Tag: featured

  • ED एक्शन के बाद पहली बार आमने-सामने होंगे AAP नेता, गुरुग्राम जेल में अरोड़ा से मिलेंगे मान-केजरीवाल

    ED एक्शन के बाद पहली बार आमने-सामने होंगे AAP नेता, गुरुग्राम जेल में अरोड़ा से मिलेंगे मान-केजरीवाल

    चंडीगढ़
    मुख्यमंत्री भगवंत मान 23 मई यानी आज  संजीव अरोड़ा से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान जेल में संजीव अरोड़ा से मुलाकात करेंगे। जानकारी के मुताबिक, संजीव अरोड़ा गुरुग्राम जेल में बंद हैं।ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा गिरफ्तारी के बाद यह पहली बार होगा, जब आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता संजीव अरोड़ा से जेल में मिलने पहुंचेंगे। इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

    ED ने किया था गिरफ्तार
    पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन नि
    देशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने पहले उन्हें 7 दिन के रिमांड पर लिया। इसके बाद दो दिन का अतिरिक्त रिमांड भी मिला था। पूछताछ पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    सूत्रों के अनुसार ईडी की जांच वित्तीय लेन-देन और कुछ कारोबारी गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर चल रही है। हालांकि आम आदमी पार्टी लगातार इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रही है।

    गिरफ्तारी के बाद AAP का खुला समर्थन
    संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी लगातार उनके समर्थन में खड़ी नजर आई। पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए कर रही है।

    अब मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल का जेल जाकर मुलाकात करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व पूरी तरह अरोड़ा के साथ खड़ा है।

    पंजाब की राजनीति में अहम चेहरा
    संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति और उद्योग जगत दोनों में सक्रिय रहे हैं। आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया था और बाद में पार्टी के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होने लगी।

    पार्टी संगठन और कारोबारी वर्ग में मजबूत पकड़ रखने वाले अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई थी। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    जेल मुलाकात पर राजनीतिक नजर
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल की यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी है। निकाय चुनावों और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच आप अपने नेताओं के समर्थन का स्पष्ट संकेत देना चाहती है।

    केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी नेता संजीव अरोड़ा के बीच गुरुग्राम जेल में होने वाली मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का गुरुग्राम जेल में आम आदमी पार्टी नेता संजय अरोड़ा से मिलने जाना केवल एक सामान्य मुलाकात नहीं, बल्कि इसके पीछे कई सवाल खड़े होते हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुलाकात के तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, जेल में बंद व्यक्ति को यह समझाना कि ''अगर कमाया हुआ पैसा वापस जाना भी पड़े तो रोना नहीं चाहिए'', दूसरा, कथित तौर पर 'लूटे हुए धन' की जानकारी हासिल करना, और तीसरा, जेल के माहौल और व्यवस्था को समझना।

    रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि यह सिर्फ एक 'मीटिंग' नहीं थी, बल्कि एक तरह की 'रेकी' थी, जिससे आगे की राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में कई और नाम भी सामने आ सकते हैं।

    अरोड़ा को 9 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने 16 मई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था।

    अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने 9 मई को चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें मंत्री का सरकारी आवास भी शामिल था। यह कार्रवाई 2024 में भी हुई जांच से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें औद्योगिक जमीन को रिहायशी परियोजनाओं में बदलने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं।

    इस कार्रवाई को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

    अब गुरुग्राम की जेल में बंद संजीव अरोरा से सीएम भगवंत मान की होने वाली मुलाकात को लेकर केंद्रीय मंत्री ने तंज कसा है और कहा है कि आने वाले दिन में किसी अन्य नेता का नंबर आ सकता है, ऐसे में सीएम मान जेल की सुविधाओं का आंकलन करने के लिए जेल जा रहे हैं।

  • 10 दिन में तीसरी बढ़ोतरी से जनता परेशान, पंजाब-चंडीगढ़ में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े

    10 दिन में तीसरी बढ़ोतरी से जनता परेशान, पंजाब-चंडीगढ़ में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़े

    चंडीगढ़ 
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। आज पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। 10 दिन में तीसरी बार ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है। बढ़ती कीमतों से लोगों में हाहाकार मच गया है।बढ़ोतरी के बाद अब लुधियाना में पेट्रोल का दाम 103.03 रुपये हो गया है। वहीं अमृतसर में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 

    लोग बोले-कैसे चलेगा घर
    वैश्विक ऊर्जा संकट और ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। इससे लोगों में खासी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं और अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सफर करना भी मुश्किल होता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामान के दाम भी बढ़ेंगे।

    10 दिन में कितना बढ़ा दाम?
    ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी पिछले कुछ दिनों में बेहद तेज रफ्तार से हुई है:

        ताजा बढ़ोतरी (23 मई): पेट्रोल +87 पैसे, डीजल +91 पैसे
        इससे पहले (मंगलवार): पेट्रोल +87 पैसे, डीजल +91 पैसे
        15 मई को: तेल कंपनियों ने एक बार में पेट्रोल और डीजल दोनों पर करीब 3 रुपये प्रति लीटर का झटका दिया था

    आखिर दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
    इस लगातार बढ़ोतरी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहा भू-राजनीतिक संकट है। इस संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई पर मंडरा रहे खतरे ने वैश्विक कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है।

    भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हलचल का असर तुरंत देश के अंदर दिखने लगता है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रूड बास्केट (कच्चे तेल की कीमतों का औसत) की कीमत में भारी उछाल आया है, जिससे तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) का घाटा बढ़ता जा रहा था। अब इसी घाटे की भरपाई आम उपभोक्ताओं की जेब से करवाई जा रही है।

    सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, महंगी होंगी ये सब चीजें
    विशेषज्ञों और आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ियों में तेल भरवाने तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) सीधा महंगी हो जाती है।

    जब ट्रकों का किराया बढ़ेगा, तो मंडियों से लेकर दुकानों तक आने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध, राशन (अनाज-दाल) और दूसरी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी अपने आप बढ़ जाएंगे। इसका मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में रसोई का बजट और भी बिगड़ सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों की मानें तो अगर वैश्विक स्तर पर तनाव खत्म नहीं हुआ और कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो तेल कंपनियां आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं।

    पंजाब में सूख सकते हैं पंप
    पंजाब के पेट्रोल पंपों पर तो पेट्रोल-डीजल खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। एक दिन पहले ही पंजाब पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को इस संबध में पत्र लिखा है और मांग की है कि सप्लाई सही करने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश जारी किए जाने चाहिए। अगर सप्लाई न हुई तो आगे स्थिति बिगड़ सकती है। 

    एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अशोक कुमार थापर ने कहा कि तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की उचित सप्लाई नहीं दे रही हैं। इस वजह से उनका स्टॉक खत्म हो रहा है। वह कंपनियों से बात कर रहे हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही है। सूबे में खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और इस समय डीजल की मांग बढ़ती जा रही है लेकिन सप्लाई न होने से स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है।

    सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों ने पेट्रोल पंपों को एक हजार लीटर पेट्रोल और 2 हजार डीजल का स्टॉक रखने के लिए बोला है लेकिन सप्लाई न होने के कारण उनके लिए इन आदेशों की पालना करना मुश्किल हो गया है।  

    पेट्रोल की कीमत (Petrol price today)

    दिल्ली – 99.51 रुपये

    नोए़़डा – 99.51 रुपये

    भोपाल – 96.85 रुपये

    चंडीगढ़- 98.95 रुपये

    गुवाहाटी – 103.01 रुपये

    जयपुर – 109.87 रुपये

    पटना – 110.37 रुपये

    लखनऊ – 99.28 रुपये

    पोर्टब्लेयर – 92.16 रुपये

    रांची – 102.60 रुपये

    कोलकाता – 110.64 रुपये

    चेन्नई – 105.31 रुपये
    डीजल की कीमत (Diesel price today)

    दिल्ली – 92.49 रुपये

    नोएडा – 92.84 रुपये

    भोपाल – 111.71 रुपये

    चंडीगढ़ – 86.49 रुपये

    गुवाहाटी – 94.39 रुपये

    जयपुर – 95.05 रुपये

    पटना – 96.53 रुपये

    लखनऊ – 92.64 रुपये

    पोर्टब्लेयर – 82.22 रुपये

    रांची – 97.66 रुपये

    कोलकाता – 97.02 रुपये

    चेन्नई – 96.98 रुपये
    10 दिन में करीब 5 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल (petrol diesel price hike news)

    इस महीने सबसे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले हफ्ते शुक्रवार को 3-3 रुपये का इजाफा किया गया था। उसके बाद एक बार फिर से तेल की कीमतों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे की बढ़ोतरी की थी। आज हुए इजाफे को अगर मिला लें तो 10 दिन में पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 5 रुपये प्रति लीटह महंगा हो गया है।

    कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी (Crude oil price today)

    ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का रेट बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडियट (WTI) का रेट 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 97.46 डॉलर प्रति बैरल आज बिक रहा है। बता दें, युद्ध से पहले इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल था। क्रूड ऑयल के बढ़े हुए रेट की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हुई हैं।

    आगे अभी और बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम?

    आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा या गिरावट इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति पर निर्भर करेगा। मौजूदा परिस्थितियों को देखकर लगता है कि पेट्रोल और डीजल का रेट अभी आगे और बढ़ सकता है। यानी कीमतों में इजाफे के लिए तैयार रहिए। कुछ रिपोर्ट्स में तेल कंपनियों को 9 से 12 रुपये प्रति लीटर के नुकसान की बात कही गई है।

     

  • हमजा की अंतिम विदाई में आतंक का प्रदर्शन! सलाउद्दीन और जमीन खान की बंदूकों के बीच हुआ जनाजा

    हमजा की अंतिम विदाई में आतंक का प्रदर्शन! सलाउद्दीन और जमीन खान की बंदूकों के बीच हुआ जनाजा

    इस्लामाबाद

    पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड और वांटेड आतंकी अर्जुनमंद गुलजार उर्फ ​​हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसकी हत्या कर दी थी. अब उसके 'नमाज-ए-जनाजा' में कई बड़े आतंकी संगठनों के टॉप मोस्ट कमांडर और कुख्यात आतंकी खुलेआम शामिल हुए। 

    हमजा को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दफनाया गया है. उसके जनाजे में भारत का मोस्ट वॉन्टेड और आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का चीफ सैयद सलाउद्दीन खुद मौजूद था। इसके अलावा, प्रमुख आतंकी संगठन अल-बदर का टॉप कमांडर और चीफ बख्त जमीन खान भी हमजा को अंतिम विदाई देने पहुंचा था। 

    जनाजे के दौरान कड़ी सुरक्षा
    हमजा के जनाजे के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. आतंकी संगठन अल-बदर के चीफ बख्त जमीन खान की सुरक्षा के लिए वहां दर्जनों आतंकी तैनात किए गए थे. ये सभी AK-47 और घातक हथियारों से पूरी तरह लैस थे, जो घेरा बनाकर बख्त जमीन खान की रखवाली कर रहे थे। 

    हालांकि, इस भारी सुरक्षा और आधुनिक हथियारों के बीच वहां मौजूद सभी आतंकी कमांडरों के चेहरों पर अज्ञात हमलावरों का खौफ भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा था. हाल के दिनों में पाकिस्तान और PoK के भीतर कई बड़े आतंकियों की जिस तरह चुन-चुनकर हत्याएं हुई हैं, उससे इन आतंकी संगठनों के टॉप कमान के बीच भारी डर का माहौल है। 

    आतंकी हमजा कौन था, कहां था?
    दरअसल, हमजा बुरहान का नाम जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों और हमलों से जोड़ा जाता रहा है. सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं. 2022 में भारत सरकार ने उसे आतंकवादी घोषित किया था और कहा था, ‘अरजुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर खारबतपोरा, रत्नीपोरा, पुलवामा का निवासी था. वह अल-बद्र आतंकी संगठन का सहयोगी सदस्य था, जिसे यूएपीए के तहत प्रतिबंधित किया गया.’ उसकी उम्र महज 23-24 साल थी। 

    पुलवामा में ही पैदा हुआ था आतंकी हमजा
    आतंकी हमजा को डॉक्टर भी कहा जाता था. व
    ह पुलवामा के रत्नीपोरा क्षेत्र में पैदा हुआ था. वह 2017 में यह कहकर पाकिस्तान गया था कि वह उच्च शिक्षा यानी एमबीबीएस के लिए जा रहा है, लेकिन बाद में वह आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया और जल्दी ही कमांडर बन गया. अल-बद्र में शामिल होने के बाद वह कश्मीर लौटा. उस पर दक्षिण कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने और उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल करने का आरोप था. उसका नेटवर्क मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था। 

    कश्मीर में कैसे खड़ा किया था आतंकी नेटवर्क
    कश्मीर में रहने के दौरान उसने पुलवामा से शोपियां तक अपना नेटवर्क फैलाया. उसकी मौत को पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वह उन प्रमुख लोगों में से था जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों के लिए काम करते थे. पुलवामा आतंकी हमला भारत के सबसे घातक हमलों में से एक था. 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हमला किया गया था. लेथपोरा क्षेत्र में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन के साथ बस को टक्कर मार दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। 

    पुलवामा अटैक का बदला
    यह हमला जैश-ए-मोहम्मद ने किया था और हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी. इस हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान में कई आतंकवादियों को अज्ञात बंदूकधारियों ने निशाना बनाया है. हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और जांचों को लेकर भी खामोशी बरकरार रखी है। 

    लश्कर-जैश में खलबली
    बीते दो वर्षों में धुरंधर स्टाइल मर्डर से पाकिस्तान में हड़कंप है. कुछ सालों से ऐसी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी होती देखी गई है. पाकिस्तान के शीर्ष आतंकियों और नेताओं को अज्ञाक द्वारा निशाना बनाए जाने से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को दोबारा संगठित होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इन दोनों आतंकी गुटों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है. अपनी कारनामों को ये लोग अंजाम नहीं दे पा रहे हैं. ऐसी हत्याओं ने इनके मनोबल को काफी तोड़ा है और इससे जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। 

    बता दें कि हमजा बुरहान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का बेहद करीबी माना जाता था. ISI में कर्नल रिजवान नाम का अधिकारी उसका मुख्य हैंडलर था, जो उसे भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए दिशा-निर्देश और वीआईपी सुरक्षा मुहैया कराता था. हमजा मुजफ्फरबाद में एक औद्योगिक परिसर से अपना पूरा नेटवर्क चलाता था, जिसे 'माचिस फैक्ट्री' कहा जाता है। 
    यहां हमजा अल-बराक के पूर्व कमांडर फारूक कुरैशी के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में ड्रग्स की तस्करी, जाली नोटों का रैकेट और हथियारों की सप्लाई का काला कारोबार कर रहा था। 

  • तेल संकट गहराया, पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर इजाफा; आपके शहर में आज कितना महंगा हुआ ईंधन

    तेल संकट गहराया, पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर इजाफा; आपके शहर में आज कितना महंगा हुआ ईंधन

    नई दिल्ली

     पेट्रोल और डीजल का रेट आज शनिवार, 23 मई 2026 को फिर से बढ़ गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 10 दिन के अंदर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम को बढ़ाया है। आज शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में 0.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आइए जानते हैं कि देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल का क्या रेट चल रहा है?

    पेट्रोल की कीमत (Petrol price today)

    दिल्ली – 99.51 रुपये

    नोए़़डा – 99.51 रुपये

    भोपाल – 96.85 रुपये

    चंडीगढ़- 98.95 रुपये

    गुवाहाटी – 103.01 रुपये

    जयपुर – 109.87 रुपये

    पटना – 110.37 रुपये

    लखनऊ – 99.28 रुपये

    पोर्टब्लेयर – 92.16 रुपये

    रांची – 102.60 रुपये

    कोलकाता – 110.64 रुपये

    चेन्नई – 105.31 रुपये
    डीजल की कीमत (Diesel price today)

    दिल्ली – 92.49 रुपये

    नोएडा – 92.84 रुपये

    भोपाल – 111.71 रुपये

    चंडीगढ़ – 86.49 रुपये

    गुवाहाटी – 94.39 रुपये

    जयपुर – 95.05 रुपये

    पटना – 96.53 रुपये

    लखनऊ – 92.64 रुपये

    पोर्टब्लेयर – 82.22 रुपये

    रांची – 97.66 रुपये

    कोलकाता – 97.02 रुपये

    चेन्नई – 96.98 रुपये

    10 दिन में करीब 5 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल

    इस महीने सबसे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले हफ्ते शुक्रवार को 3-3 रुपये का इजाफा किया गया था। उसके बाद एक बार फिर से तेल की कीमतों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे की बढ़ोतरी की थी। आज हुए इजाफे को अगर मिला लें तो 10 दिन में पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 5 रुपये प्रति लीटह महंगा हो गया है।
    कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी 

    ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का रेट बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडियट (WTI) का रेट 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 97.46 डॉलर प्रति बैरल आज बिक रहा है। बता दें, युद्ध से पहले इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल था। क्रूड ऑयल के बढ़े हुए रेट की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हुई हैं।

    आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
    तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं।

    पिछले कुछ दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी वजह से तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है। लगातार तीसरी बार कीमतें बढ़ने से परिवहन खर्च और जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    आम लोगों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
    पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। निजी वाहन चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा। वहीं, डीजल महंगा होने से ट्रक, बस और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ सकता है। इसका असर सब्जियों, फल, दूध और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। माना जा रहा है कि अगर आने वाले दिनों में भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो महंगाई और बढ़ सकती है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने मध्यम वर्ग और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।
      

    आगे अभी और बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम?

    आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा या गिरावट इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति पर निर्भर करेगा। मौजूदा परिस्थितियों को देखकर लगता है कि पेट्रोल और डीजल का रेट अभी आगे और बढ़ सकता है। यानी कीमतों में इजाफे के लिए तैयार रहिए। कुछ रिपोर्ट्स में तेल कंपनियों को 9 से 12 रुपये प्रति लीटर के नुकसान की बात कही गई है।

  • हर घर तक पहुंचे सोलर पावर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- सौर ऊर्जा को दें अधिक प्रोत्साहन

    हर घर तक पहुंचे सोलर पावर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- सौर ऊर्जा को दें अधिक प्रोत्साहन

    सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सोलर उपकरणों की उपलब्धता बढ़ायें
    मंत्रालय में हुई ऊर्जा विभाग के कार्यों की समीक्षा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे।

    नवाचारों की प्रशंसा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है।

    19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति

    बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है।

    समाधान योजना 2025-26

    समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई।

    प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी

    प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं।

    ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश

        सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

        मजरों टोलों के सभी घरों तक सभी कार्य पूर्ण करें।

        विद्युत देयक वसूली और नगद संग्रहण में वृद्धि हुई है ,इसे कायम रखें।

        ऊर्जा विभाग में 2500 करोड़ रुपए की हानि को कम किया है। ऐसे प्रयास जारी रखें।

        जबलपुर में वन नेशन वन ग्रिड के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के कार्य के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

        विद्युत बचत उपाय पर निरंतर अमल हो।

        प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया, भारिया के घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। इन वर्गों के सभी लोगों को लाभ पहुंचाएं।

        ऊर्जा की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारी को अंजाम दें।

        मध्यप्रदेश विद्युत जनरेशन कंपनी लाभ में है। इसके लिए कंपनी के पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं।
        बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • NDA विस्तार की रणनीति पर हलचल, स्टालिन की एंट्री को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म

    NDA विस्तार की रणनीति पर हलचल, स्टालिन की एंट्री को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म

    चेन्नई

    तमिलनाडु की सत्ता से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) बाहर हो चुकी है और टीवीके प्रमुख थलपति विजय मुख्यमंत्री हैं. सत्ता के बदलने के साथ ही चेन्नई से लेकर दिल्ली तक की सियासत भी बदलती दिख रही है. डीएमके का साथ छोड़कर कांग्रेस ने विजय सरकार में शामिल हो गई है तो बीजेपी की कोशिश डीएमके के साथ हाथ मिलाने की है.  इस दिशा में सियासी एक्सरसाइज भी शुरू हो गई है। 

    दक्षिण के तमिलनाडु की सियासत बदलते ही कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर विजय के साथ हो गई. कांग्रेस के इस स्टैंड से एमके स्टालिन को गहरा झटका लगा है, जिसके बाद डीएमके ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से खुद को अलग कर लिया. अब मौके की नजाकत को देखते हुए बीजेपी ने डीएमके को एनडीए का हिस्सा बनाने की कवायद में जुट गई है। 

    सूत्रों के मुताबिक एनडीए की नजर डीएमके के 22 लोकसभा सांसदों और राज्यसभा के 8 सांसदों पर है. बताया जा रहा है कि मुद्दों के आधार पर डीएमके से बाहर से समर्थन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, क्योंकि एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत की तलाश में है। 

    डीएमके को एनडीए में लाने का प्लान
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद ही  डीएमके
    ने कांग्रेस से रिश्ता तोड़ लिया है.  डीएमके ने बकायदा लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी लिखा है. हालांकि, सनातन धर्म के मुद्दे पर डीएमके के सियासी रुख को देखते हुए औपचारिक गठबंधन की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन डीएमके का समर्थन हासिल करने के लिए एक अलग प्लानिंग की जा रही है। 

    मोदी सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और बीआरएस की तरह ही डीएमके भी मुद्दों के आधार पर एनडीए को समर्थन दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक, डीएमके में टूट से कोई बड़ा फायदा नहीं होगा, इसलिए सभी 22 सांसदों का समर्थन ज्यादा अहम माना जा रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी के समय डीएमके एनडीए का हिस्सा रह चुकी है। 

    दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाने का दांव
    बीजेपी संसद में 'दो-तिहाई बहुमत' का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और चौंकाने वाले मिशन पर काम कर रही है. इस मिशन के तह तमिलनाडु की सत्ता से बाहर होने वाली डीएमके को एनडीए के पाले में लाने की है. डीएमके के 22 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसद है, जिनका समर्थन अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो संसद में दो-तिहाई वाले बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सकती है। 

    हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान यह साफ हो गया कि साधारण बहुमत होने के बावजूद भाजपा बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई थी। 

    वन नेशन-वन इलेक्शन, परिसीमन और न्यायिक सुधार जैसे बड़े ऐतिहासिक फैसलों को बिना किसी संवैधानिक अड़चन के पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। 

    एनडीए बहुमत में है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत (360+ सीटें) से दूर है. ऐसे में सांसदों के साथ आने से दो-तिहाई का आंकड़ा बेहद आसान हो जाएगा. ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि डीएमके को किसी न किसी तरह साथ लाया जाए, उससे लिए सीधे हाथ मिलाने के बजाय पर्दे के पीछे से समर्थन हासिल करने की है। 

  • छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक की बड़ी उपलब्धि, नीति आयोग की रिपोर्ट में देश में दूसरा स्थान

    छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक की बड़ी उपलब्धि, नीति आयोग की रिपोर्ट में देश में दूसरा स्थान

    नीति आयोग की रिपोर्ट: देश में चमका छत्तीसगढ़ का उसूर ब्लॉक, मिला दूसरा स्थान

    वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है।

    नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।

    मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है  

            मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।"

    मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला  

            वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।"

            मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है।

    विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर  

             नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया:

    1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया।
    2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई।
    3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया।
    4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई।

    अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान 
     
              कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

  • दो राज्यों में चुनावी हलचल तेज, महाराष्ट्र-तमिलनाडु उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान

    दो राज्यों में चुनावी हलचल तेज, महाराष्ट्र-तमिलनाडु उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान

    नई दिल्ली
    राज्यसभा की 24
    खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने आज द्विवार्षिक चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दस राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं। 

    18 जून को होगी वोटिंग 
    चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा. 8 जून तक नामांकन भरा जा सकेगा. 9 जून को नामांकन की जांच होगी. 11 जून को नामांकन वापस लिया जा सकेगा. अगर जरूरी हुई तो 18 जून को वोटिंग होगी. वोटिंग सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी. 18 जून को मतगणना होगी और 20 जून तक राज्यसभा का चुनाव पूरा कर लिया जाएगा। 

    11 बीजेपी से और 4 कांग्रेस के सांसद हो रहे रिटायर
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू आदि का कार्यकाल हो रहा है समाप्त। 

    कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से चार-चार सीटें होंगी खाली हो रही हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली होने जा रही हैं. मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट खाली होंगी . इनके अलावा झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एक-एक सीटों पर उपचुनाव भी हो सकता है. 22 रिटायर होने वाले सांसदों में 11 बीजेपी के हैं जबकि कांग्रेस के चार सांसद हैं। 

    चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके। 

    राजनीतिक तौर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या बल कई बड़े विधेयकों और राजनीतिक रणनीतियों पर असर डालता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न दल उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की कवायद तेज कर सकते हैं। 

    किस राज्य की कितनी सीटों पर चुनाव?

    आंध्र प्रदेश: 4
    गुजरात: 4
    कर्नाटक: 4
    मध्य प्रदेश: 3
    राजस्थान: 3
    झारखंड: 2
    मणिपुर: 1
    मेघालय: 1
    अरुणाचल प्रदेश :
    मिजोरम :1

    नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है.

    केंद्रीय मंत्रियों पर तलवार लटकी
    केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो रहा है. माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रवनीत सिंह को पार्टी दोबारा राज्य सभा भेज सकती है। 

    वहीं कूरियन को केरल चुनाव के मद्देनजर सरकार में लाया गया था. अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें फिर से राज्य सभा भेजती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों का बना रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फिर से राज्य सभा में आते हैं या नहीं। 

    खरगे और दिग्विजय का क्या होगा?
    कर्नाटक से संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं. इनमें से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का चुना जाना तय माना जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. हालांकि उसके पास केवल छह सरप्लस वोट हैं. ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जा सकता है. खुद दिग्विजय सिंह फिर से राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं. राज्य में दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस को मिल सकती है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन भी दौड़ में हैं. राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम चल रहा है। 

    गुजरात में कांग्रेस जीरो
    कांग्रेस को बड़ा झटका गुजरात में लगने जा रहा है. अभी गुजरात से राज्यसभा की 11 सीटों में कांग्रेस के केवल एक ही सदस्य हैं. शक्तिसिंह गोहिल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. वर्तमान में एक सीट जीतने के लिए 46 वोट चाहिए जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं. यानी कांग्रेस का गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में नहीं जीत सकता. यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य से कांग्रेस का राज्य सभा में कोई भी सदस्य नहीं होगा. हालांकि झारखंड में कांग्रेस की उम्मीदें सत्तारूढ़ जेएमएम पर टिकी हैं. पार्टी को उम्मीद है कि जेएमएम यह सीट कांग्रेस को दे देगा. इस चुनाव में एनडीए की स्थिति वर्तमान स्तर पर ही रहने की संभावना है. हालांकि टीडीपी की सीटें बढ़ सकती हैं. बीजेपी के अभी राज्य सभा में 113 सांसद हैं और एनडीए के 148 सांसद हैं. इस दौर के चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या कमोबेश इसी के आसपास रहेगा। 

    बीजेपी के 11 सांसद हो रहे रिटायर
    केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 11 बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें खाली हो रही हैं। झारखँड, तमिलनाडुऔर महाराष्ट्र की एक-एक सीटों पर उपचुनाव हो सकताहै। 11 सांसदों में से 11 बीजेपी के और चार कांग्रेस के सांसद रिटायर हो रहे हैं।

    रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। फिलहाल वह राजस्थान से सांसद हैं। वहीं जॉर्च कूरियन की वापसी पक्की नहीं बताई जा रही है।

    मल्लिकार्जुन खरगे और दिग्विजय सिंह
    कर्नाटक से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का राज्यसभा के लिए चुना जाना तय है। वहीं मध्य प्रदेश की सीट जीतने के लिए कांग्रेस के मेहनत करनी होगी। कांग्रेस के पास यहां 6 सरप्लस वोट हैं। वहीं दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह राज्यसभा नहीं जानाचाहते। मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के खाते में दो-दो सीटें जा सकती हैं।

     

  • पंजाब में खतरनाक लावारिस कुत्तों का होगा नियंत्रण, प्रशासन ने शुरू किया विशेष अभियान

    पंजाब में खतरनाक लावारिस कुत्तों का होगा नियंत्रण, प्रशासन ने शुरू किया विशेष अभियान

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में आज जानलेवा लावारिस कुत्तों के खात्मे के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस संबंध में जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करेगी। इसका उद्देश्य उन जानलेवा लावारिस कुत्तों को खत्म करना है, जो बच्चों और राहगीरों के जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या अत्यधिक आक्रामक व खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत मृत्यु दी जा सकती है।

    कोर्ट ने कहा था कि संविधान के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार में कुत्ते के हमलों के डर या खतरे के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का हक भी शामिल है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से लावारिस कुत्तों के काटने के मामले में वृद्धि होती जा रही है। सरकार ने जनवरी में लुधियाना में राज्य की पहली डॉग सैंक्चुअरी का उद्घाटन भी किया था जिसका उद्देश्य डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है।

    इसकी क्षमता लगभग 500 कुत्तों की है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है और प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी तर्ज पर डॉग सैंक्चुअरी स्थापित करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2025 में कुत्तों के काटने के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए जबकि वर्ष 2024 में डॉग बाइट के 2.13 लाख मामले रिपोर्ट किए गए थे। 

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई संगठनों में मायूसी

    पेटा (PETA) इंडिया के मुताबिक देश में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या 6.2 करोड़ है। इनकी संख्या बढ़ने की मुख्य वजह एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स का सही पालन न होना है। इन नियमों के तहत कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण होना चाहिए। पेटा ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की एसओपी पर ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इस एसओपी में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है। इतने छोटे स्थान में इन्हें नीचलन रखना क्रूरता है। इससे बीमारियां फैल सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर कुत्तों को बंद रखने के लिए न पर्याप्त जगह है और न ही बजट और न ही प्रशासनिक व्यवस्था है।

    एक दैनिक अखबार में प्रकाशित कुत्तों के आंकड़ों पर आयोग ने कहा था कि 3.34 लाख डॉग बाइट के मामले चौंकाने वाले हैं। लावारिस कुत्ते सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं। बता दें कि पंजाब में 2025 में डॉग बाइट के 3.34 लाख मामले रिपोर्ट हुए थे जबकि 2026 में अब तक 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

    जस्टिस संत प्रकाश और जस्टिस गुरबीर सिंह जता चुके चिंता पंजाब -चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह पर आधारित आयोग ने जालंधर, लुधियाना, पटियाला और संगरूर के नगर निगम कमिश्नरों सहित निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब को नोटिस जारी कर कुत्तों के काटने के मामलों की रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

    आयोग ने कहा था कि 2025 के 3.34 लाख मामलों में ही अगर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है तो सूबा सरकार पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। अकेले संगरूर जिले में ही नगर कौंसिल को 10 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ सकता है।

    5 साल में तीन गुना बढ़े कुत्तों के काटने के केस हेल्थ विभाग पंजाब के आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 सालों में पंजाब में कुत्तों के काटने के मामले तीन गुना बढ़े हैं। साल 2020 में जहां 1 लाख 10 हजार 472 मामले दर्ज थे, वहीं यह बढ़कर 2021 में 1 लाख 26 हजार 842 हो गए। इसी तरह साल 2022 में 1 लाख 65 हजार 133 मामले रिकॉर्ड हुए और 2023 में भी यह आंकड़े 1 लाख 65 हजार 133 ही दर्ज किए गए।

    इसके बाद 2024 में यह मामले बढ़कर 2 लाख 13 हजार 521 हुए और 2025 में रिकॉर्ड तोड़ 3 लाख 34 हजार 736 तक पहुंच गए। 2026 की बात करें तो अब तक पंजाब में 5 महीने में 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

    SOP में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है
    ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के एमडी आलोकवर्मा सेनगुप्ता ने कहा कि इंसानों और आवारा कुत्तों के बीच बढ़ते संघर्ष की असली वजह कुत्तों की मौजूदगी नहीं, बल्कि सालों से नसबंदी और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम का सही ढंग से लागू न होना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया। संगठन ने अदालत के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें उसने कहा है कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह काम करने वाला एबीसी सेंटर बनाया जाए।

    जबरन कार्रवाई से बढ़ सकती है आवारा कुत्तों की समस्या: संगठन
    संगठन ने कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे कदम न उठाएं जो कानून और वैधानिक प्रक्रिया से बाहर हो। इनमें कुत्तों को जबरन हटाने, बड़ी संख्या में पकड़कर बंद करने, मारना या हटाने की नीति अपनाने जैसे कदम शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे समस्या कम नहीं होगी, बल्कि दोबारा आबादी बढ़ेगी और संघर्ष बढ़ सकता है।

    संगठनों ने क्या दिए सुझाव
    कुत्तों के लिए तय समय में बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी अभियान चले, रेबीज टीकाकरण हो, अवैध ब्रीडर और पालतू पशु दुकानों पर कार्रवाई हो, विदेशी नस्ल के डॉग्स के अवैध प्रजनन पर रोक लगे, कुत्तों को खाना खिलाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, डॉग्स को गोद लेने को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय निकायो की जिम्मेदारी तय की जाए।

    कब-कब क्या हुआ?
    28 जुलाई 2025 : SC ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के में प्रकाशित समाचार 'आवारा कुत्तों से त्रस्त शहर, बच्चे भुगत रहे कीमत' (City hounded by strays and kids pay price) पर स्वतः संज्ञान (suo moto cognisance) लिया था।

    11 अगस्त 2025 : कोर्ट ने दिल्ली और एमसीडी की अथॉरिटी को निर्देश जारी किया कि वे तुरंत सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़ना शुरू करें और डॉग शेल्टर में भेजें। इस फैसले के बाद पशु प्रेमियों और अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने गुहार लगाई गई कि फैसले पर रोक लगाई जाए।

    13 अगस्त 2025 : सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित एक याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने मामले को तीन जज को ट्रांसफर कर दिया।

    22 अगस्त 2025 : तीन जजों की बेंच ने 11 अगस्त के फैसले के कुछ पार्ट पर रोक लगा दी थी। आदेश में कहा कि आवारा कुत्तों को पकड़े जाने के बाद उसे नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

    7 नवंबर 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने एजुकेशनल सेंटर्स, अस्पतालों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक इलाकों में कुत्तों के काटने की घटना में बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता जताई और निर्देश दिया कि ऐसे आवारा कुत्तों को निर्धारित शेल्टर में स्थानांतरित किया जाए। यह भी आदेश दिया कि कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर वापस न छोड़ें जहां जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

    •     10 लाख के करीब दिल्ली में आवारा कुत्तों की कुल संख्या बताई गई है।
    •     4.68 लाख से ज्यादा कुत्तों का अब तक टीकाकरण और सफलतापूर्वक नसबंदी का काम होने का दावा।
    •     12 विधानसभा क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जाने की थे प्लानिंग।
    •     20 नए सेंटर बीमार और काटने वाले कुत्तों के इलाज के लिए बनाने का अहम सुझाव दिया गया था।
    •     80% तक आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी करने का लक्ष्य समिति द्वारा रखा गया था।
    •     5 अगस्त 2025 से हर जोन की चयनित विधानसभा में विशेष अभियान की प्लानिंग की गई थी।
    •     8-10 महीने से पशुपालन विभाग में निदेशक का पद पिछले साल जुलाई तक था खाली।
  • नई सड़कों से बदलेगी रफ्तार, CM डॉ. यादव बोले- मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों का होगा तेज विकास

    नई सड़कों से बदलेगी रफ्तार, CM डॉ. यादव बोले- मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों का होगा तेज विकास

    भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र नई सड़कों से होगा समृद्ध : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    सिंहस्थ के पहले सड़कों के निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश
    रिंग रोड्स निर्माण के कार्य समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में तेजी से निर्मित हो रही सड़कें नागरिकों को विकास का पूरा लाभ दिलवाने में सहयोगी हैं। इनसे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों भोपाल और इंदौर-उज्जैन की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। भविष्य में जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी अधोसंरचना विकास के प्रयासों से लाभान्वित होंगे। इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई वे फोर लेन, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे फोर लेन बन जाने से यह सम्पूर्ण क्षेत्र विकास के नए आयामों को स्पर्श करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुरुवार को मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिंहस्थ : 2028 के कुछ माह पूर्व ही सड़कों के निर्माण कार्य पूरे किए जाएं। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

    अमूल्य जिंदगियां बचाने के प्रयास सराहनीय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के निर्माण, नवाचारों के उपयोग और विभिन्न विधियों से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयासों में मिली सफलता सराहनीय है। लोक निर्माण विभाग अन्य विभागों के सहयोग से किसान कल्याण वर्ष में गांव से शहरों तक सब्जियां और फल लेकर आने वाले कृषकों को हेलमेट वितरण के कार्य में भी शामिल हो जिससे सड़कों पर दो पहिया वाहनों की दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। प्रदेश में मूल्यवान जिंदगियां बचाने के लिए लोक निर्माण और अन्य विभाग मिलकर कार्य करें। दुर्घटना की आशंका वाले मार्गों को चिन्हित कर निकट ही प्राथमिक उपचार केंद्र भी संचालित किए जाएं। यह कार्य विभागीय समन्वय से किया जाए।

    बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्तमान में 481 ब्लैक स्पॉटस चिन्हित हैं। दुर्घटनाओं में कमी लाने की दृष्टि से लोक निर्माण विभाग ने निरंतर कार्य किया है। ब्लैक स्पॉटस का समाधान करते हुए रोड सेफ्टी के अंतर्गत स्कूल जोन में वाहनों की गति सीमित करने, विशेष चेतावनी संकेत लगाने, वाहनों की आवाजाही को स्पष्ट दिशा संकेतक देने, लेन अनुशासन मार्किंग, रोड मार्किंग जैसे उपाय किए गए।

    निर्माण कार्यों की मंजूरी में भी नवाचार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया में किए गए नवाचार की जानकारी प्राप्त की। कार्य स्वीकृति से पूर्व संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा तकनीकी उपयुक्तता और आवश्यकता का प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इसी तरह परियोजना की वास्तविक आवश्यकता, यातायात घनत्व, भविष्य की मांग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के स्थल विश्लेषण, पीएम गति शक्ति पोर्टल से मार्ग अलाइनमेंट, मल्टी- मॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर समन्वय और इंटर कनेक्टिविटी का परीक्षण, जीआईएस आधारित प्लानिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाने और नए मार्गों के लिए नेटवर्क प्लानिंग और अलाइमेंट परीक्षण के कार्य मुख्य अभियंता स्तर से अनिवार्य किए जाने से अच्छे परिणाम मिले हैं। पुल- पुलियों के सुधार, बसाहट की जगहों पर वीसी मार्ग के निर्माण और कार्यपालन यंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण को भी अनिवार्य किया गया है।

    रिंग रोड्स के निर्माण के कार्यों में तेजी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के बड़े नगरों में निर्मित किए जा रहे रिंग रोड्स के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि भोपाल पश्चिमी बायपास जिसकी लंबाई 35.6 किमी है आगामी ढाई वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन का रिंग रोड आगामी डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगा। प्रदेश के अन्य मध्यम छोटे शहरों जैसे रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जहां यातायात का दबाव बढ़ रहा है, वहां नये रिंग रोड के निर्माण की पहल की गई है। नगर निगम और अन्य एजेंसियों से समन्वय कर विद्यमान बायपास को रिंग रोड में परिवर्तित करने की योजना पर कार्य हो रहा है। 

    रेल्वे ओवर ब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर

    रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। भारत सरकार की पहल के अंतर्गत असुरक्षित रेल्वे क्रांसिंग को समाप्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग रेल्वे ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण कर रहा है। इससे यातायात जाम और दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ समय की बचत करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश में पीडब्ल्यूडी सड़कों पर 105 आरओबी बनाए गए हैं। सड़क विकास निगम के अंतर्गत 16 और एनएचएआई के अंतर्गत 25 आरओबी एवं आरयूबी मंजूर किए गए हैं। प्रदेश में एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से शहरी कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। जबलपुर में यह कार्य पूरा हो चुका है। ग्वालियर और भोपाल में तीन चौथाई कार्य पूर्ण हो चुका है। इंदौर और उज्जैन में कॉरिडोर के कार्य प्रारंभ हुए हैं।

    प्रगति पथ प्रदेश की तीव्र प्रगति में होंगे सहायक

    प्रदेश में छह प्रगति पथ निर्माणाधीन हैं। इनमें नर्मदा प्रगति पथ और मालवा-निमाड़ विकास पथ के कार्य क्रमश: 68 और 92 प्रतिशत पूर्ण हो चुके हैं। मध्यभारत विकास पथ का कार्य 61 प्रतिशत, बुंदेलखण्ड विकास पथ का कार्य 33 प्रतिशत पूर्ण हुआ है। विंध्य एक्सप्रेस-वे का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। अटल प्रगति पथ के निर्माण के लिए आवश्यक प्रकिया प्रचलन में है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभाग द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि  केपेसिटी बिल्डिंग सहित विभिन्न एप का प्रयोग और नए मार्गों के लिए कृषक पथ, आस्था पथ, विकास पथ जैसे अभिनव नामकरण किए जा रहे हैं। प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखवीर सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कार्यों की प्रगति से अवगत करवाया। विशेष रूप से इंदौर- उज्जैन स्टेट हाईवे 59 के 6लेन बनने और उज्जैन- जावरा हाईवे 4 लेन और इंदौर-उज्जैन हाइवे फोरलेन, वेस्टर्न भोपाल बायपास, स्टेट हाइवे 67 के नर्मदापुरम- टिमरनी खंड और सिवनी मालवा बायपास टू लेन, सागर- दमोह फोर लेन और बड़वाह- धामनोद फोर लेन सड़क परियोजनाओं की जानकारी दी गई। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव सहित अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।