Category: देश

  • एक झटके में FIR खत्म! आखिर क्या है संविधान का आर्टिकल 142 और सुप्रीम कोर्ट कब करता है इसका इस्तेमाल?

    एक झटके में FIR खत्म! आखिर क्या है संविधान का आर्टिकल 142 और सुप्रीम कोर्ट कब करता है इसका इस्तेमाल?

    नई दिल्ली
     नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली समेत देशभर में हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आया है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारी छात्रों के दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की।

    सभी एफआईआर रद्द होंगे
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस सिर्फ उन 2873 लोगों के खिलाफ FIR जारी रखेगी जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर किसी राज्य में कोई एफआईआर है जिसकी जानकारी अभी हमें नहीं दी गई है तो उसे रद्द करने की मांग का राज्य विरोध नहीं करेंगे।

    20 से 26 जुलाई की घटनाओं पर नई FIR भी नहीं

    शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाए। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की छूट दी है, जिनका उल्लेख अदालत के समक्ष दाखिल आवेदन में किया गया है. अगर जांच में इन लोगों के दो अपराधों में शामिल होने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ नई FIR दर्ज की जा सकेगी। 

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाली किसी भी नई FIR से उनके कानूनी उपाय अपनाने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वे कानून के तहत उपलब्ध राहत के लिए अदालत का रुख कर सकेंगे। 

    देशभर के लिए बनेगा मुआवजे का मैकेनिज्म
    सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों के साथ ही देशव्यापी मुआवजा व्यवस्था तैयार करने का भी निर्देश दिया है. केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर मुआवजे के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। 

    कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस फ्रेमवर्क को मुआवजा देने की नियमित व्यवस्था के रूप में अपनाएंगे. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को NEET 2026 से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर CJP के प्रवक्ता ने अदालत का आभार जताया. उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज जो किया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। 

    छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी
    अदालत ने कहा कि हम अनुच्छेद 142 के तहत इन आवेदनों को स्वीकार करते हुए यह आदेश दे रहे हैं कि अगर किसी भी राज्य में इन्हीं मामलों को लेकर और एफआईआर हैं, तो उन पर जांच बंद कर दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पेपर लीक के खिलाफ धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी।

    मुआवजे को लेकर तीन महीने में बने नीति
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जहां तक NEET परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। इस नीति को 3 महीने में पूरा कर मुआवजा दिया जाए।

    सीजेआई ने कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में हज़ारों छात्रों ने आंदोलन में हिस्सा लिया। पुलिस ने कुल 13 एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के आवेदन हैं। इनमें एफआईआर का विवरण है। हमें बताया गया है कि दिल्ली पुलिस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों पर नई एफआईआर करेगी। और कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी।

    क्या है आर्टिकल 142?
    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी भी लंबित मामले में "पूर्ण न्याय" (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने का विशेष अधिकार देता है. इसका मतलब है कि अगर अदालत को लगता है कि सामान्य कानूनी प्रक्रिया (Standard legal procedure) से न्याय पूरा नहीं हो पाएगा, तो फिर सर्वोच्च अदालत इसका इस्तेमाल कर सकती है। 

    संविधान में साफ कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई भी आदेश पारित कर सकता है, जो किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए जरूरी हो. अदालत के ऐसे आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं। 

    सीजेपी ने 5 सितंबर का प्रोटेस्ट वापस लिया, सौरव दास ने क्या कहा?
    सौरव दास ने सुनवाई के दौरान पार्टी का स्टेटमेंट पढते हुए कहा कि CJP के को-कन्वीनर के तौर पर, मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकरात्मक भरोसे और आज ज्यूडिशियल सैंक्टिसिटी को देखते हुए, और इस कोर्ट के पास किए गए ऑर्डर को देखते हुए, CJP 5 सितंबर को मार्च का कॉल वापस लेना सही समझता है और आज के ऑर्डर का पालन करने की उम्मीद करता है। मैं इस फ़ैसले के लिए कोर्ट को और दोनों तरफ़ के वकील, सॉलिसिटर जनरल को उनकी कोशिशों के लिए भी धन्यवाद देता हूं।

    सुनवाई के दौरान एक ऐसा भी मौका आया जब सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष आपस में विश्वास दिखाएं, तो सभी मुद्दे एक-एक करके हल हो सकते हैं। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इतना मुश्किल हो कि उस पर खुले दिमाग से चर्चा न की जा सके।

  • GSLV-F17 से अंतरिक्ष में जाएगा EOS-05, एक ही इलाके पर बार-बार नजर रखने की होगी क्षमता

    GSLV-F17 से अंतरिक्ष में जाएगा EOS-05, एक ही इलाके पर बार-बार नजर रखने की होगी क्षमता

    श्रीहरिकोटा 
    इसरो 4 सितंबर को
    EOS-05 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. इसे GSLV-F17 रॉकेट से सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भेजा जाएगा. EOS-05 भारत का पहला ऐसा सैटेलाइट होगा, जो 36 हजार किलोमीटर ऊपर रहकर भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें लेगा. एक ही इलाके पर कई बार नजर रख सकेगा। 

    इस सैटेलाइट से चक्रवात, बाढ़, बादल फटने और जंगलों में आग जैसी घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी. इससे बड़े इलाके की तस्वीरें मिलेंगी, जिससे जमीन पर हो रहे बदलावों का पता लगाया जा सकेगा. सीमा के पास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में भी इससे मदद मिल सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक ही इलाके को बार-बार देख सकेगा। 

    36 हजार KM ऊपर से देखेगा भारत
    EOS-05 को धरती से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर भेजा जाएगा. इसे ऐसे ऑर्बिट में रखा जाएगा, जहां यह धरती के साथ उसी गति से घूमेगा. इससे सैटेलाइट लंबे समय तक भारत के बड़े हिस्से पर नजर रख सकेगा. आम तौर पर तस्वीरें लेने वाले सैटेलाइट धरती के काफी करीब घूमते हैं. वे कुछ समय बाद किसी इलाके के ऊपर से दोबारा गुजरते हैं. लेकिन EOS-05 की ऑर्बिट की वजह से भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें बार-बार मिल सकेंगी। 

    GSLV-F17 रॉकेट कितना बड़ा है?
    GSLV-F17 रॉकेट की 19वीं उड़ान है. इसमें GSLV Mk II का इस्तेमाल किया जाएगा. यह रॉकेट करीब 51.7 मीटर लंबा है. लॉन्च के समय इसका वजन करीब 420.5 टन होगा. यह रॉकेट तीन हिस्सों में काम करेगा. पहले यह EOS-05 को धरती के चारों ओर एक शुरुआती ऑर्बिट में पहुंचाएगा. इसके बाद सैटेलाइट को उसकी तय ऑर्बिट तक पहुंचाया जाएगा। 

    बाढ़ और जंगल की आग में आएगा काम
    EOS-05 से मिलने वाली तस्वीरें चक्रवात और बाढ़ के समय काफी काम आ सकती हैं. इससे पता लगाने में मदद मिल सकती है कि बाढ़ कितने इलाके में फैली है या चक्रवात से कौन से इलाके प्रभावित हुए हैं। 

    जंगल में आग लगने पर भी सैटेलाइट से प्रभावित इलाके की जानकारी मिल सकती है. यह जानकारी मौसम से जुड़ी एजेंसियों, आपदा से निपटने वाली टीमों और दूसरी सरकारी एजेंसियों के काम आएगी. खेती और जमीन में हो रहे बदलावों पर नजर रखने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। 

    2021 में ऐसा ही मिशन हुआ था फेल
    EOS-05 का यह मिशन 2021 में भेजे गए EOS-03 सैटेलाइट से जुड़ा है. 12 अगस्त 2021 को GSLV-F10 रॉकेट से EOS-03 को लॉन्च किया गया था. लेकिन रॉकेट के आखिरी हिस्से में तकनीकी खराबी आ गई थी. इसके कारण सैटेलाइट अपनी तय ऑर्बिट तक नहीं पहुंच सका था। 

    अब इसरो EOS-05 के जरिए इस तरह की सैटेलाइट सेवा को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है. अगर मिशन सफल रहता है, तो भारत को अंतरिक्ष से बड़े इलाके पर बार-बार नजर रखने की नई सुविधा मिलेगी। 

  • GST Collection में जोरदार बढ़ोतरी, ₹1.99 लाख करोड़ जुटाए; असम के आंकड़ों ने किया हैरान

    GST Collection में जोरदार बढ़ोतरी, ₹1.99 लाख करोड़ जुटाए; असम के आंकड़ों ने किया हैरान

    नई दिल्ली
     जीडीपी ग्रोथ के बाद जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर भी अच्छी खबर आई है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़कर 1,99,853 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल अगस्त में यह 1,74,116 करोड़ रुपये रहा था। घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व 9.3 प्रतिशत बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं आयात से राजस्व 29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,604 करोड़ रुपये हो गया। जीएसटी कलेक्शन में लगातार तीसरी बार दोहरे अंकों में तेजी आई है। जुलाई में इसमें 15.4% और जून में 13.9% की बढ़त हुई थी।

    सकल केंद्रीय जीएसटी संग्रह अगस्त में 38,413 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी संग्रह 46,316 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी संग्रह 1.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। अगस्त में रिफंड भी 68 प्रतिशत बढ़कर 31,795 करोड़ रुपये हो गया। समीक्षाधीन महीने में शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा जो सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत की वृद्धि है।

    सोमवार को आए GDP ग्रोथ के आंकड़े के बाद देश के लिए ये एक और सकारात्‍मक संकेतक है। 

    •     घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व 9.3 प्रतिशत बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। 
    •     वहीं आयात से GST आय 29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,604 करोड़ रुपये हो गया। 
    •     CGST यानी केंद्र सरकार के हिस्‍से आने वाला सकल केंद्रीय जीएसटी संग्रह अगस्त में 38,413 करोड़ रुपये रहा। 
    •     वहीं राज्‍यों के हिस्‍से आने वाला SGST यानी राज्य जीएसटी संग्रह 46,316 करोड़ रुपये रहा। 
    •     IGST यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी संग्रह 1.15 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा के लेवल पर पहुंच गया। 

    पांच महीनों का लेखा-जोखा
    इस साल अप्रैल-अगस्त की अवधि में कुल GST कलेक्शन 11 प्रतिशत बढ़कर 10.43 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 9.40 लाख करोड़ रुपये था। घरेलू कुल रेवेन्यू में 5.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि इंपोर्ट से होने वाले रेवेन्यू में 27.3 प्रतिशत का उछाल आया। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले पांच महीनों में नेट GST रेवेन्यू 9 प्रतिशत बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल रिफंड 23.8 प्रतिशत बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गए।

    इस महीने में रिफंड 68 प्रतिशत बढ़कर ₹31,795 करोड़ हो गए, जबकि नेट GST कलेक्शन ₹1.68 लाख करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। अगस्त में ग्रॉस सेंट्रल GST कलेक्शन ₹38,413 करोड़ था, जबकि स्टेट GST कलेक्शन ₹46,316 करोड़ रहा। इस महीने में इंटीग्रेटेड GST कलेक्शन ₹1.15 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।

    कुल मिलाकर, अगस्त में ग्रॉस GST कलेक्शन बढ़कर लगभग ₹2 लाख करोड़ हो गया, जिसकी मुख्य वजह घरेलू और इंपोर्ट से होने वाली ज़्यादा कमाई थी; हालांकि रिफंड में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हुई और नेट कलेक्शन सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1.68 लाख करोड़ हो गया।

    GST काउंसिल सेक्रेटेरिएट द्वारा जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम के अनुसार, GST काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को सुबह 11 बजे नई दिल्ली में होनी है।

    यूपी में 19% बढ़ोतरी
    बड़े राज्यों में अगस्त में उत्तर प्रदेश में घरेलू GST कलेक्शन में 19% की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद तेलंगाना में 16%, गुजरात में 15%, कर्नाटक और केरल में 13-13% और हरियाणा और पंजाब में 12-12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश की इकॉनमी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले राज्य महाराष्ट्र में 8% की बढ़ोतरी के साथ कलेक्शन ₹28,779 करोड़ हो गया।

    असम ने चौंकाया
    इस बीच दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के कलेक्शन में 1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 7-7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। राजस्थान और गोवा में कलेक्शन 2 प्रतिशत कम हुआ। असम में इस महीने के दौरान जीएसटी रेवेन्यू में 162 प्रतिशत की असाधारण रूप से तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल अगस्त में यह 1,403 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 3,679 करोड़ रुपये रहा।

  • हवा में इंजन खराब होने से हड़कंप! IndiGo विमान की गोवा में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग

    हवा में इंजन खराब होने से हड़कंप! IndiGo विमान की गोवा में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग

    नई दिल्ली

    गोवा से दिल्ली आ रही इंडिगो की एक फ्लाइट को इंजन में खराबी की सूचना के बाद वापस गोवा लौटना पड़ा. सूत्रों के मुताबिक, IndiGo की फ्लाइट 6E 2102 ने मंगलवार सुबह गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद विमान के एक इंजन में खराबी की सूचना मिली. इसके बाद विमान की गोवा के मोपा एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। 

    जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट 6E 2102 ने सुबह करीब 9:16 बजे गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद विमान के एक इंजन में खराबी की जानकारी सामने आई. इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने करीब 9:30 बजे फुल इमरजेंसी घोषित कर दी। 

    सामने आया है कि IndiGo की फ्लाइट 6E 2102 (GOX-DEL) ने मंगलवार सुबह 9:16 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. इंजन में खराबी की सूचना मिलने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने करीब 9:30 बजे फुल इमरजेंसी घोषित कर दी। 

    इसके बाद विमान को वापस गोवा के मोपा एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया. फ्लाइट ने सुबह 9:51 बजे रनवे 28 पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान को बाद में स्टैंड नंबर 6 पर पूरी तरह पार्क कर दिया गया। 

    विमान के सुरक्षित तरीके से पार्क होने के बाद ATC ने सुबह 10:03 बजे फुल इमरजेंसी समाप्त कर दी. राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं. लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित उतार लिया गया और उन्हें एयरपोर्ट के बोर्डिंग एरिया में ठहराया गया है। 

    दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए अब फ्लाइट के प्रस्थान का संशोधित समय दोपहर 3:30 बजे निर्धारित किया गया है. हालांकि, यह समय विमान को जरूरी क्लीयरेंस मिलने और ऑपरेशनल जरूरतों पर निर्भर करेगा। 

    सूत्रों के मुताबिक, इंजन में खराबी की सूचना मिलने के बाद विमान को वापस गोवा की ओर मोड़ने का फैसला लिया गया था. विमान को सुरक्षित लैंडिंग के लिए मोपा एयरपोर्ट वापस लाया गया. फिलहाल विमान में कितने यात्री सवार थे और इंजन में किस तरह की तकनीकी खराबी आई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. इंडिगो की ओर से भी घटना को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। 

  • चाय से लेकर रात के सफर तक महंगा! मुंबई में मंगलवार से आम आदमी पर बढ़ा खर्च

    चाय से लेकर रात के सफर तक महंगा! मुंबई में मंगलवार से आम आदमी पर बढ़ा खर्च

    नई दिल्‍ली/ मुंबई 
     हर नया महीना अपने साथ जिंदगी और जेब से जुड़े कुछ बदलाव जरूर लेकर आता है. नया महीना सितंबर शुरू हो चुका है. कैलेंडर बदलते ही रसोई गैस, इनकम टैक्स, दूध के भाव से लेकर हवाई यात्रा तक के कई अहम नियम बदल चुके हैं. इनमें से कुछ बदलाव जहां आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएंगे, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो आपकी जेब पर सीधा बोझ डालेंगे. अगर आप भी अनजाने में अतिरिक्त चार्ज या जुर्माने से बचना चाहते हैं, तो 1 सितंबर से लागू हुए इन 5 बड़े बदलावों के बारे में जान लीजिए। 

    सितंबर के पहले दिन तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका दिया है. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹9.50 की बढ़ोतरी कर दी गई है. इसके अलावा 5 किलोग्राम वाले नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडर का भाव भी ₹2 बढ़ाकर ₹762 से ₹764 कर दिया गया है. इससे होटल और रेस्टोरेंट का खाना महंगा हो सकता है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में रहने वालों के लिए 1 सितंबर की तारीख महंगाई की मार लेकर आई है. एक ही दिन में तीन अलग-अलग मोर्चों पर आम आदमी की जेब पर असर पड़ा है. दूध, सीएनजी-पीएनजी और ऑटो-टैक्सी का किराया, तीनों एक साथ महंगे हो गए हैं. गैस कंपनी महानगर गैस ने सीएनजी और घरेलू पीएनजी के दाम बढ़ा दिए हैं, टैक्सी और ऑटो का न्यूनतम किराया भी बढ़ गया है, और तबेले का दूध भी अब पहले से महंगा मिलेगा। 

    सबसे पहले बात गैस की. महानगर गैस यानी एमजीएल ने सोमवार को बताया कि मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया है. अब यहां सीएनजी 88 रुपये प्रति किलो में मिलेगी. घरेलू पीएनजी की कीमत भी 1 रुपये प्रति एससीएम बढ़ाई गई है. यह बढ़ोतरी 1 सितंबर की आधी रात से ही लागू हो चुकी है। 

    कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर उनकी लागत पर पड़ रहा है. कंपनी को महंगे दामों पर स्पॉट आरएलएनजी आयात करनी पड़ रही है, इसलिए यह बढ़ोतरी जरूरी हो गई। 

    दूसरा झटका सफर करने वालों को लगा है. मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण यानी एमएमआरटीए ने ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. अब ऑटो का न्यूनतम किराया 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया 33 रुपये हो गया है. टैक्सी का प्रति किलोमीटर किराया 20.66 रुपये से बढ़कर 21.90 रुपये हो गया है, जबकि ऑटो का किराया 17.14 रुपये से बढ़कर 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। 

    पहले 1.5 किलोमीटर के लिए टैक्सी में अब 31 की जगह 33 रुपये देने होंगे. ड्राइवरों को अपने मीटर नई दरों के हिसाब से कैलिब्रेट कराने के लिए नवंबर के अंत तक का समय मिला है, वरना जुर्माना भरना पड़ सकता है. मुंबई में साढ़े चार लाख से ज्यादा ऑटो और 50 हजार से अधिक टैक्सियां चलती हैं. इससे पहले किराया फरवरी 2025 में बढ़ा था, यानी करीब 18 महीने बाद यह बढ़ोतरी हुई है। 

    तीसरा और सबसे सीधा असर दूध पर पड़ा है. आज से तबेले का दूध 9 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है. अब यह 93 की जगह 102 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. यह नई कीमत अगले साल 28 फरवरी तक लागू रहेगी। 

    दूध उत्पादकों का कहना है कि पशु आहार जैसे अनाज, तूर चुनी और चना चुनी की कीमतें 25 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं, इसलिए यह फैसला लेना पड़ा।  

    दूध के दाम बढ़े
    मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब दूध लेने के लिए ज्‍यादा दाम चुकाने होंगे. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने डेयरी फार्मों से मिलने वाले भैंस के दूध के थोक दाम सीधे ₹93 से बढ़ाकर ₹102 प्रति लीटर कर दिए हैं. दूध की कीमतों में हुआ यह ₹9 का भारी इजाफा 28 फरवरी तक लागू रहेगा. इस बढ़ोरती से दूध के साथ ही दूध से बने सभी डेयरी उत्पाद महंगे हो जाएंगे। 

    LPG e-KYC की डेडलाइन खत्म
    एलपीजी कनेक्‍शन की ई-केवाईसी कराने की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी, जो अब बीत चुकी है. आपने अगर अपने घरेलू रसोई गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं कराई है, तो आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. जिन उपभोक्ताओं ने यह प्रोसेस पूरा नहीं किया है, उन्हें आगे गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने और बैंक खाते में सब्सिडी हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

    ITR फाइल करने पर लगेगा जुर्माना
    असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नॉन-ऑडिट खातों वाले टैक्सपेयर्स के पास बिना पेनाल्टी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-3 और ITR-4) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी. अगर आप इस डेडलाइन से चूक गए हैं, तो अब रिटर्न फाइल करने पर आपको लेट फीस चुकानी होगी। 

    बोर्डिंग पास पर मुहर का झंझट खत्म
    विदेश यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ा और राहत भरा नियम लागू हुआ है. ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने एयरपोर्ट्स पर इमिग्रेशन काउंटर पर फिजिकल बोर्डिंग पास पर मुहर (स्टैम्प) लगाने की व्यवस्था को बंद कर दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या डिजिटल कॉपी दिखाकर तेजी से इमिग्रेशन क्लीयर कर सकेंगे, जिससे लंबी कतारों और समय की बर्बादी से मुक्ति मिलेगी। 

  • अर्थव्यवस्था को 7.8% का बूस्टर, PM मोदी ने फिर दिया ‘स्वदेशी अपनाओ’ का मंत्र

    अर्थव्यवस्था को 7.8% का बूस्टर, PM मोदी ने फिर दिया ‘स्वदेशी अपनाओ’ का मंत्र

     नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मंगलवार को भारत की पहली तिमाही में जोरदार जीडीपी ग्रोथ को लेकर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा तमाम ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद देश की इकोनॉमी तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वदेशी मंत्र भी दिया और अपील करते हुए कहा कि अगर जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचें और विदेशों में शादी समारोह के बजाय देश में ही शादी करें। 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की ग्रोथ रेट के दमदार आंकड़ें को लेकर तारीफ की है और कहा है कि इस आंकड़े से देश खुशियों से भर गया है. उन्होंने कहा कि देश ने 7.8 फीसदी की विकास दर हासिल की है और आगे भी हमें इस रफ्तार को बरकरार रखना है. हालांकि, भारत के भीतर ही निराशा में डूबे हुए लोग चारों तरफ निराशा फैलाने में ही लगे हुए हैं। 

    जरूरत के बिना सोना न खरीदने की अपील
    India GDP Growth की तारीफ करने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को स्वदेशी मंत्र देते हुए अपी की कि भारतीय लोग विदेशों शादी के लिए जाते हैं, तो उन्हें नहीं जाना चाहिए. इसके अलावा अगर जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदना चाहिए. हम आत्मनिर्भरता के जरिये 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करेंगे. हमें इसके लिए संकल्प लेना होगा.  उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से विदेश यात्रा से बचने की अपील की है। 

    'झूठ की गूंज के बीच उम्मीद से बेहतर जीडीपी'
    जनरेशन-Z से जुड़ने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी-वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि देश में फैली 'झूठ की गूंज' के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Indian Economy ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। 

    गौरतलब है कि सोमवार को जारी India GDP Growth के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो RBI और तमाम एक्सपर्ट्स द्वारा जताए जा रहे अनुमानों से कहीं अधिक है. SCO शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो कैप्शन में इसे लेकर लिखा, '7.8% की ग्रोथ, शानदार आंकड़े, और भी मजबूत आत्मविश्वास। 

    दुनिया युद्ध में डूबी, भारत ने दिखाया दम
    पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की प्रभावशाली ग्रोथ ऐसे ग्लोबल हालातों में देखने को मिली है, जो तमाम युद्धों, सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद दिखी. प्रधानमंत्री ने कहा, 'दुनिया युद्ध में डूबी हुई है, दुनिया संकटों से घिरी हुई है, सप्लाई चेन पूरी तरह से बाधित है, कोविड-19 महामारी के बाद से स्थिरता नहीं आई है और इन सबके बावजूद भारत बहुत तेजी से विकास कर रहा है। 

    PM ने स्वदेशी अपनाने पर दिया जोर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि, 'जितना अधिक हम स्वदेशी अपनाएंगे, जितना अधिक हम आत्मनिर्भरता पर जोर देंगे, मुझे पूरा विश्वास है कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे, तो हम अपनी युवा पीढ़ी के सामने एक विकसित भारत पेश करेंगे.' उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के विजन को दोहराते हुए लोगों से 'लोकल वोकल' और 'भारत में शादी' करने की अपील की।  

     

  • सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का दांव पड़ा उल्टा, अमेरिकी मंच पर इंटरनेशनल एक्सपर्ट नहीं पहुंचे

    सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का दांव पड़ा उल्टा, अमेरिकी मंच पर इंटरनेशनल एक्सपर्ट नहीं पहुंचे

    वॉशिंगटन
    सिंधु जल संधि पर अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की फजीहत हो गई है। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी आयोजकों ने कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था लेकिन एक भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ नहीं पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन में हुई एक पॉलिसी बातचीत में ज्यादातर पाकिस्तानी लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े झगड़ों को 'सिंधु जल संधि' (IWT) से पीछे हटने का बहाना नहीं बनाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान जो प्रोपेगेंडा फैला रहा है उसमें उसे बड़ा झटका लगा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक 28 और 29 अगस्त को इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस बातचीत के दौरान पाकिस्तानी वक्ताओं ने तर्क दिया कि पानी के बंटवारे की व्यवस्था को राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े झगड़ों से अलग रखा जाना चाहिए और संधि की शर्तों के आधार पर ही सिंधु नदी प्रणाली का प्रबंधन जारी रहना चाहिए। वहीं 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि राजनीतिक तनावों के कारण उस समझौते को कमजोर नहीं होने देना चाहिए जो पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धों और बार-बार आए संकटों के बावजूद कायम रहा है।

    अमेरिकी बैठक में नहीं पहुंचे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ
    अमेरिका की राजधानी में चर्चा आयोजित करके इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की गंभीर कोशिशों के बावजूद वह किसी भी जल या अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ को इसमें शामिल करने में नाकाम रहा। इनमें से कोई भी इसके किसी सत्र में शामिल नहीं हुआ। बोस्टन यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर जरूर इसमें शामिल हुए थे लेकिन वो भी लाहौर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर आदिल नजम थे।

    इस कार्यक्रम के फ्लॉप होने के बाद यही पता चलता है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय मंच सिंधु जल संधि के मुद्दे को उठाने को तैयार नहीं है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया, जिसमें UN की भी भूमिका हो सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पाकिस्तान को चीन से भी सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि चीन इस मामले के नतीजे को प्रभावित करने की स्थिति में है।

    विश्व बैंक पहले ही खारिज कर चुका है मध्यस्थता की बात
    विश्व बैंक के प्रमुख अजय सिंह बंगा ने कई बार सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के उन तर्कों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि बैंक को भारत और पाकिस्तान के बीच दखल देना चाहिए। उन्होंने साफ कर दिया था कि उन्हें किसी द्विपक्षीय मुद्दे में बैंक की कोई भूमिका नहीं दिखती।

    वॉशिंगटन में हुई बातचीत में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि संधि के कानूनी और संस्थागत ढांचे को बनाए रखना जरूरी है। हिस्सा लेने वालों ने कहा कि यह संधि युद्धों, संकटों और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनावों के बावजूद कायम रही है और इसने पानी से जुड़े सहयोग को विवादों से अलग रखने में मदद की है।

  • यूक्रेनी हमलों के बीच गुजरात की इस रिफाइनरी का बड़ा रोल, 2 महीने में रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल

    यूक्रेनी हमलों के बीच गुजरात की इस रिफाइनरी का बड़ा रोल, 2 महीने में रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल

    अहमदाबाद 

    यूक्रेन और रूस के बीच करीब साढ़े चार साल से जंग जारी है। इस दौरान दोनों ही देशों ने एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। यूक्रेन के खास रणनीति के तहत रूस की तेल रिफाइनरीज को निशाना बनाया और उन पर ड्रोन हमले किए ताकि उसका तेल उत्पादन बाधित हो। जब यूक्रेन इस मकसद में कामयाब रहा तो रूस में तेल का संकट गहराने लगा। ऐसी स्थिति में भारत, रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश बनकर उभरा है। जहाज निगरानी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

    इस बीच, एक खबर सामने आई है कि गुजरात की एक रिफाइनरी ने इस स्थिति का सबसे ज्यादा लाभ उठाया है और दो महीने के अंदर भारत से हुई 10 लाख बैरल गैसोलीन सप्लाई में अधिकांश हिस्सेदारी उसी की थी। ये कंपनी है गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी, जिसका संचालन नयारा एनर्जी करती है। नयारा एनर्जी में रूस की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
    जून-जुलाई में भारत ने प्रतिदिन 26 लाख बैरल कियाआयात

    ऊर्जा विश्लेषक कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस का समुद्री रास्ते से पेट्रोल आयात करीब 1,25,000 बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। यह पूरे माह के लिए लगभग 4.7 लाख टन के बराबर है। रूस की रिफाइनरी पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों से घरेलू ईंधन उत्पादन में भारी गिरावट आई है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। जून और जुलाई में भारत ने प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक रूसी कच्चा तेल आयात किया, जो फरवरी में करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा।

    घरेलू पेट्रोल उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट
    ऐसी संभावना है कि रूस को निर्यात किया गया कुछ पेट्रोल भी रूसी कच्चे तेल से ही भारत में तैयार किया गया हो। इस तरह रूस से भारत आने वाला कच्चा तेल शोधन के बाद पेट्रोल के रूप में वापस रूस पहुंच रहा है। रूस दुनिया के बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल है, लेकिन यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण उसकी रिफाइनिंग क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। घरेलू पेट्रोल उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट के चलते रूस को अब इसका आयात करना पड़ रहा है। इसके साथ ही देश में ईंधन बिक्री पर भी अंकुश जारी हैं।

    बैन के बावजूद रूस कैसे पहुंचे तेल
    वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले देशों में भारत, तुर्किये और मोरक्को शामिल रहे। रूस ने जुलाई में पेट्रोल के निर्यात पर लागू पूर्ण प्रतिबंध को उत्पादकों और गैर-उत्पादकों दोनों के लिए जनवरी, 2027 के अंत तक बढ़ा दिया था। डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध भी एक सितंबर, 2026 तक बढ़ाया गया है। रूस के अगस्त के पेट्रोल आयात में करीब 55 प्रतिशत, यानी लगभग 2.6 लाख टन, ऐसा माल था जिसे प्रतिबंधित जहाजों के जरिये पहुंचाया गया। वॉर्टेक्सा के मुताबिक, अगस्त में भारत से रूस पहुंचने वाले पेट्रोल के सभी कार्गो प्रतिबंधित बेड़े के जहाजों पर लाए गए और भूमध्यसागर में जहाज-से-जहाज (एसटीएस) हस्तांतरण के जरिये रूस पहुंचे।

    रूसी की रिफाइनरी पर 32 हमले
    रूस के अगस्त में कुल पेट्रोल आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जहाज-से-जहाज हस्तांतरण के जरिये पहुंचा। इनमें अधिकांश हस्तांतरण के दौरान जहाजों ने अपना स्वचालित पहचान तंत्र (एआईएस) बंद रखा। इस बीच, रूस के डीजल निर्यात पर भी भारी असर पड़ा है। वॉर्टेक्सा के अनुसार, 25 अगस्त तक अगस्त में रूस का समुद्री डीजल/गैसऑयल निर्यात करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है। मासिक आधार पर यह स्थिर रहा है, लेकिन एक साल पहले की समान अवधि के आंकड़े 6.10 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी कम है। साथ ही यह पांच साल के औसत स्तर से 81 प्रतिशत कम हैं। वॉर्टेक्सा के अनुसार, जुलाई और अगस्त में रूसी की रिफाइनरी पर करीब 32 हमले हुए हैं।

  • नेपाल की बाढ़ के बाद अलर्ट, उत्तराखंड में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तेज

    नेपाल की बाढ़ के बाद अलर्ट, उत्तराखंड में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तेज

    नई दिल्ली 
    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की अस्थिरता ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर उत्तराखंड में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तेज कर दी गई है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को राज्य में मौजूद ग्लेशियरों और ज्ञात ग्लेशियल झीलों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वैज्ञानिकों का फोकस हैंगिंग ग्लेशियर पर भी है। ये ऐसे बर्फीले हिस्से होते हैं जो बेहद खड़ी पहाड़ी ढलानों या ऊंची घाटियों में स्थित रहते हैं और बड़े ग्लेशियरों से अलग हो सकते हैं।

    अप्रैल 2026 में प्रकाशित रिसर्च में मध्य हिमालय के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की गई। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 71.7 वर्ग किलोमीटर पाया गया और इनमें से लगभग 30 प्रतिशत बर्फ का आयतन ऊपरी अलकनंदा बेसिन में है। हैंगिंग ग्लेशियर इसलिए खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि तापमान बढ़ने और ग्लेशियरों के पीछे हटने से उनकी स्थिरता प्रभावित हो सकती है। जब मुख्य ग्लेशियर पिघलकर पीछे हटता है तो उससे जुड़े बर्फ के कुछ हिस्से खड़ी ढलानों पर अलग-थलग पड़ जाते हैं। नीचे से मिलने वाला सहारा कम होने पर ये हिस्से अचानक टूटकर नीचे गिर सकते हैं। ऐसी घटना सिर्फ बर्फ के गिरने तक सीमित नहीं रहती।

    कितने विनाशकारी हो सकते हैं ग्लेशियर
    ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने पर बर्फ, चट्टान, बर्फीला मलबा और मिट्टी तेजी से नीचे की ओर बढ़ सकते हैं। रास्ते में यह मलबा और अधिक सामग्री अपने साथ जोड़कर विनाशकारी रूप ले सकता है। इससे नदियों का रास्ता रुक सकता है और पानी जमा होकर बाद में अचानक बाढ़ का कारण बन सकता है। यानी एक ग्लेशियर टूटने की घटना बर्फीले मलबे, भूस्खलन, नदी अवरोध और बाढ़ जैसी कई आपदाओं की शुरुआत कर सकती है।

    हैंगिंग ग्लेशियरों से बने बर्फीले मलबे का अध्ययन
    उत्तराखंड के लिए खतरे की गंभीरता का अंदाजा इस अध्ययन के मॉडल से लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने 25 हैंगिंग ग्लेशियरों से संभावित बर्फीले मलबे के बहाव का अध्ययन किया। इसके अनुसार बद्रीनाथ क्षेत्र में ऐसे बहाव की अधिकतम ऊंचाई 51 मीटर तक पहुंच सकती है, जो करीब 15 से 17 मंजिला इमारत जितनी है। बद्रीनाथ-माणा सड़क पर यह ऊंचाई 48 मीटर तक आंकी गई। माणा, बद्रीनाथ, हनुमान चट्टी और घांघरिया जैसे इलाके प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। हालांकि, ये आंकड़े सबसे खराब स्थिति में किए गए अनुमान हैं और इसका मतलब यह नहीं कि किसी खास ग्लेशियर के टूटने या उसके समय की भविष्यवाणी की गई है।

    जानें खतरा बढ़ने के क्या कारण
    रिपोर्ट के मुताबिक, खतरा इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि पहाड़ी घाटियों में निर्माण और आबादी लगातार बढ़ रही है। रिसर्च के अनुसार 2000 से 2030 के बीच संभावित प्रभावित क्षेत्रों में निर्मित क्षेत्र 8,025 वर्ग मीटर से बढ़कर 1,51,800 वर्ग मीटर और वहां रहने वाली आबादी 380 से बढ़कर करीब 8,540 हो सकती है। नेपाल की आपदा के पीछे भी ग्लेशियर और चट्टान के टूटने की भूमिका की जांच की जा रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक लैंगटांग लिरुंग चोटी के पास ग्लेशियर और चट्टान का एक हिस्सा पहाड़ की ऊपरी ढलान से अलग हुआ था। गर्म होते मौसम में ग्लेशियर के पीछे हटने से निचले हिस्से का सहारा कम हुआ और वह अस्थिर हो गया।

    भारत को अभी क्या करना चाहिए?
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ऐसे खतरों से निपटने के लिए केवल ग्लेशियरों की पहचान करना काफी नहीं है। लगातार निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, समय पर निकासी और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण को नियंत्रित करना जरूरी है। 2021 की चमोली आपदा और स्विट्जरलैंड के ब्लाटेन में 2025 की बर्फ-चट्टान आपदा की तुलना करते हुए एक अध्ययन किया गया। इससे पता कि बेहतर निगरानी और समय पर कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है। हर हिमस्खलन के समय और स्थान की सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है, लेकिन निगरानी और तैयारी के जरिए संभावित नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।

  • 5 और 15 साल की उम्र में जरूरी है आधार अपडेट! जानें नीले बाल आधार और सफेद आधार के नियम

    5 और 15 साल की उम्र में जरूरी है आधार अपडेट! जानें नीले बाल आधार और सफेद आधार के नियम

    नई दिल्ली
    देश में आधार कार्ड (Aadhar Card) हर नागरिक की पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है. आमतौर पर हम सभी के पास जो सफेद रंग का आधार कार्ड (White Aadhar Card) होता है, उसमें 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर, जनसांख्यिकीय (Demographic) डेटा और फिंगरप्रिंट व आईरिस स्कैन जैसे बायोमेट्रिक डेटा दर्ज होते हैं। 

    वहीं, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष रूप से नीले रंग का आधार कार्ड जारी करता है, जिसे बाल आधार भी कहा जाता है. रंग के अलावा भी इन दोनों आधार कार्डों में कई बड़े और बुनियादी अंतर हैं, जिन्हें हर माता-पिता को जानना बेहद जरूरी है। 

    सफेद और नीले आधार कार्ड के बीच सबसे मुख्य अंतर बायोमेट्रिक डेटा का होता है. 5 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों और वयस्कों के लिए जारी सफेद आधार कार्ड में व्यक्ति की सभी दस उंगलियों के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों का डेटा संग्रहित होता है। 

    बच्चों के नहीं लिए जाते फिंगर प्रिंट 
    सफेद और नीले आधार कार्ड के बीच सबसे मुख्य अंतर बायोमेट्रिक डेटा का होता है. 5 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों और वयस्कों के लिए जारी सफेद आधार कार्ड में व्यक्ति की सभी दस उंगलियों के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों का डेटा संग्रहित होता है. वहीं, 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चों के बायोमेट्रिक फीचर्स लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए नीले आधार कार्ड को बनाते समय बच्चे का कोई फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन नहीं लिया जाता. इसे सिर्फ बच्चे के फोटो, जनसांख्यिकीय विवरण और माता-पिता में से किसी एक के आधार कार्ड से लिंक करके जारी किया जाता है। 

    बाल आधार को 5 और 15 साल में दो बार कराना होता है अपडेट
    नीला आधार कार्ड पूरी तरह से माता-पिता की पहचान पर निर्भर करता है, जबकि सफेद आधार कार्ड एक स्वतंत्र पहचान पत्र होता है. बाल आधार बनवाते समय बच्चे का कार्ड माता या पिता के आधार नंबर के साथ लिंक किया जाता है. नीला आधार कार्ड सिर्फ बच्चा के 5 साल का होने तक ही मान्य रहता है. जैसे ही बच्चा 5 साल की उम्र पूरी करता है, उसका बायोमेट्रिक अपडेट  कराना जरूरी हो जाता है. अगर 5 साल की उम्र के बाद बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया जाता है, तो बच्चे का नीला आधार कार्ड निष्क्रिय हो जाता है. बायोमेट्रिक अपडेट होते ही यह सामान्य सफेद आधार कार्ड में बदल जाता है. इसके बाद 15 साल की उम्र में दोबारा बायोमेट्रिक अपडेट कराना होता है। 

    बाल आधार के लिए ऐसे करें आवेदन?
    अपने 5 साल से छोटे बच्चे के लिए नीला आधार कार्ड बनवाना बेहद आसान है. इसके लिए नीचे बताए स्टेप्स को फॉलो कर बनाया जा सकता है।