Tag: featured

  • सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों के परिजनों को अब 1.25 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता

    सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों के परिजनों को अब 1.25 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता

    भोपाल.

    अब तक सेवाकाल के दौरान किसी शासकीय सेवक की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिजनों को मिलने वाली 'अनुग्रह राशि' (Ex-gratia) की अधिकतम सीमा मात्र 50 हजार रुपये थी। बढ़ती महंगाई और आधुनिक दौर की जरूरतों के सामने यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान थी। लेकिन अब, मध्यप्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए इस सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार रुपये कर दिया है।

    वित्त विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, अब मृतक कर्मचारी के परिवार को उनके छह माह के वेतन के बराबर राशि दी जाएगी। इसमें 'वेतन पुनरीक्षण नियम 2017' के मानकों को आधार बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अनुग्रह राशि केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस आर्थिक सहायता होगी।
    आदेश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी
    यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होने जा रहा है। यानी इस तारीख या इसके बाद आने वाले सभी दुखद प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को सवा लाख रुपये तक की मदद तत्काल मिल सकेगी। यह कदम उन छोटे कर्मचारियों (जैसे चतुर्थ श्रेणी) के लिए जीवनदान जैसा है, जिनके पास बचत के नाम पर बहुत कम संसाधन होते हैं। सवा लाख रुपये की यह राशि शायद किसी की कमी को पूरा न कर सके, लेकिन अंतिम संस्कार, तात्कालिक बिलों और बच्चों की शिक्षा जैसे शुरुआती झटकों को सहने में यह एक मजबूत लाठी का काम जरूर करेगी।

  • MP में राज्यसभा चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं, भाजपा तीसरा प्रत्याशी उतारने की तैयारी, कांग्रेस की सीट पर फोकस

    MP में राज्यसभा चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं, भाजपा तीसरा प्रत्याशी उतारने की तैयारी, कांग्रेस की सीट पर फोकस

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. .

    एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा 
    मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं। 

    जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित 
    राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है। 

    क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति
    बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी।

    इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।

    खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है।

    एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट 
    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है. 

    बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार
    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके। 

    एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी
    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

    भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव
    इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।

     

  • देश में स्मार्टफोन पर खर्च हुआ आय का 40%, 22 करोड़ यूजर्स का अपग्रेड महंगाई से प्रभावित

    देश में स्मार्टफोन पर खर्च हुआ आय का 40%, 22 करोड़ यूजर्स का अपग्रेड महंगाई से प्रभावित

    नई दिल्ली

    देश में 22 करोड़ लोग फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। वे स्मार्टफोन पर शिफ्ट होना चाहते हैं। पर बजट और महंगे हैंडसेट बड़ी बाधा हैं। एक भरोसेमंद स्मार्टफोन और एंट्री-लेवल फीचर फोन के बीच ₹4-6 हजार का अंतर है।

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक मेमोरी चिप की कीमतें बढ़ने से अंतर 6-8 हजार हो सकता है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक महंगे स्मार्टफोन डिजिटल इंडिया के लिए चुनौती हैं। बेसिक स्मार्टफोन की कीमत यूजर की मासिक आय का 30-40% तक है।

    यह सामर्थ्य के तय मानक 5% से कई गुना है। सिंधिया ने सुझाव दिया है कि पीएलआई स्कीम को मेक इन इंडिया से आगे बढ़ाकर ‘अफोर्डेबल इन इंडिया’ की दिशा में ले जाना चाहिए।

    हिस्सेदारी

        5-10 हजार सेगमेंट: बाजार हिस्सेदारी 24% है और इसमें 71% मॉडल अब 5जी तकनीक वाले हैं।

        15 हजार से कम सेगमेंट: इसकी कुल मार्केट हिस्सेदारी 4% रह गई है और इसमें 100% मॉडल 4जी हैं।

    फीचर फोन से 7 गुना महंगा स्मार्टफोन
    देश का सबसे सस्ता 4जी स्मार्टफोन आईटेल जेनो ₹5799 रुपए का है। वहीं लावा शार्क ₹8999 रुपए में सबसे सस्ता 5जी स्मार्टफोन विकल्प है। इसके मुकाबले स्नेक्सलैन गुरु 301 जैसा 2जी फीचर फोन महज ₹649 और कार्बन के1 जैसा 4जी फीचर फोन मात्र ₹835 रुपए में उपलब्ध है।

    मेमोरी चिप महंगी होने से बढ़ेंगी कीमतें
    काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक के मुताबिक 4जी फीचर फोन से 4जी स्मार्टफोन पर अपग्रेड के लिए ₹4 हजार अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। यदि ग्राहक 5जी फोन चुनता है तो बोझ 6 हजार रुपए तक बढ़ जाता है। मेमोरी शॉर्टेज से कीमतें बढ़ने पर स्मार्टफोन खरीदना और मुश्किल होगा।

    मेमोरी चिप की कीमतों में उछाल: ₹8,000 तक बढ़ सकती है लागत 
    इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, साल 2026 तक स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल आने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत और कीमतों में हो रही वृद्धि है। माना जा रहा है कि केवल मेमोरी की बढ़ती लागत के कारण हर हैंडसेट की कीमत में ₹6,000 से ₹8,000 तक का इजाफा हो सकता है। 

    काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार: 
    "वर्तमान में 4G फीचर फोन से स्मार्टफोन पर शिफ्ट होने का मतलब ₹4,000 का अतिरिक्त बोझ है, जो 5G के मामले में ₹6,000 तक है। 2026 में यह गैप और बढ़ेगा। सरकार को किफायती फोन निर्माताओं को इंसेंटिव देने पर विचार करना चाहिए।" 

    आय का 40% हिस्सा स्मार्टफोन पर: सिंधिया ने जताई चिंता 
    संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मुद्दे को डिजिटल समावेशन की 'नई सीमा' करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि कई बाजारों में एक बेसिक स्मार्टफोन की कीमत यूजर की मासिक आय के 30-40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वैश्विक मानक के अनुसार यह 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। सिंधिया ने सुझाव दिया है कि अब समय आ गया है जब PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना का ध्यान "मेक इन इंडिया" के साथ-साथ "अफोर्डेबल इन इंडिया" पर भी केंद्रित हो। 

    बाजार का बदलता स्वरूप और चुनौतियां
    इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
    (MeitY) फिलहाल स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने और वैल्यू एडिशन पर ध्यान दे रहा है, लेकिन घरेलू बाजार में ₹5,000-10,000 की कैटेगरी छोटी होती जा रही है। 

    बाजार के प्रमुख आंकड़े (2025-26 अनुमान): 
    ₹5,000 से कम का सेगमेंट: कुल शिपमेंट में केवल 4% योगदान (सभी 4G फोन)। 

    ₹5,000-10,000 का सेगमेंट: 24% योगदान (71% 5G फोन)। 

    मुनाफे की कमी: OEMs (कंपनियों) के लिए इस कम बजट वाले सेगमेंट में मुनाफा कमाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। 

  • चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोने में ₹53,000 की गिरावट, ताजे भाव जानें

    चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोने में ₹53,000 की गिरावट, ताजे भाव जानें

    मुंबई 

    सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) बीते सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी बढ़त में रहीं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ, तो वहीं चांदी का भीव 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इन रेट्स की तुलना दोनों कीमती धातुओं के हाई लेवल से करें, तो ये अभी भी क्रैश (Gold-Silver Price Crash From High) नजर आ रही हैं. जी हां, चांदी जहां हाई से 2 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना 53000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है। 
         
    हाई छूने के बाद क्रैश होती गई चांदी 
    चांदी की कीमत एमसीएक्स पर अपने हाई को छूने के बाद से संभली नजर नहीं आई है. इस साल जनवरी महीने में इतिहास में पहली बार 1 Kg Silver Price 4 लाख रुपये के पार पहुंचा था और 4,39,337 रुपये के लेवल छू लिया था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि, बीच-बीच में उछाल भी आया, लेकिन वर्तमान 2,32,600 रुपये प्रति किलो के भाव के आधार पर कैलकुलेशन करें, तो चांदी 2,06,737 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है। 

    सोना भी फिर न छू सका हाई
    न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी अपने लाइफ टाइम हाई को फिर से नहीं छू सका. चांदी की तरह ही जनवरी महीने में Gold Rate ने एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये का लेवल पार किया था और रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था. वहीं बीते गुरुवार को ये गिरावट के साथ 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ. ऐसे में अपने हाई से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 53,334 रुपये कम हो गया है। 
           
    बीते हफ्ते ऐसा था हाल 
    बात सिर्फ बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए चेंज की करें, तो एमसीएक्स पर 2 अप्रैल को  5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,49,650 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि 27 मार्च को ये 1,47,255 रुपये था. यानी हफ्तेभर में ये कीमती पीली धातु 2395 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगी हुई है. चांदी का भाव देखें, तो ये 2,27,954 रुपये से चढ़कर बीते सप्ताह 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई यानी इसमें 4646 रुपये की तेजी आई।          
           
    घरेलू मार्केट में सोना-चांदी 
    MCX के बाद घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों को देखें, तो पिछले सप्ताह महज तीन कारोबार दिन में ट्रेड हुआ. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 24 कैरेट सोना 27  मार्च को 24 कैरेट सोना 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 2 अप्रैल को ये 1,46,608 रुपये पर क्लोज हुआ यानी यहां भी Gold Rate में 3666 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया. चांदी को देखें, तो घरेलू मार्केट में ये कीमती धातु 2,21,647 रुपये से बढ़कर 2,27,813 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी 1 किलो चांदी की कीमत 6166 रुपये बढ़ गई।    
          
     घरेलू मार्केट में GST+Making Charge
    गौरतलब है कि आईबीजेए द्वारा अपडेट किए जाने वाले गोल्ड-सिल्वर रेट्स देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब सर्राफा दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर तय 3 फीसदी जीएसटी के साथ मेकिंग चार्ज भी देना होता है. ये मेकिंग चार्ज विभिन्न शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से सोना-चांदी की कीमत बढ़ जाती है। 

    विदेशों में भी सोना-चांदी सस्ता, ये हैं कारण
    इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है. COMEX पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4317 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गया, तो चांदी की कीमत गिरकर 66.89 डॉलर प्रति औंस पर नजर आई।  

    Gold-Silver Rates में जारी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा लोगों को सता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा बीते सप्ताह ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर जारी अनिश्चितता ने भी इस गिरावट को रफ्तार देने का काम किया है. इसके अलावा मंगलवार को भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसका दबाव सोना-चांदी पर पड़ा। 

  • कांग्रेस नेता कमलनाथ ने किया दावा, देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं

    कांग्रेस नेता कमलनाथ ने किया दावा, देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं

    भोपाल
     कांग्रेस नेता कमलनाथ के देश में LPG गैस क्राइसिस पर दिए गए बयान के बाद अब BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के एलपीजी क्राइसिस को लेकर घेरना शुरू कर दिया है। सबसे आगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया आए, जिन्होंने कहा कि कमलनाथ ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी है, शर्म आना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ जी ने भी स्वयं कह दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है' 'झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक गुमराह कर रही कांग्रेस को अब शर्म आना चाहिए। अब समय है कि कांग्रेस जनता में डर और विश्वास पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कर दे।'

    क्या है मामला, ऐसे समझें
        कमलनाथ ने गैस क्राइसिस पर बयान दिया था
        उन्होंने कहा था, गैस की ऐसी कोई कमी नहीं है
        उनका बयान पार्टी लाइन से इतर आया था
        भाजपा ने तत्काल इसे कांग्रेस लपक लिया
        सिंधिया ने कहा, कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही
        कांग्रेस को शर्म आना चाहिए

    कमलनाथ का वीडियो भी शेयर किया है
    मंत्री सिंधिया ने भाजपा मध्य प्रदेश के X की पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पार्टी ने लिखा था कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी द्वारा एलपीजी को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी' इसमें कमलनाथ का छिंदवाड़ा का वह वीडियो भी लगाया गया था, जिसमें कमलनाथ ने कहा था कि, गैस की कमी नहीं है, सिस्टम में गड़बड़ी है और एक भ्रम फैलाया गया है।

    कमलनाथ ने LPG पर क्या कहा था
    दरअसल बीते रोज कमलनाथ छिंदवाड़ा आए थे। उन्होंने हेलीपेड पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, 'गैस की कोई कमी नहीं है, यह अव्यवस्था है, लेकिन माहौल बना दिया कि कमी है।' उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उनका यह बयान पार्टी लाइन से हटकर दिया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में एलपीजी और पेट्रोलियम क्राइसिस को लेकर MP सहित पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। जबकि कमलनाथ कह रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है।

    BJP ने मौके को तत्काल लपक लिया
    कमलनाथ का 'गैस ऐसी कोई कमी नहीं है' बयान को BJP ने तत्काल पलक लिया और इसके 'कांग्रेस के गैस की क्राइसिस कैंपेन' की हवा निकालने के लिए उपयोग कर रही है। भाजपा इस मौके को कतई छोड़ने वाली नहीं है। MP से लेकर दिल्ली तक भाजपा ने इसको लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • पाकिस्तान की उम्मीदों को लगा करारा झटका, ईरान ने इस्लामाबाद में बैठक से किया साफ इनकार

    पाकिस्तान की उम्मीदों को लगा करारा झटका, ईरान ने इस्लामाबाद में बैठक से किया साफ इनकार

    इस्लामाबाद

    पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को मध्यस्थों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। ईरान ने पाकिस्तान सहित मध्यस्थता करा रहे देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करने को तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। कुल मिलाकर ये बातचीत अब 'डेड एंड' पर पहुंच गई है।

    ईरान का इनकार और अमेरिका की मांगें
    सूत्रों के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के लिए अपनी शर्तें दोहराई हैं। शुरुआती दौर में ईरान ने कहा था कि वह तभी युद्ध समाप्त करेगा जब अमेरिका युद्ध मुआवजा दे, मध्य पूर्व के अपने सभी सैन्य ठिकानों से वापसी करे और भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी दे। इन मांगों पर कोई समझौता नहीं होने के कारण बातचीत अटक गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के नेतृत्व में बातचीत को आगे बढ़ाने की यह कोशिश कोई सफलता हासिल नहीं कर सकी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसे अमेरिका की मांगें 'अस्वीकार्य' लगती हैं। वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक के लिए अपने कोई अधिकारी को नहीं भेजेगा। इस कड़े रुख ने बातचीत की मौजूदा रूपरेखा के दरवाजे प्रभावी रूप से बंद कर दिए हैं।

    पाकिस्तान की निकल गई हवा!
    पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान बैकडोर कूटनीति के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद में सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की थी। इसी दिशा में पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव ईरान को सौंपा था। इससे पहले, चीन और पाकिस्तान ने भी संयुक्त रूप से एक 5-सूत्रीय शांति योजना पेश की थी।

    हालांकि, अमेरिका की कुछ कठोर रणनीतिक मांगों और जमीनी स्तर पर लगातार हो रहे सैन्य हमलों के कारण, ईरान ने इस बातचीत से अपने कदम पीछे खींच लिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि पाकिस्तान के लिए दोनों पक्षों को एक मेज पर लाना कूटनीतिक रूप से एक बेहद जटिल काम था, जो अंततः विफल साबित हुआ।

    शांति प्रयासों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी युद्धक विमान (F-15E) को मार गिराने का दावा किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विशेष बलों ने एक पायलट का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    तुर्की और मिस्र तलाश रहे नए विकल्प
    इस कूटनीतिक गतिरोध के कारण शांति प्रयास अधर में लटक गए हैं। इसे देखते हुए तुर्की और मिस्र अब इस समस्या का समाधान इस्लामाबाद से बाहर तलाश रहे हैं। दोनों देश युद्धविराम की बची-खुची उम्मीदों को बचाने के लिए नए स्थानों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें दोहा (कतर) और इस्तांबुल (तुर्की) बातचीत की मेजबानी के लिए प्रमुख विकल्पों के रूप में उभरे हैं।

    विवाद की मुख्य जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री रास्ता
    एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। इस समझौते के तहत यह प्रस्ताव था कि अगर तेहरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते को वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोल देता है, तो इसके बदले में युद्धविराम लागू किया जा सकता है।

    डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और धमकियां
    रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान संभावित युद्धविराम को लेकर चर्चा की थी।

    उसी दिन, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति युद्धविराम चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी होगा जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से 'खुला और स्वतंत्र' होगा।

    ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा: हम तभी विचार करेंगे जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुला होगा। तब तक, हम ईरान पर विनाश की हद तक बमबारी कर रहे हैं। उन्हें वापस पाषाण युग में भेज देंगे!!!"

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ट्रंप के इन दावों और बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने युद्धविराम चाहने वाले ट्रंप के दावे को पूरी तरह से झूठा और निराधार करार दिया है। इस युद्ध की आंच अब अन्य देशों तक फैल रही है। इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने हाई-अलर्ट जारी करते हुए अमेरिकी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने को कहा है, क्योंकि ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा हमले की आशंका है। बहरीन से लेकर दुबई तक ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।

  • 24 घंटे की बुरी घटना: ईरान जंग में US के 2 फाइटर जेट और 2 चॉपर क्रैश, पायलट लापता

    24 घंटे की बुरी घटना: ईरान जंग में US के 2 फाइटर जेट और 2 चॉपर क्रैश, पायलट लापता

    वाशिंगटन

    पिछले पांच हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और अनिश्चित दौर में पहुंच गया है. पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जबकि बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हमले की चपेट में आ गए हैं। 

    ईरानी मीडिया की तरफ से कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं और दावा किया गया है कि कुवैत स्थित 'कैंप बुहरिंग' पर हुए ईरानी हमलों में अमेरिकी सेना का एक 'बोइंग CH-47 चिनूक' भारी-भरकम हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। 

    28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद  यह पहली बार है जब अमेरिकी विमानों को इस तरह नुकसान पहुंचा है. जिसने वाशिंगटन के ‘एयर सुपीरियरिटी’ के दावों को कड़ी चुनौती दी है.  जानकारी के मुताबिक, एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान ईरान के भीतर सैन्य अभियान के दौरान क्रैश हो गया. इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है और उसके ईरान में कहीं छिपे होने की आशंका है। 

    कुवैत में भी प्लेन क्रैश
    एक अन्य घटना में, कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा। 

    लापता पायलट को खोजने के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक (Black Hawk) हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने भारी गोलीबारी की जिसके बाद वे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे. लगातार दो विमानों के नुकसान को इस युद्ध में अमेरिकी सेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 

    अमेरिकी सेना के लिए मुश्किल भरे रहे पिछले 24 घंटे 
        F-15E स्ट्राइक ईगल:
    ईरान की सीमा के भीतर एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया है. विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स में से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है. लापता क्रू मेंबर की तलाश में हाई-स्टेक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। 

        A-10 वारथॉग: दो A-10 वारथॉग विमानों को निशाना बनाया गया. इनमें से एक फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया (पायलट सुरक्षित), जबकि दूसरे ने एक इंजन खराब होने के बावजूद इमरजेंसी लैंडिंग की। 

        रेस्क्यू  हेलीकॉप्टरों पर अटैक: लापता पायलट को खोजने निकले दो HH-60W जॉली ग्रीन II रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आ गए. हालांकि क्रू सुरक्षित है, लेकिन कुछ जवान घायल हुए हैं। 

        इमरजेंसी लैंडिंग: एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को भी तकनीकी खराबी या हमले के बाद इमरजेंसी घोषित कर सुरक्षित लैंडिंग करनी पड़ी। 

    ईरान का 'पायलट हंट' 
    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता अमेरिकी पायलट की तलाश के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे जंग का टर्निंग पॉइंट बताते हुए कहा कि अब लड़ाई 'सत्ता परिवर्तन' से हटकर 'अमेरिकी पायलटों की तलाश' पर केंद्रित हो गई है। 

    ईरानी अधिकारियों ने अपने नागरिकों से पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने का आग्रह किया है और एक क्षेत्रीय अधिकारी ने 'शत्रु की सेनाओं' को पकड़ने या मारने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा इनाम देने की भी घोषणा की है। 

    ट्रंप बोले- यह जंग है, होता रहता है
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं को बहुत अधिक महत्व न देते हुए कहा, 'यह जंग है और ऐसा होता रहता है.' उन्होंने संकेत दिया कि इन नुकसानों से ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के उन दावों के विपरीत है जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। 

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर एयर डिफेंस सिस्टम भी मोबाइल मिसाइल और ग्राउंड फायर के जरिए खतरा पैदा कर सकते हैं. हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा, लेकिन दो विमानों के गिरने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

    फिलहाल जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं और इसका असर पूरे मध्य-पूर्व पर पड़ रहा है. ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयासों को खारिज कर दिया है, जिससे पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे सीजफायर की कोशिशों को झटका लगा है. वहीं कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। 

  • सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की मिसाल, CM यादव ने साझा किया महानाट्य का महत्व

    सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की मिसाल, CM यादव ने साझा किया महानाट्य का महत्व

    सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य
    सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास
    सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश
    बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी
    वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।

    विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

    उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया।

    भेंट की गई वैदिक घड़ी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है।

    समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

    वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

    महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

    महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

    महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित 'विक्रम संवत' की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और 'सिंहासन बत्तीसी' के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

    तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही "जय महाकाल" और "सम्राट विक्रमादित्य" के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

    कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।

    वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षण

    •     समारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
    •     महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है।
    •     महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी।
    •     महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है।
    •     महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है।
    •     महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।

     

  • रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की वृद्धि, ₹16,625 करोड़ की रिकॉर्ड प्राप्ति 25-26 में

    रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की वृद्धि, ₹16,625 करोड़ की रिकॉर्ड प्राप्ति 25-26 में

    रायपुर :खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि , 25–26 में ₹16,625 करोड़ की प्राप्ति 

    पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता 

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। 

    खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।

    इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है।

    खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय 
    सुधार हुआ है।

    आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

    छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

  • उत्तर प्रदेश: आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर, पर्यटन विभाग ने यूपी@2047 रोडमैप जारी किया

    उत्तर प्रदेश: आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर, पर्यटन विभाग ने यूपी@2047 रोडमैप जारी किया

    विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग ने पेश किया विकसित यूपी@2047 का रोडमैप

    पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य

    “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन पर्यटन में वृद्धि के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” के विजन के तहत वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप जारी किया है। जिसके तहत विभाग ने वर्ष 2047 तक राज्य को विश्व की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में देश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान वर्तमान के लगभग 9.2 प्रतिशत में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी करते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    पर्यटकों के लिए कमरों की उपलब्धता को 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग सबसे जरूरी कार्य राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। हालांकि इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का वृहद पैमाने पर सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे का भी तेज गति से विकास किया गया है। इसी क्रम में राज्य के पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने के किए जाएंगे सभी संभव प्रयास

    पर्यटकों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें बढ़ोतरी करने के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार राज्य में आने वाला 1 पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों में 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग पर्यटकों की इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक बढ़ाकर 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

    यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासतों की संख्या 20 तक पहुंचाने का लक्ष्य

    उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश के पास  यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2029-30 तक 08,  2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी भी सुनिश्चित हो रही है।