Category: देश

  • बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत-चीन की बड़ी तैयारी, नया निवेश फ्रेमवर्क बनाने पर विचार

    बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत-चीन की बड़ी तैयारी, नया निवेश फ्रेमवर्क बनाने पर विचार

    नई दिल्‍ली
    अमेरिका और भारत के बीच व्‍यापार को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन फिर भी ट्रंप बार-बार रूसी तेल खरीदने या फिर किसी वजहों से टैरिफ की धमकी देते रहते हैं. इस बीच, भारत अब चीन के साथ मिलकर बड़ा खेल करने जा रहा है, जो आगे चलकर ग्‍लोबल चेन सप्‍लाई को बदल सकता है। 

    दरअसल, ब्रिक्‍स समिट के दौरान चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की खबर है और इस दौरान एक बड़े निवेश फ्रेमवर्क की भी तैयारी चल रही है. चीन भारत के लिए एक बड़ा निवेश पैकेज का ऐलान कर सकता है, जो भारत के लिए बूस्‍टर साबित हो सकता है. दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच व्‍यापार के लिए रिश्‍तों में सुधार होगा. ऐसे में भारत और चीन मिलकर ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। 

    मोदी-जिनपिंग की होगी मुलाकात 
    इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन व्यापारिक आदान-प्रदान को सुगम बनाने और चीनी निवेश को गति देने के लिए एक नए निवेश ढांचे पर विचार कर रहे हैं. दोनों पड़ोसी मुल्‍क का लक्ष्‍य राजनयिक संबंधों में व्यापक सुधार के बीच ट्रेड रिलेशन को फिर से जिंदा करना है. इस निवेश ढाचे का ऐलान चीन 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कर सकता है. रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। 

    इसी बैठक के दौरान शी जिनपिंग भारत के लिए एक निवेश पैकेज की घोषणा कर सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मुलाकात की नींव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की हाल ही में बीजिंग यात्रा के दौरान रखी गई है और इस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच व्‍यापार रिश्‍ते काफी सुधर सकते हैं। 

    निवेश ढाचे के तहत क्‍या-क्‍या होगा? 
    अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ढाचे के तहत समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच वाला एक खास आर्थिक क्षेत्र होगा. BYD समेत चीनी इलेक्ट्रिक व्‍हीकल कंपनियों को भारतीय बाजार में ज्‍यादा पहुंच पेश करने की भी संभावना है. एक अन्य प्रस्ताव में चीनी फंडिंग से भारत में एक एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर स्थापित करना शामिल है, जिससे तीसरे देशों को निर्यात में सुविधा हो सकती है। 

    चीन 2019 के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा का लाभ उठाकर प्रस्तावित एक्‍सपोर्ट प्रोसेसिंग सेक्‍टर संभावित निवेशों की घोषणा करने के लिए उत्सुक है। 

    अभी बहुत बड़ा पैकेज नहीं होगा 
    रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल निवेश पैकेज बड़ा नहीं हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष छह साल के गतिरोध के बाद धीरे-धीरे संबंधों को सुधारने और मतभेदों को दूर करने पर फोकस कर रहे हैं. भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश के लिए अपूव प्रॉसेस को और आसान बनाने पर भी विचार कर रहा है, हालांकि वास्तविक नियंत्रण रेखा, रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। 

    भारत IT और महत्वपूर्ण कच्चे माल की सुगम उपलब्धता के लिए चीन से आश्वासन मांग रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इन आपूर्ति मार्गों को ज्‍यादा विश्वसनीय बनाने और भारतीय उद्योग के लिए पहुंच को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं. भारत, चीन से अधिक निवेश और टेक वस्तुओं समेत भारत से आयात बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है, ताकि दोनों देशों के बड़े व्यापार घाटे को कम किया जा सके। 

  • हर घर और हर जेब पर असर! 1 सितंबर से बदलेंगे बैंकिंग, गैस, टैक्स और UPI के 5 बड़े नियम

    हर घर और हर जेब पर असर! 1 सितंबर से बदलेंगे बैंकिंग, गैस, टैक्स और UPI के 5 बड़े नियम

    नई दिल्ली

    अगस्त का महीना अब खत्म होने वाला है और सितंबर की शुरुआत के साथ कई अहम बदलाव लागू होने वाले हैं. इन बदलावों का असर आम लोगों की जिंदगी से लेकर खर्च और बचत तक पर पड़ सकता है. बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, क्रेडिट कार्ड, ट्रैवल या दूसरे जरूरी नियमों में होने वाले बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं. कई बदलावों की वजह से आपको पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि कुछ बदलावों से राहत भी मिल सकती है.

    ऐसे में सितंबर शुरू होने से पहले इन सभी बदलावों की जानकारी रखना आपके लिए जरूरी है. अगर किसी नियम के तहत कोई जरूरी काम पूरा करना है, तो उसकी डेडलाइन का इंतजार न करें. समय पर जरूरी प्रोसेस पूरा करने से एक्स्ट्रा चार्ज से बचा जा सकता है. इसलिए सितंबर में लागू होने वाले हर बड़े बदलाव पर नजर रखें। 

    आपकी यात्रा से जुड़ा बदलाव
    1 सितंबर से भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर स्टैम्प नहीं लगवाना पड़ेगा. अब यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे. अधिकारियों की ओर से बोर्डिंग पास पर कोई स्टैम्प नहीं लगाया जाएगा. ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने यह बदलाव प्रोसेस को आसान और तेज बनाने के लिए किया है. इससे यात्रियों का एक अतिरिक्त काम कम होगा और स्टैम्प के साफ न दिखने जैसी परेशानी भी नहीं होगी. यह नियम भारत से बाहर जाने वाले इंटरनेशनल यात्रियों पर लागू होगा। 

    इनकम टैक्स से जुड़ा नियम
    अगर आपकी कमाई बिजनेस या किसी प्रोफेशन से होती है, तो ITR भरते समय सही फॉर्म चुनना जरूरी है. एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जिन लोगों के खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उन्हें 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न फाइल करना है. ITR-4 यानी सुगम फॉर्म उन लोगों के लिए है, जो अनुमानित टैक्स योजना के तहत रिटर्न भरते हैं और कारोबार से आय 50 लाख रुपये तक है. वहीं, ITR-3 उन लोगों के लिए है जो ITR-4 के दायरे में नहीं आते, जैसे 50 लाख रुपये से ज्यादा आय, पूरे खाते रखने वाले या F&O ट्रेडिंग करने वाले लोग। 

    एफडी से जुड़े नियम
    बैंक एफडी से जुड़े कुछ नियम बदलने जा रहे हैं. नए नियमों के तहत 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की बड़ी जमा राशि पर बैंक को ब्याज दर अपनी वेबसाइट पर हर कारोबारी दिन सुबह 10:10 बजे तक बतानी होगी. एक ही दिन जमा की गई समान रकम पर बैंक की अलग-अलग ब्रांच अलग ब्याज नहीं दे सकेंगी. हालांकि, बड़ी जमा रकम के लिए बैंक अलग-अलग ब्याज दर तय कर सकते हैं. आम लोगों की छोटी एफडी पर इन बदलावों का असर ज्यादा नहीं होगा. नए नियमों का मकसद ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाना और बैंकिंग व्यवस्था को ज्यादा स्पष्ट बनाना है. हालांकि, ये बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 

    एलपीजी गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए बदलाव
    खाना पकाने वाली गैस वाले घरों को राहत मिली है. जो लोग 23 अगस्त तक एलपीजी कनेक्शन का ई-केवाईसी नहीं कर पाए थे, उनके लिए आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है. यानी 1 सितंबर से आप ईकेवाईसी नहीं कर पाएंगे. यह ई-केवाईसी या आधार बायोमेट्रिक कंफर्मेशन जरूरी है, नहीं तो घरेलू रेट पर सिलेंडर नहीं मिलेगा. इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल कंपनियां लोगों से जल्दी पूरा करने की जानकारी दे चुकी है. बाकी बचे लोगों को मैसेज भी आएगा जिसमें नई तारीख बताई जाएगी. समय रहते काम निपटा लें ताकि गैस सप्लाई न रुके। 

    ये बदलाव भी होंगे लागू
    इसके अलावा सितंबर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव हो सकता है. वहीं, बैंक एफडी की ब्याज दरों में बदलाव की संभावना है, जिसका असर आपकी बचत और रिटर्न पर पड़ सकता है. साथ ही, एटीएफ की कीमतों में भी बदलाव हो सकता है. इसके अलावा एटीएम चार्ज में भी बदलाव की उम्मीद है. इन सभी बदलावों का असर अलग-अलग तरह से आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है, इसलिए सितंबर की शुरुआत में इनकी नई दरों और नियमों पर नजर रखना जरूरी होगा। 

  • Gen-Z की सबसे बड़ी चिंता नौकरी, 53 फीसदी युवाओं ने रोजगार को बताया अहम मुद्दा

    Gen-Z की सबसे बड़ी चिंता नौकरी, 53 फीसदी युवाओं ने रोजगार को बताया अहम मुद्दा

    नई दिल्ली
    इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में देश की बदलती राजनीतिक और सामाजिक बयार का बड़ा आकलन सामने आया है. हालिया 'Gen-Z' प्रोटेस्ट के बाद किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक सर्वे है, जिसमें युवाओं और आम जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की गई है. इस सर्वे में देश के मूड को लेकर कई अहम सवाल पूछे गए हैं। 

    सर्वे का फोकस मौजूदा हालात से लेकर आने वाले चुनाव तक के सवालों पर है. इसमें NEET संकट से 2029 के बैलेट तक देश के लोगों की राय जानने की कोशिश की गई है. लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या एक इस्तीफे के बाद जेन-जी संतुष्ट है या यह विरोध सिर्फ शुरुआत है। 

    नौकरी या शिक्षा, बड़ा मुद्दा क्या?
    सर्वे में जब देश के GenZ से पूछा गया कि अभी उनके लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में उन्होंने नौकरी को चुना. 53 प्रतिशत युवाओं ने साफ कहा कि रोजगार ही उनकी सबसे बड़ी चिंता है. इसके बाद 22 प्रतिशत ने शिक्षा को अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. रहन-सहन का खर्च यानी महंगाई 12 प्रतिशत युवाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा निकला, जबकि मानसिक स्वास्थ्य को सिर्फ 4 प्रतिशत ने प्राथमिकता दी। 

    ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि बेरोजगारी की समस्या युवाओं के मन में बाकी सब मुद्दों से ऊपर है। 

    युवाओं को उपलब्ध मौके पर क्या राय है?
    सर्वे में युवाओं से यह भी पूछा गया कि देश में उन्हें उपलब्ध मौकों को लेकर उनकी क्या राय है. जवाब में 32 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि कठिन मेहनत और प्रतिभा आज भी मायने रखती है. 26 प्रतिशत का मानना था कि असल में पैसा और संपर्क ही काम आते हैं. 22 प्रतिशत युवाओं ने यह राय रखी कि देश में बहुत कम मौके उपलब्ध हैं, जबकि 14 प्रतिशत का कहना था कि मौके तो हैं लेकिन वे चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। 

    रोजगार योग्य बनाने की जिम्मेदारी किसकी?
    जब युवाओं से पूछा गया कि उन्हें रोजगार योग्य बनाने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा किसकी है, तो भारी बहुमत ने केंद्र और राज्य सरकारों का नाम लिया. 63 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि रोजगार योग्य बनाने की मुख्य जिम्मेदारी केंद्र-राज्य सरकारों की है। 

    इसके बाद 14 प्रतिशत ने स्कूल-कॉलेज को जिम्मेदार ठहराया, 9 प्रतिशत ने निजी नियोक्ताओं को और सिर्फ 5 प्रतिशत ने आम लोगों व परिवार को इस जिम्मेदारी का हिस्सा माना. ये आंकड़े बताते हैं कि युवा रोजगार के मामले में सबसे ज्यादा सरकार पर निर्भर हैं। 

    अभी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
    सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि अभी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता क्या होनी चाहिए. सबसे ज्यादा 23 प्रतिशत लोगों ने शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार को प्राथमिकता दी. 21 प्रतिशत ने बुनियादी ढांचा और पूंजीगत खर्च बढ़ाने की बात कही. 18 प्रतिशत का मत था कि सभी क्षेत्रों को बराबर प्राथमिकता दी जाए, जबकि 16 प्रतिशत ने सीधे परिवारों को मदद पहुंचाने की वकालत की. टैक्स घटाने की मांग 8 प्रतिशत लोगों ने की और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने को सिर्फ 4 प्रतिशत ने सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। 

    इससे साफ है कि शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी जनता की नजर में सबसे ऊपर हैं। 

    CJP को चुनाव भी लड़ना चाहिए?
    एमओटीएन सर्वे में छात्रों के नए संगठन सीजेपी को लेकर भी दिलचस्प नतीजे आए. जब पूछा गया कि सीजेपी दबाव समूह बने रहना चाहता है तो आप क्या कहेंगे, तो 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह केवल दबाव समूह ही बने रहें. वहीं 26 प्रतिशत का मत था कि सीजेपी को चुनाव भी लड़ना चाहिए। 

    सीजेपी चुनाव लड़े तो क्या आप उसे वोट देंगे?
    आगे जब यह सवाल पूछा गया कि अगर सीजेपी चुनाव लड़े तो क्या आप उसे वोट देंगे, तो 33 प्रतिशत लोगों ने हां कहा. वहीं 43 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक जवाब दिया. ये आंकड़े दिखाते हैं कि सीजेपी को लेकर जनता में दिलचस्पी तो है, लेकिन अभी वह व्यापक चुनावी समर्थन जुटाने की स्थिति में नहीं दिख रही। 

    बता दें कि मूड ऑफ द नेशन सर्वे के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद देश की सोच और प्राथमिकताओं में कितना बदलाव आया है. क्या युवाओं का असंतोष किसी बड़े बदलाव का संकेत है या हालात सामान्य हो रहे हैं?

    सर्वे में लोगों से सीधे सवाल पूछकर यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर क्या भारत का मूड बदल रहा है? आने वाले समय में जनता की सोच किस दिशा में जाती है और इसका असर 2029 के चुनावी मैदान पर कितना दिखाई देता है, यह भी इस सर्वे के अहम सवालों में शामिल है। 

  • ओलंपिक में भारत की सीमित भागीदारी पर पीएम मोदी चिंतित, बोले- आधे खेलों से बाहर रहकर कैसे बढ़ेंगे पदक?

    ओलंपिक में भारत की सीमित भागीदारी पर पीएम मोदी चिंतित, बोले- आधे खेलों से बाहर रहकर कैसे बढ़ेंगे पदक?

     नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के ओलंपिक अभियान को लेकर गुरुवार को बड़ा सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर देश को ओलंपिक में अपना पदक प्रदर्शन बेहतर करना है, तो उन खेलों में भी उतरना होगा, जिनमें भारत अब तक भाग नहीं लेता रहा है. उन्होंने कहा कि ओलंपिक के आधे खेलों में भारत की मौजूदगी ही नहीं है और ऐसे में पदक तालिका का बड़ा हिस्सा अपने आप ही हमारे लिए बाहर हो जाता है। 

    ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में देशभर के खिलाड़ियों, छात्रों और स्वयंसेवकों को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं किया जा सकता. खेलों के जरिए देश की युवा शक्ति और खेल शक्ति को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ना उनकी सोच का हिस्सा है. इस कार्यक्रम में खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी शामिल हुए। 

    ‘ओलंपिक में आधे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेते’
    पीएम मोदी ने कहा, 'ओलंपिक में इतने सारे अलग-अलग खेल होते हैं… भारतीय टीमें उनमें से आधे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेतीं. इसका मतलब है कि हम पदकों की बड़ी संख्या के लिए मुकाबला ही नहीं कर रहे हैं। 

    उन्होंने इसे देश के लिए एक कड़वी सच्चाई बताते हुए कहा कि यह स्थिति दशकों से चली आ रही है. मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत ने सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था. यानी 20 से ज्यादा खेलों में भारत की मौजूदगी नहीं थी। 

    उन्होंने कहा कि दूसरे देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं, जबकि भारत वहां प्रतियोगिता में ही शामिल नहीं हो रहा. ऐसे में पदक तालिका में सुधार के लिए इन खेलों में भी अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। 

    2024 पेरिस में 32 में से 16 खेलों में भारत
    पीएम मोदी की बात का आंकड़ों से भी सीधा संबंध है. 2024 पेरिस ओलंपिक में कुल 32 खेल शामिल थे, लेकिन भारत ने इनमें से सिर्फ 16 खेलों में हिस्सा लिया था. यानी आधे खेलों में भारतीय खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरे। 

    मोदी ने इसी अंतर को भारत के लिए नए अवसर के तौर पर देखने की बात कही. उनका मानना है कि सिर्फ उन खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने से काम नहीं चलेगा, जिनमें भारत पहले से मजबूत है. पदक जीतने का दायरा बढ़ाने के लिए नए खेलों में भी खिलाड़ियों को तैयार करना होगा। 

    सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग पर खास जोर
    प्रधानमंत्री ने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में इन खेलों के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां मौजूद हैं, लेकिन अभी तक कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में इन स्पर्धाओं में नहीं उतरा है। 

    उन्होंने कहा कि भारत की विशाल समुद्री तटरेखा सर्फिंग के लिए और देश का विशाल पहाड़ी क्षेत्र स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों के लिए अनुकूल है. इसके बावजूद इन खेलों में भारत की वैश्विक मौजूदगी नजर नहीं आती। 

    सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग दोनों को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के कार्यक्रम में जगह मिली है. मोदी ने कहा कि भारत को अलग-अलग क्षेत्रों में इन खेलों के विकास के अवसर तलाशने होंगे और इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी। 

    उन्होंने कहा, 'पानी के खेलों से लेकर विंटर स्पोर्ट्स तक, हमारे पास जरूरी जनसांख्यिकी और भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। 

    5 से 15 साल के बच्चों की होगी तलाश
    प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में देश के खेल भविष्य को लेकर एक राष्ट्रव्यापी टैलेंट हंट का ऐलान किया था. इसके तहत 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों की प्रतिभा पहचानने पर जोर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ओलंपिक में भारत की भागीदारी और मजबूत हो सके। 

    खेलों के अपने विजन को समझाते हुए मोदी ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ पदक जीतना नहीं है. खेलों को देश की युवा शक्ति के साथ जोड़कर विकसित भारत के निर्माण का माध्यम बनाना है। 

    ‘खेल सिर्फ चैम्पियन नहीं, बेहतर इंसान बनाता है’
    पीएम मोदी ने खेलों की भूमिका को पदकों से आगे बताते हुए कहा कि खेल युवाओं में चरित्र निर्माण का काम करते हैं. उनके मुताबिक खेल जीतने के साथ-साथ हार के बाद फिर उठ खड़े होने की भावना भी सिखाते हैं। 

    उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे जैसी गंभीर चुनौती से दूर रखने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। 

    मोदी ने युवाओं को स्क्रीन और गेमिंग की दुनिया से बाहर निकलकर मैदान और खेल केंद्रों से जुड़ने का संदेश भी दिया. उन्होंने कहा, 'स्क्रीन से ज्यादा स्पोर्ट्स सेंटर की अहमियत है. प्ले स्टेशन से ज्यादा प्लेग्राउंड की अहमियत है। 

    मेजर ध्यानचंद को किया याद
    प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया. 29 अगस्त को ध्यानचंद की जयंती के मौके पर देश में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। 

    मोदी ने कहा कि करीब 100 साल पहले भारतीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी और उस टीम में ध्यानचंद भी शामिल थे. उन्होंने इस दौरे को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की शताब्दी की नींव बताया। 

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भी उन्होंने मेजर ध्यानचंद को याद किया था। 

    पैरा एथलीटों से प्रेरणा लेने की अपील
    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों को खेल की ताकत का बड़ा उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की सफलता सिर्फ उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उससे परिवार, स्कूल, कॉलेज, जिले और पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ता है। 

    उन्होंने पैरा-आर्चर शीतल देवी, पैरा-शूटर अवनी लेखरा, पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार और पैरा-जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल का विशेष रूप से जिक्र किया। 

    मोदी ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने दिखाया है कि खेल किसी व्यक्ति की जिंदगी के साथ-साथ उसके आसपास के पूरे समाज को बदलने की क्षमता रखता है। 

    प्रधानमंत्री का संदेश साफ है- अगर भारत को ओलंपिक पदक तालिका में बड़ा बदलाव लाना है, तो सिर्फ मौजूदा मजबूत खेलों पर निर्भर रहने के बजाय नए खेलों में भी खिलाड़ियों की फौज तैयार करनी होगी। 

  • महंगी चीनी से राहत की खबर, ₹51 किलो तक गिरे दाम; सरकार की कार्रवाई का असर

    महंगी चीनी से राहत की खबर, ₹51 किलो तक गिरे दाम; सरकार की कार्रवाई का असर

    मुंबई 

    चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी
    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।

    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट
    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।

    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम
    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है।

    इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • मुसीबत में नेपाल के साथ भारत! तबाही के बीच आज भेजी जाएगी 35 टन राहत सामग्री

    मुसीबत में नेपाल के साथ भारत! तबाही के बीच आज भेजी जाएगी 35 टन राहत सामग्री

    नई दिल्ली

    नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने राहत और बचाव के लिए मदद तेज कर दी है. भारत अब गुरुवार सुबह दिल्ली के हिंडन एयरबेस से C-17 सैन्य परिवहन विमान के जरिए 35 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल भेजने जा रहा है. विमान के सुबह करीब 9 बजे रवाना होने की उम्मीद है. यह राहत अभियान भारत की तरफ से भेजी जा रही अतिरिक्त मानवीय सहायता का हिस्सा है। 

    भारत ने बुधवार रात राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी थी. भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से करीब 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी मेडिकल सामान काठमांडू पहुंचाया गया. इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। 

    नेपाल में आई फ्लैश फ्लड से अब तक कम से कम 163 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में भारी तबाही मचाई है.नकई जगह सड़क, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। 

    पीएम मोदी ने नेपाली पीएम से की बात
    राहत सामग्री भेजने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की थी. पीएम मोदी ने नेपाल के लोगों के प्रति एकजुटता जताते हुए हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि भारत की टीमें नेपाल में राहत और बचाव प्रयासों के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय कर रही हैं। 

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बताया कि भारत ने नेपाल के लिए 10 टन HADR यानी मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री के साथ जरूरी दवाइयां भेजी हैं। 

    आगे भी जारी रहेगा राहत अभियान
    भारतीय वायुसेना ने बताया कि C-17 और C-130 विमानों के जरिए आगे भी राहत सामग्री भेजी जाएगी. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टरों को रेस्क्यू और इवैक्यूएशन ऑपरेशन के लिए तैयार रखा गया है। 

    नेपाल में भारतीय दूतावास भी राहत प्रयासों में सहयोग कर रहा है. बुधवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड्का राज पौडेल को 10 टन मानवीय सहायता सामग्री सौंपी. भारत ने स्पष्ट किया है कि इस मुश्किल वक्त में वह नेपाल के साथ खड़ा है और राहत एवं बचाव के लिए हर संभव मदद जारी रखेगा। 

  • अमेरिका जाने की तैयारी है? वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट से पहले जान लें नया नियम

    अमेरिका जाने की तैयारी है? वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट से पहले जान लें नया नियम

     नई दिल्ली

    अमेरिका जाने की योजना बना रहे लोगों के लिए अहम खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दुनियाभर में वीजा अपॉइंटमेंट प्रक्रिया में अस्थायी बदलाव किया है. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, दुनिया भर के अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट में कर्मचारियों के लिए एक वैश्विक ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके चलते वीजा इंटरव्यू के अपॉइंटमेंट को ट्रेनिंग शेड्यूल के हिसाब से बदला जा रहा है। इस बदलाव का असर उन आवेदकों पर पड़ रहा है, जिनके इंटरव्यू पहले से तय थे. कुछ आवेदकों को ईमेल के जरिए बताया गया है कि उनका अपॉइंटमेंट दोबारा निर्धारित किया जाएगा. उन्हें नई तारीख की जानकारी बाद में दी जाएगी।

    क्यों बदली जा रही है वीजा प्रक्रिया?
    अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्रेनिंग की पूरी समय सीमा या कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की है. विभाग के मुताबिक, इसका मकसद वीजा आवेदकों की व्यापक और समान तरीके से जांच सुनिश्चित करना है. ट्रेनिंग में अधिकारियों को ऐसे आवेदकों की पहचान करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिनके अमेरिका में सार्वजनिक सुविधाओं और सरकारी लाभों पर निर्भर होने की आशंका हो सकती है. इससे वीजा जांच प्रक्रिया और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं। 

    ट्रंप प्रशासन का इमिग्रेशन पर सख्त रुख
    यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की इमिग्रेशन नीति को सख्त किया है. सरकार अवैध प्रवासन पर कार्रवाई के साथ वीजा और ग्रीन कार्ड रद्द करने तथा कुछ आवेदनों को अलग-अलग आधार पर खारिज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

    गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका में हुए फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बाद भी इमिग्रेशन नीति को लेकर बहस तेज हुई है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का मकसद अमेरिका की घरेलू सुरक्षा मजबूत करना है। 

    कोर्ट से भी लगा झटका
    इमिग्रेशन नीति को अदालतों में भी चुनौती मिली है. हाल ही में एक अमेरिकी जज ने 75 देशों के नागरिकों को इमिग्रेंट वीजा जारी करने पर रोक लगाने वाली ट्रंप प्रशासन की नीति को खारिज कर दिया. अदालत ने माना कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पास ऐसा फैसला लेने का पर्याप्त वैधानिक अधिकार नहीं था. फिलहाल प्रभावित आवेदकों को नई अपॉइंटमेंट तारीख का इंतजार करना होगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह बदलाव कब तक जारी रहेगा। 

     

  • दुनिया संकट में, भारत में पैसों की बारिश! गोल्ड की तेजी ने कैसे बदल दी मोदी सरकार की आर्थिक तस्वीर?

    दुनिया संकट में, भारत में पैसों की बारिश! गोल्ड की तेजी ने कैसे बदल दी मोदी सरकार की आर्थिक तस्वीर?

    नई दिल्ली

    आजकल बाजार से लेकर आम लोगों के बीच दो ही चीजों की सबसे ज्यादा चर्चा है, एक तो सोने की कीमतों में आई तूफानी तेजी और दूसरी भारत की तेजी से दौड़ती अर्थव्यवस्था. अगस्त के महीने में सोने के दामों ने अचानक ऐसा गियर बदला कि लोग हैरान रह गए. हर तरफ यही सवाल तैर रहा है कि क्या सोना इस बार नया रिकॉर्ड कायम करेगा? लेकिन कमाल की बात ये है कि सिर्फ सोना ही नहीं चमक रहा, बल्कि भारत भी सोने की तरह दमक रहा है. आज पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची है, कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं क्रैश हो रही हैं और युद्ध का संकट गहराया हुआ है. ऐसे मुश्किल दौर में भी भारत न सिर्फ मजबूती से खड़ा है, बल्कि अपनी रफ्तार से पूरी दुनिया को चौंका रहा है। 

    सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: 1 महीने में करीब 20 हजार की उछाल
    पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था. जुलाई के आसपास जो सोना एक दायरे में अटका हुआ दिख रहा था, उसने अचानक तेजी पकड़ ली. 24 कैरेट सोना 24 जुलाई को 1,42,757 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 25 अगस्त तक बढ़कर 1,62,344 रुपये पर पहुंच गया. यानी महज एक महीने में सोना 19,587 रुपये महंगा हो गया. इसी तरह चांदी भी एक महीने में 23,890 रुपये चढ़कर 2,43,446 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। 

    सोने के दाम भागने के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल टेंशन और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध है. जब भी दुनिया में संकट आता है, तो लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित ठिकाने पर लगाते हैं। 

    दुनिया में आर्थिक संकट, लेकिन भारत की इकॉनमी ‘रॉकेट’
    जहां ग्लोबल सप्लाई चेन ध्वस्त हो रही है, वहीं RBI बुलेटिन के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का मोमेंटम बेहद मजबूत है. जुलाई 2026 में कुल रिटेल ऑटोमोबाइल सेल्स में पिछले साल के मुकाबले 25.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. ट्रैक्टर बिक्री में 28.1%, टू-व्हीलर्स में 28.3% और पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में 19.1% का उछाल आया है. देश का औद्योगिक उत्पादन (IIP) भी 7.3% बढ़ा है, जिससे साफ है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में घरेलू मांग रॉकेट बनी हुई है। 

    11 हफ्ते में 73 अरब डॉलर का इजाफा: पाकिस्तान के फॉरेक्स से 3 गुना ज्यादा
    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आई तेजी ने दुनिया को हैरान कर दिया है. 8 जून के बाद से महज 11 हफ्ते में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 73 अरब डॉलर यानी करीब 7 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है. तुलना के लिए समझें तो ये अकेले बढ़ोतरी की रकम पाकिस्तान के कुल फॉरेक्स रिजर्व से 3 गुना से भी ज्यादा है, जो करीब 22 अरब डॉलर है। 

    ये सब मुमकिन हुआ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की USD-INR Forex Swap स्कीम से. इसके तहत विदेशों में रह रहे भारतीयों ने ‘फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट’ खातों के जरिए बिना किसी करेंसी रिस्क के भारतीय बैंकों में जमकर डॉलर जमा किए, जिससे देश में डॉलर की बरसात हो गई। 

    ग्लोबल आउटरीच: दुनिया भर में भारत का डंका
    पीएम मोदी के विजन के तहत भारत के दिग्गज मंत्री दुनिया भर में आर्थिक मोर्चे पर डटे हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 कारोबारियों के साथ जापान में हैं, जहां 65% जापानी कंपनियों ने भारत को दुनिया का सबसे बेहतरीन मार्केट माना है. विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस दौरे पर हैं, जहां राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को खाद की लगातार सप्लाई का भरोसा दिया है. वहीं NSA अजीत डोभाल चीन में सीमा विवाद पर वार्ता कर रहे हैं। 

    UPI के 10 साल: गोलगप्पे वाले से लेकर ग्लोबल मार्केट तक
    10 साल पहले जब डिजिटल पेमेंट और UPI की शुरुआत हुई थी, तब विपक्षी नेताओं ने इसका काफी मजाक उड़ाया था. कांग्रेस नेताओं का कहना था कि देश में रेहड़ी-पटरी वाले और गरीब लोग डिजिटल पेमेंट कैसे करेंगे. हालांकि, आज आंकड़ों ने नया इतिहास रच दिया है. 2016-17 में जहां रोजाना सिर्फ 3 हजार ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर रोजाना 66 करोड़ हो चुके हैं. जुलाई 2026 में सिर्फ एक महीने के भीतर 29.88 लाख करोड़ रुपए का डिजिटल लेन-देन हुआ। 

    आज दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट का लगभग 49% हिस्सा अकेले भारत के UPI पर होता है. छोटे से गांव में गोलगप्पे और चाय बेचने वाला भी अब QR कोड स्कैन करा रहा है. यही वजह है कि बीजेपी नेताओं ने पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा कि जिस डिजिटल इंडिया का कभी मजाक बनाया जाता था, आज उसी मॉडल को दुनिया के 11 देश अपना रहे हैं और रेहड़ी-पटरी वाले भी स्मार्ट बनकर देश की इकॉनमी को आगे बढ़ा रहे हैं। 

    जहां एक तरफ युद्ध और अनिश्चितता के कारण सोने के दाम नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मजबूत नीतियों, विदेशी मुद्रा के अंबार और डिजिटल क्रांति के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के नक्शे पर सोने से भी ज्यादा तेजी से चमक रही है। 

     

  • मुंबई-गोवा ट्रेन के 1AC में विदेशी महिला का अनुभव, वीडियो बनाकर दिखाया लग्जरी केबिन का हाल

    मुंबई-गोवा ट्रेन के 1AC में विदेशी महिला का अनुभव, वीडियो बनाकर दिखाया लग्जरी केबिन का हाल

    मुंबई 
    भारतीय ट्रेन में रोजाना ना जाने कितने लोग सफर करते हैं, किसी की ट्रेन की जर्नी बेहद मजेदार लगती है तो किसी का एक्सपीरियंस इतना अच्छा नहीं होता है. हाल ही में एक इंटरनेशनल ट्रैवल क्रिएटर कारा वाइल्डबर ने भारतीय ट्रेन में सफर किया,  उन्होंने अपनी इस ट्रेन जर्नी का एक्सपीरियंस इंस्टाग्राम पर शेयर किया. उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वो ट्रेन के अंदर का नजारा दिखा रही हैं।  

    कारा वाइल्डबर ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें उन्होंने मुंबई से गोवा तक करीब 12 घंटे के फर्स्ट क्लास स्लीपर कोच के अंदर का पूरा नजारा दिखाया. उनका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की सलाह दे रहे हैं. आइए जानते हैं कि विदेशी महिला का अनुभव कैसा रहा। 

    ऐसा था प्राइवेट केबिन

    कारा ने वायरल वीडियो में बताया कि जिस कोच में उन्होंने सफर किया, उसमें तीन कमरे थे और दोनों तरफ टॉयलेट की फैसिलिटी मौजूद थी. उन्होंने डबल रूम की डिमांड की थी, जिसे इस बार में ही मान लिया गया था. हालांकि, उन्होंने बताया कि यात्री डबल या क्वाड्रुपल केबिन की भी डिमांड कर सकते हैं, लेकिन कौन सा कमरा मिलेगा, इसकी गारंटी नहीं होती। 

    उन्होंने अपने कमरे को क्यूट लिटिल केबिन बताया. केबिन में दो बंक बेड थे. नीचे वाले बंक को दिन के समय सीट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था और रात में इसे बेड में बदला जा सकता था। 

    केबिन में कौन-कौन-सी फैसिलिटी मिली?
    कारा के मुताबिक, इस 12 घंटे की लंबी जर्नी को कंफर्टेबल बनाने के लिए केबिन में कई फैसिलिटी मौजूद थीं. सबसे अच्छी बात यह थी कि मुंबई की गर्मी से राहत के लिए उनके रूम में एयर कंडीशनिंग भी मौजूद थी. AC के अलावा केबिन में रीडिंग लाइट, प्लग पॉइंट, शीशा, सीट के नीचे सामान रखने की जगह, छोटी टेबल, ड्रिंक होल्डर, बड़ी खिड़की और पर्दे थे. केबिन का अपना दरवाजा और पर्दा था, जिससे सभी को प्राइवेसी मिली। 

    टॉयलेट देखकर हुईं अपसेट 
    अक्सर ही ट्रेन के टॉयलेट को लेकर लोगों की शिकायतें देखने को मिलती हैं, तब लोगों को लगता है कि जनरल कोच का टॉयलेट गंदा होता है. मगर कारा ने जिस फर्स्ट क्लास स्लीपर कोच में सफर किया था, उसके टॉयलेट की हालत भी कुछ खास नहीं थी। 

    कारा के कोच में दो टॉयलेट थे, जिनमें एक इंडियन स्टाइल और दूसरा वेस्टर्न स्टाइल था. वहां से बदबू आ रही थी और जब ट्रेन किसी स्टेशन पर रूकती थी, तब ज्यादा बदबू आती थी और यह कुछ समय तक बनी रहती थी। 

    यूजर्स ने दी वंदे भारत में सफर करने की सलाह
    कारा के वीडियो के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर यूजर्स तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. उनके इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट कर कहा कि अगर ट्रेन में टॉयलेट साफ नहीं है, तो कोच असिस्टेंट से शिकायत कर सकते हैं. कोच में हेल्पलाइन नंबर दिए गए होते हैं। 

    वहीं, कुछ यूजर्स ने उनको अगली बार वंदे भारत ट्रेन या भारत की लग्जरी ट्रेनों जैसे पैलेस ऑन व्हील्स और महाराजा एक्सप्रेस में सफर करने की सलाह दी. तो कुछ ऐसे यूजर्स भी थे, जिन्होंने कहा कि उनके लिए भारतीय ट्रेन यात्रा का यह अलग नजरिया देखना काफी दिलचस्प था। 

  • युवा मतदाताओं पर चुनाव आयोग का फोकस, जेन-जी और जेन अल्फा को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ेगा

    युवा मतदाताओं पर चुनाव आयोग का फोकस, जेन-जी और जेन अल्फा को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ेगा

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले जेन अल्फा और जेन-जी (Gen-Z) तक पहुंचने की कोशिशें फिर शुरू की हैं। आयोग का मकसद उन्हें जागरूक वोटर बनाना है, जो चुनावी प्रक्रिया से अच्छी तरह परिचित हों और भविष्य में लोगों को जागरूक करने वाले अभियानों की अगुआई कर सकें।

    आयोग के नए अभियान में देश की 4,123 विधानसभा सीटों के स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को जोड़ा जाएगा। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली बच्चों के साथ कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स शामिल होंगे।

    हर सीट पर 10 साक्षरता क्लब बनाए जाएंगे
    आयोग 50 हजार चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हर विधानसभा सीट में ऐसे 10 क्लब बनाए जाएंगे।

    इसके लिए आयोग 15 लाख स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों से संपर्क करेगा। इसके अलावा 70 हजार कॉलेजों और 1,400 यूनिवर्सिटी तक भी पहुंच बनाई जाएगी।

    2018 में शुरू हुए थे ईएलसी
    चुनावी साक्षरता क्लब 2018 में सिस्टमेटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (एसवीईईपी) कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए थे। इनका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका व कामकाज से परिचित कराना था।

    डिजिटल तरीके से लगातार जुड़ने पर जोर
    आयोग के मुताबिक, कम्युनिकेशन का तरीका तेजी से बदल रहा है और लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। युवा मतदाताओं और जमीनी स्तर से जुड़े लोगों के साथ लगातार, व्यवस्थित और सीधे संपर्क की जरूरत को देखते हुए ईएलसी 2.0 की योजना बनाई गई है।

    ईएलसी 2.0 में इन क्लबों को डिजिटल सुविधाओं से लैस, व्यवस्थित और लगातार जुड़े रहने वाले ढांचे के तौर पर फिर से तैयार किया जाएगा।

    2029 तक कितनी बड़ी होगी 'जेन जी'?
    जनसांख्यिकी अनुमानों के मुताबिक भारत में 2029 तक 'जेन जी' की आबादी करीब 38 करोड़ होगी. इनमें 'जेन जी' पुरुषों की संख्या करीब 19.9 करोड़, तो महिलाएं लगभग 18.1 करोड़ होंगी। 

    उस समय अगर अनुमानित मिलेनियल्स की संख्या से तुलना करें, तो देश में तब मिलेनियल्स की संख्या लगभग 35.7 करोड़ रहने का अनुमान है। 

    यानी ये वो पहला मौका होगा जब पहली बार भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी 'जेन जी' होगी। 

    इसका चुनावी महत्व क्या है?
    'जेन जी' केवल संख्या में बड़ी नहीं होगी बल्कि यह समाज के सबसे सक्रिय वर्ग का प्रतिनिधित्व करेगी।

    उस दौरान करोड़ों की संख्या में वो 'जेन जी' पहली बार वोट डालने वाले युवा होंगे. इसमें कॉलेज, यूनिवर्सिटी और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र शामिल होंगे. तो नौकरी की तलाश में बेरोजगार युवा भी होंगे. वहीं ऐसे युवा भी होंगे जो अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे होंगे. साथ ही इनमें अपना करियर स्टार्ट कर चुके और परिवार बसा रहे युवा भी शामिल होंगे। 

    किन मुद्दों पर केंद्रित होगी राजनीति?
    एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2029 तक चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा कई विषयों पर आधारित हो सकता है. इनमें शिक्षा, रोजगार, महंगाई, घर, स्टार्टअप्स, क्लाइमेट चेंज और शासन-प्रशासन शामिल होगा। 

    रोजगारः भारत हर साल लाखों युवाओं को रोजगार बाजार में प्रवेश करते देख रहा है. क्वालिटी जॉब्स, निजी निवेश और स्किल डेवलपमेंट सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। 

    शिक्षाः पेपर लीक, परीक्षा के आयोजनों में सुधार, डिजिटल शिक्षा, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर युवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। 

    महंगाईः शुरुआती करियर वाले युवाओं के लिए घर खरीदना, किराया, स्वास्थ्य, परिवहन और जीवन-यापन की लागत बड़ा मुद्दा बन सकती है। 

    घरः बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और किराया युवा मतदाताओं को सीधे प्रभावित करेंगे। 

    स्टार्टअप और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और फ्यूचर जॉब्स भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती हैं। 

    क्लाइमेट चेंजः 'जेन जी' पर्यावरण और क्लीन एनर्जी जैसे मुद्दों पर पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों पर पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक प्रतिक्रिया देने वाली पीढ़ी मानी जाती है।