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  • क्या ईरान संकट ट्रंप की कुर्सी पर पड़ेगा भारी? अपनों की बगावत ने बढ़ाई मुश्किलें

    क्या ईरान संकट ट्रंप की कुर्सी पर पड़ेगा भारी? अपनों की बगावत ने बढ़ाई मुश्किलें

    वाशिंगटन 

    अमेरिका की सीनेट में  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा. ईरान युद्ध को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान उसके ही चार सांसदों ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दे दिया. यह प्रस्ताव वॉर पॉवर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा है. सीनेट में यह प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हुआ, जिसमें तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए. रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने ट्रंप के खिलाफ वोट किया, वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। 

    ये सिर्फ एक राजनीतिक एजेंडा नहीं था, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बुरा संकेत भी है. अब तक सिर्फ बयान आ रहे थे लेकिन इसे ट्रंप के खिलाफ उनकी ही पार्टी की ओर से एक दुर्लभ सार्वजनिक नाराजगी माना जा रहा है. अब तक रिपब्लिकन पार्टी और उसके समर्थक ईरान युद्ध में ट्रंप के साथ खड़े रहे हैं, लेकिन 81 दिन से जारी इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में पार्टी के भीतर भी नाराजगी नजर आने लगी है। 

    ट्रंप को हटाने के लिए 25वें संशोधन की भी मांग
    मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच कई बार ऐसे सवाल भी उठे हैं कि क्यों उन्हें संविधान का सहारा लेकर हटा न दिया जाए? डेमोक्रेट्स ने 25वें संशोधन की मांग की और डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी कई बार ये कह चुके हैं कि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को तुरंत 25वें संशोधन की धारा 4 लागू करनी चाहिए.अमेरिका के कई सांसद और नेता कह रहे हैं कि ट्रंप का ईरान युद्ध को लेकर बार-बार शब्द बदलना, रणनीति बदलना और यह गाली भरा पोस्ट लिखना, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाता है. ईरान युद्ध में हजारों मौतें हो चुकी हैं और ट्रंप लगातार पूर्ण हवाई नियंत्रण का दावा करते हैं, लेकिन ईरानी हमले खत्म नहीं हो रहे. ऐसे में लोग चिंतित हैं कि राष्ट्रपति का यह व्यवहार देश और दुनिया के लिए खतरा बन सकता है। 

    कैसे जा सकती है ट्रंप की कुर्सी?
    इस सवाल का सीधा जवाब है – 25वां संशोधन और उसकी धारा 4. यह अमेरिकी संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो 1967 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद पास किया गया. इसका मकसद होता है – अगर राष्ट्रपति मर जाए, इस्तीफा दे दे, हटा दिया जाए या अक्षम हो जाए तो उपराष्ट्रपति को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया तय करना. इसकी धारा 4 की मांग की जा रही है। 

    धारा 4: यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत (15 में से 8) को अधिकार है कि वे लिखित रूप से घोषणा करें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हैं. इसके बाद उपराष्ट्रपति तुरंत एक्टिंग राष्ट्रपति बन जाता है. अगर राष्ट्रपति कहे कि वह ठीक है तो 4 दिन में कैबिनेट और उपराष्ट्रपति को कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से साबित करना पड़ता है। 

  • ट्रंप के बाद पुतिन की चीन यात्रा फाइनल, दुनिया के दो शक्तिशाली देशों की अहम बैठक संभव

    ट्रंप के बाद पुतिन की चीन यात्रा फाइनल, दुनिया के दो शक्तिशाली देशों की अहम बैठक संभव

    बीजिंग

    दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच कूटनीतिक गठजोड़ और मजबूत होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा खत्म होने के तुरंत बाद, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। क्रेमलिन और चीनी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 19 और 20 मई को चीन की यात्रा पर रहेंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के तुरंत बाद रूस ने ऐलान किया है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही चीन जाएंगे. क्रेमलिन ने कहा कि यात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19-20 मई को चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। क्रेमलिन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन अपनी इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

    इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मॉस्को और बीजिंग के बीच ‘व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना’ है। दोनों शीर्ष नेता कई ‘प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों’ पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। बातचीत के अंत में दोनों देशों के बीच एक साझा घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, पुतिन चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा होगी।

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने गुरुवार को कहा कि पुतिन की चीन यात्रा अब लगभग तय है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी पूरी हो चुकी है. हालांकि उन्होंने यात्रा की सटीक तारीख नहीं बताई, लेकिन संकेत दिए कि यह दौरा जल्द होने वाला है.

    रूस और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं. पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं. दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई थी.

    अब पुतिन की प्रस्तावित चीन यात्रा पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन संबंध, ऊर्जा व्यापार और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर बड़ी रणनीति बन सकती है.

    दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के हालिया चीन दौरे के दौरान भी शी जिनपिंग ने पुतिन का जिक्र किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के खत्म होते ही रूस और चीन की बढ़ती नजदीकियां फिर चर्चा में आ गई हैं. रूस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बहुत जल्द चीन का दौरा करेंगे और इस यात्रा की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

  • चीन दौरे के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- होर्मुज को लेकर जिनपिंग ने दे दी सहमति

    चीन दौरे के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- होर्मुज को लेकर जिनपिंग ने दे दी सहमति

    बीजिंग 

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे से लौटने के बाद बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मानते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी है। 

    तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ ईरान, ताइवान और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लंबी चर्चा की. ट्रंप के मुताबिक, "शी ने बहुत मजबूती से कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं होना चाहिए. वह यह भी चाहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे। 

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल कर रहा है और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान को पिछले ढाई हफ्तों में हर दिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, "अगर ईरान स्ट्रेट बंद करता है तो उसका नुकसान उसी को होगा. वहां पूरी तरह अमेरिका का नियंत्रण है। 

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस क्षेत्र में लगातार खतरा बना हुआ है। 

    ताइवान पर 
    ट्रंप ने ताइवान मुद्दे पर भी बातचीत का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ताइवान की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश के खिलाफ हैं और इसे बड़ा टकराव मानते हैं. ट्रंप ने कहा, "शी नहीं चाहते कि ताइवान को लेकर कोई लड़ाई हो. उनका मानना है कि इससे बहुत बड़ा संघर्ष पैदा हो सकता है। "

    हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन शी जिनपिंग ने 1982 के अमेरिका-चीन समझौते और ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा उठाया. ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच ताइवान पर "बहुत विस्तार से" चर्चा हुई। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका किसी नए युद्ध में नहीं उलझना चाहता. ट्रंप ने कहा, "आखिरी चीज जिसकी हमें जरूरत है, वह 9500 मील दूर एक और युद्ध है। 

    ट्रंप ने चीन यात्रा को "बेहद शानदार" बताया और शी जिनपिंग को "अविश्वसनीय नेता" कहा. उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर अच्छी समझ बनी है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। 

  • अमेरिका-चीन रिश्तों पर जिनपिंग का बड़ा बयान, ट्रंप से बोले- टकराव नहीं सहयोग जरूरी

    अमेरिका-चीन रिश्तों पर जिनपिंग का बड़ा बयान, ट्रंप से बोले- टकराव नहीं सहयोग जरूरी

    बीजिंग 
    चीन की राजधानी बीजिंग में अमेरिका और चीन के बीच हुई हाई-स्टेक्स समिट में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने टकराव नहीं, बल्कि साझेदारी का संदेश देने की कोशिश की. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात ऐसे वक्त में हुई, जब दोनों देशों के रिश्ते पिछले कई वर्षों से ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी बैन, ताइवान और वैश्विक प्रभाव की लड़ाई को लेकर तनावपूर्ण रहे है। 

    बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने बेहद संतुलित और कूटनीतिक अंदाज में दुनिया के सामने बड़ा संदेश रखा. उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक नए मोड़ पर खड़ी है और ऐसे समय में चीन और अमेरिका की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ जाती है। 

    जिनपिंग ने ट्रंप की तरफ देखते हुए कहा, "क्या हम मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और दुनिया को ज्यादा स्थिरता दे सकते हैं? क्या हम अपने लोगों के हित और मानवता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय रिश्तों का बेहतर भविष्य बना सकते हैं?"

    अमेरिका-चीन को दुश्मन नहीं, साझेदार होना चाहिए!
    राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि ये सिर्फ दो देशों के सवाल नहीं हैं, बल्कि इतिहास, दुनिया और पूरी मानवता से जुड़े सवाल हैं, जिनका जवाब दोनों नेताओं को मिलकर देना होगा. चीनी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि चीन और अमेरिका के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं. जिनपिंग ने कहा, "एक देश की सफलता दूसरे के लिए अवसर है. चीन और अमेरिका के रिश्तों में स्थिरता पूरी दुनिया के लिए अच्छी बात है। 

    शी जिनपिंग ने आगे कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनना चाहिए. उनके मुताबिक, टकराव दोनों देशों के लिए नुकसानदायक होगा, जबकि सहयोग से दोनों को फायदा मिलेगा. जिनपिंग ने यह भी कहा कि नई सदी में बड़ी शक्तियों को साथ रहने और साथ आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना होगा। 

    शी जिनपिंग ने 2026 को चीन-अमेरिका रिश्तों के लिए "ऐतिहासिक और निर्णायक साल" बनाने की अपील भी की. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश पुराने तनाव पीछे छोड़कर नए भविष्य की तरफ बढ़ेंगे। 

    राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग की सराहना की
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बैठक के दौरान जिनपिंग की खुलकर तारीफ की. उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को शानदार बताते हुए कहा कि जिनपिंग एक महान नेता हैं. ट्रंप ने कहा, "आपका दोस्त होना मेरे लिए सम्मान की बात है. चीन और अमेरिका के रिश्ते पहले से बेहतर होने जा रहे हैं." ट्रंप ने यह भी कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच कोई समस्या आई, उन्होंने और जिनपिंग ने सीधे बातचीत कर उसे जल्दी सुलझाया. उन्होंने चीन की उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता की भी सराहना की। 

    हालांकि, दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों में नरमी दिखी, लेकिन बंद कमरे में हुई बातचीत में व्यापार, ईरान, चिप टेक्नोलॉजी, स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। 

  • ड्रग कनेक्शन पर घिरे नेता: ट्रंप के डर से मेक्सिको में गवर्नर और मेयर ने छोड़ी कुर्सी

    ड्रग कनेक्शन पर घिरे नेता: ट्रंप के डर से मेक्सिको में गवर्नर और मेयर ने छोड़ी कुर्सी

    मेक्सिको

    अमेरिका द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लौडिया शिनबाम की पार्टी के दो सदस्यों ने अपने पद से अस्थायी रूप से हटने की घोषणा की है। उत्तर पश्चिमी सिनालोआ राज्य से शिनबाम की पार्टी के इन सदस्यों ने बताया कि अमेरिका ने उन पर और आठ अन्य नेताओं एवं सुरक्षा अधिकारियों पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप लगाए हैं।

    अमेरिका के द्वारा ड्रग्स तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मैक्सिको के सिनालोआ प्रांत के गवर्नर और मेयर ने अपना पद छोड़ दिया है.

    शुक्रवार मध्यरात्रि को जारी एक वीडियो संदेश में अभियोग में नामित गवर्नर रुबेन रोचा मोया ने उन आरोपों का खंडन किया. उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह ‘सिनालोआ कार्टल’ को संरक्षण देने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने लाखों डॉलर की रिश्वत के बदले में उसे अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी में मदद करने से इनकार किया.

    पूर्व राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर के लंबे समय से सहयोगी रहे 76 वर्षीय रोचा ने कहा, ‘मेरा ईमान साफ है. मैं अपने लोगों और अपने परिवार से आंख मिलाकर कह सकता हूं कि मैंने कभी आपको धोखा नहीं दिया और न ही कभी दूंगा.’

    वहीं, सिनालोआ राज्य की राजधानी कुलियाकान के मेयर जुआन डी डियोस गामेज मेंडिविल का नाम भी अभियोग में शामिल है. उन्होंने भी आरोपों से इनकार किया और पद से हटने का ऐलान किया. शनिवार को एक विशेष मतदान में राज्य की स्थानीय कांग्रेस ने रोचा की सहयोगी येराल्डिन बोनिला वाल्वरडे को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया.

    मैक्सिको में ड्रग्स और उसकी तस्करी के कारण हिंसा भी बहुत होती है. लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से उस पर इस धंधे पर लगाम लगाने का भी दबाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को इन्हीं आरोपों के तहत उनके देश में उनके बिस्तर से गिरफ्तार कर लिया.

    गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम को अपनी प्रगतिशील मोरेना पार्टी के हितों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कार्टेल के खिलाफ लड़ाई तेज करने के दबाव के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है. शीनबाम ने कहा कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति का बचाव नहीं करेंगी जो अपराध करने का दोषी पाया गया हो. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन 10 लोगों के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो उन पर मैक्सिको में ही केस चलाया जाएगा.

    मैक्सिको में कई तरह के ड्रग कार्टेल काम करते हैं. पिछले दिनों, फरवरी 2026 में एल मेंचो नाम के ड्रग लॉर्ड और जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल का संंचालक की मौत काफी चर्चा में था. सिनालोआ कार्टेल मैक्सिको का सबसे शक्तिशाली ड्रग नेटवर्क है.

  • अमेरिका का बड़ा कदम: जर्मनी से 5000 सैनिक वापस, ट्रंप ने मर्केल पर तंज क्यों कसा?

    अमेरिका का बड़ा कदम: जर्मनी से 5000 सैनिक वापस, ट्रंप ने मर्केल पर तंज क्यों कसा?

     वाशिंगटन

    अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' ने जर्मनी से अपने 5000 सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है. यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच ईरान युद्ध को लेकर तनातनी बढ़ गई है. मर्ज ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने को लेकर अमेरिका की आलोचना की थी और उसकी रणनीति पर सवाल उठाए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के सामने अमेरिका को जिल्लत का सामना करना पड़ा है। 

    इसके जवाब में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व को बेहद खराब बताया. अमेरिकी ने कहा कि मर्ज के नेतृत्व में जर्मनी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें इमिग्रेशन और ऊर्जा संकट शामिल हैं. बता दें कि अमेरिका की जर्मनी में बड़ी सैन्य मौजूदगी है, जहां उसके करीब 36,000 सैनिक तैनात हैं. इनमें से कई सैनिक रामस्टीन एयर बेस जैसे प्रमुख ठिकानों पर तैनात हैं। 

    अगले 6 से 12 महीने में वापस आएंगे सैनिक

    अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि जर्मनी से 5000 सैनिकों को वापस बुलाने का  फैसला रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के निर्देश पर लिया गया है और इसे अगले 6 से 12 महीनों में पूरा किया जाएगा. ट्रंप ईरान युद्ध में सहयोग नहीं देने के लिए नाटो के सदस्य देशों की आलोचना करते रहे हैं और इस सैन्य गठबंधन के औचित्य पर सवाल उठाया है. उन्होंने इटली और स्पेन से भी अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का संकेत दिया है। 

    जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इससे पहले कहा था कि अमेरिका के पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है और ईरान शांति वार्ता में बेहद चालाकी दिखा रहा है. इस पर ट्रंप ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि मर्ज ईरान के परमाणु हथियार रखने के पक्ष में हैं और उन्हें स्थिति की समझ नहीं है. बता दें कि जर्मनी में अमेरिकी सैन्य तैनाती यूरोप में सबसे बड़ी है, जबकि इटली और ब्रिटेन में भी उसके हजारों सैनिक मौजूद हैं। 

    पूर्वी यूरोप के देशों में रूस को लेकर चिंता बढ़ी
    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2020 में भी जर्मनी से 12,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे बाद में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रद्द कर दिया था. अब फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व वाली सरकार ने जर्मनी के डिफेंस बजट में भारी बढ़ोतरी की है और 2027 तक इसे देश की जीडीपी के 3% से अधिक तक ले जाने की योजना बनाई है. वहीं, अमेरिका पहले ही रोमानिया में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाने का फैसला कर चुका है, जिससे पूर्वी यूरोप के देशों में रूस को लेकर चिंता बढ़ गई है। 

  • इसे युद्ध नहीं कहूंगा: ईरान पर ट्रंप का बयान, फिर अपनी उपलब्धियों की तारीफ की

    इसे युद्ध नहीं कहूंगा: ईरान पर ट्रंप का बयान, फिर अपनी उपलब्धियों की तारीफ की

    वाशिंगटन

    दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मामले को युद्ध मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के अभियान के बाद ईरान की नौसेना और थल सेना कमजोर हो गई है और अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ड्रोन फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ईरान की परमाणु क्षमता को भी धराशायी कर दिया गया है।

    बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा था कि टैरिफ का दबाव बनाकर उन्होंने युद्ध रुकवाया था। युद्ध रुकवाने के दावे करके वह कई बार नोबेल पुरस्कार की भी इच्छा जता चुके हैं। इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला तो वह काफी भड़के हुए थे।

    युद्ध को लेकर क्या कह रहे डोनाल्ड ट्रंप
    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें मानने को तैयार नहीं होता तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के श्री ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।

    अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।

  • Donald Trump इवेंट में ताबड़तोड़ गोलियां, सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बची जान; आरोपी हिरासत में

    Donald Trump इवेंट में ताबड़तोड़ गोलियां, सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बची जान; आरोपी हिरासत में

    वाशिंगटन.

    वाशिंगटन हिल्टन होटल में शनिवार की रात 8:45 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) के करीब कॉरेस्पोंडेंट डिनर कार्यक्रम के दौरान जोरदार फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए थे। इस घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे सीक्रेट सर्विस के एजेंट ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया।

    एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। इस घटना पर राष्ट्रपति ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस घटना के करीब एक घंटे बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि एक शूटर को पकड़ लिया गया है। ट्रंप ने आगे कहा, "डीसी में आज की शाम काफी गहमागहमी भरी रही। सीक्रेट सर्विस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है।" रॉयटर्स के लिए काम करने वाले एक फ्रीलांस फोटोग्राफर ने आंखोदेखा हाल बताते हुए कहा कि होटल के भीतर फायरिंग की चार से छह राउंड आवाज सुनाई दी।

    हालांकि ये आवाजें मुख्य डाइनिंग हॉल के बिल्कुल पास नहीं थीं, लेकिन इनकी तीव्रता ने सभी को चौंका दिया। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि होटल परिसर के भीतर एक सशस्त्र हमलावर देखा गया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। जैसे ही आवाजें सुनाई दीं, मेहमानों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। "गेट डाउन, गेट डाउन!" हॉल में मौजूद लगभग 2,600 मेहमान अपनी मेजों के नीचे छिप गए। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और अमेरिका की पर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित निकाल लिया गया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा मंच से हटाए जाने से कुछ ही देर पहले मेलानिया ने भीड़ में किसी बात पर प्रतिक्रिया दी और उनके चेहरे पर चिंता के भाव दिखाई दिए।
    The empty stage is seen after President Donald Trump and other top leaders were evacuated from an annual dinner of White House correspondents on Saturday night(, April 25, 2026, in Washington/ AP Photo/Zeke Miller)
    प्रेस पूल ने सीक्रेट सर्विस के हवाले से बताया कि ट्रंप के डिनर के दौरान हुई कथित गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया। यह सुरक्षा घटना उस कमरे के बाहर हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य अधिकारी डिनर कर रहे थे। सीक्रेट सर्विस और अन्य अधिकारी बैंक्वेट हॉल पहुंचे। सैकड़ों मेहमान मेजों के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे।

    क्या होता है कॉरेस्पोंडेंट डिनर?
    वाशिंगटन डीसी में हर साल कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर का आयोजन किया जाता है, जिसकी मेज़बानी वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन करता है। इस समारोह में पत्रकार, राजनेता और हॉलीवुड की मशहूर हस्तियां एक साथ जुटती हैं। यह समारोह प्रेस की आजादी का जश्न मनाता है, पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां जुटाता है और इसमें हल्के-फुल्के अंदाज में राजनेताओं की रोस्टिंग (व्यंग्या) किया जाता है। अक्सर इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति भी शामिल होते हैं।

  • ‘डील नहीं तो बमबारी’, ट्रंप ने ईरान को दिया आखिरी अल्टीमेटम

    ‘डील नहीं तो बमबारी’, ट्रंप ने ईरान को दिया आखिरी अल्टीमेटम

    वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने दोहरे तेवर में नजर आए हैं. एक तरफ वे ईरान के साथ युद्ध खत्म होने पर व्हाइट हाउस में "पार्टी" करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुली चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो फिर से बमबारी शुरू हो सकती है। 

    एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं भी हो सकते. उन्होंने कहा, "शायद मैं इसे एक्सटेंड न करूं. अगर ऐसा हुआ तो ब्लॉकेड जारी रहेगा और हमें फिर से बम गिराने पड़ सकते हैं। 

    राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि 21 अप्रैल की डेडलाइन बेहद अहम है. अगर इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो सीजफायर खत्म हो सकता है. इसका मतलब साफ है कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की तरफ बढ़ सकता है. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डील हो जाएगी. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह होने वाला है" लेकिन ईरान का कहना है कि उनकी बातों पर भरोसे कम है। 

    होर्मुज के आसपास ब्लॉकेड रहेगा जारी
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि चाहे सीजफायर बढ़े या नहीं, अमेरिका का ईरान पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रहेगा. यह ब्लॉकेड ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इससे उसके तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ता है. यानी भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन दबाव की राजनीति भी साथ-साथ चलती रहेगी। 

    अमेरिका-ईरान में बातचीत की कोशिशें जारी
    इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में एक नई बातचीत के दौर के लिए मिल सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में हैं. ईरानी सूत्रों की तरफ से खबरें चल रही हैं कि सोमवार को ये बातचीत इस्लामाबाद में होगी और रविवार शाम तक दोनों देशों के नेता पाकिस्तान पहुंचेंगे. पिछले दौर की बातचीत बिना नतीजे के खत्म हुई थी, ऐसे में इस बार का राउंड और भी अहम माना जा रहा है। 

    ट्रंप का "डबल गेम"
    ट्रंप की रणनीति को समझना मुश्किल नहीं है. एक तरफ वह बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखते हैं.  फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं. 21 अप्रैल की डेडलाइन करीब है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। 

  • ट्रंप का कड़ा संदेश: ईरान केवल बातचीत के लिए, होर्मुज रहेगा खुला शांति वार्ता से पहले

    ट्रंप का कड़ा संदेश: ईरान केवल बातचीत के लिए, होर्मुज रहेगा खुला शांति वार्ता से पहले

    वाशिंगटन

    अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आज शांति वार्ता होने वाली है. दूसरी तरफ, वार्ता से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. ट्रंप ने दावा किया है कि 'ईरान के पास कोई ऑप्शन नहीं है और वो सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा है.' उन्होंने होर्मुज खोलने को लेकर भी बड़ा बयान दिया। 

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कंट्रोल करके दुनिया को जबरन वसूली का शिकार बना रहा है। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ईरानियों को शायद ये अहसास नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया को डराने के अलावा उनके पास कोई कार्ड नहीं है. वो आज अगर जिंदा हैं, तो सिर्फ बातचीत करने के लिए। 

    शांति वार्ता नाकाम होने पर फिर शुरू हो सकती है जंग
    बता दें कि एक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हैं. ट्रंप ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि अगर ये शांति वार्ता नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिकी युद्धपोतों को बेहतरीन गोला-बारूद से लैस कर दिया गया है और वो हमलों के लिए तैयार हैं। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सहमति हो या न हो, वाशिंगटन जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल देगा. उन्होंने कहा, 'ये आसान नहीं होगा. मैं बस इतना कहूंगा कि हम इसे जल्द ही खोल देंगे। 

    ट्रंप ने इस दौरान ईरान को लेकर कहा, 'हम ऐसे लोगों से निपट रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता कि वे सच बोलते हैं या नहीं. हमारे सामने वो कहते हैं कि वो परमाणु हथियार खत्म कर रहे हैं और फिर प्रेस में जाकर कहते हैं कि वो यूरेनियम संवर्धन करना चाहते हैं। 

    ट्रंप के मुताबिक, ईरान के लोग लड़ने से बेहतर फेक न्यूज मीडिया और पब्लिक रिलेशंस संभालने में माहिर हैं। 
    बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. इस्लामाबाद में आज ईरानी-अमेरिकी अधिकारी आमने-सामने होंगे और अपना-अपना पक्ष रखेंगे।