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  • नाना पाटेकर ने दुनिया को कहा अलविदा, गोवा में हुआ निधन; PM मोदी ने जताया शोक

    नाना पाटेकर ने दुनिया को कहा अलविदा, गोवा में हुआ निधन; PM मोदी ने जताया शोक

    मुंबई 
    8 अक्टूबर 2026 को हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर सुबह उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया. अस्पताल में करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की. नाना पाटेकर ने पर्दे पर जितनी दमदार पहचान बनाई, निजी जिंदगी में वह उतने ही सादे नजर आते थे। 

    नाना पाटेकर का निधन, ऐसा था उनका सादा लाइफस्टाइल
    महंगे ब्रांड और दिखावे के बजाय खेती, गांव, घर का खाना और साधारण कपड़े उनकी पसंद का हिस्सा रहे. यही वजह है कि उनके निधन के बाद उनकी इस जमीन से जुड़ी जिंदगी को भी याद किया जा रहा है।

    पीएम मोदी ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि बहुत कम कलाकारों में नाना पाटेकर जैसी गहराई, अपनी अलग पहचान और खास मौजूदगी थी. उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई और ऐसे किरदार दिए, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। 
    पीएम मोदी ने कहा कि नाना पाटेकर अपने बेबाक और साफ विचारों के लिए भी जाने जाते थे और जो सही मानते थे, उसे कहने से कभी नहीं हिचकते थे. हिंदी और मराठी सिनेमा में उनका योगदान बहुत बड़ा था. उनके निधन से एक गहरी कमी पैदा हो गई है. पीएम मोदी ने उनके परिवार, दोस्तों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदना जताई और उनकी आत्मा की शांति की कामना की.

    अमित शाह ने नाना पाटेकर के निधन पर जताया दुख
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता नाना पाटेकर के निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने कहा कि पांच दशकों तक नाना पाटेकर ने अपने सहज अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी. गंभीर सामाजिक विषय हों या हास्य-व्यंग्य, उन्होंने जिस किरदार को निभाया, उसे जीवंत बना दिया। 

    अमित शाह ने कहा कि ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए सूखे से जूझ रहे किसान परिवारों की सेवा करना हो या सीमा पर जाकर जवानों का हौसला बढ़ाना, नाना पाटेकर ख्याति के शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहे। 

    अमित शाह ने कहा कि जब भी नाना से मिलने का मौका मिला, उनकी सरलता और साफगोई ने हमेशा प्रभावित किया. अमित शाह ने शोकाकुल परिवार और प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति देने और दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। 

     

     

    खेती और गांव से था खास लगाव
    नाना पाटेकर का खेती से जुड़ाव काफी पुराना था. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने पुणे के पास अपनी जमीन पर खेती करने की बात बताई थी. वहां चावल, मूंगफली, लहसुन और प्याज जैसी फसलें उगाई जाती थीं. उन्होंने खेती को अपने पसंदीदा कामों में शामिल बताया था. फार्महाउस पर उनका जुड़ाव केवल फसलों तक सीमित नहीं था. पुरानी रिपोर्टों और उनके इंटरव्यू में गाय-बैल समेत पशुओं की देखभाल का भी जिक्र मिलता है. कोविड के दौर में भी उन्होंने फार्महाउस पर रहने और वहां के जीवन का अनुभव शेयर किया था। 

    योगी आदित्यनाथ का ट्वीट
    यूपी के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा, 'मशहूर अभिनेता, सशक्त थिएटर कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी पद्म श्री नाना पाटेकर जी का निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपनी बेहतरीन अदाकारी से उन्होंने भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की। भगवान श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।'

     

    खुद खाना बनाना पसंद करते थे
    नाना पाटेकर की सादगी उनके खान-पान में भी नजर आती थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें खाना बनाना पसंद है. उन्होंने यह तक कहा था कि अगर वह अभिनेता नहीं बनते तो शायद एक छोटा होटल खोलते. बाद के वर्षों में गांव में रहते हुए भी वह खुद खाना बनाने और अपने रोजमर्रा के काम करने की बात करते रहे. यानी उनका फार्महाउस उनके लिए केवल आराम करने की जगह नहीं था, बल्कि एक ऐसी जगह थी जहां वह सामान्य जीवन जीना पसंद करते थे। 

    कपड़ों में भी दिखती थी सादगी
    नाना पाटेकर के पहनावे की बात करें तो उनका अंदाज बॉलीवुड के सामान्य ग्लैमर से काफी अलग रहा. वह अक्सर साधारण कुर्ता-पायजामा या खादी जैसे आरामदायक पारंपरिक कपड़ों में नजर आते थे. गोवा में 4 अक्टूबर 2026 को उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी की तस्वीरों और वीडियो में भी वह सफेद कुर्ते और सफेद गमछे में दिखाई दिए थे. उनके लिए कपड़े किसी स्टेटस सिंबल से ज्यादा आराम और जरूरत की चीज रहे. यही सादगी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व की पहचान बन गई थी। 

    लग्जरी से ज्यादा सीमित जरूरतों पर भरोसा
    नाना पाटेकर ने पुराने इंटरव्यू में अपनी जिंदगी को लेकर कहा था कि वह लग्जरी लाइफ नहीं जीते और उनकी जरूरतें सीमित हैं. वह महंगी चीजों पर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की मदद को अधिक महत्व देने की बात भी करते रहे. किसान परिवारों की मदद और सामाजिक कामों से उनका जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा है. नाम फाउंडेशन के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों से जुड़े राहत कार्यों में भी योगदान दिया था। 

    नाना पाटेकर की सादगी क्यों याद रहेगी?
    नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी फिल्मों और दमदार संवादों की चर्चा स्वाभाविक है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी का यह पहलू भी कम दिलचस्प नहीं है. एक ऐसे दौर में जब सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल अक्सर महंगी कारों, डिजाइनर कपड़ों और लग्जरी छुट्टियों से जोड़ा जाता है, नाना का खेत, पशु, घर का खाना और साधारण पहनावा उनकी अलग पसंद को दिखाता है। 

  • MP में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने वाली तीसरी लाइन अटकी, जबलपुर-इटारसी प्रोजेक्ट से मिलेगा बड़ा फायदा

    MP में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने वाली तीसरी लाइन अटकी, जबलपुर-इटारसी प्रोजेक्ट से मिलेगा बड़ा फायदा

    जबलपुर
    एक ओर जबलपुर मंडल से जुड़ने वाले रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग की रफ्तार बढ़ रही है, वहीं मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी के महत्वपूर्ण रेलमार्ग की तीसरी लाइन की योजना अभी अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रही है। इस दोहरी लाइन वाले करीब 519 किमी लंबे रेलखंड पर प्रतिदिन औसतन दो से ज्यादा यात्री और मालगाड़ियों का संचालन होता है।

    ट्रेनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले ट्रैक क्षमता कम होने से कई बार यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों की समयबद्धता पर पड़ रहा है। ट्रेनों की धीमी चाल और विलंब के कारण यात्रियों को समस्या से जूझना पड़ रहा है।

    रेल बोर्ड भेजा गया डीपीआर
    पश्चिम मध्य रेल की ओर से मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी रेलखंड की तीसरी लाइन के लिए सर्वे कर डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है। डीपीआर परीक्षण के लिए रेल बोर्ड भेजी गई है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है।

    इसके चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह रेलमार्ग कोलकाता-मुंबई के पुराने और महत्वपूर्ण रेल रूट का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश और बिहार को महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत से जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। जबलपुर मंडल के इस हिस्से पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी लगातार दबाव रहता है।

    अतिरिक्त ट्रैक नहीं होने के कारण एक ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी ट्रेन को रोकने की स्थिति कई जगह बनती है।

    कनेक्टिंग रूट पर मल्टीट्रैकिंग तेज
    मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी से जुड़े रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग का काम आगे बढ़ चुका है। मानिकपुर-प्रयागराज के बीच उत्तर मध्य रेलवे ने तीसरी लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा कर निर्माण शुरू कर दिया है। कटनी-बीना रेलखंड पर तीसरी लाइन तैयार हो चुकी है।

    चौथी लाइन को मिली स्वीकृति
    कटनी-शहडोल-अनूपपुर रेलखंड पर चौथी लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं इटारसी-भोपाल और इटारसी-नागपुर रेलखंड पर भी चौथी लाइन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में बीच के मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी हिस्से की तीसरी लाइन अभी स्वीकृति के इंतजार में है।

     

  • लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, इस दिन मिल सकते हैं महिलाओं को ₹1500

    लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, इस दिन मिल सकते हैं महिलाओं को ₹1500

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चल रही लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि इस बार योजना की 41वीं किस्त जारी होनी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है।

    इस बार लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस बार महिलाओं के बैंक खाते में 1500 रुपये की अगली राशि आखिर कब तक आएगी? तो चलिए बिना देर किए इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं। 

    कब आएगी लाडली बहना योजना की 41 किस्त?
    अगर आप भी लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो अभी सरकार की तरफ से इसकी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि माना जा रहा है कि लाडली बहनों को उनकी अगली किस्त के 1500 रुपये 10 से 15 अक्टूबर के बीच मिल जाएंगे। हालांकि किस्त के जारी होने से पहले लाभार्थी बहनों को कुछ चीजें चेक कर लेनी चाहिए। सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है। इसके अलावा ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए, वरना पैसे बैंक में नहीं आएंगे।

    1500 रुपये पाने के लिए कौन से 3 काम करवाना जरूरी है?

    पहला काम

        लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली किस्त के 1500 रुपये सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजे जाते हैं
        इसलिए बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होना जरूरी है
        अगर बैंक खाते की जानकारी गलती है, तो आपकी किस्त अटक सकती है

    दूसरा काम

        लाभार्थी यह जरूर चेक कर लें कि उनका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक है या नहीं
        साथ ही बैंक खाते में डीबीटी सुविधा भी एक्टिव होनी चाहिए
        अगर ऐसा है, तो बेहतर है वरना किस्त प्राप्त करने में आपको दिक्कत हो सकती है

    तीसरा काम

        लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली किस्त का लाभ लेने के लिए आपको ई-केवाईसी भी करवानी होती है
        अगर आप ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं तो आपकी किस्त अटक सकती है
        इसलिए ये जरूर चेक करें कि आपकी केवाईसी हो रखी है या नहीं

    लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आ सकती है?

        लाड़ली बहना योजना के तहत सरकार सामान्य तौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी कर देती है
        इसी आधार पर 41वीं किस्त के भी इसी समय के बीच आने की उम्मीद है यानी 10 से 15 तारीख के बीच
        हालांकि, अभी सरकार की तरफ से तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है

    बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत?

    अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं। 

     

     

     

  • लांजी के जंगल में दिखने लगे हाथी-बाघ, नवेगांव-नगझीरा और कान्हा को जोड़ रहा वन्यजीव कॉरिडोर

    लांजी के जंगल में दिखने लगे हाथी-बाघ, नवेगांव-नगझीरा और कान्हा को जोड़ रहा वन्यजीव कॉरिडोर

    बालाघाट
     मध्य प्रदेश का लांजी क्षेत्र अब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आने वाले वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक रास्ता बनता जा रहा है। पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र के जंगलों से होकर वन्यजीव नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य और कान्हा टाइगर रिजर्व के बीच आवाजाही कर रहे हैं। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कट्टीपार के जंगल इस प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे की अहम कड़ी बनकर उभरे हैं।

    लांजी से पश्चिम दिशा में नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य करीब 80 किलोमीटर और पूर्व में कान्हा टाइगर रिजर्व करीब 100 किलोमीटर दूर है। दोनों बड़े वन क्षेत्रों के बीच मौजूद लगातार फैला जंगल वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही का प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराता है।

    हाथी ने 15 दिन तक किया विचरण
    अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से आया एक हाथी कट्टीपार के रास्ते बालाघाट पहुंचा था। हाथी ने किरनापुर और हट्टा क्षेत्र के जंगलों में करीब 15 दिन तक विचरण किया। इसके बाद वह उकवा के जंगलों से होते हुए कान्हा की दिशा में चला गया।यह इस गलियारे से हाथियों की आवाजाही का पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी इसी रास्ते से तीन हाथियों के गुजरने की जानकारी सामने आई थी।

    नवेगांव-नगझीरा की बाघिन भी पहुंची थी लांजी
    वन्यजीवों की आवाजाही का एक और उदाहरण वर्ष 2025 में सामने आया, जब नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य की एक बाघिन लांजी-किरनापुर क्षेत्र में पहुंची। बाघिन करीब एक महीने तक इस इलाके के जंगलों में विचरण करती रही और इसके बाद वापस लौट गई।इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    23 बीटों में बाघ से लेकर बायसन तक मौजूद

    दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र का विस्तार करीब 23 हजार हेक्टेयर में है। यहां 23 बीट हैं, जिनमें बाघ, तेंदुआ, बायसन और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की जाती है।

    लांजी और महाराष्ट्र की सीमा के बीच से बाघ नदी बहती हुई किरनापुर क्षेत्र की ओर आती है। नदी के दोनों तरफ जंगल होने के कारण गर्मी के मौसम में जब पानी के स्रोत सीमित होते हैं, तब नवेगांव-नगझीरा क्षेत्र के वन्यजीव नदी पार कर इस ओर आ जाते हैं।

    कुछ यहीं बना लेते हैं ठिकाना
    वन विभाग के अनुसार, दूसरे वन क्षेत्रों से आने वाले वन्यजीव इस इलाके में कई दिनों तक विचरण करते हैं। इनमें से कुछ वापस अपने पुराने क्षेत्र में लौट जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक इसी क्षेत्र में बने रहते हैं।

    पश्चिम लांजी सामान्य के वन परिक्षेत्र अधिकारी सपन ताम्रकार के मुताबिक, कान्हा और नवेगांव-नगझीरा के बीच पश्चिम लांजी सामान्य का जंगल प्राकृतिक गलियारे की तरह काम कर रहा है। दोनों वन क्षेत्रों से वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

    बालाघाट बना बाघों का नया ठिकाना, बढ़ती संख्या से वन विभाग अलर्ट, 200 से ज्यादा टाइगर

    मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है. देश भर में साल 2014 से 2022 के बीच 65 प्रतिशत आबादी बढ़ी है. इसमें सिर्फ एमपी में 155 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में एमपी टाइगर की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है. इसमें अकेले में बालाघाट में अकेले 200 से ज्यादा बाघ होने की संभावना है. इसी बीच बालाघाट में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। 

    दरअसल, बालाघाट के कान्हा पेंच कॉरिडोर यानी दक्षिण सामान्य वन मंडल में 18 बाघ और 27 तेंदुए दर्ज हुए है. ऐसे में एमपी को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन जितनी तेजी से बाघों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से बाघों और मानव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है। 

    दक्षिण बालाघाट बना बाघों का आशियाना
    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नई रिपोर्ट में एक जानकारी सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण बालाघाट के वन मंडलों में बड़े मांसाहारी वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है. ऐसे में जिस इलाके को कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के बीच बाघों के गूजरने का गलियारा नहीं माना जाता है. वह अब सिर्फ एक रास्ता नहीं बल्कि बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्य प्राणियों का अहम इलाका भी बन गया  है.  दूसरी तरफ बाघों की बढ़ती आबादी और सिकुड़ता जंगल कई चिंताएं पैदा कर रहा है. इसमें सड़क निर्माण, माइनिंग, मानव-वन्य संघर्ष और बाघों की टेरिटोरियल फाइट भी शामिल है। 

    जानिए कितने बाघ और कितने तेंदुआ
    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नवंबर 2021 में दक्षिण बालाघाट के लालबर्रा और कटंगी वन क्षेत्रों में 71 कैमरा ट्रैप लगाए गए. इसमें कैमरों की मदद से 215 वर्ग किलोमीटर इलाके में 25 दिनों तक निगरानी रखी गई. इस दौरान बाघों के 262 और 154 फोटो मिले. इसी के आधार पर 18 अलग-अलग बाघ और 27 तेंदुए की पहचान हुई. इसके अलावा कैमरे ने 24 स्तनधारी प्रजातियों को भी कैद किया. इसमें भेड़िया, सियार, रीछ या स्लॉथ बेयर, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, बार्किंग डियर और साही जैसी कई प्रजातियां शामिल है। 

    क्यों भा रहा बाघों को यह ठिकाना 
    बालाघाट को दो नेशनल पार्कों (कान्हा और पेंच) का कॉरिडोर कहा जाता है. दरअसल, जब बाघों की आबादी कम हुआ करती थी तब यहीं से बाघ गुजरते थे. बालाघाट सीसीएफ गौरव चौधरी ने बताया कि यह इलाका बाघों  के प्रजनन के लिए अनुकूल वातारण मिलता गया. ऐसे में यहाँ पर आबादी भी बढ़ती गई. दूसरी तरफ यह पर बाघों के लिए शिकार और आराम की भी पर्याप्त व्यवस्था है. इसके अलावा जंगल और गांव पास-पास ही है. ऐसे में बाघों को आसान शिकार मिलते हैं. ऐसे में कॉरिडोर ही अब बाघों का ठिकाना बनता गया। 

  • MP में निवेश बढ़ाने CM यादव की पहल तेज, मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद

    MP में निवेश बढ़ाने CM यादव की पहल तेज, मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज  8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे।

    मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा।

    निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा।

    मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क

    मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो।

    मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।

     

  • Vande Bharat vs Amrit Bharat: स्पीड, कोच, दरवाजे और किराये में कितना अंतर? जानें पूरी डिटेल

    Vande Bharat vs Amrit Bharat: स्पीड, कोच, दरवाजे और किराये में कितना अंतर? जानें पूरी डिटेल

    नई दिल्ली
    अमृत भारत एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों ही भारतीय रेलवे की नई पीढ़ी की ट्रेनें हैं, जिन्हें यात्रा के समय को कम करने और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है। 

    दरअसल, पटरियों पर 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की सफलता के बाद अब 'अमृत भारत एक्सप्रेस' भी देश के प्रमुख रेल मार्गों पर रफ्तार भर रही है. हालांकि ये दोनों ही ट्रेनें भारतीय रेल के आधुनिक दौर की मिसाल हैं, लेकिन अपनी तकनीक, किराये और सुविधाओं के मामले में एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं. आइए दोनों ट्रेनों के बीच 5 बड़े अंतर जानते हैं. दोनों ट्रेनों की टेक्नोलॉजी, क्लास और लक्षित यात्रियों में बड़ा अंतर है। 

    1. एसी बनाम नॉन-एसी
    वंदे भारत एक्सप्रेस: यह पूरी तरह से एक एयर-कंडीशनर (AC) ट्रेन है. इसमें यात्रियों के लिए केवल 'एसी चेयर कार', 'एक्सीक्यूटिव क्लास' और नए वेरिएंट्स में 'एसी स्लीपर' की सुविधा दी गई है। 

    अमृत भारत एक्सप्रेस: यह एक पूरी तरह से नॉन-एसी ट्रेन है. इसे विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आम यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें केवल 'स्लीपर क्लास' और 'अनारक्षित जनरल डिब्बे' शामिल हैं। 

    2. दोनों के इंजन में भी अंतर 
    वंदे भारत: यह भारत की पहली बिना इंजन वाली (Self-Propelled) ट्रेनसेट है. मेट्रो की तर्ज पर इसके डिब्बों के नीचे ही मोटर लगे होते हैं, जिससे यह सेकंडों में बेहद तेज रफ्तार पकड़ लेती है। 

    अमृत भारत: इस ट्रेन में आगे और पीछे दो शक्तिशाली लोकोमोटिव 'WAP-5' इंजन लगाए गए हैं, जो 'पुश-पुल तकनीक' पर काम करते हैं. आगे वाला इंजन ट्रेन को खींचता है और पीछे वाला धक्का देता है, इस तकनीक से ट्रेन बिना झटके के तेजी से स्पीड पकड़ती है और समय की बचत करती है। 

    3. रफ्तार और किराया
    वंदे भारत: 160 से 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम यह ट्रेन प्रीमियम श्रेणी में आती है. इसका किराया राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस के समकक्ष या उससे थोड़ा अधिक है. वंदे भारत मुख्य रूप से इंटरसिटी (200 से 600 किमी) और लंबी दूरी के रूटों को कवर करती है। 

    अमृत भारत: 130 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चलने वाली यह ट्रेन किफायती सफर का बेहतरीन विकल्प है. इसका किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों जितना ही रखा गया है, ताकि आम आदमी भी कम खर्च में आरामदायक लंबी दूरी तय कर सकें. अमृत भारत मुख्य रूप से 800 से 1500+ किमी की लंबी दूरी वाले राज्यों/शहरों को जोड़ती है। 

    4. यात्री सेगमेंट अलग-अलग
    जहां वंदे भारत का मुख्य ध्यान बिजनेस ट्रैवलर्स, कॉर्पोरेट पेशेवरों और कम समय में सफर पूरा करने वाले यात्रियों पर है, वहीं अमृत भारत एक्सप्रेस को मुख्य रूप से देश के प्रवासियों, मजदूरों और आम बजट यात्रियों की लंबी दूरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

    5. खान-पान और बाकी सुविधाएं
    वंदे भारत में ट्रेन खान-पान के लिए ऑन-बोर्ड कैटरिंग/पेंट्री कार सुविधा उपलब्ध है. जबकि अमृत भारत में कैटरिंग शामिल नहीं है, हालांकि बोतल होल्डर, चार्जिंग पॉइंट और पैक्ड स्नैक टेबल उपलब्ध है. वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे हैं, वहीं अमृत भारत में मैन्युअल दरवाजे हैं। 

    भारतीय रेलवे की मानें तो 'वंदे भारत' जहां देश में हाई-स्पीड प्रीमियम सफर का चेहरा है, वहीं 'अमृत भारत एक्सप्रेस' आम नागरिक के लिए बजट-फ्रेंडली, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं का नया पर्याय बनकर उभरी है। 

  • शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि:
    शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। पूरे 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। वैसे नवरात्रि की तैयारियां कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती हैं। खासकर घर की साफ-सफाई का काम तो जल्दी से जल्दी शुरू हो जाता है। इस दौरान सिर्फ धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी चीजों को भी हटाना भी जरूरी है जिनका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हुआ है। कई बार हम पुरानी और बेकार चीजों को ये सोचकर संभालकर रखते जाते हैं कि ये बाद में काम आएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और घर में बेकार की चीजें बढ़ती जाती हैं। ऐसे में नवरात्रि के लिए आप भी घर की सफाई करने वाले हैं तो ये चीजें हटाना ना भूलें।

    रसोई से निकालें टूटे हुए बर्तन और सामान
    रसोई में रखे टूटे-फूटे बर्तन, चटके हुए कप-प्लेट, खराब डिब्बे और लंबे समय तक इस्तेमाल ना हुए सामान को अलग कर दें। इनकी वजह से रसोई साफ करने के बाद भी भरी-भरी और अव्यवस्थित नजर आती है। हो सके तो त्योहरों से पहले पुराने डिब्बे बदलकर नए और मजबूत डिब्बों से रिप्लेस कर दें।

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान
    पुराने और बेकार चार्जर, खराब इयरफोन, केबल और काम ना करने वाले इलेक्ट्रिक गैजेट्स या दूसरे सामान को यूं ही घर में इक्कठा करने से कोई फायदा नहीं है। ये दोबारा काम भी नहीं आते हैं और फालतू की जगह घेरकर रखते हैं। इसलिए सफाई के दौरान इन्हें भी घर से निकालने का इंतजाम करें।

    पुराने कपड़े और जूते-चप्पल
    अलमारी में कई ऐसे कपड़ों का ढेर लगा हुआ रहता है, जिन्हें कोई पहनता भी नहीं है और वो दोबारा इस्तेमाल भी नहीं होते। ऐसे ही जूते-चप्पल के ढेर भी रखे रहते हैं। सफाई के दौरान इन्हें भी निकालकर अलग करें। इसमें से ठीक सामान को किसी जरूरतमंद को डोनेट किया जा सकता है।

    मंदिर से हटाएं टूटी हुई मूर्तियां
    घर के मंदिर में रखी हुई खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को भी अलग कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मूर्तियों को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। इन्हें किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या उचित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कर दें।

    बंद घड़ी और टूटा हुआ सामान
    घर में बंद और टूटी हुई घड़ी रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही ये फालतू की जगह भी घेरकर रखती है। इसके अलावा टूटे हुए शोपीस, चटका हुआ शीशा और खराब सामान को भी अलग निकालकर रख दें। इससे घर की सफाई के साथ-साथ अनावश्यक सामान भी कम होगा।

    सूखे हुए खराब पौधे
    अगर आपके घर में पूरी तरह सूख चुके या खराब हो चुके पौधे रखे हैं तो उन्हें भी नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से अलग कर दें। इसके अलावा सूखे हुए फूल या फूलों की माला को उचित व्यवस्था के साथ घर से हटा दें।

    नवरात्रि से पहले हटाएं तामसिक चीजें
    नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से तामसिक चीजें भी हटा देनी चाहिए। अगर आपके घर पुरानी शराब की बोतल इक्कठा हैं, तो उन्हें कबाड़ में दे दें। इसके अलावा रसोई और फ्रिज से मांस, अंडे और प्याज-लहसुन भी निकाल दें।

  • यूपी में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स का निर्माण तेज, महिलाओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    यूपी में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स का निर्माण तेज, महिलाओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    योगी सरकार तेजी से बना रही सुरक्षित और सुविधाजनक पिंक टॉयलेट

    189 नगरीय निकायों में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण की प्रक्रिया प्रगति पर

    प्रदेश के नगरीय निकायों में अब तक बनाए जा चुके हैं 950 पिंक टॉयलेट

    स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत महिला केंद्रित स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार

    बाजारों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर विकसित किए जा रहे पिंक टॉयलेट

    लखनऊ,
    शहरी स्वच्छता व्यवस्था को अधिक समावेशी और महिला केंद्रित बनाने के लिए योगी सरकार ने महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में पिंक टॉयलेट विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के नगरीय निकायों में अब तक करीब 950 पिंक टॉयलेट बनाए जा चुके हैं। 

    महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित हो रहे पिंक टॉयलेट

    विभागीय जानकारी के मुताबिक, 189 नगरीय निकायों में करीब 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण कार्य संबंधित प्रक्रिया प्रगति पर है। इन ब्लॉक्स में कुल 1,100 सीटें होंगी। वर्ष 2025 में प्रदेश के नगरीय निकायों में पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण का आवंटन किया गया था। इन पिंक टॉयलेट्स को विशेष रूप से महिला उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। 

    जेंडर-फ्रेंडली स्वच्छता सुविधाओं के साथ रखरखाव पर विशेष फोकस

    शहरों के बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अलग, सुरक्षित और सुविधाजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नगर विकास विभाग का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए बेहतर स्वच्छता सुविधाएं शहरी जीवन की आवश्यक जरूरतों में शामिल हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नगरीय निकायों को जेंडर-फ्रेंडली स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ मौजूदा स्वच्छता परिसंपत्तियों के बेहतर रखरखाव और उपयोग योग्य स्थिति में बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    पिंक टॉयलेट्स से शहरी स्वच्छता व्यवस्था बनी अधिक सुरक्षित और समावेशी

    सरकार की इस पहल के तहत महिलाओं और बालिकाओं को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ स्वच्छता व्यवस्था में उनकी आवश्यकताओं को केंद्र में रखने का प्रयास किया जा रहा है। पिंक टॉयलेट्स के विस्तार से शहरों में महिला-अनुकूल सार्वजनिक सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा तथा नगरीय स्वच्छता व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक, सम्मानजनक और समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।

    महिलाओं की सुविधा के अनुसार बनेंगे पिंक शौचालय

    नगर विकास विभाग के सचिव अनुज कुमार झा ने कहा कि महिला सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत आवश्यकतानुसार पिंक शौचालयों के निर्माण के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिन नगरीय निकायों में इसकी आवश्यकता होगी, वहां मांग के अनुसार पिंक शौचालयों की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नगर विकास विभाग तत्पर है।

  • ₹3,800 करोड़ की स्वामित्व योजना उलझी, पटवारियों ने रजिस्ट्रियों पर साइन से किया इनकार

    ₹3,800 करोड़ की स्वामित्व योजना उलझी, पटवारियों ने रजिस्ट्रियों पर साइन से किया इनकार

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत तैयार होने वाल संपत्ति दस्तावेजों का काम शुरू ही नहीं हो पाया हैं। पटवारियों के साा ही अब तहसीलदार भी विरोध में उतर आए हैं। एक साथ पटवारी के हस्ताक्षर को लेकर राजस्व अमले ने सवाल उठाए हैं। मंगलवार को तहसीलदार संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, मध्यप्रदेश पटवारी संघ और प्रांतीय पटवारी संघ ने संयुक्त रूप से कहा कि पटवारी योजना के काम में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं, लेकिन जिस संपत्ति में उनका कोई स्वामित्व या कानूनी अधिकार नहीं है, उसके दस्तावेज पर उन्हें ‘निष्पादक’  के रूप में हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है, इसका वैधानिक आधार स्पष्ट होना चाहिए। संघों ने 13 अगस्त 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें पटवारी को दस्तावेज के निष्पादन की भूमिका दिए जाने की बात है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकार किस अधिनियम, नियम, राजपत्र या वैध डेलिगेशन के तहत मिला है। संघों ने आदेश से जुड़ी मूल फाइल, अनुमोदन और रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है। 

    रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेज पर हस्ताक्षर अलग-अलग काम
    राजस्व अमले का तर्क है कि जमीन का सर्वे, सीमांकन, मौके का सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करना अलग काम है, जबकि किसी संपत्ति संबंधी कानूनी दस्तावेज को शासन या स्वामी की ओर से निष्पादित करना अलग। उनके मुताबिक मैदानी और रिकॉर्ड संबंधी जिम्मेदारी होने मात्र से पटवारी को संपत्ति दस्तावेज execute करने का अधिकार नहीं मिल जाता। संघों ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और भू-अभिलेख नियमावली 2020 का हवाला देते हुए कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसमें पटवारी को स्वतंत्र रूप से इस तरह की एग्जीक्यूशनरी पावर दी गई हो। 

    हरियाणा-राजस्थान का हवाला
    संघ ने दावा किया कि हरियाणा और राजस्थान में अधिकार अभिलेख देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में विवाद होने पर इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    3500 से 4000 रजिस्ट्रियां रोज
    प्रदेश में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां होती हैं। ऐसे में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्रियों पर रोक का सीधा असर ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले मालिकाना हक की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

    पटवारियों की अन्य मांगें

        2100 से बढ़ाकर 2400 रुपये ग्रेड पे करने की मांग।
        पीएम किसान, सीएम किसान और फार्मर आईडी का काम कृषि विभाग को देने की मांग।
        अतिरिक्त काम का भार कम करने की मांग।
        सरकार कार्रवाई करती है तो सामूहिक रणनीति बनाने की चेतावनी।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
    संघों ने के. गोपी बनाम द सब-रजिस्ट्रार एवं अन्य मामले में 7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि इस फैसले में दस्तावेज के निष्पादन और उससे जुड़े अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जब पटवारी के पास संबंधित संपत्ति में कोई टाइटल,राइट याइंटरेस्ट नहीं है, तो उसे एक्जीक्यूटेंट की भूमिका किस कानूनी अधिकार से दी गई है। संघों ने संविधान के अनुच्छेद 299 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेज राज्य की ओर से निष्पादित किए जा रहे हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि पटवारी को राज्य की ओर से ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और राज्य को उससे बाध्य करने की शक्ति किस प्रावधान से मिली है।  

    पंजीयन की भूमिका अलग, निष्पादन पर सवाल
    संघों के अनुसार स्वामित्व प्रक्रिया में पंजीयन और दस्तावेज का निष्पादन दो अलग कानूनी कार्य हैं। पंजीयन के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक या प्रभारी राजस्व निरीक्षक को Sub-Registrar की भूमिका दिए जाने का उल्लेख है, लेकिन पटवारी को एक्जीक्यूटेंट बनाने का अलग वैधानिक आधार स्पष्ट नहीं है। राजस्व अमले का कहना है कि ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रूथिंग, सीमांकन, पहचान और रिकॉर्ड सत्यापन जैसे काम पटवारी पहले की तरह करते रहेंगे। आपत्ति केवल अंतिम संपत्ति दस्तावेज पर हस्ताक्षर और उससे जुड़ी कानूनी जवाबदेही को लेकर है। 

    योजना के खिलाफ नहीं, भूमिका स्पष्ट करने की मांग
    संघों ने साफ किया कि उनकी आपत्ति स्वामित्य योजना के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक योजना से ग्रामीणों को संपत्ति का रिकॉर्ड मिल रहा है और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का रास्ता भी आसान हो रहा है। संघों की मांग है कि दस्तावेज का निष्पादन कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, एसडीओ/एसडीएम या शासन द्वारा विधि-सम्मत रूप से अधिकृत सक्षम अधिकारी से कराया जाए। साथ ही पटवारियों की मैदानी और अभिलेखीय भूमिका स्पष्ट रखते हुए उन्हें लिखित मार्गदर्शन और कानूनी संरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि जिस काम की वैधानिक अधिकारिता स्पष्ट नहीं है, उसमें व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही लेकर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। 

  • मां दुर्गा के आगमन का वाहन बना चर्चा का विषय, 2026 में हाथी की सवारी को क्यों माना जा रहा शुभ?

    मां दुर्गा के आगमन का वाहन बना चर्चा का विषय, 2026 में हाथी की सवारी को क्यों माना जा रहा शुभ?

      Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नवरात्रि शुरू होने के दिन के आधार पर माता के आगमन के वाहन को लेकर एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है। इसी मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।

    माता की सवारी को लेकर भक्तों में हर साल खास उत्सुकता रहती है। धार्मिक परंपराओं में हाथी को शुभता, सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और धन-धान्य से जोड़कर देखा गया है। इसलिए 2026 में मां दुर्गा का हाथी पर आगमन भक्तों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
     
    2026 में हाथी पर आएंगी मां दुर्गा
    प्रचलित मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो माता का वाहन हाथी माना जाता है। शनिवार या मंगलवार को शुरुआत होने पर घोड़ा, बुधवार को नाव और गुरुवार या शुक्रवार को डोली या पालकी से आगमन की मान्यता बताई जाती है। चूंकि 2026 में नवरात्रि की शुरुआत रविवार को हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है।

    हाथी पर आगमन को क्यों माना जाता है शुभ?
    हिंदू धार्मिक परंपरा में हाथी को शक्ति, स्थिरता, समृद्धि और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है। इसी वजह से देवी के हाथी पर आगमन को शुभ संकेत माना जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उपज और समाज में सुख-समृद्धि से भी जोड़ा गया है। यानी भक्तों की आस्था के अनुसार इस बार मां का गज पर आगमन खुशहाली और समृद्धि का संदेश लेकर आ सकता है।

    क्या मां का स्थायी वाहन सिंह नहीं है?
    धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा का प्रमुख और स्थायी वाहन सिंह माना जाता है। वहीं नवरात्रि के दौरान माता के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों का उल्लेख कुछ परंपराओं में मिलता है। इसलिए हाथी पर आगमन की बात का अर्थ यह नहीं है कि मां दुर्गा का सिंह से संबंध बदल गया है। यह नवरात्रि के आगमन से जुड़ी विशेष धार्मिक मान्यता है।
     
    नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
    शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ देवी आराधना शुरू होगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को होगी।
     
    मां की विदाई किस वाहन से होगी?
    माता के आगमन की तरह प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं और इसमें विजयादशमी के दिन के वार को आधार माना जाता है। 2026 में विजयादशमी मंगलवार को पड़ रही है। इस वजह से अलग-अलग परंपराओं में प्रस्थान वाहन को लेकर घोड़े या चरणायुध/कुक्कुट का जिक्र मिलता है।