Tag: yogi

  • सीएम योगी का चित्रकूट-बांदा दौरा आज, विकास कार्यों की सौगात के साथ कई कार्यक्रमों में होंगे शामिल

    सीएम योगी का चित्रकूट-बांदा दौरा आज, विकास कार्यों की सौगात के साथ कई कार्यक्रमों में होंगे शामिल

    सीएम योगी गुरुवार को चित्रकूट-बांदा दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

    मुख्यमंत्री चित्रकूट के कामदगिरी की परिक्रमा करेंगे

    बांदा में जनसभा, बबेरू एवं बांदा सदर के विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं शिलान्यास

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार 9 जुलाई को चित्रकूट और बांदा के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री चित्रकूट के न्यू सर्किट हाउस से 
    कामदगिरि परिक्रमा स्थल में मौजूद बरहा के हनुमान मंदिर पहुंचेंगे। वहां दर्शन पूजन के बाद कामदगिरि की परिक्रमा करेंगे। कामदगिरि की परिक्रमा लगभग 6 किलोमीटर है, जिसे लगभग 1 घंटे में पूरा किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री फिर से हनुमान मंदिर पहुंचेंगे और फिर वहां से चित्रकूट के न्यू सर्किट हाउस पहुंचेंगे। 

    इसके बाद मुख्यमंत्री बांदा पहुंचेंगे। यहां पं. जवाहरलाल नेहरू डिग्री कॉलेज के मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री बांदा जनपद की 2 विधानसभाओं (बबेरू एवं बांदा सदर) की लगभग 709 करोड़ रुपए की 229 विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र में 171 करोड़ रुपए की लागत से करीब 45 विकास कार्य कराए जा चुके हैं। 

    इसी तरह बबेरू विधानसभा क्षेत्र में 65 करोड़ की लागत से 64 कार्य कराए गए हैं। जिनका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इसी तरह बांदा सदर विधानसभा में 425 करोड़ रुपए की लागत से 40 कार्य और बबेरू विधानसभा में 47 करोड़ की लागत से 80 विकास कार्यों का शिलान्यास मुख्यमंत्री करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री शहर के कालूकुआ चौराहे में रानी अवन्ति बाई लोधी की मूर्ति का अनावरण कर सकते हैं।

  • मिलेट कैफे और एग्रो प्रोसेसिंग आधारित इकाइयों की स्थापना से बढ़ेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर

    मिलेट कैफे और एग्रो प्रोसेसिंग आधारित इकाइयों की स्थापना से बढ़ेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर

    योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने की नई पहल, यूपीएसआरएलएम और टाटा पावर ट्रस्ट के बीच हुआ एमओयू

    स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को मिलेगा उद्यमिता, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण

    योगी सरकार के 'लखपति महिला उद्यमी' अभियान को मिलेगी नई गति, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा
     
    मिलेट कैफे और एग्रो प्रोसेसिंग आधारित इकाइयों की स्थापना से बढ़ेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर

    लखनऊ 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) और टाटा पावर कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित करना है।

    राज्य मिशन कार्यालय लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में हुए इस समझौते के तहत महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों और क्लस्टर स्तरीय संघों की संस्थागत क्षमता को मजबूत किया जाएगा। महिलाओं को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, उद्यमिता कौशल का विकास और उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    समझौते के तहत प्रदेश में मिलेट कैफे, एग्रो प्रोसेसिंग आधारित इकाइयों और अन्य महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यम स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और टाटा पावर कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट की यह साझेदारी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    यह पहल प्रदेश में महिला उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि कर उन्हें लखपति महिला उद्यमी बनाने के अभियान को और अधिक गति प्रदान करेगी। इस अवसर पर मिशन निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन दीपा रंजन ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाना है। टाटा पावर कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट के साथ यह साझेदारी महिला उद्यमिता को नई दिशा प्रदान करेगी। साथ ही महिलाओं की आय में वृद्धि कर उन्हें लखपति महिला उद्यमी बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    टाटा पावर कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन एवं मुख्य मानव संसाधन, सीएसआर एवं सस्टेनेबिलिटी अधिकारी हिमल तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ यह सहयोग महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाने, स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और सतत ग्रामीण आजीविका के अवसर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह साझेदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को नई गति प्रदान करेगी।

    इस अवसर पर मिशन निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन दीपा रंजन, अपर मिशन निदेशक जयंत यादव, संयुक्त मिशन निदेशक चंद्रशेखर, राज्य परियोजना प्रबंधक आचार्य शेखर, मिशन मैनेजर नवीन शर्मा सहित उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। टाटा पावर कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट की ओर से चेयरमैन एवं मुख्य मानव संसाधन, सीएसआर एवं सस्टेनेबिलिटी अधिकारी हिमल तिवारी, मुख्य सामुदायिक प्रभाव (सीएसआर) पंकज सिंह, गीतांजलि त्रिपाठी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

  • वाराणसी से शिक्षकों को बड़ी सौगात! CM योगी करेंगे कैशलेस चिकित्सा योजना की शुरुआत, परिवार को भी मिलेगा लाभ

    वाराणसी से शिक्षकों को बड़ी सौगात! CM योगी करेंगे कैशलेस चिकित्सा योजना की शुरुआत, परिवार को भी मिलेगा लाभ

    मख्यमंत्री योगी बुधवार को वाराणसी से करेंगे 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ 
     
    -लगभग 12 लाख शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, विशेष शिक्षक, रसोइये एवं अन्य कार्मिक परिवार सहित होंगे लाभान्वित

    -प्रति शिक्षक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का भुगतान करेगी राज्य सरकार, लगभग ₹447 करोड़ होगा वार्षिक व्यय

    – डीबीटी से 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में पहुंचेंगे ₹1320 करोड़

    शिक्षा विभाग का एसबीआई के साथ सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू भी होगा

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कार्मिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को नई मजबूती देने जा रही है। मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी से 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ करेंगे। इसी कार्यक्रम में परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डीबीटी से धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी समझौता (एमओयू) का आदान-प्रदान होगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों को भी सम्मानित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (सीडब्ल्यूएसएन), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डेन, पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइये तथा अन्य पात्र कार्मिक और उनके परिवार लाभान्वित होंगे। इस योजना से लगभग 12 लाख शिक्षक, रसोइये एवं अन्य कार्मिक परिवार सहित स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे।

    योजना में प्रति शिक्षक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का पूरा भुगतान राज्य सरकार करेगी। इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹447 करोड़ का व्यय किया जाएगा। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज के माध्यम से होगा। लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। योजना में लगभग 1900 उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं। इनमें सामान्य उपचार से लेकर गंभीर बीमारियों, जटिल सर्जरी, हृदय रोग, कैंसर, किडनी रोग सहित अनेक उपचार शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री प्रतीकात्मक रूप से शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित करेंगे।

    अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी 

    कार्यक्रम में शैक्षिक सत्र 2026-27 के प्रथम चरण में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी। यह राशि यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, स्वेटर, जूते-मोजे और स्टेशनरी की खरीद के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अभिभावकों को बच्चों की आवश्यक शैक्षणिक सामग्री समय पर उपलब्ध कराने में सुविधा मिलेगी।

    शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच होगा एमओयू 
     
    समारोह के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू भी होगा। इससे लगभग 10 लाख शिक्षक एवं अन्य कार्मिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जुड़ेंगे। उन्हें समूह जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी एवं आंशिक दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर तथा आकस्मिक परिस्थितियों में बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए अतिरिक्त सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जिन कार्मिकों के वेतन खाते पहले से भारतीय स्टेट बैंक में हैं, उन्हें इन सुविधाओं का लाभ स्वतः मिलेगा। अन्य पात्र कार्मिकों को भी बैंक में वेतन खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

    राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक होंगे सम्मानित 

    कार्यक्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय (एसएचवीआर) योजना के राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई और बेहतर विद्यालयी वातावरण विकसित करने के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए दिया जाएगा।

  • गंगा नदी के किनारे 603, गोमती किनारे 297, सरयू किनारे 254 स्थलों पर होगा भव्य पौधरोपण कार्यक्रम

    गंगा नदी के किनारे 603, गोमती किनारे 297, सरयू किनारे 254 स्थलों पर होगा भव्य पौधरोपण कार्यक्रम

    पौधरोपण महायज्ञ- 2026 

     योगी सरकार 13 प्रमुख नदियों के तट क्षेत्र पर रोपेगी 3.83 करोड़ से अधिक पौधे 
     
    नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में पौधरोपण कर 22240 से अधिक हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करेगी योगी सरकार  
     
    गंगा तीरे 4495 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 79.86 लाख पौधरोपण 

    यमुना नदी के किनारे 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर में लगेंगे 1.08 करोड़ पौधे 

    गंगा नदी के किनारे 603, गोमती किनारे 297, सरयू किनारे 254 स्थलों पर होगा भव्य पौधरोपण कार्यक्रम

    लखनऊ
     योगी सरकार पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत उत्तर प्रदेश में 13 प्रमुख नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करेगी। गंगा, यमुना, गोमती, सरयू, समेत कई प्रमुख नदियों के किनारे पौधरोपण होगा। गंगा के किनारे 4495.72 हेक्टेयर में 79.86 लाख से अधिक पौधरोपण होगा तो यमुना किनारे सर्वाधिक 647 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पौधरोपण कराए जाएंगे। नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में कुल 2673 स्थल चिह्नित किए गए हैं, इनके किनारे 22240 हेक्टेयर से अधिक में 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण होगा। 

    यमुना नदी के तट क्षेत्र पर होंगे सर्वाधिक पौधरोपण 
    सीएम योगी के निर्देश पर नदियों के किनारे पौधरोपण होंगे। अविरल धारा पौधरोपण कार्यक्रम के तहत यमुना नदी के तट पर सर्वाधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। यमुना के कैचमेंट एरिया में 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़, 8 लाख, 18 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। वहीं गंगा नदी के किनारे 603 स्थलों पर 4495.72 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसके किनारे 79.86 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। गंगा किनारे के वन प्रभागों प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, काशी वन्यजीव व बलिया आदि में यह पौधरोपण प्रस्तावित है। 

    इन 13 नदियों के समीप होगा अविरल धारा पौधरोपण

    क्रम  नदी    स्थल   क्षेत्रफल (हेक्टेयर)   पौधों की संख्या 
    1  यमुना       647      6531.77         1,08,18,731
    2 गंगा         603       4495.72          79,86,512
    3 गोमती        297      1521.5          31,37,845
    4 सरयू/घाघरा   254      1635.58         27,75,860
    5  सई        238      1032.52          23,29,609
    6  बेतवा       171       3281.76         52,35,132
    7 राप्ती       155          1037.67         16,60,272
    8 छोटी गंडक   105       513.00          8,20,800
    9  सोन        67        970.63         14,77,158 
    10  रामगंगा    51        268.51         4,49,978
    11  केन       39       667.9            10,68,381
    12  हिंडन     33        131.55          3,16,480
    13  चंबल     13         152.00           2,28,200

    कुल–     2673        22240.11        3,83,04,958

    पौधरोपण महायज्ञ-2026 के दौरान वन विभाग की तरफ से प्रदेश में 13 नदियों के किनारे अविरल धारा पौधरोपण कराया जाएगा। इसमें मां गंगा, मां यमुना, मां सरयू आदि के नदियों के तट से 5 किमी. की परिधि में पौधरोपण होगा। नदियों के किनारे 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण को लेकर भी विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में पौधरोपण महायज्ञ उत्सव के साथ मनाया जाएगा। 
     

  • उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड पौधरोपण अभियान, CM योगी ने दिया ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ का संदेश

    उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड पौधरोपण अभियान, CM योगी ने दिया ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ का संदेश

    'माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:' के भाव को आत्मसात कर पौधरोपण का नया रिकॉर्ड बनाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों व पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के पार्षदों आदि से किया संवाद

    12 जुलाई को वृक्षारोपण महाभियान-2026 के तहत लगाएं ‘एक पेड़ मां के नाम’, उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे, सुबह 7 से शाम छह बजे तक होगा वृहद आयोजन

    मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से की अपील- जनसहभागिता से पौधरोपण महाभियान को बनाएं सफल, इसके लिए दो दिन के भीतर कर लें तैयारी 

    पौधे लगाएं और हर हाल में उसकी सुरक्षा पर भी दें पूरा ध्यानः मुख्यमंत्री

    72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति, इनकी सहभागिता से हासिल किया जाएगा हर लक्ष्यः मुख्यमंत्री 

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने'पौधरोपण महाभियान-2026' के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद किया। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षदों आदि की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।  

    12 जुलाई को लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधेः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान जनांदोलन का स्वरूप ले चुका है। 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर भी पांच करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार विगत 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश में 247 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। 

    जनप्रतिनिधि दो दिन के भीतर बैठक कर पूरी करें तैयारी 
    मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें।

    कई विशिष्ट वन भी किए जाएं स्थापित, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाए जाएं छायादार पौधे
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन स्थापित किए जाएं। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी हो। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएं। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाए। 

    हर हाल में सुनिश्चित हो पौधों की सुरक्षा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपलब्ध कराया जाए। यह पौधा कुपोषण से बचाव में काफी कारगर साबित होता है। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से संवाद बनाकर उन्हें भी पौधरोपण जन अभियान से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत सरोवरों, नदियों के किनारे, खाली जमीन, हाइवे-एक्सप्रेसवे के किनारे, मंडी समितियों में आवश्यकतानुसार फलदार-छायादार पौधे रोपित किए जाएं। गंगा जी, यमुना जी समेत अन्य नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधे लगवाने के साथ इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ट्री गार्ड आदि लगाकर इनकी सुरक्षा भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए। 

    नर्सरियों में उपलब्ध हैं 57 करोड़ से अधिक पौधे
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ वर्ष पहले जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ किया गया था, तब वन एवं उद्यान विभाग की नर्सरियों में पांच करोड़ पौधे भी उपलब्ध नहीं थे। आज स्थिति यह है कि दोनों विभागों के पास 57 करोड़ से अधिक पौधों का भंडार है। इनमें फलदार, औषधीय, इमारती तथा सजावटी प्रजातियों सहित सभी प्रकार के पौधे शामिल हैं और प्रत्येक जनपद में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

    ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा उत्तर प्रदेश 
    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय दायित्व है। ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है और उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

    72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति 
    उन्होंने कहा कि प्रदेश के 72 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि सभी जनप्रतिनिधि पूरी सक्रियता से इस अभियान से जुड़ेंगे तो वृक्षारोपण का लक्ष्य सहजता से प्राप्त किया जा सकेगा और यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करेगा।

    मुख्यमंत्री का पौधों के संरक्षण व संवर्धन पर रहा जोर 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण और संवर्धन की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई, सुरक्षा एवं देखरेख की व्यवस्था करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सुरक्षित पौधा ही भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेगा।

    महाभिय़ान को जन जागरूकता व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जोड़ें 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आम, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, हरड़ सहित पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नुक्कड़ नाटक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए, जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वाभाविक जागरूकता और उत्साह का वातावरण बने।

    प्रत्येक कार्यक्रम की कराएं फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी
    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक वृक्षारोपण कार्यक्रम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कर वन विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इससे अभियान की पारदर्शी मॉनिटरिंग के साथ-साथ प्रदेश के उत्कृष्ट आयोजनों को डिजिटल, सोशल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आयोजन स्थल पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का बैनर लगाया जाए, ताकि जनसहभागिता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण कार्यक्रमों को एक प्रेरक जनअभियान के रूप में प्रस्तुत किया जाए, जिससे अधिकाधिक नागरिक स्वयं इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।

    पेड़-पौधों में भी होती हैं संवेदनाएं
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बसु ने सिद्ध किया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन और संवेदनाएं होती हैं। इसलिए वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि प्रकृति और धरती माता के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त वर्षा हो चुकी है और यह वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे में सभी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस अभियान को सफल बनाएं। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक इकाई के साथ समन्वय स्थापित कर समय पर पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    नया कीर्तिमान स्थापित करेगा महाभियान
    मुख्यमंत्री जी ने विश्वास जताया कि 12 जुलाई को आयोजित होने वाला ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृहद वृक्षारोपण महाभियान जनसहभागिता का नया कीर्तिमान स्थापित करेगा और उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक बार फिर मिसाल बनेगा।

  • योगी कैबिनेट की बैठक में डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी

    योगी कैबिनेट की बैठक में डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी

    यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

    60 करोड़ रुपये से लागू होगी बीमा योजना, 85 प्रतिशत प्रीमियम देगी सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान

    महामारी, दैविक आपदा और आकास्मिक दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा, 2.28 लाख से अधिक पशु आएंगे दायरे में

    पशुओं की मौत या अपंगता पर नहीं होगा आर्थिक संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

    लखनऊ, 
     सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।

    पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है।

    इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ
    योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान
    प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा
    कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी।

    धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है। प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी। राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा।

    यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित
    मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।

    शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी'

    नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर को मिलेगी नई आधिकारिक पहचान

    अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा नाम परिवर्तन का निर्णय

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा।

    वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा।

    भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद
    जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

    अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधी भर्ती में मिलेंगे अधिक अवसर

    विभागों के चिह्नित पदों को शामिल किया जाएगा नियमावली-2022 में

    लखनऊ, 6 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 में विभागों के चिह्नित पदों को नियमावली में शामिल किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के सेवायोजन के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

    मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा खेल गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहन, खेल अवसंरचना के विकास तथा खेलों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों की भागीदारी और पदक प्राप्ति में निरंतर वृद्धि हुई है। इसी के दृष्टिगत खिलाड़ियों के सेवायोजन के लिए वर्तमान नियमावली में शामिल पदों एवं उनकी संख्या को और पर्याप्त बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की गई। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार संशोधित नियमावली के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों के चिह्नित पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी। ये नियुक्तियां लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर रहेंगी। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सेवायोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    योगी कैबिनेट की बैठक में डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी

    2 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता के साथ यूपी को ग्रीन व एआई-रेडी डेटा सेंटर हब बनाने की तैयारी

    बुंदेलखंड और पूर्वांचल को मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन, 2 लाख करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य

    50 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत 2 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डेटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना
    डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डेटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

    सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम
    मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डेटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली 2 डेटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं।

    त्रिस्तरीय पंचायती संस्थाओं के लिए वित्तीय प्रस्ताव स्वीकृत

    लखनऊ, 6 जुलाई। कैबिनेट बैठक में पंचायती राज्य संस्थाओं की वित्तीय आवश्यकताओं से संबंधित प्रस्ताव पर भी सहमति दी गई। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत तीनों स्तर की पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी 10 प्रतिशत धनराशि यानी लगभग 1,498 करोड़ रुपये प्रशासनिक, परिचालन एवं रख-रखाव पर खर्च होंगे। इसी राशि में से 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय व बैठक भत्तों पर व्यय किए जाएंगे। 

    गौरतलब है कि तीनों स्तरों की पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का 01.05 प्रतिशत निदेशालय स्तर पर रोककर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग कार्मिकों के मानदेय, तकनीकी/प्रशासनिक/सिविल व अन्य आवश्यकताओं हेतु व्यय किए जाने के निर्देश हैं। इसे देखते लगभग 157.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग के अंतर्गत गठित वित्त प्रकोष्ठ में राज्य, मंडल, जनपद और विकास खंड स्तर पर कार्यरत कार्मिकों के मानदेय एवं तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च होने का अनुमान है। यह राज्य वित्त आयोग की वर्तमान किस्त (14,988.50 करोड़ रुपये) का लगभग 1.05 प्रतिशत है और शासनादेश 12 दिसंबर 2024 के अनुरूप ही है। यह धनराशि निदेशक, पंचायती राज के निर्देश पर नियमानुसार व आवश्यकतानुसार खर्च की जाएगी।

    रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

    चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत खुलेगा नया महाविद्यालय

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और उद्यानिकी को मिलेगा नया विस्तार

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

    उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग संचालित हैं, जहां उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

    रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

    चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत खुलेगा नया महाविद्यालय

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और उद्यानिकी को मिलेगा नया विस्तार

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

    उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग संचालित हैं, जहां उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: गोरखपुर और मुरादाबाद में बनेंगे 100-100 बेड के आधुनिक ईएसआई अस्पताल

    वाराणसी में स्थापित होगा ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, श्रमिकों व उनके परिजनों को मिलेगा बेहतर इलाज
     
    वाराणसी ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में 50 फीसदी एमबीबीएस सीटों पर श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा प्रवेश

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पतालों तथा वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति प्रदान की। योगी सरकार की ओर से इन परियोजनाओं के लिए भारत सरकार को निःशुल्क और रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। 

    बीमांकित श्रमिकों व परिजनों को मिलेगी चिकित्सा सुविधा
    मुरादाबाद में अस्पताल निर्माण के लिए ग्राम हरथला, तहसील एवं जनपद मुरादाबाद स्थित गाटा संख्या-1336/9.984 हेक्टेयर में से 2.025 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि ईएसआईसी, श्रम एवं रोजगार विभाग, भारत सरकार को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। यह भूमि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-1 राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज है। मुरादाबाद में प्रस्तावित 100 शैय्या अस्पताल से लगभग 93,591 बीमांकित श्रमिकों और उनके 3,55,646 परिजनों को चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल का निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा कराया जाएगा, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। इसके संचालन से चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    इसी प्रकार गोरखपुर में गीडा सेक्टर-09 स्थित संस्थागत भूखंड संख्या एएल-7, क्षेत्रफल 21,427 वर्ग मीटर (करीब 5.249 एकड़) भूमि पर 100 बेड का ईएसआईसी अस्पताल बनाया जाएगा। परियोजना को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि की दर 8720 रुपये प्रति वर्ग मीटर के स्थान पर रियायती 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। नियमानुसार अन्य शुल्क अलग से देय होंगे। इस अस्पताल की स्थापना से चिकित्सकीय सुविधाओं के विस्तार के साथ ही प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नए रोजगार अवसर भी सृजित होंगे। 

    श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि वाराणसी में बनने वाले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के लिए पिंडरा तहसील के ग्राम पिंडरा में लगभग 13 एकड़ भूमि शिक्षण संकाय के लिए भारत सरकार को निशुल्क दी जाएगी। प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना में लगभग 800 करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है, जिससे बड़े पैमाने पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा संविदा स्टाफ के लिए रोजगार अवसर सृजित होंगे। कॉलेज में एमबीबीएस की अधिसंख्य सीटें उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों को उपलब्ध होंगी। 50 प्रतिशत एमबीबीएस सीटें बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा 18 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार व 7 प्रतिशत सीटों पर केंद्र सरकार के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा।

    अनिल राजभर ने बताया कि प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज में भविष्य में नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्सेज भी प्रारंभ किए जा सकेंगे। राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश में श्रमिकों व उनके आश्रितों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे वाराणसी एवं आसपास के जनपदों के संगठित क्षेत्र के 1.45 लाख ईएसआई कार्डधारक श्रमिकों तथा उनके 5.50 लाख परिजनों को बेहतर चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा मिलेगी।

    कैबिनेट की मंजूरी: गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का जारी करेंगे म्युनिसिपल बॉण्ड

    शहरी विकास परियोजनाओं के लिए जुटेगा बाजार से वित्त, क्रेडिट रेटिंग सुदृढ़ करने के लिए मिलेगी सहायता

    अमृत 2.0 के अंतर्गत नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।

    वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।

    वित्तमंत्री ने बताया कि म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से बाजार से धन जुटाने पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किए जाने का प्रावधान है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन करेंगे।

    उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है। इसी क्रम में नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी।

    उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में प्रोत्साहन की बौछार 

    यूपी बनेगा देश का स्टार्टअप हब, कैबिनेट से मंजूर नई नीति में एआई और डीप-टेक स्टार्टअप्स पर विशेष फोकस

    सीड फंडिंग 15 लाख और विशेष परिस्थितियों में इसे 50 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकेगा

    100 करोड़ तक पेशेंस कैपिटल का प्रावधान, पूर्वांचल-बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए विशेष अनुदान

    एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

    वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मिलेगी नई रफ्तार, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के असीमित अवसर

    उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के तहत बनेगा मिशन

    हाईटेक रिसर्च व इनोवेशन के लिए योगी सरकार स्थापित करेगी 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के साथ उत्तर प्रदेश प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दे दी गई। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर का मजबूत, समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यह नीति प्रदेश को नवाचार और उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाने के साथ-साथ वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस (भरण-पोषण भत्ता) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।

    स्टार्टअप्स को मिलेंगे कई नए वित्तीय प्रोत्साहन
    नई नीति में स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 2 करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति, 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ और ईएसआई की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्टार्टअप्स की शुरुआती वित्तीय चुनौतियां कम होंगी और उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

    डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा विशेष पैकेज
    सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल सहायता तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    इन्क्यूबेटर्स को मिलेगा अधिक सहयोग
    नई नीति में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेटर्स को भी अधिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए यह राशि बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अलावा परिचालन व्यय अनुदान 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

    20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डीप-टेक यू-हब की स्थापना
    प्रदेश में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे। इनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक, रोबोटिक्स सहित अन्य उभरती तकनीकों पर रहेगा। साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। सरकार राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब की स्थापना करेगी, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेंटरशिप तथा अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगा।

    स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा व्यापक विस्तार
    नई नीति के तहत प्रदेश में बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, ग्रैंड चैलेंज, स्टार्टअप वीक, नवाचार संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा मिल सके। सरकार का उद्देश्य स्टार्टअप संस्कृति को गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाकर अधिक से अधिक युवाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ना है।

    मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश स्टार्टअप में बहुत आगे है। 17 हजार स्टार्टअप यूपी में रजिस्टर्ड हैं। इनको आगे बढ़ाने और इन्क्यूबेटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना की जाएगी। इससे स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा।

    उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी
    लखनऊ। कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित होने वाला यह मिशन आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्टार्टअप और नवाचार गतिविधियों की नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा। मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देना, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इन्क्यूबेटर, नवाचार केंद्र, डीप-टेक इकोसिस्टम, मेंटरशिप और एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों को मजबूत करना है। मिशन के तहत निवेशकों, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी संचालन, निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

    सीएम योगी ने निभाया वादा, होमगार्ड जवानों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा स्वीकृत

    होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को मिलेगा लाभ, साचीज के माध्यम से मिलेगी स्वास्थ्य सुरक्षा

    35.50 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय से लागू होगी होमगार्ड कैशलेस चिकित्सा योजना, राजकीय और संबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज

    पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी, 20 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग के अंतर्गत कार्यरत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह सुविधा स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पुलिस समेत कई विभागों के कर्चमारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी पर भी मंजूरी दी गई है।

    मुख्यमंत्री ने 6 दिसंबर 2025 को होमगार्ड दिवस के अवसर पर होमगार्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ इस घोषणा को अमली जामा पहनाया जाएगा।

    राजकीय और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
    वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि योजना के तहत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध राजकीय अस्पतालों और संबद्ध निजी अस्पतालों में आईपीडी (अंतर्रोगी विभाग) उपचार के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इससे गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।

    सरकार वहन करेगी योजना का खर्च
    कैबिनेट से मंजूर योजना के तहत प्रति होमगार्ड स्वयंसेवक एवं अवैतनिक अधिकारी 3 हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना संचालित की जाएगी। इसके लिए सरकार पर लगभग 35.50 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय व्यय अनुमानित है। इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का संचालन साचीज के माध्यम से किया जाएगा। इस योजना से प्रदेश में लगभग 69 हजार होमगार्ड्स और उनके आश्रित लाभान्वित होंगे।

    पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी
    कैबिनेट बैठक में वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने इन संस्तुतियों को यथावत स्वीकार करने का निर्णय लिया। इसके तहत गृह (पुलिस) विभाग के कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में संशोधन किया जाएगा। साथ ही न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के कर्मचारियों के वर्दी, वर्दी नवीनीकरण और वर्दी धुलाई भत्ते में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। हालांकि अन्य भत्तों और मामलों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है।

    20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार
    सरकार के अनुसार इस निर्णय से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उन्हें बढ़ी हुई दरों पर वर्दी संबंधी भत्ते प्राप्त होंगे। इन संस्तुतियों को लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा।

  • योगी सरकार का ग्रीन मिशन तेज, 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 में रचा जाएगा नया इतिहास

    योगी सरकार का ग्रीन मिशन तेज, 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 में रचा जाएगा नया इतिहास

    पौधरोपण में 12 जुलाई को फिर नया इतिहास रचेगी योगी सरकार 

    पौधरोपण महाभियान-2026 

    जनसहभागिता से रविवार को पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे

    अभियान की सफलता के लिए बैठक कर जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री, अधिकारियों को भी देंगे दिशा निर्देश 

    वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे, ग्राम्य विकास 10 करोड़ पौधरोपण करेगा

    लखनऊ
     योगी सरकार 12 जुलाई (रविवार) को फिर नया इतिहास रचेगी। पौधरोपण महाभियान-2026 के तहत जनसहभागिता से पूरे प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए नोडल (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग) ने तैयारी शुरू कर दी है। अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री सोमवार से जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और अधिकारियों की भी निरंतर बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। वहीं वन मंत्री भी अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक कर इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। 

    जनसहभागिता से फिर होगा अभूतपूर्व आयोजन
    मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्र-प्रदेश सरकार के विभागों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों-कॉलेजों समेत व्यापक जनसहभागिता से उत्सव के रूप में महाभियान चलेगा। व्यापक जनसहभागिता के साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार के विभाग मिलकर इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण करेंगे।

    वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे
    वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधरोपण करेगा। ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़,  कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान 1.50 करोड़, पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी 5.50 लाख पौधे लगेंगे। नोडल विभाग (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन) होगा। इसे लेकर जिला वृक्षारोपण समिति की नियमित बैठकें भी चल रही हैं। 

    कई विशिष्ट वनों की होगी शुरुआत, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगेंगे छायादार पौधे
    योगी सरकार प्रत्येक वर्ष नवीन विशिष्ट वन स्थापित करती है। इस थीम के अंतर्गत पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन तैयार किए जाएंगे। महर्षि चरक औषधि वन की शुरुआत 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) पर की गई है। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी होगा। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाएगा। 

    52.44 करोड़ पौधे कराए जा रहे तैयार 
    वृहद पौधरोपण के लिए वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग निरंतर बैठक व संवाद स्थापित कर रहा है। इसके साथ ही पौधों को लेकर भी विभाग की तैयारी चल रही है। वन विभाग की लगभग दो हजार नर्सरी में इस वर्ष 52.44 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को भी अब वितरित किया जाएगा। 

    गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगेंगे 5.50 लाख पौधे 
    प्रदेश के एक्सप्रेसवे के किनारे भी पौधरोपण किया जाएगा। इस बार विशेष रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। 594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर वन विभाग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.50 लाख पौधरोपण करेगा। दोनों पटरी पर हर एक किमी. पर हरिशंकरी रोपा जाएगा, जबकि बीच-बीच में पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, गूलर, महुआ, आम, अर्जुन, चिलबिल, अमलतास, कचनार, जकरकंडा, गुलमोहर आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनकी सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग व सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सुनिश्चित की जाएगी। 

    मुख्यमंत्री का निर्देश- जनसहभागिता से मनाया जाए उत्सव 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महाभियान-2026 की तैयारी को लेकर निरंतर बैठक करेंगे। वहीं वन मंत्री अन्य विभागों के मंत्रियों, अधिकारियों के साथ ही इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनसहभागिता पर विशेष जोर देते हुए इसे उत्सव के रूप में मनाने का निर्देश दिया है। सीएम योगी ने महाभियान में सभी जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक-महिला मंगल दल, रोटरी-लायंस, इको क्लब, एफपीओ, व्यापार मंडल आदि की भी सहभागिता अनिवार्य रूप से करने के लिए वन विभाग को निर्देश दिया है। कृषि विभाग की देखरेख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीकृत किसान भी महाभियान का हिस्सा बनेंगे।  

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 का आयोजन होगा। वन विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। इस बार भी एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण होगा। सभी विभागों, संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठनों आदि के सहयोग से व्यापक जनसहभागिता के साथ इस महाभियान को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। विभागों, मंडलों व जनपदों के लक्ष्य प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट वनों की शुरुआत होगी। 

    सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष 
    वन विभाग, उत्तर प्रदेश

  • महंत नृत्य गोपाल दास से मिलने मेदांता पहुंचे सीएम योगी, स्वास्थ्य की ली जानकारी

    महंत नृत्य गोपाल दास से मिलने मेदांता पहुंचे सीएम योगी, स्वास्थ्य की ली जानकारी

    सीएम योगी मेदांता अस्पताल पहुंचे, महंत नृत्य गोपाल दास का जाना हालचाल

    मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से ली महंत जी के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी

    महंत नृत्य गोपाल दास के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की मुख्यमंत्री ने की कामना

    राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में चल रहा इलाज

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का हाल-चाल जानने के लिए मेदांता अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास के स्वास्थ्य की जानकारी चिकित्सकों से ली और उनके बेहतर उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने महंत जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की। महंत नृत्य गोपाल दास का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है।

    इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा की। मुख्यमंत्री ने लिखा कि मणिरामदास छावनी के पूज्य महंत एवं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी महाराज से आज लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना तथा चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य के विषय में जानकारी ली। प्रभु राम की कृपा से उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो, यही प्रार्थना है।

  • UP को बड़ी सौगात! कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मिली हरी झंडी, सीएम योगी ने PM मोदी को कहा धन्यवाद

    UP को बड़ी सौगात! कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मिली हरी झंडी, सीएम योगी ने PM मोदी को कहा धन्यवाद

    कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी मिलने पर सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार

    बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध कनेक्टिविटी

    117.7 किमी लंबे हाईवे पर खर्च किए जाएंगे 7,145 से अधिक करोड़ रुपये

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है।  7,145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई शक्ति देने वाले इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे आवागमन सुगम होगा, निवेश को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा।

    डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर
    राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के अंतर्गत बनने वाला यह 117.7 किलोमीटर लंबा चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस हाईवे के बनने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर, जो अभी करीब साढ़े तीन घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएगा।

    बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश को मिलेगा फायदा
    यह हाईवे कानपुर, कबरई, सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के
    अन्य क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों का जुड़ाव मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से और मजबूत होगा। इससे व्यापार, उद्योग और माल परिवहन को भी गति मिलेगी।

    रोजगार के नए अवसर
    इस परियोजना के निर्माण से बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।

  • रामपुर-बरेली को CM योगी की बड़ी सौगात, विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण और शिलान्यास

    रामपुर-बरेली को CM योगी की बड़ी सौगात, विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण और शिलान्यास

    सीएम योगी मंगलवार को रामपुर व बरेली के दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

    रामपुर में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे सीएम योगी

    इंटरमीडिएट-हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को करेंगे सम्मानित

    बरेली में मंडल के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 30 जून को रामपुर व बरेली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुरादाबाद से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां शाहाबाद में वह रामपुर के मिलक एवं बिलासपुर विधानसभा
    क्षेत्रों में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 

    कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी इंटरमीडिएट/हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देंगे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि देंगे। मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान भी करेंगे। 

    रामपुर के बाद मुख्यमंत्री बरेली पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में बरेली मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री बरेली के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।