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  • कांवड़ यात्रा को लेकर योगी सरकार एक्शन मोड में, निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल ने कसी कमर

    कांवड़ यात्रा को लेकर योगी सरकार एक्शन मोड में, निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल ने कसी कमर

    योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए की बड़ी तैयारी, यूपीपीसीएल ने कसी कमर

    कांवड़ यात्रा से पहले सभी धार्मिक स्थलों पर होंगे विद्युत सुरक्षा के विशेष इंतजाम

    ट्रांसफार्मर खराब होने पर होगी जवाबदेही, अधिकारियों को सख्त चेतावनी

    बरसात में फॉल्ट का तत्काल निस्तारण, सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष जोर

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्विघ्न बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से तैयारियों में जुटी है। श्रद्धालुओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने और किसी भी प्रकार की विद्युत दुर्घटना से बचाने के उद्देश्य से ऊर्जा विभाग ने प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं।

    इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने डिस्कॉम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। बैठक में निर्देश दिए गए कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले सभी सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर विद्युत सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक अनुरक्षण कार्य पूरे कर लिए जाएं। मंदिर समितियों और अन्य आयोजनकर्ताओं को भी विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। 

    बैठक में जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर क्षेत्र में चल रहे विद्युत सुधार कार्यों की जानकारी साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि ट्रांसफार्मर की खराबी की घटनाओं में कमी आनी चाहिए। अधीक्षण अभियन्ता भी इसके लिए सजग रहें। अन्यथा ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अधीक्षण अभियन्ता पर भी कार्रवाई होगी। जहां अस्थाई कनेक्शन में विलम्ब हुआ है, वहां जांच करके कार्रवाई की जाये। अस्थाई कनेक्शन अतिशीध्र स्वीकृत होना चाहिए।  

    यूपीपीसीएल ने अनुरक्षण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारी सुरक्षा उपकरण पहनकर ही कार्य करें ताकि विद्युत संबंधी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए अधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर स्थानीय फॉल्ट का त्वरित निस्तारण करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने को कहा गया है।

    डॉ. गोयल ने बताया कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में पर्याप्त विद्युत सामग्री उपलब्ध है। अधिशासी अभियंताओं को स्थानीय स्तर पर आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए वित्तीय अधिकार और धनराशि भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि दैवी आपदा या खराब मौसम की स्थिति में न्यूनतम समय में बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके। इस तरह कांवड़ यात्रा के दौरान प्रदेशभर में सुरक्षित और सुचारु विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपीपीसीएल पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है।

  • मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, 16 जिलों के सभी प्रसव केंद्रों ने हासिल की बड़ी सफलता

    मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, 16 जिलों के सभी प्रसव केंद्रों ने हासिल की बड़ी सफलता

    योगी सरकार की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि, 16 जिलों में तीन महीनों में सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में

    इस अवधि में इन जिलों में एक भी गैरसंस्थागत (घर या अन्य स्थान पर) प्रसव दर्ज नहीं किया गया, यह उपलब्धि अन्य जिलों को भी करेगी प्रोत्साहित 

    योगी सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच, जनजागरूकता और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयासों का है परिणाम 

    – गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित जांच, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क व एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता से मिली सफलता 

    लखनऊ,
    योगी सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के 16 जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं। इस अवधि में इन जिलों में एक भी गैरसंस्थागत (घर या अन्य स्थान पर) प्रसव दर्ज नहीं किया गया। योगी सरकार की यह उपलब्धि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच, जनजागरूकता और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

    दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ रेफरल व्यवस्था को किया गया मजबूत
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से जिला महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूति सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। आवश्यक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इसी प्रकार संस्थागत प्रसव की दर लगातार बनी रहती है तो मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) में और अधिक कमी लाने में मदद मिलेगी। साथ ही सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उत्तर प्रदेश नई मिसाल कायम कर सकेगा।

    गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़ ने लहराया परचम
    एचएमआईएस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, वाराणसी, अमेठी, अयोध्या, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, गाजीपुर, शामली, गाजियाबाद, हाथरस, इटावा, महोबा व कौशांबी में अप्रैल से जून के बीच एक भी प्रसव गैरसंस्थागत नहीं हुआ है। संयुक्त निदेशक डॉ. शालू गुप्ता ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रयास किए गए हैं। गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क, एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता तथा जननी सुरक्षा एवं मातृत्व लाभ से जुड़ी योजनाओं ने महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के लिए प्रेरित किया है। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रावती का मानना है कि संस्थागत प्रसव मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की मौजूदगी, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात की तत्काल देखभाल, रक्त की उपलब्धता तथा आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था होने से जटिल परिस्थितियों में भी मां और शिशु की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

    जागरूकता और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत से मिली सफलता
    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि समुदाय की बढ़ती जागरूकता और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की सतत मेहनत का भी प्रतिफल है। आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क बनाए रखा, प्रसव की संभावित तिथि से पहले परिवारों को तैयार किया और समय पर अस्पताल तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • बुजुर्गों से बोले सीएम योगी- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए

    बुजुर्गों से बोले सीएम योगी- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए

    सपा-कांग्रेस से सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे, इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगाः सीएम योगी 

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को किया आगाह- कांग्रेस व सपा विरासत, विकास, गांव-गरीब, किसानों, नौजवानों और महिलाओं की जन्मजात विरोधी

    मुख्यमंत्री ने बाराबंकी में रामनगर व दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 542 करोड़ से अधिक की 82 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास 

    मुख्यमंत्री ने लोधेश्वर महादेव के सामने से जाने वाली सड़क को फोरलेन और गेट को भव्य बनाने की घोषणा की 

    रामनगर ने 2022 व बाराबंकी ने 2024 में जिसे चुना, उन्होंने विकास को लेकर एक बार भी चर्चा नहीं कीः मुख्यमंत्री 

    बुजुर्गों से बोले सीएम योगी- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए

    केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी, वहां बनाएंगे संग्रहालय

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  बाराबंकी की धरा से प्रदेशवासियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विरासत, विकास, गांव-गरीब, किसानों, नौजवानों और महिलाओं की जन्मजात विरोधी हैं। इनसे सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे अन्यथा जैसे ही इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव, सरकारी धन की डकैती व लूट के बारे में बताइए। मुख्यमंत्री ने लोधेश्वर महादेव के सामने से जाने वाली सड़क को टूलेन से फोरलेन बनाने और गेट को भव्य बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  बाराबंकी में रामनगर व दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 542 करोड़ से अधिक की 82 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। सीएम ने साहित्यिक विभूतियों, खिलाड़ियों, किसानों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, सीमा की सुरक्षा करने वाले युवाओं आदि का नाम लेकर बाराबंकी को विरासत, आध्यात्मिकता, साहित्य, समर्पण, युवा शक्ति से ओतप्रोत, स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान वाली प्रतिभाशाली व समृद्ध धरा बताया। 

    कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो विकास की लौ पहुंची लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर पर ध्यान नहीं दिया गया
    सीएम ने कहा कि बाराबंकी को लोधेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। सोमवार को बाबा का दर्शन कर अंतःकरण से आनंद की अनुभूति हुई। यहां अगल-बगल के कई जनपदों से श्रद्धालु आते हैं, फिर भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण ही रहा। आजादी के बाद भी आपके पैसे से विकास की लौ कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो पहुंची, लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर, केडी सिंह बाबू की हवेली, पारिजात के महाभारत कालीन वृक्ष के संरक्षण, महादेवा, अयोध्या, काशी विश्वनाथ, गोला गोकर्णनाथ, महापुरुषों, वीरांगनाओं आदि के नाम पर योजनाओं के लिए पैसा नहीं मिला। हमारी सरकार भगवान लोधेश्वर महादेव का कॉरिडोर बना रही है, जिससे देश-प्रदेश के हर कोने से यहां आने वाला श्रद्धालु अभिभूत होगा और बाराबंकीवालों को आशीर्वाद व धन्यवाद देकर जाएगा। सरकार गोला गोकर्णनाथ में भी भव्य कॉरिडोर बना रही है। विंध्यवासिनी मंदिर का कॉरिडोर बन गया। पहले काशी में गंदगी थी और गलियां संकरी थीं लेकिन अब वह भी दिव्य-भव्य बन गई है। देश से जो भी काशी व अयोध्या आता है, हमें भी धन्यवाद देकर जाता है। 

    केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में 36 वर्ष बाद भारतीय टीम ने ओलंपिक में पदक जीता लेकिन उससे पहले मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू के समय भारत ने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता था। जिस खिलाड़ी ने हॉकी को पूरा जीवन दिया, उन केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी। हमने तय किया कि वहां संग्रहालय का निर्माण होगा। सीएम ने अमेरिका के न्यू जर्सी में हुए फीफा विश्वकप का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पेन व अर्जेंटीना के मैच को देखकर लोगों में गजब का उत्साह था। ऐसे ही जब हॉकी चलती है तो भारत की निगाहें उस पर रहती हैं। मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू ने इसे नई ऊंचाई दी थी। 

    सनातन सुरक्षित तो सब सुरक्षित, संकट के समय बंद हो जाते हैं सपाइयों व कांग्रेसियों के मुंह 
    सीएम ने कहा कि विरासत के संरक्षण व सनातन मूल्यों के रक्षा के लिए महापुरुषों ने योगदान दिया। राजा बलभद्र सिंह, लाखन पासी, बिजली पासी, महाराज सुहेलदेव, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए योगदान दिया। सुहेलदेव ने जहां सालार मसूद को मारा था, हमारी सरकार ने बहराइच में वहीं उनका भव्य स्मारक बनाया है। लखनऊ में वीरांगना उदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई, बदायूं में अवंती बाई के नाम पर पीएसी बटालियन, बांदा में महारानी दुर्गावती, औरैया में लोकमाता अहिल्याबाई मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, निषादराज नाम पर रैनबसेरा का निर्माण किया है। देश के लिए योगदान व सनातन के लिए समर्पण देने वाले महापुरुषों को सरकार ने सम्मान दिया है। सनातन की सुदृढ़ नींव पर ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। सनातन सुरक्षित है तो हम सभी सुरक्षित हैं। सनातन पर खतरा आया तो कोई बच नहीं पाएगा। लोगों को बांटने वाले इन सपाइयों व कांग्रेसियों के नमूनों के मुंह संकट के समय बंद हो जाते हैं। 

    कट्टा- बम बनवाने वाले कराते थे गुर्गों से वसूली
    सीएम ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बनाने और कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा, दुर्गापूजा के पंडाल पर प्रतिबंध लगाना सपा के लिए निरपेक्षता का मानक था। हमें ऐसे धर्मनिरपेक्षता को उखाड़ फेंककर सनातन की सुदृढ़ भूमि पर सुरक्षित भारत का निर्माण करना होगा। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सनातन को अपमानित करने वाले लोग त्योहारों के पहले उपद्रव और गुर्गों से वसूली कराते थे। इन लोगों ने गांवों- शहरों में कट्टा-बम बनवाना शुरू कर दिया, जिससे व्यापारी व बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता था। अब लखनऊ में बने ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान व उसके आका बाप-बाप कहकर चिल्लाते हैं। निवेश आने से अब यूपी में ही युवाओं को नौकरी मिल रही है। 

    बुजुर्गों से बोले- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए
    सीएम ने कहा कि समाजवादी जाति से जाति को लड़ा रही है। एक समय कहावत थी कि देख सपाई, बिटिया घबराई। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को इनकी गुंडागर्दी, उपद्रव, डकैती, अराजकता, लूट के बारे में बताइए। उन्होंने कहा कि सैफई घराना ने आमजन के पैसे पर लूट मचाई थी। सपा जिस जेपीएनआईसी को बना रही थी, उसकी कीमत 200 करोड़ थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च होने के बावजूद भी बिल्डिंग अधूरी थी। हमारी सरकार से पहले सपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। सीएम ने यहां भी उनके घोटाले को उजागर किया। कहाकि जिसके लिए वे 15,200 करोड़ का एस्टिमेट बनाए थे। दो वर्ष बाद जमीन आने पर हमने प्रधानमंत्री जी से इसका शिलान्यास कराया और 11,800 करोड़ रुपये में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाया। गोमती रिवर फ्रंट का कुल एस्टिमेट 167 करोड़ रुपये था, लेकिन 1700 करोड़ खर्च होने के बावजूद वह अधूरा ही रहा। 

    डबल इंजन सरकार ने रोकी सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट 
    सीएम ने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने तो कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर यहां तक कह दिया कि 100 में से 15 पैसे ही नीचे आम जनता तक जाता है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट को रोका। इस पैसे से अब नौजवान को छात्रवृत्ति, बेटी की शादी, कन्या सुमंगला योजना का लाभ, टैबलेट, किसानों को सम्मान निधि, गरीबों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। जिस पैसे से यह कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बना रहे थे, उस पैसे का हमने मुंह घुमा दिया और अब इससे कॉरिडोर बन रहा है। सैफई सिडिंकेट का युवाओं की नौकरी पर कब्जा था। नौकरियों की नीलामी होती थी, लेकिन अब बाराबंकी के युवाओं को भी निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरी मिल रही है। 

    सनातन विरोधी है सपा-कांग्रेस का चरित्र
    मुख्यमंत्री ने विपक्षियों (सपा-कांग्रेस) के वास्तविक चरित्र को सनातन विरोधी बताया, कहा कि य़ह जनता के हक, विकास की परियोजनाओं पर डकैती डालते थे। इनके कारनामों से यूपी के सामने पहचान का संकट था। देश में यूपी टॉप-3 इकॉनमी बन गया है। अब बाढ़ बचाव का स्थायी समाधान और गोमती नदी का सुंदरीकरण-पुनरुद्धार हो रहा है। लखनऊ व अयोध्या के बीच स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में शामिल बाराबंकी का विकास कोई रोक नहीं सकता।  

    सपा चट कर जाती थी राशन, आपके विधायक बने मंत्री तो हर गरीब को मिल रहा राशन 
    सीएम ने कहा कि हमने दरियाबाद के विधायक सतीश चंद्र शर्मा को खाद्य व रसद राज्यमंत्री बनाया तो वे यहां के साथ ही अन्य जनपदों का भी विकास कर रहे हैं। सपा गरीब का राशन चट कर जाती थी, लेकिन अब हर गरीब का राशन उसे ही मिलता है। धांधली करने वालों पर कार्रवाई होती है। सपा व कांग्रेस के समय गरीब को पेंशन, छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने से पहले घूस लिया जाता है। आज सीधे अकाउंट में पैसा जाता है, बीच में घूसखोरी नहीं चल सकती। रामनगर ने जिन्हें 2022 और बाराबंकी ने जिन्हें 2024 में चुना, उन्हें विकास की चर्चा करने की फुर्सत नहीं है। इन लोगों ने एक बार भी विकास के प्रस्ताव नहीं दिए। यदि रामनगर विधानसभा और बाराबंकी लोकसभा में कमल खिला होता तो यह क्षेत्र भी विकास की बुलंदियों को छू रहा होता। 

    इस अवसर पर कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही, खाद्य व रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा, दिनेश रावत, विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह, इंजी. अवनीश कुमार सिंह, जिला पंचायत प्रशासक राजरानी रावत, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद प्रियंका रावत, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।

  • योगी सरकार की कौशल योजनाओं ने बदली युवाओं की तकदीर, रोजगार से स्वरोजगार तक बनी नई पहचान

    योगी सरकार की कौशल योजनाओं ने बदली युवाओं की तकदीर, रोजगार से स्वरोजगार तक बनी नई पहचान

    मुख्यमंत्री ने विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर 11 युवाओं को किया सम्मानित

    मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर भावुक हुए युवा, बोले- सरकार की योजनाओं ने आत्मनिर्भर बनने का दिया अवसर

    योगी सरकार की कौशल योजनाओं ने बदली युवाओं की तकदीर, रोजगार से स्वरोजगार तक बनी नई पहचान

    बरेली की राजरानी ने सुनाई संघर्ष से सफलता की कहानी, कैंसर से पीड़ित मां का करा रही ईलाज

    ज्ञान प्रकाश के हेल्थकेयर स्टार्टअप ने युवाओं को दिया रोजगार

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त 11 युवाओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाकर युवाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। कुछ युवाओं ने मुख्यमंत्री के सामने अपने संघर्ष, सफलता और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणादायक कहानियां भी साझा कीं।

    बरेली की राजरानी ने सुनाई संघर्ष से सफलता की कहानी
    राजरानी ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है और उनकी मां कैंसर से पीड़ित हैं। आज अपनी कमाई से वह मां का इलाज कराने के साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिसके बाद उन्हें हरियाणा में नौकरी मिली। वर्तमान समय में 27 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। उन्होंने युवतियों से यूपी की सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील भी की।

    कृष्ण कुमार साहू ने जताया सीएम का आभार
    उन्नाव के कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि उन्होंने आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त किया और आज वह एनसीएल (कोल इंडिया का उपक्रम) में लगभग एक लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पर कार्यरत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहले उनके क्षेत्र से आईटीआई की दूरी लगभग 35 किलोमीटर थी, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण केंद्र खुलने से ग्रामीण युवाओं को काफी सुविधा मिली है। 

    स्वरोजगार की मिसाल बनीं भावना दुबे
    चंदौली की भावना दुबे ने बताया कि उन्होंने आईटीआई से फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया। उन्हें खुशी है कि मुख्यमंत्री के सामने अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आईटीआई के माध्यम से अनेक बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वर्तमान में उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से 70 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक आय हो रही है।

    हेल्थकेयर स्टार्टअप से रोजगार दे रहे ज्ञान प्रकाश
    ज्ञान प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने आईटीआई से प्रेरणा लेकर हेल्थकेयर स्टार्टअप की शुरुआत लखनऊ से की। महिला सशक्तीकरण और महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी कंपनी ने एआई तकनीक आधारित समाधान विकसित किए हैं। उनके स्टार्टअप ने कई युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।

    शुभ्रा मिश्रा बनीं महिला उद्यमिता की मिसाल
    फर्रुखाबाद की शुभ्रा मिश्रा ने बताया कि आईटीआई से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने एडवांस लेवल का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया और अब अपना काम कर रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं से उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग पांच लाख रुपये है तथा वह अपने संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन भी देती हैं।

    मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर भावुक हुए युवा
    मुख्यमंत्री ने जिन 11 युवाओं को सम्मानित किया, उनमें शीतल कुमारी, नेहा, फरदीन खान, मोहम्मद बिलाल, राजरानी, वर्तिका गुप्ता, अर्जुन पाल, संगीता वर्मा, शिवांग वर्मा, राजीव विश्वकर्मा और विनीता शामिल रहे। अयोध्या की शीतल कुमारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मान प्राप्त करना उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण है। उन्होंने कौशल योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया था। आज मेदांता में कार्यरत हैं और उन्हें 23 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। 

    सरकार की योजनाओं ने आत्मनिर्भर बनने का असवर दिया
    गौतमबुद्ध नगर की संगीता वर्मा ने बताया कि उन्होंने नोएडा से आईटीआई का प्रशिक्षण लिया और आज अपना स्वयं का व्यवसाय संचालित कर रही हैं। सरकार की योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। लखनऊ की वर्तिका गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अलीगंज स्थित आईटीओटी रिसर्च सेंटर से कॉस्मेटोलॉजी ट्रेड में प्रशिक्षण लिया और ऑल इंडिया रैंक भी हासिल की। शिक्षकों के मार्गदर्शन और सरकार के सहयोग से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाना उनके लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री से मिलने का सपना पूरा हुआ
    हमीरपुर जिले की नेहा ने बताया कि वर्तमान समय में उन्हें 22,800 रुपये प्रतिमाह मिल रहा है। सामान्य परिवार से आने वाली नेहा ने कहा कि आज वह अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर पा रही हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री जी से मिलने का मौका मिलेगा। लेकिन मेरा सपना आज पूरा हो गया है। मुझे बहुत खुशी हो रही है।

  • मुख्यमंत्री ने जताया युवा शक्ति पर भरोसा, कहा- युवाओं के दम पर बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर का उत्तर प्रदेश

    मुख्यमंत्री ने जताया युवा शक्ति पर भरोसा, कहा- युवाओं के दम पर बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर का उत्तर प्रदेश

    2017 से पहले तत्कालीन सरकार ही सबसे बड़ी अपशगुन थी: सीएम योगी

    कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के सम्मान समारोह कार्यक्रम को संबोधित किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    2017 से पहले नौकरी निकलती नहीं थी और निकल गई तो चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली पर निकल पड़ती थी: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने जताया युवा शक्ति पर भरोसा, कहा- युवाओं के दम पर बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर का उत्तर प्रदेश

    पहले यूपी के नाम पर बाहर के लोग चिढ़ते थे, सरकारी नौकरी पर एक खानदान का अधिकार था

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए न रोजगार था और न पारदर्शी भर्ती प्रणाली। सरकारी नौकरियों पर एक परिवार का अधिकार था और बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकार की सोच व कार्यशैली बीमार थी। 2017 से पहले तत्कालीन राज्य सरकार ही प्रदेश की सबसे बड़ी अपशगुन थी। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि सवा तीन करोड़ से अधिक युवा व कारीगर रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े हैं।

    मुख्यमंत्री बुधवार को विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रशिक्षित युवाओं से संवाद किया और उनके उत्पादों की सराहना की।

    सीएम ने कहा कि इस वर्ष यूनेस्को ने विश्व युवा कौशल दिवस की थीम "साझा भविष्य के लिए कौशल" निर्धारित की है। अवसर तभी साकार होते हैं, जब दूरदृष्टि और सकारात्मक सोच वाली सरकार हो। दुनिया का सबसे अधिक युवा वर्ग उत्तर प्रदेश में है और यह गर्व का विषय है। यह हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। हम इस स्केल को स्किलिंग से जोड़कर यूपी की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। युवा शक्ति किसी भी चुनौती का समाधान बन सकती है। युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण व अवसर मिलें तो वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। 

    पहले यूपी के नाम से चिढ़ते थे बाहरी लोग
    सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों ने ऐसे हालात बना दिए कि बाहर के लोग यूपी के नाम से चिढ़ते थे। कोई युवा डिप्लोमा या डिग्री लेकर प्रदेश से बाहर जाता था तो उसे अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सरकारी नौकरियों पर एक खानदान का अधिकार था, पारदर्शिता का अभाव था। भर्ती प्रक्रियाओं में भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार हावी था। बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि धन्ना सेठ हो या झोपड़ी में रहने वाला इंसान, रोटी केवल दो ही खाता है। जिसके पास सीमित आवश्यकता है, उसको नींद अच्छी आती है। जिसके पास चोरी का पैसा होगा, वह ठीक से सो भी नहीं पाता। उसके लिए तो जीवन नर्क से बदतर है।

    स्किल डेवलपमेंट को मिली नई पहचान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पहली बार देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन कर स्किल डेवलपमेंट को नई पहचान और दिशा दी। इसे युवाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाया गया है। करीब 10 वर्ष पहले यहां मौजूद अधिसंख्य युवा छात्र थे और माता-पिता पर निर्भर थे। तब प्रदेश की स्थिति बेहद खराब थी। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। स्कूल शिक्षा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी और युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। कानून-व्यवस्था की स्थिति भी कमजोर थी। न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी और न ही आम नागरिक।

    उत्तर प्रदेश पर प्रकृति व परमात्मा की विशेष कृपा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रकृति व परमात्मा की विशेष कृपा वाला प्रदेश है। यहां गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, राप्ती व घाघरा जैसी नदियों के रूप में प्रचुर जल संसाधन उपलब्ध हैं, जो दुनिया के बहुत कम क्षेत्रों को प्राप्त हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, नैमिषारण्य, विंध्यवासिनी धाम, मां पाटेश्वरी धाम, शाकंभरी धाम और महाकुंभ जैसी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों ने उत्तर प्रदेश को विशिष्ट पहचान दी है। प्रदेश के पास प्रतिभाशाली युवा और मेहनती अन्नदाता किसान जैसी अमूल्य शक्तियां भी हैं। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की सोच और कार्यशैली बीमारू मानसिकता का प्रतीक थी। जो सरकार अपने युवाओं की उपेक्षा करे, कारीगरों को पलायन के लिए मजबूर करे और अन्नदाता किसानों का सम्मान न करे, ऐसी व्यवस्था जनता के हित में नहीं हो सकती। 

    कोरोना काल में भी जारी रहा ब्रह्मोस प्रोजेक्ट
    2017 के बाद सरकार की कार्यशैली में आए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सीएम ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की ओर से लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव आया था। उस समय रक्षा मंत्री ने भी इच्छा जताई थी कि यदि भूमि निःशुल्क उपलब्ध हो जाए तो परियोजना को लखनऊ में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद करीब 200 एकड़ भूमि चिह्नित की गई। कोरोना काल के दौरान भी प्रोजेक्ट का काम चलता रहा। इस प्रोजेक्ट को यूपी में स्थापित करने को लेकर कई सुझाव आए, लेकिन हमने इसे लखनऊ में लगाने का ही निर्णय किया, ताकि इस प्रोजेक्ट में यूपी के नौजवानों को रोजगार भी सुनिश्चित कराया जा सके। इसके लिए एकेटीयू को कैंपस चयन का केंद्र बनाया गया। इसके बाद आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके 500 युवाओं को रोजगार मिला। इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, बदायूं, बरेली, गोरखपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा और अयोध्या समेत कई जिलों के युवा शामिल हैं।

    एमएसएमई इकाइयां यूपी की मजबूत आधारशिला
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग, मेरठ का खेल उद्योग, भदोही का कालीन उद्योग, लखनऊ की चिकनकारी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और बनारसी साड़ी जैसे पारंपरिक उत्पाद उत्तर प्रदेश की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने इन पारंपरिक उद्योगों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं दिया।

    बदलती तकनीक के अनुरूप ट्रेनिंग
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती तकनीक के अनुरूप प्रदेश के आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3 डी प्रिंटिंग से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये सुविधाएं केवल लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा या गाजियाबाद तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि महोबा, चित्रकूट, सोनभद्र, बलिया, बहराइच समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी आधुनिक कौशल प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने का लक्ष्य रखें। दुनिया कुशल युवाओं का इंतजार कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक जिले में एमएसएमई, कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, श्रम एवं सेवायोजन विभाग के समन्वय से सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन स्थापित किए जा रहे हैं।

    विदेशी भाषा का भी मिलेगा प्रशिक्षण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई युवा जापान या किसी अन्य देश में रोजगार करना चाहता है तो उसे संबंधित देश की भाषा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और रोजगार उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा। राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रोजगार की मांग के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की व्यापक व्यवस्था विकसित की जा रही है। हर घर नल योजना, पीएनजी गैस विस्तार, डिजिटल इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना होगा।

    ये 27 हजार रुपये कई लाख पर भारी
    सीएम योगी ने कार्यक्रम में उपस्थित एक युवती का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 27 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अपने दम पर अर्जित कर रही है और अपनी मां का उपचार करा रही है। यही वास्तविक स्वावलंबन है। यह 27000 रुपये कई लाख पर भारी हैं। उन्होंने उस युवती की मां के उपचार में हरसंभव सरकारी सहायता देने का आश्वासन दिया।

    कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास विभाग के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान एवं मुकेश शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा डॉ. हरिओम, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एम.के. सुंदरम और प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • सीएम योगी की जल संरक्षण मुहिम का बड़ा असर, अमृत सरोवर निर्माण में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

    सीएम योगी की जल संरक्षण मुहिम का बड़ा असर, अमृत सरोवर निर्माण में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

    सीएम योगी के नेतृत्व में चला सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

    जल संरक्षण में देश में पहला स्थान, दूसरे स्थान पर रहे मध्य प्रदेश से तीन गुना आगे उत्तर प्रदेश

    अमृत सरोवर, तालाबों के पुनर्जीवन, जल संरक्षण कार्यों से कृषि, पर्यावरण, भूजल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर सकारात्मक असर

    रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर और पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार, 16 हजार करोड़ रुपए से बदली तस्वीर

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश के लिए एक नया मॉडल तैयार कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं और पिछले पांच वर्षों में करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और पूरे देश के कुल अमृत सरोवरों में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है।
    पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संबंधी कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक का काम किया गया, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। जल संरक्षण की इस व्यापक मुहिम का असर अब खेती, भूजल स्तर, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।

    जल संरक्षण बढ़ाने के लिए पहले मनरेगा के तहत कुल 266 अनुमन्य कार्यों में से 78 कार्य जल संरक्षण से संबंधित रहे। वहीं, अब वीबी-जीराम-जी के तहत कुल 318 अनुमन्य कार्य हैं, जिनमें से 107 कार्य जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से संबंधित हैं। इनमें चेक डैम का निर्माण, सोक पिट का निर्माण, रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, तालाब का निर्माण, जलाशयों का पुनरोद्धार, बांधों का निर्माण, मेड़बन्दी, पौधारोपण शामिल हैं।

    उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ा

    जल संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जिसकी तुलना में उत्तर प्रदेश लगभग तीन गुना आगे है। यह उपलब्धि केवल सरकारी निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को जनभागीदारी से जोड़ने का परिणाम है।

    हर गांव में जल संरक्षण बना जन आंदोलन

    योगी सरकार ने अमृत सरोवर योजना को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया। गांवों में पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, नए जलाशयों का निर्माण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ी और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को स्थायी समाधान मिलने लगा।

    खेती, भूजल और पर्यावरण को मिल रहा बड़ा सहारा

    अमृत सरोवरों और तालाबों के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को राहत मिली है और भूजल स्तर में व्यापक सुधार आया है। जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ी है, जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार

    जल संरक्षण अभियान का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ा है। अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन, पशुपालन, सिंचाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के नए अवसर विकसित हुए हैं। वीबी-जीराम-जी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला, जबकि जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी काफी वृद्धि हुई है।

    जल संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बना उत्तर प्रदेश

    उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण को विकास, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे देश के अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। अमृत सरोवरों, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक जल संरक्षण कार्यों ने यह साबित किया है कि सुनियोजित नीति, जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है।

  • उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती, अब हाई रिस्क केस का स्थानीय स्तर पर इलाज

    उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती, अब हाई रिस्क केस का स्थानीय स्तर पर इलाज

    योगी सरकार की पहल से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई ताकत, अब छोटे जिलों में संभाले जा रहे हाई रिस्क केस

    – सीएम योगी के निर्देश पर शुरू हुई आरआरटीसी योजना से हाई रिस्क प्रसव का स्थानीय स्तर पर सफल इलाज
     
    – हैंड ऑन प्रशिक्षण के बाद डॉक्टर जटिल मामलों को रेफर करने के बजाय खुद कर रहे सुरक्षित उपचार
     
    – सीतापुर में तीन महीने में 2,218 हाई रिस्क सहित सुरक्षित प्रसव, बिना रेफरल संभाले गए गंभीर केस 

    लखनऊ, 
     योगी सरकार प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने व हर गर्भवती महिला को स्थानीय स्तर पर ही सुरक्षित प्रसव कराने के उद्देश्य से स्थानीय डॉक्टरों को हैंड आन ट्रेनिंग दे रही है, जिसका असर दिखने लगा है। ट्रेनिंग से मिले आत्मविश्वास से अब डॉक्टर हाई रिस्क वाले मामलों को रेफर नहीं कर रहे, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही उनका इलाज कर रहे हैं। अब तक केजीएमयू व एएमयू के अधीन आने वाले आठ जिलों के डॉक्टरों को प्रशिक्षण देकर उनके कौशल का क्षमतावर्धन किया जा चुका है। अन्य जिलों के चिकित्सकों को बारी-बारी से ट्रेनिंग दिए जाने की तैयारी है। 

    पहले चरण में प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेजों को आरआरटीसी सेंटर बनाया गया 
    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि प्रदेश में जिलास्तर पर डॉक्टर तो थे, लेकिन उनमें उच्च जोखिम (गंभीर एनिमिया, हाई ब्लड प्रेशर, शॉक, एंटी पार्टम हैमरेज, पोस्ट पार्टम हैमरेज, लंबी प्रसव पीड़ा, बाधित प्रसव) वाले केसों को संभालने का आत्मविश्वास नहीं था और वे ऐसे केसों को रेफर कर दिया करते थे। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वर्ष 2017 में रीजनल रिर्सोस एंड ट्रेनिंग सेटर (आरआरटीसी) कार्यक्रम डिजाइन किया गया और तय किया गया कि जच्चा-बच्चा का इलाज करने वाले जिलास्तरीय डॉक्टरों का क्षमता वर्धन किया जाए। पहले चरण में प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेजों को आरआरटीसी सेंटर बनाया गया और उनके माध्यम से आसपास के जिलों के डॉक्टरों के कौशल का क्षमतावर्धन किया गया। दूसरे चरण में अब हाईब्रिड माध्यम से डॉक्टरों का क्षमतावर्धन व हैण्ड आन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    सीतापुर में पिछले तीन महीने में 2,218 सुरक्षित प्रसव कराए गये 
    सीतापुर जिला महिला अस्पताल के प्रशिक्षण प्राप्त पांच डॉक्टर्स ने पिछले तीन महीने में 2,218 सुरक्षित प्रसव किये, जो प्रसव एक से एक हाई रिस्क वाले थे। किसी का हीमोग्लोबिन 2 मिलीग्राम, किसी का ब्लड प्रेशर 200 पार, किसी में प्रसव के दौरान की जटिलताएं आदि। इस पर न किसी को रेफर किया गया और न किसी सीनियर को फोन लगाया गया। खुद सभी केस संभाले और जच्चा-बच्चा दोनों की जिंदगी सुरक्षित की। महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमलेश कुमारी ने बताया कि प्रशिक्षण बहुत ही व्यावहारिक है। हाई रिस्क के सभी कारणों (गंभीर एनिमिया, हाई ब्लड प्रेशर, एंटी पार्टम हैमरेज, लंबी प्रसव पीड़ा, बाधित प्रसव आदि) पर अलग- अलग प्रशिक्षण दिया गया। पहले इलाज के सारे तकनीकी पहलू बताए गए। उसके बाद विशेषज्ञों की मौजूदगी में इन हाईरिस्क केसों का इलाज किया गया और जहां पर चूक हो रही थी, वहां पर बताया गया। आज हम सभी डॉक्टर हर तरह के हाईरिस्क प्रसव को संभाल रहे हैं और बहुत मजबूरी में ही मरीज को रेफर करते हैं। 

    वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल में मातृ मृत्यु दर 80 से 90 प्रतिशत तक घटी
    डॉ. कमलेश ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद उनके अंदर भी मरीज की स्थिति देखकर जल्दी से फैसला लेने का आत्मविश्वास आया है और स्वयं कई गंभीर मरीजों को बचा पाईं। आज से पांच साल पहले जिला महिला अस्पताल में दिन भर में दो से तीन सीजेरियन प्रसव होते थे। अब औसतन 10 से 12 प्रसव रोजाना होते हैं। लोगों का सरकारी अस्पताल के प्रति इतना विश्वास बढ़ा है कि लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली, बहराइच, गोण्डा व हरदोई तक से महिलाएं यहां प्रसव कराने आती हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. सुनीता कश्यप ने स्वीकारा कि ट्रेनिंग के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में जच्चा-बच्चा को संभालने का विश्वास बढ़ा है। वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल, लखनऊ के चिकित्सा अधिकारी डॉ. देशबंधु गुप्ता ने बताया कि उनके अस्पताल में 10 डॉक्टरों ने यह ट्रेनिंग की है और इसका सीधा फायदा यह दिखता है कि अस्पताल में मातृ मृत्यु दर 80 से 90 प्रतिशत तक घटी है। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत तौर पर अब वह दो-तीन मिनट में किसी भी केस में फैसला ले लेते हैं और मरीज का इलाज शुरू कर देते हैं। ट्रेनिंग के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है। अब अंदर से विश्वास है कि कोई भी केस संभाल लूंगा। पहले सीनियर से पूछकर ही फैसले लेता था। 

    हैण्ड ऑन प्रशिक्षण से डॉक्टरों का बढ़ा आत्मविश्वास
    आरआरटीसी की नोडल अधिकारी डॉ. सीमा टंडन ने बताया कि गर्भवती महिलाओं का इलाज करने वाले प्रदेश के डॉक्टरों की क्षमतावर्धन करने व उनकी जानकारी को अपडेट करने के लिए यह कार्यक्रम 2017 में लागू किया गया था ताकि वे पोस्टपार्टम हैमरेज व एक्लम्पसिया जैसी जटिलताओं को स्थानीय स्तर पर संभाल सकें। हाईब्रिड माध्यम से केजीएमयू के अधीन आने वाले पांच जिलों सीतापुर, बहराइच, बलरामपुर, गोण्डा व श्रावस्ती के डॉक्टरों व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाले हाथरस, कासगंज व अलीगढ़ जिला अस्पताल के डाक्टरों को प्रशिक्षित किया गया। अब दूसरे मंडलों के डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई जा रही है। आरआरटीसी की मेंटर क्वीन मैरी अस्पताल की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों को हैण्ड आन प्रशिक्षण दिए जाने से निश्चित तौर पर उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे जटिल केस भी अपने जिलों में संभालने लगे हैं। पहले ऐसे बहुत से केस हमारे पास आते थे। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनिंग सभी डॉक्टरों की होनी चाहिए। फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) से बहुत से मामले उनके अस्पताल आते हैं जिनका वहीं इलाज किया जा सकता है। बस डॉक्टरों में आत्मविश्वास आने की बात है। इसके बाद वे वहीं पर बहुत से जटिल केसों का इलाज कर लेंगे।

  • अवैध कब्जे से जुड़े मामलों की हो सख्ती से जांच, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई: सीएम योगी

    अवैध कब्जे से जुड़े मामलों की हो सख्ती से जांच, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई: सीएम योगी

    अपराधियों के लिए यूपी में जगह नहीं, करें सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री

    सीएम योगी ने किया 'जनता दर्शन', हर पीड़ित की समस्या सुन समाधान के लिए दिए निर्देश

    अवैध कब्जे से जुड़े मामलों की हो सख्ती से जांच, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई: मुख्यमंत्री

    एक बिल्डर के खिलाफ शिकायत पर मुख्यमंत्री ने जांच कर कार्रवाई करने के दिए निर्देश

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। उन्होंने प्रदेश भर से आए हर फरियादी से मुलाकात की, उनकी शिकायत सुनी और अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। अवैध कब्जे से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत मिलने पर ऐसे मामलों की सख्ती से जांचकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें। धमकी के मामले में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं है, पुलिस ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करे। 

    अपराध व अवैध कब्जे से जुड़े मामलों की विवेचना में की जाय शीघ्रता
    मुख्यमंत्री योगी के समक्ष अवैध कब्जे से जुड़े मामले आये। पीड़ितों ने आरोपियों पर धमकी देने का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने फरियादियों के प्रार्थना पत्र लेकर शासन के अधिकारियों को प्रेषित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। अवैध कब्जा करने व धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही अपराध व कब्जे से जुड़े मामलों की विवेचना में तेजी कर पीड़ितों को ससमय न्याय और दोषियों को दंड दिलाया जाय। 

    बिल्डर के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचे लोग, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
    गाजियाबाद, मेरठ व नोएडा से जुड़े एक बिल्डर की शिकायत भी 'जनता दर्शन' के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंची। पीड़ितों ने बताया कि बिल्डर ने एक ही फ्लैट कई लोगों को रजिस्ट्री कर दिया है। इस पर मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को गम्भीरता से लिया और कहा कि जांच में बिल्डर के दोषी मिलने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर पीड़ितों को न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाय।

  • प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को बनाया गया लखनऊ का नोडल अफसर, प्रमुख सचिव (कृषि) रहेंगे सहारनपुर

    प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को बनाया गया लखनऊ का नोडल अफसर, प्रमुख सचिव (कृषि) रहेंगे सहारनपुर

    पौधरोपण महायज्ञ-2026 -पूरे प्रदेश में आयोजन को अभूतपूर्व बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी

    योगी सरकार ने शासन में तैनात अफसरों को बनाया नोडल अधिकारी

    प्रमुख सचिव सहकारिता प्रयागराज, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी वाराणसी में संभालेंगे कमान 

    खेल सचिव सुहास एल वाई को गोरखपुर की जिम्मेदारी, खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की सचिव रोशन जैकब बस्ती में रहेंगी 

    प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को बनाया गया लखनऊ का नोडल अफसर, प्रमुख सचिव (कृषि) रहेंगे सहारनपुर

    लखनऊ, 
    योगी सरकार ने पौधरोपण महायज्ञ-2026 के सकुशल क्रियान्वयन के लिए शासन के अधिकारियों को जनपदों का नोडल अफसर नामित किया है। नोडल अधिकारी विभिन्न जनपदों में पहुंचकर 12 जुलाई (रविवार) को होने वाले पौधरोपण महायज्ञ में केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों के साथ ही वन विभाग के समन्वय से अभियान को सफल बनाएंगे। विभिन्न जनपदों के शासन के अधिकारियों की घोषणा भी कर दी गई है। 

    गोरखपुर में खेल सचिव सुहास एलवाई, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार वाराणसी के लिए  
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महायज्ञ का शुभारंभ गोरखपुर से करेंगे। यहां शासन की तरफ से खेल सचिव सुहास एलवाई को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार यह जिम्मेदारी संभालेंगे। जौनपुर में महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. मौजूद रहेंगी। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन बलिया में रहेंगे। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की सचिव डॉ. रोशन जैकब बस्ती में रहेंगी। 

    प्रमुख सचिव (सहकारिता) प्रयागराज, प्रमुख सचिव (कृषि) जाएंगे सहारनपुर
    प्रमुख सचिव (सहकारिता) अजय कुमार शुक्ल प्रयागराज व प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र सहारनपुर में पौधरोपण महायज्ञ की कमान संभालेंगे। खाद्य व रसद विभाग के प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद बहराइच, प्रमुख सचिव स्टांप व रजिस्ट्रेशन अमित गुप्ता अयोध्या रहेंगे। प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम आगरा, संयुक्ता समद्दार फिरोजाबाद, सौरभ बाबू बरेली, मनीष चौहान शाहजहांपुर, अनिल कुमार तृतीय मुरादाबाद, अजय चौहान मेरठ, कामिनी रतन चौहान गाजियाबाद में होने वाले महायज्ञ में शामिल रहेंगी। 

    प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को बनाया गया लखनऊ का नोडल अफसर
    प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को राजधानी लखनऊ का नोडल अफसर बनाया गया है। प्रमुख सचिव (हथकरघा व वस्त्रोद्योग) अनिल कुमार सागर रायबरेली, प्रमुख सचिव (विज्ञान व प्रौद्योगिकी) पंधारी यादव उन्नाव, प्रमुख सचिव (आवास व शहरी नियोजन) पी. गुरु प्रसाद सीतापुर, प्रमुख सचिव (श्रम व सेवायोजन) डॉ. शनमुगा सुंदरम एमके कानपुर नगर, प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू कन्नौज में रहेंगी। अनिल गर्ग नोएडा, रंजन कुमार बागपत में पहुंचकर महायज्ञ की सफलता का कार्य देखेंगे। इनके अलावा अन्य सभी जनपदों में भी शासन के अधिकारियों को तैनात किया गया है।

  • UP ने रचा नया रिकॉर्ड, 19,989 अमृत सरोवरों के निर्माण-पुनरुद्धार के साथ देश में शीर्ष स्थान

    UP ने रचा नया रिकॉर्ड, 19,989 अमृत सरोवरों के निर्माण-पुनरुद्धार के साथ देश में शीर्ष स्थान

    अमृत सरोवर निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष पर, 19989 सरोवरों का किया गया निर्माण और पुनरुद्धार

    योगी सरकार की जल संरक्षण मुहिम को बड़ी सफलता, हरदोई बना अमृत सरोवर निर्माण में अव्वल

    पर्यावरण संरक्षण और रोजगार का संगम बने अमृत सरोवर, गांवों की बदल रही तस्वीर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' व 'अमृत सरोवर योजना 2.0' के तहत प्रदेश में 19,989 अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है। 

    ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार के मामले में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है। इस अभियान से जल संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

    हरदोई बना प्रदेश में सबसे आगे
    अमृत सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश पांच जिले हरदोई, आजमगढ़, गोरखपुर, महराजगंज व प्रयागराज टॉप पांच में शामिल हैं। यहां हरदोई प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां 1,202 सरोवरों का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा आजमगढ़ में 797, गोरखपुर में 734, महराजगंज में 726 और प्रयागराज में 638 अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। प्रदेशभर में अब तक निर्माण एवं पुनरुद्धार का कुल आंकड़ा 19,989 तक पहुंच चुका है।

    जल संरक्षण के साथ कृषि को भी मिल रहा लाभ
    अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य केवल पुराने जल स्रोतों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर में सुधार लाना भी है। इन सरोवरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे कृषि गतिविधियों को मजबूती मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी बल मिला है।

    गांवों में हरियाली और स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा
    योगी सरकार ने अमृत सरोवरों को केवल जल संचय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें ग्रामीण जीवन का आकर्षक केंद्र भी बनाया है। प्रत्येक अमृत सरोवर को कम से कम एक एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार घन मीटर है। सरोवरों के चारों ओर पक्के पैदल मार्ग, बैठने के लिए बेंच, प्रकाश व्यवस्था और व्यापक वृक्षारोपण की व्यवस्था की गई है। इससे गांवों में हरियाली और स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा मिला है।

    ग्रामीण रोजगार को मिला नया सहारा
    अमृत सरोवर योजना का एक बड़ा लाभ ग्रामीण रोजगार के रूप में भी सामने आया है। सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और सुंदरीकरण के कार्यों को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया है। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत भी विकसित हुए हैं।

    सतत विकास की दिशा में प्रभावी पहल
    अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, हरियाली बढ़ाने और कृषि को सहयोग देने के साथ यह योजना गांवों में सतत विकास की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

    अन्य राज्यों के लिए बना मॉडल 
    ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, अमृत सरोवर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण रोजगार को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल प्रदेश में ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता को नई गति दे रही है।