औंधी/मानपुर/राजनांदगांव.
मोहला मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के अति संवेदनशील व महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र आंधी तहसील मुख्यालय से कृषि विभाग की घोर आपराधिक लापरवाही और पदीय शक्तियों के दुरुपयोग का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है।
औधी स्थित दो गोदामों के ठीक बीच के खुले परिसर में भारी मात्रा में जहरीले कीटनाशक, जैव- उर्वरक और रासायनिक पैकेजिंग सामग्री को लावारिस हालत में फेंक दिया गया है। मौके पर किए गए इन्वेस्टिगेटिव सर्वे में साफ देखा गया कि सड़क किनारे फैले इस जहरीले रासायनिक कचरे में Profen 44 जैसे जानलेवा तरल कीटनाशक, Coral जैव उर्वरक और घनश्याम खाद की सैकड़ों बोतलें, सीलबंद पैकेट और बोरियां लावारिस पड़ी सड़ रही हैं। लगातार पड़ रही धूप और बारिश के कारण इन बोतलों से जहरीले रसायनों का रिसाव होकर मिट्टी और भूजल में मिल रहा है, जिससे स्थानीय वनांचल के गरीब मवेशियों, बच्चों और आसपास के पेयजल स्रोतों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। इस पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों का रवैया और भी गैर- जिम्मेदाराना नजर आ रहा है।
जब मामले को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गोविंद मानपुर धुर्वे से सवाल किए गए, तो उन्होंने ऑन रिकॉर्ड यह तो स्वीकार किया कि रसायनों को इस तरह खुले मैदान में फेंकना नियम विरुद्ध, खतरनाक और गैर- कानूनी है, लेकिन अपनी गर्दन बचाने के लिए पूरा ठीकरा सात साल पुराने कर्मचारियों पर फोड़ दिया। अधिकारी का दावा है कि यह सामग्री लगभग सात से आठ साल पुरानी है, जिसे तत्कालीन कर्मचारियों द्वारा समय पर किसानों को वितरित नहीं किया गया था।
अधिकारी ने यह भी माना कि नियमानुसार एक्सपायर दवाओं को बाकायदा गड्ढा खोदकर डीकंपोज यानी सुरक्षित विनिष्ट किया जाना चाहिए था, न कि इस तरह खुले में फैलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ करना चाहिए था। अधिकारी के इस रटे-रटाए जवाब ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सात साल पुराना मामला बताकर अफसर अपनी आपराधिक जवाबदेही से बच सकते हैं? अगर दवाइयां सात साल पुरानी थीं, तो इतने वर्षों में जितने भी अधिकारी और गोदाम प्रभारी बदले, उन्होंने प्रभार हस्तांतरण और भौतिक सत्यापन के दौरान इस अनुपयोगी स्टॉक का रिकॉर्ड उच्च कार्यालय को क्यों नहीं भेजा ? हर साल होने वाले सरकारी ऑडिट में लाखों रुपये का यह सरकारी माल कागजों में दर्ज क्यों नहीं हुआ?
क्या साक्ष्य मिटाने और सरकारी चोरी छुपाने की नीयत से इस रासायनिक कचरे को हाल ही में गोदाम के अंदर से निकालकर खुले मैदान में फेंका गया है? मीडिया में मामला उजागर होने और साक्ष्य सामने आने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर पल्ला झाड़ने में जुट गए हैं। वर्तमान में पदस्थ अधिकारियों का कहना है कि उनके चार्ज लेने से पहले यह सामग्री वहां नहीं थी, जबकि स्थानांतरित गए पूर्व अफसरों का दावा है कि माल गोदाम के भीतर ही था। वनांचल क्षेत्र का गरीब किसान साल-दर-साल खाद-बीज और कीटनाशकों के लिए तरसता रहा और दूसरी तरफ जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई शासकीय दवाइयां अफसरों की नाकामी से गोदामों में सड़ती रहीं।

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