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  • ट्रंप की ईरान को लास्ट वॉर्निंग, ‘हमला किया तो ऐसा मारेंगे कि दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा’

    ट्रंप की ईरान को लास्ट वॉर्निंग, ‘हमला किया तो ऐसा मारेंगे कि दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा’

    तेहरान.

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी दे दी है। रविवार को उन्होंने कहा कि अगर ईरान अटैक करता है, तो अमेरिका और ज्यादा ताकत से हमला करेगा। यह चेतावनी ईरान की वॉर्निंग के बाद आई है, जिसमें अमेरिका पर सबसे बड़े हमले की चेतावनी दी थी। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो चुकी है।

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका और भी बड़ा जवाबी हमला करेगा। उन्होंने लिखा, 'ईरान ने अभी बयान दिया है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करने जा रहे हैं, इतना बड़ा हमला जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं किया। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई होगी!'

    सुप्रीम लीडर की मौत
    अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 86 वर्ष की उम्र में मौत हो गई। खामेनेई ने 1989 से इस्लामी गणराज्य का नेतृत्व किया। खामेनेई ने ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में दशकों तक धार्मिक सत्ता स्थापित करने और देश को एक क्षेत्रीय महाशक्ति बनाने का प्रयास किया। उनका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजरायल और अमेरिका के साथ टकराव रहा तथा उन पर देश में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को कुचलने के भी आरोप लगे। ईरान में 88 सीट वाली विशेषज्ञ सभा खामेनेई के उत्तराधिकारी का चुनाव करेगी। इस विशेषज्ञ सभा में अधिकतर कट्टरपंथी धर्मगुरु शामिल हैं। हालांकि अब तक कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी तय नहीं हुआ है।

    UN में गूंजा मुद्दा
    संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और 'क्षेत्र और पूरी दुनिया को संकट से निकालने' के लिए तत्काल फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। गुतारेस ने आपातकालीन बैठक में कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। गुतारेस ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के लिए ईरान के जवाबी हमलों की भी निंदा की।अमेरिका ने किया हमले के फैसले का बचाव

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई वैध थी। उन्होंने सुरक्षा परिषद को बताया, 'ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता। यह सिद्धांत राजनीति का विषय नहीं है। यह वैश्विक सुरक्षा का विषय है और इसी उद्देश्य से अमेरिका कानूनी कार्रवाई कर रहा है।' इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने इन हवाई हमलों का बचाव करते हुए कहा कि अस्तित्व पर आए संकट को रोकने के लिए ये हमले आवश्यक थे।

    ईरान ने बताया अपराध
    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने परिषद को बताया कि हवाई हमलों में सैकड़ों ईरानी नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं और इसे उन्होंने युद्ध अपराध एवं मानवता के खिलाफ अपराध बताया। रूस के राजदूत ने अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों की निंदा की, जबकि चीन के राजदूत ने अपनी आलोचना में अधिक संयम बरता।

  • ‘अगर मैं न होता तो PAK के 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते’, ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किया नया खुलासा

    ‘अगर मैं न होता तो PAK के 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते’, ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किया नया खुलासा

    वाशिंगटन
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध समेत आठ युद्धों को रोकने के अपने दावे को दोहराया. हालांकि, उन्होंने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रोककर 3.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी. ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते.

    ट्रंप का यह बयान भारत के खिलाफ मई 2025 में चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के बैकफुट पर होने का स्पष्ट संकेत देता है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, 'अपने पहले 10 महीनों में, कंबोडिया और थाईलैंड समेत मैंने आठ युद्ध रुकवाए. ये मजाक नहीं है. पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि अगर मैं हस्तक्षेप न करता तो 3.5 करोड़ लोगों की मौत होती.' ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 'स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन' के दौरान अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए ये दावे किए.

    ट्रंन ने इन आठ युद्धों को रोकने का किया दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने जिन युद्धों को सुलझाने का दावा किया है, उनमें- इजरायल और हमास, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, भारत और पाकिस्तान, सर्बिया और कोसोवो, रवांडा और कांगो, आर्मेनिया और अजरबैजान, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच के संघर्ष शामिल हैं. भारत ने पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में भूमिका निभाने के ट्रंप के दावों को बार-बार खारिज किया है. संघर्ष को रोकने में ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चुटकी लेते हुए इससे इनकार किया था.

    भारत ने ट्रंप के दावे को हर बार किया खारिज
    उनसे पूछा गया था कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के दौरान यूएस कहां था? मतलब अमेरिका की क्या भूमिका थी. इस पर कूटनीतिक भाषा में जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा था, 'यूएस, यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका में था.' उनके इस जवाब का मतलब था कि अमेरिका का भारत पाकिस्तान सीजफायर में कोई भूमिका नहीं थी. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी सीजफायर में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को खारिज किया था. उन्होंने कहा था, 'पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) ने हॉटलाइन पर अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया और संघर्ष खत्म का अनुरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ.'

  • राष्ट्रपति ट्रंप ने किया दावा- इनकम टैक्स को टैरिफ ने किया रिप्लेस, विदेशी दे रहे हैं भुगतान

    राष्ट्रपति ट्रंप ने किया दावा- इनकम टैक्स को टैरिफ ने किया रिप्लेस, विदेशी दे रहे हैं भुगतान

     वाशिंगटन
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन दे रहे हैं. ट्रंप ने अपने कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले कभी इतनी तेजी से नहीं बढ़ी और दावा किया कि देश को पहले डेड कहा जाता था, अब हम सबसे आगे हैं. ट्रंप ने यह भी दोहराया कि उन्होंने 'ड्रिल, बेबी, ड्रिल' का अपना वादा निभाया है. यह नारा अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य रिपब्लिकन नेताओं द्वारा अमेरिका में तेल और गैस ड्रिलिंग को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बताकर खारिज करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले को जायज ठहराने के लिए तरह-तरह के पैंतरे आजमा रहे हैं. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने स्वीपिंग टैरिफ खत्म किया तो ट्रंप ने 15% ग्लोबल टैरिफ का एलान कर दिया. अब यूएस कांग्रेस में अपने संबोधन में उन्होंने टैरिफ को इनकम टैक्स का सब्सिट्यूट बता दिया. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मेरा मानना ​​है कि विदेशी देशों द्वारा चुकाए जा रहे ये टैरिफ, हमारे देश में इनकम टैक्स की आधुनिक प्रणाली को काफी हद तक प्रतिस्थापित कर देंगे, जिससे मेरे देशवासियों पर से एक बड़ा वित्तीय बोझ कम हो जाएगा.'

    स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी पुरुष हॉकी के ओलंपिक हीरो कॉनर हेलेब्यूक को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' से सम्मानित करने की घोषणा की. अमेरिकी पुरुष हॉकी टीम के खिलाड़ी ट्रंप के संबोधन के दौरान यूएस कैपिटल में मौजूद थे. अमेरिका ने 2026 विंटर ओलंपिक के फाइनल में कनाडा को हराकर 46 साल बाद हॉकी में स्वर्ण पदक जीता.

    अमेरिकी सीमा अब सुरक्षित और दुश्मन डरे हुए हैं: ट्रंप

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सीमा अब सुरक्षित है और दुश्मन डरे हुए हैं. उन्होंने कहा, 'हमारी सेना और पुलिस पहले से कहीं अधिक मजबूत है, और वैश्विक मंच पर अमेरिका को एक बार फिर सम्मान प्राप्त है.'अमेरिकी राष्ट्रपति ने इमिग्रेशन का मुद्दा उठाया, जो उनके चुनाव अभियान के प्रमुख मुद्दों में से एक था, और अपने प्रशासन के दौरान इसमें महत्वपूर्ण बदलाव का दावा किया. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले एक साल में अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर घातक फेंटानिल की तस्करी में रिकॉर्ड 56 प्रतिशत की गिरावट आई है.

    ट्रंप ने कहा कि अवैध आव्रजन और मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के प्रयासों से परिणाम मिले हैं, और उन्होंने दावा किया कि चार साल तक बेरोकटोक सीमा पार करने के बाद, अब अमेरिका के पास देश के इतिहास की 'सबसे मजबूत और सुरक्षित सीमा' है. उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के अंत तक मेक्सिको के साथ लगने वाली अमेरिकी सीमा पर अवैध घुसपैठ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी.

    महंगाई पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर: ट्रंप

    ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान महंगाई पर काबू पाने का दावा किया. उन्होंने अपने पूर्ववर्ती, जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान देश के इतिहास में सबसे भीषण महंगाई होने का आरोप लगाया. अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने 12 महीनों के भीतर महंगाई को पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर ला दिया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के बाद से शेयर बाजार ने 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर दर्ज किया है और कहा कि उनकी सरकार ने अपने पहले वर्ष में 18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया है.

  • अमेरिका का 10% ग्लोबल टैरिफ लागू: भारत समेत किन देशों को होगा फायदा या नुकसान?

    अमेरिका का 10% ग्लोबल टैरिफ लागू: भारत समेत किन देशों को होगा फायदा या नुकसान?

    नई दिल्ली

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर ट्रंप की जोरदार हार हुई है. US Supreme Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए Donald Trump को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इस हार के बाद ट्रंप ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ (10% Global Tariff) लगाने का ऐलान कर दिया है. आइए समझते हैं इसका भारत समेत दुनिया के तमाम देशों पर क्या असर होने वाला है और क्या अब पहले से लागू टैरिफ के बजाय सिर्फ 10% टैरिफ ही देना होगा?

    कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम
    सबसे पहले बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से US Reciprocal Tariff को अवैध करार दिए जाने के बाद ट्रंप के तेवर गर्म हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर साइन कर दिए और दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ जड़ दिया. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर भी दी है. 

    क्या भारत और दूसरे देशों पर सिर्फ 10% टैरिफ? 
    Donald Trump के टैरिफ को गैरकानूनी बताए जाने और इसके बाद ट्रंप द्वारा नए ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) का ऐलान करने के बाद बड़ा सवाल ये है कि भारत समेत तभी देशों को अब सिर्फ 10% ही टैरिफ देना होगा. तो एएनआई की रिपोर्ट में इसे लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हां, जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं किया जाता, तब तक 10% टैरिफ ही लागू रहेगा. इसका मतलब 18% नहीं, अब भारतीय सामानों के आयात पर अमेरिका में 10 फीसदी टैरिफ रह सकता है. हालांकि, यहां ट्रंप के बयान पर गौर करें, तो उन्होंने कहा था कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा. 

    IEEPA की जगह लेगा नया टैरिफ? 
    ट्रंप ने बीते साल 2025 के अप्रैल महीने में अमेरिका के लिए लिब्रेशन डे करार देते हुए टैरिफ का ऐलान किया था, जो 10 फीसदी से 50 फीसदी तक था. ये रेसिप्रोकल टैरिफ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाया था और कोर्ट ने इस संबंध में साफ किया है कि ऐसा करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है और ये सिर्फ इमरजेंसी के हालात में यूज होता है. ऐसे में अधिकारी ने साफ किया कि हां, ये IEEPA के तहत लागू किए गए टैरिफ की जगह लेगा, जब तक कोई नया सिस्टम लागू नहीं किया जाता. 

    कितने दिन तक लागू रहेगा नया टैरिफ? 
    Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में मिली टैरिफ पर हार के बाद आनन-फानन में 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश दे दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि करीब पांच महीने या 150 दिनों के लिए लागू रहेगा.

    क्या ट्रंप लगा सकते हैं अधिक टैरिफ?  
    इस सवाल का जबाव भी खुद डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10% ग्लोबल टैरिफ पर बात करते हुए संकेत दिया है कि उचित टैरिफ तय करने के लिए जरूरी जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर Tariff Hike किया जा सकता है. 

    ट्रंप ने क्यों लगाया नया ग्लोबल टैरिफ? 
    White House के अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका का नया 10% ग्लोबल टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन संबंधी समस्याओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं का समाधान करना है. इसके साथ ही उन्होंने सभी ट्रेड पार्टनर्स को Trade Deals का पालन करने की सलाह भी दी है. 

  • अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मौजूदगी, पीएम शहबाज़ शरीफ़ होंगे ट्रंप के साथ बैठक में शामिल

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मौजूदगी, पीएम शहबाज़ शरीफ़ होंगे ट्रंप के साथ बैठक में शामिल

    इस्लामाबाद/वॉशिंगटन

      पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मिशन पर अमेरिका पहुँच चुके हैं। 18 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य केंद्र वॉशिंगटन में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकें और अमेरिकी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता है। ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ़ पीस' में शिरकत : पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष आमंत्रण पर 'बोर्ड ऑफ़ पीस' की पहली बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए हैं।

    महत्वपूर्ण बैठक : यह बैठक आज यानी गुरुवार, 19 फरवरी को होनी है। पृष्ठभूमि : गौरतलब है कि पिछले महीने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम' के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में इस शांति बोर्ड का गठन किया गया था।

    वरिष्ठ मंत्रियों का दल साथ : प्रधानमंत्री अकेले इस दौरे पर नहीं हैं। उनके साथ पाकिस्तान का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जिसमें शामिल हैं-उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार। मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ मंत्री और उच्चाधिकारी।

    द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा : 'बोर्ड ऑफ़ पीस' की बैठक के अलावा, शहबाज़ शरीफ़ अमेरिका की वरिष्ठ लीडरशिप के साथ अलग से भी मुलाकातें करेंगे।एजेंडा : इन बैठकों में मुख्य रूप से पाकिस्तान-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों, सुरक्षा सहयोग और वर्तमान वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।कूटनीतिक महत्व : राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ संबंधों की यह नई दिशा अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।