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  • सरकार ने किया ऐलान: 3 महीने के लिए पार्किंग और लैंडिंग चार्ज पर 25% की छूट

    सरकार ने किया ऐलान: 3 महीने के लिए पार्किंग और लैंडिंग चार्ज पर 25% की छूट

    नई दिल्ली

    एयरपोर्ट टैरिफ नियामक एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA)ने मंगलवार को एयरलाइंस को बड़ी राहत दी है। अथॉरिटी ने देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की। यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और अगले तीन महीनों तक सभी घरेलू उड़ानों पर लागू रहेगी।

    AERA ने अपने आदेश में कहा कि यह फैसला सरकार के उस निर्देश के बाद लिया गया है, जिसमें मौजूदा पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए एयरलाइंस को वित्तीय राहत देने की आवश्यकता जताई गई थी। आदेश के अनुसार, बड़े हवाई अड्डों पर वर्तमान एरोनॉटिकल टैरिफ का हिस्सा होने वाले लैंडिंग और पार्किंग चार्ज को 25 प्रतिशत कम किया जा रहा है।

    अथॉरिटी ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उसने सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह फैसला लागू करने का निर्णय लिया है। इस कदम से एयरलाइंस के परिचालन खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है, जो फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में हैं।

    एयरलाइंस को लागत के दबाव से राहत मिलेगी
    एनडीटीवी प्रॉफिट की खबर के मुताबिक, एयरपोर्ट शुल्क में इस कटौती से एयरलाइंस को लागत के दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि एयरलाइंस इस राहत का फायदा पैसैंजर्स को भी दे सकती हैं। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हाल के महीनों में बढ़ती ईंधन कीमतों और परिचालन चुनौतियों के कारण एयरलाइंस पहले ही दबाव में हैं। लैंडिंग और पार्किंग शुल्क एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी विमान उपयोग दर अधिक होती है। इन शुल्कों में कमी करके AERA का मकसद घरेलू रूट्स पर संचालित एयरलाइंस को कुछ समय के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिससे उनके मार्जिन और नकदी प्रवाह में सुधार हो सकता है।

    तीन महीने बाद होगी समीक्षा 
    यह अस्थायी राहत AERA द्वारा नियंत्रित सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर लागू होगी, जिससे पूरे एविएशन इकोसिस्टम को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। विशेष रूप से घरेलू एयरलाइंस को इस फैसले से फायदा होगा, जो वर्तमान में अस्थिर परिचालन परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। AERA ने स्पष्ट किया है कि यह राहत पूरी तरह से समयबद्ध है और तीन महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के दौरान मौजूदा बाजार स्थिति, एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति और उद्योग के व्यापक परिदृश्य को ध्यान में रखा जाएगा।

    पिछले कुछ हफ्तों में आपने नोटिस किया होगा फ्लाइट टिकट अचानक महंगे हो गए हैं.इसका कारण साफ था फ्यूल महंगा, ऑपरेशन खर्च ज्यादा. लेकिन अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है एयरपोर्ट चार्ज में 25% कटौती की,लेकिन असली सवाल क्या इससे आपका टिकट सस्ता होगा, तो आइए इसे साफ और आसान भाषा में समझते हैं। 

    5 प्वाइंट में पहले समझ लें पूरी बात

        लैंडिंग और पार्किंग चार्ज 25% कम
        लागू सिर्फ घरेलू उड़ानों पर
        राहत 3 महीने के लिए
        एयरलाइंस का खर्च घटेगा
        किराए में राहत संभव, लेकिन तय नहीं

    देखते हैं हवाई यात्रियों को क्या मिलेगा ?

        ATF कीमतों में राहत, Fare Capping हटाया
        Fuel Surcharge में एयरलाइंस को छूट के बाद एयरलाइंस को और बड़ी राहत
        AERA ने 3 महीने के लिए लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में 25% की कटौती की
        AERA ने सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स पर लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में अगले 3 महीने के लिए 25% की राहत दी
        ये फैसला तत्काल प्रभाव से लागू है
        इसका लाभ सिर्फ घरेलू उड़ानों को ही मिलेगा
        पश्चिम एशिया संकट के कारण सरकार के निर्देश पर यह राहत दी गई है

    यह फैसला क्यों लिया गया?

        सीधी बात पश्चिम एशिया संकट की वजह से
        जेट फ्यूल और ऑपरेशन खर्च बढ़ गया

    एयरलाइंस पर दबाव बढ़ा इसलिए सरकार ने Airports Economic Regulatory Authority of India के जरिए एयरपोर्ट चार्ज कम कर दिए ताकि एयरलाइंस को राहत मिले। 
    क्या आपका फ्लाइट टिकट सस्ता होगा?

        एयरलाइंस का खर्च कम जरूर होगा लेकिन टिकट सस्ता करना एयरलाइंस के फैसले पर निर्भर है
        यानी कि तुरंत बड़ी राहत नहीं मिल सकेगी
        लेकिन किराए बढ़ने की रफ्तार कम हो सकती है

  • Repo Rate:रेपो रेट स्थिर, EMI पर असर नहीं पड़ेगा

    Repo Rate:रेपो रेट स्थिर, EMI पर असर नहीं पड़ेगा

    नई दिल्ली
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एमपीसी बैठक के नतीजे आ गए हैं और आरबीआई गवर्नर ने बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में जानकारी दी. बीते फरवरी महीने की तरह इस बैठक में भी रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखा गया है, यानी इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. इसका सीधा मतलब है कि आपके होम लोन या कार लोन की ईएमआई पर कोई भी असर नहीं होगा, न तो ये घटेगी और न ही ये बढ़ेगी। 

    गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए आगे कहा कि समिति ने न्यूट्रल रुख बनाए रखा है. रेपो रेट को यथावत रखने के साथ ही SDF 5%, MSF 5.50% पर स्थिर हैं. इसके अलावा FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान जाहिर किया है। 

    2025 में हुई थी दनादन कटौती
    बता दें कि बीते साल 2025 में आरबीआई ने एक के बाद एक कई बार रेपो रेट में कटौती कर लोन लेने वालों को तोहफा दिया था और Repo Rate में कुल 125 अंकों की कटौती की गई थी. लेकिन इस साल की पहली बैठक फरवरी में हुई थी और उसमें कटौती के सिलसिले पर ब्रेक लगा था और इस बार फिर इसमें कोई बदलाव न करते हुए केंद्रीय बैंक ने 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा था. पहले से ही ज्यादातर अर्थशास्त्री Repo Rate Unchanged रहने का अनुमान जाहिर कर रहे थे। 

    कैसे EMI पर असर डालता है रेपो रेट? 
    रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक तमाम बैंकों को कर्ज देती है. इसका उपयोग अर्थव्यवस्था में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी किया जाता है. जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है, जिससे आम जनता के लिए होम लोन या ऑटो लोन की EMI बढ़ जाती है। 

    इस रफ्तार से भागेगी इंडियन इकोनॉमी
    आरबीआई की ओर से देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर भी अनुमान जाहिर किए गए हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि  FY26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% रखा गया है. जबकि  FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है. पहली तिमाही के लिए इसे कम करते हुए 6.8% किया गया है। 

    महंगाई को लेकर ये अनुमान
    Indian GDP के साथ ही आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा महंगाई का अनुमान भी जाहिर किया. उनके मुताबिक, 2027 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) 4.6% किया गया है. उन्होंने FY27 की पहली तिमाही में CPI बेस्ड महंगाई 4% रहने का अनुमान जताया है, जबकि दूसरी तिमाही के लिए इसे 4.4% किया गया है. इसके अलावा तीसरी तिमाही (Q3) के लिए महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है और अनुमान को 5.2% किया गया है। 

    'भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत'
    मिडिल ईस्ट युद्ध और ग्लोबल टेंशन के अलावा डॉलर के मजबूत होने, क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा होने को लेकर बात करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्लबोल टेंशनों से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर बुरा असर पड़ा, लेकिन भारत में इसका कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला है. दुनियाभर के शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में उथल-पुथल देखने को मिली. उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। 

  • US-ईरान सीजफायर ने शेयर बाजार को दिया बड़ा झटका, सेंसेक्स 2700 अंक चढ़ा

    US-ईरान सीजफायर ने शेयर बाजार को दिया बड़ा झटका, सेंसेक्स 2700 अंक चढ़ा

    मुंबई 
    शेयर बाजार पर अमेरिका-ईरान में हुए दो हफ्ते के सीजफायर (US-Iran Ceasefire) का सीधा असर पड़ा है. खुलने के साथी ही बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा चढ़ गया, तो वहीं एनएसई निफ्टी ने भी ओपनिंग के साथ ही 800 अंकों की तगड़ी छलांग लगा दी. ग्लोबल मार्केट में बंपर तेजी के बीच शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव सिग्नल पहले से ही मिल रहे थे। 

    शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 74,616.58 की तुलना में खुलने के साथ ही 77,290 के लेवल पर पहुंच गया और फिर कुछ सेकंड में ही ये अपनी रफ्तार को तेज करते हुए 77,392 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा।  

    बात नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स (NSE Nifty) की करें, तो अपने पिछले बंद 23,123.65 की तुलना में तेज उछाल के साथ ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स 23,855 पर ओपन हुआ और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए एक झटके में 800 अंक की तेजी के साथ 23,938 के लेवल पर जा पहुंचा। 

    युद्ध पर ब्रेक, तो हर ओर हरियाली
    युद्ध की टेंशन पर ब्रेक लगने के साथ ही शेयर बाजार में लौटी तूफानी तेजी के चलते सभी कैटेगरी में बुधवार को हरियाली देखने को मिली. BSE लार्जकैप में शामिल 30 में से 29 शेयरों बंपर उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. IndiGo Share (10%), LT Share (8%), Bajaj Finance Share (7%), Adani Ports Share (7%), Bajaja Finserv Share (6.60%), M&M Share (5.90%). Eternal Share (5.30%). Titan Share (5.20%), Maruti Share (5.10%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे। 

    इसके अलावा HDFC Bank Share (4.80%). SBI Share (4%), ICICI Bank Share (4%), Kotak Bank Share (3.30%) और Reliance Share भी करीब 3 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। 

    शेयर बाजार में तेजी के ये बड़े कारण
    शेयर बाजार में तेजी के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध की टेंशन (US-Iran War Tension End) कम होने और दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार आया है. इसके अलावा तेल संकट गहराने से बढ़ी टेंशन को क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आई गिरावट (Crude Oil Price Crash) ने कम किया है, जो इस तेजी के पीछे बड़ी वजह है। 

     

     

  • ईरान के दबाव में ट्रंप, दो हफ़्ते के सीजफायर पर हुआ समझौता

    ईरान के दबाव में ट्रंप, दो हफ़्ते के सीजफायर पर हुआ समझौता

    वाशिगटन / तेहरान 

    मिडिल-ईस्ट में पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रही जंग अब थम सकती है.  अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों से शुरू हुई महाजंग में अब सीजफायर का ऐलान हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जो डेडलाइन दी थी, उसके खत्म होने से ठीक पहले ही ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए जंग रोकने की घोषणा कर दी। 

    धमकियों से अचानक पीछे हटते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोक देंगे, जो कूटनीति के लिए एक संभावित मौके का संकेत है. सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा, "मैं दो हफ़्तों की के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं." उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिन्होंने उनसे नियोजित हमलों को टालने का आग्रह किया था। 

    ईरान ने पाकिस्तान के दो हफ़्तों के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस युद्धविराम को देश के नए सुप्रीम लीडर ने मंज़ूरी दे दी है. ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को जंग के खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. 10-सूत्रीय प्रस्ताव में सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने, पूरी तरह मुआवज़ा देने और ईरान की सभी ज़ब्त संपत्तियों को जारी करने की मांग की गई है। 

    वहीं, ईरान ने जंग रोकने के लिए 10-Points का प्रस्ताव भेजा है. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि वह युद्ध की समाप्ति को तभी स्वीकार करेगा. ईरान की मांगों को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी। 

    सीजफायर के बावजूद जारी तनाव
    हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

    इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा
    इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।

    इसी दबाव के चलते अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाया। सीजफायर के तहत दो हफ्तों के लिए इस स्ट्रेट को खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि यह पूरी तरह खुला रहेगा या सीमित नियंत्रण में, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।

    आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव
    सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।

     

    आइए जानते हैं अब तक के बड़े अपडेट क्या हैं-  

    1- ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने से परहेज करेगा. मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मीटिंग होगी। 

    2- कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आने के बावजूद जमीनी स्तर पर अनिश्चितता और हिंसा जारी रही. ईरान ने सीजफायर समझौते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका बनी रही. व्हाइट हाउस की ओर से सीजफायर पर सहमति जताए जाने के बावजूद, इज़रायली सेना ने ईरान पर हमले जारी रखे। 

    3- ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा, 'मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं और अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है तो मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को निलंबित करने पर सहमत हूं। 

    4- ईरान ने कहा, 'अगर उस पर हमले रोक दिए जाते हैं तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी.' ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता के अनुरोध पर विचार कर रहा है. साथ ही वाशिंगटन द्वारा ईरान की 10 सूत्रीय योजना को वार्ता के ढांचे के रूप में स्वीकार करने पर भी विचार कर रहा है। 

    5- तेहरान ने आगे कहा कि दो सप्ताह की अवधि के लिए, ईरान के सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन संभव होगा। 

    6- ईरान ने इसे तेहरान की जीत बताया और उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ट्रंप ने शत्रुता समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें मान ली हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस ने जवाब दिया कि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए मजबूर किया था। 

    7- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इज़राइल ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान को रोकने पर सहमत हो गया है. हालांकि, इजरायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि देश अभी भी हमले कर रहा है. तेल अवीव की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार है। 

    8- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, इसके बावजूद सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत सहित खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए। 

    9- खबरों के मुताबिक, ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के साथ समन्वय में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाना शामिल है. तेहरान का कहना है कि इस राजस्व का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा. इसके अलावा युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और उसकी जब्त संपत्तियों को जारी करना शामिल है। 

    10- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि युद्धविराम में इजरायल और हिजबुल्लाह से लेबनान में लड़ाई रोकने की भी मांग की गई है. उन्होंने ईरान और अमेरिका के डेलीगेशन को शुक्रवार को इस्लामाबाद में मिलने का निमंत्रण दिया है और स्थायी शांति और आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें मिलने की कामना की है। 

     

  • मोजतबा खामेनेई कोमा में, न युद्ध की खबर न सीजफायर का होश, लोकेशन की जानकारी मिली

    मोजतबा खामेनेई कोमा में, न युद्ध की खबर न सीजफायर का होश, लोकेशन की जानकारी मिली

    तेहरान 

     ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई अचेत हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. पहले भी ये खबरें आई थीं कि वे उसी अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी. एक डिप्लोमैटिक मेमो में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बरे में ये जानकारी दी गई है. यह मेमो अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों पर आधारित है. इसे खाड़ी देशों के सहयोगी देशों के साथ साझा किया गया है। 

    द टाइम्स की खबर के मुताबिक मोजतबा खामेनी फिलहाल अचेत अवस्था में हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. उनकी लोकेशन के बारे में बताते हुए कहा गया है कि उनका इलाज ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 140 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कोम शहर में चल रहा है. पहले कहा जा रहा था कि उन्हें युद्ध के बीच रूस ले जाया गया है और मॉस्को में उनका इलाज किया जा रहा है. हालांकि बाद में रूस के राजदूत ने बताया था कि वे ईरान के अंदर ही हैं और अब ब्रिटिश अखबार द टाइम् ने भी इसकी पुष्टि की है। 

    कैसे अमेरिकी हमले से बचे मोजतबा खामेनेई?
    ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों से इसलिए बच गए, क्योंकि मिसाइलों से उनके घर पर हमला होने से कुछ मिनट पहले ही वह अपने बगीचे में टहलने के लिए बाहर निकल गए थे. जिस अमेरिकी-इजरायली अटैक में उनके पिता अली खामेनेई और अन्य परिवार को मारा गया, उसी में मोजतबा खामेनेई को भी टारगेट किया गया था. हालांकि उसी वक्त बाहर निकलने की वजह से वह मिसाइल अटैक में सेंकेड के अंतर से बाल-बाल बच गए. ‘द टेलीग्राफ’ को मिले एक लीक ऑडियो से पता चलता है कि 28 फरवरी को स्थानीय समयानुसार सुबह 9:32 बजे जब इजरायली ‘ब्लू स्पैरो’ बैलिस्टिक मिसाइलों ने उनके आवास पर हमला किया, उससे कुछ ही पल पहले वह ‘कुछ काम से’ बाहर चले गए थे। 

    अब शासन करने के काबिल नहीं मोजतबा
        मोजतबा खामेनेई को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया कि वो या तो अमेरिकी हमलों में मारे जा चुके हैं या फिर बेहद जख्मी हालत में हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वो सार्वजनिक तौर पर दिखते नहीं, जिसकी वजह से ये संदेह और गहरा हो जाता है। 

        मोजतबा खामेनेई को युद्ध की शुरुआत में ही ईरान का सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया था लेकिन वे कभी दिखाई नहीं दिए. उनके संदेश में कभी-कभी आते हैं और ज्यादातर मामलों में ईरान की सैन्य इकाई आईआरजीसी ही बयान देती है। 

        मोजतबा खामेनेई का आखिर संदेश सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज खोलने और सीजफायर के बयान के बाद आया था. इस संदेश में कहा गया था कि ईरान झुकेगा नहीं और सेनाएं अमेरिका पर पलटवार करेंगी। 

        अब द टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मोजतबा खामेनेई के संदेश भी उनके नहीं हैं क्योंकि वे अचेत अवस्था में हैं और शासन करने के काबिल नहीं बचे हैं. जिस मेमो का जिक्र अखबार में किया गया है, वो इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित है. इसमें ये भी बताया गया है, कि मोजतबा खामेनेई किसी भी फैसले या युद्ध संचालन में शामिल होने की स्थिति में नहीं हैं. ईरान की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

     

  • दतिया उपचुनाव को लेकर सियासी गतिविधियाँ बढ़ीं, हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख टली

    दतिया उपचुनाव को लेकर सियासी गतिविधियाँ बढ़ीं, हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख टली

    दतिया उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज, हाईकोर्ट में सुनवाई टली

    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहुंचे डॉ मिश्रा के  निवास,बंद कमरे में की चर्चा

    भोपाल
     दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की गई है। न्यायाधीश डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के उपरांत यह आदेश दिया।
    उल्लेखनीय है कि बैंक फ्रॉड मामले में राजेंद्र भारती को गत 2 अप्रैल को दिल्ली की एमपी/एमएलए कोर्ट ने तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। सजा के बाद उनकी विधायकी समाप्त हो गई, जिससे दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई है।

    सुनवाई टलने के साथ ही मध्यप्रदेश की राजनीति, विशेषकर भोपाल में, हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निवास पहुंचकर उनसे करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव की संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से डॉ. मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है, जहां से वे तीन बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान परिस्थितियों में सीट रिक्त होने के कारण उपचुनाव की स्थिति बन रही है, और ऐसे में डॉ. मिश्रा के फिर से मैदान में उतरने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अब 15 अप्रैल की सुनवाई और उसके बाद के घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो दतिया उपचुनाव की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • बंगाल में 90 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, चुनाव आयोग ने जारी किया जिलेवार आंकड़ा

    बंगाल में 90 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, चुनाव आयोग ने जारी किया जिलेवार आंकड़ा

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है।

    अबतक 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए 
    चुनाव आयोग ने पहली बार जिलेवार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की भी जानकारी शेयर की है. आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में एसआईआर की इस प्रक्रिया में अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. पहले चरण में दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि फरवरी 2026 की अंतिम सूची तक 5.46 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए हैं। 

    चुनाव आयोग के मुताबिक लॉजिकल विसंगति यानी डेटा में तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर 60 लाख से ज्यादा वोटरों को जांच के दायरे में रखा गया था. इन मामलों को अंडर एडजुडिकेशन की कैटेगरी में रखा गया था ताकि अधिकारी गहराई से इनकी जांच कर सकें. आयोग के मुताबिक, अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस जांच के बाद करीब 32.68 लाख पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए हैं, जबकि अपात्र मिले 27.16 लाख लोगों के नाम काटे गए। 

    ECI के इतिहास में पहली बार हुआ ये काम
    इलेक्शन कमीशन के इतिहास में ये पहली बार है जब पश्चिम बंगाल को लेकर एसआईआर के संबंध में जिलेवार नाम जोड़ने और हटाने का डेटा सार्वजनिक किया गया है. आयोग का मकसद पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है. बता दें कि ये डेटा अब सार्वजनिक तौर पर भी उपलब्ध है। 

    न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर होते ही जारी होंगे आंकड़े

    जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए कुल 60,06,675 मामलों में से 59,84,512 मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन पर न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। इसके अलावा, 59,84,512 मामलों में से, जिन मतदाताओं को न्यायिक अधिकारियों द्वारा हटाए जाने योग्य माना गया है। उनके नामों को हटा दिया गया है। उनकी संख्या 27,16,393 है।

    91 लाख वोटरों के कट जाएंगे नाम
    इसका मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या वर्तमान में 90,83,345 है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अधिसूचना जारी होने से पहले, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मतदाताओं की मसौदा सूची में, कुल 58,20,899 नाम हटाए गए थे। 28 फरवरी को जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में, हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई।

    अब, न्यायिक अधिकारियों ने 27,16,393 मामलों को हटाने लायक पाया है। इसके बाद, पूरे SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में हटाए गए वोटरों की कुल संख्या बढ़कर 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि जिन वोटरों के नाम न्यायिक जांच प्रक्रिया में "हटाने लायक" पाए गए हैं। उन्हें अपनी बात रखने का और अपील करने का एक अवसर मिलेगा।

    वहीं, विपक्षी दल (खासकर तृणमूल कांग्रेस) इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने को वोटरों को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों पर ज्यादा असर पड़ा है. वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहे हैं। 

    दो चरणों में मतदान
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे में इस SIR प्रक्रिया और नाम हटाने के आंकड़ों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। 

    एक बार अपील करने का मिलेगा मौका
    CEO कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक जांच अभ्यास के दौरान "हटाने लायक" पाए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से थी। मुर्शिदाबाद से हटाए गए नामों की कुल संख्या 4,55,137 है।

    इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। जहां 3,25,666 नाम हटाए गए। बता दे कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा और दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर मतदान होगा। इसके बाद चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डेटा जारी
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट आज मंगलवार तक हर हाल में पब्लिश करने के आदेश दिए थे. साथ ही यह भी कहा था कि अगर सभी दस्तावेजों पर डिजिटल साइन नहीं भी हुए तो भी लिस्ट निकाली जाए. इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट को 3 पूर्व जजों की एक कमेटी बनाने के आदेश दिए. वोटर लिस्ट पब्लिश करने की आखिरी तारीख सोमवार थी, लेकिन काम न पूरा होने के चलते संभव नहीं सका. लिहाजा आज मंगलवार को चुनाव आयोग ने डेटा जारी किया है। 

  • इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    जनता दर्शन: गोरखनाथ मंदिर में 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस जमा कराने का निर्देश दिया सीएम ने

    इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी

    अधिकारियों को दिए त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश

    गोरखपुर
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों के प्रति संवेदनशीलता का एक और उदाहरण  जनता दर्शन में देखने को मिला। सीएम से मिलने पहुंची एक बेटी ने जब उन्हें बताया कि पैसों की दिक्कत के चलते वह अपनी फीस नहीं जमा कर पा रही है, मुख्यमंत्री ने अविलंब अधिकारियों को बिटिया की फीस जमा कराने का निर्देश दिया। सीएम ने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने पहुंचे लोगों को भी आश्वस्त किया कि वे उच्चीकृत अस्पताल से इस्टीमेट मंगवा लें, इलाज के खर्च में सरकार भरपूर मदद करेगी।

     सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। सीएम ने सभी को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का उचित, विधिसम्मत, समयबद्ध एवं संतुष्टिपरक निस्तारण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में आए लोगों के प्रार्थना-पत्रों को संबंधित अधिकारियों को हस्तगत करते हुए इस संबंध में निर्देश भी जारी किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी परेशान होने या घबराने होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार हर मुश्किल में आपके साथ खड़ी है। हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा। 

    जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था होगी
    जनता दर्शन में एक बेटी ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से फीस जमा करने में बाधा आ रही है। इस पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अविलंब बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक दिक्कत की वजह से किसी बेटी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। हर बेटी को सुरक्षा के साथ-साथ उसका सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो पूरे समाज पर सकारात्मक असर पड़ता है।

    मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। यदि कोई पात्र व्यक्ति शासन की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है तो उसे तत्काल योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। कैंसर से पीड़ित अपने परिजन के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंची एक महिला से मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चीकृत सरकारी अस्पताल में मरीज को दिखाकर इस्टीमेट मंगवा लीजिए। इलाज में पूरी मदद की जाएगी।

    सीएम योगी ने इसे लेकर अफसरों को निर्देशित भी किया कि जिन लोगों को उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर से आई एक गरीब महिला को पेंशन और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए।

  • ईरान युद्ध में 45 दिन का ब्रेक? पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता से शांति की उम्मीद

    ईरान युद्ध में 45 दिन का ब्रेक? पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता से शांति की उम्मीद

    वाशिंगटन

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं।

    इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है।
    क्या है सीजफायर प्लान?

    रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
    एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ

    युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
    ईरान ने रखी हैं शर्तें

    एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं।
    ट्रंप ने दी है डेडलाइन

    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है।

    इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा।
    ईरान ने दिया दो टूक जवाब

    वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

  • Gold and Silver Prices Decline: चांदी ₹2800 सस्ती, सोने का नया रेट क्या है?

    Gold and Silver Prices Decline: चांदी ₹2800 सस्ती, सोने का नया रेट क्या है?

     नई दिल्ली

    सोना-चांदी की कीमतों में जारी गिरावट (Gold-Silver Rates) का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर वायदा कारोबार ओपन होने के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. चांदी एक झटके में अपने पिछले बंद के मुकाबले 2800 रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई, तो वहीं सोने का भाव 1300 रुपये से ज्यादा कम हो गया। 

    इस गिरावट के बाद अब 1 Kg Silver Price अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से क्रैश (Silver Crash From High) होते हुए 2.09 लाख रुपये सस्ती हो गई है. अगर आप सोना-चांदी में निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो फिर खरीदारी से पहले इनके लेटेस्ट रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है. हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट के दोनों कीमती धातुएं रिकवरी मोड में भी नजर आईं। 

    चांदी की कीमत में फिर गिरावट
    एमसीएक्स पर सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही चांदी की कीमत धड़ाम हो गई. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन गुरुवार को वायदा चांदी 2,32,495 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और जब लॉन्ग वीकेंड के बाद कमोडिटी मार्केट ओपन हुआ, तो Silver Price फिसलकर 2,29,651 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो चांदी अचानक 2844 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। 

    सोमवार को आई इस शुरुआती गिरावट के बाद अब चांदी अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा कम कीमत पर मिल रही है. MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इस कीमती धातु का लाइफ टाइम हाई लेवल 4,39,337 रुपये प्रति किलोग्राम है और ताजा भाव से तुलना करें, तो अब 1 Kg Silver Price 2,09,686 रुपये तक कम है। 

    सोने का भी चांदी जैसा हाल 
    न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि सोने की कीमत में भी सप्ताह के पहले कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है. बीते गुरुवार को सोने का वायदा भाव 1,49,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और सोमवार को ये गिरावट के साथ 1,48,298 रुपये पर ओपन हुआ. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1382 रुपये कम हो गया।  

    सोना भी अपने हाई लेवल से अब काफी सस्ता हो चुका है. गोल्ड का लाइफ टाइम एमसीएक्स हाई 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है और ताजा भाव इस हाई के मुकाबले 54,686 रुपये सस्ता है। 

    ग्लोबल टेंशन, फिर भी टूटे सोना-चांदी 
    मिडिल ईस्ट युद्ध से ग्लोबल टेंशन चरम पर है और ट्रंप की ईरान को लेकर नई धमकियों ने इसे बढ़ाने का काम किया है. इन हालातों में भी सोना-चांदी की कीमतों में ये गिरावट चौंकाने वाली है, क्योंकि अक्सर किसी आपदा या जियो-पॉलिटिकल तनाव की स्थिति में कीमती धातुओं के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं। 

    वर्तमान हालात में सोना-चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल के दाम में तेजी के चलते महंगाई के जोखिम ने दबाव बढ़ाया है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. लोग अपने हाथ में कैश रखने को ज्यादा उचित मान रहे हैं. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी सोना-चांदी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।