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  • गोल्डन टेंपल को बम से उड़ाने की धमकी! पुलिस ने सौरव बिस्वास को दबोचा

    गोल्डन टेंपल को बम से उड़ाने की धमकी! पुलिस ने सौरव बिस्वास को दबोचा

    अमृतसर.

    पश्चिम बंगाल के सौरव बिस्वास की गिरफ्तारी की सूचना अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (इंटरपोल) को देने जा रही है। पता चला है कि आरोपित ने पाकिस्तान और बंगलादेश में क्रिप्टो करंसी के जरिए कुछ लोगों को भुगतान किया है।

    यह भुगतान किस डील के बदले में किया गया इसकी जांच करवाई जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ई-मेल के जरिए धमकियां देने वाला आरोपित सौरव बिस्वास के खिलाफ उक्त दो देशों के साथ-साथ अन्य देशों को भी वांछित हो सकता है। फिलहाल जांच मुकम्मल होने के बाद उसे फताहपुर जेल भेज दिया गया है। साइबर सेल के अधिकारी ने बताया कि केस में नए पहलू सामने आने पर आरोपित को दोबारा कोर्ट के जरिए प्रोडक्शन वारंट पर जेल से गिरफ्तार किया जा सकता है।
    बता दें सौरव बिस्वास ने छह महीने पहले से अब तक श्री हरिमंदिर साहिब को बम से उड़ने की 40 के करीब धमकियां ई-मेल भेज कर की थी। इसके अलावा आरोपित ने श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, स्कूल, बस अड्डा, श्री दुर्ग्याणा मंदिर, रेलवे स्टेशन सहित देश के कई हिस्सों में ई-मेल भेजकर महत्वपूर्ण स्थलों को बम से उड़ाने की धमकियां दी थीं।

    पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल के बाद सौरव बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया। इसके कब्जे से तीन सौ से ज्यादा ई मेल आइडी और उनके पासवर्ड बरामद किए हैं। यह सभी उसने पैसे देकर विभिन्न लोगों से खरीदे थे और इसके जरिए फिर धमकियों का सिलसिला शुरु हुआ था। आरोपित के कब्जे से मिले तीन सीपीयू, पांच हार्ड डिस्क, तीन मोबाइल, एक इंटरनेट राउटर, 15 हाट मेल अकाउंट बरामद किए थे।

  • बलूचिस्तान में विस्फोट के बाद ट्रेन हादसा, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं

    बलूचिस्तान में विस्फोट के बाद ट्रेन हादसा, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं

     बलोचिस्तान

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुई, जो बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार धमाका रेलवे ट्रैक पर किया गया था और निशाना उस मालगाड़ी को बनाया गया, जो क्वेटा के कैंटोनमेंट इलाके की तरफ जा रही थी.

    बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि पास खड़ी एक ट्रेन की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो डब्बे पलट गए. रेल ट्रैक के पास खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और पास के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए. यह हादसा क्वेटा स्टेशन के चमन फाटक के पास हुआ.

    कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के बाद इलाके में फायरिंग की भी आवाज सुनी गई. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में यह साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और उसका धमाके से सीधा संबंध था या नहीं

    सोशल मीडिया में इस घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक ट्रेन में आग लगी हुई है और धुएं का गुबार ऊपर तक उठ रहा है. आप भी देखें-

    राहत बचाव के साथ-साथ जांच में जुटीं एजेंसियां
    स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई, ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. बलूचिस्तान के गृह विभाग के विशेष सहायक बाबर यूसुफजई ने पत्रकारों को बताया कि धमाके की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है.

    सेना और पुलिस बल मामले की छानबीन कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों ने हादसे की वजह और धमाके की वजह से हुए जानमाल के नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है.

    क्यों संवेदनशील माना जाता है बलूचिस्तान?
    घटना के कई घंटे बाद तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। हालांकि बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है. यहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जो प्रांत की आजादी की मांग करते रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान के इस इलाके में जाफर एक्सप्रेस नाम की ट्रेन को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है.

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का खनिज संपदा से भरपूर इलाका माना जाता है. यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का अहम मार्ग भी है. अरबों डॉलर की इस परियोजना को चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं.

    सीपीईसी के लिए बातचीत करने चीन में हैं पाक पीएम
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. अपने भारी-भरकम डेलिगेशन के साथ बीजिंग की यात्रा पर निकले शरीफ चीन के साथ इस कॉरिडोर के दूसरे चरण की फंडिंग की बात करने वाले हैं. हालांकि, सुरक्षा के लिए चुनौती बने इस अशांत क्षेत्र में चीन कितना निवेश करेगा, यह जल्द ही सामने आ जाएगा.

    हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने यहां का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से बात की थी. आए दिन पाकिस्तान आर्मी की ओर से इस जगह पर कंट्रोल करने के लिए ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अपनी आजादी के लिए जान को जोखिम में डालने वाले बलोच विद्रोही इसका बखूबी जवाब देते रहे हैं.

  • पांच महीने से वेतन अटका, 30 हजार स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

    पांच महीने से वेतन अटका, 30 हजार स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

    भोपाल

    मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने प्रदेशभर के आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों से 25 मई को भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले पांच से छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रदर्शन के बाद कर्मचारी उपमुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे। मांगें नहीं मानी गईं तो भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।
    30 हजार कर्मचारी दे रहे हैं सेवाएं

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा और न्यूनतम वेतन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

    निजी एजेंसियों की मनमानी और शोषण का आरोप

    संघ का आरोप है कि निजी एजेंसियों और अधिकारियों की मनमानी के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। शासन द्वारा स्वीकृत राशि और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर है। कर्मचारियों को आठ से 12 हजार रुपए तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन की मांग लंबे समय से की जा रही है।

    कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें

    संघ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के बदले समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश सुविधा, मातृत्व अवकाश और निजी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई हैं।

     

  • राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल, कांग्रेस की बढ़त मामूली; BJP ने तेज की जोड़तोड़ राजनीति

    राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल, कांग्रेस की बढ़त मामूली; BJP ने तेज की जोड़तोड़ राजनीति

    भोपाल
    कांग्रेस मध्यप्रदेश से राज्यसभा की अपनी एक सीट बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है। वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा जाने से इंकार करने के बाद से उम्मीदवार पर सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस में दो स्तरों पर जद्दोजहद जारी है, पहला उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाना और दूसरा क्रॉस वोटिंग को रोकना। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने पहले प्रदेश के दिग्गज नेताओं से रायशुमारी की, इसके बाद 5 मई को दिल्ली में हुई बैठक में उम्मीदवार का फैसला हो गया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी में राज्यसभा उम्मीदवार तय हो गया है। पार्टी, मध्यप्रदेश के ही सर्वस्वीकार्य और व्यापक जनाधार वाले नेता को आगे करेगी।

    राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस में सक्रियता बढ़ी है। संभावित उम्मीदवार के लिए जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों नामों पर चर्चा कर प्रस्ताव एआइसीसी को भेजे जाएंगे।

    कांग्रेस में सर्वसम्मति बनाने और क्रॉस वोटिंग रोकने पर पूरा जोर

    कांग्रेस खेमे में अभी भी उम्मीदवार के नामों को लेकर ऊहापोह की स्थिति है। इतना ही नहीं, बीजेपी भी उनका खेल बिगाड़ने की कवायद में जुटी हुई है। चर्चा यहां तक है कि कांग्रेस की सीट हासिल करने के लिए बीजेपी डमी प्रत्याशी उतार सकती है।

    सिर्फ 4 विधायक ज्यादा, बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए

    दरअसल कांग्रेस के पास अपनी राज्यसभा सीट बचाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या बल तो है पर वरिष्ठ नेताओं को इसमें सेंधमारी का डर सता रहा है। मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। एक सदस्य को राज्यसभा भेजने के लिए 58 विधायक जरूरी हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए हैं। पार्टी के पास वोट डालने वाले अब 62 विधायक ही बचे हैं जोकि एक सदस्य को जिताने की जरूरी संख्या से चार ही अधिक हैं।

    क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे

    हरियाणा-उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग और बिहार में विधायकों की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को झटका लग चुका है। अब मप्र में भी पार्टी को इसका डर सता रहा है। क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

  • मिड-डे मील स्टॉक को लेकर शिक्षा विभाग सख्त, राशन खराब होने पर तय होगी जवाबदेही

    मिड-डे मील स्टॉक को लेकर शिक्षा विभाग सख्त, राशन खराब होने पर तय होगी जवाबदेही

    फतेहाबाद/लुधियाना.

    भीषण गर्मी के बीच शिक्षा विभाग ने 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। छुट्टियों के साथ ही विभाग ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के स्टाक को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने सभी स्कूलों से मिड-डे मील में उपयोग होने वाले गेहूं, चावल, दाल, तेल सहित अन्य सामग्री का पूरा ब्योरा मांगा है।

    साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही के कारण यदि कोई खाद्यान्न खराब हुआ तो संबंधित स्कूल स्टाफ जिम्मेदार माना जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार अवकाश के दौरान स्कूल बंद रहेंगे, ऐसे में खाद्यान्न की सुरक्षित स्टोरेज सुनिश्चित करना जरूरी होगा। जिन स्कूलों में राशन अधिक मात्रा में बचा हुआ है या खराब होने की आशंका है, वहां से स्टाक तुरंत वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं से स्टाक का रिकॉर्ड निर्धारित समय में उपलब्ध करवाने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी के मौसम में खाद्यान्न खराब होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें कि पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील योजना के तहत भोजन दिया जाता है।

  • 76 दिन बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन भारत अब भी राहत में! समझें 4 साल का पूरा हिसाब-किताब

    76 दिन बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन भारत अब भी राहत में! समझें 4 साल का पूरा हिसाब-किताब

    नई दिल्ली

    देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है। 

    कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ
    28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय
    बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया। 

    साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे। 

    19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। 

    अब वैश्विक तुलना देखिए.
    होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही। 

    सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो। 

    रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं। 

    अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं?
    केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है। 

    सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं। 

    अब 2014 के '71 रुपये वाले पेट्रोल' की चर्चा.
    कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे। 

    यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा। 

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
    FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये,
    FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये,
    FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये,

    और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं। 

    चार साल का पूरा हिसाब
    2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं। 

     

  • सियासी गलियारों में हलचल, राघव चड्ढा को राज्यसभा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

    सियासी गलियारों में हलचल, राघव चड्ढा को राज्यसभा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली

    हाल ही में आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया गया है।

    याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया
    राज्यसभा की एक अधिसूचना में कहा गया है कि राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसमें यह भी बताया गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से इस पैनल का पुनर्गठन किया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया।

    चड्ढा के अलावा पैनल के सदस्यों में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रंगव्रा नारज़ारी और संदोश कुमार पी शामिल हैं।

    एक अन्य अधिसूचना में राज्यसभा सचिवालय ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा के सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है।

    आप के 7 सांसदों ने थामा था बीजेपी का हाथ
    बता दें कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में एक रहे राघव चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पार्टी को अलविदा कह दिया था। सभी सात सांसदों ने 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। राज्यसभा में 10 सांसदों वाली आप के अब केवल 3 सांसद बचे हैं।

    आप ने की थी बर्खास्त करने की मांग
    इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी हैं।

    दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
    इस बीच राघव चड्ढा की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर उनके बारे में प्रसारित किए जा रहे फर्जी, एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित सामग्री दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा व व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर छेड़छाड़ की गई सामग्री तैयार करना और प्रसारित करना न केवल कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अपूरणीय प्रतिष्ठात्मक क्षति भी हो रही है।

    कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
    दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह राघव चड्ढा के व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं बनता। उनकी आलोचना उनके राजनीतिक फैसले को लेकर और बीजेपी में जाने को लेकर की जा रही है। हाई कोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों का व्यवसायिक इस्तेमाल और आलोचना करने में अंतर है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

  • SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया। 

    शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था। 

    स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है। 

    टीएमसी ने लगाया 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप
    इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी। 

    सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। 

    इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया। 

    आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है।

    टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज
    दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है।

    बदले की भावना से कार्रवाई
    वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है।

    रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण
    इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया।

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी
    गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

  • ट्रंप का स्पेशल मैसेज लेकर PM मोदी से मिले मार्को रुबियो, जानें किन मुद्दों पर हुई बातचीत

    ट्रंप का स्पेशल मैसेज लेकर PM मोदी से मिले मार्को रुबियो, जानें किन मुद्दों पर हुई बातचीत

    नई दिल्ली

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटें तक चर्चा चलती रही है. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जय शंकर के अलावा एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद रहे हैं. हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि रूबियो की दिल्ली यात्रा भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है. अपनी इस अहम कूटनीतिक यात्रा के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर रक्षा, व्यापार, इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. इस उच्च स्तरीय मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वह निमंत्रण रहा, जो रूबियो वाशिंगटन से अपने साथ लेकर आए थे. रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का विशेष न्योता दिया। 

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं. उन्होंने आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस दौरान मार्को रुबियो ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है। 

    बैठक काफी सकारात्मक रही- रुबियो
    रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि यह बैठक काफी सकारात्मक और उपयोगी रही. दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. अमेरिका ने साफ तौर पर भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। 

    रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न सिर्फ दोनों देशों को मजबूत करेगा, बल्कि एक मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित होगा। 

    बैठक के बाद पीएम मोदी ने शेयर कीं तस्वीरें
    प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद X पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगति पर विस्तार से बातचीत हुई. इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत और अमेरिका वैश्विक हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे. दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। 

    करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हुआ. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा। 

    इन बातों पर रहेगा फोकस
    दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे। 

    पीएम मोदी ने मार्को रूबियो से मुलाकात पर दी जानकारी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बैठक की अहम जानकारी साझा की है. पीएम मोदी ने रूबियो का भारत में स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और बताया कि इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में हो रही निरंतर प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दों पर भी गहरा मंथन किया. अपनी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई और साझा हितों के लिए भविष्य में भी मजबूती से एक साथ मिलकर कार्य करते रहेंगे। 

     भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत बनाने पर मोदी-रूबियो की चर्चा- सर्जियो गोर
    मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद मीडिया से बात कर बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे के करीब चली बैठक काफी सकारात्मक रही. बैठक में सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. गोर ने भारत को अमेरिका का एक अहम साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश मिलकर फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। 

     अब और मजबूत होगी भारत-US रणनीतिक साझेदारी, MEA ने किया जोरदार स्वागत
    मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है. MEA ने नई दिल्ली पहुंचने पर तस्वीर शेयर करते हुए रूबियो का हार्दिक अभिनंदन किया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ये यात्रा दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में मील का पत्थर साबित होगी. मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया कि रूबियो का यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Global Strategic Partnership) को एक नई दिशा देगा और इसे और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। 

    प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो का स्वागत करते हुए इस रिश्ते को वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए अहम बताया। 

    रूबियो के भारत दौरे के कार्यक्रम

    23 मई, 2026

        सुबह 7:05 बजे कलकत्ता आगमन
        मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी
        दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान
        दोपहर 2:30 से 4 बजे तक – अमेरिकी दूतावास का कार्यक्रम
        शाम 4 बजे – अमेरिकी दूतावास में रेड कार्पेट

    24 मई

        सुबह 11:30 बजे से – जयशंकर/रुबियो वार्ता
        शाम 6 से 9 बजे तक – भारत मंडपम में 250वीं वर्षगांठ का स्वागत समारोह

    25 मई

        पहला भाग संभवतः आगरा में
        दोपहर 2 बजे जयपुर आगमन
        दोपहर 3 से 4:15 बजे तक आमेर किला
        शाम 4:45 बजे – रामबाग होटल

    26 मई

        सुबह 6:15 बजे – दिल्ली के लिए प्रस्थान
        सुबह 9:30 बजे – क्वाड शिखर सम्मेलन
        सुबह 11:00 बजे – क्वाड में प्रेस कॉन्फ्रेंस

     

  • ट्रंप परिवार पर मंडराया खतरा! इवांका की हत्या की कथित साजिश में IRGC का नाम सामने आया

    ट्रंप परिवार पर मंडराया खतरा! इवांका की हत्या की कथित साजिश में IRGC का नाम सामने आया

    वाशिंगटन

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है. ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से ट्रेनिंग पाए एक खतरनाक आतंकवादी ने इवांका ट्रंप की जान लेने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था।'द पोस्ट' अखबार को मिली जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी छह साल पहले अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए अपने गुरु और ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। 

    सुरक्षा एजेंसियों ने इवांका ट्रंप की हत्या का प्लान बना रहे आतंकी को पकड़ लिया है. उसकी पहचान 32 साल के मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी के तौर पर हुई है. वो इराकी नागरिक बताया जा रहा है। 

    कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था आतंकी
    दरअसल 6 साल पहले बगदाद में डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने एक बड़े ऑपरेशन में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था. अल-सादी इस हमले को अपने गुरु की मौत मानता था और तभी से ट्रंप परिवार को तबाह करने की फिराक में था। 

    आरोपी अल-सादी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार, खासकर उनकी बेटी इवांका ट्रंप को जान से मारने की कसम खाई थी. जांच के दौरान सुरक्षा बलों को अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट भी बरामद हुआ है. वो काफी समय से उनके घर की रेकी कर रहा था। 

    ‘हमें इवांका को मारना होगा’— मिला आलीशान घर का ब्लूप्रिंट
    जांच एजेंसियों को आरोपी अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट बरामद हुआ है, जिससे साफ है कि वह लंबे समय से रेकी कर रहा था। वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने बताया कि सुलेमानी की मौत के बाद अल-सादी अक्सर कहता था, “हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा और ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक करना होगा, जैसे उसने हमारे कमांडर को तबाह किया।” फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आतंकी से पूछताछ कर रही हैं।

    सोशल मीडिया पर दी थी खुली धमकी
    इवांका ट्रंप और उनके पति जेरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित 24 मिलियन डॉलर के घर की तस्वीरें और नक्शे इस आतंकी ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए थे। आतंकी ने सोशल मीडिया (X और स्नैपचैट) पर अरबी भाषा में लिखा था, 'मैं अमेरिकियों से कहता हूं, इस तस्वीर को देखो और जान लो कि न तो तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। हम अभी निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं। हमारा बदला सिर्फ समय की बात है।' अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के अनुसार, वह अक्सर स्नैपचैट पर साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भेजकर अपने टारगेट को डराता था।

    अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DoJ) के अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, अल-सादी कोई आम अपराधी नहीं बल्कि यूरोप और अमेरिका में हुए 18 आतंकी हमलों और नाकाम कोशिशों का मुख्य साजिशकर्ता है।

    उस पर मार्च में एम्स्टर्डम में 'बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन' पर फायरबम फेंकने, अप्रैल में लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से हमला करने और मार्च में ही टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी कराने के गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा वह बेल्जियम के लीज में एक सिनागॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) पर बमबारी और रॉटरडैम में आगजनी की साजिश में भी शामिल रहा है।

    तुर्की में हुआ गिरफ्तार, सरकारी पासपोर्ट ने चौंकाया
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जब अल-सादी को 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया, तो उसके पास से इराक का 'सर्विस पासपोर्ट' (Service Passport) मिला। अल-सादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक दौरों के नाम पर एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था, जिसकी आड़ में वह दुनिया भर में घूमकर आतंकी नेटवर्क और स्लीपर सेल्स तैयार करता था।

    फिलहाल, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के निर्देश पर आरोपी अल-सादी को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में कड़ी सुरक्षा के बीच एकांत कारावास (Solitary Confinement) में रखा गया है और आगे की पूछताछ जारी है।

    'हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा'
    वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने इस आतंकी के इरादों के बारे में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद, अल-सादी लोगों से कहता फिर रहा था कि हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा. वो कहता था कि हमें ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक कर देना चाहिए, जिस तरह उसने हमारे घर (कमांडर सुलेमानी) को तबाह किया था।