Author: NewseDay

  • कोरबा-जशपुर में हाथियों का आतंक, कहीं 53 का झुंड तो कहीं शहर में घुसा दंतैल हाथी

    कोरबा-जशपुर में हाथियों का आतंक, कहीं 53 का झुंड तो कहीं शहर में घुसा दंतैल हाथी

    बिलासपुर
    सुबह का वक्त था. बच्चे स्कूल के हॉस्टल में थे. किसान अपने खेतों में धान की फसल को लेकर उम्मीद लगाए हैं. तभी खबर आई कि इलाके में हाथियों का झुंड पहुंच गया है. एक-दो नहीं, पूरे 53 हाथी. स्कूल की बाउंड्री टूट गई. खेतों में खड़ी फसल रौंद दी गई. अब जरा छत्तीसगढ़ के दूसरे जिले की तस्वीर देखिए. यहां हाथियों का पूरा झुंड नहीं, बल्कि एक दंतैल हाथी शहर के भीतर पहुंच गया. कभी अस्पताल परिसर, कभी कॉलेज और फिर चर्च तक. तीन जगहों की बाउंड्रीवाल टूट गई.

    ये दोनों घटनाएं रविवार को छत्तीसगढ़ के कोरबा और जशपुर में सामने आईं. कोरबा में 53 हाथियों के झुंड ने मिशन स्कूल और किसानों के खेतों में नुकसान पहुंचाया. वहीं, जशपुर जिले के कुनकुरी में झुंड से बिछड़ा एक दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया. वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं. सवाल ये है कि जंगल में रहने वाले हाथी स्कूल, खेत, अस्पताल और शहर तक कैसे पहुंच रहे हैं? और जब ऐसा होता है, तो इंसानों और हाथियों, दोनों को सुरक्षित कैसे रखा जाए?
    पहली कहानी कोरबा जिले के तेलियामार की है. यहां जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड मिशन स्कूल के पास पहुंच गया. झुंड में कुल 53 हाथी थे. हाथियों ने स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के बीच डर का माहौल बन गया. नुकसान सिर्फ स्कूल की दीवार तक सीमित नहीं रहा. हाथियों के झुंड ने आसपास के खेतों में धान की फसल को रौंद डाला. सवाल है कि 53 हाथियों का इतना बड़ा झुंड आबादी के करीब पहुंच जाए, तो उससे निपटने की तैयारी कैसी होनी चाहिए? क्योंकि हाथियों को देखकर शोर मचाना, उनके करीब जाना या उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करना खतरे को बढ़ा सकता है.

    अब जशपुर की कहानी सुनिए, जहां दंतैल शहर में घुस आया
    दूसरी घटना जशपुर जिले के कुनकुरी की है. यहां एक दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया. दंतैल यानी नर हाथी, जिसके लंबे दांत बाहर निकले होते हैं. इस हाथी की मौजूदगी ने इलाके में हलचल पैदा कर दी. वह हॉली क्रॉस मिशन हॉस्पिटल के परिसर तक पहुंच गया और वहां की बाउंड्रीवाल तोड़ दी.

    इसके बाद हाथी लोयला कॉलेज परिसर में पहुंचा. फिर उसकी मौजूदगी चर्च परिसर में भी देखी गई. हाथी ने कुल तीन स्थानों की बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचाया.

    अक्सर हाथी को देखने की उत्सुकता में लोग घरों से बाहर निकलने लगते हैं. कोई मोबाइल से वीडियो बनाना चाहता है, कोई पास जाकर उसे देखना चाहता है. लेकिन हाथी कोई ऐसा जानवर नहीं है, जिसके सामने खड़े होकर आराम से वीडियो बनाया जा सके. वह डर जाए, खुद को घिरा हुआ महसूस करे या अचानक दिशा बदल दे, तो गंभीर हादसा हो सकता है. इसीलिए वन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हाथी की लोकेशन पता करना नहीं, बल्कि लोगों को उससे सुरक्षित दूरी पर रखना भी है.

    जंगल से बस्ती तक पहुंचने की वजह क्या है?
    सवाल है कि हाथी आबादी के करीब पहुंचते ही क्यों हैं? इसकी कोई एक वजह हर मामले में नहीं होती. हाथियों की आवाजाही पर जंगल में भोजन और पानी की उपलब्धता, उनके पारंपरिक रास्ते, जंगलों के आसपास खेती और मानवीय गतिविधियों का असर पड़ सकता है. लेकिन कोरबा और कुनकुरी की इन दोनों घटनाओं में हाथियों के आबादी तक पहुंचने की सटीक वजह सामने नहीं आई. हाथियों के रास्तों और इंसानी बस्तियों के बीच टकराव की समस्या केवल दीवार टूटने या फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं रहती. कई बार इससे इंसानों की जान पर खतरा पैदा हो जाता है.

    कोरबा के वन मंडलाधिकारी जितेंद्र शुक्ला के मुताबिक, हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं. उन्होंने बताया कि हाथी ऐप के जरिए ग्रामीणों को भी हाथियों की मौजूदगी के बारे में तत्काल सूचना दी जा रही है. अधिकारी के अनुसार, जनहानि की खबर नहीं है. वन विभाग इतने बड़े झुंड पर निगरानी रखे हुए है, ताकि हाथियों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने दिया जा सके.

    हाथी ऐप से समय पर मिली जानकारी लोगों को सतर्क रहने का मौका देती है. अगर ग्रामीणों को पता हो कि हाथियों का झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है, तो वे उस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं और बच्चों को भी सुरक्षित रख सकते हैं. हालांकि, केवल सूचना देना ही पर्याप्त नहीं है. ऐसी घटनाओं में स्थानीय स्तर पर निगरानी, लोगों को जागरूक करना और हाथियों की आवाजाही के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना भी होता है.

    हाथी दिख जाए, तो क्या नहीं करना चाहिए?
    अगर गांव के रास्ते में सामने हाथी दिखाई दे जाए. या फिर मोबाइल पर सूचना आए कि पास के खेत में हाथियों का झुंड मौजूद है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि हाथी के पास जाने या उसका रास्ता रोकने की कोशिश करने से बचा जाए. हाथी को घेरने या उसे उकसाने से बचना चाहिए. उसके सामने भीड़ लगाकर वीडियो नहीं बनाना चाहिए.

    बच्चों और दूसरे लोगों को हाथी के करीब नहीं जाने देना चाहिए. स्थानीय वन विभाग को जानकारी देनी चाहिए. सुरक्षित दूरी बनाए रखकर वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए. खासकर जब हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद हो, तब यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है कि वे किस दिशा में जाएंगे. इसलिए उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करने के बजाय वनकर्मियों को स्थिति संभालने देना ज्यादा सुरक्षित है.

    कोरबा में 53 हाथियों का झुंड मिशन स्कूल की बाउंड्री तोड़कर खेतों तक पहुंचा. जशपुर के कुनकुरी में एक दंतैल हाथी अस्पताल, कॉलेज और चर्च परिसर तक पहुंच गया. एक तरफ स्कूल में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ किसानों की मेहनत से तैयार होती फसल का. और इन सबके बीच उन लोगों की चिंता भी है, जिन्हें रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है. फिलहाल वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है.

     

     

  • सिंधु जल संधि से AQ खान नेटवर्क तक, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा

    सिंधु जल संधि से AQ खान नेटवर्क तक, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा

    नई दिल्ली
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की प्रथम समिति की बैठक के दौरान पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए भारत ने करारा जवाब दिया है। पड़ोसी देश के द्वारा फैलाए जाने वाले प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत के युवा राजनयिक और प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद, परमाणु और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने का हमारा अधिकार पूरी तरह अक्षुण्ण है।

    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बेदी ने मई में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। भारत ने कहा कि पहलगाम में हुए गंभीर उकसावे के बाद भारत ने केवल अपनी आत्मरक्षा में कदम उठाया था। भारत की यह कार्रवाई नपी-तुली, टारगेटेड और स्थिति को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करते समय परमाणु खतरे का डर दिखाकर भारत को रोका नहीं जा सकता।

    सिंधु जल संधि और एक्यू खान नेटवर्क का भी जिक्र
    बेदी ने अपने संबोधन में दो अन्य बड़े और संवेदनशील मुद्दों का भी जिक्र किया। 1960 में हुई सिंधु जल संधि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता सद्भाव और आपसी विश्वास पर आधारित था। कोई भी देश एक तरफ तो इस विश्वास को तोड़े और दूसरी तरफ इस संधि से मिलने वाले विशेषाधिकारों का लाभ उठाना चाहे तो यह अब संभव नहीं है।

    पाकिस्तान के चर्चित एक्यू खान नेटवर्क (AQ Khan Network) के इतिहास का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का जिक्र किया। भारत ने दुनिया को आगाह किया कि वे उन्नत सैन्य तकनीक और परमाणु हस्तांतरण को लेकर उच्चतम स्तर की सतर्कता बरतें। बेदी ने कहा, "अगर कोई देश आतंकवाद की मदद से हिंसा फैलाता है तो इससे उस देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। परमाणु हथियारों को कूटनीति के रोजमर्रा के औजार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार पहले उकसावे की कार्रवाई करता है, फिर अपनी संलिप्तता से इनकार करता है और भारत के जवाब देने के बाद 'संयम' की अपील करने लगता है।
    इस दौरान उन्होंने भारत के तीन मुख्य सिद्धांतों का जिक्र किया।

    मुंहतोड़ जवाब: भारत पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा और माकूल जवाब दिया जाएगा।

    जीरो टॉलरेंस: भारत किसी भी तरह की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा।

    समान जवाबदेही: आतंकवाद को पनाह देने वालों और इसके मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा।

    जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में भारत ने एक बार फिर दोहराया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों को पाकिस्तान को खाली करना ही होगा। अंत में बेदी ने कहा, "भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है और रहेगा। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर जवाबदेही तय नहीं होगी तो शांति केवल दो संकटों के बीच का एक छोटा सा ठहराव बनकर रह जाएगी।"

  • गांवों में खेल मैदान, इंटरनेट और बेहतर सुविधाएं, राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए BJP का संकल्प पत्र जारी

    गांवों में खेल मैदान, इंटरनेट और बेहतर सुविधाएं, राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए BJP का संकल्प पत्र जारी

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने ग्रामीण विकास और किसानों तथा युवाओं के कल्याण पर केंद्रित अपना आधिकारिक चुनावी घोषणा पत्र 'ग्राम विकास संकल्प पत्र' जारी कर दिया है। जयपुर स्थित पार्टी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह-प्रभारी कविता पाटीदार, कुलजीत सिंह चहल और संगठन महामंत्री ने संयुक्त रूप से इस संकल्प पत्र का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य गांवों का सर्वांगीण विकास कर वहां से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है।

    गांवों में ही मिलेंगी शहर जैसी सुविधाएं, नहीं करना पड़ेगा पलायन
    संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पिछले 30-40 सालों में लोगों ने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए गांवों से शहरों की तरफ रुख किया है, जिससे शहरों पर आबादी का दबाव बढ़ा है। भाजपा सरकार अब ऐसी नीति पर काम कर रही है जिससे ग्रामीणों को इलाज और बुनियादी जरूरतों के लिए बार-बार शहर न जाना पड़े।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि हर ग्राम पंचायत में मूलभूत सुविधाओं जैसे- पक्की सड़कें, 24 घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य सरकार का लक्ष्य गांवों में ही संपूर्ण विकास मॉडल तैयार करना है ताकि वहां के नागरिक अपने गृहनगर में ही सम्मानजनक जीवन बिता सकें।

    युवाओं के लिए 'अटल ज्ञान केंद्र' और हर पंचायत में खेल मैदान
    गांव के युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए संकल्प पत्र में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सीएम भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक भव्य खेल मैदान (Playground) विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

    इसके साथ ही, गांवों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए हर ग्राम पंचायत में 'अटल ज्ञान केंद्र' खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर हाई-स्पीड इंटरनेट समेत तमाम डिजिटल और अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि युवा गांव में रहकर ही अपनी कोचिंग और ऑनलाइन पढ़ाई पूरी कर सकें।

    जल परियोजनाओं पर जोर
    किसानों और पशुपालकों के कल्याण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों के लिए द्वार तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से मोबाइल वैन सेवा की शुरुआत की गई है। राजस्थान के लगभग 1 करोड़ से अधिक जरूरतमंदों को खाद्यान्न सुरक्षा योजना से जोड़ा गया है और बेघर लोगों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं

    पानी के संकट पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईआरसीपी (ERCP) और यमुना जल समझौते जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं पर पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से काम शुरू हुआ है। 10 बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से 4 का सीधा लाभ राजस्थान के किसानों को मिलने जा रहा है। सीएम ने यह भी रेखांकित किया कि बीजेपी ने अपने विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र के लगभग 78 प्रतिशत वादों को रिकॉर्ड समय में पूरा कर दिखाया है, और यही पारदर्शिता पंचायत चुनावों में भी कायम रहेगी।

    बीजेपी के 'ग्राम विकास संकल्प पत्र' के 10 बड़े संकल्प

    • गांवों से पलायन रोकना और शहरी सुविधाएं: सरकार का मुख्य ध्येय गांवों में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों की ओर रुख न करना पड़े।
    • हर ग्राम पंचायत में अटल ज्ञान केंद्र: गांवों के छात्र-छात्राओं और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में हाई-स्पीड इंटरनेट युक्त 'अटल ज्ञान केंद्र' खोले जाएंगे।
    • प्रत्येक पंचायत में आधुनिक खेल मैदान: ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य की हर ग्राम पंचायत में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस खेल मैदान विकसित किए जाएंगे।
    • किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी: किसानों के आर्थिक संबल को मजबूत करने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर 12,000 रुपए सालाना किया जा रहा है, जिससे अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
    • सिंचाई और जल परियोजनाओं का धरातलीकरण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ईआरसीपी और यमुना जल समझौते से जुड़ी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है, जिससे प्रदेश के कई जिलों को पानी मिलेगा।
    • पशुपालकों के लिए मोबाइल चिकित्सा सेवा: गांवों और ढाणियों में पशुधन की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए विशेष मोबाइल पशु चिकित्सा वैन की शुरुआत की गई है, जो घर-द्वार पर इलाज उपलब्ध कराएगी।
    • हर बेघर को पक्का आवास: ग्रामीण इलाकों में जिनके पास रहने के लिए पक्के मकान नहीं हैं, उन्हें आवास योजनाओं के तहत प्राथमिकता से पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
    • खाद्यान्न सुरक्षा योजना का विस्तार: राजस्थान के लगभग 1 करोड़ से अधिक जरूरतमंद और पात्र परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा स्कीम से जोड़ा गया है, ताकि किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े।
    • विधानसभा संकल्प पत्र की तर्ज पर पारदर्शिता: पार्टी ने वादा किया है कि जिस प्रकार विधानसभा चुनाव के 78 प्रतिशत वादों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है, उसी तर्ज़ पर पंचायत स्तर पर भी सभी विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे होंगे।
    • मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर रोक: गांव के विकास के लिए आने वाला बजट और योजनाएं सीधे धरातल तक पहुंच सकें, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और भ्रष्टाचार पर सख्त रोक लगाई जाएगी।
  • SC-ST अत्याचार मामलों पर बिहार सरकार सख्त, दो महीने में लंबित मुकदमों के त्वरित निष्पादन का लक्ष्य

    SC-ST अत्याचार मामलों पर बिहार सरकार सख्त, दो महीने में लंबित मुकदमों के त्वरित निष्पादन का लक्ष्य

    पटना
     राज्य में एससी-एसटी (अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति) अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े 51 हजार से अधिक मुकदमे लंबित हैं। इन मुकदमों के जल्द निष्पादन के लिए 'ट्रायल इन एबसेंशिया' चलाया जाएगा।

    ऐसे मुकदमे जिनमें दस साल, आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रविधान है और फरार अभियुक्त को विशेष न्यायालय के द्वारा अपराधी घोषित किया जा चुका है, उन मामलों में ट्रायल इन एबसेंशिया चलाने के लिए कोर्ट से लिखित अनुरोध किया जाएगा।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के अंतर्गत ट्रायल इन एबसेंशिया में फरार अभियुक्तों की अनुपिस्थति में भी उनके विरुद्ध मुकदमा शुरू करने और अभियुक्त की अनुपिस्थति में सजा सुनाने का अधिकार कोर्ट को दिया गया है।

    अभियोजन निदेशालय के स्तर से एससी-एसटी के लंबित मुकदमों की समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य के विशेष न्यायालयों में पुलिस पेपर के लिए 671 और आरोप गठन के लिए 516 मामले लंबित हैं।

    इसी तरह सफाई साक्ष्य के लिए 288, बहस के स्तर पर 379 और निर्णय के स्तर पर 67 यानी कुल 734 कांड लंबित हैं। इन सभी लंबित कांडों का दो माह में त्वरित निष्पादन करने का टास्क अभियोजन अधिकारियों को दिया गया है।

    कोर्ट में अधिक समय से बहस और निर्णय के स्तर पर लंबित मुकदमों की विवरणी विधि विभाग के साथ अभियोजन निदेशालय को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है

    डीएम-एसपी की रिपोर्ट में सजा की संख्या में अंतर
    समीक्षा बैठक में पाया गया कि जिलों के डीएम-एसपी के स्तर से मिलने वाली मासिक रिपोर्ट में सजा की संख्या में अंतर होता है। इसके लिए सही-सही मिलान कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया।

    गवाहों की ससमय कोर्ट में उपिस्थति के लिए कोर्ट नायब की सूची भी निदेशालय ने तलब की है। कोर्ट में हाजिर न होने वाले गवाहों की सूचना जिले के एसपी के साथ अपराध अनुसंधान विभाग के कमजोर वर्ग की अपर पुलिस महानिदेशक को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। कंटेस्टेड मुकदमों में अभियुक्तों के कोर्ट से रिहा होने पर अपील दायर करने को भी कहा गया है।

    ट्रायल इन एब्सेंशिया लागू करने वाल पहला राज्य है बिहार
    बिहार देश का पहला राज्य है जिसने ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत कोर्ट में विचारण की प्रक्रिया शुरू की है। पिछले साल दिसंबर में ही इसकी शुरुआत हुई थी।

    ट्रायल इन एब्सेंशिया में प्रविधान है कि यदि अभियुक्त या घोषित अपराधी मुकदमा से बचने के लिए भाग गया हो और उसे गिरफ्तार करने की तत्काल कोई संभावना न हो तो आरोप तय होने की तारीख से 90 दिनों की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि के बाद मुकदमा शुरू किया जा सकता है।

     

  • कफ सिरप तस्करी मामले में बड़ा खुलासा, नेपाल-बांग्लादेश तक सप्लाई और दुबई निवेश की जांच तेज़

    कफ सिरप तस्करी मामले में बड़ा खुलासा, नेपाल-बांग्लादेश तक सप्लाई और दुबई निवेश की जांच तेज़

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की कमाई से बढ़ा कारोबार दुबई और अन्य देशों तक पहुंचा है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार की जांच में अब सप्लाई नेटवर्क से लेकर रकम के कथित हवाला हस्तांतरण और दुबई में निवेश तक के साक्ष्य मिले है।

    उत्तर प्रदेश एसटीएफ की जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, मामले के आरोपित शुभम जायसवाल ने अपने पिता के नाम पर झारखंड में शैली ट्रेड्स फर्म बनाई थी। तीन अलग-अलग फर्मों के जरिए कई स्तरों पर बिलिंग कराता था और इसी व्यवस्था के माध्यम से कारोबार का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।

    500 करोड़ रुपये के दुबई में होटल कारोबार की जानकारी
    जांच में करीब 500 करोड़ रुपये के दुबई में होटल कारोबार की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि कफ सिरप के कारोबार से अर्जित रकम का एक हिस्सा हवाला के जरिये दुबई पहुंचाया गया, जहां शुभम अपने मौसेरे भाई गौरव जायसवाल के साथ होटल कारोबार कर रहा है। इस रकम के स्रोत और निवेश से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के दस्तावेजों के आधार पर महत्वपूर्ण होगी।

    38 हजार पन्नों की चौथी चार्जशीट
    एसटीएफ ने इस मामले में करीब 38 हजार पन्नों की चौथी चार्जशीट लखनऊ एनडीपीएस, न्यायालय में दाखिल की है। इसमें शुभम जायसवाल, उसके मौसेरे भाई गौरव जायसवाल, विकास सिंह नर्वे और अमित जायसवाल को आरोपित किया गया है। चार्जशीट में लेनदेन, बिलिंग और वर्क ऑर्डर से जुड़े दस्तावेज शामिल किए जाने की जानकारी है।

    14 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट
    इससे पहले दाखिल आरोपपत्रों के साथ अब तक 14 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। एसटीएफ की जांच में वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र और गाजियाबाद समेत कई जिलों में शैली ट्रेड्स के माध्यम से बिलिंग किए जाने की कड़ियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित फर्मों के जरिए खरीदे और बेचे गए सिरप की वास्तविक सप्लाई कहां हुई और रकम का लेनदेन किन खातों के माध्यम से किया गया।

    कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई नेपाल व बांग्लादेश की सीमा पार
    एसटीएफ जांच में कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई नेपाल और बांग्लादेश की सीमा पार किये जाने की पुष्टी हुई हैं। इस पहलू में यह पता लगाना अहम है कि माल किन खरीदारों तक पहुंचा और सीमा पार नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी। कोडीनयुक्त कफ सिरप का नशे के लिए दुरुपयोग किए जाने की आशंका के बीच एसटीएफ बिलिंग और सप्लाई के दस्तावेजों का मिलान कर रही है।

    अवैध कारोबार करीब दो वर्ष से चल रहा
    जांच में यह भी आरोप है कि संबंधित अवैध कारोबार करीब दो वर्ष से चल रहा था। दिसंबर 2024 के अंतिम दिनों में जांच एजेंसी की ओर से नोटिस भेजे जाने के बाद कारोबार रोकने और जनवरी-मार्च 2025 में बचे हुए माल को फिर बेचने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच और गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ने पर शुभम और गौरव भारत छोड़कर दुबई भाग गया। अब दुबई में होटल कारोबार, निवेश के स्रोत और भारत में संचालित फर्मों के साथ संभावित वित्तीय संबंधों की पुष्टि हुई है।

    बैंक खातों और सप्लाई रूट की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए
    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और एसटीएफ ने पिछले वर्ष इस सिंडिकेट का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि गिरोह एबॉट कंपनी से कफ सिरप की खेप खरीदकर विभिन्न राज्यों में बेचता था और इसकी आपूर्ति नेपाल व बांग्लादेश तक करता था। एसटीएफ ने नेटवर्क, बैंक खातों और सप्लाई रूट की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए हैं। जांच के मुताबिक, अवैध कारोबार से कई सौ करोड़ रुपये की कमाई की गई। चार्जशीट में शुभम व गौरव के अलावा अमित जायसवाल और विकास सिंह नर्वे को भी आरोपी बनाया गया है।

     

  • दशहरा-दीपावली पर स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की तैयारी में जुटी योगी सरकार

    दशहरा-दीपावली पर स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की तैयारी में जुटी योगी सरकार

    लखनऊ
    योगी सरकार आगामी दशहरा, दीपावली सहित अन्य त्योहारों पर प्रदेशवासियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयारियों में जुट गई है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में व्यापक साफ-सफाई, सड़कों को गड्ढामुक्त करने, जल निकासी, कूड़ा निस्तारण, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। साथ ही मंदिरों, पूजा पंडालों और मूर्ति विसर्जन मार्गों पर विशेष सफाई अभियान चलाने तथा सड़कों की मरम्मत समय से पूरी कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने नगर आयुक्तों से त्योहारों की तैयारियों की जानकारी लेकर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा है।

    विद्युत सुरक्षा और निर्बाध आपूर्ति पर विशेष जोर
    ऊर्जा मंत्री ने त्योहारों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के साथ विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूजा पंडालों का निरीक्षण कर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और जुलूस व शोभायात्राओं के मार्गों पर बिजली के तारों का सर्वेक्षण कराने के भी निर्देश दिए। मंत्री ने ढीले या नीचे लटके तारों को तत्काल दुरुस्त करने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।

    ऊर्जा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान रात के समय भी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने कुशल संविदा कर्मियों को फिर सेवा में रखने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए, ताकि विद्युत व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में अनुभवी कर्मियों की सेवाएं ली जा सकें।

  • CG Farmers News: किसानों के लिए नया नियम लागू, अब खाद लेने के लिए मोबाइल ऐप जरूरी!

    CG Farmers News: किसानों के लिए नया नियम लागू, अब खाद लेने के लिए मोबाइल ऐप जरूरी!

    दुर्ग.

    किसानों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग उर्वरक विक्रय की नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत किसानों को अब खरीफ और रबी सीजन की खेती के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की खरीदी करनी होगी। रबी सीजन में किसानो को टोकन के माध्यम से खाद मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को पहले गरियाबंद एवं बीजापुर जिलों में मॉडल के रूप में संचालित किया गया था। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है। यह किसानों के लिए नई व्यवस्था होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण को सुव्यवस्थित करना, कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना तथा किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम करना है।

    नई प्रणाली के माध्यम से पीओएस मशीन से अनिवार्य विक्रय, उपलब्ध स्टाक का रियल टाइम मिलान, पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं आधार लिंकिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे उर्वरकों की अग्रिम मांग का आकलन करने, भंडारण एवं वितरण की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने तथा अमानक उर्वरकों और कालाबाजारी पर निगरानी मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

    टोकन के लिए करना होगा यह प्रक्रिया
    नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से उर्वरक खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस फर्टिलाइजर ऐप इंस्टाल कर आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद टोकन अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से नजदीकी निर्धारित केंद्र से अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

  • मुरादाबाद की बेटियों की ढाल बनीं एसआई समीक्षा ठाकुर, शोहदों पर कसा शिकंजा

    मुरादाबाद की बेटियों की ढाल बनीं एसआई समीक्षा ठाकुर, शोहदों पर कसा शिकंजा

    मुरादाबाद
    नवरात्र में पूरा जनपद मां दुर्गा की आराधना में लीन है। पंडालों और मंदिरों में घंटियां गूंज रही हैं, और उसी समय सड़कों, बाजारों, चौराहों और गांव की चौपालों पर शक्ति का एक और रूप दिख रहा है- खाकी वर्दी में मुस्तैद महिला पुलिसकर्मी। इस मोर्चे का प्रतिनिधि रूप हैं मुरादाबाद की मिशन शक्ति सेल प्रभारी उप निरीक्षक समीक्षा ठाकुर, जो मानती हैं कि महिलाएं सिर्फ चहारदीवारी या सुरक्षित नौकरियों के लिए नहीं बनी हैं। वे खाकी पहनकर हर बहन-बेटी की ढाल भी बन सकती हैं। समीक्षा इसी संकल्प के साथ दिन-रात आधी आबादी को अभयदान देने में जुटी हैं।

    गांव की दहलीज से खाकी तक
    मां दुर्गा का एक रूप दृढ़ता का है, और समीक्षा की कहानी इसी से शुरू होती है। मेरठ के सरूरपुर खुर्द थाना क्षेत्र के पांची गांव की इस बेटी ने उस दौर में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखा, जब गांवों में लड़कियों के लिए सोच बेहद सीमित थी। उन्होंने देखा कि अधिसंख्य महिलाएं लोकलाज व डर के मारे छेड़खानी व उत्पीड़न की तकलीफ दिल में दफन कर लेती थीं। यही टीस उनकी प्रेरणा बनी। 30 जून 2019 को पुलिस सेवा में शामिल होकर उन्होंने प्रशिक्षण पूरा किया और संकल्प लिया कि पीड़ितों की आवाज बनेंगी और उनका संकोच मिटाएंगी। आज वह ग्रामीण परिवेश की हर उस बेटी के लिए मिसाल हैं, जो सपनों को पंख देना चाहती है।

    चौपाल में संवाद: टूट रहा हिचक का दायरा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच के तहत 'मिशन शक्ति’ फेज-5.0 में समीक्षा के नेतृत्व में पुलिस टीम हर रविवार रोस्टर के अनुसार गांवों और कस्बों में 'बहू-बेटी सम्मेलन' और चौपाल कर रही हैं। कभी थाने जाने से कतराने वाली ग्रामीण महिलाएं अब महिला पुलिसकर्मियों को अपना साथी मानती हैं। स्कूल-कॉलेजों में शिकायत पेटिकाएं लगाई गई हैं। महिला बीट अधिकारी अपने मोबाइल नंबर छात्राओं से साझा कर रही हैं, ताकि नाम गोपनीय रखते हुए भी शिकायत दर्ज कराई जा सके। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और पीआरवी की नियमित गश्त से माहौल सुरक्षित बनाया गया है।

    शोहदों पर जीरो टॉलरेंस का कहर
    समीक्षा बताती हैं कि जिले के सभी 20 थानों में एंटी रोमियो स्क्वाड और मिशन शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। स्कूल-कॉलेज खुलने और छूटने के समय, कोचिंग संस्थानों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में विशेष चेकिंग अभियान चलता है। हाल में कटघर थाना क्षेत्र की चौकी दससराय में महिलाओं की शिकायत पर महिला उप निरीक्षक सोनम पुनिया की टीम ने राह चलती युवतियों पर अश्लील फब्तियां कसने वाले एक शोहदे को दबोच कर उसे जेल भेजा। महिला सुरक्षा दस्तों ने भी ऐसे शोहदों के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए हैं।

    सख्ती के साथ संवेदना का चेहरा भी
    खाकी सिर्फ सख्ती का नाम नहीं है, उसमें ममता भी है। समीक्षा बताती हैं कि मूढापाण्डे थाने में मिशन शक्ति सेल की महिला उप निरीक्षक सुनीता और उनकी टीम ने जेल में निरुद्ध एक महिला के तीन मासूम बच्चों का भविष्य संवारा। टीम ने बच्चों को स्कूल में एडमिशन कराया और साल भर की फीस भी जमा कराई। बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस व कॉपी-किताबें भी खरीदीं। इसी तरह सिविल लाइंस क्षेत्र से लापता हुए तीन बच्चों को महिला निरीक्षक ऊषा मलिक की टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगालकर तलाशा और सकुशल परिजनों को सौंपा। कोतवाली क्षेत्र में लापता तीन वर्षीय बच्चे को उप निरीक्षक चंद्रप्रभा गौतम की टीम ने एक घंटे के भीतर खोजकर परिवार की गोद में लौटाया।

    पीड़ितों का सहारा बने मिशन शक्ति केंद्र
    मिशन शक्ति केंद्र पर पॉक्सो एक्ट के मामलों से जुड़ी पीड़ित बालिकाओं और महिलाओं की विशेषज्ञों से काउंसिलिंग कराई जा रही है। मकसद है उन्हें मानसिक आघात से उबारना, चिकित्सीय जांच सुनिश्चित करना और पढ़ाई की आर्थिक अड़चनें दूर करना, जिसके लिए फीस माफी तक की व्यवस्था कराई जा रही है। समीक्षा के इस समर्पण के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह के अलावा कई सामाजिक संस्थाओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है।

    जिम्मेदारी मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास
    समीक्षा कहती हैं कि पहले पुलिसिंग को केवल पुरुषों का दायित्व माना जाता था। अब हर बीट, हर चौराहे और संवेदनशील स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी मिलने से उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा है। नवरात्र के अवसर पर उनका संदेश साफ है कि हर बेटी और महिला बिना किसी भय के अपने सपने पूरे करे, उनकी सुरक्षा और संबल के लिए योगी सरकार की पुलिस चौबीसों घंटे तैनात है।

  • MP News: भोपाल के ज्यादातर प्रमुख चौराहों पर शोर का स्तर खतरनाक, 47 जगहों पर ध्वनि प्रदूषण की समस्या

    MP News: भोपाल के ज्यादातर प्रमुख चौराहों पर शोर का स्तर खतरनाक, 47 जगहों पर ध्वनि प्रदूषण की समस्या

    भोपाल.

    भोपाल के चौराहों पर ट्रैफिक और हॉर्न का शोर तय सीमा पार कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की जांच में 69 प्रमुख चौराहों में से 47 पर ध्वनि प्रदूषण निर्धारित मानक से ज्यादा मिला, जबकि 22 पर सीमा के भीतर रहा।

    सबसे ज्यादा औसत शोर काली मंदिर तिराहे पर 89.90 डेसिबल और अल्पना तिराहे पर 88.56 डेसिबल दर्ज हुआ। व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन के समय निर्धारित सीमा 65 डेसिबल है। इस लिहाज से दोनों जगह क्रमशः 24.90 और 23.56 डेसिबल ज्यादा शोर मिला। पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 के बीच सुबह 10 से शाम 6 बजे तक जांच की। नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर सीमा पार हुई। आम आदमी पर क्या असर यदि कोई यातायात पुलिसकर्मी, वाहन चालक, ठेला संचालक या दुकानदार रोज कई घंटे ऐसे शोर के बीच रहता है, तो उसका तनाव एक-दो मिनट वहां से गुजरने वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा संस्थान ने काम के दौरान 85 डेसिबल के शोर पर 8 घंटे की सीमा सुझाई है। लंबे समय तक ऐसे शोर में खड़े रहने से कान, आंख में खराबी और मानसिक पीड़ा भी हो सकती है।

    रिहायशी इलाकों में भी राहत नहीं
    तय सीमा 55 डेसिबल है, लेकिन कोहेफिजा में 76.34 और त्रिलंगा में 75.02 डेसिबल शोर

    लाउडस्पीकर बंद, फिर भी शोर ज्यादा
    मामला ट्रैफिक सिग्नलों पर लगे सार्वजनिक लाउडस्पीकर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर एनजीटी ने 21 मई 2026 को पीसीबी को ध्वनि स्तर की व्यापक जांच, ध्वनि मानचित्रण और उद्घोषणा तंत्र के नियमों की समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 तक सुबह 10 से शाम 6 बजे के बीच चौराहों पर शोर मापा। याचिकाकर्ता के वकील हर्षवर्धन तिवारी के मुताबिक, जांच में 69 में से 68 चौराहों पर लाउडस्पीकर बंद थे। केवल कोलार तिराहे पर चालू मिला। ज्यादा शोर का कारण केवल लाउडस्पीकर होना साबित नहीं होता। वाहनों की आवाजाही आसपास शोर बढ़ाती हैं। जांच में 22 चौराहों पर शोर तय सीमा के भीतर मिला। वहीं, नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर निर्धारित सीमा पार हुई।

  • F-35 खरीदने की चर्चा के बीच एपी सिंह का बयान, भारत को अब तक नहीं मिला आधिकारिक प्रस्ताव

    F-35 खरीदने की चर्चा के बीच एपी सिंह का बयान, भारत को अब तक नहीं मिला आधिकारिक प्रस्ताव

     नई दिल्ली
    भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने  अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को लेकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय अधिकारियों को इस लड़ाकू विमान के पास तक नहीं जाने देते, जबकि इसे भारत को बेचने की बात हो रही है. वायुसेना प्रमुख ने यह टिप्पणी अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर की मौजूदगी में की.

    दरअसल, जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. इसमें भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर एक साथ मंच पर मौजूद थे. इस दौरान वायुसेना प्रमुख से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 को भारत को बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव दिया है?

    इस सवाल पर एपी सिंह ने कहा, 'आपके लोग हमें विमान के पास भी नहीं जाने देते और आप इसे हमें बेचने की बात कर रहे हैं.' उनकी इस टिप्पणी ने अमेरिकी लड़ाकू विमान को भारत को बेचे जाने की चर्चाओं की ओर ध्यान खींचा.

    F-35 को लेकर अमेरिका ने नहीं दिया कोई आधिकारिक प्रस्ताव
    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से F-35 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर भारत को अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब अमेरिका की ओर से भारत को इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं. खास बात यह रही कि एपी सिंह ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर की मौजूदगी में की.

    रूस के Su-57 लड़ाकू विमान पर क्या बोले वायुसेना प्रमुख?
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख से रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर उन्होंने बताया कि रूस की ओर से इस विमान को लेकर दिया गया प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के संज्ञान में आया है. हालांकि, अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि इस लड़ाकू विमान का मूल्यांकन किया जाना चाहिए या नहीं.

    एपी सिंह ने कहा, 'एक बार सरकार की ओर से हमें फैसला बता दिया जाएगा, तो हम मूल्यांकन करेंगे कि Su-57 हमारी जरूरतों को किस हद तक पूरा करता है.' उनके बयान से स्पष्ट है कि रूसी लड़ाकू विमान को लेकर अभी मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय नहीं हुआ है.

    भारत खुद भी बना रहा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान
    भारतीय वायुसेना प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत अपनी भविष्य की लड़ाकू विमान संबंधी जरूरतों का आकलन कर रहा है. इसके साथ ही भारत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है.
    भारत की दीर्घकालिक रक्षा योजनाओं में स्वदेशी लड़ाकू विमानों का विकास और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.

    तरंग शक्ति-2026 युद्धाभ्यास का समापन
    जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' में भारतीय वायुसेना समेत कुल आठ देशों की वायुसेनाओं ने भाग लिया. इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाना और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था. इसी युद्धाभ्यास के समापन समारोह के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना प्रमुख ने अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट की.