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  • CM योगी और मोहन यादव सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम में हुए शामिल

    CM योगी और मोहन यादव सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम में हुए शामिल

    सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व एमपी के सीएम मोहन यादव

    सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का काशी की धरा पर मंचन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की उत्कृष्ट अवधारणा का उदाहरण – सीएम योगी आदित्यनाथ

    यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी का सम्मिलन है – सीएम योगी

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने आयोजन को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और ज्ञान को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया

    वाराणसी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के महानायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य का आज काशी की धरा पर मंचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस आयोजन ने मां गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ की पावन धरा को महाकाल की धरा उज्जैन के साथ एक सांस्कृतिक एकता के बंधन से जोड़ने का काम किया है। इसके लिए मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विभाग के पदाधिकारियों और इस आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों का उत्तर प्रदेश में काशी की धरा पर स्वागत करता हूं।

    मुख्यमंत्री ने काशी और उज्जैन नगरी के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय परंपरा में भाई-भाई के संबंध के आदर्श रूप में भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ियां प्रसिद्ध हैं, वैसे ही नाथ संप्रदाय में दीक्षित संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी प्रसिद्ध है। सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली जहां उज्जैन थी, तो वहीं संत भर्तृहरि की साधनास्थली काशी के गंगा तट पार स्थित है। काशी के ठीक उस पार चुनार का किला उनके ही तप और आशीर्वाद से संभव हुआ था। यूपी सरकार चुनार के किले के सौंदर्यीकरण और संरक्षण का कार्य कर रही है।

    सीएम योगी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी का सम्मिलन है, जो भारत की कालगणना की परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा। वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से देश के पारंपरिक ज्ञान और कौशल का विकास किया जा रहा है, उसे आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। भारतीय परंपरा का योग हो या आयुष, आज पूरा विश्व उसे स्वीकार कर रहा है। कुंभ की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, लेकिन वर्ष 2019 में जब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इसका भव्य आयोजन किया गया तो पूरा विश्व इसमें सहभागी बना। पूरी दुनिया से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज की धरा पर महाकुंभ में आए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद से देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष काशी और अयोध्या आ रहे हैं। अयोध्या नगरी के पुनरुत्थान में भी महाराज विक्रमादित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2000 वर्ष पहले अयोध्या नगरी को खोजने का कार्य सम्राट विक्रमादित्य ने ही किया था। प्रभु श्रीराम के पुत्र लव के बाद सबसे पहले श्रीराम मंदिर भी सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सम्राट विक्रमादित्य के प्रयासों को ही आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि नाटक, कला और सिनेमा समाज को दिशा देने का माध्यम होते हैं और कलाकारों द्वारा निभाए गए पात्र युवाओं के लिए प्रेरणा बनते हैं। मैं सिनेमा निर्माताओं को भी सुझाव देता हूं कि सकारात्मक चरित्रों को ही नायक के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। एक कालखंड था, जब सिनेमा नकारात्मक चरित्रों को नायक के रूप में स्थापित करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि देश की एक पीढ़ी इससे प्रभावित होकर बर्बाद हो गई।

    मुख्यमंत्री ने इस नाट्य रूपांतरण को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता, न्याय व्यवस्था और सुशासन जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रयास आज की नई पीढ़ी को अपने प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और आदर्शों से जोड़ने के वृहद अभियान का एक हिस्सा है। इस सराहनीय प्रयास के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृत विभाग और सभी कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग, हुई शिष्टाचार भेंट

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग, हुई शिष्टाचार भेंट

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने की शिष्टाचार भेंट

    निवेश, स्किल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने पर सहमति

    मुख्यमंत्री की सिंगापुर यात्रा का असर, वैश्विक निवेशकों में यूपी को लेकर बढ़ा विश्वास: साइमन वोंग

    सिंगापुर का बड़ा औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल जल्द करेगा उत्तर प्रदेश का दौरा

    ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र के साथ यूपी बना निवेश का प्रमुख केंद्र: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से सिंगापुर गणराज्य के भारत में उच्चायुक्त साइमन वोंग ने गुरुवार को शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दोनों पक्षों के बीच उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के मध्य निवेश, कौशल विकास, आधारभूत संरचना तथा सांस्कृतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई।

    उच्चायुक्त वोंग ने गत फरवरी माह में मुख्यमंत्री जी की सिंगापुर यात्रा को अत्यंत सफल बताते हुए कहा कि इस दौरे ने न केवल सिंगापुर, बल्कि आस-पास के देशों के औद्योगिक जगत में भी उत्तर प्रदेश के प्रति सकारात्मक और भरोसेमंद संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक समुदाय उत्तर प्रदेश को एक नए अवसर और संभावनाओं के केंद्र के रूप में देख रहा है, जो भारत-सिंगापुर संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    उच्चायुक्त ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में प्रदेश में कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों की प्रशंसा की। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश में कार्यरत सिंगापुर की कंपनियों ने यहां के निवेश वातावरण को अनुकूल बताया है और अपने निवेश के विस्तार की दिशा में सक्रिय रूप से योजनाएं बना रही हैं।

    उन्होंने यह भी अवगत कराया कि आगामी महीनों में सिंगापुर के औद्योगिक जगत का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश का दौरा करेगा, जो राज्य में निवेश के विविध अवसरों का अवलोकन करते हुए बड़े निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा। सिंगापुर द्वारा प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल विकास (स्किलिंग) के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

    सांस्कृतिक सहयोग के संदर्भ में कुशीनगर, सारनाथ जैसे बौद्ध पर्यटन स्थलों की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए दोनों पक्षों ने पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं को आकार देने पर सहमति व्यक्त की। इससे प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ झांसी, वाराणसी सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे उत्तर प्रदेश के संतुलित एवं समावेशी विकास को और गति मिलेगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र के साथ देश की सबसे तीव्र गति से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी एवं उद्योग-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेहतर कानून-व्यवस्था, आधुनिक आधारभूत संरचना, सुदृढ़ कनेक्टिविटी तथा कुशल मानव संसाधन उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए सर्वोत्तम गंतव्य बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क तथा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब निवेशकों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। 

    मुख्यमंत्री जी ने सिंगापुर को एक विश्वस्तरीय आर्थिक एवं तकनीकी साझेदार बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश, शहरी विकास, लॉजिस्टिक्स, स्किल डेवलपमेंट तथा पर्यटन के क्षेत्रों में सिंगापुर के साथ दीर्घकालिक और परिणामोन्मुखी सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी प्रतिनिधिमंडल का दौरा दोनों पक्षों के बीच निवेश एवं साझेदारी के नए आयाम स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री जी ने विश्वास व्यक्त किया कि सिंगापुर की तकनीकी दक्षता और उत्तर प्रदेश की विशाल संभावनाओं का समन्वय दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक लाभ का मार्ग प्रशस्त करेगा और यह साझेदारी सतत विकास, नवाचार एवं रोजगार सृजन के नए मानक स्थापित करेगी।

  • बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर-खीरी में पुनर्वासित करने का सीएम योगी का आदेश

    बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर-खीरी में पुनर्वासित करने का सीएम योगी का आदेश

    सीएम योगी के निर्देश पर बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर-खीरी में बसाया गया

    जीविकोपार्जन के लिए तीन तहसीलों के चार गांवों में दी गई जमीन

    प्रधानमंत्री आवास, किसान सम्मान निधि समेत कई योजनाओं का मिल रहा लाभ

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर खीरी जिले की अलग-अलग तहसीलों के गांवों में बसाया गया है। इनमें धौरहरा तहसील के सुजानपुर गांव में 97 परिवार, मोहम्मदी तहसील के ग्राम मोहनपुर ग्रन्ट में 41 और मियांपुर गांव में सर्वाधिक 156 परिवारों को बसाया गया है। इसके अलावा गोला तहसील के गांव ग्रन्ट नंबर-3 में 37 परिवारों को बसाया गया है। इन परिवारों का पुनर्वास वर्षों पहले किया गया था और अब ये यहीं स्थायी रूप से रह रहे हैं।

    खेती के लिए दी गई जमीन

    इन विस्थापित परिवारों को बसाने के साथ ही उन्हें खेती के लिए जमीन भी आवंटित की गई। गोला तहसील के ग्रन्ट नंबर-3 में बसे 37 परिवारों को प्रति परिवार औसतन 3 एकड़ कृषि भूमि दी गई है। धौरहरा तहसील के सुजानपुर गांव में 60 परिवारों को प्रति परिवार औसतन 1.620 हेक्टेयर और 37 परिवारों को प्रति परिवार करीब 0.607 हेक्टेयर जमीन मिली है। मोहम्मदी तहसील के मोहनपुर ग्रन्ट में 15 परिवारों को प्रति परिवार 3 एकड़, 9 परिवारों को प्रति परिवार 7 एकड़ और 17 परिवारों को प्रति परिवार 5 एकड़ कृषि भूमि का पट्टा दिया गया है। वहीं मियांपुर गांव में बसे 156 परिवारों को प्रति परिवार करीब 4.75 एकड़ जमीन दी गई है, जिससे वे खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

    सरकारी योजनाओं का लाभ, कई सुविधाएं पहुंचीं गांव तक

    प्रशासन का कहना है कि इन परिवारों को केवल जमीन ही नहीं दी गई, बल्कि सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी पहुंचाया जा रहा है। पात्रता के आधार पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, विधवा और वृद्धावस्था पेंशन, सुकन्या समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा राशन वितरण, टीकाकरण, मनरेगा, मिड-डे मील, समग्र शिक्षा योजना, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

    जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी, दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि बांग्लादेश से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश पहुंचे 331 हिंदू परिवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जनपद लखीमपुर की 3 तहसीलों में बसाया गया है। इन परिवारों को न सिर्फ कृषि योग्य जमीन आवंटित की गई, बल्कि राज्य व केंद्र सरकार की सभी जन-कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया गया है।

  • पूर्व विधायक शीतल पांडेय के पुत्र को मुख्यमंत्री योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    पूर्व विधायक शीतल पांडेय के पुत्र को मुख्यमंत्री योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    पूर्व विधायक शीतल पांडेय के पुत्र को मुख्यमंत्री योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    मनु पांडेय के चित्र पर पुष्प चढ़ाये सीएम ने, परिजनों को बंधाया ढांढस 

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  सहजनवा के पूर्व विधायक शीतल पांडेय के रामगढ़ताल/तारामंडल क्षेत्र स्थित आवास पर जाकर उनके पुत्र मानवेंद्र पांडेय ‘मनु’ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मानवेंद्र का मंगलवार को आकस्मिक निधन हो गया था। 

    बुधवार शाम मुख्यमंत्री लखनऊ से गोरखपुर आए। एयरपोर्ट से वह सीधे पूर्व विधायक शीतल पांडेय के आवास पर पहुंचे। उन्होंने पूर्व विधायक के पुत्र मानवेंद्र पांडेय के चित्र पर पुष्पांजलि और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक शीतल पांडेय और अन्य परिजनों से आत्मीयता से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाया।
    इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, भाजपा नेता अश्विनी त्रिपाठी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पुष्पदंत जैन आदि भी मौजूद रहे। 

    गुरुवार सुबह पिपराइच के लुहसी जाएंगे सीएम योगी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह पिपराइच क्षेत्र के लुहसी गांव जाएंगे। वह यहां के निवासी और गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त मारकंडेय यादव के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। मारकंडेय यादव का बुधवार को निधन हो गया।

  • योगी सरकार की औद्योगिक क्रांति: 9 साल में 17 हजार से ज्यादा कारखाने पंजीकरण से जुड़े

    योगी सरकार की औद्योगिक क्रांति: 9 साल में 17 हजार से ज्यादा कारखाने पंजीकरण से जुड़े

    योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति, 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत

    पिछले 70 वर्षों में प्रदेश में पंजीकृत हुए थे केवल 14 हजार कारखाने

    16 लाख से अधिक लोगों को रोजगार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से सामाजिक-आर्थिक बदलाव के संकेत

    लखनऊ
     योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शी नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का ही असर है कि प्रदेश में अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के स्वतंत्र होने के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक लगभग 70 वर्षों में प्रदेश में कुल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हो पाए थे। वर्तमान समय में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है।

    ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से प्रदेश में बना निवेश अनुकूल माहौल
    प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से सुधार, निवेश अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं विकसित कीं। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17,841 कारखाने अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं। सिर्फ सितंबर 2023 से अब तक ही 10,194 कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत इन कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोग नौकरी कर रहे हैं। इनमें 15,29,907 पुरुष व 1,23,272 महिलाएं कार्यरत हैं।

    सबसे अधिक 10,895 कारखाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत
    प्रमुख सचिव ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10,895, मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार ने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए हर क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए। इन कारखानों से प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन भी तेजी से हुआ है। खास बात यह है कि कारखानों में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है।

    कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा योगदान
    प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी तरह 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह संख्या दर्शाती है कि योगी सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई)के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी समान रूप से प्रोत्साहन दिया है। इससे प्रदेश की औद्योगिक संरचना मजबूत हुई है। बता दें कि औद्योगिक विकास में कानून-व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

    इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को नई गति दी। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न केवल रोजगार दिया, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।

  • सीएम योगी को अपशब्द कहने पर मौलाना गिरफ्तार, यूपी पुलिस ने बिहार से की कार्रवाई

    सीएम योगी को अपशब्द कहने पर मौलाना गिरफ्तार, यूपी पुलिस ने बिहार से की कार्रवाई

    पूर्णिया
     गौमाता और योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मौलाना को पूर्णिया जिले से हिरासत में लिया और अब उसे यूपी ले जाया जा रहा है. गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा के बीच उसे ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कराकर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया. इस कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। 

    मौलाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मजहबी जलसे के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी मां को लेकर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे. इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिला. कई संगठनों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. परिवर्तन चौक और गांधी पार्क के आसपास मौलाना के खिलाफ पोस्टर लगाए गए थे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन पोस्टर हटवा दिए और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। 

    120 से ज्यादा हुईं थीं FIR
    बताया जा रहा है कि मौलाना ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में लागू गौकशी कानूनों की आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने अपने समर्थकों से सोशल मीडिया और सड़कों पर विरोध करने की अपील भी की थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस, नगर निगम, अलीगंज, आलमबाग, गोमतीनगर समेत पूरे शहर में पोस्टर लगे थे. मौलाना सलीम पर उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं। 

    बिहार से यूपी ला रही पुलिस
    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है. मौलाना को उत्तर प्रदेश लाकर आगे की पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। 

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मुख्य सेविकाओं को देंगे ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस और स्मार्टफोन

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मुख्य सेविकाओं को देंगे ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस और स्मार्टफोन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मुख्य सेविकाओं को देंगे कई सौगात   

    सीएम लोकभवन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कार्यक्रम में होंगे शामिल 

     आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मुख्य सेविकाओं को देंगे ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस और स्मार्टफोन 

     नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को देंगे नियुक्ति पत्र, नए आंगनवाड़ी केंद्रों और परियोजना कार्यालयों का करेंगे शिलान्यास व लोकार्पण 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लोकभवन सभागार में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की महिला सशक्तीकरण, बाल विकास और रोजगार सृजन को नई गति देने वाली कई बड़ी पहल का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ मिशन रोजगार के तहत नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जाएंगे। 

    सीएम योगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वितरित करेंगे ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस
    बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की डायरेक्टर सरनीत कौर ब्रोका ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 30 मार्च को लोकभवन के सभागार में 10 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस वितरित किए जाएंगे। इनमें स्टैडियोमीटर, इन्फैंटोमीटर और मदर एंड चाइल्ड वेटिंग स्केल शामिल हैं। प्रदेश में भर में कुल 1,33,282 स्टैडियोमीटर, 10,553 इन्फैंटोमीटर और 58,237 वेटिंग स्केल वितरित किए जाएंगे, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की निगरानी और अधिक सटीक व प्रभावी हो सकेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा 10 नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किया जाएगा जबकि 46 जिलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा 739 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा 42 जिलों में 15,203 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। 

    स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम का किया जाएगा शुभारंभ
    डायरेक्टर ने बताया कि कार्यक्रम में 10 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन भी वितरित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रदेश में कुल 69,794 कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन वितरित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ हो जाएगा। इससे डिजिटल मॉनिटरिंग, डेटा संग्रहण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री आंगनवाड़ी केंद्र भवनों के नए डिजाइन का भी विमोचन करेंगे, जिसकी लागत लगभग 30.32 लाख रुपये प्रति भवन है। इतना ही नहीं, 13 जिलों में 633 आंगनवाड़ी केंद्रों, 28 जिलों में 71 बाल विकास परियोजना कार्यालयों और 27 जिलों में 69 अन्य केंद्रों के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं पर कुल 1,37,04.29 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही 70 जिलों में 2,468 आंगनवाड़ी केंद्रों और 29 जिलों में 69 बाल विकास परियोजना कार्यालयों का लोकार्पण किया जाएगा, जिनकी कुल लागत 3,13,26.31 लाख रुपये है। इन परियोजनाओं से प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

  • उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण के लिए नई पहल

    उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण के लिए नई पहल

    गन्ना उत्पादन, पौध तैयार करने और वैल्यू एडिशन में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी महिलाएं 

    सीएम योगी के निर्देश पर गन्ना विभाग और यूपीएसआरएलएम के बीच हुआ एमओयू

    उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण के लिए नई पहल 

    लखनऊ
    योगी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और कृषि आधारित गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के बीच हाल ही में एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अब प्रदेश की ‘आधी आबादी’ गन्ना उत्पादन, पौध तैयार करने और वैल्यू एडिशन जैसी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएगी।

    गन्ने से जुड़े अन्य उत्पाद बनाने का भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
    गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बताया कि एमओयू का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ना आधारित आजीविका से जोड़ना है। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर मिलेगा। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 47.5 लाख गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करते हैं। इसमें करीब 2.95 लाख महिला किसान शामिल हैं। इसके अलावा 57 हजार से अधिक महिला किसान 3,000 से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गन्ने की उन्नत किस्मों की पौध तैयार करने का कार्य कर रही हैं। ये समूह गन्ने की नई प्रजातियों के तेजी से प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल के तहत महिलाओं को केवल पौध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें गन्ने से जुड़े अन्य कार्यों जैसे प्रसंस्करण, जैविक उत्पाद निर्माण, गुड़ और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्माण में भी प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

    तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन पर दिया जा रहा जोर
    गन्ना आयुक्त का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि प्रदेश के समग्र विकास में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। इसी सोच के तहत योगी सरकार लगातार महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दे रही है। चाहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान हो या स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने की योजनाएं, हर स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें गन्ना क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकेंगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्पादकता वृद्धि में भी योगदान देंगी। यह पहल गन्ना उत्पादन प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव ला सकती है। महिला समूहों द्वारा तैयार की जा रही उन्नत किस्मों की पौध से गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन मिलेगा। साथ ही, वैल्यू एडिशन के जरिए उत्पादों का बाजार मूल्य भी बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि आएगी।

  • 2017 में क्लीयरेंस से 2026 के उद्घाटन तक त्वरित फैसले, कुशल नेतृत्व और समयबद्ध क्रियान्वयन की मिसाल बना एनआईए

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    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट:पेपर से प्रोजेक्ट तक: 8 वर्षों में साकार हुआ सपना

    सीएम योगी के विजन व नियमित समीक्षा से निर्धारित समय में तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए)

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    एविएशन इंडस्ट्री के फलक पर चमकने को तैयार यूपी का 'जेवर', एयरपोर्ट से आगे का विकास मॉडल भी तैयार

    जेवर
     आठ वर्षों के सतत श्रम, समन्वय, सुपरविजन व समीक्षा से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) हकीकत बना है। मार्च 2026 में एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने और अब पीएम मोदी द्वारा फेज-1 के लोकार्पण के बाद यह एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। यह सब कुछ संभव हुआ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प की वजह से, जिनके विजन, कार्यकुशलता व नियमित समीक्षा के चलते यह मेगा प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ा।

    2017: एक सपने की शुरुआत
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई, जब जुलाई में साइट क्लीयरेंस और अक्टूबर में गृह मंत्रालय से एनओसी प्राप्त हुई। यही वह समय था, जब जेवर को एक वैश्विक एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की नींव रखी गई। इसके बाद वर्ष 2018 में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनआईएएल) का गठन हुआ और परियोजना को संस्थागत रूप मिला। 2020 में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को कंसेशनायर के रूप में चुना गया और कंसेशन एग्रीमेंट साइन किया गया।

    2021: फाइनेंशियल क्लोजर से निर्माण का रास्ता साफ
    अगस्त 2021 में फाइनेंशियल क्लोजर और मास्टर प्लान की मंजूरी के बाद अक्टूबर 2021 में ‘अपॉइंटेड डेट (तिथिवार कार्ययोजना)’ घोषित हुई, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट का मार्ग प्रशस्त हो गया। मार्च 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और टाटा प्रोजेक्ट्स को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोकरमेंट एंड कन्सट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त किया गया। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच सभी अहम टास्क समयबद्ध तरीके से पूरे किए गए, जो परियोजना प्रबंधन की दक्षता को दर्शाता है। अक्टूबर 2025 में कैलिब्रेशन फ्लाइट सफल रही और मार्च 2026 में एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया। इसी के साथ एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार हो गया।

    हर कदम पर सक्रिय रहे सीएम योगी
    इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता भूमि अधिग्रहण से लेकर इसके लोकार्पण तक हर कदम पर दिखाई दी। चाहे निर्माण से जुड़े मामले हों, विभिन्न प्रकार की एनओसी या विभागों के बीच समन्नय, सीएम योगी नियमित निर्देशन व समीक्षा से इसे अमली जामा पहनाते रहे। उन्होंने इस परियोजना को केवल एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति बनाई। इसका नतीजा यह निकला कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक सेक्टर विकास की नई जमीन तैयार कर रहे हैं। यह एयरपोर्ट न सिर्फ रोजगार के लाखों अवसर सृजित करेगा, बल्कि निवेश, औद्योगिकीकरण, निर्यात, लॉजिस्टिक्स व पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का यह परिणाम उत्तर प्रदेश को वैश्विक कनेक्टिविटी और आर्थिक शक्ति के नए युग में प्रवेश कराता है। आठ वर्षों का यह सफर अब नई उड़ान की शुरुआत बन चुका है।

  • कौशाम्बी हादसा: मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की

    कौशाम्बी हादसा: मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की

    कौशाम्बी हादसा: मुख्यमंत्री ने जताया शोक,  मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा की

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    सीएम ने घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया

    स्थानीय प्रशासन को दिया निर्देश: घायलों का कराया जाय समुचित इलाज

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कौशाम्बी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की कि परिजनों को दुःख सहने की क्षमता प्रदान करें। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन से कौशांबी में हुए हादसे के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक मदद देने की  घोषणा की। 

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन के आलाधिकारियों को राहत-बचाव तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि घायलों का समुचित तरीके से इलाज कराया जाय। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।