुकी है. उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए गए हैं। 

    पहले दौर में 1200 से ज्यादा नोटिस
    परिवहन विभाग के मुताबिक, पहले दिन राज्यभर में 8,217 चालकों की जांच हुई. इनमें 1,268 चालकों को नोटिस दिया गया. मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,995 चालकों की जांच हुई. इनमें 604 चालक मराठी का जरूरी ज्ञान नहीं दिखा सके. पूरे महाराष्ट्र में करीब 9.65 लाख ऑटो और टैक्सी चालक लाइसेंसधारी हैं. ऐसे में चालकों के बीच इस नियम को लेकर चिंता बनी हुई है। 

    कांदिवली में सोमवार को ऑटो और टैक्सी चालकों ने सड़क जाम भी किया था, चालकों ने भाषा नियम लागू करने के दौरान परेशान करने और धमकाने का भी आरोप लगाया। 

    मुंबई में पहले से बारिश के कारण यातायात प्रभावित है. अब ऑटो और टैक्सी की कमी से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है. चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है. उनकी मांग है कि लैंग्वेज टेस्ट व्यावहारिक हो और उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए। 

    'ऐसे नियम का क्या फायदा जो शहर से दूर कर दें'
    वडाला के एक कैब ड्राइवर ने कहा, "वे मराठी न जानने के लिए कड़ी सजा लागू नहीं कर सकते। 60-70% ड्राइवरों को देखें वे स्थानीय नहीं हैं लेकिन मुंबई क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन सेवा देने के इच्छुक हैं। आपके पास ऐसे नियम कैसे हो सकते हैं जो उन्हें शहर से दूर कर देंगे?"

    अंधेरी, जोगेश्वरी, गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली और जुहू जैसे क्षेत्रों में ऑटो की भारी कमी की सूचना है, जबकि पूर्वी उपनगरों में कुर्ला, घाटकोपर, भांडुप और मुलुंड भी प्रभावित हुए हैं। पश्चिमी उपनगरों में कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारी ड्राइवरों के समूहों ने सड़कों पर ऑटो रोक दिए और कथित तौर पर यात्रियों को उतरने के लिए मजबूर किया, जिससे फीडर सेवाएं बाधित हो गईं।

    नेताओं ने क्या कहा?
    शिवसेना के पूर्व सांसद संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि उन्हें आरटीओ अधिकारियों द्वारा 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने की शिकायतें मिली हैं, जबकि उन्हें केवल एक महीने का नोटिस देना चाहिए। इसके अलावा, ड्राइवरों ने शिकायत की कि सड़क परीक्षण के दौरान पूछे गए प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर थे, जो उन्होंने पिछले 3 महीनों में आरटीओ और स्कूलों में मराठी पाठों के दौरान सीखा था।

    प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यदि कोई आरटीओ अधिकारी एक महीने का नोटिस समाप्त होने से पहले गलत तरीके से ड्राइवरों पर जुर्माना लगाता पाया गया तो अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। BEST पहले से ही बस बेड़े की कमी और कई मार्गों पर कम आवृत्तियों का सामना कर रहा है।