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  • एमपी में कर्मचारियों को 3% DA बढ़ाकर राहत, एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, मई से नई सैलरी शुरू

    एमपी में कर्मचारियों को 3% DA बढ़ाकर राहत, एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, मई से नई सैलरी शुरू

    भोपाल

     अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी।

    सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है।

    महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा
    वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा।

    6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान
    वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा।

    सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान
    वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी।

    भुगतान संबंधी अन्य निर्देश
    महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

  • मालदा हिंसा के मास्टरमाइंड को बागडोगरा एयरपोर्ट से किया गया गिरफ्तार, भागने की कोशिश में था

    मालदा हिंसा के मास्टरमाइंड को बागडोगरा एयरपोर्ट से किया गया गिरफ्तार, भागने की कोशिश में था

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हालिया हिंसा और तनाव के मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. बंगाल पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के मास्टरमाइंड माने जा रहे अधिवक्ता और एआईएमआईएम (AIMIM) नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी उस समय हुई जब इस्लाम बागडोगरा एयरपोर्ट से राज्य छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था। 

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी. खुफिया जानकारी मिली थी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाला है. पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाकर उसे टर्मिनल के पास से धर दबोचा। 

    इस्लाम पेशे से वकील है, जिसे कानून की अच्छी समझ है, फिर भी वह पुलिस की नजरों से बच नहीं सका. मोफक्करुल इस्लाम का राजनीतिक प्रोफाइल काफी सक्रिय रहा है। 

    वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का एक प्रमुख चेहरा है. उसने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार (Itahar) सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. जांच में सामने आया है कि पिछले दिनों सुजापुर और कालियाचक के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी इस्लाम ही कर रहा था। 

    पुलिस-प्रशासन को दी थी चुनौती
    हाल ही में सामने आए एक वीडियो में इस्लाम बेहद आक्रामक तेवर में जिले के आला अधिकारियों को ललकारता नजर आ रहा है. वीडियो में उसे कैमरे के सामने चिल्लाते हुए सुना जा सकता है, 'ओए डीएम , एसपी .. सीआईडी कहां हो? आईबी कहां है? तुम सब कहां हो? यहां आओ…" प्रशासन के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी और भीड़ को उकसाने के बाद से ही वह पुलिस के राडार पर था। 

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लाम की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. आरोप है कि सुजापुर में हुए विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित तरीके से उसी ने लीड किया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई गहरी साजिश थी या यह अचानक भड़का हुआ आक्रोश था. फिलहाल वह पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। 

  • मुख्यमंत्री साय का संदेश: अनन्य रामभक्त हनुमान जी का प्रेरणादायक जीवन

    मुख्यमंत्री साय का संदेश: अनन्य रामभक्त हनुमान जी का प्रेरणादायक जीवन

    अनन्य रामभक्त हनुमान जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक- मुख्यमंत्री साय

    राम नाम से गुंजायमान हुआ नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर

    मुख्यमंत्री ने पवित्र नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का किया भूमिपूजन

    मुख्यमंत्री हनुमान उत्सव एवं राम कथा कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के स्टेशन चौक स्थित नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में आयोजित हनुमान उत्सव एवं राम कथा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम के अनन्य भक्त हनुमान का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। बल, बुद्धि और विद्या के दाता हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि हमारे जीवन में निष्ठा, सेवा और समर्पण कैसा होना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने पवित्र नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन किया। राम कथा के दौरान नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर राम नाम से गुंजायमान हो उठा। 

    मुख्यमंत्री ने नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से हनुमान का दर्शन और आरती पूजन किया। उन्होंने हनुमान जी से छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उल्लेखनीय है कि हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर 01 से 05 अप्रैल तक नर्मदा कुंड मंदिर में स्वामी राजीव लोचन दास जी द्वारा राम कथा का भी आयोजन किया जा रहा है। 

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय को कहा छत्तीसगढ़ प्रभु राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु राम ने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। रामायण काल में वर्णित दंडकारण्य अबूझमाड़ क्षेत्र का इलाका है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रभु रामलला दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अभी तक लगभग 42 हजार भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं। 5 हजार से अधिक बुजुर्ग विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कर चुके हैं। तीर्थयात्रा के लिए 19 जगहों को चिन्हांकित किया गया है। 

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभी हमने धर्मांतरण रोकने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत देश के सभी प्रदेशों से कठोर नियम बनाए गए हैं। इन कड़े प्रावधानों से निश्चित ही धर्मांतरण पर अंकुश लगेगा। गौ माता के भी संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार द्वारा सुरभि गौधाम योजना लागू की गई है। इसके तहत 29 गौधाम का शुभारंभ किया गया है। सुरभि गौधाम में गौमाता के लिए चारे और अन्य व्यवस्था के साथ ही गौपालकों को गोबर के विभिन्न उत्पाद के निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में 10 सुरभि गौधाम के साथ प्रदेश में 330 गौधाम का निर्माण किया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में रुद्र सेना और रुद्र शक्ति के पोस्टर का विमोचन भी किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा,विधायक किरण सिंहदेव और पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास जी, राम गर्ग, श्रीमती विभा अवस्थी सहित गणमान्यजन और भक्तगण उपस्थित थे।

  • फार्मा सेक्टर को ट्रंप की 100% टैरिफ धमकी, जंग के बावजूद भारत पर असर संभव

    फार्मा सेक्टर को ट्रंप की 100% टैरिफ धमकी, जंग के बावजूद भारत पर असर संभव

    नई दिल्ली

    ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपन‍िया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्‍हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्‍पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है। 

    ब्‍लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया। 

    Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। 

    किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर?
    फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी। 

    जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा
    हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है। 

    ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं। 

  • विधानसभा चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सक्रियता, यूपी और गुजरात में सियासी लाभ की तैयारी

    विधानसभा चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सक्रियता, यूपी और गुजरात में सियासी लाभ की तैयारी

     नई दिल्ली
     पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने अचानक नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) के तहत संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन से संबंधित तैयारी शुरू की. उसने इसके लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है. बताया यह जा रहा है कि विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन विधेयक पारित किया जायेगा. इसमें कई सारे कदम उठाये जाने की बात कही गयी है. जैसे-संविधान संशोधन से लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाने वाली हैं, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जायेंगी.

    इसके अलावा, सरकार ने परिसीमन को 2026-27 के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर कराने का फैसला किया है. इसके पीछे तर्क यह है कि नयी जनगणना होने और उसका आंकड़ा आने में इतना समय लग जायेगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक परिसीमन नहीं हो पायेगा. एक और प्रस्ताव यह है कि संशोधन से राज्यों में सीटों की वृद्धि का अनुपात नहीं बदलेगा. जबकि पहले ऐसा माना जा रहा था कि कम जनसंख्या होने के कारण दक्षिण भारत के राज्यों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

    इस कारण दक्षिण के नेता क्षुब्ध थे. लेकिन नये प्रस्ताव के मुताबिक, परिसीमन से उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर अगर 120 हो जायेंगी, तो तमिलनाडु में भी लोकसभा सीटों में वृद्धि इसी अनुपात में होगी. परिसीमन के मुद्दे पर लंबे समय से उत्तर बनाम दक्षिण का न सिर्फ द्वंद्व छिड़ा हुआ था, बल्कि दक्षिण के राज्यों को लगता था कि जनसंख्या को नियंत्रित रखने का उन्हें दंड दिया जा रहा है, जबकि ज्यादा आबादी वाले उत्तर भारत के राज्यों को परिसीमन के जरिये बड़ा राजनीतिक लाभ मिलेगा. लेकिन नये प्रस्ताव में यह आशंका दूर हो गयी है.

    2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराकर दक्षिण की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश
    दरअसल, परिसीमन मुद्दे पर एनडीए में भाजपा के सहयोगी चंद्रबाबू नायडू तक का रवैया नाराजगी भरा था, और वैसे में, दक्षिण भारत में भाजपा के लिए अपना विस्तार कर पाना कठिन होता, इसलिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराकर दक्षिण की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश है. दरअसल, 19 सितंबर, 2023 को जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) संसद से पारित हुआ था, तब इसे जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की घोषणा की गयी थी. लेकिन अब सरकार ये दोनों कार्य संविधान संशोधन के जरिये करना चाहती है. संविधान संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो सरकार के पास नहीं है. इसके अलावा, आधे राज्यों को इसे पारित कराना होगा. बेशक मौजूदा राजनीतिक माहौल में इसे पारित कराना आसान नहीं है. लेकिन विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध भी नहीं कर पायेंगे.
    अगर संसद के विशेष सत्र में इस पर मुहर लग जाती है, तो फिर परिसीमन आयोग बैठेगा, और उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले वर्ष तक महिला आरक्षण लागू हो जायेगा. हालांकि यह सवाल उठाया जा रहा है कि महिला आरक्षण को अगर 2011 की जनगणना और परिसीमन के आंकड़ों पर ही लागू करना था, तो इसे पहले भी लाया जा सकता था. लेकिन सरकार अब अचानक यह कदम उठाने जा रही है, तो कुछ सोच-समझकर ही उठा रही होगी. दरअसल, अगले साल तीन राज्यों-उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव, जाहिर है कि भाजपा और एनडीए के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.

    अगर अगले साल तक महिला आरक्षण लागू हो जाता है, तो इन तीनों राज्यों में भाजपा को चुनावी लाभ मिलना तय है. फिर 2029 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इसका लाभ मिलेगा. हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव है, और काफी जटिल भी है. कई प्रश्नों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं. जैसे परिसीमन के बाद लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो जायेंगी. लेकिन ये सीटें किस तरह आरक्षित होंगी, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है. सवाल यह भी है कि परिसीमन जब 2011 की जनगणना के आधार पर ही होना है, तो फिर 2026-27 की जनगणना के आधार पर नये सिरे से परिसीमन कराने का क्या औचित्य होगा. फिलहाल लगता है कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने यह दांव चला है.

    दरअसल युद्ध का लंबा असर रहने वाला है, और हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव भी लंबे समय तक रहेगा. इस कारण आय से लेकर रोजगार तक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में, महिला आरक्षण लागू कर सरकार महिलाओं का एकमुश्त वोट अपने साथ होने की उम्मीद कर सकती है. इस मामले में दो बातों पर ध्यान देना चाहिए. एक यह कि चुनावों में महिला वोटरों की भूमिका अब पुरुष वोटरों के बराबर या उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण होने लगी है. इसके अलावा, महिलाओं का बड़ा वर्ग पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ है. ऐसे में, अगर मान लें कि युद्ध के असर से युवा वर्ग सरकार से नाराज हो जाये, तो उसका चुनावी नतीजे पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है. इसके अलावा, परिसीमन चूंकि 2011 के आंकड़े पर ही होना है, ऐसे में, दक्षिण भारत के नेता खुश हैं, और वहां भाजपा को नाराजगी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा.

    लेकिन इस कदम को सिर्फ चुनावी राजनीति के चश्मे से देखना सही नहीं होगा. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण लागू हो जाता है, तो यह भारतीय राजनीति की एक बड़ी उपलब्धि होगा. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आरक्षण के कारण जिन पुरुष राजनेताओं को अपनी सीटें गंवानी पड़ेंगी, वे आरक्षित सीटों पर अपनी महिला रिश्तेदारों को बिठा सकते हैं. और बहुत संभव है कि इसे राजनीतिक बुराई के तौर पर ही देखा जाये.

    महिला आरक्षण के कारण बड़ी संख्या में स्त्रियों में जागृति और आत्मविश्वास की भावना आयी है
    लेकिन पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिला आरक्षण लागू होने के बाद हमने देखा है कि भले ही अनेक जगहों पर वास्तविक ताकत अब भी महिला प्रमुखों के पतियों के पास ही हो, लेकिन महिला आरक्षण के कारण बड़ी संख्या में स्त्रियों में जागृति और आत्मविश्वास की भावना आयी है. और अब वे राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में अपनी जगह लेने के लिए तैयार हैं. इस लिहाज से महिला आरक्षण भारतीय राजनीति को बदलने के साथ-साथ उसमें नयी ऊर्जा भर सकता है. संसद और विधानमंडलों में महिलाओं की संख्या बढ़ने पर वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका जैसे मुद्दों पर नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी, जिसका समाज पर निश्चित रूप से सकारात्मक असर पड़ेगा.

  • अमित शाह का ममता को जवाब, बोले- ‘मैं 15 दिन तक बंगाल में ही रहकर काम करूंगा’

    अमित शाह का ममता को जवाब, बोले- ‘मैं 15 दिन तक बंगाल में ही रहकर काम करूंगा’

     कोलकाता

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच सीधे टक्कर देखने को मिली रही है. इसी क्रम में शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में नंदीग्राम पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ललकारते हुए बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने घोषणा की कि वह आगामी 15 दिनों तक लगातार पश्चिम बंगाल में ही रहकर चुनावी कमान संभालेंगे। 

    गुरुवार को अमित शाह कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि  मैं बंगाल चुनाव में 15 दिन तक बंगाल में ही रहने वाला हूं. मैं यहां खासतौर पर शुवेंदु अधिकारी के नामांकन के लिए आया हूं. शुभेंदु की जीत बंगाल में परिवर्तन की नींव रखेगी। 

    'बंगाल में होगी दीदी की हार'

    अमित शाह ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली बार दीदी नंदीग्राम में हार गई थीं और इस बार वह भवानीपुर के साथ-साथ पूरे बंगाल को खो देंगी. उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी का नामांकन बंगाल में टीएमसी के पतन की शुरुआत है. शाह ने जोर देकर कहा कि नंदीग्राम की जनता इस बार फिर से इतिहास दोहराएगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। 

    'मैंने पूरे बंगाल का किया दौरा'
    उन्होंने दावा करते हुए कहा कि मैंने पूरे बंगाल का दौरा किया है और जहां भी जाता हूं, वहां एक ही आवाज़ गूंज रही है- ममता बनर्जी को बाय-बाय कर दो. चुनाव से पहले ही बंगाल का दौरा करें, जहां भी जाएं, हर जगह यही आवाज़ सुनाई दे रही है कि सरकार को विदा कर दो और ममता बनर्जी को बाय-बाय कह दो। 

    गृह मंत्री ने बंगाल की ज्वलंत समस्याओं को उठाते हुए कहा कि बंगाल की जनता टीएमसी की टोलबाजी और गुंडागर्दी से पूरी तरह त्रस्त है.आए दिन हो रहे बम धमाकों और बेरोजगारी से युवा परेशान हैं. राज्य में आए दिन होने वाले बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने घुसपैठियों को संरक्षण दिया है, जिससे राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है। 

    शाह ने युवाओं से वादा किया कि भाजपा सरकार आने पर बेरोजगारी को खत्म किया जाएगा और विकास की नई लहर लाई जाएगी, ताकि बंगाल फिर से अपनी पुरानी पहचान पा सके। 

  • राघव चड्डा पर AAP का एक्शन, राज्यसभा उपनेता के पद से हटाए जाने का फैसला

    राघव चड्डा पर AAP का एक्शन, राज्यसभा उपनेता के पद से हटाए जाने का फैसला

    नई दिल्ली

    राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका मिला है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है. इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी कैंची चली है. जी हां, आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा की जगह अब नया उपनेता चुना लिया है. अब आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल राज्यसभा में उपनेता होंगे. आम आदमी पार्टी ने इस बाबत राज्यसभा सचिवालय को पत्र सौंपा है। 

    सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यह भी सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए. दरअसल, राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे. लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे. चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों। 

        सूत्र बताते हैं कि पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं. वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। 

    राघव चड्ढा केजरीवाल के बरी होने पर भी चुप थे
    हालांकि, आम आमदी पार्टी ने इस फैसले के पीछे का कारण नहीं बताया है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है. राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था। 

    राघव चड्ढा पर यह एक्शन क्यों?
    पहली वजह: जब दिल्ली में शराब कांड मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कईयों को जमानत मिली तब उस पर भी वह चुप थे। 

    दूसरी वजह: राघव राज्यसभा में पार्टी के कोटे से तय किए हुए समय में बोल रहे थे. इस वजह से पार्टी के अन्य सांसदों को मौका या तो नहीं मिल पाता था या कम मिलता था। 

    तीसरी वजह: पार्टी का स्टैंड सही से नहीं रख पा रहे थे या पार्टी के मुद्दों पर बोलने से बचते थे। 
    चौथी वजह:

    आप का अंदरूनी कलह 

    बहरहाल, राघव चड्डा ने इस पर अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. इस घटना से आम आदमी पार्टी का अंदरूनी कलह सामने आ गया है. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल सीमित संख्या में सांसद हैं. संजय सिंह जेल में होने के बाद राघव चड्डा को अनौपचारिक रूप से उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी. वे कई महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय रहे. लेकिन पार्टी का कहना है कि व्यक्तिगत स्टाइल के बजाय सामूहिक फैसला जरूरी है। 

    राघव ने किन-किन मुद्दों को उठाया:

        राइट टू रिकॉल (जनता को नेता वापस बुलाने का अधिकार)
        मिडिल क्लास पर टैक्स बोझ:
        खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा:
        गिग वर्कर्स (10 मिनट डिलीवरी वाले कामगारों) की सुरक्षा
        एयरपोर्ट पर महंगा चाय-पानी और फ्लाइट टिकट की समस्याएं

     

  • 7.4 तीव्रता का भूकंप और सुनामी से इंडोनेशिया में मची तबाही, दर्जनों की मौत

    7.4 तीव्रता का भूकंप और सुनामी से इंडोनेशिया में मची तबाही, दर्जनों की मौत

    जकार्ता

    इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा। 

    दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी। 

    इंडोनेशिया में भूंकप
    इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है। 

    इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। 

    भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही
    प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया। 

    तटीय इलाके में खतरा बरकरार
    आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है। 

    क्यों खतरा मंडरा रहा
    इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है। 

    यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप
    यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था। 

  • डीजल और पेट्रोल के दामों में भारी बढ़ोतरी, ₹25 महंगा हुआ डीजल, ₹7.4 बढ़ा पेट्रोल का दाम

    डीजल और पेट्रोल के दामों में भारी बढ़ोतरी, ₹25 महंगा हुआ डीजल, ₹7.4 बढ़ा पेट्रोल का दाम

    नई दिल्‍ली
     नायरा के बाद निजी क्षेत्र की कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के कारण तेल के दाम बढ़ाए गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेल ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर की वृद्धि की है. पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढोतरी की गई है. इस वृद्धि के बाद सामान्य डीजल की कीमत शेल इंडिया के पंपों पर ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

     वहीं, बेंगलुरु में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। 

    सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम
    जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप के कारण खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों को ऐसा करने पर सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती. घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 

    कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि
    ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कच्‍चे तेल के बढ़े दाम हैं. फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी आयात करता है। 

  • चंडीगढ़ BJP ऑफिस हमले में पाकिस्तानी ग्रेनेड का इस्तेमाल, 2 संदिग्धों के वीडियो हुए जारी

    चंडीगढ़ BJP ऑफिस हमले में पाकिस्तानी ग्रेनेड का इस्तेमाल, 2 संदिग्धों के वीडियो हुए जारी

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर हुए ब्लास्ट में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है।

    जानकारी के अनुसार, विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है।

    इससे पहले 2 नए वीडियो सामने आए। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं।

    बुधवार शाम को पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट हुआ था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा। जबकि, दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे, जिन्हें हमलवार बताया गया।

    वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। अब तक पुलिस ने इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की है। चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने कहा था कि क्रूड जैसी चीज फेंकी गई है। चंडीगढ़ पुलिस और सीएफएसएल की टीम बीजेपी ऑफिस के बाहर जांच में जुटी हुई हैं।

    30 फुट दूरी से फेंका गया ग्रेनेड BJP मुख्यालय के बाहर करीब 30 फुट दूरी से ग्रेनेड फेंका गया था। दीवार की ऊंचाई लगभग 3 फुट है, जबकि उसके ऊपर करीब 2 फुट ऊंची एल्यूमीनियम ग्रिल लगी हुई है। जिस जगह ग्रेनेड गिरा, वहां से बीजेपी दफ्तर के मुख्य द्वार की दूरी करीब 25 फीट बताई जा रही है।

    मुख्य द्वार के पास सुरक्षा कर्मियों के लिए केबिन बना हुआ है, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवान राउंड द क्लॉक तैनात रहते हैं। वहीं मुख्य गेट पर चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। हालांकि जिस स्थान पर ग्रेनेड गिरा, वहां अकसर आने वाले लोग अपनी गाड़ियां पार्क करते हैं और घटना के समय भी वहां वाहन खड़े थे।

    खालिस्तानी आतंकी सुखजिंदर सिंह बब्बर ने इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में हुए ग्रेनेड हमले के पीछे वही है। पोस्ट में कहा गया है कि भारतीय सिस्टम चाहे पंजाब के सिख युवाओं के खिलाफ कितने भी कदम उठा ले, इसका जवाब दिया जाएगा। खालसा पंथ उचित प्रतिक्रिया करेगा। गुरदासपुर में रणजीत सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए उसके आरोपियों को भी न बख्शने की बात कही गई है।

    पंजाब की धरती खालसा की धरती
    पोस्ट के अंत में खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखे गए हैं, जिनमें खालिस्तान के समर्थन और खालसा राज की बात दोहराई गई है। इस में कहा गया है कि पंजाब की धरती खालसा की धरती है। पंजाब में खालिस्तान बनेगा खालिस्तान जिंदाबाद, खालसा राज करेगा। वायरल पोस्ट में संगठन की ओर से इस वारदात को अंजाम देने का जिक्र करते हुए पंजाब के डीआईजी संदीप गोयल को भी चेतावनी दी गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें एक शख़्स ग्रेनेड की पिन निकाल कर फेंकते हुए दिख रहा है। हमले की जांच में पुलिस को सीसीटीवी में दो संदिग्ध दिखे हैं। दोनों लोगों को मोटरसाइकिल पर बीजेपी ऑफिस के आसपास घूमते देखा गया। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

    कहीं पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष तो नहीं थे निशाना?
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस घटना के तार प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। इसके अलावा इस हमले को पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी कुमार शर्मा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। करीब 15 दिन पहले एसएसपी पठानकोट ने अश्वनी शर्मा को सतर्क रहने और सार्वजनिक स्थानों पर कम जाने की चेतावनी दी थी। घटना से दो दिन पहले तक शर्मा पार्टी कार्यालय में मौजूद थे और बुधवार सुबह ही दिल्ली में एक कार्यक्रम के लिए रवाना हुए थे।

    क्रूड बम का इस्तेमाल किया:
    एसएसपी चंडीगढ़ सेक्टर-37 में पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर बुधवार शाम करीब 4:48 बजे जोरदार धमाके से भाजपा कार्यालय के बाहर खड़ी कार का शीशा टूट गया। काले रंग की एक एक्टिवा क्षतिग्रस्त हो गई और चारदीवारी पर 50 से अधिक स्थानों पर छर्रों के निशान देखने को मिले। चण्डीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि विस्फोट के लिए क्रूड बम का इस्तेमाल किया गया था।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले क्रूड बम का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में एक घटना में किया गया था। घटना के बाद केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीमों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। वहीं, घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।