Category: देश

  • सुभाष चंद्रा के कर्ज सैटलमेंट पर विजय माल्या का तंज, जानिए क्या है बैंकिंग का ‘हेयरकट’ खेल

    सुभाष चंद्रा के कर्ज सैटलमेंट पर विजय माल्या का तंज, जानिए क्या है बैंकिंग का ‘हेयरकट’ खेल

     नई दिल्ली

    अगर आप किसी बैंक से 100 रुपये का लोन लें और बाद में बैंक के पास जाकर कहें कि भाई मेरे पास पैसे नहीं हैं, आप सिर्फ 30 पैसे रखकर मेरा पूरा कर्ज माफ कर दो… तो सोचिए बैंक मैनेजर का क्या रिएक्शन होगा? आम इंसान के लिए तो यह किसी हसीन सपने जैसा लगता है, लेकिन भारत के बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऐसा सचमुच हो रहा है. देश के इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मीडिया दिग्गज और ज़ी ग्रुप के चेयरमैन रहे सुभाष चंद्रा को लेकर एक ऐसा ही फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम और आर्थिक हलकों में हंगामा मचा दिया है. इस मामले में विजय माल्या और कांग्रेस का रिएक्शन और भी दिलचस्प है। 

    इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल ने सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये के भारीभरकम कर्ज से मुक्त होने की हरी झंडी दे दी है. इसके बदले उन्हें चुकाने होंगे महज 6.5 करोड़ रुपये. अगर इसका हिसाब लगाएं तो यह कर्ज की कुल राशि का लगभग 99.97 प्रतिशत हिस्सा माफ कर देने जैसा है. सरल शब्दों में कहें तो 100 रुपये के भारी-भरकम कर्ज के बदले महज 30 पैसे देकर पूरे कर्ज से आजादी मिल गई। 

    विजय माल्या की बधाई में छुपा दर्द और तंज
    जैसे ही यह खबर बाहर आई, ब्रिटेन में रह रहे भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर अपनी भड़ास निकालते हुए सुभाष चंद्रा को खास अंदाज में बधाई दी और साथ ही देश के इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल पर करारा तंज कसा। 

    माल्या ने चुटकी लेते हुए लिखा कि “मुझसे सरकारी तौर पर घोषित 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले अब तक 14,100 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं. यानी जितने का कर्ज था, उससे डबल से ज्यादा पैसा वसूला गया, फिर भी मुझे कोई राहत नहीं मिल रही है. और दूसरी तरफ 22,000 करोड़ का कर्ज महज 6.5 करोड़ देकर खत्म हो रहा है. शायद यही भारत का कर्ज सैटल करने वाला असली 'जस्टिस' है… और कमाल की बात देखिए, इस पर कोई सवाल भी नहीं पूछ रहा है!

    विजय माल्या का यह तंज भले ही खुद को पीड़ित दिखाने का एक तरीका हो, लेकिन उनके इस बयान ने भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम की एक बड़ी और कड़वी सच्चाई को सरेआम उजागर कर दिया है. माल्या खुद बैंकों का पैसा डकार कर विदेश भाग गए थे और उन्होंने भी कभी बैंकों की दरियादिली का जमकर फायदा उठाया था. लेकिन आज जब वे दूसरों को इतनी आसानी से छूट मिलते देख रहे हैं, तो उनका दर्द छलकना स्वाभाविक ही है। 

    'हेयरकट' या फिर सीधा 'मुंडन'? कांग्रेस का तीखा हमला
    इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल दरअसल देश में दिवालिया हो रही कंपनियों, बैंकों और सरकारी देनदारियों का तालमेल बैठाकर फैसला सुनाती है. फाइनेंशियल जर्नलिज्म की भाषा में इसे 'हेयरकट' कहा जाता है. यानी कर्जदार के सिर से कर्ज का बोझ थोड़ा हल्का कर देना. लेकिन जब सिर से 99.97% बाल ही साफ कर दिए जाएं, तो उसे हेयरकट कौन कहेगा?

    इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और ट्रिब्यूनल पर जोरदार हमला बोला. जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि इंसॉल्वेंसी के नाम पर दी गई यह राहत दरअसल 'हेयरकट' नहीं, बल्कि बैंकों का सरेआम 'मुंडन' है. उन्होंने कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC 2016) को इसलिए लाया गया था ताकि बैंकों का फंसा हुआ पैसा जल्दी वापस आ सके, लेकिन इस तरह 99.9% से ज्यादा का डिस्काउंट देना इस कानून का सीधा-साधा मखौल उड़ाना है। 

    किसकी जेब से जा रहा है यह पैसा?
    IBC कानून 2016 ने बेशक कई डिफाल्टरों से वसूली को आसान और तेज बनाया है, लेकिन इसने देश के बैंकिंग ढांचे की सबसे बड़ी कमजोरी की पोल खोलकर रख दी है. सवाल यह उठता है कि जब 22 हजार करोड़ का कर्ज सिर्फ 6.5 करोड़ में सैटल हो जाता है, तो बाकी के 21,999 करोड़ रुपये का नुकसान कौन उठाता है?

    जवाब साफ है कि यह पैसा देश के आम करदाताओं (Taxpayers) और बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई जमा करने वाले आम नागरिकों का है. जब बड़े उद्योगपतियों को बिना किसी कड़े रिपेमेंट प्लान के हजारों करोड़ के लोन बांट दिए जाते हैं, और बाद में उन्हें 'इंसॉल्वेंसी' के नाम पर कौड़ियों के भाव राहत दे दी जाती है, तो बैंकों का बैलेंस शीट बिगड़ता है. इस घाटे की भरपाई अंततः आम जनता की जेब से ही होती है। 

    विजय माल्या भले आज नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हों और सुभाष चंद्रा के बहाने व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हों, लेकिन सच यह है कि हमारे देश में सरकारों और बैंकों द्वारा बिना रिपेमेंट की क्षमता जांचे खुले हाथ से कर्ज बांटने की जो बीमारी रही है, उसका फायदा हर बड़े डिफाल्टर ने कर्ज लेते वक्त उठाया है. अब देखना यह होगा कि क्या संसद और नियामक संस्थाएं इस 'मुंडन संस्कृति' पर कोई लगाम लगाती हैं या फिर वही ढर्रा चलेगा कि आम आदमी तो लोन के लिए बैंक के चक्कर काटता रहे और बड़े दिग्गज मजे में हजारों करोड़ का कर्ज माफ करवाते रहें। 

    कड़वी सच्चाई : आम आदमी के लोन की हकीकत ये है कि वह 100 रुपए के लोन पर 50 रुपए सूद भर चुका होता है. लेकिन, इसके बाद यदि उसका 50 पैसा भी बाकी रह जाता है तो उसे नोटिस भेजा जाने लगता है. सिबिल स्कोर बिगाड़ दिया जाता है. कर्ज चुका न पाना बेशक अच्छी बात नहीं है. लेकिन, ये आम आदमी के लिए ‘पाप’ और बड़े कारोबारी के लिए यह मामूली बात क्यों हो जाती है?

  • पानी के लिए पाकिस्तान की नई अपील! सिंधु नदी के मुद्दे पर भारत से की बड़ी गुहार

    पानी के लिए पाकिस्तान की नई अपील! सिंधु नदी के मुद्दे पर भारत से की बड़ी गुहार

    नई दिल्ली

    भारत की सिंधु जल संधि पर सख्ती बरकरार है. सिंधु जल संधि खत्म होने से पाकिस्तान पानी के बगैर तड़प रहा है. उसकी आवाम बूंद-बूंद को तरस रही है. पाकिस्तान बार-बार सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगा रहा है. भारत है कि टस से मस नहीं हो रहा. भारत का स्टैंड क्लियर एंड लाउड है. खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. पहले आतंकवाद से तौबा करो, तभी पानी मिलेगा. भारत की इसी सख्ती को देखते हुए एक बार फिर पाकिस्तान गिड़गिड़ाया है. इस बार तो अमेरिका में जाकर पाकिस्तान ने गुहार लगाई है कि प्लीज कोई भारत से सिंधु का पानी दिलवा दो।  

    जी हां, भारत के साथ सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गुहार लगाता नजर आया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है. पाकिस्तान की 25 करोड़ से ज्यादा आबादी की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है. उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की. इशाक डार ने यह बयान अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार में दिया. उन्होंने भारत के अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले पर चिंता जताई. गौरतलब है कि पहलगाम अटैक के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता खत्म कर दिया था। 

    सिंधु जल संधि पर फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान
    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय स्थिरता के लिए जल सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है. इशाक डार ने कहा, ‘भारत का अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित करने का फैसला इस संधि के तहत किसी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता.’ पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने एक तरफ भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत और सहयोग की जरूरत बताई, लेकिन दूसरी तरफ संधि बहाल नहीं होने की स्थिति में इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी. बहरहाल, डार के बयान से साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान संधु जल संधि स्थगित होने से कितना झुंझला गया है। 

    सिंधु का पानी पाकिस्तान के लिए इतना अहम क्यों?
    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि सिंधु बेसिन पाकिस्तान के 25 करोड़ से ज्यादा लोगों की जीवनरेखा है. इशाक डार के मुताबिक, पाकिस्तान की कृषि, खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन, लोगों की आजीविका और आर्थिक विकास सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में पानी की सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ जाती है. उन्होंने कहा कि सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा. इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। 

    जल संकट के लिए जलवायु परिवर्तन का भी दिया हवाला
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने देश के बढ़ते जल संकट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे ज्यादा जल-संकट वाले देशों में शामिल है. पिछले कई दशकों में देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भी बड़ी चुनौती बताया. डार ने कहा कि बारिश के बदलते पैटर्न, ग्लेशियरों के पिघलने, विनाशकारी बाढ़, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और पानी के प्रवाह में बढ़ती अनिश्चितता ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे पर ज्यादा सहयोग होना चाहिए. हालांकि, पाकिस्तान की यह अपील ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। 

    गिड़गिड़ा भी रहा और धमका भी रहा
    इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगते हुए भारत को चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के तहत मिले पानी के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई तो इसके क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सिंधु नदी को टकराव की वजह नहीं बनना चाहिए. यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन, आजीविका और सभ्यता का स्रोत रही है. डार ने कहा कि साझा जल संसाधनों को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. पाकिस्तान की ओर से यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर रखा है। 

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने लिया था बड़ा फैसला
    अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था. इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी. भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया था.भारत ने साफ कहा था कि आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते. इसी संदर्भ में भारत ने अपनी नीति को ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ के सिद्धांत को दोहराया. नई दिल्ली का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से भारत के खिलाफ चल रहे सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ ठोस, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को सामान्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा। .

    पाकिस्तान की अपील के पीछे बढ़ता दबाव
    पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और संसाधन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में पानी का मुद्दा उसके लिए और भी संवेदनशील हो गया है. कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई का पानी बेहद महत्वपूर्ण है. इसके अलावा बिजली उत्पादन और खाद्य सुरक्षा भी जल संसाधनों से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाता रहा है. अब इशाक डार ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में समर्थन मांगा है. हालांकि भारत अपने रुख से पीछे हटता नहीं दिख रहा है. नई दिल्ली का स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद और पानी पर सहयोग को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. भारत का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में पुराने ढर्रे पर द्विपक्षीय सहयोग संभव नहीं है। 

     

  • क्लाइमेट जस्टिस पर CJI सूर्यकांत का दो टूक संदेश! अमीर देशों से पूछा- हमें इतनी जल्दी क्यों?

    क्लाइमेट जस्टिस पर CJI सूर्यकांत का दो टूक संदेश! अमीर देशों से पूछा- हमें इतनी जल्दी क्यों?

    लंदन

    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इंग्लैंड की राजधानी लंदन में बैठकर अमीर देशों को खूब सुनाया। उन्होंने विकसित और विकासशील देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने को लेकर असमानता का मुद्दा उठाया। सीजेआई ने कहा कि जिन औद्योगिक देशों ने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में करीब दो सदियां लगाईं, वे अब औद्योगीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे देशों से कुछ ही दशकों में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सचिवालय में 56 देशों के साझा मंच पर ‘जलवायु न्याय पर नीति संवाद’ को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

    ‘तेजी से बदलाव नहीं कर पाने पर विकासशील देशों की आलोचना’
    रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने कहा कि जो देश अभी औद्योगीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, उनसे तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को कहा जा रहा है। ऐसा नहीं कर पाने पर कई बार उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, जिन देशों की ओर से यह बदलाव तेजी से करने की मांग की जा रही है, उन्होंने खुद कोयले और तेल के सहारे अपनी ताकत और अर्थव्यवस्था खड़ी करने में दो सदियां लगाईं।

    कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम पर भी निर्भरता
    CJI सूर्यकांत ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों के सामूहिक रूप से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की प्रक्रिया कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम पर निर्भर करती है। इन खनिजों के खनन से पर्यावरण और समाज पर असर पड़ता है।

    उन्होंने चेताया कि विकासशील देश अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पहले ही कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें अवास्तविक गति से स्वच्छ ऊर्जा की ओर धकेलने से समाधान के बजाय नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव की तात्कालिकता को निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी के सिद्धांतों के साथ संतुलित करना जरूरी है।

    ‘पर्यावरण संरक्षण और विकास को आमने-सामने खड़ा न करें’
    CJI ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने पर्यावरण, पारिस्थितिकी और लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जाम्बिया हाईकोर्ट के एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें पानी को प्रदूषित करने वाली एक कॉपर खनन कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया था। उनके मुताबिक, कॉमनवेल्थ देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को आसान बना सकते हैं, ताकि इसकी बड़ी कीमत उनकी आबादी को न चुकानी पड़े।

    CJI ने कहा कि जब किसी देश की अदालत के सामने जलवायु से जुड़ा सवाल आए तो हर देश को अलग कानूनी शब्दावली विकसित करने की जरूरत नहीं है। अदालतें कॉमनवेल्थ के दूसरे देशों में उपयोगी साबित हुए विचारों, तरीकों और समाधानों को अपना सकती हैं, हालांकि उन्हें अपने संवैधानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय हालात के अनुसार ढालना होगा।

    उन्होंने कहा कि अदालतों को ऐसे समाधान तलाशने के लिए तैयार रहना चाहिए जो पर्यावरण की रक्षा करें, लेकिन विकास की जायज जरूरतों को भी नजरअंदाज न करें। पर्यावरण संरक्षण और विकास को हमेशा ऐसी दो अलग-अलग राहों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, जहां एक की जीत के लिए दूसरे को हारना जरूरी हो।
    घायल अर्धसैनिक जवानों के लिए सड़क चौड़ी करने का मामला भी बताया

    CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के सामने आए एक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अधिकारियों पर घायल अर्धसैनिक बलों के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक पहुंच बनाने के लिए सड़क चौड़ी करने के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटने का आरोप था। उन्होंने कहा कि कोर्ट न तो पेड़ काटने वाले अधिकारियों को इनाम देना चाहता था और न ही घायल जवानों के लिए एंबुलेंस के रास्ते से इनकार करना चाहता था।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण रोकने के बजाय बड़े पैमाने पर क्षतिपूरक वनीकरण का आदेश दिया। CJI ने कहा कि उस वनीकरण की निगरानी अब भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण हमेशा तराजू के दो विपरीत पलड़े नहीं होने चाहिए। कई बार अदालत का काम न्यायिक रचनात्मकता के जरिए ऐसा तीसरा रास्ता तलाशना होता है, जिससे दोनों उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

  • ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं! कलकत्ता हाईकोर्ट की बात नहीं मानने पर कोलकाता में FIR दर्ज

    ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं! कलकत्ता हाईकोर्ट की बात नहीं मानने पर कोलकाता में FIR दर्ज

    कलकत्ता 
    28 अगस्त को पश्चिम बंगाल तृणमूल छात्र परिषद (WBTMCP) के स्थापना दिवस समारोह के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है। कार्यक्रम के आयोजकों को भी आरोपी बनाया गया है।

    शिकायत के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान तृणमूल छात्र परिषद के समर्थकों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को जबरन तोड़ दिया, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और कैथेड्रल रोड पर यातायात को पूरी तरह से बाधित कर दिया। इसके अलावा आयोजकों पर अदालत द्वारा निर्धारित समय-सीमा के बाद भी कार्यक्रम जारी रखने का आरोप लगा है।

    हेस्टिंग्स थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ममता बनर्जी और आयोजकों के खिलाफ धारा 61(2) आपराधिक साजिश, धारा 223 (आदेश की अवज्ञा करना), धारा 125(a) (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना), धारा 132 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    क्या था कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश
    आपको बता दें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बैठक सड़क के एक तरफ आयोजित की जानी थी, जबकि गाड़ियां बगल की लेन से गुजरनी थीं। भीड़ के कारण जब ट्रैफिक लेन में जाम लग गया, तो ममता बनर्जी ने अपनी सभा रोक दी और स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप किया। उन्होंने पुलिस की खराब व्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जतायी और आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम को बाधित करने की साजिश थी।

    ममता ने भाजपा पर लगाया सत्ता चोरी का आरोप
    आपको बता दें कि इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि उसने चोरी से बंगाल पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा, "चोरी कर बंगाल पर कब्जा किया गया है, लेकिन आप चिंता न करें। बंगाल में एक और बदलाव आयेगा। बहुत जल्द तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापस आयेगी। और भाजपा के अपने लोग ही भाजपा को जवाब देंगे।"

    ममता ने भाजपा पर बाहुबल के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी से जुड़े 'अराजक तत्व' पूरे बंगाल में राजनीतिक गतिविधियों पर हावी हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "ईश्वर नाम की भी कोई चीज होती है। उन्होंने कहा था कि मुझे बाहर नहीं निकलने दिया जायेगा। मैं देखना चाहती हूं कि उनमें कितनी हिम्मत है। सब कुछ बाहुबल से नहीं चलाया जा सकता।"

    तृणमूल छात्र परिषद के आधिकारिक गुट का मुख्य कार्यक्रम कैथेड्रल रोड पर आयोजित किया गया था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट ने एस्प्लेनेड के रानी राशमोनी एवेन्यू में अपना कार्यक्रम रखा। न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए, किसी भी गुट को मेयो रोड पर बैठक करने की अनुमति नहीं दी गई थी।

  • SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान: आतंकवाद पर नहीं चलेगा कोई समझौता

    SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान: आतंकवाद पर नहीं चलेगा कोई समझौता

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य की दो देशों की यात्रा पर रवाना हुए। वे SCO समिट में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस संगठन के लिए भारत के विज़न को आगे बढ़ाने और आतंकवाद के खतरे से मुक्त क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं।

    मोदी पहले उज़्बेकिस्तान (29-30 अगस्त) जाएंगे और फिर बिश्केक, किर्गिज़ गणराज्य (30 अगस्त-1 सितंबर) में समिट में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि उनकी यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करेगी और इस क्षेत्र के साथ सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करेगी। रवाना होने से पहले अपने बयान में मोदी ने कहा कि यह यात्रा शांति, स्थिरता और समृद्धि की साझा कोशिशों को आगे बढ़ाएगी; ये मूल्य दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव के केंद्र में हैं।

    उन्होंने कहा, "भारत 2017 से SCO का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मैं सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर आधारित इस क्षेत्र के लिए भारत के विज़न को आगे बढ़ाने और आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खतरे से मुक्त क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं। ये खतरे हमारे पड़ोस और उससे आगे शांति और स्थिरता के लिए खतरा बने हुए हैं।"

    प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के निमंत्रण पर वे 29-30 अगस्त को उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के लिए ताशकंद जाएंगे। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने तथा 'विकसित भारत' और 'यांगी उज़्बेकिस्तान' (नया उज़्बेकिस्तान) के हमारे साझा विज़न को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं।"

    मोदी ने कहा कि वे ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज़ में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर भी जाएंगे। यह हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले करीबी सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ताशकंद से किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे। वहां वे 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जो इस अहम संगठन के 25 साल पूरे होने का मौका है।

    उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति झापारोव और SCO के दूसरे नेताओं से मिलने और छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शामिल होने का भी बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं। यह मध्य एशिया की समृद्ध जीवित विरासत का जश्न है, जिसका भारत बहुत सम्मान करता है।" अधिकारियों ने बताया कि मोदी SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें वे सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों के मामले में भारत की प्राथमिकताओं पर ज़ोर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शिखर सम्मेलन के दौरान SCO नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।

     

  • BJP की पदयात्रा से पहले कर्नाटक सरकार को झटका! घोटाले में घिरे मंत्री बी नागेंद्र ने छोड़ा पद

    BJP की पदयात्रा से पहले कर्नाटक सरकार को झटका! घोटाले में घिरे मंत्री बी नागेंद्र ने छोड़ा पद

    बेंगलुरु

    कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार को कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में कथित 89 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नागेंद्र का यह इस्तीफा रायचूर से बेल्लारी तक होने वाली भाजपा की 10 दिन की पदयात्रा से ठीक पहले आया है। बी नागेंद्र इस्तीफे की जानकारी देते हुए मीडिया के सामने भावुक हो गए और रो पड़े।

    इस्तीफा देते हुए बी नागेंद्र ने आरोप लगाया कि मनुवादियों ने उन्हें टारगेट किया है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि आदिवासी आदमी आगे बढ़े। भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मुझे ईडी, सीबीआई से नहीं डरा सकते हैं। बता दें कि कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र से जुड़े मामले में दखल दिया था और सीबीआई ने वाल्मीकि कॉर्पोरेशन स्कैम में मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी मांगी थी।

    सीएम शिवकुमार ने दिए थे संकेत
    मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को संकेत दिए कि मंत्री बी नागेंद्र अपने कैबिनेट पद को लेकर जल्द ही खुद बड़ा फैसला लेंगे। शिवकुमार ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि नागेंद्र ने सुबह उनसे बात की है और वह जल्द ही मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागेंद्र ने खुद को कांग्रेस का अनुशासित सिपाही बताते हुए पार्टी के फैसले का पालन करने की बात कही है।

    पहले भी दिया था इस्तीफा, फिर हुई वापसी
    गौरतलब है कि वाल्मीकि निगम के पैसे को ट्रांसफर करने के आरोपों के बाद नागेंद्र ने पहले भी इस्तीफा दिया था। हालांकि, जांच जारी रहने के दौरान मंत्रिमंडल में उनकी वापसी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर था। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागेंद्र का इस्तीफा अपेक्षित था और इस पर करीब दस दिन पहले ही फैसला लिया जा चुका था। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार बार-बार खुद को ऐसे राजनीतिक संकट की स्थिति में क्यों ले आती है।

    आखिरी तक बचाव करते रहे डिप्टी सीएम परमेश्वर
    वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को ही बी. नागेंद्र का बचाव किया था और कहा था कि उनके इस्तीफे की मांग करने का कोई आधार नहीं है। परमेश्वर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि विपक्ष बिना किसी कारण के नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहा है। उन्होंने कॉर्पोरेशन से कथित तौर पर डायवर्ट की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा वापस मिलने की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "हमने उन्हें बार-बार बताया है कि उनके इस्तीफे की कोई जरूरत नहीं है। सीबीआई या ईडी की ओर से दायर चार्जशीट में उनका नाम नहीं है और उनसे कोई पैसा भी बरामद नहीं हुआ है।" डीसीएम ने बताया कि जांच एजेंसियों ने इस मामले से जुड़े 84 करोड़ रुपये में से 79 करोड़ रुपये बरामद कर लिए हैं। हालांकि, देर रात बी नागेंद्र ने पद से इस्तीफा दे दिया।

  • पहले विदेशी मदद से किया इनकार, अब भारत-चीन से सहायता की मांग; दिल्ली ने दिखाई बड़ी दरियादिली

    पहले विदेशी मदद से किया इनकार, अब भारत-चीन से सहायता की मांग; दिल्ली ने दिखाई बड़ी दरियादिली

    नई दिल्ली
       नेपाल में आई भीषण बाढ़ में प्रभावित इलाकों में अंतर्राष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों की मदद न लेने के अपने फैसले को नेपाल सरकार ने बदला है. यह फैसला उन देशों के राजनयिक दबाव के बाद लिया गया जिनके नागरिक इस आपदा में लापता है। 

    भारत की टेक्निकल टीम मदद के लिए काठमांडू पहुंच गई हैं. भारतीय वायु सेना भी नेपाल में राहत-बचाव अभियान में जुटी है. भारत ने दवाइयों और खाने-पीने की चीजें समेत 10 टन जरूरी राहत सामग्री नेपाल भेजी है. प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान 10 टन जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा है। 

    नेपाल सरकार ने बुधवार 26 जून को कहा था कि उसके बचाव कर्मी खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी बचाव टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी. हालांकि अब नेपाल सरकार ने अपना रुख बदलते हुए DNA टेस्ट, फॉरेंसिक जांच और बचाव कार्य जैसे क्षेत्रों में सीमित अंतर्राष्ट्रीय मदद लेने का फैसला लिया है। 

    'द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से सरकार पर विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने का काफी दबाव था. बाढ़ में कई विदेशी नागरिक लापता हुए हैं. हम कुछ खास क्षेत्रों में सीमित संख्या में एक्सपर्ट्स को आने की इजाज़त दे रहे हैं। 

    इन देशों से जाएगी मदद
    राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर नेपाल की बालेन शाह सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति के माध्यम से भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को सुरंग से बचाव, डीएनए और फोरेंसिक जांच में अनुभवी विशेषज्ञों और तकनीशियनों की टीमों को काठमांडू भेजने की मंजूरी दे दी है।

    कई देशों ने नेपाल को राहत सहायता की घोषणा करते हुए विशेषज्ञ टीमें भेजने की इच्छा जताई थी। बालेन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। काठमांडू में कम से कम दो देशों के दूतावासों के अधिकारियों ने कहा कि वे अपनी टीमों को मदद की अनुमति देने का अनुरोध कर रहे थे लेकिन उन्हे सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    हमारे देश के लोगों का पता लगाने में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और तीन दिन बीत चुके हैं। हम वास्तव में उनके बारे में चिंतित हैं। मदद के लिए हमारे अनुरोधों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

    भारत ने की मदद की पेशकश
    भारत समेत कई देशों ने नेपाल को खोज और बचाव कार्यों में मदद की सार्वजनिक रूप से पेशकश की है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत ने टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और अपनी नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स की टीमों को भेजने की पेशकश की है।

    दक्षिण कोरिया ने भी सार्वजनिक रूप से अतिरिक्त मदद की पेशकश की है। गुरुवार को दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने नेपाली विदेश मंत्री खनाल से बात की। उन्होंने नेपाल में दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। इनमें नौ लोग ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

    हमने मदद के लिए तीन क्षेत्रों की पहचान की है और उसी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहायता मांग रहे हैं। चार देशों की विशेषज्ञ टीमों को रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को बचाने की अनुमति दी जाएगी। बाढ़ से चौदह पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं- आठ रसुवा में और छह नुवाकोट में।

    नेपाल में बाढ़ से तबाही
    नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार तक 550 लोगों की मौत हो चुकी है और 977 अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 31 देशों के 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 भारतीय नागरिक बाढ़ के बाद लापता हैं। अमेरिका, यूके और कई दूसरे देशों के नागरिक भी लापता हैं।

    बता दें, चीन-नेपाल सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में 77 ईशा तीर्थयात्रियों के अब भी लापता होने की खबर है. विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रॉयटर्स से कहा, "नेपाल को उन तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी मदद की जरूरत है, जहां उसके पास एक्सपर्टाइज की कमी है. लेकिन सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। 

    नेपाल में आई भीषण बाढ़ में तबाही का आंकड़ा 600 के पार पहुंच गया है. अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं. इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। 

    रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण लापता हुए लोगों में से नवलपरासी जिले में शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए. आज ही, 48 शव और बरामद किए गए हैं। 
    पुलिस के मुताबिक, नवलपरासी पूर्व से होकर बहने वाली नारायणी नदी के अलग-अलग जगहों पर शुक्रवार शाम तक 158 शव मिले. DSP ने बताया कि नारायणी नदी के किनारे मिले शवों को विभिन्न अस्पतालों और वन कार्यालय के भवनों में सुरक्षित रखा गया है. उन्होंने बताया कि 9 शव अभी नदी किनारे ही हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारी की जा रही है। 

  • IRCTC Rules: टिकट बुकिंग के झंझट होंगे कम! जल्द होगा बड़ा बदलाव, मिनटों में होगा काम

    IRCTC Rules: टिकट बुकिंग के झंझट होंगे कम! जल्द होगा बड़ा बदलाव, मिनटों में होगा काम

     नई दिल्‍ली
    भारतीय रेलवे टूरिज्‍म कैटेरिंग एंड टूरिज्‍म कॉर्पोरेशन (IRCTC) एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव टिकट बुकिंग सिस्‍टम को लेकर है. इस बादलाव के बाद आपके टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ जाएगी और तेजी से टिकट बुकिंग होगी. इससे पीक टाइम में भी टिकट बुकिंग करने को लेकर दिक्‍कतें नहीं होंगी। 

    दरअसल, भारतीय रेलवे (IRCTC) एक मेजर टेक्‍नोलॉजी अपग्रेड पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश ऑलनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग को फास्‍टर और रिलाइबल बनाना है. खासकर तब जब पीक बुकिंग टाइम के दौरान डिमांड हाई पर रहती है। 

    इन बदलावों से वेबसाइट के अचानक धीमे होने, भारी ट्रैफिक और सेवा में रुकावट जैसी समस्‍याओं का समाधान होने की उम्‍मीद है, जिनका सामना यात्रियों को तब करना पड़ता है जब हजारों यूजर्स एक साथ टिकट बुक करने का प्रयास करते हैं। 

    IRCTC अपने टिकट बुकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करेगा
    इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, IRCTC अपनी नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग (NGET) प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना बना रहा है. इस अपग्रेड में सर्वर, स्‍टोरेज, नेटवर्किंग और सॉफ्टवेयर समेत कई चीजें शामिल हैं. अपग्रेड होने के बाद प्लेटफॉर्म की क्षमता काफी बढ़ जाएगी, जो हर मिनट पहले से कई गुना टिकट बुक करेगी। 

    हर मिनट कितने बुकिंग की होगी क्षमता? 
    IRCTC ने कहा है कि उसकी मौजूदा सिस्‍टम पहले ही लगभग 37,000 टिकट प्रति मिनट की क्षमता तक पहुंच चुकी है. अब सॉफ्टवेयर में अपग्रेड के बाद, यह क्षमता संभावित रूप से 1 लाख टिकट प्रति मिनट से ज्‍यादा हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेशन ने अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्‍टम के इंफ्रा के आधुनिकीकरण में लगभग 150 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है। 

    नया बैकअप सिस्‍टम 
    IRCTC बुकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के किसी एक हिस्से के काम करना बंद कर देने की स्थिति में रुकावट नहीं होगी या कम होगी, क्‍योंकि इसकी जगह पर एक्टिव आपदा रिकवरी सिस्‍टम पर भी काम चल रहा है. सरल शब्दों में कहें तो, इस सिस्‍टम को दो प्रोजेक्‍ट सेटअपों के साथ डिजाइन किया गया है जो सेवा को सुचारू रूप से चला सकते हैं। 

    अगर एक सिस्‍टम में कोई समस्या आती है, तो दूसरा सिस्‍टम ट्रैफिक को संभालना जारी रख सकती है, जिससे यात्रियों के बुकिंग प्लेटफॉर्म से बाहर होने की संभावना कम हो जाती है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, IRCTC आपदा रिकवरी सुविधा के लिए सिकंदराबाद को स्थान के रूप में विचार कर रहा है. कंपनी ने उच्च मांग वाले बुकिंग अवधियों के दौरान, जब यात्री सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे होते हैं, तो थोड़े समय के रुकावट के महत्व पर जोर दिया है। 

    सिस्‍टम को सरल बनाया गया
    IRCTC की नई वेबसाइट से बुकिंग प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से बाधित करने वाले कई तत्वों को हटा दिया गया है. इनमें अनावश्‍यक CAPTCHA जांच, पॉप-अप और चमकते ग्राफिक्स को कम कर दिया गया है, जिससे यात्रियों के लिए एक सरल इंटरफेस तैयार हुआ है. इसका उद्देश्‍य यूजर्स को उलझने के बजाय अपनी यात्रा का चयन करने और बुकिंग पूरी करने पर फोकस करने में आसानी देना है। 

  • LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर! नए कनेक्शन की बुकिंग को लेकर सरकार ने साफ की स्थिति

    LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर! नए कनेक्शन की बुकिंग को लेकर सरकार ने साफ की स्थिति

    नई दिल्ली

    पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर चल रहे विवाद की वजह से गैस की सप्लाई अब भी बाधित है. अब भारत स्थिति को देखते हुए LPG और LNG की खरीदारी अमेरिका से शुरू कर दी है. हालांकि देश में LPG गैस के नए कनेक्शन पर अब भी बैन लगा हुआ है. लोग गैस कनेक्शन के लिए लगातार आवेदन देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन नए कनेक्शन की बुकिंग सभी कंपनियों में बंद है. कंपनियों का कहना है कि मार्च 2026 से 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर का कोई नया कनेक्शन जारी नहीं किया गया है। 

    मौजूदा समय में केवल पुराने कनेक्शन वाले ग्राहकों को गैस कि सप्लाई दी जा रही है. वहीं जिन ग्राहकों का पुराना कनेक्शन बंद पड़ा है उसे केवल रिन्यू किया जा रहा है. इसके साथ लगातार KYC कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कि फर्जी कनेक्शन हटाए जा रहे हैं। 

    सरकार ने क्या दिया है बयान
    केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया है कि मौजूदा भू-राजनीति हालात के चलते नए LPG कनेक्शन पर फिलहाल रोक लगाई गई है. डिस्ट्रीब्यूटर मौजूदा ग्राहकों को रिफिल सप्लाई देने में प्राथमिकता दे रही है, जिससे सेवा बाधित न हो. मंत्रालय ने कहा है कि नए कनेक्शन पर रोक अस्थायी कदम है. हालात स्थिर होते ही नए कनेक्शन फिर से शुरू होने की उम्मीद है। 

    द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार FLDI के महासचिव पवन सोनी ने बताया कि अभी सप्लाई की स्थिति ठीक है. लेकिन लंबे समय तक ऐसी ही स्थिति रहेगी यह कहना मुश्किल है. उन्होंने बताया कि यह कोई नहीं जानता है कि तेल कंपनियां कितने जहाज LPG लेकर भारत आ पाएंगी, क्योंकि पश्चिम एशिया में स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। 

    नए कनेक्शन न होने पर क्या है विकल्प
    लोगों को नए कनेक्शन नहीं देने के बाद वह इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में कई डिस्ट्रीब्यूटरों ने ऐसे लोगों के लिए 5 किलो और 10 किलो वाला कंपोजिट सिलेंडर लेने की सलाह दे रहा है. फिलहाल बड़े शहरों में 10 किलो वाला FTL एलपीजी सिलेंडर लॉन्च किया गया है. जिसे आसानी से बुक कर मंगाया जा सकता है। 

    बता दें पश्चिम एशिया तनाव से पहले भारत 60 फीसदी तक LPG आयात करता था. इसमें 90 फीसदी तक गैस कि सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर पहुंचता था. लेकिन संकट के दौरान भारत में आयात कम होने की वजह से घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाया गया है. लेकिन ने कनेक्शन को जारी करने की मंजूरी नहीं दी गई है. फिलहाल भारत जरूरत का 67 फीसदी LPG अमेरिका से आयात कर रहा है, जो लंबी समुद्री यात्रा के बाद पहुंच रहा है जो पश्चिम एशिया की तुलना में ज्यादा महंगा है। 

  • Aadhaar डिटेल लीक होने का डर खत्म! होटल चेक-इन में अब QR कोड और OTP से होगा काम

    Aadhaar डिटेल लीक होने का डर खत्म! होटल चेक-इन में अब QR कोड और OTP से होगा काम

    नई दिल्ली

    अगर आप अक्सर घूमने जाते हैं और होटल में रुकते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। होटल में चेक-इन करते समय सबसे पहले पहचान पत्र मांगा जाता है। कई होटल में ग्राहकों से Aadhaar Card की फोटोकॉपी भी जमा कराई जाती है। कई बार यात्री के पास आधार की कॉपी नहीं होती और उसे आसपास की दुकान से फोटोकॉपी करवानी पड़ती है। अब इस झंझट को कम करने के लिए होटल चेक-इन को डिजिटल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    अब ऐसे होगा होटल का चेक-इन
    नए रूल में पहचान के लिए QR कोड, OTP और ऐप बेस्ड डिजिटल वेरिफिकेशन जैसे तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यानी आने वाले समय में होटल में कमरा लेने के लिए हर बार आधार की फोटो या फिजिकल फोटोकॉपी जमा करने की जरूरत कम हो जाएगी। इसका मकसद सिर्फ चेक-इन को आसान बनाना नहीं, बल्कि ग्राहक की आधार डिटेल्स को ज्यादा सुरक्षित रखना भी है।

    QR कोड स्कैन करके होगा वेरिफिकेशन
    नए रूल में QR कोड बेस्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा। होटल में चेक-इन के दौरान ग्राहक को Aadhaar App में मौजूद QR कोड दिखाने के लिए कहा जाएगा।

    OTP से भी होगी पहचान की जांच
    QR कोड के अलावा OTP आधारित वेरिफिकेशन भी नई व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजकर पहचान की पुष्टि करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यह तरीका काफी हद तक वैसा ही हो सकता है जैसा आज ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट या दूसरी सेवाओं में पहचान की पुष्टि के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

    Aadhaar डिटेल रहेगी ज्यादा सुरक्षित
    Aadhaar की फोटोकॉपी जमा करने की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पर्सनल डिटेल्स की सुरक्षा है। कागज पर मौजूद Aadhaar की कॉपी में नाम, पता और अन्य पहचान से जुड़ी जानकारी होती है। अगर इसकी कॉपी लंबे समय तक किसी संस्था के पास रखी जाती है तो डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठ सकते हैं। डिजिटल वेरिफिकेशन का उद्देश्य इस तरह की जानकारी को संभालने की जरूरत कम करना है।

    यात्रियों को होगा फायदा
    इस बदलाव से चेक-इन प्रोसेस आसान होगा। पहचान वेरिफिकेशन में कम समय लग सकता है। Aadhaar की फिजिकल कॉपी संभालने की जरूरत कम होगी। कागज का इस्तेमाल कम होगा। निजी जानकारी की सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिल सकती है।