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  • मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अंतरित किए ₹37.19 करोड़

    मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अंतरित किए ₹37.19 करोड़

    मातृशक्ति के सम्मान और स्वावलंबन का मजबूत आधार बनी महतारी वंदन योजना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त, 67.38 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में पहुंचे ₹632.40 करोड़

    महतारी वंदन योजना के माध्यम से अब तक माताओं-बहनों को ₹20,708 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता

    मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अंतरित किए ₹37.19 करोड़

    मातृशक्ति के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर परिवार और प्रदेश को सशक्त बना रही हमारी सरकार: मुख्यमंत्री साय

    दुर्ग जिले को ₹218.48 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी नई गति

    23 विकास कार्यों का भूमिपूजन, आईटीआई दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ की लाखों माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत कर रही महतारी वंदन योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुर्ग जिले में आयोजित कार्यक्रम में योजना की 32वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 632 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक दी गई आर्थिक सहायता की राशि 20708 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आर्थिक सशक्तीकरण हमारी सरकार के लिए केवल एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। हमारा विश्वास है कि जब परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर परिवार के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े निर्णयों तक उसकी भागीदारी और मजबूत होती है। इसलिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से सरकार माताओं-बहनों के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास दे रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नारीशक्ति को विकास की धुरी बनाते हुए महिला सशक्तीकरण को नई दिशा दी है। उनके नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल हुई हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के अनुरूप माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि लाखों महिलाओं के लिए अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने का भरोसेमंद आर्थिक आधार बनी है। कोई बहन इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई में कर रही है, कोई पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में, तो कोई अपनी छोटी-छोटी बचत और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में इसका उपयोग कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन की राशि केवल बैंक खातों में पहुंचने वाली आर्थिक सहायता नहीं है। यह माताओं-बहनों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को नई शक्ति देने वाली राशि है। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की माताएं-बहनें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हों, बल्कि परिवार और समाज के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी निरंतर बढ़े।

    हर महीने सीधे माताओं-बहनों के खाते में पहुंच रहा आर्थिक संबल

    प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रभावी महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना की शुरुआत से सितंबर 2026 तक 31 किस्तों में महिलाओं को 20075 करोड़ 76 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी थी।

    मुख्यमंत्री साय द्वारा आज जारी 32वीं किस्त में प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 632 करोड़ 40 लाख 4 हजार 250 रुपये की राशि अंतरित की गई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक 20708 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।

    प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचने से उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल रहा है। यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ महिलाओं को अपने संसाधनों पर सीधा अधिकार भी प्रदान कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाना और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कौशल और आजीविका के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि एक महिला सशक्त होती है तो उसका परिवार सशक्त होता है और जब प्रदेश की लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा समाज और राज्य विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

    दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक माताओं-बहनों को मिले ₹37.19 करोड़

    महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त से दुर्ग जिले की 3 लाख 89 हजार 507 पात्र महिलाओं को भी सीधा लाभ मिला। मुख्यमंत्री साय ने जिले की इन माताओं-बहनों के बैंक खातों में 37 करोड़ 19 लाख 10 हजार 250 रुपये की राशि अंतरित की।

    नियमित रूप से मिलने वाली यह आर्थिक सहायता महिलाओं को घरेलू आवश्यकताओं के साथ स्वयं की जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्रता दे रही है। इससे परिवार की आर्थिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और निर्णय क्षमता भी मजबूत हो रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ की हर माता-बहन आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उनके सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने में सरकार सहभागी बने। महिला सशक्तीकरण हमारे लिए केवल आर्थिक सहायता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने का व्यापक संकल्प है।

    मातृशक्ति के सशक्तीकरण के साथ दुर्ग के विकास को ₹218.48 करोड़ की नई गति

    कार्यक्रम में एक ओर प्रदेश की लाखों माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना के माध्यम से आर्थिक संबल मिला, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग जिले के समग्र विकास के लिए 218 करोड़ 48 लाख 29 हजार रुपये की लागत के विकास कार्यों की सौगात दी।

    मुख्यमंत्री ने 1 करोड़ 22 लाख 56 हजार रुपये की लागत से पूर्ण हुए आईटीआई दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया। इसके साथ ही 217 करोड़ 25 लाख 73 हजार रुपये की लागत के 23 निर्माण एवं विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।

    ये कार्य सड़क संपर्क, सिंचाई, शिक्षा, कौशल विकास, चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा और विद्युत अधोसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनके पूर्ण होने से दुर्ग जिले में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विकास को नई गति मिलेगी।

    बेहतर सड़कें बढ़ाएंगी कनेक्टिविटी, सुगम होगा आवागमन

    लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में पुलगांव पुल मुख्य मार्ग से अंजोरा-रसमड़ा पहुंच राज्य मार्ग क्रमांक-22 के लगभग पांच किलोमीटर हिस्से को चार लेन बनाने के लिए 30.20 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किया जाएगा।

    अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में कुम्हारी-अहिवारा-पथरिया राज्य मार्ग क्रमांक-21 के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 24.06 करोड़ रुपये तथा जेवरा सिरसा से भटगांव तक 3.60 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 4.28 करोड़ रुपये के कार्यों की आधारशिला रखी गई।

    पाटन विधानसभा क्षेत्र में भिलाई-सिरसा-औंधी-औरी-मोतीपुर मार्ग के 15.50 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण पर 15.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भिलाई से तर्रा मुख्य जिला मार्ग के 15 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 8.33 करोड़ रुपये तथा पौहा से खपरी तक 2.20 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 3.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

    अहिवारा एवं वैशाली नगर क्षेत्र में चंदूलाल चंद्राकर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से जुनवानी-कोहका-कुरूद मुख्य मार्ग के 2.50 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण के लिए 7.06 करोड़ रुपये के कार्य का भी भूमिपूजन किया गया।

    इन कार्यों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा, आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के केंद्रों तक लोगों की पहुंच आसान होगी।

    युवाओं के कौशल और भविष्य में निवेश

    मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र में सिडबी क्लस्टर डेवलपमेंट फंड से वित्तपोषित आईटीआई दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया। इस कार्य पर 1 करोड़ 22 लाख 56 हजार रुपये की लागत आई है। उन्नत अधोसंरचना से युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल अर्जित करने की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

    शासकीय पॉलिटेक्निक दुर्ग में भी 8.86 करोड़ रुपये की लागत से ऑफिस ब्लॉक के नवीनीकरण, सीसी रोड निर्माण, दिव्यांगजनों के लिए प्रसाधन तथा सिविल विंग के विस्तार सहित विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य किए जाएंगे।

    दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में 4.11 करोड़ रुपये की लागत से लाइवलीहुड कॉलेज भवन का निर्माण किया जाएगा। इससे जिले के युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी तथा उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

    सिंचाई व्यवस्था होगी मजबूत, किसानों को मिलेगा लाभ

    जल संसाधन विभाग के अंतर्गत सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जल संरक्षण और जलाशयों की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए अनेक कार्यों की आधारशिला रखी गई।

    पाटन विधानसभा क्षेत्र में सुरपा व्यपवर्तन योजना के जीर्णोद्धार तथा नहर प्रणाली की रीमॉडलिंग एवं लाइनिंग के लिए 2.23 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    अहिवारा क्षेत्र में मोहंदी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग के लिए 4.96 करोड़ रुपये, कपसदा जलाशय के लिए 4.57 करोड़ रुपये तथा नंदौरी जलाशय के लिए 4.77 करोड़ रुपये के कार्य किए जाएंगे।

    दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में तिरगा और गनियारी जलाशयों के जीर्णोद्धार पर प्रत्येक के लिए 4.71 करोड़ रुपये तथा रिसाली-उमरपोटी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग पर 4.97 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने के लिए कोटनी माइनर चैनल का निर्माण 4.93 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। शिवनाथ मंडल कार्यालय दुर्ग के जीर्णोद्धार एवं नवीन निर्माण के लिए भी 4.96 करोड़ रुपये के कार्य की आधारशिला रखी गई।

    इन कार्यों के पूरा होने से जल प्रबंधन बेहतर होगा, सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को खेती के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    चिकित्सा और नर्सिंग शिक्षा की सुविधाओं का होगा विस्तार

    दुर्ग शहर में चिकित्सा शिक्षा की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री साय ने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए 16.16 करोड़ रुपये की लागत से छात्रावास निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।

    जिला चिकित्सालय दुर्ग स्थित शासकीय जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए 11.96 करोड़ रुपये के कार्य की भी आधारशिला रखी गई। इन परियोजनाओं से चिकित्सा एवं नर्सिंग विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में सहायता मिलेगी।

    पाटन क्षेत्र में और मजबूत होगी विद्युत अधोसंरचना

    पाटन विधानसभा क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति और ट्रांसमिशन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तीन महत्वपूर्ण कार्यों का भूमिपूजन किया गया।

    इनमें 25.83 करोड़ रुपये की लागत से 132/33 केवी उपकेंद्र जामगांव (आर) का निर्माण तथा 14 करोड़ रुपये की लागत से 132 केवी पाटन-जामगांव (आर) अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण शामिल है।

    इसके अतिरिक्त 220/132 केवी उपकेंद्र पाटन में 2.50 करोड़ रुपये की लागत से दो अतिरिक्त 132 केवी बे का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के पूरा होने से क्षेत्र की ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक मजबूत एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    मातृशक्ति के सामर्थ्य से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का विकास मॉडल जनकल्याण और मजबूत अधोसंरचना के समन्वय पर आधारित है। एक ओर माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ पूरी शक्ति से योगदान दे रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा में मातृशक्ति की भूमिका निर्णायक है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर, युवाओं के लिए अवसर बढ़ाकर, किसानों को मजबूत करके और आधुनिक अधोसंरचना विकसित करके राज्य सरकार विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं-बहनों के चेहरे पर खुशी, उनके जीवन में आत्मविश्वास और उनके हाथों में आर्थिक सामर्थ्य हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। सशक्त मातृशक्ति ही सशक्त परिवार, समृद्ध समाज और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है।

  • CM मोहन यादव से मिले RPG ग्रुप के प्रतिनिधि, MP के 4 शहरों में ट्रांसमिशन-टायर और IT निवेश की तैयारी

    CM मोहन यादव से मिले RPG ग्रुप के प्रतिनिधि, MP के 4 शहरों में ट्रांसमिशन-टायर और IT निवेश की तैयारी

     भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई के होटल द सेंट रेजिस में आयोजित 'मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम में कई बड़े समूहों से चर्चा की। उन्होंने वन टू वन चर्चा भी। इस मुलाकात के दौरान आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका और वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से निवेश पर चर्चा हुई। हर्ष गोयनका ने मध्यप्रदेश के जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं संदीप गर्ग के साथ पाइप निर्माण, टेक्सटाइल और अधोसंरचना पर निवेश की बातें हुईं।
    मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका से मुलाकात की। मुंबई में हुई बैठक में समूह की ओर से प्रदेश में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और आईटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन को संभावित निवेश स्थलों के तौर पर चर्चा में रखा गया।

    जबलपुर में ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट की संभावना
    आरपीजी समूह ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने में रुचि दिखाई। बैठक में प्रदेश की औद्योगिक सुविधाओं, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध कार्यबल के साथ निवेश के लिए राज्य की नीतियों पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर विद्युत पारेषण क्षेत्र में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। चर्चा में मध्यप्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों का लाभ लेकर नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। आरपीजी समूह ने मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए राज्य में टायर निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित निवेश स्थलों के रूप में चर्चा में आए। इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई। आरपीजी समूह की टीम ने संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर आवश्यक सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने की इच्छा व्यक्त की। इस क्रम में उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में उपलब्ध प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे समूह को तैयार बुनियादी ढांचे के माध्यम से आईटी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

    तीन शहरों में टायर प्लांट पर विचार
    टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर के विकल्पों पर चर्चा हुई। समूह इन स्थानों पर औद्योगिक सुविधाओं, कच्चे माल की उपलब्धता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन कर सकता है। इसके बाद संभावित परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी। 

    मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव
    आरपीजी समूह अवसंरचना, मोबिलिटी, टायर, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विविध क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख भारतीय औद्योगिक समूह है। इसके प्रमुख व्यवसायों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह की वैश्विक उपस्थिति छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में है। समूह का मध्यप्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वर्ष 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से समूह की राज्य में उपस्थिति रही है।

    टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में वेलस्पन समूह ने दिखाई रुचि
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में समूह की निवेश योजनाओं तथा नई परियोजनाओं में सहभागिता की संभावनाओं पर चर्चा की। वेलस्पन समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश की रुचि दिखाई। समूह ने प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा भी व्यक्त की। इस संबंध में वेलस्पन समूह स्थल का निरीक्षण करने के लिए अपनी टीम भेजेगा।

    एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गर्ग के बीच वेलस्पन कॉर्प द्वारा एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा हुई। प्रदेश में पाइप निर्माण क्षेत्र में समूह की गतिविधियों और निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सिंटेक्स के ₹700 करोड़ के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा की गई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति के संदर्भ में पाइप निर्माण तथा टेक्सटाइल क्षेत्र की गतिविधियों पर संवाद हुआ।

    उज्जैन के आईटी पार्क पर नजर
    आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। समूह की टीम संभावित स्थानों का दौरा कर वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करेगी। प्लग-एंड-प्ले सुविधा के कारण तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर आईटी गतिविधियां शुरू करने का विकल्प भी बैठक में सामने आया। बैठक में संभावित परियोजनाओं के लिए जमीन, जरूरी मंजूरियों और निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सरकार की एकल-खिड़की व्यवस्था के जरिए परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग देने की बात कही गई। आरपीजी समूह के प्रमुख कारोबार में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह का मध्यप्रदेश से भी पुराना कारोबारी जुड़ाव है। केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश में विद्युत पारेषण से जुड़ी परियोजनाओं में काम किया है। अब समूह की ओर से नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशने से प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

     

  • राजेंद्र सलूजा को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सभी आरोपों से बरी

    राजेंद्र सलूजा को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सभी आरोपों से बरी

    गुना
     मध्य प्रदेश में गुना से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप लगा था. जिस पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई चल रही थी. सालों से चल रहे इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है. कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया है कि पूर्व विधायक ने कूटरचित दस्तावेज बनवाए थे। 

    राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण का आरोप
    बता दे की राजेंद्र सिंह सलूजा द्वारा गुना विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी. जिसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सलूजा सामान्य वर्ग से आते हैं, उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है. जांच के बाद 2011 को उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था. पत्रकार कोमल प्रसाद शाक्य ने कोर्ट में एफआईआर के लिए प्राइवेट इस्तगासा लगाया था. (जब पुलिस कोई एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जिसे कानून की भाषा में इस्तगासा कहा जाता है। 

    ग्वालियर हाईकोर्ट ने आरोपों से किया बरी
    उस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राजेंद्र सिंह सलूजा, उनके पिता अमरीक सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120B के तहत मामला संज्ञान में लिया था. इसमें निचली अदालत से अग्रिम जमानत हो गई थी. इसके बाद कोमल प्रसाद शाक्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में आदेश दिया था कि हाईकोर्ट एक साल में इस मामले में फैसला ले. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. जहां बुधवार को कोर्ट ने मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। 

    सालों चला कोर्ट में केस, राजेंद्र सलूजा ने जताई खुशी
    राजेंद्र सिंह सलूजा ने जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2012 में याचिका कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी. इसके बाद रिव्यू पिटीशन भी 2013 में खारिज हो गई थी. हालांकि वह पहले ही 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे. मामले में ईटीवी भारत से फोन पर चर्चा में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने बताया कि "सब टेकरी सरकार की कृपा और आशीर्वाद है. मैं न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता हूं। यह सब जनता का आशीर्वाद है. टेकरी सरकार ने आज तक मेरे को एक कांटा भी नहीं लगने दिया. गुना जिले की जनता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं. जो मेरे बुरे समय भी मेरे साथ खड़ी रही. बता दें पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा गुना के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी मंदिर बालाजी के परम भक्त माने जाते हैं। 

  • योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत, इंफ्रास्ट्रक्चर से तकनीक तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत, इंफ्रास्ट्रक्चर से तकनीक तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत

     योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक पर दिया जोर

    पिछले नौ वर्षों में जेल विभाग के बजट में 215 फीसदी का इजाफा

     वर्ष 2017-18 में 913 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 2,877 करोड़ हुआ बजट

    लखनऊ
    योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। इस दौरान जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और नई तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की। इसमें सबसे अधिक धनराशि जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गयी। 

    जेल विभाग के बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
    डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि योगी सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही जेलों की व्यवस्थाओं को भी समय के अनुरूप बनाने पर जोर दिया है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की जेल व्यवस्था में एक ओर जहां क्षमता विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के जरिए सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल विभाग के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग के लिए कुल 913.07 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में जेल विभाग के बजट में करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया जबकि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी योगी सरकार की ओर से जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।

    जेलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
    डीजी ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में नई जेलों के निर्माण के साथ ही बंदी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़, और हापुड़ में 190.08 करोड़ की लागत से जिला कारागार का निर्माण किया जा रहा है। नई जेलों के निर्माण के साथ ही प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। संभल में प्रस्तावित जेल के लिए शासन की ओर से 24.56 करोड़, शामली में 96.20 करोड़, बलिया में 24.12 करोड़, सहारनपुर में 50.87 करोड़, अमरोहा में 32.28 करोड़ और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि के लिए स्वीकृत किए गये हैं।

  • राजोआना को फांसी या उम्रकैद? केंद्र ने SC में सजा कम करने का विरोध किया, 28 को होगी सुनवाई

    राजोआना को फांसी या उम्रकैद? केंद्र ने SC में सजा कम करने का विरोध किया, 28 को होगी सुनवाई

    नई दिल्ली
    केंद्र सरकार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा पाए दोषी बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका का विरोध किया है जिसमें उन्होंने अपनी सजा को कम करने की मांग की है।30 से अधिक वर्षों से हिरासत में रह रहे राजोआना ने राष्ट्रपति के समक्ष 2012 से लंबित दया याचिका पर निर्णय में देरी के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, “हमें उनकी मांगों पर आपत्ति है। राज्य [पंजाब] में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं होगा।”

    केंद्र सरकार द्वारा याचिका का विरोध किए जाने के मद्देनजर, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और अपारेश कुमार सिंह सहित पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करेगी।"चूंकि अब वे अपनी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने पर जोर दे रहे हैं, जिसका आप विरोध कर रहे हैं, इसलिए हम मामले की योग्यता के आधार पर सुनवाई करेंगे," पीठ ने कहा।श्री नटराज द्वारा मामले की तैयारी के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की।

    बब्बर खालसा के उग्रवादी राजोआना को तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। बेअंत सिंह की हत्या 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सिविल सचिवालय के बाहर एक आत्मघाती बम विस्फोट में हुई थी। इस विस्फोट में हमलावर दिलावर सिंह और 17 अन्य लोग भी मारे गए थे।

    एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में रजोआना को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2010 में बरकरार रखा था। उनकी फांसी 31 मार्च, 2012 को तय की गई थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा उनकी ओर से दया याचिका प्रस्तुत करने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था।

    14 साल से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका
    राजोआना की याचिका का मुख्य आधार उसकी दया या
    चिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होना है। राजोआना की ओर से दलील दी गई है कि उसकी दया याचिका वर्ष 2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है।

    14 साल से अधिक समय तक फांसी की सजा के अनिश्चित भविष्य में रहने से उसे मानसिक पीड़ा और असहनीय तनाव का सामना करना पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि दया याचिका पर फैसला लेने में इतनी लंबी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।

    राजोआना के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उन पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया जाएगा, जिनमें दया याचिका पर अत्यधिक देरी को मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के आधार के रूप में स्वीकार किया गया है। 23 सितंबर को वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राजोआना अब मुख्य रूप से मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के मुद्दे पर जोर दे रहा है।

    31 अगस्त 1995 को हुआ था बम विस्फोट
    बलवंत सिंह राजोआना को 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए आत्मघाती बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था। इस विस्फोट में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। जांच में राजोआना को मामले में बैकअप बम हमलावर बताया गया था।

    विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा। राजोआना को 31 मार्च 2012 को फांसी दी जानी थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से उसकी ओर से दया याचिका दाखिल किए जाने के बाद फांसी पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

    2019 में केंद्र ने रखा था सजा कम करने का प्रस्ताव
    राजोआना की सजा को लेकर वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने भी पहल की थी। गृह मंत्रालय ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर राजोआना की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सका।

    इसके बाद राजोआना ने वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और केंद्र के प्रस्ताव को लागू करने के साथ-साथ उसकी दया याचिका पर फैसला करने की मांग की। इस दौरान केंद्र ने अदालत को बताया था कि मामले में फैसला टाल दिया गया है। दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होने के कारण यह मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है।

    पंजाब के मौजूदा माहौल का दिया हवाला
    इस बार केंद्र ने राजोआना की सजा कम करने का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। केंद्र का ताजा रुख ऐसे समय आया है जब पंजाब में राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं।

    हालांकि, केंद्र ने अदालत के समक्ष मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा कम करने को अनुकूल नहीं बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को केंद्र के विरोध और राजोआना की ओर से सजा में देरी को आधार बनाकर दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

     

  • मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, वैश्विक मंच पर चमकेगी प्रदेश की आतिथ्य क्षमता

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, वैश्विक मंच पर चमकेगी प्रदेश की आतिथ्य क्षमता

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश की आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल

    मुख्य सचिव बर्णवाल और केंद्रीय पर्यटन सचिव कुमार ने ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट’ में एग्जिबिशन का किया शुभारंभ
    टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलियर्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, टेबल स्पेस और ग्रामीण पर्यटन है एग्जिबिशन का मुख्य आकर्षण
    मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से संवाद कर बढ़ाया उत्साह
    177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगे, पर्यटन ग्राम पंचवटी में दिखी ग्रामीण होम-स्टे की सुंदरता

    भोपाल

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और केंद्रीय सचिव पर्यटन मंत्रालय भुवनेश कुमार ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर मे ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ (सप्तम संस्करण) के दूसरे दिन एग्जिबिशन का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का निरंतर विकास हो रहा है और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सके। मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में लगाई गई यह प्रदर्शनी टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों व होम-स्टे संचालकों जैसे स्टेकहोल्डर्स को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एग्जिबिशन का अवलोकन कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल पहल की भी जानकारी प्राप्त की। 

    मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से किया संवाद

    मुख्य सचिव बर्णवाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए देश-विदेश से आए ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हितधारकों से उनके व्यावसायिक पैकेजेस, आगामी योजनाओं और मध्यप्रदेश में पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रदेश के पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वन्यजीव विविधता और अनूठे ग्रामीण पर्यटन अनुभवों को वैश्विक पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। 

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM 2026) में इस बार 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगाए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को और गति देना है। 

    मध्यप्रदेश के पवेलियन में दिखी पर्यटन की खास झलक

    मध्य प्रदेश के पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में लगाई गई बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों और आगंतुकों को यहाँ के खूबसूरत ऐतिहासिक किलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत अनुभव कराया जा रहा हैं। इसके साथ ही, अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन्टरैक्टिव कियोस्क (Interactive Kiosks) के जरिए आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी खुद देख और समझ पा रहे हैं, जिससे यह पूरा अनुभव बेहद आधुनिक और सुगम बन गया है।

    पर्यटन ग्राम पंचवटी का किया अवलोकन

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटकों को अनूठे और वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराया जा रहा है। इस प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव को जीवंत रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट परिसर में एक विशेष प्रतिकृति पर्यटन ग्राम पंचवटी 

    तैयार की गई है। इस जीवंत प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए होम-स्टे का अनुभव, स्टारगेजिंग, बैलगाड़ी की सवारी, साइकलिंग, जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियाँ, तीर-कमान चलाने की कला, तथा विभिन्न हस्तकलाओं की प्रदर्शनी जैसी आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अनूठे स्थल पर नेशनल पार्क की झलक, प्राकृतिक झरने, गोंड पेंटिंग, तथा जनजातीय ग्रामीणों द्वारा अपनी जीवनशैली और कहानियों का सजीव चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। 

    मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर मध्य प्रदेश की अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा (हैंडलूम) की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है—इनमें बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, भैरवा क्राफ्ट और बाटिक प्रिंट प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये स्टॉल न केवल राज्य की लोक कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक शानदार जरिया भी हैं।

    इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी., मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, फिक्की मध्यप्रदेश के चेयरमैन महेंद्र प्रताप सिंह सहित संबंधित अधिकारी सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

  • SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

    SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

     नई दिल्ली

    चुनाव आयोग के मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच देश के 272 नागरिकों और उच्च न्यायपालिका के 42 पूर्व जजों ने एक ओपन लेटर जारी किया है. इस पत्र में चुनाव आयोग का खुलकर समर्थन किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार बेबुनियाद सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए. पूर्व जजों ने विपक्ष के विरोध को'माहौल बनाने की सियासत' करार दिया है। 

    दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखते हुए कहा. 'ये सारा शोर मतदाताओं का नहीं, बल्कि वो राजनीतिक दल मचा रहे हैं जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं। 

    जस्टिस भुइयां के बयान पर रिटायर्ड जजों की आपत्ति
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी. उन्होंने इसे नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली एक मनमानी प्रक्रिया करार दिया था. जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और दूसरे रिटायर्ड जजों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 

    उनका कहना था कि जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी मौजूदा जज को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। 

    इन पूर्व जजों का तर्क है कि कानून के दायरे में रहकर योग्य और अयोग्य मतदाताओं की छंटनी करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है. इस प्रशासनिक प्रक्रिया को 'नागरिकों को दोयम दर्जे का बनाना' कहना किसी भी तरह से संतुलित नजरिया नहीं है। 

    एक तरफ पूर्व जजों का एक बड़ा समूह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसके कानूनी अधिकारों का बचाव कर रहा है. दूसरी तरफ वकीलों के संगठनों (LAFC) ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन कर दिया है। 

    बिना ठोस सबूत के EC पर आरोपों को बताया गलत
    इस बीच, पूर्व जजों के खुले पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. पत्र में बिना किसी ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने पर सवाल उठाए गए हैं। 

    पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार 'तस्कर' या 'समझौतावादी' कहकर बदनाम करने से लोकतंत्र में आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है. 'संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका हनन करना या उन्हें नीचा दिखाना सही नहीं है। 

    SIR का बचाव करते हुए पूर्व जजों ने कहा कि ये पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है. 'भरोसा ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है' और चुनावों को अमान्य ठहराने की ऐसी कोशिशें देश में अशांति और अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं। पत्र के आखिर में राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वो अपनी शिकायतों को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर रखें, न कि सड़कों पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाएं। 

  • साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    नई दिल्ली

    कनाडा की कवि और लेखिका ऐनी कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वीडिश अकादमी ने गुरुवार को यह घोषणा की। पुरस्कार उनके साहसिक और नए अंदाज के लेखन के लिए दिया गया है। उनके काम में पुरानी क्लासिकल परंपरा से हल्की-फुल्की बातचीत के जरिए आज के साहित्य के लिए नए रूप बनाए गए हैं। बता दें कि यह पुरस्कार स्वीडिश अकादमी देती है। इसकी राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है, जो करीब 1.2 मिलियन डॉलर है।

    अकादमी की स्थायी सचिव इंग्रिड कार्लबर्ग ने बताया कि कार्सन इस खबर से बहुत हैरान थीं। बातचीत के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस समय आइसलैंड में हैं और हवा की दिशा सुन रही हैं। कार्सन का लेखन कविता, गद्य, संवाद और अनुवाद का ऐसा मिश्रण है, जो किसी एक शैली में नहीं बंधता। उनका जन्म टोरंटो में हुआ था। 2022 से उनके पास आइसलैंड की नागरिकता भी है।

    वे प्राचीन ग्रीक साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं। इन अनुवादों का उनके अपने लेखन पर गहरा असर पड़ा है। उनके काम में ओपेरा के गीत, साहित्यिक आलोचना और 1998 की कविता-उपन्यास 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड' शामिल हैं। अकादमी ने कहा कि उनकी लगभग सारी रचनाएं शब्दों के प्रति भाषाविद के जुनून और कवि की नए अर्थ खोजने की चाह के बीच के रिश्ते पर टिकी हैं। वे खुद शब्दों की उत्पत्ति को अपने काम की शुरुआत मानती हैं। प्राचीन ग्रीक से उनके अनुवाद अपने आप में स्वतंत्र रचनाएं माने जा सकते हैं।

    उनकी शैली का उदाहरण 2019 की 'नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय' है। यह एक मंचन रचना है, जिसमें यूरिपिडीज के नाटक 'हेलेन' की हेलेन ऑफ ट्रॉय और मर्लिन मुनरो की कहानियों को एक साथ जोड़ा गया है। 76 साल की कार्सन इस साल पुरस्कार पाने की पसंदीदा दावेदारों में थीं। सट्टेबाजी कंपनी लैडब्रोक्स के मुताबिक उनका नाम आगे चल रहा था। इस पुरस्कार को पाने वालों में अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन, एलिस मुनरो और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे नाम भी शामिल था।

    कौन हैं एन कार्सन

    एन कार्सन कनाडा की एक प्रसिद्ध निबंधकार, अनुवादक, क्लासिकल साहित्य की विद्वान और कवयित्री हैं। उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य और दर्शन को आधुनिक कविता और लेखन से जोड़ा। उनका लेखन पारंपरिक कविता से काफी अलग माना जाता है। एन कार्सन को प्राचीन यूनानी भाषा और साहित्य में रुचि बचपन से ही थी।

    ऐन कार्सन का जन्म 21 जून 1950 को कनाडा के टोरंटो शहर में हुआ था। उनके पिता बैंक में काम करते थे। हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके एक लैटिन भाषा के शिक्षक ने उन्हें प्राचीन यूनान की दुनिया और वहां की भाषा से परिचित कराया। इसके बाद यूनानी भाषा और साहित्य में उनकी रुचि बढ़ती गई।

  • बाजार में मचा हाहाकार! सेंसेक्स 72 हजार के नीचे, निफ्टी ने 22,200 का सपोर्ट तोड़ा

    बाजार में मचा हाहाकार! सेंसेक्स 72 हजार के नीचे, निफ्टी ने 22,200 का सपोर्ट तोड़ा

    मुंबई 

    घरेलू शेयर बाजार में आज भारी गिरावट रही। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दिख रही है। RBI की सख्त पॉलिसी, FII की लगातार बिकवाली और दूसरी वजहों से इन्वेस्टर्स डर गए। कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 2% गिरकर अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले लेवल पर आ गया। इंडेक्स 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,179 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिरकर 71,400 के लेवल से नीचे फिसला। इस गिरावट ने BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का टोटल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 460 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    रियल्टी, एनर्जी और इंफ्रा में सबसे ज्यादा नुकसान
    लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर है निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, जिसमें 2.98% की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी (-2.87%), निफ्टी इंफ्रा (-2.66%), निफ्टी पीएसई (-2.47%), निफ्टी फार्मा (-2.38%) और निफ्टी एफएमसीजी (-2.01%) 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। वहीं, भारी बिकवाली के बीच केवल निफ्टी आईटी (+0.04%) मामूली बढ़त बनाकर हरे निशान में टिकने में सफल रहा।

    कौन से शेयर चमके और किसमें हुई भारी बिकवाली?
    बाजार में मंदी के बावजूद केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखी गई। फोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, सबसे बड़ा नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज (-5.36%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-4.46%), आईटीसी (-4.03%), मैक्स हेल्थकेयर (-3.81%), इंडिगो (-3.55%) और श्रीराम फाइनेंस (-3.24%) में दर्ज किया गया।

    गिरावट की क्या बड़ी वजह?
    भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। RBI ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। 30 साल की यील्ड 5.71% और 10 साल की 5.3% से ऊपर पहुंच गई। ऐसे में बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है।

    सेंसेक्स 1045.46 अंक यानी 1.44% गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। आईटीसी में सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी गिरावट रही। एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 371.25 अंक यानी 1.64% फिसलकर 22,231.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले कारोबार के दौरान ITC, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% तक गिरकर सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। आज की गिरावट के मुख्य कारण:

    1) RBI की सख्त पॉलिसी
    RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स ने कहा कि मुश्किल ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड के बीच सेंट्रल बैंक का अपना रुख 'न्यूट्रल' से 'सख्त' में बदलने का फैसला ज्यादा जरूरी था। जेफरीज को उम्मीद है कि RBI मौजूदा साइकिल में ब्याज दरों में करीब 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। नोमुरा के मुताबिक रुख में बदलाव एक सरप्राइज़ था।

    2) बॉन्ड यील्ड 24 साल के हाई पर
    ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई पर पहुंच गई। अमेरिका में 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के नोट्स की यील्ड 5.3% से ऊपर है जबकि दो-साल के नोट्स की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आमतौर पर डेट मार्केट को इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इससे उभरते इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है।

    3) कच्चे तेल की कीमत
    ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आज 2% तेजी के साथ $102 प्रति बैरल को पार कर गईं। इसकी वजह यह है कि गल्फ और होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट पर बढ़ते हमलों के बीच इन्वेस्टर्स मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंतित हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बुधवार को कहा कि कतर के उत्तर में एक टैंकर कई प्रोजेक्टाइल से टकरा गया, जिससे कई लोग मारे गए। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछले हफ्ते क्रूड का स्टॉक 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया।

    4) FII की भारी बिकवाली
    NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। FIIs ने बुधवार तक लगातार नौवें सेशन में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक FIIs 25 में से 20 सेशन में भारतीय इक्विटीज़ के नेट सेलर बने हुए हैं।

    5) फेड रेट बढ़ने की चिंता
    मिनट्स के मुताबिक पिछले महीने फेड के पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे के कारण को लेकर बंटे हुए थे। कुछ पार्टिसिपेंट्स एनर्जी और दूसरे प्राइस शॉक के असर को दूर रखने के लिए बढ़ोतरी को जरूरी मान रहे थे। वहीं कुछ इसे उभरती डिमांड से चलने वाली महंगाई से बचने के लिए जरूरी मान रहे थे। CME के ​​फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में बढ़ोतरी की 80% संभावना मान रहे हैं।

    6) कमजोर ग्लोबल संकेत
    ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत
    मिल रहे हैं। साउथ कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग 1% से ज्यादा गिरे। वॉल स्ट्रीट और यूरोपियन मार्केट भी पिछले सत्र में लाल निशान पर बंद हुए जबकि डाउ जोन्स फ्यूचर्स आज अमेरिकी स्टॉक मार्केट में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं।

    7) टेक्निकल लेवल टूटे
    शेयर मार्केट में गिरावट बीच के कारोबारी घंटों में और तेज हो गई क्योंकि निफ्टी जरूरी सपोर्ट लेवल को तोड़ गया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट में डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर ने चेतावनी दी थी कि जब तक निफ्टी 22,800 से नीचे है, मार्केट का माहौल बहुत कमजोर बना हुआ है। इसके 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,180 के पास पहुंचने की संभावना है।

  • पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर फोकस, केंद्रीय सचिव कुमार बोले- पर्यटकों को बनाना होगा संवेदनशील

    पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर फोकस, केंद्रीय सचिव कुमार बोले- पर्यटकों को बनाना होगा संवेदनशील

    पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक- केंद्रीय सचिव कुमार

    मध्यप्रदेश का लक्ष्य सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी.

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन पर हुआ पैनल डिस्कशन
    वन्यजीव पर्यटन के संरक्षण के साथ समुदायों की समृद्धि पर जोर

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 'भारत के वन्य क्षेत्रों का जीवंत परिदृश्य : मध्यप्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन' विषय पर पैनल चर्चा हुई। सत्र में केंद्रीय सचिव पर्यटन भुवनेश कुमार ने अपने विचार रखें। पैनल में सीईओ मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड एल. कृष्णमूर्ति, सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी., महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू, निदेशक, एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर, संस्थापक एवं सीईओ, ग्राम स्टे पारीक्षित सिंह और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर शिवांग मेहता शामिल रहे। सत्र का संचालन वैक्सपोल होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की संस्थापक एवं निदेशक तथा एटोआई वुमन्स कलेक्टिव की चेयरपर्सन सुआकांक्षा गर्ग ने किया।

    वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव जरूरी- केंद्रीय सचिव कुमार

    केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। "स्थानीय समुदाय के साथ चलें और उनसे जुड़ें" की भावना के साथ ही सतत पर्यटन का उद्देश्य पूरा हो सकता है। मध्यप्रदेश में वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है, और कूनो में हुआ चीता संरक्षण इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। वन्यजीव पर्यटन को केवल वन्यजीव देखने तक सीमित न रखकर विविध प्राकृतिक अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता है। चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर क्षेत्र की जैव विविधता, गिद्ध संरक्षण तथा गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनूठे अनुभव मध्यप्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम दे सकते हैं।

    केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि पर्यटन से स्थानीय समुदाय और प्रकृति को कितना लाभ मिल रहा है। पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यटन और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। साथ ही स्थानीय समुदायों को पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद और आतिथ्य के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंच सके।

    पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी है महत्वपूर्ण- एल. कृष्णमूर्ति

    मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के सीईओ एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन तकनीक और बेहतर संवाद के साथ आगे बढ़ेगा। वन्यजीव पर्यटन केवल भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटक विशिष्ट और यादगार अनुभव के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश में कान्हा के साथ रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य जैसे क्षेत्रों को भी वन्यजीव पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    मध्यप्रदेश का लक्ष्य 'सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल' विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी.

    सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया है। हाल ही में भारत में जन्मी चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो देश में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीतों को मध्यप्रदेश के पर्यावरण में ढलने में समय लगा, लेकिन अब संरक्षण के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। इन संरक्षण प्रयासों को पर्यटन के नए और जिम्मेदार अनुभवों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रातापानी को नए बाघ अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाना प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चंबल में गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की चांदनी में नौका विहार जैसे विशिष्ट अनुभव पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों के करीब लाने के साथ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का लक्ष्य ऐसा सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता हो और स्थानीय समुदायों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर मिलें।

    वन्यजीव पर्यटन में विविध अनुभव और प्रशिक्षित गाइड जरूरी

    निदेशक एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर  ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन अब केवल बाघ देखने तक सीमित नहीं रहा। जंगल, प्रकृति, पक्षी, अन्य वन्यजीव और स्थानीय जीवन के अनुभवों को भी पर्यटन का हिस्सा बनाना होगा। इसके लिए प्रशिक्षित कहानीकारों की आवश्यकता है, ताकि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे समझें और महसूस भी करें।

    महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू ने कहा कि छोटे-छोटे अनुभव ही किसी गंतव्य को खास बनाते हैं। सफारी और वाहन के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ गाइडों के ज्ञान और प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी की बेहतर जानकारी देकर उनका अनुभव अधिक ज्ञानवर्धक और यादगार बना सकते हैं।

    पैनल चर्चा में संरक्षण आधारित और समुदाय-केंद्रित वन्यजीव पर्यटन पर जोर दिया गया। साथ ही कहा गया कि कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्यटन का विकास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देकर किया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षित गाइड, होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।