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  • ब्रिटेन से फ्रांस और जर्मनी तक, मोदी की कूटनीति का असर; NYT बोला- भारत बढ़ा रहा रणनीतिक विकल्प

    ब्रिटेन से फ्रांस और जर्मनी तक, मोदी की कूटनीति का असर; NYT बोला- भारत बढ़ा रहा रणनीतिक विकल्प

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ अब अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी की है। इस लेख में बड़ा जिक्र यह है कि भारत पिछले एक साल से चुपचाप क्या-क्या कर रहा है। इसके हालिया एनालिसिस में कहा गया है कि 'पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं, एक बार में एक डील के साथ'। इसमें कहा गया है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल दुनिया भर में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों का नेटवर्क बढ़ाने में बिताया है।

    पीएम मोदी के दौरे ने बदल दी भारत की तस्वीर
    जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक(DGP) रहे शेष पॉल वैद ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-NYT का यह विश्लेषण अच्छा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया भर के अलग-अलग देशों की यात्रा कर रहे हैं और समझौते कर रहे हैं, लेकिन इससे यह नतीजा निकालना गलत है कि यह अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ है। भारत एक संप्रभु देश है और वह ऐसे व्यापार और समझौते करने के लिए स्वतंत्र है जो हमारे विकास और तरक्की के लिए फायदेमंद हों, खासकर तब जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख भारत के हितों को नुकसान पहुंचा रहा हो। अपने हितों की रक्षा के लिए काम करने का मतलब यह नहीं है कि आप अमेरिका के खिलाफ काम कर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने साल भर में किए 20 दौरे
    NYT के अनुसार, अगस्त 2025 से, पीएम मोदी ने कम से कम 20 देशों का दौरा किया है, जबकि 13 देशों के नेताओं ने भारत की यात्रा की है। अखबार इनमें से कई मुलाकातों को सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार के आदान-प्रदान के बजाय खास लक्ष्यों को हासिल करने के मकसद से की गई ठोस, कारोबारी बातचीत बताता है। और इसके नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।
    पीएम मोदी ने अगस्त, 2025 से अब तक कम से कम 20 देशों का दौरा किया है, जबकि 13 देशों के नेताओं ने भारत की यात्रा की है।

    भारत और ब्रिटेन में डील बड़ी भूमिका
    एक्स पर पॉलिटिकल एनालिस्ट ने लिखा-भारत-UK FTA, जो 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ, हजारों उत्पादों पर टैरिफ कम करता है या खत्म करता है। स्कॉच व्हिस्की पर भारत का टैरिफ तुरंत 150% से घटकर 75% हो जाएगा और 10 सालों में 40% हो जाएगा, जबकि भारतीय सामानों के 99% हिस्से पर UK का टैरिफ खत्म कर दिया जाएगा। इस समझौते से लंबे समय में सालाना द्विपक्षीय व्यापार में £25.5 बिलियन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

    यूरोपीय संघ से समझौता एक ऐतिहासिक कामयाबी
    लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद, भारत और EU ने 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत पूरी की। यूरोपीय आयोग EU को भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बताता है, जिसका 2025 में सामान का व्यापार €118 बिलियन का था। यह व्यापार के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा भी देता है।

    फ्रांस से AI, इनोवेशन और रणनीतिक सहयोग
    भारत और फ्रांस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा में सहयोग को और गहरा किया है। दोनों देशों ने पेरिस में 2025 AI एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की, जिसमें AI से जुड़े लगभग 100 ठोस कदम उठाए गए, और फरवरी 2026 में अपने रिश्तों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।

    नॉर्वे और EFTA निवेश और नौकरियां
    भारत-EFTA आर्थिक साझेदारी, जिसमें नॉर्वे भी शामिल है, के तहत EFTA देशों का लक्ष्य है कि वे 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश जुटाएं और दस लाख नौकरियां पैदा करने में मदद करें। नॉर्वे की सरकार ने इस वादे को फिर से दोहराया है।

    दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग
    दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ ज्यादा निवेश और जहाज निर्माण में सहयोग करने का वादा किया है। इस साझेदारी में औद्योगिक सहयोग शामिल है, जिसमें भारतीय शिपयार्ड और कोरियाई जहाज निर्माण की विशेषज्ञता का तालमेल भी शामिल है। भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण करने वाले देशों में शामिल होना है।

    न्यूजीलैंड के साथ समुद्री सुरक्षा समझौता
    भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़ गए हैं। अब बातचीत समुद्री सुरक्षा और व्यापार पर केंद्रित है, जो पहले हुए रक्षा सहयोग समझौते पर आधारित है।

    जर्मनी रक्षा तकनीक का खासतौर पर जिक्र
        NYT खास तौर पर जर्मनी की पनडुब्बी तकनीक का जिक्र करता है, जो भारत की हालिया कूटनीतिक कोशिशों के ठोस नतीजों में से एक है। बात सिर्फ यह नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी विदेश यात्रा करते हैं। भारतीय प्रधानमंत्री हमेशा से विदेश यात्राएं करते रहे हैं।
        NYT जिस फर्क को उजागर करता है, वह है सिर्फ बड़े-बड़े बयानों के बजाय खास मकसदों, मापने योग्य लक्ष्यों और ठोस आर्थिक या रणनीतिक नतीजों पर ध्यान देना।

    भारत की अपनी रणनीतिक जरूरतें
    अखबार यह भी बताता है कि देश खुद भी भारत की ओर तेजी से देख रहे हैं, जिसकी वजह भारत की अर्थव्यवस्था का आकार और विकास और उनकी अपनी रणनीतिक जरूरतें हैं।
    जापान और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अहम साझेदार हैं। फ्रांस AI और रणनीतिक तकनीक के मामले में भारत के साथ काम कर रहा है। यूरोप व्यापार का एक बड़ा मौक़ा दे रहा है। UK के साथ व्यापार समझौता पहले ही लागू हो चुका है। नॉर्वे और अन्य EFTA देशों ने बड़े निवेश का वादा किया है। दक्षिण कोरिया भारत की जहाज बनाने की क्षमता पर नजर रखे हुए है।

    मेलोनी को टॉफी का पैकेट भी एक संदेश
        इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक मीटिंग के दौरान, पीएम मोदी ने उन्हें 'मेलोडी' टॉफी का एक पैकेट भेंट किया – एक छोटा सा ऐसा काम जिसे NYT ने भी खास माना और उसका जिक्र किया। इससे मिलने वाला बड़ा संदेश साफ है-भारत अपनी सभी उम्मीदें या संसाधन किसी एक ही जगह पर नहीं लगा रहा है।
        आज की अनिश्चित दुनिया में, भारत व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, ज़रूरी मिनरल्स, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपने विकल्पों का दायरा बढ़ा रहा है।

    न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण का मकसद क्या है
        इसका मकसद अमेरिका के खिलाफ होना या डोनाल्ड ट्रंप से ऊपर दिखना नहीं है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि व्हाइट हाउस में चाहे कोई भी बैठे, भारत रणनीतिक रूप से स्वतंत्र और आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे। NYT के विश्लेषण का असली महत्व यही है।
        फ्रांस से लेकर जर्मनी, ब्रिटेन से लेकर नॉर्वे, दक्षिण कोरिया से लेकर न्यूजीलैंड, जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ तक, भारत स्पष्ट हितों और नतीजों वाली साझेदारियां बना रहा है। विदेश नीति का असल मकसद यही होता है कि आप अपने देश के लिए क्या हासिल करते हैं। और तेजी से, भारत टेक्नोलॉजी, निवेश, बाजार तक पहुंच, नौकरियां, रणनीतिक साझेदारियां और भारतीय कारोबारियों व नागरिकों के लिए नए मौके हासिल कर रहा है।
        आत्मविश्वास से भरा भारत अब दुनिया के उसे चुनने का इंतजार नहीं कर रहा है। भारत अपना रास्ता खुद चुनने के लिए काफी साझेदारियां बना रहा है।

  • समुद्र की गहराइयों का नया ‘सहारा’ बना INS निपुण, 75% स्वदेशी सामग्री से तैयार जहाज नौसेना में शामिल

    समुद्र की गहराइयों का नया ‘सहारा’ बना INS निपुण, 75% स्वदेशी सामग्री से तैयार जहाज नौसेना में शामिल

    नई दिल्ली
     इंडियन नेवी ने मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल 'INS निपुण' को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) द्वारा स्वदेशी तकनीक से तैयार INS निपुण गहरे समुद्र के अंदर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकता है।

    नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ ही पश्चिमी नौसेना को 'INS निस्तार' के समकक्ष एक समर्पित डाइविंग सपोर्ट वेसल मिल गया है। बताते चलें कि INS निस्तार पिछले साल जुलाई में बेड़े में शामिल किए जाने के बाद से पूर्वी नौसेना कमान के तहत अपनी सेवाएं दे रहा है।

    विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा निर्मित और 75% स्वदेशी सामग्री से बना 8,500 टन का यह पोत 300 मीटर की गहराई तक संतृप्त गोताखोरी और संकटग्रस्त पनडुब्बियों से चालकों को सुरक्षित निकालने जैसे कठिन मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है।

    अत्याधुनिक क्षमताएं और फीचर्स
    यह जहाज समुद्र में 300 मीटर तक की गहराई में सैचुरेशन डाइविंग और 75 मीटर तक साइड-स्टेज डाइविंग अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। यह समुद्र की तेज लहरों और खराब मौसम में स्थिर रह सकता है। जिसके चलते यह समुद्र के भीतर फंसी पनडुब्बी और नौसेनिकों को आसानी से बाहर निकाल सकता है।

    इसके अलावा अगर कोई शिप या मशीन समुद्र के भीतर खराब हो जाती है तो यह उसे वहीं पर रिपेयर कर सकता है। गहरे समुद्र में जटिल अभियानों के लिए इसमें 15 टन की सब-सी क्रेन, डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम और 1,000 मीटर की गहराई तक काम करने में सक्षम 'रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स' (ROV) तैनात किए गए हैं।
    खासियत

    जहाज में आठ बिस्तरों वाला अस्पताल, एक गहन चिकित्सा इकाई, एक ऑपरेशन थिएटर और हाइपरबेरिक चिकित्सा सुविधाएं भी हैं, यह इसे गहरे समुद्र में गोताखोरी से संबंधित चिकित्सा समस्याओं से निपटने की क्षमता प्रदान करती हैं।

    2018 में हुआ था अनुबंध
    गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में HSL के साथ लगभग 2,393 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे दो जहाजों का अनुबंध किया था। इसमें INS निस्तार की नींव दिसंबर 2019 में और निपुण की नींव उसके तीन महीने बाद रखी गई थी।

    विशाखापत्तनम स्थित 'हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड' (HSL) द्वारा निर्मित INS निपुण को व्यापक साज-सज्जा और कड़े समुद्री परीक्षणों के बाद 30 जुलाई को नौसेना को सौंपा दिया गया। जिसके बाद आज यानी 31 अगस्त, सोमवार को भारतीय नौसेना कमीशन किया गया है।

  • ‘महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में नहीं आना चाहिए’, ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद के बयान पर विवाद

    ‘महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में नहीं आना चाहिए’, ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद के बयान पर विवाद

    तिरुवनंतपुरम
     केरलम में ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद महिलाओं को लेकर एक विवादित बयान दिया है। कोच्चि में आयोजित 'हुब्बुल रसूल सम्मेलन' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने घरों तक ही सीमित रहना चाहिए और बाहर नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि उनका सार्वजनिक क्षेत्र में लाने से भारी विनाश हो सकता है।

    दरअसल, कंथापुरम एपी अबू बकर मुसलियार के नाम से जाने जाने वाले ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद ने कोच्चि में हुब्बुल रसूल सम्मेलन में महिलाओं की तुलना सोने के गहनों से करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह आभूषणों की सुंदरता बनाए रखने के लिए उन्हें डिब्बे में बंद रखा जाता है, उसी तरह इस्लाम ने भी उनकी गरिमा और सुरक्षा के लिए पर्दा प्रथा निर्धारित की है।

    महिलाओं को नीचा दिखाना उद्देश्य नहीं
    अबू बकर ने कहा "महिलाओं को अपने घरों तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए। पवित्र कुरान भी यही कहता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को नीचा दिखाना नहीं था, बल्कि उनका सम्मान करना और उनकी रक्षा करना था।"

    बता दें कि धर्मगुरु (ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद) अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलमा और समस्ता केरल जमीयतुल उलमा दोनों के महासचिव भी हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति सोने का हार खरीदता है, तो उसे अलमारी से, फिर डिब्बे से और अंत में उसकी पैकिंग से बेहद सावधानीपूर्वक निकालकर दिखाया जाता है।

    इसके विपरीत, उन्होंने पास की एक दुकान की तुलना की जहां पत्थर की चक्कीयां बेची जाती थीं, जिन्हें सड़क किनारे रख दिया जाता था और लोग आते-जाते उन पर पैर रख देते थे। कंथापुरम ने तर्क दिया कि यदि सोने का हार भी इसी तरह सड़क किनारे छोड़ दिया जाए, तो हर गुजरता व्यक्ति उसे छुएगा, जिससे उसकी सुंदरता और मूल्य नष्ट हो जाएगा।

    इसी उदाहरण को उन्होंने महिलाओं पर लागू करते हुए तर्क दिया, "अगर हार की सुंदरता बरकरार रखनी है, तो उसे डिब्बे में सुरक्षित रखना होगा। अगर महिलाओं को इस तरह सार्वजनिक क्षेत्र में लाया गया, तो इससे भारी तबाही मचेगी। इसी कारण इस्लाम ने महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा निर्धारित की है।"

    इस्लाम ने महिलाओं को हमेशा ऊंचा उठाया
    अपने भाषण में अबू बकर ने कहा कि इस्लाम ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं की स्थिति को हमेशा ऊंचा उठाया है। उन्होंने इस्लाम-पूर्व अरब में प्रचलित कन्या भ्रूणहत्या और बालिका शिशु हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लाम ने इस पर रोक लगाई। उन्होंने आगे कहा कि जिस दौर में महिलाओं के पास उत्तराधिकार का कोई अधिकार नहीं था, उस समय इस्लाम ने उन्हें संपत्ति का अधिकार प्रदान किया।

    सार्वजनिक जीवन पर प्रतिबंध को बताया सम्मान का प्रतीक
    अबू बकर ने तर्क दिया, "इस्लाम ने महिलाओं को एक महान और सम्मानित स्थान दिया है।" उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को भी उनके प्रति अनादर नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा के रूप में देखा जाना चाहिए।

    बोलने का अधिकार और कर्तव्य धर्म गुरुओं के पास
    अपने बयान पर सवाल उठाने वाले संगठनों को करारा जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक विद्वानों ने धर्म का गहन अध्ययन किया है, इसलिए इस पर बोलने का अधिकार और कर्तव्य दोनों उनके पास हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमने धर्म का अध्ययन किया है, इसलिए अपने समुदाय को सही दिशा दिखाना हमारा कर्तव्य है। हम अपनी बात कहते रहेंगे और इसे कोई रोक नहीं सकता।"

    हमें अपने समुदाय से बात करने का पूरा अधिकार
    अबू बकर ने यह भी कहा कि उनका संगठन अन्य धर्मों के अनुयायियों की परंपराओं में कभी हस्तक्षेप नहीं करता है। ठीक उसी तरह, मुस्लिम धर्म गुरुओं को भी अपने समुदाय को संबोधित करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने समुदाय से बात करने का पूरा अधिकार है और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।

     

  • ‘ग्राहक को पता हो कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल’, सुप्रीम कोर्ट में उठी मांग, याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट

    ‘ग्राहक को पता हो कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल’, सुप्रीम कोर्ट में उठी मांग, याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट

     नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिसमें पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल के ब्लेंडिंग का प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और इसे पेट्रोल बिल व रसीद पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश की मांग की गई थी।

    जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता प्रदान की है।

    उपभोक्ताओं के अधिकारों की मांग
    सुनवाई के दौरान अधिवक्ता गोस्वामी ने दलील दी कि देश के उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो ईंधन खरीद रहे हैं, उसकी कंपोजिशन क्या है। उन्होंने पेट्रोल की रसीदों पर इथेनॉल की मात्रा की कोई जानकारी न होने का मुद्दा उठाते हुए अदालत से कहा कि रसीद में इथेनॉल का कोई जिक्र नहीं होता और एक ग्राहक के तौर पर उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार है।

    इसके अलावा, उन्होंने उल्लेख किया कि पिछली सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने इथेनॉल-ब्लेंडिंग कार्यक्रम को एक एक्सपेरिमेंट बताया था, हालांकि बाद में सरकार ने स्पष्टीकरण जारी कर ऐसे किसी बयान से इनकार किया था। याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट आश्वासन की मांग की।

    दूसरी ओर, भारत के अटॉर्नी जनरल ने इस मामले को आगे बढ़ाने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि भारत सरकार सीधे उनके प्रति जवाबदेह हो। इस पर गोस्वामी ने जवाब दिया कि यह मांग उनके व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ी है और देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खरीद रहे हैं।

    अटॉर्नी जनरल ने इसे एक प्रॉक्सी याचिका करार देते हुए अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल भी इसी तरह की एक याचिका खारिज कर चुका है। इसके बाद अदालत ने मामले पर आगे सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की छूट दे दी।

    क्या है याचिका में की गई प्रमुख मांगें?
    इस याचिका में अदालत से कई अहम राहतों की मांग की गई थी। इसमें प्रमुख रूप से यह निर्देश देने की अपील की गई थी कि सभी पेट्रोल पंपों के नोजल पर पेट्रोल में इथेनॉल का सटीक प्रतिशत प्रमुखता व समान रूप से प्रदर्शित किया जाए और हर ईंधन बिल या रसीद पर इसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए।

    इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने एक आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से सुलभ डेटाबेस बनाने की भी मांग की, जिसमें वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जांचा जा सके कि कौन सा इथेनॉल मिश्रण किस व्यक्तिगत वाहन के अनुकूल है।

    याचिका में पुराने या गैर-अनुकूल वाहनों के लिए एक पारदर्शी नीति बनाने का भी आग्रह किया गया था। इसमें यह विचार करने को कहा गया था कि जहां तकनीकी, आर्थिक व व्यावहारिक रूप से संभव हो, वहां ऐसे वाहनों के लिए कम इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए।

    इसके अलावा, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय मानक ब्यूरो के परामर्श से इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लिए एक राष्ट्रीय कंज्यूमर डिस्क्लोजर प्रोटोकॉल तैयार करने की भी मांग रखी गई थी।

    कनीकी समीक्षा की अपील
    याचिका में पेट्रोलियम मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो, उपभोक्ता संगठनों, पर्यावरण व स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल इंजीनियरों की एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया था।

    इस प्रस्तावित समिति के माध्यम से भारत में मौजूद वर्तमान वाहनों के साथ E20 पेट्रोल की वास्तविक अनुकूलता, वाहन के माइलेज, इंजन की उम्र और रख-रखाव की लागत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों की गहन जांच करने की मांग की गई थी।

    इसके साथ ही, वारंटी और वाहन बीमा पर पड़ने वाले असर के अलावा इथेनॉल उत्पादन से पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव, पानी की अत्यधिक खपत और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का आकलन करने का भी अनुरोध किया गया था।

    याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की गई थी कि वह सरकार को अनिवार्य ई-20 पेट्रोल लागू करने से जुड़े नीतिगत दस्तावेज, तकनीकी अध्ययन, अनुकूलता रिपोर्ट, सुरक्षा मानक और सार्वजनिक परामर्श के सभी रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दे।

  • नई दिल्ली में चलती बस में 11वीं की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म, ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार

    नई दिल्ली में चलती बस में 11वीं की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म, ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार

     नई दिल्ली
    देश की राजधानी में एक बार फिर 'निर्भया कांड' की तर्ज पर एक 16 वर्षीय 11वीं की छात्रा से बलात्कार का मामला सामने आया है। चलती बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने दुष्कर्म करने के बाद पीड़िता को कश्मीरी गेट के पास रिंड रोड पर छोड़कर फरार हो गए थे। पीड़िता की शिकायत पर दोनों आरोपितों को कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच करीब 47 किमी तक चलती बस में किशोरी दरिंदगी का शिकार होती रही।

    गलत जगह उतरने पर मांगी थी मदद
    उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय 11वीं की छात्रा मां की डांट से नाराज होकर 4 अगस्त को बिना बताए नोएडा के लिए निकली थी। रात के समय भारी बारिश और अंधेरा होने के कारण वह गलती से परी चौक पर उतर गई। वहां से आगे जाने के लिए उसने एक स्लीपर बस को रुकवाकर नोएडा सेक्टर-63 का रास्ता पूछा। बस के कंडक्टर ने सेक्टर-63 जाने की बात कहकर उसे बस में सवार कर लिया।

    सवारी न होने का उठाया फायदा
    बस में चढ़ने के बाद पीड़िता को अहसास हुआ कि उसमें कोई अन्य यात्री नहीं था। बस के चलते ही कंडक्टर ने छात्रा के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। इसके बाद चालक और कंडक्टर दोनों ने मिलकर चलती बस में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। वारदात के बाद आरोपियों ने देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतार दिया और मौके से फरार हो गए।

    सीसीटीवी फुटेज से पकड़े गए आरोपी
    घटना के तुरंत बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसकी शिकायत पर सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण व मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कोतवाली एसीपी शंकर बनर्जी की देखरेख में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को भी जब्त कर लिया है।

     

  • भारत को घेरने की तैयारी? ‘मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला’ कहकर मक्का डिफेंस पैक्ट पर बांग्लादेश का बड़ा बयान

    भारत को घेरने की तैयारी? ‘मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला’ कहकर मक्का डिफेंस पैक्ट पर बांग्लादेश का बड़ा बयान

    नई दिल्ली 
    बांग्लादेश के बोल बिगड़ने लगे हैं। बीते कुछ ही दिनों में उसने बार-बार उकसाने वाले बयान दिए हैं। बड़ी ही चालाकी से बांग्लादेश ने एक सप्ताह में ही दूसरी बार ‘इस्लामिक नाटो’ कहे जा रहे मक्का समझौते में शामिल होने के संकेत दिए हैं। रविवार को एक नए बयान में ढाका ने कहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की वाले इस सैन्य समझौते से जुड़ने में उसे ‘कोई जोखिम नहीं’ दिखता और इससे दूसरे देशों के साथ उसके रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को कहा है कि मक्का डिफेंस पैक्ट एक ‘अनूठा समझौता’ है और इससे बांग्लादेश के लिए नए रणनीतिक अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ढाका इस मुद्दे पर अपने द्विपक्षीय साझेदार देशों से चर्चा कर रहा है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। कबीर ने कहा, "बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। किसी एक रक्षा सहयोग में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि हम दूसरे देशों के साथ साझेदारी नहीं रख सकते।"

    मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला- बांग्लादेश
    हालांकि बांग्लादेश को फिलहाल इस समझौते में शामिल होने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन उसने इस तरह के बयान देकर भारत को उकसाने की कोशिश जरूर की है। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने संसद में कहा था कि अगर बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का न्योता मिलता है तो सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी। उन्होंने इसे ‘मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला’ तक बता दिया था।

    क्या है मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट?
    गौरतलब है कि बीते 7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में एक रक्षा समझौते पर दस्तखत किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा तीनों देश रक्षा तकनीक का भी आदान-प्रदान करेंगे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो की शुरुआत भी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका के घटते प्रभाव को देखते हुए मुस्लिम देश अब अपनी सुरक्षा को लेकर विकल्प ढूंढ रहे हैं और इस्लामिक नाटो इसी दिशा में एक कदम है।

    भारत के लिए चिंता?
    अब बांग्लादेश भी इसमें शामिल होने की बात कर रहा है। पाकिस्तान पहले से ही समझौते में शामिल होकर उछल रहा है। ऐसे में बांग्लादेश इसमें शामिल हुआ तो भारत के लिए दोनों मोर्चों पर चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि खाड़ी देशों के साथ भारत की विश्वसनीय साझेदारियां हमारे हक में हैं। इसके बावजूद भारत ने इस घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखे हुए है और भारत देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।

    बांग्लादेश में ही उठ रहे सवाल
    बांग्लादेश के इस रुख पर खुद उसके देश में ही सवाल उठ रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश लंबे समय से गुटनिरपेक्ष यानी नॉन अलाइनमेंट की नीति अपनाता आया है और किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होना उसकी पारंपरिक विदेश नीति से अलग कदम होगा। पूर्व राजदूत महफुजुर रहमान का कहना है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले से ही कई क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेश ऐसी स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक यह समझौता भविष्य में बांग्लादेश को युद्ध में भी खींच सकता है।

  • SIR का असर: दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97.5 लाख नाम, 47.7 लाख वोटर बाहर; 4 नवंबर को फाइनल लिस्ट

    SIR का असर: दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97.5 लाख नाम, 47.7 लाख वोटर बाहर; 4 नवंबर को फाइनल लिस्ट

     नई दिल्ली 
     दिल्ली में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सोमवार को जारी कर दी गई। 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.7 लाख नाम बाहर कर दिए गए हैं। दिल्ली में कुल 1,45,10,299 मतदाता हैं, लेकिन डोर-टू-डोर अभियान के दौरान 97.5 लाख मतदाताओं के ही गणना फॉर्म जमा और डिजिटाइज हो सके हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब 67.18 फीसदी है।

    अधिकारियों के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होंगे, उन्हें अपना नाम शामिल कराने का मौका दिया जाएगा। इसके लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होनी है।

    नाम बाहर है तो क्या करना होगा?
    अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है और आप मतदाता के तौर पर पात्र हैं, तो आपको दावा दाखिल कर नाम शामिल कराने का अनुरोध करना होगा। इसके लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभावित मतदाता 30 सितंबर तक अपना दावा पेश कर सकते हैं। अधिकारियों की ओर से प्राप्त दावों की जांच की जाएगी और जरूरी वैरिफिकेशन के बाद तय किया जाएगा कि नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या नहीं।

    कब तक जुड़वा सकते हैं नाम?
    नाम शामिल कराने के लिए सबसे अहम तारीख 30 सितंबर 2026 है। इसी दिन दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त होगी। इसके बाद चुनाव अधिकारी प्राप्त आवेदनों की जांच करेंगे। नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। पूरी प्रक्रिया के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

    47.7 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर क्यों हुए?
    SIR के तहत दिल्ली में घर-घर जाकर मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा कराए गए थे। इनमें से करीब 97.5 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटाइज किया गया। यह दिल्ली के कुल मतदाताओं का करीब 67.18 फीसदी है। वहीं, करीब 47.7 लाख मतदाताओं के फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' श्रेणी में रखे गए। इनमें Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others (ASDDO) श्रेणियां शामिल हैं। इन मतदाताओं के नाम इसलिए ड्राफ्ट रोल में नहीं आए हैं।

    70 विधानसभा क्षेत्रों में अलग रहा SIR का असर
    घर-घर चलाए गए इस अभियान के दौरान फॉर्म के डिजिटाइजेशन की दर सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। रोहिणी में सबसे ज्यादा 83.43 फीसदी फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह दर 52.15 फीसदी रही। इसका मतलब है कि अलग-अलग इलाकों में मतदाताओं के फॉर्म जमा होने और डिजिटाइज होने की स्थिति में काफी अंतर रहा।

  • न्यूयॉर्क में खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन से बढ़ा विवाद, तिरंगे के कथित अपमान पर रिजिजू का कड़ा रुख

    न्यूयॉर्क में खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन से बढ़ा विवाद, तिरंगे के कथित अपमान पर रिजिजू का कड़ा रुख

    नई दिल्ली 
    अमेरिका के न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान भी किया गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, 'तुम्हें महंगा पड़ेगा। आरएसएस, बीजेपी या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन देश का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' वायरल वीडियो में एक प्रदर्शनकारी तिरंगा को अपने पैर से दबाते नजर आ रहा है।

    न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में शनिवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने करीब 5,000 लोगों को संबोधित किया। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के बाहर खालिस्तान समर्थक सिख संगठनों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और आरएसएस, बीजेपी व भारत सरकार की नीतियों का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भारत में सिखों, मुसलमानों और ईसाइयों के साथ भेदभाव किया जाता है और देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है।

    भारतीय तिरंगे के अपमान का वीडियो वायरल
    प्रदर्शन के दौरान भारतीय तिरंगे के अपमान के वीडियो भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे को फाड़ा और उसके साथ आपत्तिजनक बर्ताव किया। वहीं, कार्यक्रम में पहुंचे भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कुछ लोगों ने खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों का विरोध किया। इस विरोध प्रदर्शन में केवल सिख संगठन ही नहीं, बल्कि मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल थे। हालांकि प्रदर्शन के दौरान डेमोक्रेटिक नेता ब्रैड लेंडर को भी प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा और उन पर यहूदी समर्थक होने के आरोप लगाए गए।

    इस पूरे विवाद के बीच हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के बाहर हुए प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थकों की धमकियों से लेकर यहूदियों के खिलाफ कथित नफरत तक कई गंभीर घटनाएं देखने को मिलीं। दूसरी ओर, भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले संगठनों ने आरएसएस की विचारधारा पर गंभीर आरोप लगाए। भागवत ने अपने संबोधन में भारत की विविधता में एकता और दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की बात कही। इस घटनाक्रम ने न्यूयॉर्क में आरएसएस कार्यक्रम को लेकर विवाद को और तेज कर दिया है।

  • ओडिशा सरकार का सख्त फैसला! पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण नहीं दिया तो वेतन से सीधे कटेगी राशि

    ओडिशा सरकार का सख्त फैसला! पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण नहीं दिया तो वेतन से सीधे कटेगी राशि

    भुवनेश्वर

    ओडिशा की मोहन चरण माझी की सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है. इसका असर सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा. आदेश के मुताबिक, तलाक के बाद अगर कोई कर्मचारी तलाकशुदा पत्नी को एलिमनी देने में आनाकानी करता है, तो इसकी रकम सीधे सैलरी से काटी जाएगी और तलाकशुदा पत्नी के अकाउंट में भेज दी जाएगी। 

    मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने निर्देश दिया है कि अगर कर्मचारी एलिमनी का भुगतान करने में चूक करते हैं तो उनकी सैलरी से रकम काटकर तलाकशुदा पत्नियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए। 

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    सीएम ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार के कई कर्मचारी अपनी तलाकशुदा पत्नियों या बच्चों को हर महीने गुजारा-भत्ता नहीं दे रहे थे.हर सुनवाई के दौरान ऐसे दो-तीन मामले CM के शिकायत सेल तक पहुंचते हैं। 

    बयान में कहा गया है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित कर्मचारियों की सैलरी से यह रकम काटने का आदेश जारी किया है। 

    माझी ने कहा कि राज्य सरकार का कर्मचारी होने के नाते, कोर्ट की अवमानना ​​और तलाकशुदा महिलाओं और बच्चों के साथ बुरा बर्ताव करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। 

    कितनी कटेगी सैलरी? कैसे तय होगा
    CM के निर्देशों पर, राज्य सरकार ने संबंधित महिलाओं और बच्चों को गुजारा-भत्ता जारी करने के निर्देश दिए हैं। 

    CMO ने बताया कि गुजारा-भत्ता भुगतान के लिए कोर्ट का आदेश मिलने के बाद, डिविजनल DDO (ड्राइंग एंड डिसबर्समेंट ऑफिसर) सरकारी कर्मचारी का मासिक सैलरी बिल तैयार करेगा, सैलरी से कोर्ट से तय गुजारा-भत्ते की रकम काटेगा और इसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे तलाकशुदा महिला या बच्चे के बैंक खाते में जमा करेगा। 

    बयान के अनुसार, माझी ने गुजारा-भत्ते के मामलों को शामिल करके राज्य सरकार के ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में और सुधार करने को भी कहा। 

    क्या फायदा होगा इससे?
    इसमें आगे कहा गया कि इस कदम से न केवल कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि संबंधित महिलाओं और बच्चों की मुश्किलों को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। 

  • डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा, नियमों में बदलाव से भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के नए रास्ते

    डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा, नियमों में बदलाव से भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के नए रास्ते

    नई दिल्ली
     भारत सरकार ने रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव रक्षा क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में तेजी से कारोबार करने में सक्षम बनाने के लिए गए हैं। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था को सरल कर दिया है। इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रियागत बोझ कम करना व निर्यात मंजूरी को आसान बनाना है। साथ ही भारत को विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में ये बदलाव किए गए हैं। इनसे भारतीय रक्षा कंपनियों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अंतरराष्ट्रीय निविदाओं, प्रदर्शनियों और विदेशी बाजारों तक तेजी से पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही संवेदनशील देशों, महत्वपूर्ण तकनीकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जरूरी सुरक्षा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। नई व्यवस्था के तहत अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। हालांकि संवेदनशील देशों के मामले में आवश्यक सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे।

    इसी तरह अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और रक्षा प्रदर्शनियों के लिए सभी तरह के रक्षा सामान के निर्यात में भी हितधारक परामर्श की जरूरत नहीं होगी। इससे भारतीय कंपनियां विदेशी निविदाओं में तेजी से भाग ले सकेंगी। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने रक्षा उत्पादों को कम प्रक्रियागत देरी के साथ प्रदर्शित कर सकेंगी।
    सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल व्यवस्था को भी काफी सरल और व्यापक बनाया है। ओजीईएल एक ऐसी स्थायी और एकमुश्त निर्यात मंजूरी है, जिसके तहत पात्र कंपनियां तय रक्षा सामान की कई खेपों के लिए अलग-अलग निर्यात मंजूरी लेने के बजाय स्वयं निर्यात प्राधिकरण तैयार कर सकती हैं। इससे हर खेप के लिए अलग अनुमति लेने की जरूरत कम होती है।

    कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ कारोबार करने में अधिक लचीलापन मिलता है। पहले प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरण, कलपुर्जों एवं घटकों तथा कंपनियों के बीच तकनीक हस्तांतरण से संबंधित तीन अलग ओजीईएल एसओपी लागू थीं। अब इन तीनों को मिलाकर एकीकृत ओजीईएल एसओपी बनाई गई है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इससे निर्यातकों को एक समान और सरल नियमों के तहत काम करने की सुविधा मिलेगी। वहीं सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस का नवीनीकरण कराने की जरूरत कम होगी। अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियागत लागत एवं समय की बचत होगी। ओजीईएल के तहत निर्यात किए जा सकने वाले देशों का दायरा भी काफी बढ़ाया गया है।

    पहले यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी। अब इसे बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है। हालांकि नकारात्मक या संवेदनशील देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंध या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इससे बाहर रखा गया है। इस बदलाव से भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए संभावित विदेशी बाजारों का दायरा काफी व्यापक हो जाएगा।

    नई व्यवस्था में उन भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है, जिनके विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं, यानी एफओईएम के साथ लंबे समय के अनुबंध या समझौते हैं। निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ऐसे भारतीय निर्यातकों को संबंधित एफओईएम और पात्र सामान के लिए ओजीईएल दिया जा सकेगा। इसकी वैधता संबंधित अनुबंध या समझौते की अवधि के अनुरूप रखी जा सकेगी।

    इससे पात्र कंपनियों को पहले की तुलना में ज्यादा प्रकार के रक्षा सामान के निर्यात की सुविधा मिलेगी। संशोधित व्यवस्था में छोटे कैलिबर के हथियारों के कुछ निर्धारित कलपुर्जों और घटकों तथा सुरक्षा उपकरणों के नागरिक उपयोग के लिए निर्यात की भी अनुमति दी गई है।

    इससे भारतीय कंपनियों के लिए वैध अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसरों का दायरा और बढ़ेगा। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सुधारों का मकसद निर्यात नियमों को पूरी तरह ढीला करना नहीं, बल्कि नियमित और कम जोखिम वाले मामलों में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना है।

    संवेदनशील रक्षा सामान, महत्वपूर्ण तकनीक और संवेदनशील देशों से जुड़े निर्यात के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय बरकरार रहेंगे। ये सुधार ऐसे समय किए गए हैं जब भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि में देश का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।