Author: NewseDay

  • ‘अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे तो अखिलेश की जमानत जब्त हो जाएगी’, ओम प्रकाश राजभर का तीखा हमला

    ‘अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे तो अखिलेश की जमानत जब्त हो जाएगी’, ओम प्रकाश राजभर का तीखा हमला

    लखनऊ
    सुभासपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। जेपीएनआईसी के मुद्दे पर भी उन्होंने सपा प्रमुख को घेरते हुए कहा  कि अखिलेश यादव को लीज और बिक्री का अंतर नहीं पता है।

    'अयोध्या से डर लग रहा तो जहूराबाद से चुनाव लड़ें अखिलेश'
    राजभर ने कहा कि अयोध्या से चुनाव लड़ने के लिए अखिलेश यादव ने खुद चुनौती दी थी और अब  मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार कर लिया है। अब अखिलेश को अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाना चाहिए। राजभर ने दावा किया कि वहां चुनाव लड़ने पर अखिलेश यादव की जमानत जब्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ना चाहते तो जहूराबाद आकर उनसे मुकाबला कर सकते हैं।

    '200 करोड़ का प्रोजेक्ट 865 करोड़ तक पहुंचा, फिर भी अधूरा'
    जेपीएनआईसी को बेचने के आरोप पर राजभर ने अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि परियोजना की शुरुआती लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो सपा सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएनआईसी के आठ सदस्यों में सात अखिलेश यादव के करीबी थे और अखिलेश यादव खुद भी उसमें शामिल थे। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान के होटल, क्लब और आय के अन्य स्रोतों पर अखिलेश यादव और उनके परिवार के लोगों का प्रभाव था।

    राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव के इसे बेचे जाने के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि लीज पर देने और संपत्ति बेचने में अंतर होता है।

    'अखिलेश अपने पांच साल के कार्यकाल को देखें'
    दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ और इस मामले में उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर राजभर ने कहा कि सपा प्रमुख को अपने पांच साल के शासनकाल को भी देखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई पुलिस के साथ बदसलूकी करेगा तो क्या पुलिस उस पर फूल बरसाएगी? राजभर ने कहा कि पुलिस को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी होती है।

  • Punjab News: परगट सिंह का सरकार पर निशाना, तानाशाही के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का ऐलान

    Punjab News: परगट सिंह का सरकार पर निशाना, तानाशाही के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का ऐलान

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान परगट सिंह के पदभार ग्रहण समारोह में रविवार को पार्टी की एकजुटता और विधानसभा चुनाव की रणनीति का संदेश देते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि पंजाब का मौसम इतनी जल्दी बदल जाएगा और यहां की फिजाएं इस तरह बदलेंगी, इसकी उम्मीद नहीं थी।

    दिल्ली से रवाना होते समय मौसम कुछ और था, लेकिन चंडीगढ़ पहुंचने पर बारिश के बीच भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश देखकर उन्होंने सभी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि गर्मी हो या बारिश,कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पंजाब कांग्रेस का झंडा हमेशा ऊंचा रखा है। कार्यकर्ताओं ने आज इसे साबित कर दिया है। पायलट ने नए प्रधान परगट सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें शानदार टीम मिली है। ऐसी टीम किसी के पास नहीं है। यह टीम गोल करने में माहिर है और सभी का सहयोग मिलने से पंजाब में कांग्रेस को आगे बढ़ने में परेशानी नहीं होगी। अब नौजवानों को साथ लेकर पंजाब के हर गांव, हर शहर और हर पिंड तक पहुंचना है।

    साढ़े 4 साल में सरकार ने पंजाब को लूटा
    सचिन पायलट ने कहा कि अगले चार महीने केवल सत्ता हासिल करने या आम आदमी पार्टी की सरकार को हटाने का संघर्ष नहीं हैं, बल्कि पंजाब के भविष्य का चुनाव है। पंजाब की अहमियत और देश के विकास में पंजाबियों के योगदान को पूरा देश जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि साढ़े चार साल में भगवंत मान सरकार ने पंजाब को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं है कि पंजाब के बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।

    राजा वड़िंग की बात का दिया जवाब
    पायलट ने पूर्व प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग के कार्यकाल में पार्टी को मजबूत बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन समय में वड़िंग ने संगठन को मजबूती देने का काम किया। वड़िंग ने अपने संबोधन में उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को नजरअंदाज नहीं करने की बात कही , जिन्होंने पिछले साढ़े चार साल में पार्टी के लिए मेहनत की। इस पर पायलट ने कहा कि जीवन में किसी की मेहनत कम नहीं पड़ती और न ही किसी की मेहनत बेकार जाएगी। उनके इस बयान पर पंडाल में जमकर तालियां बजीं।

    12 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने का आह्वान
    पायलट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का उल्लेख करते हुए पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पंजाबियों से सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के विरोध कार्यक्रम में भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब को नया रास्ता दिखाना है और आने वाला समय नौजवानों का है। कांग्रेस युवाओं को साथ लेकर आगे बढ़ेगी और प्रदेश के हर गांव तथा शहर तक पहुंचकर जनता के बीच अपनी बात रखेगी।

  • Rajnandgaon News: खुले में रखा मिला जहरीले कीटनाशकों का बड़ा जखीरा, लोगों की सुरक्षा पर चिंता

    Rajnandgaon News: खुले में रखा मिला जहरीले कीटनाशकों का बड़ा जखीरा, लोगों की सुरक्षा पर चिंता

    औंधी/मानपुर/राजनांदगांव.

    मोहला मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के अति संवेदनशील व महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र आंधी तहसील मुख्यालय से कृषि विभाग की घोर आपराधिक लापरवाही और पदीय शक्तियों के दुरुपयोग का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है।

    औधी स्थित दो गोदामों के ठीक बीच के खुले परिसर में भारी मात्रा में जहरीले कीटनाशक, जैव- उर्वरक और रासायनिक पैकेजिंग सामग्री को लावारिस हालत में फेंक दिया गया है। मौके पर किए गए इन्वेस्टिगेटिव सर्वे में साफ देखा गया कि सड़क किनारे फैले इस जहरीले रासायनिक कचरे में Profen 44 जैसे जानलेवा तरल कीटनाशक, Coral जैव उर्वरक और घनश्याम खाद की सैकड़ों बोतलें, सीलबंद पैकेट और बोरियां लावारिस पड़ी सड़ रही हैं। लगातार पड़ रही धूप और बारिश के कारण इन बोतलों से जहरीले रसायनों का रिसाव होकर मिट्टी और भूजल में मिल रहा है, जिससे स्थानीय वनांचल के गरीब मवेशियों, बच्चों और आसपास के पेयजल स्रोतों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। इस पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों का रवैया और भी गैर- जिम्मेदाराना नजर आ रहा है।

    जब मामले को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गोविंद मानपुर धुर्वे से सवाल किए गए, तो उन्होंने ऑन रिकॉर्ड यह तो स्वीकार किया कि रसायनों को इस तरह खुले मैदान में फेंकना नियम विरुद्ध, खतरनाक और गैर- कानूनी है, लेकिन अपनी गर्दन बचाने के लिए पूरा ठीकरा सात साल पुराने कर्मचारियों पर फोड़ दिया। अधिकारी का दावा है कि यह सामग्री लगभग सात से आठ साल पुरानी है, जिसे तत्कालीन कर्मचारियों द्वारा समय पर किसानों को वितरित नहीं किया गया था।

    अधिकारी ने यह भी माना कि नियमानुसार एक्सपायर दवाओं को बाकायदा गड्ढा खोदकर डीकंपोज यानी सुरक्षित विनिष्ट किया जाना चाहिए था, न कि इस तरह खुले में फैलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ करना चाहिए था। अधिकारी के इस रटे-रटाए जवाब ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सात साल पुराना मामला बताकर अफसर अपनी आपराधिक जवाबदेही से बच सकते हैं? अगर दवाइयां सात साल पुरानी थीं, तो इतने वर्षों में जितने भी अधिकारी और गोदाम प्रभारी बदले, उन्होंने प्रभार हस्तांतरण और भौतिक सत्यापन के दौरान इस अनुपयोगी स्टॉक का रिकॉर्ड उच्च कार्यालय को क्यों नहीं भेजा ? हर साल होने वाले सरकारी ऑडिट में लाखों रुपये का यह सरकारी माल कागजों में दर्ज क्यों नहीं हुआ?

    क्या साक्ष्य मिटाने और सरकारी चोरी छुपाने की नीयत से इस रासायनिक कचरे को हाल ही में गोदाम के अंदर से निकालकर खुले मैदान में फेंका गया है? मीडिया में मामला उजागर होने और साक्ष्य सामने आने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर पल्ला झाड़ने में जुट गए हैं। वर्तमान में पदस्थ अधिकारियों का कहना है कि उनके चार्ज लेने से पहले यह सामग्री वहां नहीं थी, जबकि स्थानांतरित गए पूर्व अफसरों का दावा है कि माल गोदाम के भीतर ही था। वनांचल क्षेत्र का गरीब किसान साल-दर-साल खाद-बीज और कीटनाशकों के लिए तरसता रहा और दूसरी तरफ जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई शासकीय दवाइयां अफसरों की नाकामी से गोदामों में सड़ती रहीं।

  • सतना में खूनी वारदात से सनसनी, नकाबपोश बदमाशों ने किसान पर किया हमला, पांच की हालत गंभीर

    सतना में खूनी वारदात से सनसनी, नकाबपोश बदमाशों ने किसान पर किया हमला, पांच की हालत गंभीर

    सतना.

    जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनवारी गांव में शनिवार-रविवार की दरम्यानी देर रात नकाबपोश बदमाशों ने एक घर में घुसकर खूनी वारदात को अंजाम दिया। खेत में बने घर के बरामदे में सो रहे 40 वर्षीय किसान रज्जन सिंह पटेल की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई।

    हमलावरों ने उनकी पत्नी, दो बच्चों और बुजुर्ग दादी पर भी हमला कर घायल कर दिया। वारदात के बाद बदमाश घर से गहने और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर हमले और किसान की हत्या से गांव में दहशत फैल गई।

    बरामदे में सो रहे किसान पर हमला
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 12:30 बजे रज्जन सिंह पटेल अपने खेत में बने घर के बरामदे में खाट पर सो रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान करीब आधा दर्जन नकाबपोश बदमाश वहां पहुंचे और रज्जन पर कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    चीख-पुकार सुनकर बाहर निकला परिवार
    मृतक की पत्नी अंजना सिंह पटेल के मुताबिक, पति पर हमला होने के दौरान चीख-पुकार सुनकर वह अपनी आठ वर्षीय बेटी रागनी सिंह पटेल, 12 वर्षीय बेटे अनिकेत पटेल और बुजुर्ग दादी लल्ली सिंह पटेल के साथ बाहर निकलीं। इस दौरान हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया। अंजना के सिर और लल्ली सिंह के सिर व आंख में चोट आई है। बेटी रागनी के सिर में भी चोट लगी, जबकि बेटे अनिकेत को मामूली चोट आई है।

    पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची
    घटना की सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक महेंद्र सिंह और कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। डायल 112 की सहायता से सभी घायलों को सिविल अस्पताल मैहर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल पर फोरेंसिक अधिकारी डॉ. महेंद्र पटेल अपनी टीम के साथ पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मामले में गांव के कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हत्या और लूट की इस वारदात को लेकर पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

  • महंगी ऊर्जा और अमेरिका-चीन तनाव से दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित, भारत की रफ्तार बरकरार रहने का अनुमान

    महंगी ऊर्जा और अमेरिका-चीन तनाव से दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित, भारत की रफ्तार बरकरार रहने का अनुमान

    नई दिल्ली
    दुनिया संकट में हैं, ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर वेस्ट एशिया में तनाव का बेहद बुरा असर देखने को मिल सकता है. ये चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय यूएनसीटीएडी (UNCTAD Warning Global Economy) ने दी है. इसमें अलर्ट किया गया है कि मध्य पूर्व में टेंशन के चलते पैदा हुआ एनर्जी संकट सबसे बड़ा खतरा बना है और इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोख रेट बीते साल के 2.9% से घटकर 2026 में 2.6% रह सकती है.

    एनर्जी प्राइस का दुनिया की रफ्तार पर असर
    UNCTAD के मुताबिक, वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट का बुरा असर दुनिया की इकोनॉमिक रफ्तार पर पड़ रहा है. अपनी व्यापार और विकास रिपोर्ट में इसने जहां ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ रेट बीते साल के 2.9% से घटकर इस साल 2.6% होने का अनुमान जाहिर किया है. तो वहीं कहा है कि वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में इस वर्ष स्थिर कीमतों पर 4% की वृद्धि होने का अनुमान है. हालांकि, व्यापार में अनुमानित वृद्धि का अधिकांश हिस्सा हाई एनर्जी कॉस्ट के कारण होने की उम्मीद है.

    संकट में भी नहीं रुकेगा भारत
    यूएनसीटीएडी का ताजा अनुमान बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों, वैश्विक व्यापार के पैटर्न में बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के उछाल से जुड़े वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंताओं के बीच आया है.
    UNCTAD ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास में एशिया का योगदान 59% रहने का अनुमान है, जिसमें भारत की ग्रोथ रेट सबसे अधिक 7.3% रहेगी. इसके अलावा चीन की 4.5% और इंडोनेशिया की 5.2% रहने की उम्मीद है. ये अनुमान वेस्ट एशिया संकट और Energy Price Hike से व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बावजूद ग्लोबल ग्रोथ को समर्थन देने में एशिया की भूमिका को प्रदर्शित करते हैं.

    US-चीन से बदला व्यापार का गणित
    रिपोर्ट में अमेरिका-चीन के बीच तनाव जारी रहने से व्यापार में बदलाव का जिक्र किया गया है. यूएनसीटीएडी ने कहा कि 2024 से चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार में 20% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि पूर्वी एशिया ने चीन और उत्तरी अमेरिका दोनों के साथ व्यापार का विस्तार किया है.

    एजेंसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि व्यापार और निवेश पर लगे प्रतिबंधों के कारण नई कंपनियों के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में प्रवेश करना लगातार कठिन होता जा रहा है. UNCTAD के अनुसार, निर्यात नियंत्रण, निवेश की जांच और सप्लाई चेन की स्थितियां नए एंट्री लेने वाले बिजनेस के लिए रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच जटिल बना रही है.

    AI को लेकर ये बड़ा अलर्ट
    एनर्जी प्राइस से लेकर अमेरिका-चीन में तनाव (US-China Tension) के असर का जिक्र करने के साथ ही एजेंसी की एआई के बढ़ते उपयोग से व्यापार के अवसर और वित्तीय जोखिम दोनों के बारे में अनुमान जाहिर किया है. UNCTAD के अनुसार, सेमीकंडक्टर समेत AI से संबंधित उत्पाद, माल व्यापार के मुख्य चालक के रूप में उभरे हैं. हालांकि, एआई से जुड़े व्यापार में ग्रोथ का मतलब यह नहीं है कि व्यापक विकास में भी स्वतः ही लाभ होगा.

    रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि एआई की बढ़ती लोकप्रियता वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बाजार तेजी से कुछ ही कंपनियों पर निर्भर होते जा रहे हैं. हालांकि, एजेंसी ने इन कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया है.

  • ग्वालियर-बरौनी छपरा मेल में सांप की सूचना से हड़कंप, मोंठ और उरई स्टेशन पर हुई तलाशी; नहीं मिला सांप

    ग्वालियर-बरौनी छपरा मेल में सांप की सूचना से हड़कंप, मोंठ और उरई स्टेशन पर हुई तलाशी; नहीं मिला सांप

    जालौन
    ग्वालियर से बरौनी जा रही छपरा मेल के एसी कोच में सांप होने की आशंका से यात्रियों में अफरातफरी मच गई। यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन पर सूचना दी, जिसके बाद मोंठ स्टेशन पर वन विभाग की टीम और आरपीएफ ने कोच की जांच की।

    जांच के दौरान सांप के बजाय कोच के अंदर चूहा मिला, जिसे बाहर निकाल दिया गया। इसके बावजूद यात्रियों में डर बना रहा। बाद में उरई स्टेशन पर भी आरपीएफ ने कोच की तलाशी ली, लेकिन कुछ नहीं मिला। इस दौरान ट्रेन करीब 10 मिनट अतिरिक्त खड़ी रही।

    ग्वालियर से बरौनी जाने वाली ट्रेन (11123) छपरा मेल शनिवार को नंदखास स्टेशन से गुजर रही थी। इसी दौरान एसी कोच में मौजूद यात्रियों को सांप होने की आशंका हुई। यात्रियों ने तत्काल रेलवे हेल्पलाइन को इसकी सूचना दी।

    तलाशी में नहीं मिला कोई सांप
    ट्रेन के मोंठ स्टेशन पहुंचने पर पहले से मौजूद आरपीएफ और वन विभाग की टीम ने कोच के अंदर तलाशी ली। जांच में एक चूहा मिला, जिसे बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद भी यात्रियों की घबराहट दूर नहीं हुई।

    ट्रेन के दोपहर 4:03 बजे उरई स्टेशन पहुंचने पर आरपीएफ के उप निरीक्षक अनिल कुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे और संबंधित एसी कोच की दोबारा जांच की। हालांकि, तलाशी में कोई सांप या अन्य संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

    आरपीएफ जवानों ने यात्रियों को आश्वस्त किया कि कोच में कोई खतरा नहीं है और वे निश्चिंत होकर यात्रा करें। जांच के चलते ट्रेन करीब 10 मिनट अतिरिक्त स्टेशन पर खड़ी रही।

  • बिहार में जमीन अधिग्रहण पर बड़ा अपडेट, शहरी जमीन पर दोगुना और ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा; भुगतान में देरी जारी

    बिहार में जमीन अधिग्रहण पर बड़ा अपडेट, शहरी जमीन पर दोगुना और ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा; भुगतान में देरी जारी

    पटना
     राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई व्‍यवस्‍था की।

    भू-स्वामियों की जरूरत को देखते हुए उनकी जमीन की खरीद का आदेश दिया, लेकिन अब तक एक भी आवेदक को भुगतान नहीं हो सका है।

    10 सेटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित जमीन बेचने के लिए अब तक 1264 भू-स्वामियों ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को आवेदन दिया है।

    12 ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए जमीन की खरीद प्रक्रिया अटकी
    इसके बावजूद जिला और प्रमंडल स्तर की समितियों से जमीन की जांच रिपोर्ट बिहार राज्य आवास बोर्ड को नहीं मिली है। इससे जमीन बेचकर जरूरी काम निपटाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    खासकर उन भू-स्वामियों के सामने मुश्किल है, जिन्हें इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य जरूरी काम के लिए पैसों की जरूरत है।

    जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक के कारण वे अपनी संपत्ति बेचकर जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विभाग ने 17 जून को आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था।

    जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से भू-स्वामी लगा रहे विभागों के चक्कर
    इसके तहत 100 करोड़ रुपये तक मूल्य वाली जमीन के प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) के पास भेजने हैं। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन के प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजे जाने का प्रावधान है।

    जिला या प्रमंडल स्तर की रैयती भूमि क्रय समिति को जमीन की जांच कर बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत दर, कुल मूल्य और अन्य पहलुओं का आकलन करना था
    संबंधित समितियों ने अब तक अपनी रिपोर्ट आवास बोर्ड को नहीं सौंपी है। इसी कारण जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।

    एक माह में भुगतान का मिला था आश्वासन
    जमीन खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभाग विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर चुका है। 22 जुलाई को विभागीय मंत्री ने एक माह के भीतर भुगतान कराने का आश्वासन भी दिया था।

    इसके बावजूद आवेदकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। आवेदक जिला कार्यालयों से लेकर आवास बोर्ड तक चक्कर लगा रहे हैं।

    नियम के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भू-स्वामी से अंतिम लिखित सहमति ली जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    स्वीकृति मिलने पर बिहार राज्य आवास बोर्ड को सात दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। इसके बाद अधिकृत पदाधिकारी की देखरेख में विक्रय विलेख का निबंधन और जमीन का नामांतरण आवास बोर्ड के पक्ष में कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा।

    पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए सबसे अधिक आवेदन
    बिहार राज्य आवास बोर्ड के अनुसार, पटना जिले में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए सबसे अधिक 859 आवेदन मिले हैं।

    मगध टाउनशिप के लिए 69 आवेदन आए हैं। इन दोनों टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में रोक बरकरार है।

    अन्य टाउनशिप के लिए मिले आवेदनों में सारण के 80, कोसी के 44, तिरहुत के 72, सीतापुरम के 92, मिथिला के 25, रोहतास के एक, मां पूरण देवी के पांच और विक्रमशिला के 17 आवेदन शामिल हैं। इन क्षेत्रों के भू-स्वामियों को जमीन बेचने और भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।

    शहरी जमीन पर दोगुना, ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा
    विभाग ने जमीन खरीद के लिए मुआवजे की दर भी तय की है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए बाजार मूल्य या न्यूनतम सरकारी दर (एमवीआर) में से निर्धारित आधार पर दोगुना भुगतान किया जाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए यह मुआवजा चार गुना होगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण जमीन के मुआवजे पर 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

    हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए आवेदन कर चुके भू-स्वामियों को पहले जांच, मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

  • अभिषेक बनर्जी की याचिका पर बढ़ी हलचल, TMC के 20 बागी सांसदों को जवाब देने के लिए मिली नई समयसीमा

    अभिषेक बनर्जी की याचिका पर बढ़ी हलचल, TMC के 20 बागी सांसदों को जवाब देने के लिए मिली नई समयसीमा

    नई दिल्ली
     लोकसभा स्पीकर के ऑफिस ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका का जवाब देने के लिए 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों को 20 अक्टूबर तक का समय दिया है। स्पीकर के ऑफिस ने शुक्रवार को इन 20 सांसदों को चिट्ठी भेजी। इससे पहले, 25 सितंबर को स्पीकर ने उन्हें 8 अक्टूबर तक का समय दिया था।

    गुरुवार, 8 अक्टूबर को सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर समय सीमा 22 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की, जो उनकी पिछली मांग थी। यह तीसरी बार था जब सांसदों ने समय बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, स्पीकर ने अब उन्हें 22 अक्टूबर के बजाय 20 अक्टूबर तक का समय दिया है, जबकि सांसदों ने 22 अक्टूबर तक का समय मांगा था।

    ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी से अलग हो गए थे सांसद
    इन सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बगावत की थी और बाद में एक अलग राजनीतिक पार्टी के तौर पर मान्यता पाने के लिए NCPI में शामिल हो गए थे। संसद के मॉनसून सत्र से पहले, स्पीकर ने इन 20 बागी सांसदों के लिए बैठने की अलग व्यवस्था की थी। हालांकि, स्पीकर के ऑफिस ने अभी तक उन्हें संसदीय पार्टी के तौर पर मान्यता नहीं दी है।

    अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
    25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि लोकसभा स्पीकर को इस याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए। बनर्जी की याचिका में 'लोकसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985' के नियम 6 के तहत 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है।

     

  • Punjab News: संतान सुख मिलने पर निभाई आस्था की परंपरा, अमृतसर में बच्चों ने धारण किया ‘लंगूर का बाना’

    Punjab News: संतान सुख मिलने पर निभाई आस्था की परंपरा, अमृतसर में बच्चों ने धारण किया ‘लंगूर का बाना’

    अमृतसर.

    पवित्र नगरी अमृतसर स्थित ऐतिहासिक श्री दुर्ग्याणा तीर्थ परिसर के बड़े हनुमान मंदिर में रविवार से प्रसिद्ध लंगूर मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले इस मेले में भाग लेने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु अपने बच्चों के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं।

    लाल गोटेदार पोशाक, सिर पर शंकु आकार की टोपी और हाथ में छोटी छड़ी लिए नन्हे-मुन्ने बच्चे पूरे परिसर में बजरंगबली के स्वरूप में नजर आ रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है।

    संतान प्राप्ति की मन्नत से जुड़ी है गहरी आस्था
    बड़े हनुमान मंदिर में लगने वाले इस मेले को लेकर श्रद्धालुओं में अटूट श्रद्धा है। मान्यता है कि जिन निसंतान दंपतियों की मनोकामना श्री हनुमान जी के आशीर्वाद से पूरी होती है, वे नवरात्र के दौरान अपने बच्चे को यहां लेकर आते हैं और उसे लंगूर का बाना पहनाते हैं। इस अवधि में बच्चों को साक्षात बजरंगबली का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

    10 दिनों तक चलता है कठिन साधना का दौर
    धार्मिक परंपरा के अनुसार, लंगूर का रूप धारण करने वाले बच्चों को नवरात्र के पूरे 10 दिनों तक इसी विशेष वेशभूषा में रहना पड़ता है। इस दौरान बच्चों और उनके परिजनों को कई कड़े नियमों व धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना होता है। जमीन पर सोना, सात्विक दिनचर्या और विशेष पूजा-अर्चना इस साधना का हिस्सा होती है।

    दशहरे के अगले दिन उतरता है चोला
    मंदिर परंपरा के मुताबिक, विजयादशमी (रावण दहन) के अगले दिन सुबह लंगूर बने बच्चे बड़े हनुमान मंदिर में नतमस्तक होते हैं। इसके पश्चात विधि-विधान से उनका यह चोला उतारा जाता है और इसी के साथ नवरात्र से शुरू हुई 10 दिवसीय धार्मिक साधना संपन्न होती है। विशिष्ट आस्था और अनूठी संस्कृति को समेटे इस मेले को देखने और बाल-लंगूरों का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।

  • योगी सरकार किसानों की मदद को आगे आई, आंधी-तूफान से गिरे पेड़ों के निस्तारण में मिलेगी राहत

    योगी सरकार किसानों की मदद को आगे आई, आंधी-तूफान से गिरे पेड़ों के निस्तारण में मिलेगी राहत

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर महीने में चक्रवाती तूफान, तेज आंधी और अतिवृष्टि से कई स्थानों पर किसानों के खेतों व निजी भूमि पर बड़ी संख्या में पेड़ों के उखड़ने और गिरने की घटनाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों को राहत देने और गिरे हुए वृक्षों का नियमानुसार तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) और उत्तर प्रदेश वन निगम को निर्देश दिए हैं, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    किसानों के आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि निजी भूमि और खेतों में गिरे पेड़ों को हटाने व उनके निस्तारण के लिए किसानों की ओर से दिए जाने वाले आवेदनों पर वन विभाग और उत्तर प्रदेश वन निगम तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करें। आवेदनों के निस्तारण में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो, ताकि प्रभावित किसान जल्द राहत प्राप्त कर सकें। गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी के परिवहन और निस्तारण में किसानों को किसी तरह की समस्या न हो, इसके लिए आवश्यक अभिवहन अनुज्ञा पत्र (ट्रांजिट परमिट) प्राथमिकता के आधार पर जारी किए जाएं। परमिट जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित वन नियमों के अनुरूप पूरी की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी भूमि पर गिरे वृक्षों की लकड़ी के निस्तारण में अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।

    सड़कों पर गिरे पेड़ तत्काल हटाए जाएं
    सीएम योगी के निर्देशानुसार, तेज आंधी और तूफान के कारण सार्वजनिक मार्गों पर गिरे पेड़ों को तत्काल हटाया जाए। मार्ग अवरोधों का शीघ्र समाधान किया जाए, जिससे यातायात सुचारु बना रहे और आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों और प्रभागीय वनाधिकारियों को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित किसानों को पेड़ों के निस्तारण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के मानसिक या आर्थिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

    पारदर्शिता से होगा गिरे पेड़ों का निस्तारण
    मुख्यमंत्री ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर जोर दिया है। गिरे हुए वृक्षों को हटाने और उनके निस्तारण से संबंधित सभी कार्य निर्धारित वन नियमों के अनुसार किए जाएंगे। सीएम ने स्पष्ट कहा है कि संकट की इस घड़ी में सरकार किसानों के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए संकल्पबद्ध है।