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  • औद्योगिक विकास को रफ्तार: 8 मेगा इकाइयों के लिए प्रोत्साहन प्रस्ताव मंजूर

    औद्योगिक विकास को रफ्तार: 8 मेगा इकाइयों के लिए प्रोत्साहन प्रस्ताव मंजूर

    8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देने की मंजूरी

    2,901 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मिलेगा बढ़ावा, प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को गति

    लखनऊ,
    योगी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने की संस्तुति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

    इन आठ औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदेश में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन इकाइयों को नीति के तहत नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा।

    मेगा निवेश परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी
    उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की 4 मई 2026 को हुई बैठक में इन औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों पर विचार कर कैबिनेट से अनुमोदन की संस्तुति की गई थी। अब कैबिनेट ने इन इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जाने की मंजूरी दे दी है। मंजूरी पाने वाली औद्योगिक इकाइयों में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गौतमबुद्ध नगर में 605.37 करोड़ रुपये, शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड द्वारा हमीरपुर में 297.30 करोड़ रुपये और साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हाथरस में 225 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसी तरह वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बाराबंकी में 436.12 करोड़ रुपये, जुआरी (Zuari) एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट बायोएनर्जी लिमिटेड द्वारा लखीमपुर खीरी में 294.72 करोड़ रुपये, पसवारा पेपर्स लिमिटेड द्वारा हाथरस में 315 करोड़ रुपये, सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड द्वारा मथुरा में 363.94 करोड़ रुपये और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड द्वारा उन्नाव में 363.52 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

    निवेशकों को मिलेगा नीति आधारित प्रोत्साहन
    इन परियोजनाओं को उनकी पात्रता के अनुसार नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराना है। इन आठ मेगा परियोजनाओं से प्रदेश में विनिर्माण एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है। निवेश के साथ नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

    सरकार के इस निर्णय से गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

  • सीएम योगी की कैबिनेट का बड़ा फैसला, युवाओं के लिए खरीदे जाएंगे 25 लाख टैबलेट

    सीएम योगी की कैबिनेट का बड़ा फैसला, युवाओं के लिए खरीदे जाएंगे 25 लाख टैबलेट

    युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव मंजूर

    युवा शक्ति को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट का बड़ा फैसला

    उच्च शिक्षा से लेकर कौशल विकास तक युवाओं को मिलेगा डिजिटल सहारा, पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे टैबलेट

    आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े युवाओं को भी लाभ, रोजगार के अवसर होंगे मजबूत

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। योगी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाने की मंजूरी देकर प्रदेश के युवाओं को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये टैबलेट पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

    गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना 5 वर्ष के लिए लागू है। योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए आधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस योजना से केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा।

    उच्च शिक्षा से लेकर कौशल विकास तक मिलेगा डिजिटल सपोर्ट
    योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास समेत विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को निशुल्क टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे विद्यार्थी अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम को डिजिटल माध्यम से बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे और तकनीक आधारित अध्ययन की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। टैबलेट मिलने से युवाओं को सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।

    आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े युवाओं को भी मिलेगा लाभ
    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के इस निर्णय से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े पंजीकृत कुशल युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ युवाओं की रोजगारपरक दक्षता भी बढ़ेगी। तकनीकी रूप से सक्षम युवा वर्ग रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • वृद्ध माता-पिता के सम्मान की नई पहल, अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    वृद्ध माता-पिता के सम्मान की नई पहल, अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    वृद्ध माता-पिता के सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    संतान या अन्य आश्रित रिश्तेदार देखभाल न करें तो उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं बुजुर्ग

    बुजुर्गों की मदद के लिए योगी सरकार जल्द जारी करेगी टोलफ्री नम्बर

    लखनऊ
     योगी कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़ने का निर्णय लिया है।

    नए प्रावधानों के तहत मां-बाप अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। यदि किसी भी वरिष्ठ नागरिक की संतान या उनके अन्य आश्रित रिश्तेदार उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं अथवा उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो पीड़ित बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे।

    वित्त मंत्री ने बताया कि बुजुर्गों को इस व्यवस्था का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है। साथ ही, जल्द ही सरकार एक टोल नंबर भी जारी करेगी ताकि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक स्वयं जाकर शिकायत करने में सक्षम न हो, तो उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकेगी और उन्हें इस प्रकार के सभी मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के अंदर की जाएगी, ताकि बुजुर्गों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

    सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ होने वाले अत्याचार एवं दुर्व्यवहार में कमी लाना है। साथ ही, यह व्यवस्था परिवार के सदस्यों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल और उनके सम्मान के प्रति प्रेरित करेगी।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की बस यात्रा निशुल्क

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की बस यात्रा निशुल्क

    60 साल से अधिक उम्र की महिलाएं यूपी रोडवेज की बसों में करेंगी निशुल्क यात्रा, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

    88 हजार से अधिक महिलाओं को लाभ, हर महीने 22.55 करोड़ का अतिरिक्त व्यय आएगा सरकार पर

    परिवहन निगम की ओर से महिलाओं की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे विशेष स्मार्ट कार्ड

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तीकरण और उन्हें बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार ने लोक कल्याण संकल्प-2022 के तहत ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की सामान्य बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है। यह फैसला वरिष्ठ महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ ही उन्हें आवागमन में अधिक स्वतंत्रता और सुविधा देने वाला कदम साबित होगा।

    योगी सरकार के इस फैसले का लाभ बड़ी संख्या में महिला यात्रियों को मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 88,438 महिला यात्रियों द्वारा इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इससे महिलाओं को प्रतिदिन आने-जाने के खर्च में राहत मिलेगी। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र की उन महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन अधिक सुलभ होगा, जिन्हें नियमित रूप से विभिन्न कार्यों के लिए यात्रा करनी पड़ती है।

    निगम की ओर से जारी होंगे विशेष स्मार्ट कार्ड
    इस योजना के तहत निशुल्क यात्रा सुविधा को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को परिवहन निगम की ओर से विशेष स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। स्मार्ट कार्ड के माध्यम से पात्र महिला यात्रियों की पहचान और निशुल्क यात्रा की व्यवस्था को सुगम बनाया जा सकेगा।

    22 करोड़ से ज्यादा हर महीने होंगे खर्च
    इस सुविधा के तहत सरकार पर हर महीने 22.55 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। योगी सरकार ने इस फैसले के जरिए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता के रूप में दर्शाया है। ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को अब परिवहन सेवाओं से भी जोड़ दिया गया है।

  • 16 जिलों में बाढ़ राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक पहुंचाई जा रही जरूरी सहायता

    16 जिलों में बाढ़ राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक पहुंचाई जा रही जरूरी सहायता

    बाढ़ प्रभावितों तक तेजी से पहुंच रही राहत, 16 जिलों में मदद से जुड़ा अभियान जारी

    योगी सरकार ने बाढ़ में फंसे 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, अब तक प्रदेश में नहीं होने पाई कोई जनहानि

    810 मेडिकल टीमें लगातार कर रहीं निगरानी, 536 नाव-मोटरबोट से राहत अभियान को मिली रफ्तार

    75 बाढ़ शरणालयों में 2240 लोगों को मिला आश्रय, 2 लाख से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गए

    पशुओं के लिए 2345 क्विंटल से अधिक भूसा वितरित हुआ, प्रदेश में 1,618 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार की मुस्तैदी से राहत और बचाव अभियान लगातार प्रभावी ढंग से जारी है। सरकार की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों की जान बचाने के साथ उन्हें समय पर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है। अब तक 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और बाढ़ से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों को अब तक 2.04 लाख से अधिक भोजन के पैकेट पहुंचाए गए हैं। इसके साथ ही मेडिकल टीमों की तैनाती, क्लोरीन-ओआरएस का वितरण, पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था कर सरकार ने इंसानों के साथ पशुधन की सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम सुनिश्चित किया है।

    राहत आयुक्त कार्यालय की मंगलवार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 16 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक कुल 25 जिले बाढ़ की चपेट में आए हैं। वर्तमान में करीब 1.44 लाख आबादी प्रभावित है, जबकि अब तक प्रभावित कुल आबादी का आंकड़ा 2.19 लाख से अधिक रहा है।

    प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए अब तक प्रदेश में कुल 1,618 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए आज 127 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं और अब तक कुल 810 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं।

    जनहानि और पशुहानि का आंकड़ा शून्य
    राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक बाढ़ से जनहानि और पशुहानि का आंकड़ा शून्य है। वहीं, बाढ़ से आज चार और अब तक 208 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के सापेक्ष आज तीन और अब तक कुल 130 मामलों में सहायता वितरित की जा चुकी है।

    14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    राहत अभियान में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब तक 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा प्रदेश में कुल 1,281 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 75 वर्तमान में संचालित हैं। इन संचालित शरणालयों में 2,240 लोग रह रहे हैं।

    भोजन की व्यवस्था, लाखों पैकेट पहुंचाए
    बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए राहत एजेंसियों की ओर से लगातार खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है। मंगलवार को 4,819 खाद्य पैकेट और 14,962 लंच पैकेट वितरित किए गए। अब तक कुल 39,321 खाद्य पैकेट और 2,04 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को मुश्किल हालात में भोजन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्लोरीन और ओआरएस का वितरण
    बाढ़ के दौरान जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। मंगलवार को 7,882 क्लोरीन टैबलेट और 2,270 ओआरएस वितरित किए गए। अब तक 1,07,347 क्लोरीन टैबलेट और 45,338 ओआरएस वितरित किए जा चुके हैं। मेडिकल टीमों की तैनाती के साथ यह व्यवस्था प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम करने में सहायक है।

    पशुओं के लिए भी राहत व्यवस्था
    राहत अभियान में प्रभावित परिवारों के साथ
    उनके पशुधन की सुरक्षा को भी शामिल किया गया है। पशुओं के लिए मंगलवार को 1,282.15 क्विंटल भूसा वितरित किया गया, जबकि अब तक कुल 2,345 क्विंटल से अधिक भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है।

    536 नाव-मोटरबोट से राहत अभियान को मिली रफ्तार
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और बचाव कार्य के लिए प्रशासन की ओर से नावों और मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में 536 नाव एवं मोटरबोट राहत कार्य में प्रयुक्त हैं, जबकि अब तक कुल 1,028 नाव एवं मोटरबोट का उपयोग किया जा चुका है। इससे जलभराव वाले क्षेत्रों तक राहत दलों और आवश्यक सामग्री की पहुंच आसान हुई है।

  • यूपी में 2,606 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मंजूर, तीन बड़ी कंपनियों को मिला लेटर ऑफ कम्फर्ट

    यूपी में 2,606 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मंजूर, तीन बड़ी कंपनियों को मिला लेटर ऑफ कम्फर्ट

    यूपी में होगा 2,606 करोड़ रुपये का नया औद्योगिक निवेश

    एग्रिस्टो मासा, कैनपैक इंडिया और सुप्रीम इंडस्ट्रीज को लेटर ऑफ कम्फर्ट की मंजूरी

    फ्रेंच फ्राइज से लेकर एल्युमिनियम बेवरेज कैन और प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन का होगा उत्पादन

    बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में स्थापित होंगी औद्योगिक परियोजनाएं

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने तीन प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,606.04 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

    तीन जिलों में स्थापित होंगी औद्योगिक परियोजनाएं
    कैबिनेट की मंजूरी पाने वाली परियोजनाओं में मेसर्स एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड की बिजनौर में, मेसर्स कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की उन्नाव में और मेसर्स सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कानपुर देहात में परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं में एफडीआई/ एफसीआई तथा अन्य पात्र श्रेणियों के अंतर्गत नीति आधारित प्रोत्साहन के रूप में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा।

    उन्नाव में 1,573 करोड़ रुपये का निवेश
    कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उन्नाव में एल्युमिनियम बेवरेज कैन के विनिर्माण की इकाई स्थापित की जाएगी। परियोजना के लिए 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह इकाई यूपीडा के आईएमएलसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 26 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाएगी। परियोजना की अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

    बिजनौर में बनेगी फ्रेंच फ्राइज की बड़ी यूनिट
    एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड अपनी मौजूदा आलू फ्लेक्स उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करते हुए फ्रेंच फ्राइज के उत्पादन में प्रवेश करेगी। कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता लगभग 7,332 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जबकि प्रस्तावित फ्रेंच फ्राइज इकाई की अधिकतम स्थापित क्षमता 75,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। इस परियोजना में 794.27 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

    कानपुर देहात में सुप्रीम इंडस्ट्रीज का निवेश
    सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये के निवेश से वैल्यू एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पादों का विनिर्माण किया जाएगा। वर्ष 1942 में स्थापित सुप्रीम इंडस्ट्रीज भारत के प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग समूहों में शामिल है। कंपनी देशभर में आधुनिक तकनीक और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं से युक्त 28 संयंत्र संचालित करती है।

    औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    तीनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में एफडीआई, विनिर्माण और वैल्यू एडेड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने तथा प्रदेश को एक प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • 7,968 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण को मंजूरी

    7,968 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण को मंजूरी

    7,968 करोड़ रुपये से बनेगा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे

    बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी तेज कनेक्टिविटी, प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से आवागमन होगा सुगम

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की लागत से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के विकास को मंजूरी प्रदान कर दी है।

    बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा सीधा लाभ
    झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र, डिफेंस कॉरिडोर और जनपद झांसी के आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश एवं देश के अन्य क्षेत्रों से इन स्थानों तक सुरक्षित और द्रुतगति यातायात आवागमन की सुविधा मिलेगी। परियोजना के निर्माण की अनुमानित लागत 7,968.30 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए होने वाला संभावित पूरा व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

    जल्द शुरू होगा निर्माण
    परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यथाशीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। सरकार का लक्ष्य परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करना है, जिससे क्षेत्र को जल्द बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सके। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण बीडा और डिफेंस कॉरिडोर के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। परियोजना के निर्माण और इसके बाद बढ़ने वाली आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

  • सुल्तानपुर में औद्योगिक विकास को रफ्तार, 272 करोड़ के लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

    सुल्तानपुर में औद्योगिक विकास को रफ्तार, 272 करोड़ के लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

    सुल्तानपुर में 272 करोड़ से बनेगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप विकसित होगा औद्योगिक क्लस्टर, कैबिनेट ने अवस्थापना विकास के प्रस्ताव को दी मंजूरी

    औद्योगिक कॉरिडोर योजना के तहत सुल्तानपुर में होगा आईएमएलसी का विकास

    272.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी अवस्थापना, ग्लोबल बिड से चुनी जाएगी निर्माण एजेंसी

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने औद्योगिक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत जनपद सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) की स्थापना के लिए अवस्थापना विकास के निर्माण कार्यों से संबंधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी।

    272.25 करोड़ रुपये की परियोजना को मिली मंजूरी
    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सन्निकट विकसित किए जाने वाले इस औद्योगिक क्लस्टर के लिए 27225.33 लाख रुपये यानी लगभग 272.25 करोड़ रुपये की लागत अनुमोदित की गई है। निर्माण कार्य में होने वाला संभावित व्यय-भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

    ग्लोबल बिड से होगा निर्माण एजेंसी का चयन
    कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना के निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा और परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

    पूर्वांचल में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
    आईएमएलसी के विकास से सुल्तानपुर में उद्योगों की स्थापना, निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप होने के कारण क्लस्टर को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
    परियोजना के क्रियान्वयन और इसके अंतर्गत उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे सुल्तानपुर के लोगों को अपने ही जनपद में रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास से सुल्तानपुर में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।

  • उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी: मुख्यमंत्री

    कृषि विभाग में चयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) व 126 मंडी सचिवों को सीएम योगी आदित्यनाथ ने सौंपे नियुक्ति पत्र 

    उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    जापान, जर्मनी, इजराइल समेत अनेक देश दे रहे यूपी के युवाओं को नौकरीः मुख्यमंत्री

    सीएम ने कहा- 2017 के पहले खेतों से मोटर चोरी कराते थे सरकार के लोग, अब चोरी की तो अंजाम भुगतना पड़ेगा

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी ढंग से बिना भेदभाव सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी में कभी एक लाख नौकरियां कल्पना होती थी, लेकिन हम छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। रिजल्ट की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कृषि विभाग में नवचयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) व 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र सौंपने के उपरांत युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवचयनितों से कहा कि सरकार ने पारदर्शी नियुक्ति दी है तो आप भी इसका लाभ प्रदेश, भावी पीढ़ी और देश को दें। कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन ही ‘नेशन फर्स्ट’ की थ्योरी है।

    सीएम ने थपथपाई आयोग की पीठ
    सीएम ने कहा कि हमारे आयोग व बोर्ड पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया से बिना भेदभाव, आरक्षण नियमों का पालन करते हुए योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट के अनुसार सफलतापूर्वक नियुक्ति पत्र दिला रहे हैं। यह प्रशंसनीय है। योग्यतम अभ्यर्थियों के चयन से उनकी ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। 

    अधियाचन के छह महीने में परिणाम दें
    सीएम ने आयोग व बोर्डों के अधिकारियों से कहा कि आपके कार्यों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यदि हमने स्वतंत्रता दी है तो समय से परिणाम लाइए। अधियाचन जाने के बाद परिणाम आने में छह महीने से अधिक नहीं लगना चाहिए। एक महीने के अंदर विज्ञापन और अगले दो महीने के अंदर परीक्षा कराएं। प्रक्रिया को सहज-सरल बनाएं, जिससे युवा अपनी ऊर्जा का लाभ दे सके। जब हम युवा ऊर्जा को साथ लेकर चलते हैं तो परिणाम आते हैं। 

    मुख्यमंत्री योगी के हाथों 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र 

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य समारोह में मंच पर 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इनमें से प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के 19 व मंडी सचिव पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिला। 

    नाम-     तैनाती स्थल
    कनिष्का वर्मा- अयोध्या 
    रविप्रकाश सिंह- अयोध्या
    अनीश निषाद-आजमगढ़
    लवकुश यादव- लखीमपुर खीरी
    दिशा सिंह- अयोध्या 
    भावना श्रीवास्तव- प्रयागराज
    अमित कुमार मौर्य-गोंडा
    जूही वर्मा- अयोध्या
    अविनाश सिंह- फतेहपुर
    मो. अफरोज- जालौन 
    ज्ञानवी तिवारी-गोंडा
    प्रगति सिंह- मीरजापुर 
    प्रज्ञा रस्तोगी- मथुरा
    पवनेश कुमार-कौशांबी
    शुभम कुमार-प्रयागराज
    उपासना-गोरखपुर 
    मधुमिता सिंह- गोरखपुर
    अक्षिता सिंह-लखनऊ

    ज्योतिका मिश्रा-लखनऊ

    मंडी सचिव पद पर नवचयनित पांच अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र
    शिवशंकर चौधरी
    विनोद कुमार
    महिमा मौर्या
    खुशनुमा
    रवि माहौर

    9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
    सीएम ने 9 साल में पारदर्शी नियुक्तियों को डबल इंजन सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस दौरान सरकार ने 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है। किसी भी नियुक्ति पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा कर सकता। 2017 से पहले तो विज्ञापन निकलते ही चाचा-भतीजे की जोड़ी और महाभारत का खानदान वसूली करने निकल पड़ता था। युवा भटकता था, लेकिन परिणाम नहीं आता था। अंततः माननीय न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। युवाओं का समय और उम्र खराब होती थी। नौकरी न पाने वाले युवाओं को लोग किसी काम का नहीं मानते थे, लेकिन गलती युवा की नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे राजनेताओं, आयोगों व बोर्डों में बैठे बेईमान लोगों की होती थी। हमारी सरकार ने कहा था कि नकल माफिया की कमर तोड़ेंगे और उनके आकाओं को भी जमीन दिखाएंगे। हम लोगों ने माफिया की संपत्ति जब्त कराकर उनसे वसूली कराई। 

    नौजवानों की दुश्मन थी पिछली सरकार
    सीएम ने 2017 से पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा की दुर्दशा भी बताई और कहा कि तीन महीने परीक्षा और तीन महीने परिणाम आने में लगते थे। फिर अगले तीन महीने त्योहारों के बीच प्रवेश प्रक्रिया चलती थी। बच्चों को पढ़ाई के लिए तीन महीने भी नहीं मिल पाते थे। नौजवानों की दुश्मन सपा सरकार नकल करवाती थी और नौजवानों को किसी लायक नहीं छोड़ती थी। 

    एक महीने में परीक्षा व परिणाम नहीं देने वाले कुर्सी छोड़ें 
    मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में सीएम बनने के बाद मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों से कहा कि परीक्षा व परिणाम एक महीने में दो। जवाब नकारात्मक मिला तो मैंने कहा कि तुम कुर्सी छोड़ो, मैं एक महीने के अंदर यह कराऊंगा। आज यूपी बोर्ड के 56 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा 14 दिन में होती है और अगले 14 दिन में परिणाम आता है। पहले फरवरी से शुरू हुई परीक्षा जून में लू-तपती गर्मी तक चलती थी। अब नकलविहीन परीक्षा और समय से परिणाम आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों को भी सुधार लाने का निर्देश दिया गया है। शिक्षण संस्थान बच्चों की स्किलिंग, करियर, रोजगार के लिए भी खुद को तैयार करें।

    युवाओं की उपेक्षा कर विकास नहीं कर सकती सरकार
    सीएम ने कहा कि इन 9.30 लाख युवाओं ने डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में यूपी को लाभान्वित किया है। यूपी की अर्थव्यवस्था व प्रतिव्यक्ति आय को तीन गुना करने में योगदान दिया है। पिछली सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती थीं। बंदरबांट कर पैसे के बल पर नौकरी देती थीं, लेकिन आज युवाओं के चेहरे की खुशी बता रही है कि बिना किसी लेनदेन, सिफारिश के उनके सपनों को उड़ान मिल रही है। युवा यूपी को बीमारू राज्य से उबारकर टॉप-3 राज्य बनाने में सफल हुए हैं। कोई सरकार युवाओं की उपेक्षा करके न विकास कर सकती और न ही परिणाम ला सकती है। 

    यूपी के युवाओं को दुनिया दे रही नौकरी
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यहां कोई नहीं आता था, लेकिन दुनिया आज यूपी के नौजवानों को मांग रही है। उन्होंने विगत दिनों यूपी में आए जापान के प्रतिनिधिमंडल का भी जिक्र किया। कहा कि 240 सदस्यों का इतना बड़ा दल पहली बार भारत आया। इसमें बड़े नेता, अधिकारी, इडस्ट्री-बिजनेस लीडर्स शामिल थे। वे यूपी के युवाओं को जापान में नौकरी देना चाहते हैं। जर्मनी, इजराइल भी यूपी के नौजवानों को नौकरी देते हैं। इजराइल में यूपी के 5000 नौजवान गए, वहां डेढ़ लाख रुपये प्राप्त करते हैं। घर पर भी पैसा भेज रहे हैं। उनके रहने-खाने की भी व्यवस्था है। इजराइल जब युद्ध लड़ रहा था, तब भी यूपी के युवा वहां काम कर रहे थे। 

    2017 के पहले खेतों से मोटर चोरी कराते थे सरकार के लोग
    सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसान खेत में जाने से डरता था। उसकी मोटर चोरी हो जाती थी, लेकिन अब कोई मोटर चोरी नहीं करता, क्योंकि पता है कि ऐसा करने पर अंजाम भुगतना पड़ेगा। 2017 के पहले सरकार के लोग ही मोटर चोरी कराते थे। सीएम ने 2017 के पहले बिजली क्षेत्र की दुर्दशा का भी जिक्र करते हुए बताया कि यूपी के किसानों को सर्वाधिक (10 घंटे) बिजली मिलती है। 16 लाख से अधिक निजी ट्यूबवेल का 3000 करोड़ रुपये का बिजली बिल भी सरकार ने माफ किया। अब इसका भुगतान प्रदेश सरकार करती है। पहली बार यूपी में किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिला है।

    जिस चीनी मिल का स्क्रैप 10 करोड़ में बिकता, उसे 3 करोड़ में बेच दिया 
    सीएम ने 2017 से पहले गन्ना किसानों की तबाही बयान की और बताया कि 2009 से चीनी मिलों पर बकाया था। 2007 से 2017 के बीच सपा-बसपा सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। गोरखपुर मंडल की एक चीनी मिल मात्र तीन करोड़ रुपये में बेची गई थी, जबकि उसका स्क्रैप ही 10 करोड़ में बिकता। उस जमीन की कीमत आज 1000 करोड़ रुपये है। बतौर सांसद मैंने आंदोलन किया और माफिया की चलने न दी। तत्कालीन सरकारें चीनी मिलों को बंद करती थीं। आज 122 मिलें चल रही हैं।

    30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं कृषि विकास दर
    सीएम ने कहा कि यूपी जितना सामर्थ्य किसी के पास नहीं है। यूपी ने कृषि विकास दर 8 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया। अब इसे और आगे बढ़ाते हुए 30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं। इसके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने होंगे। चौधरी चरण सिंह सीड पार्क काम काम लखनऊ में प्रारंभ हो रहा है। अब 3.25 लाख करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेजे जा चुके हैं। सीएम ने किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी जिक्र किया। 

    किसानों के लिए 2014-15 में आया पैसा हमने 2017 में बांटा 
    सीएम ने कहा कि 2014-15 में हुदहुद साइक्लोन आया था, जिससे असमय अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अत्यधिक बारिश से वर्ष भर का फसल चक्र बिगड़ा था। उस समय केंद्र सरकार ने आपदा राहत से पैसा उपलब्ध कराया था। यह पैसा 2017 तक नहीं बंट पाया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद हमने किसानों को वह पैसा बांटा। अब मानव-वन्यजीव संघर्ष, सर्पदंश, आकाशीय बिजली की चपेट में आने पर किसान, बटाईदार व परिवार वालों को 24 घंटे के भीतर 5 लाख की सहायता देते हैं। अतिवृष्टि-अनावृष्टि खेत का नुकसान हुआ है तो फसल बीमा का पैसा बाद में मिलेगा, लेकिन आपदा राहत का पैसा किसान को तत्काल दिलाते हैं।

    हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले किसान सरकार के एजेंडे में ही नहीं था, लेकिन हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया। 2018 में बाणसागर परियोजना पूरी की। इससे ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। अर्जुन सहायक परियोजना के जरिए महोबा से बांदा तक सिंचाई सुविधा को बढ़ाया। 1972 में बनी सरयू राष्ट्रीय नहर परियोजना 2021 में पूरी हुई। इससे बहराइच से गोरखपुर तक 9-10 जनपदों को 14 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिल रही है। 

    अच्छे कार्यों से किसानों के मन में जगह बनाइए
    सीएम ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से कहा कि मंडियों को चमकाइए। वह साफ-सुथरी हों, कचरे का निस्तारण व रंगरोगन हो। किसानों को बुनियादी सुविधाएं, सम्मान मिले, मंडी समिति की सड़कों का समय से निर्माण हो। शेड अच्छे व प्रभावी हों। किसान की उपज की खरीद व एमएसपी देने की उचित व्यवस्था हो। मंडी को ई-नाम से जोड़ने की कार्रवाई को बढ़ाइए। किसानों को वैल्यू एडिशन, ड्रिप एरिगेशन, स्प्रिंकलर प्रणाली, आधुनिक तकनीकों से जोड़ें ताकि उनकी आमदनी बढ़े। आपके अच्छे कार्यों से किसानों के मन में श्रद्धाभाव पैदा होगा। 

    यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं
    सीएम ने कहा कि यूपी 140 करोड़ देशवासियों का भी पेट भरने की क्षमता रखता है। यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं है। यूपी में एक महीने की कुल खपत 4 लाख टन चीनी है और हमारे पास 28 लाख टन चीनी (7 महीने की चीनी) मौजूद है। 15 अक्टूबर से चीनी मिलें प्रारंभ होगी तो 90 लाख टन चीनी का और उत्पादन हो जाएगा। 

    इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

  • बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    बस दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनी योगी सरकार की ‘यात्री राहत योजना’

    योगी सरकार ने 17.33 करोड़ रुपये की दी आर्थिक सहायता, बस हादसों के पीड़ितों व आश्रितों को मिली मदद

    यात्रियों के साथ राहगीरों को भी राहत, गैर-यात्रियों को भी योजना के साथ जोड़ा गया

    बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में यात्रियों और अन्य प्रभावित लोगों को आर्थिक सहारा देने के लिए संचालित यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी मदद का माध्यम बनी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच मृत्यु और घायल होने के कुल 342 प्रकरणों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। योगी सरकार ने यह मदद पीड़ितों और परिवारों को उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के हक की दिशा में गंभीरता से काम किया है।

    योजना के तहत 2017 से पहले उपलब्ध दो वर्षों यानी 2015-16 और 2016-17 में मृत्यु के 8 मामलों में 40 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इसके बाद 2017-18 से 2025-26 तक 9 वर्षों में मृत्यु के 322 मामलों में लगभग 17.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं घायल यात्रियों के 20 प्रकरणों में 24.37 लाख रुपये की सहायता दी गई।

    2017 के बाद बढ़ा सहायता का दायरा और भुगतान
    2017-18 से 2025-26 के बीच मृतकों के परिजनों को दी गई सहायता में लगातार बड़े स्तर पर भुगतान दर्ज है। इस अवधि में सबसे अधिक 2019-20 में 78 मृत्यु प्रकरणों में लगभग 3.68 करोड़ रुपये, 2021-22 में 48 प्रकरणों में लगभग 2.37 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं 2017-18 में 42 प्रकरणों में करीब 2.10 करोड़ रुपये, 2023-24 में 32 प्रकरणों में 1.85 करोड़ रुपये और 2025-26 में 27 प्रकरणों में 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।

    परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि सड़क दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों के परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार व परिवहन निगम की योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमारा प्रयास शुरू से यह भी रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए। इसके लिए ड्राइवरों, कर्मचारियों से लेकर बसों के बेड़ों तक सभी की नियमित निगरानी की जा रही है।

    वयस्क यात्री की मृत्यु पर अब 7.50 लाख रुपये
    योजना के नए प्रावधानों में मृत्यु की स्थिति में राहत राशि बढ़ाई गई है। वयस्क यात्री की मृत्यु पर 7.50 लाख रुपये, आधा टिकट लेने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपये और परिवहन निगम के नियमों के तहत निःशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर लगभग 1.87 लाख रुपये की राहत राशि निर्धारित है। इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

    गंभीर रूप से घायल यात्रियों को भी राहत
    दुर्घटना में घायल होने वाले यात्रियों के लिए भी योजना में राहत का प्रावधान है। सामान्य रूप से घायल होने पर उपचार के लिए 10 हजार रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 25 हजार रुपये तक की अग्रिम राहत संबंधित अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं प्रारंभिक राहत के बाद भी घायल यात्री के उपचार पर इससे अधिक खर्च आता है, तो चिकित्सकीय उपचार के प्रमाणित बिलों और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जाती है।

    योजना के मूल प्रावधानों में गंभीरता के आधार पर घायल यात्री के लिए अधिकतम राहत की सीमा भी निर्धारित की गई है। सामान्य चोट के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये, गंभीर चोट के लिए एक लाख रुपये और अति गंभीर चोट/शरीर के 50 प्रतिशत से अधिक जलने जैसी स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

    बस में सवार नहीं होने वाले पीड़ितों को भी मदद
    यात्री राहत योजना को और व्यापक बनाते के लिए अप्रैल 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसके तहत ऐसे राहगीर/शहरी व्यक्ति, जो निगम की बस में यात्रा नहीं कर रहे हों, लेकिन निगम की बस या अनुबंधित बस से दुर्घटना में घायल या मृत हो जाते हैं, उन्हें भी योजना के दायरे में लाया गया है।

    ऐसे व्यक्ति की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक, गंभीर रूप से घायल होने पर 2.50 लाख रुपये तक भुगतान का प्रावधान किया गया है। हालांकि, पुलिस रिपोर्ट और परिवहन निगम के जांच अधिकारी की रिपोर्ट में यदि दुर्घटना के लिए संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो योजना के तहत भुगतान नहीं किया जाता।