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  • Moon पर माइक्रोब्स की सर्वाइवल क्षमता ने चौंकाया, NASA की स्टडी में सामने आया बड़ा खुलासा

    Moon पर माइक्रोब्स की सर्वाइवल क्षमता ने चौंकाया, NASA की स्टडी में सामने आया बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली
    चांद पर इंसानों के लिए रहना आसान नहीं है. वहां सांस लेने के लिए हवा नहीं है, तापमान बहुत ज्यादा बदलता है. सूरज से आने वाली तेज किरणों और रेडिएशन का सामना करना पड़ता है. लेकिन नासा की एक नई स्टडी में पता चला है कि धरती के कुछ छोटे माइक्रोब्स चंद्रमा की सतह पर भी कुछ समय तक जिंदा रह सकते हैं. कुछ जगहों पर ये जीव हफ्तों से लेकर महीनों तक टिक सकते हैं। 

    यह स्टडी नासा के वैज्ञानिकों ने की है. इसमें चांद के साउथ पोल के तीन इलाकों- नोबिल रिम, कनेक्टिंग रिज और डे गर्लेश रिम को देखा गया. वैज्ञानिकों ने नासा के लूनर रीकॉन्सेंस ऑर्बिटर से मिले आंकड़ों और चांद पर रेडिएशन की जानकारी का इस्तेमाल किया. उन्होंने पांच तरह के माइक्रोब्स पर कंप्यूटर मॉडल के जरिए जांच की. इनमें दो फंगस और तीन बैक्टीरिया शामिल थे। 

    कौन से जीव ज्यादा मजबूत निकले?
    स्टडी में शामिल दोनों फंगस ने बैक्टीरिया के मुकाबले ज्यादा मजबूती दिखाई. इनमें एस्परजिलस नाइगर सबसे ज्यादा मजबूत रहा. इसे आम तौर पर ब्लैक मोल्ड कहा जाता है. यह गर्म और नमी वाली जगहों पर पाया जाता है. इसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर भी पाया जा चुका है। 

    दूसरा फंगस फ्यूजेरियम था. यह आमतौर पर मिट्टी में पाया जाता है. इसने भी मुश्किल हालात में टिकने की क्षमता दिखाई, लेकिन एस्परजिलस से कम. तीन बैक्टीरिया में डाइनोकोकस रेडियोडूरान्स, स्टेफाइलोकोकस ऑरेयस और बैसिलस सबटिलिस शामिल थे. इनमें डाइनोकोकस सबसे मजबूत रहा. बाकी दो बैक्टीरिया पर चांद की UV किरणों का ज्यादा असर पड़ा। 

    चांद पर कहां बच सकते हैं ये माइक्रोब्स?
    चंद्रमा पर माइक्रोब्स के लिए सबसे बड़ी परेशानी तेज UV किरणें, रेडिएशन और बहुत ज्यादा गर्मी है. चांद पर दिन के समय तापमान करीब 127 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. लेकिन चांद की हर जगह एक जैसी नहीं है. दक्षिणी ध्रुव के कुछ गड्ढों में सूरज की रोशनी सीधे नहीं पहुंचती। 

    इन जगहों पर माइक्रोब्स के कुछ समय तक बचने की संभावना ज्यादा है. कंप्यूटर मॉडल के मुताबिक कुछ इलाकों में ये जीव हफ्तों से महीनों तक जिंदा रह सकते हैं। 

    जिंदा रहना और बढ़ना अलग बात है
    वैज्ञानिकों ने बताया कि इस स्टडी में सिर्फ यह देखा गया कि माइक्रोब्स कितने समय तक जिंदा रह सकते हैं. यह नहीं देखा गया कि वे चांद पर बढ़ सकते हैं या अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं. अगर कोई माइक्रोब चांद की मिट्टी के नीचे दब जाए तो उसे तेज रेडिएशन से कुछ बचाव मिल सकता है। 

    चांद के कुछ इलाकों में पानी बर्फ के रूप में भी मौजूद है. इसलिए वैज्ञानिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि धरती से पहुंचे माइक्रोब्स भविष्य में चांद की मिट्टी और पानी से जुड़े रिसर्च को प्रभावित तो नहीं करेंगे। 

    भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए क्यों जरूरी है यह स्टडी?
    नासा के अर्टिमिस मिशनों के तहत इंसानों को चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास भेजने की तैयारी है. इंसानों के साथ धरती के माइक्रोब्स भी अनजाने में चांद तक पहुंच सकते हैं. ये स्पेससूट, उपकरणों या मशीनों के जरिए वहां पहुंच सकते हैं। 

    इससे भविष्य के वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ी समस्या आ सकती है. अगर चांद की मिट्टी या बर्फ में कोई माइक्रोब मिलता है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि वह चांद पर पहले से था या धरती से वहां पहुंचा.इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्र मिशनों में धरती से ले जाए गए माइक्रोब्स का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा। 

    इससे बाद में चांद से मिले सैंपल की सही जांच करने में मदद मिलेगी. इस स्टडी का मतलब यह नहीं है कि ये माइक्रोब्स चांद पर आराम से रह सकते हैं. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि चांद की कुछ खास जगहों पर धरती के कुछ छोटे जीव उम्मीद से ज्यादा समय तक जिंदा रह सकते हैं। 

  • पहाड़ से मैदान तक दुश्मन के टैंक होंगे निशाने पर, भारत की नई एंटी-टैंक ताकत से बढ़ेगी मारक क्षमता

    पहाड़ से मैदान तक दुश्मन के टैंक होंगे निशाने पर, भारत की नई एंटी-टैंक ताकत से बढ़ेगी मारक क्षमता

     नई दिल्ली

    भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने इसे भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए बड़ा कदम बताया. साथ ही दोनों देशों के बीच जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम की साथ मिलकर प्रोडक्शन करने की संभावना भी जताई है। 

    जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है. इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं. इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है. पहाड़ी इलाकों से लेकर खुले मैदान तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. यह सिस्टम टैंकों और दूसरे बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। 

    अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत का जैवलिन खरीदने का फैसला दोनों देशों के रक्षा रिश्तों को और मजबूत करेगा. उन्होंने मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री की ओर से कही गई बातों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस सौदे से भारत में जैवलिन के सह-उत्पादन का रास्ता भी खुल सकता है। 

    भारत लंबे समय से अपनी सेना की एंटी-टैंक क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है. ऐसे में जैवलिन सिस्टम की संभावित खरीद को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में टैंक और बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए ऐसे हथियार अहम माने जाते हैं। 

  • भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए जमीन से 12 मीटर ऊपर बना स्टेशन, जानें क्यों चुना गया यह डिजाइन

    भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए जमीन से 12 मीटर ऊपर बना स्टेशन, जानें क्यों चुना गया यह डिजाइन

    अहमदाबाद
    देश में पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) चलाने की तैयारियां जोरों पर हैं और इसके ट्रैक से लेकर रेलवे स्टेशनों तक पर निर्माण कार्य रॉकेट की रफ्तार से चल रहा है. सरकार की तैयारी मुंबई-अहमदाबाद रेल कॉरिडोर (Mumbai-Ahmedabad Rail Rout) पर पहले चरण में अगले साल 15 अगस्त 2027 से पहली बुलेट ट्रेन चलाने की है. इस बीच हाई स्पीड बुलेट ट्रेन के लिए तैयार हो रहा ठाणे स्टेशन चर्चा में हैं, क्योंकि ये जमीन से 12 मीटर ऊपर जो है। 

    508 किमी के ट्रैक पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन
    अगले साल जिस 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन तेज रफ्तार से भागने वाली है, उसपर निर्माण कार्य नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) कर रहा है. ये महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरेगा. बुलेट ट्रेन रेल परियोजना का महाराष्ट्र वाला हिस्सा ठाणे और पालघर जिलों से निकल रहा है. Thane Bullet Train Station अपनी कुछ खास विशेषताओं के चलते सुर्खियों में है।         

    12 मीटर ऊंचा बुलेट ट्रेन स्टेशन
    ठाणे में बन रहा बुलेट ट्रेन स्टेशन का डिजाइन मैंग्रोव वनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Thane Station का कॉनकोर्स लेवल जमीनी स्तर से लगभग 12 मीटर ऊपर रखा जा रहा है. ये डिजाइन खासतौर पर पर्यावरण के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्र में मैंग्रोव पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए प्लान किया गया है। 

    पारंपरिक स्टेशनों जैसा नहीं है डिजाइन
    ठाणे बुलेट ट्रेन स्टेशन का डिजाइन पारंपरिक जमीनी रेलवे स्टेशनों से बिल्कुल अलग है. उल्हास नदी से प्रेरित होकर इसका एंट्री गेट तैयार किया गया है. इसे देखने पर साफ पता चलता है कि क्योंकि इस Bullet Train Station की छत लहरों के आकार और गति से प्रेरित है, जो नदी के निकट स्टेशन की स्थिति को दर्शाती है। 
           
           ताकि जंगल रह सके सुरक्षित
    NHSRCL के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि जमीन से इतने ऊंचे कॉनकोर्स को मैंग्रोव वनों की सुरक्षा और वहीं की पर्यावरणीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. इससे जुड़े एक बयान में बताया गया है कि ठाणे में स्टेशन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कॉनकोर्स का लेवल प्राकृतिक भू-स्तर से लगभग 12 मीटर ऊपर रहे, ताकि यहां पर मौजूद मैंग्रोव वनों का संरक्षण हो सके। 
          
    महाराष्ट्र सेक्शन में 3 एलिवेटेड स्टेशन 
    ठाणे स्टेशन महाराष्ट्र में मुंबई-अहमदाबाद बुले
    ट ट्रेन रेल कॉरिडोर के 135.45 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन का हिस्सा है, जो ठाणे के शिलफाटा से लेकर महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास स्थित जारोली गांव तक फैला है, इसमें थाइन, विरार, बोईसर तीन एलिवेटेड स्टेशन शामिल होंगे।        

    सात सुरंगों से निकलेगी बुलेट ट्रेन 
    Bullet Train महाराष्ट्र सेक्शन का निर्माण शहरी, पहाड़ी और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील भूभाग में किया जा रहा है. इसमें 7 पर्वतीय सुरंगें शामिल होंगी, जिनमें से तीन में निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है. इन सुरंगों में जल निकासी, जलरोधक और सुरंग की परत बिछाने का काम प्रगति पर है. नदी पर कई पुलों का निर्माण भी लगातार जारी है. इनमें 460 मीटर लंबा पुल उल्हास नदी पर बना है. वैतरणा नदी पर 2.32 किलोमीटर लंबा, जबकि जगानी नदी पर बना 510 मीटर लंबा पुल बन रहा है। 

  • सोनिया गांधी की ऑटोबायोग्राफी को लेकर पेंगुइन की सफाई, एडिटोरियल बदलाव के आरोपों पर क्या कहा?

    सोनिया गांधी की ऑटोबायोग्राफी को लेकर पेंगुइन की सफाई, एडिटोरियल बदलाव के आरोपों पर क्या कहा?

    नई दिल्ली

    कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की किताब "बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव" को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने शुक्रवार को साफ कहा कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। 

    कंपनी का यह बयान उस समय आया है जब कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ ने ऐलान किया था कि यह किताब 10 नवंबर को रिलीज होगी. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी ने किताब में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रकाशक ने किताब छापने से हाथ खींच लिया. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस दावे को गलत बताया है। 

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि उसने हमेशा यह किताब छापने में दिलचस्पी दिखाई थी और वह इसे छापने के लिए तैयार भी थी. साथ ही यह भी कहा गया कि लेखकों के तथ्यों की जांच करना और उन्हें सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होता है, जो उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है. कंपनी ने आगे कहा कि लेखक के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर वह आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगी। 

    इस बीच भारत में किताब का वितरण कौन करेगा, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग साइट अमेजन पर इसकी ईबुक 2,615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध दिखाई गई है. अमेजन के मुताबिक यह ईबुक विलियम कॉलिंस नाम के प्रकाशक ने छापी है, जो हार्पर कॉलिंस यूके का हिस्सा है. जब से अल्फ्रेड ए नॉफ ने इस किताब का ऐलान किया है, तब से भारत में इसकी रिलीज को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। 

    79 साल की सोनिया गांधी, जो कांग्रेस की बड़ी नेता हैं और भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित हस्तियों में गिनी जाती हैं, इस किताब में अपनी निजी जिंदगी की कहानी साझा करेंगी. इसमें एक ताकतवर राजनीतिक परिवार में उनकी शादी, राजीव गांधी को खोने का दर्द, जिसने उन्हें राजनीति की दुनिया में ला खड़ा किया, और साल 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने जैसे कई पहलू शामिल होंगे. प्रकाशक के मुताबिक किताब में वे इटली में बीते अपने बचपन से लेकर भारत आने की प्रेम कहानी और अपनी जिंदगी बदल देने वाली त्रासदियों तक का सफर बताएंगी। 

    गौरव गोगोई का आरोप- BJP सरकार में कुछ लोग किताब पढ़े जाने से डरते हैं
    कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. गौरव गोगोई ने पब्लिशर के बयान को “कमजोर बयान” बताया। 

    उन्होंने कहा कि पेंगुइन इंडिया को ‘एग्जाम वॉरियर्स’ और आरएसएस पर कई किताबें प्रकाशित करने में कोई दिक्कत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में कुछ लोग अब इस बात से डरने लगे हैं कि भारत के लोग किसी किताब को पढ़ें। 

  • देश में फिर बिगड़ेगा मौसम! 2 साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय, 18 राज्यों के लिए अलर्ट

    देश में फिर बिगड़ेगा मौसम! 2 साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय, 18 राज्यों के लिए अलर्ट

    नई दिल्ली

    मानसून इस बार भी अपने रंग बदलने से बाज नहीं आ रहा है. अपने आखिरी समय में खूब बरस रहा है. अब मौसम विभाग ने 28 अगस्त के लिए एक और बड़ा अलर्ट जारी किया है. यूपी, बिहार और दिल्ली समेत कई राज्यों में तेज बारिश के साथ आंधी का दौर देखने को मिल सकता है. कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 83 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. यानी अगले कुछ घंटे कई राज्यों के लिए सामान्य नहीं रहने वाले हैं. पूर्वी भारत में बिजली और वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है. पहाड़ी इलाकों में बारिश के साथ भूस्खलन की आशंका है. ऐसे में मानसून की यह नई करवट लोगों की चिंता बढ़ा सकती है। 

    मौसम की इस पूरी तस्वीर में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. पहला सिस्टम उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के इलाकों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर बना हुआ है. दूसरा साइक्लोनिक सर्कुलेशन गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद है. इन सिस्टम के कारण कई इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है. नदी और समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. मछुआरों को भी सुरक्षित जगहों पर रहने को कहा गया है. कुछ राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है. ऐसे में आज का दिन कई राज्यों के लिए बारिश, आंधी और वज्रपात के लिहाज से अहम रहने वाला है। 

    दिल्ली-NCR में शाम तक आंधी-बारिश, 50KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
    दिल्ली-NCR में आज यानी 28 अगस्त की देर शाम तक तेज आंधी और बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग के मुताबिक हवा की रफ्तार करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. तेज हवा के साथ बारिश होने पर सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक की परेशानी बढ़ सकती है. लोगों को मौसम बिगड़ने के दौरान खुले इलाकों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। 

    यूपी में 80KM की आंधी का अलर्ट, इन जिलों में बदलेगा मौसम
    उत्तर प्रदेश में आज मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रह सकता है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, सहारनपुर, आजमगढ़, सोनभद्र, महाराजगंज, मिर्जापुर, बलिया, देवरिया, सिद्धार्थनगर, मुरादाबाद, कानपुर, रामपुर, मैनपुरी, ललितपुर, सीतापुर, बहराइच, कन्नौज, प्रयागराज, गोरखपुर और कुशीनगर में बारिश और आंधी की चेतावनी है. हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 

    बिहार में बारिश के साथ तूफानी हवा, बिजली गिरने का भी खतरा
    बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है. पूर्वी चंपारण, सिवान,
    बक्सर, रोहतास, कैमूर, मधेपुरा, पूर्णिया, भागलपुर, कटिहार, समस्तीपुर, दरभंगा, सुपौल, बांका, मुंगेर और जमुई में मौसम खराब रहने का अनुमान है. इस दौरान करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं. आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है. पटना में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की जरूरत है। 

    झारखंड में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 60KM तक पहुंच सकती है हवा
    झारखंड में आज कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. साहेबगंज, पाकुड़, जामताड़ा, दुमका, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर, रामगढ़, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, सरायकेला, गुमला और रांची में बारिश का असर देखने को मिल सकता है. इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है. रांची में अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी बढ़ सकती है। 

    पश्चिम बंगाल में गरज के साथ बारिश, 65KM तक तेज हवाओं का असर
    पश्चिम बंगाल में भी आज मौसम बिगड़ने की संभावना है. हावड़ा, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, कोलकाता, अलीपुरद्वार, दुर्गापुर और कूचबिहार में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट है. हवा की रफ्तार 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. कोलकाता में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. तेज हवाओं के दौरान कमजोर ढांचे और पेड़ों से दूरी बनाए रखना जरूरी होगा। 

    राजस्थान में बारिश के साथ तेज हवा, इन जिलों में मौसम बदलेगा
    राजस्थान में भी मानसून का असर कई जिलों में दिखाई देगा. झुंझुनू, टोंक, बारां, बूंदी, दौसा, भरतपुर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, अलवर, झालावाड़, जैसलमेर, करौली, उदयपुर, सवाई माधोपुर और जयपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है. इस दौरान करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. जयपुर में अधिकतम तापमान 45 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान दिया गया है. बारिश और तेज हवाओं के बीच स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदल सकता है। 

    मध्य प्रदेश में तेज बारिश-आंधी का दौर, 50KM की हवा का अलर्ट
    मध्य प्रदेश के कई जिलों में आज भारी बारिश और आंधी का अलर्ट है. कटनी, विदिशा, सिवनी, दमोह, होशंगाबाद, खरगोन, मंडला, खंडवा, बैतूल, नरसिंहपुर, इंदौर, सागर, छिंदवाड़ा और सीधी में मौसम खराब रहने की संभावना है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. भोपाल में अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. किसानों को भी तेज बारिश और हवाओं के दौरान फसलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। 

    पंजाब-हरियाणा में तेज हवाएं, 60KM तक पहुंच सकती है रफ्तार

        पंजाब में 28 और 29 अगस्त को मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है. लुधियाना, कपूरथला, चंडीगढ़, फरीदकोट, फिरोजपुर, संगरूर, अमृतसर, होशियारपुर, गुरदासपुर, बठिंडा और बरनाला में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. इस दौरान करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के झोंके चल सकते हैं. कई इलाकों में बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। 

        हरियाणा में सोनीपत, भिवानी, गुरुग्राम, फतेहाबाद, हिसार, झज्जर, पानीपत, फरीदाबाद और पलवल में बारिश और आंधी की चेतावनी है. हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में दिल्ली-NCR से सटे इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है. खासकर खुले इलाकों में तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। 

    उत्तराखंड में बारिश के साथ आंधी, पहाड़ों पर बढ़ी भूस्खलन की चिंता
        उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल और ऋषिकेश समेत कई इलाकों में बारिश और आंधी का अलर्ट है. हवा की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 

    देहरादून में अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका को देखते हुए यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है। 

        हिमाचल प्रदेश में चंबा, कांगड़ा, सिरमौर, कुल्लू, शिमला, किन्नौर, सोलन और मंडी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसके साथ तेज आंधी की चेतावनी भी है. पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है. मनाली में अधिकतम तापमान 17 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही सफर की योजना बनाने की जरूरत है। 

        जम्मू-कश्मीर में जम्मू, रियासी, राजौरी, रामबन, कुलगाम, पुंछ, पुलवामा और कुपवाड़ा में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी है. इस दौरान हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. श्रीनगर में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में बारिश के दौरान यात्रा को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। 

    पूर्वोत्तर में 2 सितंबर तक बारिश का दौर, 30 अगस्त को भारी बारिश की आशंका
    पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर लंबा चलने वाला है. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश हो सकती है. असम और मेघालय में 29 से 31 अगस्त के बीच व्यापक बारिश का अनुमान है. 28 से 31 अगस्त के दौरान कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है. अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में 28-29 अगस्त तथा 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच भारी बारिश हो सकती है. 30 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश की आशंका है. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 28 से 31 अगस्त तथा 2 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। 

    दक्षिण भारत में 2 सितंबर तक बारिश, तटीय इलाकों में तेज हवाओं का असर
    दक्षिण भारत में भी मानसूनी गतिविधियां बनी रहेंगी. तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल तथा तेलंगाना में 28 अगस्त से 2 सितंबर तक कई जगह हल्की से छिटपुट बारिश हो सकती है. तटीय कर्नाटक में भी इस दौरान कई स्थानों पर बारिश जारी रहने की संभावना है. केरल, माहे और लक्षद्वीप में 28 से 30 अगस्त और फिर 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान बारिश हो सकती है. उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 28-29 अगस्त को तेज हवाएं चल सकती हैं. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 28 से 31 अगस्त के बीच गरज-चमक और तेज हवाओं का असर रहेगा. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 28 अगस्त को आंधी और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है। 

     

  • त्योहारों से पहले महंगाई की मार! दूध के दाम ₹9 बढ़े, जानें कब से लागू होंगी नई कीमतें

    त्योहारों से पहले महंगाई की मार! दूध के दाम ₹9 बढ़े, जानें कब से लागू होंगी नई कीमतें

    मुंबई

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। मुंबई में 1 सितंबर से दूध की थोक कीमत में सीधे 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है। मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (MMPA) ने दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। इसके बाद ताजा भैंस के दूध का थोक भाव 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।

    1 सितंबर से लागू होगी नई कीमत
    मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक, नई दर 1 सितंबर 2026 से लागू होगी और 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी। यानी मुंबईकरों को अगले करीब छह महीने तक बढ़ी हुई कीमतों पर दूध खरीदना पड़ेगा। इसके बाद कीमतों की दोबारा समीक्षा की जाएगी।

    इससे पहले फरवरी 2026 में दूध का थोक भाव 91 रुपये से बढ़ाकर 93 रुपये प्रति लीटर किया गया था। अब एक बार में 9 रुपये की वृद्धि की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह MMPA के करीब 70 साल के इतिहास में सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी बताई जा रही है।

    क्यों बढ़ाए गए दूध के दाम?
    दूध उत्पादकों ने कीमत बढ़ाने के पीछे पशु चारे और दूध देने वाले पशुओं की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया है। उत्पादकों के मुताबिक, पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले अनाज, तूर चुनी और चना चुनी जैसी चीजों की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा चारा, पेंड और अन्य जरूरी सामग्री भी महंगी हुई है।

    दूध देने वाले पशुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी उत्पादकों की लागत बढ़ाई है। ऐसे में दूध उत्पादन का खर्च बढ़ने का असर अब उसकी थोक कीमत पर डाला जा रहा है।

    3,000 से ज्यादा विक्रेताओं पर असर
    MMPA के चेयरमैन सी.के. सिंह के मुताबिक, मुंबई में 3,000 से अधिक खुदरा विक्रेताओं के जरिए ताजा भैंस का दूध बेचा जाता है। थोक कीमत 93 से बढ़कर 102 रुपये होने के बाद इस पूरे सप्लाई नेटवर्क पर असर पड़ेगा।

    यहां यह समझना जरूरी है कि 102 रुपये प्रति लीटर घोषित थोक दर है। खुदरा बाजार में ग्राहक को मिलने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है और यह विक्रेता तथा वितरण लागत पर निर्भर करेगी।

    त्योहारी सीजन में बढ़ेगा घरेलू बजट का बोझ
    दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। दूध का इस्तेमाल सिर्फ रोजाना पीने के लिए ही नहीं, बल्कि दही, पनीर, मिठाई, खीर और दूसरी कई चीजों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

    ऐसे में दूध महंगा होने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ने के साथ-साथ दूध से बने दूसरे उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है। खासकर त्योहारों के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने से इसका असर और ज्यादा महसूस हो सकता है।

  • जलभराव से मिलेगी राहत! अमित शाह बोले- अगली बार वोट मांगने से पहले ठीक होगी समस्या

    जलभराव से मिलेगी राहत! अमित शाह बोले- अगली बार वोट मांगने से पहले ठीक होगी समस्या

    गांधीनगर 

     अहमदाबाद के बोपल, घुमा, आंबली और शेला इलाकों में जुलाई महीने में हुई भारी बारिश से लोगों के घरों और सोसायटियों में पानी भर गया था. इस समस्या को लेकर लोगों में काफी नाराजगी थी. अब केंद्रीय गृहमंत्री और गांधीनगर के सांसद अमित शाह ने इन इलाकों के लोगों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया है कि अगली बार जब वे वोट मांगने आएंगे, उससे पहले यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। 

    उन्होंने कहा कि अब चाहे 30 इंच बारिश भी क्यों न हो जाए, सोसायटियों में पानी नहीं भरेगा. इसी के साथ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नगर निगम की योजना में कमी रही है। 

    रक्षाबंधन के त्योहार पर गुजरात आए अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान एक खास लोक दरबार का आयोजन किया. इसमें बोपल, घुमा, आंबली और शेला जैसे इलाकों के लोग और सोसायटियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। 

    दरअसल जुलाई में हुई तेज बारिश के कारण इन नए इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया था. पीने के पानी की दिक्कत भी हुई थी और गंदे पानी की निकासी की लाइनों का पानी उल्टा घरों में आने लगा था. उस समय अमित शाह गुजरात में नहीं थे, इसलिए वे लोगों का हाल जानने नहीं आ सके थे. इसी वजह से उन्होंने इस बार खास तौर पर यह लोक दरबार रखा और लोगों की परेशानी सीधे सुनी। 

    बैठक में मौजूद लोगों ने बताया कि पिछले 50 साल में कभी भी एक साथ 21 इंच बारिश दर्ज नहीं हुई थी. इतनी ज्यादा बारिश होने से अहमदाबाद नगर निगम की मौजूदा व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। 

    अमित शाह ने साफ कहा कि इस समस्या के लिए मेयर या नगर आयुक्त नहीं बल्कि वे खुद सांसद होने के नाते जिम्मेदारी लेते हैं और इसका पक्का हल निकालेंगे. उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि देश की बड़ी समस्याएं सुलझाने की जिम्मेदारी तो उन्हें मिली है, लेकिन साथ ही यह भी उनका काम है कि लोगों के इलाके में पानी न भरे। 

    उन्होंने आगे कहा कि इस बार जरूरत से ज्यादा बारिश हुई, इसलिए अब 21 इंच नहीं बल्कि 30 इंच बारिश झेलने लायक व्यवस्था बनाई जाएगी. अगर आगे और ज्यादा बारिश हुई तो उसी हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाएगा। 

    उन्होंने सभी सोसायटियों के चेयरमैन से कहा कि वे अपनी शिकायतें लिखित में भेजें ताकि हर समस्या को दूर किया जा सके. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के रहते जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। 

  • कंगना-बाबा रामदेव के बीच खत्म हुई तल्खी? मिठाई-तोहफे भेजकर जताया भाई-बहन का प्यार

    कंगना-बाबा रामदेव के बीच खत्म हुई तल्खी? मिठाई-तोहफे भेजकर जताया भाई-बहन का प्यार

     नई दिल्ली

    बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत का कुछ दिनों से कई सारे लोगों के साथ विवाद चल रहा था. इसमें एक योग गुरू बाबा रामदेव भी थे. उन्होंने कंगना के 'गटर' बयान को लेकर उनकी जबरदस्त आलोचना की थी. उनके बयान से एक्ट्रेस नाराज हुईं और उन्होंने भी पलटवार किया. ये विवाद कुछ समय पहले ही शुरू हुआ था, लेकिन आज त्योहार के मौके पर इसका अंत हो गया है। 

    रामदेव ने बढ़ाया संधि का हाथ
    स्वामी रामदेव ने रक्षाबंधन के मौके पर कंगना रनौत संग अपना विवाद भुलाते हुए उन्हें मिठाई-तोहफे भेजे. मीडिया के सामने उन्होंने खुद इस बात का ऐलान किया, और अपने विवाद पर चुप्पी तोड़ी. रामदेव ने कहा- बहन कंगना रनौत को गिफ्ट और मिठाई हम बाई पोस्ट भेज रहे हैं. किसी भी कारण से देश में नफरत नहीं होनी चाहिए और ना ही एक दूसरे के प्रति बैर की भावना होनी चाहिए. इसलिए हमने बैर का परित्याग कर दिया है। 

    रामदेव ने बताया कि तोहफे और मिठाई भेजने के साथ-साथ वो कंगना रनौत को फोन भी करेंगे. उन्होंने कहा, 'पिछले दिनों एक विवाद उठा था कि स्वामी रामदेव और कंगना के बीच कहीं विवाद तो नहीं हो गया है. इस विवाद को संवाद से खत्म करें और आज हम बहन कंगना को फोन भी करेंगे और उनको बोलेंगे कि बहन कंगना रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। 

    कंगना ने स्वीकार किया योग गुरू का प्यार
    स्वामी रामदेव से आए इस मैसेज को पाकर कंग
    ना भी खुश हुईं. उन्होंने उनके भेजे हुए प्यार को स्वीकार किया और उन्हें अपना बड़ा भाई बताया. इंस्टाग्राम स्टोरी पर बीजेपी सांसद ने लिखा- त्योहार का दिन होता ही सब भूल-चूक माफ करने के लिए है. मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छा कहा कि विवाद नहीं संवाद होना चाहिए. आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं. बहुत धन्यवाद, ईश्वर आपको लंबी आयु दे। 

    बता दें कि रामदेव ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कंगना के गटर बयान पर कहा था कि उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं है. उनके खिलाफ पार्टी को एक्शन लेने की जरूरत है. रामदेव ने उनके बचपन और पढ़ाई-लिखाई पर भी सवाल उठाए थे, जिससे कंगना काफी नाराज हुई थीं। 

  • मुंबई के विस्तार का मेगा प्लान! पालघर में बसाई जाएगी Mumbai 4.0, बदल जाएगी विरार-वसई की तस्वीर

    मुंबई के विस्तार का मेगा प्लान! पालघर में बसाई जाएगी Mumbai 4.0, बदल जाएगी विरार-वसई की तस्वीर

    मुंबई

    मुंबई में आबादी और संसाधनों पर बढ़ते बोझ के बीच मुंबई 3.0 के साथ ही चौथी मुंबई बनाने की तैयारी हो रही है. ये चौथी मुंबई पालघर जिले में बनेगी. विरार, वसई बेल्ट के साथ बोईसर और वधावन के बीच ये आधुनिक शहर होगा. इस मुंबई 4.0 में भारत का सबसे बड़ा पोर्ट, एयरपोर्ट, बुलेट ट्रेन स्टेशन के साथ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और मल्टी मॉडल कॉरिडोर होगा, जो इसे मुंबई से कई गुना तेज रफ्तार वाला शहर बनाएगा.  पालघर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) का हिस्सा है और इसकी सीमाएं दक्षिण में मुंबई और ठाणे से लगी हैं. पालघर जिले का वसई-विरार सीधे मुंबई महानगर से जुड़ा है और मुंबई लोकल ट्रेन से भी जुड़ा है. इससे पहले रायगड जिले की पेन, उरण और पनवेल तालुका के 124 गांवों को मिलाकर 323 किमी के एरिया में तीसरी मुंबई का खाका खींचा गया है, जो नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु से लिंक है। 

    मुंबई 4.0 पालघर में जिले में बसेगी
    पालघर जिला मुख्यालय मुंबई से 87 किलोमीटर दूर है लेकिन जिले की दक्षिणी सीमाएं मुंबई और ठाणे शहर से सटी हैं.पालघर जिला, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक और एक्सपोर्ट हब बना रहा है. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को 2030 तक 140 अरब डॉलर से दोगुना बढ़ाकर 300 अरब डॉलर के लक्ष्य पाने के लिए मुंबई 4.0 का खाका खींचा गया है। 

    मुंबई से मुंबई 4.0 तक का प्लान
    मुंबई 1.0: साउथ और सेंट्रल मुंबई का एरिया, बांद्रा, अंधेरी, बोरीवली, जुहू, कुर्ला, घाटकोपर, मुलुंड, दादर, माटुंगा परेल आदि

    मुंबई 2.0: नवी मुंबई को मुंबई का विस्तार कहते हैं, वाशी, नेरुल, खारघर और पनवेल, सीवुड्स इसके प्रुख इलाके हैं. 

    मुंबई 3.0: रायगड जिले की उरण, पेन और पनवेल तालुका के के 124 गांव, अटल सेतु  और नवी मुंबई एयरपोर्ट से नजदीक

    मुंबई 4.0: पालघर में वधावन, दहाणू, बोईसर और पालघर तालुका का तटीय और औद्योगिक क्षेत्र, वसई-विरार बेल्ट भी जुड़ा है

    भारत का समुद्र में बना ऑफशोर एयरपोर्ट
    मुंबई 4.0 में वधावन और दहाणू परियोजनाएं सबसे बड़ी हैं, जहां देश का सबसे बड़ा मेगा वधावन बंदरगाह और भारत का पहला समुद्र में बना ऑफशोर एयरपोर्ट बन रहा है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन, उत्तन-विरार सी-लिंक, मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे और मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब यह एयरपोर्ट प्रस्तावित है. ये व्यापार और लॉजिस्टिक्स का सबसे बड़ा सेंटर होगा. बोईसर और पालघर तालुका में सिडको एक उन्नत औद्योगिक टाउनशिप बसा रही है. बोईसर में बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और एंप्लायेंट सेंटर बन रहा है. वसई-विरार बेल्ट में मुंबई की भीड़भाड़ को कम करने के लिए यहां बुलेट ट्रेन के दो स्टेशन विरार और बोईसर बन रहे हैं. साथ ही विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर तैयार हो रहा है

    चिंचानी बीच पर वधावन पोर्ट 
    चिंचानी बीच पर वधावन पोर्ट JNPA और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड द्वारा 76,220 करोड़ से अधिक की लागत से 1448 हेक्टेयर में विकसित हो रहा ग्रीनफील्ड पोर्ट है. इसका 20 मीटर गहरा ड्राफ्ट दुनिया के सबसे बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम होगा. इसकी क्षमता JNPA से 3 गुना होगी. जवाहर लाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) की तुलना में इसकी क्षमता तीन गुना होगी. यह दुनिया के टॉप 10 पोर्ट में शामिल होगा और इससे 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 
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    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
    बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का बोईसर (पालघर) स्टेशन खुलने के बाद यहां से बीकेसी (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) की यात्रा 30 मिनट से भी कम वक्त में पूरी होगी. बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की 8 में से 7 सुरंगें पालघर जिले में हैं. इसमें ठाणे क्रीक के नीचे देश की पहली 7 किमी लंबी समुद्र के नीचे से गुजरने वाली रेल टनल शामिल है। 

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे का जंक्शन पालघर जिले से गुजरेगा. एमएमआरडीए (MMRDA)का नारंगी क्रीक ब्रिज प्रोजेक्ट भी चौथी मुंबई का हिस्सा है. यहां 850 करोड़ का 4 किमी लंबा पुल वसई-विरार को पालघर और बोईसर से सीधे जोड़ेगा. इससे यात्रा 40 किमी छोटी और 45 मिनट में पूरी हो जाएगी. उत्तन-विरार सी-लिंक एक समुद्री पुल परियोजना भी बन रही है. पालघर में नया हवाई अड्डा और सी लिंक कॉरिडोर भी बनाने का प्रस्ताव है। 

    बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेगा
    पालघर, तारापुर, बोईसर और वधावन को मिलाकर बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर बनना है. वधावन बंदरगाह से भारत के कुल समुद्री व्यापार (ब्लू इकोनॉमी) को बड़ा उछाल मिलेगा. इससे महाराष्ट्र की जीडीपी ग्रोथ में बड़ा उछाल होगा। 

  • पेट्रोलियम बाजार में भारत की बड़ी छलांग! UAE और सऊदी अरब को पछाड़कर बना इस देश का नंबर-1 सप्लायर

    पेट्रोलियम बाजार में भारत की बड़ी छलांग! UAE और सऊदी अरब को पछाड़कर बना इस देश का नंबर-1 सप्लायर

     नई​ दिल्ली

    अगर हम किसी देश को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सप्लाई करने बात करें तो सबसे पहले दिमाग में जिन देशों का नाम कौंधता है उनमें- सऊदी अरब, कतर, यूएई, ईरान, इराक शामिल होते हैं. इसके पीछे वाजिब कारण भी है. ये सभी ऐसे देश हैं जहां प्राकृतिक ईंधन संसाधनों की कोई कमी नहीं. भारत हमेशा से एक पेट्रोलियम आयातक देश रहा है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस समय भारत खाड़ी और अरब देशों को पछाड़कर कई देशों के लिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का प्रमुख निर्यातक बन गया है. इनमें एक नाम केन्या भी है। 

    अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में फ्यूल ट्रेड रूट्स बाधित होने से यूएई और सऊदी अरब की सप्लाई प्रभावित हुई. इसके बाद पूर्वी अफ्रीकी देश को पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के लिए भारत का रुख करना पड़ा है. भारत खाड़ी देशों को पछाड़ते हुए केन्या के लिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है। 

    सरकारी समझौतों से होती थी फ्यूल खरीद

    केन्या लंबे समय से सरकारी सपोर्ट वाले समझौतों के तहत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदता रहा है. इनमें पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल शामिल हैं. इनकी सप्लाई मुख्य रूप से सऊदी अरामको, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और एमिरेट्स नेशनल ऑयल कंपनी जैसी कंपनियों से होती थी. हालांकि, पश्चिम एशिया में पैदा हुई आपूर्ति बाधाओं के बाद केन्या को अपना फ्यूल सोर्स बदलना पड़ा। 

    भारत ने UAE और सऊदी को पीछे छोड़ा
    बेल्जियम की कमोडिटी डेटा कंपनी Kpler के आंकड़ों का हवाला देते हुए विश्व प्रसिद्ध एनर्जी एनालिस्ट अनस अलहाजी (Anas Alhajji) ने बताया कि भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल की सप्लाई में यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह भी कहा कि जुलाई में अफ्रीका को भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 

    अफ्रीका में भारतीय फ्यूल की मांग बढ़ी है
    अलहाजी के मुताबिक, जुलाई में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. उनके अनुसार, यूरोपीय संघ की पाबंदियों के बाद भारतीय कार्गो का एक हिस्सा यूरोप से हटकर अफ्रीकी बाजारों की ओर गया. ईयू ने तीसरे देशों से ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, जिन्हें रूसी क्रूड से रिफाइन किया गया था. इसके बाद भारतीय रिफाइनरों के लिए अफ्रीकी बाजारों में अवसर बढ़े। 

    भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी ताकत
    भारत की बढ़ती भूमिका के पीछे उसकी मजबूत रिफाइनिंग कैपबिलिटी अहम है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनर और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है. देश में 22 चालू रिफाइनरियों की कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन सालाना है। 

    वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात किया. खास बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और उसे देश की रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के रूप में दुनिया के अलग-अलग बाजारों में भेजता है। 

    जामनगर की रिफाइनिंग क्षमता की भी चर्चा
    भारत में दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स भी मौजूद है. गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स भारत की विशाल रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा उदाहरण है. रिफाइनिंग सेक्टर में भारत की इसी ताकत के बीच रूस से जुड़ा एक और बदलाव देखने को मिला है. यूक्रेन के हमलों से रूसी रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ने के बाद रूस ने भी भारत से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खरीद शुरू की है। 

    भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट केन्या गए
    केन्या के न्यूज आउटलेट Kenyans की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या में यूएई से पेट्रोलियम सप्लाई जनवरी में करीब 90,000 बैरल प्रतिदिन थी, जो अगस्त में घटकर लगभग 15,000 बैरल प्रतिदिन रह गई. दूसरी ओर, भारतीय सप्लाई की भूमिका बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 19 मार्च को गुजरात के सिक्का बंदरगाह से लदा करीब 82.38 मिलियन लीटर केरोसिन केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पहुंचा. इसी बंदरगाह से अप्रैल के लिए 156.75 मिलियन लीटर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई निर्धारित थी. इसमें 81.15 मिलियन लीटर केरोसिन और 75.6 मिलियन लीटर डीजल शामिल था। 

    जुलाई में केन्या एक्सपोर्ट में जोरदार उछाल
    भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में केन्या को भारत का कुल एक्सपोर्ट मूल्य के आधार पर 151.41 फीसदी बढ़ा. केन्या इस महीने भारत के पांच सबसे तेजी से बढ़ते एक्सपोर्ट बाजारों में शामिल रहा. हालांकि, यह आंकड़ा सभी तरह के उत्पादों के निर्यात से जुड़ा है, केवल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से नहीं. इसी अवधि में भारत का ग्लोबल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट भी तेजी से बढ़ा. जुलाई में इसका मूल्य 4.13 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर पहुंच गया, यानी सालाना आधार पर करीब 67.64 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। 

    भारत-केन्या ट्रेड में पेट्रोलियम प्रोडक्ट अहम
    भारत और केन्या के बीच व्यापारिक संबंधों में भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अहम भूमिका है. भारत 2025-26 में केन्या का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार करीब 4.31 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का एक्सपोर्ट लगभग 4.01 अरब डॉलर और केन्या से भारत का इंपोर्ट करीब 290 मिलियन डॉलर रहा. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट आइटम में शामिल रहे. फिलहाल, मिडिल ईस्ट में सप्लाई रूट्स में आई बाधाओं और अफ्रीकी बाजारों में बढ़ती मांग ने भारत के लिए नया अवसर पैदा किया है. केन्या में भारतीय फ्यूल की बढ़ती हिस्सेदारी और जुलाई के एक्सपोर्ट आंकड़े इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं।