Author: NewseDay

  • MP News: नशे के कारोबार पर मध्यप्रदेश पुलिस का शिकंजा, अलीराजपुर में गांजे के पौधों सहित करोड़ों की संपत्ति जब्त

    MP News: नशे के कारोबार पर मध्यप्रदेश पुलिस का शिकंजा, अलीराजपुर में गांजे के पौधों सहित करोड़ों की संपत्ति जब्त

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की खेती, तस्करी एवं विक्रय के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अलीराजपुर एवं नरसिंहपुर जिले में पुलिस ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अवैध गांजे की खेती का पर्दाफाश किया तथा स्मैक सप्लाई नेटवर्क का खुलासा किया है। दोनों ही जिलों कार्यवाही कर पुलिस ने अवैध गांजे के पोधे एवं स्मैक सहित लगभग 1 करोड़ 52 लाख रुपए की संपति जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    अलीराजपुर में दो खेतों से 2,040 गांजे के पौधे जब्त
    जिले में थाना आंबुआ क्षेत्र में चार थानों की पुलिस एवं साइबर टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर दो खेतों से गांजे के 2,040 पौधे जब्त किए। इनका कुल वजन 20 क्विंटल 79 किलोग्राम तथा अनुमानित कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है। दोनों प्रकरणों में दो आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं।

    नरसिंहपुर में ऑपरेशन ईगल क्लॉ के तहत स्मैक सप्लाई नेटवर्क का खुलासा
    नरसिंहपुर में संचालित ऑपरेशन ईगल क्लॉ के तहत पुलिस ने स्मैक की सप्लाई करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सांकल रोड क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों से क्रमशः 270 ग्राम एवं 230 ग्राम, कुल 500 ग्राम अवैध स्मैक जब्त की। पूछताछ में प्राप्त जानकारी के आधार पर राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्र से कथित मुख्य सप्लायर को भी गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में दो मोटरसाइकिल एवं दो मोबाइल फोन सहित लगभग 52 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर सप्लाई नेटवर्क, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति एवं वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए मादक पदार्थों की बरामदगी, आरोपियों की गिरफ्तारी, सप्लाई नेटवर्क के पर्दाफाश तथा अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

     

  • महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, झारखंड में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान

    महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, झारखंड में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान

    रांची
    जेएनयू के प्रोफेसर सह कांग्रेस सांसद डाॅ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर छात्राओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन घोषणा की है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा कि 12 अक्टूबर को झारखंड के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यालयों पर भाजपा महिला मोर्चा द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

    उन्होंने कांग्रेस पर महिला सुरक्षा के सवाल पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि आरोपित सांसद के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा का आंदोलन अलग-अलग स्वरूपों में जारी रहेगा।

    बाउरी ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन के माध्यम से महिला सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे। जब तक आरोपित सांसद का इस्तीफा नहीं हो जाता है तब तक इस मामले को लेकर भाजपा महिला मोर्चा का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक ओर महिला सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, वहीं अपने सांसद से जुड़े इस मामले पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़ी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सांसद पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं, तो पार्टी नेतृत्व चुप क्यों है, इस मुद्दे पर वह खुलकर अपनी बात क्यों नहीं रख रहा है।

  • बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश

    बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश

    रायपुर.
    शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। नवरात्र के प्रथम दिन कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए निर्मित शौचालय बेटियों के सम्मान की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत कोरबा जिले के पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत दादरकला में बालिका शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में पूर्ण हुए ये निर्माण कार्य इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।

    ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ के संदेश से सजे बालिका शौचालय
    ग्राम पंचायत नोनबिर्री एवं दादरकला में निर्मित बालिका शौचालय को आकर्षक गुलाबी रंग और सुंदर चित्रकारी से सजाया गया है। भवन की दीवार पर बड़े अक्षरों में ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ का संदेश अंकित है। इसके साथ ही ‘स्वच्छ रहें, सुरक्षित रहें’ का संदेश भी दिया गया है। शौचालय के सामने खड़ी स्कूली बालिकाओं ने वीबी-जी रामजी के अक्षरों और स्वच्छता के प्रतीकों के माध्यम से योजना के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बालिकाओं की यह सहभागिता दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बेटियों के आत्मसम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।

    नवरात्र में मातृशक्ति के सम्मान का साकार रूप
    नवरात्र का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना विशेष महत्व रखता है। विद्यालयों में अलग बालिका शौचालय की उपलब्धता छात्राओं की निजता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेष रूप से किशोरावस्था में बालिकाओं के लिए ऐसी सुविधाएं उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

    प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में लगभग 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

  • किसान और महिलाएं घर से शुरू करें मशरूम की खेती, ₹10 हजार से बनाएं कमाई का रास्ता

    किसान और महिलाएं घर से शुरू करें मशरूम की खेती, ₹10 हजार से बनाएं कमाई का रास्ता

    लखनऊ
    भरपूर पोषक तत्वों के लिए शुमार मशरूम की बाजार में मांग अधिकतर हर सीजन में बनी रहती है। अपने गुण और स्वाद के कारण मशरूम अन्य सब्जियों की तुलना में अधिक लोकप्रिय बना हुआ है। ऐसे में बाजार में बढ़ती मांग के बीच किसान भाई मशरूम उत्पादन से अच्छी कमाई कर सकते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि मशरूम की खेती कैसे शुरू कर सकते हैं?

    मशरूम की बढ़ती मांग किसानों के लिए सोने की खेती साबित हो सकती है, क्योंकि कम लागत और कम जगह में इस व्यवसाय से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। यही नहीं इसमें सिर्फ एक बार ही मेहनत करनी होती है, जिसके बाद पारंपरिक खेती की तरह जीतोड़ मेहनत की आवश्यकता भी नहीं होती है।

    उत्तर प्रदेश में सरकार भी मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करती है, जिसके लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करने की विधियों पर जानकारी दी जाती है।

    इसके अलावा, कंपोस्ट की सामग्री, उसकी तैयारी, आवश्यक परिस्थितियों और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीकी जानकारी के साथ प्रायोगिक कार्य भी कराया जाता है। आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर 'मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण' की पूरी जानकारी ले सकते हैं।

    कितनी आएगी लागत, कितनी कमाई
    एक अनुमान के अनुसार, दस फीट लंबाई और दस फीट चौड़ाई वाले कमरे मशरूम के दो सौ से ढाई सौ बैग लगाए जाएं तो हर महीने तकरीबन पचास हजार रुपये तक की कमाई की जा सकती है। मशरूम को धूप की जरूरत नहीं होती, इसे पूरी तरह अंधेरे और ठंडे कमरे या शेड में उगाया जाता है।

    मशरूम उत्पादन शुरू करने में 10 से 50 हजार रुपये का शुरूआती निवेश लग सकता है। एक बैग तैयार करने में डेढ़ सौ रुपये की लागत आती है। मशरूम की कई प्रजातियां भी हैं, जैसे- मिल्की, ओयस्टर, बटन, ढींगरी, पोटबेलो और कीड़ा-जड़ी इत्यादि। बाजार में इन सबकी कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक मिलती है।

    वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवनीत कुमार मिश्र ने बताया कि मशरूम उत्पादन रोजगार सृजन के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है। कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी इसे शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी कम होगी।

    सावधानियां-
    मशरूम की खेती में सबसे बड़ा रिस्क संक्रमण का होता है, जिससे मशरूम बैग को बचाना अतिआवश्यक होता है। जरा सी भी लापरवाही से कमरे में बैक्टीरिया, वायरस या जंगली फंगस पनप सकते हैं, जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। इसके लिए कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है-

        कमरे को हमेशा साफ रखें। खिड़की पर जाली लगी हो ताकि धूल मिट्‌टी से बचाव हो सके।
        कमरे में प्रवेश करने से पहले खुद को साफ रखें। हाथ-पैर को अच्छे से साफ करके ही अंदर आएं। संभव हो तो मास्क का प्रयोग करें।
        बीज खरीदते समय गुणवत्ता का ध्यान रखें। हमेशा सरकारी लैब, कृषि विश्वविद्यालय या विश्वसनीय विक्रेता से ही ताजे बीज खरीदें।
        कमरे में झाड़ू न लगाएं, इससे उड़ने वाली धूल में मौजूद बैक्टीरिया फसल खराब कर सकते हैं। हमेशा पोछा लगाकर ही सफाई करें।

    मशरूम लेडी पूजा कमा रही लाखों रुपये
    मशरूम उत्पादन में इन हाउस फार्मिंग की कैटेगरी में आता है, जिससे यह घरेलू महिलाओं के स्वरोजगार का भी बेहतर विकल्प है। इसकी मिसाल पेश करती हैं सहारनपुर की पूजा सैनी जो अपने पति के साथ मिलकर घर में ही मशरूम उत्पादन करती हैं और उनकी सालाना कमाई 20 लाख रुपये तक हो जाती है।

    पूजा बताती हैं कि 2018 में उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की। उन्होंने पति के साथ कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। घर पर ही प्रयोग के तौर पर दो बैग तैयार किए और धीरे-धीरे बैगों की संख्या बढ़ती गई और आज यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है।

  • सेवा संकल्प अभियान: निदान-03 शिविर से संवर रही दिव्यांगजनों की जिंदगी

    सेवा संकल्प अभियान: निदान-03 शिविर से संवर रही दिव्यांगजनों की जिंदगी

    रायपुर
    सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया।

    एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं
    शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए। ​शृंखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया।

    छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े।

    जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण
    ​इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ​इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।

  • मनी प्लांट लगाते समय न करें ये 5 गलतियां, वास्तु के अनुसार घर में कहां रखना माना जाता है शुभ?

    मनी प्लांट लगाते समय न करें ये 5 गलतियां, वास्तु के अनुसार घर में कहां रखना माना जाता है शुभ?

    Money Plant: मनी प्लांट को घर की सजावट के लिए काफी पसंद किया जाता है. इसकी हरी पत्तियां घर को सुंदर बनाती हैं, कम देखभाल में भी यह पौधा आसानी से बढ़ता है.  वास्तु शास्त्र में भी मनी प्लांट को धन, तरक्की और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इससे जुड़ी कुछ मान्यताएं हैं, जिनके अनुसार पौधे को सही दिशा और जगह पर रखना जरूरी माना जाता है.  आइए जानते हैं कि मनी प्लांट कहां नहीं लगाना चाहिए, इसकी देखभाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

    1. उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से बचें
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मनी प्लांट को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से बचना चाहिए.  इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है.  मान्यता है कि इस दिशा में मनी प्लांट रखने से वास्तु संतुलन प्रभावित हो सकता है.  हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

    2. तेज धूप में न रखें
    मनी प्लांट को ऐसी जगह रखने से बचें, जहां दिनभर सीधी और तेज धूप पड़ती हो.  इससे इसकी पत्तियां पीली या झुलसी हुई दिख सकती हैं.  पौधे को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है, जहां पर्याप्त लेकिन अप्रत्यक्ष रोशनी मिले.  सही रोशनी और जरूरत के अनुसार पानी देने से पौधा स्वस्थ रह सकता है.

    3. बेल को जमीन पर न फैलने दें
    वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट की बेल का ऊपर की ओर बढ़ना तरक्की का प्रतीक माना जाता है.  इसलिए इसकी बेल को जमीन पर फैलने देने के बजाय किसी स्टैंड, जाली या सहारे की मदद से ऊपर चढ़ाया जा सकता है.  इससे पौधा व्यवस्थित भी दिखता है. उसकी देखभाल करना भी आसान होता है.

    4. बेड के बिल्कुल पास न रखें
    कुछ वास्तु मान्यताओं में मनी प्लांट को सोने की जगह के बिल्कुल पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है.  अगर आप इसे बेडरूम में रखना चाहते हैं, तो ऐसी जगह चुनें जहां पौधे को पर्याप्त रोशनी मिले, वह आने-जाने में परेशानी न पैदा करे.  पौधे को बेड के पास रखने से नुकसान होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

    5. सूखी पत्तियों और खराब गमले पर दें ध्यान
    मनी प्लांट की पत्तियां सूखने या पीली पड़ने लगें, तो उनकी वजह जानना जरूरी है.  जरूरत से ज्यादा पानी, कम रोशनी या पानी की निकासी ठीक न होने से भी ऐसा हो सकता है.  सूखी पत्तियों को हटा दें और अगर गमला टूटा हुआ है या उसमें पानी जमा रहता है, तो उसे बदल दें.  गमले में पानी निकलने के लिए छेद होना चाहिए.

    मनी प्लांट लगाने की सही दिशा क्या है?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को अच्छा माना जाता है.  इसे शुक्र ग्रह और सुख-समृद्धि से जोड़ने की मान्यता है.  इसलिए कई लोग इस दिशा में मनी प्लांट लगाना पसंद करते हैं.  ध्यान रखें कि दिशा से धन बढ़ने या आर्थिक स्थिति बदलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.  पौधे को ऐसी जगह रखना ज्यादा जरूरी है, जहां उसे सही रोशनी, पानी और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.

  • ‘Rise and Fall 2’ में माता-पिता को देखकर रो पड़े तेज प्रताप यादव, लालू-राबड़ी से वीडियो कॉल का इमोशनल पल

    ‘Rise and Fall 2’ में माता-पिता को देखकर रो पड़े तेज प्रताप यादव, लालू-राबड़ी से वीडियो कॉल का इमोशनल पल

    भोजपुरी बवाल के बाद तेज प्रताप यादव राइज एंड फॉल 2 में दर्शकों को एंटरटेन कर रहे हैं. रियलिटी शोज में तेज प्रताप की रियल पर्सनैलिटी देख फैन्स उनकी तारीफ कर रहे हैं. अब राइज एंड फॉल 2 में तेज प्रताप का इमोशनल साइड देखने को मिला. ये पल तब आया जब उन्हें अचानक अपने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी से बात करने का मौका मिला.

    तेज प्रताप के छलके आंसू
    लेटेस्ट एपिसोड में तेज प्रताप को उनके माता-पिता से सरप्राइज वीडियो कॉल कराई गई. लालू यादव और राबड़ी देवी को देखकर तेज प्रताप इतने इमोशनल हो गए कि उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. ये पल देखकर शो में मौजूद स्वरा भास्कर भी भावुक हो गईं और उन्हें अपनी बेटी राबिया की याद आ गई.

    शो के होस्ट वीरेंद्र सहवाग ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी से पूछा कि आप लोग शो देख रहे हैं. इस पर उन्होंने कहा कि हां. तेज प्रताप पेरेंट्स को देखकर अपने इमोशन्स नहीं रोक पाए. उनकी आंखें भर आती हैं. वो मां राबड़ी देवी से पूछते हैं कि पापा की तबीयत ठीक नहीं लग रही हैं. राबड़ी देवी कहती हैं कि ठीक हैं वो. पर जब लालू यादव ने माइक लेकर बोलने की कोशिश की, तो ढंग से बोल नहीं पा रहे थे.

    यादव परिवार के इस मिलन ने हर किसी को भावुक कर दिया. इसी एपिसोड में स्वरा भास्कर ने होस्ट वीरेंद्र सहवाग को बताया कि वो अपनी बेटी को याद कर रही हैं, जिसके बाद वो भी फूट-फूटकर रोने लगीं. इस तरह एक तरफ तेज प्रताप का परिवार के लिए प्यार सामने आया, तो दूसरी तरफ स्वरा की मां का दर्द भी दर्शकों को छू गया.

    इससे पहले भी तेज प्रताप यादव शो में घर और मां राबड़ी देवी की याद में इमोशनल हो चुके हैं. स्वरा भास्कर से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें घर की याद सता रही है, खासकर मां राबड़ी देवी की. उन्होंने यहां तक कह दिया था, “मुझे घर जाना है.”

    तेज प्रताप यादव लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे हैं, मई 2025 में लालू यादव ने उन्हें आरजेडी से 6 साल के लिए निकाल दिया था और परिवार से भी नाता तोड़ने की बात कही थी. इसके बाद से तेज प्रताप और परिवार के बीच की दूरी लगातार चर्चा में रही है.

  • अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों पर विवाद, हाई कोर्ट में मामला लंबित; घरेलू क्रिकेट सीजन पर संकट

    अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों पर विवाद, हाई कोर्ट में मामला लंबित; घरेलू क्रिकेट सीजन पर संकट

    नई दिल्ली
     अरुणाचल प्रदेश के घरेलू क्रिकेट अभियान को एक और झटका लगा है। टीम ने नागालैंड के खिलाफ अपना रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप का पहला मैच गंवा दिया है। ऐसा प्रशासनिक गतिरोध के कारण हुआ है, जिससे क्रिकेट एसोसिएशन के पास टीम चयन और अन्य कामकाज संभालने के लिए कोई काम करने वाली अथॉरिटी नहीं बची है। यह मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होना था, जो 2026-27 रणजी ट्रॉफी सीजन की शुरुआत के साथ ही हो रहा था। इससे पहले, इस हफ्ते की शुरुआत में भुवनेश्वर में सिक्किम के खिलाफ वीनू मांकड़ ट्रॉफी मैच के लिए अरुणाचल प्रदेश टीम नहीं उतार पाया था।

    गुवाहाटी हाई कोर्ट पहुंच चुका है मामला
    यह संकट अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (एसीए) के सितंबर में हुए चुनावों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई से पैदा हुआ है, जिसमें नबम विवेक को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद कई जिला एसोसिएशन ने चुनावों को चुनौती दी, जिसमें गड़बड़ी का आरोप लगाया गया और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई। यह मामला गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच के सामने लंबित है, जिसने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट की कार्यवाही ने एसोसिएशन के कामकाज को पूरी तरह ठप कर दिया है, जिससे बीसीसीआई के लिए मामले के लंबित रहने के दौरान कोई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाने के लिए दखल देना मुश्किल हो गया है।

    बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने पहले बताया था कि कानूनी गतिरोध के कारण अरुणाचल प्रदेश की जूनियर घरेलू प्रतियोगिताओं में भागीदारी पहले ही बाधित हो चुकी है, क्योंकि राज्य की कोई काम करने वाली संस्था न होने से टीम चयन और तैयारी असंभव हो गई है।

    उन्होंने बताया था, 'अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन में दो गुट हैं, और गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच में उनके बीच कानूनी विवाद चल रहा है। हाई कोर्ट ने कुछ महीने पहले बोर्ड के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसी कारण उस बेंच के सामने मौजूद मामले के कारण, अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन में कोई पदाधिकारी नहीं है। मामले की सुनवाई आखिरकार सितंबर के पहले हफ्ते में हुई थी, लेकिन बेंच की ओर से अभी फैसला आना बाकी है। वहां काफी समय से कोई बोर्ड नहीं है, इसलिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए टीम बनाने की कोई तैयारी नहीं हो पाई।'

    जिला निकायों ने लगाए नियम के उल्लंघन के आरोप
    रणजी ट्रॉफी मैच गंवाने से राज्य की सीनियर पुरुष टीम के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं और टीम के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है। अगर प्रशासनिक कामकाज में यह खालीपन बना रहता है, तो इस विवाद ने घरेलू सीजन के बाकी मैचों में अरुणाचल प्रदेश की भागीदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एसोसिएशन के सितंबर के चुनाव तब विवादों में घिर गए जब छह जिला निकायों – लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे – ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनकी चुनौती के कारण कोर्ट ने एसोसिएशन के कामकाज पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे प्रतिस्पर्धी गुट बिना किसी तय प्रशासनिक ढांचे के ही अपनी वैधता का दावा करने लगे।

  • अमेरिका-ब्रिटेन-जर्मनी समेत अंतरराष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की ‘टीम 12’

    अमेरिका-ब्रिटेन-जर्मनी समेत अंतरराष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की ‘टीम 12’

    लखनऊ
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी अब अपनी तकनीकी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के 150 विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर यह दिखाया कि फॉरेंसिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय किस तरह नवाचार के नए अवसर खोल सकता है। इनमें से चुनकर 'टीम 12' बनाई गई है, जो अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी के लिए तैयार है। इन विद्यार्थियों ने अपने प्रेजेंटेशन ब्राविटी (Braviti) के सीईओ पवन शर्मा के समक्ष प्रस्तुत किए। पवन शर्मा अमेरिका में एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

    इसके अलावा केआईपीएल (KIPL) के सीईओ पराग शेंडे के समक्ष भी विद्यार्थियों ने नवाचार संबंधी प्रेजेंटेशन दिया।
    जिसके बाद यहां के सर्वश्रेष्ठ बच्चों में से 'टीम 12' बनाई गई। यह पहल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान से आगे बढ़कर तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

    सीएम योगी के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षा : डॉ. जीके गोस्वामी

    यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस दिशा में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने, नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने और उनके ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

    अत्याधुनिक तकनीक पर विद्यार्थियों का फोकस

    आज दुनिया के सामने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, स्वचालन और जटिल तकनीकी प्रणालियों से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए एआई, रोबोटिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए समाधान विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की ओर से इन क्षेत्रों में तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना उनकी व्यावहारिक समझ और नवाचार क्षमता को सामने लाने का अवसर है।

    यूपीएसआईएफएस में विद्यार्थियों की इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यहां फॉरेंसिक विज्ञान के अध्ययन का संबंध तकनीकी और विधिक पहलुओं से भी जुड़ता है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच, साइबर सुरक्षा और आधुनिक अपराधों की वैज्ञानिक पड़ताल जैसे क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

    'टीम 12' की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी

    इस पहल का प्रमुख आकर्षण 'टीम 12' की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में प्रस्तावित भागीदारी है। इससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर तकनीकी कार्यों और परियोजनाओं से जुड़ने की संभावनाएं मिलेंगी। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे समाधानों के संदर्भ में भारतीय विद्यार्थियों की प्रतिभा और नवाचार क्षमता को सामने लाना इस पहल का व्यापक उद्देश्य है।

    भविष्य में खुलेंगे अनुसंधान और उद्यमिता के नए अवसर

    तकनीक आधारित शिक्षा का उद्देश्य केवल नई तकनीकों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समस्याओं की पहचान करने, उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करने और उपयोगी समाधान विकसित करने की क्षमता पैदा करना भी है। एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में इस तरह की क्षमता भविष्य में अनुसंधान और उद्यमिता के नए अवसर खोलेगी।

    टेक्नोलॉजी, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान का समन्वय

    यूपीएसआईएफएस का शैक्षणिक मॉडल टेक्नोलॉजी, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान के समन्वय को महत्वपूर्ण बनाता है। आधुनिक अपराधों की जांच में डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों के बीच तालमेल की जरूरत भी बढ़ी है। तकनीकी ज्ञान के साथ विधिक प्रक्रियाओं और फॉरेंसिक जांच की समझ विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार करने में उपयोगी हो सकती है।

    यूपीएसआईएफएस की 'टीम 12' के सदस्य

    ईशानी पांडे, ईशानी ओझा, सिद्धि वत्स, साक्षी गहलोत, पुष्कर सिंह, रवि यादव, ⁠विवेक मिश्रा, ⁠प्रखर सिंह, ⁠दिव्यम श्रीवास्तव, ⁠अनिमेष शुक्ला, ⁠अनुभव चतुर्वेदी, ⁠रविशंकर कुशवाहा। इस परियोजना का नेतृत्व यूपीएसआईएफएस के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल की प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह कर रही हैं।

  • MP News: नवरात्रि के पहले दिन मां शारदा के दरबार में रिकॉर्ड भीड़, 97,786 श्रद्धालुओं ने टेका माथा

    MP News: नवरात्रि के पहले दिन मां शारदा के दरबार में रिकॉर्ड भीड़, 97,786 श्रद्धालुओं ने टेका माथा

    मैहर.

    शारदीय नवरात्रि मेले का शुभारंभ रविवार को मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। मां शारदा मंदिर के पट सुबह तीन बजे खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

    पहले दिन देश के विभिन्न जिलों और राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैहर पहुंचे। प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने सुगमता से दर्शन किए। मंदिर में मां शारदा का लाल परिधान में मनमोहक श्रृंगार किया गया। प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 11 अक्टूबर को सुबह से दोपहर एक बजे तक कुल 97,786 श्रद्धालुओं ने मां शारदा के दर्शन किए।

    इनमें पैदल मार्ग से 94,272, वैन मार्ग से 1,014 और रोपवे के माध्यम से 2,500 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। इससे पहले सुबह चार से 11 बजे के बीच ही 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी दी गई थी।