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  • शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि:
    शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। पूरे 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। वैसे नवरात्रि की तैयारियां कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती हैं। खासकर घर की साफ-सफाई का काम तो जल्दी से जल्दी शुरू हो जाता है। इस दौरान सिर्फ धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी चीजों को भी हटाना भी जरूरी है जिनका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हुआ है। कई बार हम पुरानी और बेकार चीजों को ये सोचकर संभालकर रखते जाते हैं कि ये बाद में काम आएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और घर में बेकार की चीजें बढ़ती जाती हैं। ऐसे में नवरात्रि के लिए आप भी घर की सफाई करने वाले हैं तो ये चीजें हटाना ना भूलें।

    रसोई से निकालें टूटे हुए बर्तन और सामान
    रसोई में रखे टूटे-फूटे बर्तन, चटके हुए कप-प्लेट, खराब डिब्बे और लंबे समय तक इस्तेमाल ना हुए सामान को अलग कर दें। इनकी वजह से रसोई साफ करने के बाद भी भरी-भरी और अव्यवस्थित नजर आती है। हो सके तो त्योहरों से पहले पुराने डिब्बे बदलकर नए और मजबूत डिब्बों से रिप्लेस कर दें।

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान
    पुराने और बेकार चार्जर, खराब इयरफोन, केबल और काम ना करने वाले इलेक्ट्रिक गैजेट्स या दूसरे सामान को यूं ही घर में इक्कठा करने से कोई फायदा नहीं है। ये दोबारा काम भी नहीं आते हैं और फालतू की जगह घेरकर रखते हैं। इसलिए सफाई के दौरान इन्हें भी घर से निकालने का इंतजाम करें।

    पुराने कपड़े और जूते-चप्पल
    अलमारी में कई ऐसे कपड़ों का ढेर लगा हुआ रहता है, जिन्हें कोई पहनता भी नहीं है और वो दोबारा इस्तेमाल भी नहीं होते। ऐसे ही जूते-चप्पल के ढेर भी रखे रहते हैं। सफाई के दौरान इन्हें भी निकालकर अलग करें। इसमें से ठीक सामान को किसी जरूरतमंद को डोनेट किया जा सकता है।

    मंदिर से हटाएं टूटी हुई मूर्तियां
    घर के मंदिर में रखी हुई खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को भी अलग कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मूर्तियों को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। इन्हें किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या उचित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कर दें।

    बंद घड़ी और टूटा हुआ सामान
    घर में बंद और टूटी हुई घड़ी रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही ये फालतू की जगह भी घेरकर रखती है। इसके अलावा टूटे हुए शोपीस, चटका हुआ शीशा और खराब सामान को भी अलग निकालकर रख दें। इससे घर की सफाई के साथ-साथ अनावश्यक सामान भी कम होगा।

    सूखे हुए खराब पौधे
    अगर आपके घर में पूरी तरह सूख चुके या खराब हो चुके पौधे रखे हैं तो उन्हें भी नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से अलग कर दें। इसके अलावा सूखे हुए फूल या फूलों की माला को उचित व्यवस्था के साथ घर से हटा दें।

    नवरात्रि से पहले हटाएं तामसिक चीजें
    नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से तामसिक चीजें भी हटा देनी चाहिए। अगर आपके घर पुरानी शराब की बोतल इक्कठा हैं, तो उन्हें कबाड़ में दे दें। इसके अलावा रसोई और फ्रिज से मांस, अंडे और प्याज-लहसुन भी निकाल दें।

  • यूपी में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स का निर्माण तेज, महिलाओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    यूपी में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स का निर्माण तेज, महिलाओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

    योगी सरकार तेजी से बना रही सुरक्षित और सुविधाजनक पिंक टॉयलेट

    189 नगरीय निकायों में 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण की प्रक्रिया प्रगति पर

    प्रदेश के नगरीय निकायों में अब तक बनाए जा चुके हैं 950 पिंक टॉयलेट

    स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत महिला केंद्रित स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार

    बाजारों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर विकसित किए जा रहे पिंक टॉयलेट

    लखनऊ,
    शहरी स्वच्छता व्यवस्था को अधिक समावेशी और महिला केंद्रित बनाने के लिए योगी सरकार ने महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में पिंक टॉयलेट विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के नगरीय निकायों में अब तक करीब 950 पिंक टॉयलेट बनाए जा चुके हैं। 

    महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित हो रहे पिंक टॉयलेट

    विभागीय जानकारी के मुताबिक, 189 नगरीय निकायों में करीब 275 पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण कार्य संबंधित प्रक्रिया प्रगति पर है। इन ब्लॉक्स में कुल 1,100 सीटें होंगी। वर्ष 2025 में प्रदेश के नगरीय निकायों में पिंक टॉयलेट ब्लॉक्स के निर्माण का आवंटन किया गया था। इन पिंक टॉयलेट्स को विशेष रूप से महिला उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। 

    जेंडर-फ्रेंडली स्वच्छता सुविधाओं के साथ रखरखाव पर विशेष फोकस

    शहरों के बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अलग, सुरक्षित और सुविधाजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नगर विकास विभाग का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए बेहतर स्वच्छता सुविधाएं शहरी जीवन की आवश्यक जरूरतों में शामिल हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नगरीय निकायों को जेंडर-फ्रेंडली स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ मौजूदा स्वच्छता परिसंपत्तियों के बेहतर रखरखाव और उपयोग योग्य स्थिति में बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    पिंक टॉयलेट्स से शहरी स्वच्छता व्यवस्था बनी अधिक सुरक्षित और समावेशी

    सरकार की इस पहल के तहत महिलाओं और बालिकाओं को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ स्वच्छता व्यवस्था में उनकी आवश्यकताओं को केंद्र में रखने का प्रयास किया जा रहा है। पिंक टॉयलेट्स के विस्तार से शहरों में महिला-अनुकूल सार्वजनिक सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा तथा नगरीय स्वच्छता व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक, सम्मानजनक और समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।

    महिलाओं की सुविधा के अनुसार बनेंगे पिंक शौचालय

    नगर विकास विभाग के सचिव अनुज कुमार झा ने कहा कि महिला सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत आवश्यकतानुसार पिंक शौचालयों के निर्माण के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिन नगरीय निकायों में इसकी आवश्यकता होगी, वहां मांग के अनुसार पिंक शौचालयों की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नगर विकास विभाग तत्पर है।

  • ₹3,800 करोड़ की स्वामित्व योजना उलझी, पटवारियों ने रजिस्ट्रियों पर साइन से किया इनकार

    ₹3,800 करोड़ की स्वामित्व योजना उलझी, पटवारियों ने रजिस्ट्रियों पर साइन से किया इनकार

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत तैयार होने वाल संपत्ति दस्तावेजों का काम शुरू ही नहीं हो पाया हैं। पटवारियों के साा ही अब तहसीलदार भी विरोध में उतर आए हैं। एक साथ पटवारी के हस्ताक्षर को लेकर राजस्व अमले ने सवाल उठाए हैं। मंगलवार को तहसीलदार संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, मध्यप्रदेश पटवारी संघ और प्रांतीय पटवारी संघ ने संयुक्त रूप से कहा कि पटवारी योजना के काम में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं, लेकिन जिस संपत्ति में उनका कोई स्वामित्व या कानूनी अधिकार नहीं है, उसके दस्तावेज पर उन्हें ‘निष्पादक’  के रूप में हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है, इसका वैधानिक आधार स्पष्ट होना चाहिए। संघों ने 13 अगस्त 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें पटवारी को दस्तावेज के निष्पादन की भूमिका दिए जाने की बात है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकार किस अधिनियम, नियम, राजपत्र या वैध डेलिगेशन के तहत मिला है। संघों ने आदेश से जुड़ी मूल फाइल, अनुमोदन और रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है। 

    रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेज पर हस्ताक्षर अलग-अलग काम
    राजस्व अमले का तर्क है कि जमीन का सर्वे, सीमांकन, मौके का सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करना अलग काम है, जबकि किसी संपत्ति संबंधी कानूनी दस्तावेज को शासन या स्वामी की ओर से निष्पादित करना अलग। उनके मुताबिक मैदानी और रिकॉर्ड संबंधी जिम्मेदारी होने मात्र से पटवारी को संपत्ति दस्तावेज execute करने का अधिकार नहीं मिल जाता। संघों ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और भू-अभिलेख नियमावली 2020 का हवाला देते हुए कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसमें पटवारी को स्वतंत्र रूप से इस तरह की एग्जीक्यूशनरी पावर दी गई हो। 

    हरियाणा-राजस्थान का हवाला
    संघ ने दावा किया कि हरियाणा और राजस्थान में अधिकार अभिलेख देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में विवाद होने पर इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    3500 से 4000 रजिस्ट्रियां रोज
    प्रदेश में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां होती हैं। ऐसे में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्रियों पर रोक का सीधा असर ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले मालिकाना हक की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

    पटवारियों की अन्य मांगें

        2100 से बढ़ाकर 2400 रुपये ग्रेड पे करने की मांग।
        पीएम किसान, सीएम किसान और फार्मर आईडी का काम कृषि विभाग को देने की मांग।
        अतिरिक्त काम का भार कम करने की मांग।
        सरकार कार्रवाई करती है तो सामूहिक रणनीति बनाने की चेतावनी।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
    संघों ने के. गोपी बनाम द सब-रजिस्ट्रार एवं अन्य मामले में 7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि इस फैसले में दस्तावेज के निष्पादन और उससे जुड़े अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जब पटवारी के पास संबंधित संपत्ति में कोई टाइटल,राइट याइंटरेस्ट नहीं है, तो उसे एक्जीक्यूटेंट की भूमिका किस कानूनी अधिकार से दी गई है। संघों ने संविधान के अनुच्छेद 299 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेज राज्य की ओर से निष्पादित किए जा रहे हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि पटवारी को राज्य की ओर से ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और राज्य को उससे बाध्य करने की शक्ति किस प्रावधान से मिली है।  

    पंजीयन की भूमिका अलग, निष्पादन पर सवाल
    संघों के अनुसार स्वामित्व प्रक्रिया में पंजीयन और दस्तावेज का निष्पादन दो अलग कानूनी कार्य हैं। पंजीयन के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक या प्रभारी राजस्व निरीक्षक को Sub-Registrar की भूमिका दिए जाने का उल्लेख है, लेकिन पटवारी को एक्जीक्यूटेंट बनाने का अलग वैधानिक आधार स्पष्ट नहीं है। राजस्व अमले का कहना है कि ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रूथिंग, सीमांकन, पहचान और रिकॉर्ड सत्यापन जैसे काम पटवारी पहले की तरह करते रहेंगे। आपत्ति केवल अंतिम संपत्ति दस्तावेज पर हस्ताक्षर और उससे जुड़ी कानूनी जवाबदेही को लेकर है। 

    योजना के खिलाफ नहीं, भूमिका स्पष्ट करने की मांग
    संघों ने साफ किया कि उनकी आपत्ति स्वामित्य योजना के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक योजना से ग्रामीणों को संपत्ति का रिकॉर्ड मिल रहा है और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का रास्ता भी आसान हो रहा है। संघों की मांग है कि दस्तावेज का निष्पादन कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, एसडीओ/एसडीएम या शासन द्वारा विधि-सम्मत रूप से अधिकृत सक्षम अधिकारी से कराया जाए। साथ ही पटवारियों की मैदानी और अभिलेखीय भूमिका स्पष्ट रखते हुए उन्हें लिखित मार्गदर्शन और कानूनी संरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि जिस काम की वैधानिक अधिकारिता स्पष्ट नहीं है, उसमें व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही लेकर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। 

  • मां दुर्गा के आगमन का वाहन बना चर्चा का विषय, 2026 में हाथी की सवारी को क्यों माना जा रहा शुभ?

    मां दुर्गा के आगमन का वाहन बना चर्चा का विषय, 2026 में हाथी की सवारी को क्यों माना जा रहा शुभ?

      Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नवरात्रि शुरू होने के दिन के आधार पर माता के आगमन के वाहन को लेकर एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है। इसी मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।

    माता की सवारी को लेकर भक्तों में हर साल खास उत्सुकता रहती है। धार्मिक परंपराओं में हाथी को शुभता, सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और धन-धान्य से जोड़कर देखा गया है। इसलिए 2026 में मां दुर्गा का हाथी पर आगमन भक्तों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
     
    2026 में हाथी पर आएंगी मां दुर्गा
    प्रचलित मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो माता का वाहन हाथी माना जाता है। शनिवार या मंगलवार को शुरुआत होने पर घोड़ा, बुधवार को नाव और गुरुवार या शुक्रवार को डोली या पालकी से आगमन की मान्यता बताई जाती है। चूंकि 2026 में नवरात्रि की शुरुआत रविवार को हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है।

    हाथी पर आगमन को क्यों माना जाता है शुभ?
    हिंदू धार्मिक परंपरा में हाथी को शक्ति, स्थिरता, समृद्धि और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है। इसी वजह से देवी के हाथी पर आगमन को शुभ संकेत माना जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उपज और समाज में सुख-समृद्धि से भी जोड़ा गया है। यानी भक्तों की आस्था के अनुसार इस बार मां का गज पर आगमन खुशहाली और समृद्धि का संदेश लेकर आ सकता है।

    क्या मां का स्थायी वाहन सिंह नहीं है?
    धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा का प्रमुख और स्थायी वाहन सिंह माना जाता है। वहीं नवरात्रि के दौरान माता के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों का उल्लेख कुछ परंपराओं में मिलता है। इसलिए हाथी पर आगमन की बात का अर्थ यह नहीं है कि मां दुर्गा का सिंह से संबंध बदल गया है। यह नवरात्रि के आगमन से जुड़ी विशेष धार्मिक मान्यता है।
     
    नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
    शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ देवी आराधना शुरू होगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को होगी।
     
    मां की विदाई किस वाहन से होगी?
    माता के आगमन की तरह प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं और इसमें विजयादशमी के दिन के वार को आधार माना जाता है। 2026 में विजयादशमी मंगलवार को पड़ रही है। इस वजह से अलग-अलग परंपराओं में प्रस्थान वाहन को लेकर घोड़े या चरणायुध/कुक्कुट का जिक्र मिलता है।  

     

  • विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रत्येक नागरिक निभाए अपनी भागीदारी : मुख्यमंत्री  साय

    विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रत्येक नागरिक निभाए अपनी भागीदारी : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर 

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ समारोह में शामिल हुए। समारोह में आयोजित ‘नमो सेवा गाथा’ लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की संघर्ष से सेवा और सेवा से राष्ट्र निर्माण तक की प्रेरणादायी जीवन यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन देश के सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव का साक्षी है। 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण हुए हैं। लगभग 13 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री और 12 वर्ष से अधिक समय से देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यह यात्रा सेवा, सुशासन, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की प्रेरक गाथा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य किया है। देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर वे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ देश को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में शासन की योजनाओं का केंद्र गरीब, किसान, युवा, महिला और वंचित वर्ग बने हैं तथा विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हुई है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इस संकल्प को साकार करना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। विकसित भारत के निर्माण के साथ हमें विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए भी पूरी शक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान को 13 अलग-अलग बिंदुओं के माध्यम से जनभागीदारी से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सेवा, स्वच्छता, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री की जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘नमो सेवा गाथा’ के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जीवन के विभिन्न पड़ावों, संघर्ष, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जानने का अवसर मिला। उनका जीवन विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।

    उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों से आगे बढ़कर अपने परिश्रम, अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भाव के माध्यम से देश का नेतृत्व करने तक की प्रधानमंत्री  मोदी की यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि संकल्प मजबूत हो और उद्देश्य जनसेवा का हो तो बड़ी से बड़ी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बस्तर में शांति और विकास का नया अध्याय

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को ऐतिहासिक सफलता मिली है।

    उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा और भय से प्रभावित रहे बस्तर में आज परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। जिन क्षेत्रों में कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और शासन की योजनाएं पहुंच रही हैं। बस्तर में शांति, विकास और जनविश्वास का नया दौर प्रारंभ हुआ है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश के प्रभावी रूप से नक्सलवाद मुक्त होने की उपलब्धि रेखांकित की थी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़े और वहां के युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर प्राप्त हों।

    किसानों की समृद्धि हमारी प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।  केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार किसान हित में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    महतारी वंदन से मजबूत हुआ महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्र की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक  20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देने के साथ परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी को भी मजबूत कर रही है।

    छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को मिल रहा अभूतपूर्व विस्तार

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग 51 हजार करोड़ रुपए के कार्य चल रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। नई रेल परियोजनाओं और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। बेहतर रेल नेटवर्क से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी नई गति मिलेगी।

    जनजातीय गांवों में मजबूत हो रही बुनियादी सुविधाएं

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनजातीय समाज का सम्मान, उनकी संस्कृति का संरक्षण और उनके क्षेत्रों का समग्र विकास प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में रहा है।

    उन्होंने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6,691 जनजातीय गांवों में आवास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में विकास की पहुंच बढ़ने से वहां रहने वाले परिवार तेजी से शासन की योजनाओं और सुविधाओं से जुड़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज हमारी संस्कृति और परंपराओं का गौरव है। सरकार का प्रयास है कि विकास की यात्रा में जनजातीय अंचल न केवल सहभागी बनें, बल्कि प्रदेश की प्रगति के प्रमुख केंद्र के रूप में आगे आएं।

    वैश्विक निवेश के मानचित्र पर उभर रहा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में भारत के प्रति बढ़े विश्वास का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। हमारी सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति, पारदर्शी प्रशासन और निवेश-अनुकूल वातावरण के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं।

    उन्होंने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंगापुर के उद्योग जगत के साथ हुई चर्चा में छत्तीसगढ़ के प्रति निवेशकों में व्यापक उत्साह देखने को मिला। उन्होंने बताया कि राज्य की नवीन औद्योगिक विकास नीति और निवेश-अनुकूल वातावरण से प्रभावित होकर 15 बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वन-टू-वन चर्चा में छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और छत्तीसगढ़ को आधुनिक उद्योग, तकनीक एवं नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित छत्तीसगढ़ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जो समृद्ध भी हो, आत्मनिर्भर भी हो और देश की विकास यात्रा में अग्रणी योगदान भी दे।

    सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत-2047 का निर्माण केवल सरकार का संकल्प नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से जुड़ा राष्ट्रीय लक्ष्य है।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने क्षेत्र में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए देश की आर्थिक प्रगति और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।  अग्रवाल ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

    कैबिनेट मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा, अर्थव्यवस्था, अधोसंरचना, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने देश की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी है।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से लेकर विकसित भारत-2047 के संकल्प तक प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के सामने ऐसे लक्ष्य रखे हैं, जिन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया है। उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा और राष्ट्र समर्पण की महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

    इस अवसर पर विधायक  सुनील सोनी,  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष मती हर्षिता पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • 3 दिन, लगातार बैठकें और बड़े नतीजे! छत्तीसगढ़ को ₹43,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, कौशल विकास पर करार

    3 दिन, लगातार बैठकें और बड़े नतीजे! छत्तीसगढ़ को ₹43,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, कौशल विकास पर करार

    ₹43,600 करोड़ की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं, कौशल विकास समझौता और वैश्विक साझेदारियां : छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्धियों से भरा रहा सिंगापुर दौरा

    तीन दिनों की लगातार बैठकों और संवाद से निवेश, कौशल विकास तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए द्वार खुले

    रायपुर
     मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर की सफल यात्रा के बाद आज रायपुर लौटा। तीन दिवसीय इस दौरे में प्रदेश को ₹43,600 करोड़ की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं। किसी एक विदेश यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ को मिले यह अब तक के सबसे बड़े निवेश प्रतिबद्धताओं में शामिल हैं।

    भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम-2026’ में भागीदारी के लिए देश से केवल छत्तीसगढ़ और हरियाणा का चयन किया गया था। सिंगापुर प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ ने ₹41,750 करोड़ के एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के निवेश प्रस्ताव के साथ कौशल विकास के क्षेत्र में ITE Education Services, Singapore के साथ महत्वपूर्ण एमओयू किया। वहीं Gardens by the Bay और Mandai Wildlife Group जैसी विश्वस्तरीय संस्थाओं के साथ हरित विकास, पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

    एआई डेटा सेंटर से सौर ऊर्जा और कृषि प्रसंस्करण तक बड़े निवेश

    सिंगापुर की Energy Capital Global (ECG) ने छत्तीसगढ़ में 100 मेगावाट क्षमता का एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने के लिए ₹41,750 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह परियोजना प्रदेश को देश की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ी पहल साबित हो सकती है।

    इसी प्रकार Sunstream Green Energy Pvt. Ltd. को सोलर क्षेत्र के साथ साथ 300 मेगावाट की सम्बन्धित बैटरी स्टोरेज और कंपोनेंट्स के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रस्ताव भी प्रस्ताव हुआ। वहीं 22 देशों में कार्यरत वैश्विक एग्रीबिजनेस समूह Valency International Pte Ltd को ₹350 करोड़ के एकीकृत एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए निवेश आमंत्रण दिया गया। इससे प्रदेश में कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन मजबूत होने के साथ किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के नए अवसर बनेंगे।

    इन निवेश प्रस्तावों का लाभ प्रदेश के विभिन्न वर्गों तक पहुंचेगा। युवाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-टेक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक उद्योगों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। स्थानीय स्टार्टअप और एमएसएमई को बड़ी वैश्विक कंपनियों के सप्लायर और बिजनेस पार्टनर के रूप में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, वहीं प्रदेश के किसानों और कृषि उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक बढ़ेगी।

    युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

    भविष्य के उद्योगों के लिए प्रदेश के युवाओं को तैयार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने ITE Education Services, Singapore के साथ तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एमओयू किया। इसके अंतर्गत उद्योगों की जरूरत के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने, तकनीकी प्रशिक्षण को मजबूत करने और युवाओं के लिए कौशल से रोजगार तक बेहतर अवसर विकसित करने पर काम किया जाएगा।

    SING Forum में दुनिया के सामने रखी छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा

    Singapore Business Federation (SBF) द्वारा आयोजित SING Forum-2026 में छत्तीसगढ़ ने निवेश, उद्योग और विकास के क्षेत्र में अपनी नई संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। फोरम में सिंगापुर की विदेश मंत्रालय तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री सुश्री Gan Siow Huang, SBF के चेयरमैन श्री Mark Lee, सीईओ श्री Kok Ping Soon सहित Mastercard, Nestlé और IHCL (Taj Hotels) जैसी प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।

    फोरम के दौरान आयोजित ‘फायरसाइड चैट’ में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश में आने वाला प्रत्येक निवेश रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का माध्यम बने।

    सिंगापुर के विदेश मंत्री से मुलाकात, राज्य स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

    मुख्यमंत्री श्री साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. Vivian Balakrishnan से सौजन्य भेंट क…

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 चीते व्योम और नीरा नौरादेही टाइगर रिजर्व में किये विमुक्त

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 चीते व्योम और नीरा नौरादेही टाइगर रिजर्व में किये विमुक्त

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव हमारे वनों के आभूषण हैं। इन्हें संजोकर रखना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि मप्र की धरती पर वन्य जीवों का संरक्षण और संवर्धन हमारा मिशन है और यह मिशन लगातार भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार सागर के रहली में वन्य जीव सप्ताह समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते (नर 'व्योम' और मादा 'नीरा') के लिए तैयार किए गए सुरक्षित बाड़े (सॉफ्ट रिलीज बोमा) में विमुक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता मित्रों और बाघिन दीदी से भी संवाद किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य के बाद नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को नया ठिकाना मिला है। बुंदेलखंड स्थित वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य प्रदेश में तीसरा ऐसा स्थान बना है, जहां चीते अपने अनुकूल प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद होकर विचरण करेंगे। नौरादेही में 41 वर्ष पहले टाइगर रिजर्व की स्थापना हुई थी। यह अभयारण्य सबसे खास होगा, क्योंकि अब नौरादेही में पर्यटकों को चीता और टाइगर एक ही रिजर्व में विचरण करते नजर आएंगे। मध्यप्रदेश में चीतों की संख्या अब 60 तक पहुंच गई है। प्रदेश की धरती वन्य प्राणियों के लिए सबसे अनुकूल है। मध्यप्रदेश, देश में सबसे अधिक टाइगर और गिद्धों की संख्या वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन और वन्य प्राणियों की चिंता करते हुए उनका सभी प्रकार से संरक्षण कर रही है। मध्यप्रदेश में जलचर, थलचर और नभचर सभी प्रकार के जीवों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। राज्य में नर्मदा मैया के वाहन मगरमच्छ को भी संरक्षण दिया जा रहा है।

    वन समितियों को 20 करोड़ रूपये लाभांश के वितरित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह हमारा दायित्व है कि कठिन समय में क्षेत्र के नागरिकों के लिए साथ खड़े रहें। वन्य जीव सप्ताह के समापन के अवसर पर आज वन समितियों को उनके लाभांश का वितरण भी किया गया। नौरादेही टाइगर रिजर्व के आसपास पर्यटकों को घुमाने और उन्हें सुविधाएं प्रदान करने वाली समितियों के सदस्यों को कुल 80 करोड़ की आय में से 20 करोड़ लाभांश के रूप में मिला है।

    होमस्टे बनाकर अर्जित करें आय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र के आसपास बफर जोन में होमस्टे सर्विस को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांव में रहने वाले लोग अपने मकान में एक से दो कमरे होमस्टे के लिए तैयार करें और स्वरोजगार पाएं। राज्य सरकार होमस्टे तैयार करने के लिए 2 से 3 लाख रुपए का अनुदान भी दे रही है।

    ग्राम पंचायतों में बन रही दूग्ध संकलन समितियाँ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में हमारी सरकार गौपालन और दूध उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। गौपालकों से उचित मूल्य पर दूध खरीदने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सहकारी दूध संकलन समिति बनाई जा रही हैं। इससे किसानों को दूध से निश्चित आय मिलेगी। राज्य सरकार ने पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह की मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। 

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कूनों में शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती से पहले टाइगर और चीते विलुप्त होते जा रहे थे। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सेवा संकल्प के 25 वर्ष पूर्ण हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी नेतृत्व और मार्गदर्शन में एशिया की धरती पर पहली बार कूनो अभयारण्य से चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। हमारा प्रयास है कि वनों में सभी वन्य जीव आबाद रहे और मनुष्य भी सहअस्तित्व के भाव से निवास करें। दोनों अपने अनुशासन का पालन करें। आज नौरादेही अभयारण्य में 2 चीते मुक्त आवास में छोड़े गए हैं। अगले महीने 2 और चीते यहां लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि चीता एक ऐसा जीव है, जो सभी को लेकर साथ चलता है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन सागर जिले के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में लगभग 20 लाख हैक्टेयर वनक्षेत्र है। यहां चीतों को लाए जाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। आज हमें दो चीतों की सौगात मिली है। बुंदेलखंड का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन से बुंदेलखंड के अनेक स्थानों पर नए उद्योगों की स्थापना हो रही है। पर्यटन क्षेत्र में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं, इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    विधायक एवं पूर्व मंत्री  गोपाल भार्गव ने कहा कि 41 साल पहले नौरादेही अभयारण्य घोषित होते ही स्थानीय लोग आशंकित हो गए थे, कि अब वे जंगल नहीं जा पाएंगे और मवेशियों को कहां लेकर जाएंगे। ऐसे समय में उन्होंने जनजागरुकता के लिए पद यात्रा की थी। विधायक  भार्गव ने कहा कि विपक्ष की सरकार रहते हुए रहली क्षेत्र में विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग गया था, लेकिन जब से राज्य में हमारी सरकार आई, क्षेत्र में हर तरफ सड़कें, नदियों पर पुल और गांव-गांव में स्कूल भवन बनकर तैयार होते चले गए।

    सांसद  राहुल सिंह ने कहा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां आज चीते छोड़े गए हैं, जिससे भविष्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए अलग-अलग भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए सेंटर खोलने की मांग की। सांसद  सिंह ने कहा कि युवा भाषाई ट्रेनिंग लेकर दक्षता के साथ अच्छे गाइड बन पाएंगे, जो पर्यटकों को सही और सटीक जानकारी प्रदान करेंगे।

    कार्यक्रम में विधायक  बृज विहारी पटेरिया, विधायक  प्रदीप लारिया, विधायक  शैलेंद्र सिंह, विधायक  वीरेंद्र सिंह लम्बरदार, प्रमुख सचिव वन  राघवेंद्र सिंह, वनबल प्रमुख  शुभरंजन सेन, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) डॉ. समिता राजौरा, मती रानी कुशवाहा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री ने पुस्तक, ब्रोशर और पोस्टर का किया विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में पुस्तक, 'गिद्ध संख्या आंकलन 2026', बुंदेली बोली में तैयार वीडीटीआर के पोस्टर, जनभागीदारी आधारित बाघिन दीदी अभियान के ब्रोशर का विमोचन किया।

     

  • ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल’ नहीं, अब ‘पश्चिम बंग’ होगा नाम? विधानसभा में पेश होगा विधेयक

    ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल’ नहीं, अब ‘पश्चिम बंग’ होगा नाम? विधानसभा में पेश होगा विधेयक

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि 'बांग्ला', 'वेस्ट बंगाल' या अन्य वैकल्पिक नामों के भ्रम को खत्म कर दिया जाएगा। पश्चिम बंगाल के आधिकारिक नाम को लेकर जारी दशकों पुरानी बहस के बीच राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य का नाम जल्द ही आधिकारिक तौर पर बदलकर 'पश्चिम बंग' किया जाएगा ताकि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को हमेशा के लिए संरक्षित रखा जा सके।

    समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि 'बांग्ला', 'वेस्ट बंगाल' या अन्य वैकल्पिक नामों के भ्रम को खत्म कर दिया जाएगा और बहुत जल्द इस संबंध में विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा।

    "पश्चिम बंग नाम ही हमारी ऐतिहासिक पहचान": समिक भट्टाचार्य
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे कितनी बार कहना पड़ेगा भाई? इस राज्य का नाम 'पश्चिम बंग' ही होगा। अब आपको 'पश्चिम बांग्ला', 'बांग्ला' या सिर्फ 'बंग' जैसे नाम सुनने को नहीं मिलेंगे। राज्य की ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में ही हमारी सरकार एक विधेयक लाने जा रही है।"

    उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन के समय बंगाल का एक हिस्सा अलग होकर बाद में बांग्लादेश बना। जो हिस्सा भारत के पास रहा, उसकी पहचान 'पश्चिम बंग' से ही जुड़ी हुई है, इसलिए नाम में 'पश्चिम' शब्द का रहना ऐतिहासिक तौर पर बेहद जरूरी है।

    पीएम मोदी के 25 साल की सराहना और राहुल गांधी पर तीखा तंज
    नाम बदलने के मुद्दे से इतर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री) के रूप में 25 साल पूरे होने पर उनके संबोधन की जमकर तारीफ की।

    उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद के विचारों से प्रेरित पीएम मोदी का भाषण केवल पार्टी कार्यकर्ताओं ही नहीं, बल्कि देश भर के नागरिकों और युवाओं को प्रेरित करेगा।

    विपक्ष के पीएम मोदी के जनसमर्थन से डरने के सवाल पर समिक भट्टाचार्य ने चुटकी लेते हुए कहा, "जाकर राहुल गांधी से पूछिए कि वे डरे हैं या नहीं! राहुल गांधी कोई छोटे बच्चे नहीं हैं जो भूतों से डर जाएं। मुद्दा यह है कि इस समय विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा ही नहीं बचा है। गैर-मुद्दों को मुद्दा बनाकर राजनीति नहीं की जा सकती। युवा समझ चुके हैं कि अगले 20 सालों तक केंद्र या राज्य में सरकार बदलने की कोई संभावना नहीं है।"

    असम में मदरसा बोर्ड के विलय का समर्थन
    समिक भट्टाचार्य ने असम सरकार के 'राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड' का विलय 'स्कूल सर्विस कमीशन' में करने के फैसले का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने इसे नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत एक समावेशी और क्रांतिकारी कदम बताया।

    उन्होंने सवाल उठाया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे विज्ञान और गणित की शिक्षा से वंचित क्यों रहें? देश के सभी बच्चों को एक समान मानक वाली शिक्षा पाने का अधिकार है ताकि वे राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ सकें।

    पश्चिम बंगाल के नाम बदलने का लंबा इतिहास
    राज्य का नाम बदलने की कोशिशें कोई नई नहीं हैं।

    1999 (वाम मोर्चा सरकार) में ज्योति बसु के कार्यकाल में विधानसभा में राज्य का नाम 'पश्चिम बंग' करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिली।

    2011 और 2018 (तृणमूल कांग्रेस) में ममता बनर्जी सरकार ने राष्ट्रीय बैठकों में अल्फाबेटिक ऑर्डर में पीछे रहने का तर्क देते हुए राज्य का नाम बदलकर 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव संसद को भेजा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने 'बांग्लादेश' से नाम की समानता और संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता का हवाला देते हुए इसे मंजूरी नहीं दी थी।

    अब बीजेपी की ओर से फिर से 'पश्चिम बंग' नाम को वैधानिक रूप से लागू करने के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।

  • मुख्यमंत्री ने कहा- यह गलियारा बताएगा कि दूरदृष्टि रखने वाले एक नेता की मित्रता कैसे दो देशों के विश्वास में बदलती है

    मुख्यमंत्री ने कहा- यह गलियारा बताएगा कि दूरदृष्टि रखने वाले एक नेता की मित्रता कैसे दो देशों के विश्वास में बदलती है

    आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम : सीएम योगी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन

    मुख्यमंत्री ने कहा- यह गलियारा बताएगा कि दूरदृष्टि रखने वाले एक नेता की मित्रता कैसे दो देशों के विश्वास में बदलती है

    मोदी-आबे की मित्रता पद से नहीं, विश्वास से बनी, पद बदलते रहे, मित्रता नहीं बदली

    "रुद्राक्ष" में शिंजो आबे सान की स्मृतियां संजोकर काशी ने दी सच्चे मित्र को श्रद्धांजलि

    भारत-जापान की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक

    2027 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष, स्मृति गलियारा अमृत पर्व की पहली भेंट

    जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट, जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा

    आज जब रिश्ते डील से तय होते हैं, ऐसे समय में बिना लाभ हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना बहुत कठिन

    भारत सौभाग्यशाली है, हमें जापान के रूप में ऐसा ही सच्चा मित्र मिला है

    काशी और क्योटो दोनों अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं, दोनों ने सिखाया है कि विरासत को संभालकर भी विकास किया जा सकता है

    वाराणसी,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम है। यहां आने वाला हर युवा यह सीख सकेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों के भविष्य को किस तरह नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय शिंजो आबे सान को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत-जापान की मित्रता हर वर्ष पहले से और अधिक मजबूत होती जाए। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गलियारा केवल जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे सान की स्मृतियों को संजोने वाला स्थान नहीं, बल्कि भारत और जापान की अटूट मित्रता, विश्वास और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आबे सान को विनम्र श्रद्धांजलि बताया।

    रुद्राक्ष भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रुद्राक्ष भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक है। जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और आज काशी उसी रुद्राक्ष में वहां के दोस्ती के प्रतीक जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे सान की स्मृति को हमेशा के लिए बसा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दोस्ती के एक नए आयाम को आगे बढ़ाने के साथ ही, 7 अक्टूबर को, ठीक 25 वर्ष पहले, आज ही के दिन 2001 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। हमारे प्रधानमंत्री और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच मित्रता की नींव भी उसी दौर में पड़ी थी। वर्ष 2007 में मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जापान गए। वहीं उनकी शिंजो आबे सान से पहली भेंट भी हुई थी। यह मित्रता पद से नहीं बनी थी, यह विश्वास से बनी थी। पद बदलते रहे, मित्रता नहीं बदली। जनसेवा की इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उसी मित्रता की स्मृति को समर्पित स्मृति गलियारे का उद्घाटन- इससे सुंदर संयोग नहीं हो सकता।

    जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है, तब इतिहास बदलता है
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त 2007 में प्रधानमंत्री के रूप में भारत की पहली यात्रा पर आए शिंजो आबे सान ने भारत की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि मजबूत भारत जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में है। 2014 में, क्योटो में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ। 2015 में, काशी की गंगा आरती में भारतीय आस्था का दर्शन किया। 2017 में, अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास कर भारत को मोबिलिटी क्रांति के नए युग में ले गए। 2018 में, शिंजो आबे सान ने प्रधानमंत्री मोदी जी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित कर दोनों देशों के संबंधों को एक पर्सनल टच दिया। दिल्ली मेट्रो, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की हर बड़ी छलांग में जापान हमेशा साथ खड़ा मिला है। आज लगभग 1400 जापानी कंपनियां भारत में कार्य कर रहीं हैं। अब भारत जापान की साझेदारी भविष्य के क्षेत्रों सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच चुकी है। जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट। जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा। जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है, तब इतिहास बदलता है। पीएम मोदी और स्वर्गीय आबे शान की मित्रता ऐसी ही थी। 2021 में उन्हें भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह एक सच्चे मित्र का सम्मान था। सितंबर 22 में प्रधानमंत्री जी स्वयं अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे। पूरे भारत ने राष्ट्रीय शोक रखा। यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था।

    जापान के रूप में सच्चा मित्र मिला
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, निज दुख गिरि सम रज करि जाना, मित्रक दुख रज मेरु समाना, यानी अपने पहाड़ जैसे दुख को धूल समझे और मित्र के धूल जैसे दुख को पहाड़, यही मित्रता की कसौटी भी है। आज की दुनिया में जब रिश्ते डील से तय होते हैं, ऐसे समय में बिना लाभ हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना बहुत कठिन है। भारत सौभाग्यशाली है, हमें जापान के रूप में ऐसा ही सच्चा मित्र मिला है। दुनिया इंटरेस्ट देखकर रिश्ते बनाती है, भारत और जापान के रिश्ते ट्रस्ट पर आधारित हैं यानी विश्वास पर आधारित हैं।

    जापान के पास प्रिसिजन है, उत्तर प्रदेश के पास स्केल
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वर्ष फरवरी में मुझे जापान जाने का अवसर मिला। टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ के निवेश पर समझौते हुए। 500 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज चलने वाली मैग्लेव ट्रेन में बैठकर मैंने जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को नजदीक से देखा। जिस यामानाशी में आबे सान ने पीएम नरेंद्र मोदी जी को अपने घर आमंत्रित किया था, वही यामानाशी अब उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का पार्टनर है। अगस्त 2024 में यामानाशी के गवर्नर कोटोरो नागासाकी सान 200 से अधिक निवेशकों के साथ उत्तर प्रदेश आए थे। हम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यीडा क्षेत्र में 500 एकड़ में एक जापानी सिटी विकसित कर रहे हैं। इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क की स्थापना की गई है। जापान के पास प्रिसिजन है, उत्तर प्रदेश के पास स्केल। 25 करोड़ लोगों का मार्केट, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट का सबसे बड़ा नेटवर्क।

    यह गलियारा अमृत पर्व की पहली भेंट
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 में भारत-जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है। भारत और जापान ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपनी विरासत और परंपराओं को अपने दैनिक जीवन और कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा में विकसित हुई और उस पर शिंतो तथा बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। जापान लैंड ऑफ राइजिंग सन है और उत्तर प्रदेश लैंड ऑफ सन डायनेस्टी है, यानी भगवान राम उसी सूर्यवंश में पैदा हुए हैं और इसीलिए उत्तर प्रदेश लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी है। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा, भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े सभी तीर्थ उत्तर प्रदेश में हैं। जापान की आस्था का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। काशी और क्योटो दोनों अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं। दोनों ने सिखाया है कि विरासत को संभालकर भी विकास किया जा सकता है।

    भाषा अलग-अलग, भाव एक हैं
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा अलग-अलग है, क्षेत्र अलग-अलग है, पर भाव एक हैं और मूल्य एक हैं। अभी तीन दिन पहले जापान के आइची, नागोया में एशियाई खेल संपन्न हुए हैं। भारत के खिलाड़ियों को जापान में जो आत्मीयता मिली, उसने हमारे खिलाड़ियों को बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इस अपनेपन का अनुभव कराने के लिए मैं जापान की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि यह गलियारा नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम है। यहां आने वाला हर युवा सीखेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों का भविष्य कैसे बदल देता है। आबे सान को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत-जापान की मित्रता हर साल पहले से और अधिक मजबूत हो।

    इस अवसर पर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे, प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक सौरभ श्रीवास्तव और जापान से आए हुए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे। 

    बॉक्स

    सीएम योगी ने जापानी मेहमानों का उन्हीं की भाषा में किया स्वागत

    मुख्यमंत्री ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे और जापान से आए प्रतिनिधिमंडल का जापानी भाषा में स्वागत किया। उन्होंने कहा, "सेकाईदे मोत्तोमो फुराइतोशी बनारस ए योकोसो।" यानी कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी में मैं आप सबका स्वागत करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि मां गंगा के पावन तट पर बसी देवाधिदेव महादेव भगवान विश्वनाथ की पावन नगरी अविनाशी काशी और भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश की भूमि सारनाथ एवं यहां की समस्त जनता जनार्दन की ओर से मैं श्रीमती अकी आबे सान एवं जापान से आए हुए सभी प्रतिनिधियों का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने अरिगातो गोजाइमासु कहकर सभी का धन्यवाद किया।

  • रामायण थीम पर सजेगी अयोध्या, 20 सेल्फी प्वाइंट और भव्य द्वारों की श्रृंखला बढ़ाएंगे आकर्षण

    रामायण थीम पर सजेगी अयोध्या, 20 सेल्फी प्वाइंट और भव्य द्वारों की श्रृंखला बढ़ाएंगे आकर्षण

    दीपोत्सव-2026 विशेष

    दीपोत्सव-2026 में दमकेगी रामनगरी, प्रमुख मार्गों से घाट तक दिखेगी आस्था की भव्य तस्वीर

    अयोध्या में दिखेगा रामायण का भव्य संसार, पुष्पक विमान से फ्लोटर्स तक होंगे मुख्य आकर्षण

    रामायण थीम पर सजेगी अयोध्या, 20 सेल्फी प्वाइंट और भव्य द्वारों की श्रृंखला बढ़ाएंगे आकर्षण

    अयोध्या आने वाले मुख्य मार्गों से 'धर्म पथ' तक और चौराहों से सरयू तट तक होगी थीम आधारित सजावट

    दीपोत्सव-2026 में दिखेगा अयोध्या का दिव्य और भव्य स्वरूप: पर्यटन मंत्री

    लखनऊ/ अयोध्या
    दीपों की रोशनी से निखरने वाली रामनगरी इस बार कलात्मक सजावट और रचनात्मक आकृतियों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रमुख चौराहों से लेकर प्रवेश मार्ग, रामकथा पार्क, राम की पैड़ी और सरयू तट तक रामायण की थीम पर भव्य सज्जा नजर आएगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। रामनगरी में सजावटी द्वार, वे-फाइंडर, सेल्फी प्वाइंट और मंच के साथ राम रथ व पुष्पक विमान की झलक भी दिखाई देगी। वहीं, सरयू की लहरों पर आकर्षक फ्लोटर्स दीपोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाएंगे। 

    दीपोत्सव-2026 के तहत अयोध्या में छह से आठ नवंबर तक विभिन्न आयोजन होंगे। 7 नवंबर को दीपोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब 10 प्रमुख स्थानों पर थीम आधारित वे-फाइंडर लगाए जाएंगे। ये प्रमुख प्रवेश मार्गों, चौराहों और आयोजन स्थलों के आसपास होंगे। 

    राम कथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 सेल्फी पॉइंट 
    दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए राम कथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। हर इंस्टॉलेशन की थीम, डिजाइन और निर्माण शैली अलग होगी। इनमें अयोध्या और दीपोत्सव की झलक कलात्मक अंदाज में नजर आएगी। त्रि-आयामी कलाकृतियां आयोजन स्थलों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ आगंतुकों के अनुभव को भी खास बनाएंगी। इन्हें इस तरह तैयार किया जाएगा कि ये दीपोत्सव-2026 की सजावट का हिस्सा बनने के साथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनें। इसी कड़ी में लता मंगेशकर चौक से राम की पैड़ी मार्ग तक कलात्मक स्थापनाएं (आर्ट इंस्टालेशन) तैयार की जाएंगी।

    नए कलेवर में नजर आएगा राम कथा मंच
    'दीयों के उत्सव' के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए रामकथा पार्क का स्थायी मंच नए कलेवर में नजर आएगा। यहां ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था के साथ एलईडी स्क्रीन, थीम आधारित रंगीन कपड़े आदि का इस्तेमाल होगा। दोनों ओर सीढ़ियां, पुष्प सज्जा, रंगोली, पर्दे और मंच पर बैठने की व्यवस्था भी होगी। मौजूदा ढांचे के अनुरूप ही डिजाइन तैयार किया जाएगा। वहीं, राम कथा पार्क के प्रवेश और निकास को आकर्षक बनाने के लिए सजावटी गेट का निर्माण होगा। प्रत्येक द्वार का डिजाइन भारतीय संस्कृति, पारंपरिक प्रतीकों और रामायण के प्रसंगों पर आधारित होगा। 

    अयोध्या के प्रमुख मार्गों की सजावट 
    दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रवेश मार्गों की तस्वीर इस बार नए रंग-रूप में नजर आएगी। शहर के प्रमुख हाईवे और 'धर्म पथ' पर रामायण की थीम से सजे 10 भव्य द्वार तैयार किए जाएंगे। लखनऊ, सुल्तानपुर और रायबरेली की ओर से अयोध्या आने वाले मार्गों के साथ धर्म पथ पर बनने वाले इन द्वारों की सजावट में हर गेट की अलग पहचान होगी। आकर्षक डिजाइन, थीम आधारित सज्जा और रोशनी से सजे ये प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचते ही दीपोत्सव की भव्यता का एहसास कराएंगे। 

    पुष्पक विमान, खींचेगा ध्यान 
    राम की पैड़ी के निकट पुष्पक विमान थीम पर रोडसाइड इंस्टॉलेशन आकर्षण का केंद्र बनेगा। वहीं रामायण की कथा को जीवंत करते हुए राम रथ और झांकी तैयार की जाएगी। राम की पैड़ी के पास राम दरबार की भव्य प्रस्तुति होगी, जबकि रामकथा पार्क के समीप हेलीपैड क्षेत्र में भरत मिलाप मंच और पाथवे विकसित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर फ्लैग पोल लगाकर आयोजन की भव्यता बढ़ाई जाएगी। वहीं सरयू और राम की पैड़ी पर आकर्षक फ्लोटर्स भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगे। इनके अतिरिक्त राम रथ, राम दरबार, भरत मिलाप मंच विशेष के आकर्षण होंगे।  

    अयोध्या की आभा होगी अविस्मरणीय 
    पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में अयोध्या की भव्यता के साथ उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नए रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। रामायण की थीम पर होने वाली सजावट, कलात्मक स्थापनाएं और प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं व पर्यटकों को रामनगरी के दिव्य और भव्य स्वरूप का नया अनुभव कराएंगी। हमारा प्रयास है कि दीपोत्सव की आभा अयोध्या आने वाले हर व्यक्ति के मन में अविस्मरणीय छाप छोड़े।

    आधुनिक रचनात्मकता को नया आयामः अमृत अभिजात  
    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि 'दीपोत्सव-2026 में अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक रचनात्मकता के साथ भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। रामायण की थीम पर तैयार सजावटी द्वार, आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और मनमोहक प्रकाश सज्जा श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। उन्होंने बताया कि शहर के प्रमुख मार्गों के किनारे रामायण के विभिन्न कांडों और प्रसंगों पर आधारित आकर्षक स्थापनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें लंका कांड समेत रामायण के प्रमुख प्रसंगों को बेहद सरल भाषा में एक-एक पंक्ति के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।