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  • दवा निर्माण से अनुसंधान तक संपूर्ण मूल्य शृंखला विकसित करने पर जोर

    दवा निर्माण से अनुसंधान तक संपूर्ण मूल्य शृंखला विकसित करने पर जोर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में दवा निर्माण, सक्रिय औषधीय घटक (एपीआई), अनुसंधान, परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, विकसित औद्योगिक क्लस्टर, कुशल मानव संसाधन और निवेश प्रोत्साहन इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में फार्मा सेक्टर की राउंड टेबल चर्चा में प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया। चर्चा में प्रदेश में फार्मा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और नई तकनीक पर आधारित निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    भारत की फार्मा विकास यात्रा में मध्यप्रदेश की मजबूत भागीदारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में पहचाना जाता है। भारतीय दवाएं 200 से अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का फार्मा निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्यप्रदेश एक मजबूत, भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ भागीदार है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में निर्मित फार्मा उत्पाद 160 से अधिक देशों तक पहुंचते हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 11,889 करोड़ रुपए के फार्मा उत्पादों का निर्यात दर्ज किया गया। प्रदेश का मौजूदा विनिर्माण आधार और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव नई निवेश परियोजनाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराता है।

    प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां, विकसित क्लस्टर और कुशल मानव संसाधन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से अधिक एपीआई एवं बल्क ड्रग विनिर्माता हैं। इंदौर, पीथमपुर-धार, भोपाल-रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, भिंड और मुरैना में फार्मा उद्योग का आधार विकसित हुआ है। इंदौर क्लस्टर में 96 से अधिक, पीथमपुर-धार में 57 से अधिक और भोपाल-रायसेन में 36 से अधिक फार्मा इकाइयां दर्ज हैं।

    प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज, 200 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 140 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों को भूमि के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, परिवहन संपर्क और बाजार तक पहुंच की सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। यह औद्योगिक परिवेश विनिर्माण के साथ अनुसंधान और तकनीक आधारित गतिविधियों के विस्तार में सहायक है।

    निवेश प्रस्तावों से उत्पादन तक आगे बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 19,477 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश और लगभग 18,646 रोजगार सृजन के अवसरों की संभावना है। इनमें से 34 इकाइयों के लगभग 12,306 करोड़  रुपए के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं से लगभग 10,298 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसी अवधि में 14 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ किया है। इंदौर , देवास, उज्जैन, भोपाल, धार, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में नई फार्मा एवं लाइफ साइंस इकाइयों की गतिविधियों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिल रही है।

    निवेश, अनुसंधान और गुणवत्ता के लिए नीतिगत प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग संवर्धन नीति-2025 में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता (बीआईपीए) का प्रावधान है। एपीआई, बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान भी किया गया है।

    कंपनी के अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों के व्यय पर 50 प्रतिशत सहायता तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अलग-अलग 1 करोड़ रुपए तक सहायता उपलब्ध है। स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए स्थायी पूंजी निवेश की 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 25 करोड़  रुपए तक देने का प्रावधान है।

    निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए माल परिवहन लागत की 50 प्रतिशत सहायता 5 वर्षों तक, अधिकतम 2 करोड़ रुपए की सीमा तक उपलब्ध है। इन प्रावधानों से फार्मा उद्योग में निवेश, अनुसंधान, गुणवत्ता और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।

    पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण और आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन पर 5 करोड़ रुपए तक और शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन व्यवस्था पर 10 करोड़ रुपए तक सहायता का प्रावधान है। निजी भूमि पर अधोसंरचना विकास के लिए 5 करोड़ रुपए तक तथा तकनीक हस्तांतरण के लिए एक करोड़ रूपये तक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मा उद्योग के विस्तार के साथ अनुसंधान, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इन सुविधाओं से उद्योगों को आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने और अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    विक्रम उद्योगपुरी का मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ रहे निवेश के अवसर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है और 17 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 2,374.86 करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 9,625 रोजगार अवसरों की संभावना है। मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। फार्मा और चिकित्सा उपकरण उद्योग का विकास उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।

    रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, नई पीढ़ी के फार्मा निवेश पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल क्षेत्र के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एपीआई और तैयार दवाओं के साथ टीके, इंजेक्टेबल दवाएं, जैव प्रौद्योगिकी, कोशिका एवं जीन आधारित उपचार, चिकित्सा उपकरण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण की संपूर्ण मूल्य शृंखला मध्यप्रदेश में विकसित करना चाहती है। इससे प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन की संभावनाओं का विस्तार होगा।

    प्रमुख फार्मा निवेशकों की भागीदारी, दवा निर्माण और अनुसंधान में व्यापक विशेषज्ञता

    राउंड टेबल मीटिंग में फार्मा उद्योग प्रतिनिधियों में दवा निर्माण, एपीआई, ब्रांडेड एवं जेनेरिक दवाओं, विशेष औषधियों और अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। उपस्थित फार्मा सेक्टर के निवेशकों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कहा कि हम में से कई लोग और हमारे समुदाय के लोग एमपी में इस सेक्टर में निवेश करने के इच्छुक हैं और प्रदेश की नीतियों संसाधनों और अन्य सुविधाओं के कारण मध्यप्रदेश में निवेश के लिए जल्द से जल्द आयेंगे। इस अवसर पर उपस्थित डॉ. टोनी परमार फार्मा एसोसिएशन सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि यहां उपस्थित लोगों में कई सीनियर प्रतिनिधि उपस्थित हैं। बहुत सारे लोग मध्यप्रदेश में निवेश करना चाहते हैं, हम बहुत जल्द ही मध्यप्रदेश आएंगे और इस सेक्टर में एमपी के साथ  देश के संकल्प को पूरा करने में सहयोगी बनेंगे।

    एनक्यूब एथिकल्स के प्रबंध निदेशक  मेहुल शाह की कंपनी क्रीम, ऑइंटमेंट, जेल और लोशन जैसी त्वचा पर उपयोग की जाने वाली औषधियों के विकास एवं विनिर्माण में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पाद विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण करती है। आईपीसीए के प्रबंध निदेशक  अजीत कुमार जैन की कंपनी एपीआई और तैयार दवाओं के निर्माण में सक्रिय है। इसका उत्पाद पोर्टफोलियो दर्द प्रबंधन, हृदय रोग, मलेरिया और संक्रमणरोधी उपचार सहित अनेक चिकित्सीय क्षेत्रों में विस्तृत है।

    अजंता फार्मा के अध्यक्ष  सतीश अग्रवाल की कंपनी ब्रांडेड जेनेरिक और जेनेरिक दवाओं का विकास, विनिर्माण एवं विपणन करती है। नेत्र रोग, त्वचा रोग, हृदय रोग और दर्द प्रबंधन इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। ल्यूपिन के निदेशक  के. आर. गुप्ता की कंपनी की विशेषज्ञता जेनेरिक एवं ब्रांडेड दवाओं के साथ जटिल जेनेरिक उत्पादों, बायोसिमिलर और एपीआई तक फैली है। दोनों कंपनियां भारतीय बाजार के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी सक्रिय हैं।

    मैक्लियोड्स फार्मास्युटिकल्स संक्रमणरोधी दवाओं, टीबी, एचआईवी, हृदय रोग और मधुमेह सहित विभिन्न उपचार क्षेत्रों में कार्य करती है। अमोली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रूपेश कामदार की कंपनी एपीआई और दवा निर्माण में उपयोग होने वाले मध्यवर्ती रसायनों के उत्पादन से जुड़ी है। गुफिक बायोसाइंसेज की विशेषज्ञता इंजेक्टेबल और विशेष प्रक्रिया से सुखाकर तैयार की जाने वाली लाइयोफिलाइज्ड दवाओं सहित विशेष औषधीय उत्पादों में है।

    एस. कांत हेल्थकेयर स्वास्थ्य उत्पादों और फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन के विनिर्माण एवं विपणन से जुड़ा समूह है। ब्लू क्रॉस लेबोरेटरीज विभिन्न चिकित्सीय क्षेत्रों में ब्रांडेड दवाओं के विकास, निर्माण और विपणन में कार्य करती है। डाइमैक इंडस्ट्रीज़ और एमिल फार्मा के प्रतिनिधियों को भी इस संवाद के लिए आमंत्रित किया गया।

    सिप्ला, ग्लेनमार्क और एल्केम के वरिष्ठ प्रबंधन का प्रतिनिधित्व भी प्रस्तावित है। सिप्ला श्वसन रोग, दीर्घकालिक उपचार और संक्रमणरोधी दवाओं के व्यापक पोर्टफोलियो के लिए जानी जाती है। ग्लेनमार्क अनुसंधान आधारित कंपनी है, जिसके प्रमुख क्षेत्र श्वसन रोग, त्वचा रोग और कैंसर उपचार हैं। एल्केम संक्रमणरोधी दवाओं, पाचन तंत्र संबंधी उपचार, दर्द प्रबंधन, विटामिन और दीर्घकालिक उपचार क्षेत्रों में सक्रिय है।

    इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) के महासचिव  टोनी परमार को भी राउंड टेबल के लिए आमंत्रित किया गया। आईडीएमए भारतीय दवा निर्माताओं का उद्योग संघ है, जो नीति, गुणवत्ता, विनिर्माण, मूल्य निर्धारण और उद्योग विकास से जुड़े विषयों पर सरकार एवं नियामक संस्थाओं के साथ संवाद करता है। 

  • रबी सीजन से पहले बिजली सप्लाई को लेकर बड़ी तैयारी, MP Transco ने बढ़ाई कंपनसेशन क्षमता

    रबी सीजन से पहले बिजली सप्लाई को लेकर बड़ी तैयारी, MP Transco ने बढ़ाई कंपनसेशन क्षमता

    रबी सीजन के पहले एमपी ट्रांसको ने बढ़ाई रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता : ऊर्जा मंत्री तोमर

    ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंको की संख्या पहुंची 750: वोल्टेज प्रोफाइल में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    भोपाल

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने रबी सीजन के ठीक पहले अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिएक्टिव पावर कंपन सेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों मे 750 कैपेसिटर बैंको के संचालन से वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर हुआ है तथा कृषि उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति मिल रही है।

    मंत्री तोमर ने बताया कि एमपी ट्रांसको द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 और  वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अभी तक 29 नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया  है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर हो गई है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।

    विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में सुधार

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि राज्य शासन की मंशानुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एमपी ट्रांसको  जरुरत के हिसाब से अपने  ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक स्थापित कर चुकी है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता के अनुसार नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं तथा मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे पूरे प्रदेश में विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता

    वर्तमान में एमपी ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशनों पर 132  केवी सिस्टम के लिए 33 कैपेसिटर बैंक तथा 132 केवी सबस्टेशनों पर 33 केवी  सिस्टम पर    717 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर 750 कैपेसिटर बैंकों के माध्यम से 9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता उपलब्ध है, जिसमें 132 केवी की 1073 एम वी ए आर तथा 33 केवी की 8310.5 एमवीएआर शामिल है,जो प्रदेश की विद्युत प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

    52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता बढ़ाई गई

    एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग एम वाय मंसूरी ने  जानकारी दी कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की थी, जिनकी उपयोगी आयु पूर्ण हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट प्रदान नहीं कर पा रहे थे। इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन का अभियान चलाया गया इससे सबस्टेशनों की रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अभी तक 309 एमवीएआर की बढोत्तरी हुई और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

    कैपेसिटर बैंक से होता है यह लाभ

    मंसूरी ने जानकारी दी कि ट्रांसमिशन प्रणाली में सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें तथा अन्य विद्युत उपकरण प्रायः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आती है। कैपेसिटर बैंक इस इंडक्टिव प्रभाव की भरपाई कर रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं। इससे एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन में वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार होता है, पावर फैक्टर बेहतर होता है, ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बढ़ती है तथा उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है।

     

  • भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल 

    दुर्गा उत्सव और दशहरे के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सामान्य अवकाश पर रोक लगा दी है। डीजीपी के निर्देश पर विशेष शाखा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    आदेश के मुताबिक 11 से 25 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का सामान्य अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। यह आदेश सभी स्पेशल डीजी, एडीजी, जोनल आईजी, भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षकों, सेनानियों और रेल पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है।

    आपात स्थिति में सीमित अवधि की छुट्टी
    पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार किसी आपात स्थिति में संबंधित एसपी या आईजी सीमित अवधि के लिए अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अवकाश के लिए डीजीपी की अनुमति अनिवार्य होगी।

    नवरात्र से दशहरे तक बढ़ेगी सुरक्षा
    नवरात्र के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में देवी पंडाल, गरबा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। इसके अलावा दशहरे पर रावण दहन, चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस थानों में पर्याप्त बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और लगातार निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

    सोशल मीडिया और साइबर गतिविधियों पर भी नजर
    त्योहारों के दौरान अफवाह, भड़काऊ सामग्री और असामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल, साइबर विंग और स्थानीय खुफिया इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    ड्यूटी के बाद मिलेगा क्षतिपूर्ति अवकाश
    त्योहारों के दौरान लगातार ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों
    को बाद में रोटेशन के आधार पर क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाएगा। ड्यूटी पॉइंट पर जवानों के लिए भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार  त्योहारों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

  • आकाश अंबानी का बड़ा ऐलान, Jio बना रहा स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक; 6G के लिए तैयारी शुरू

    आकाश अंबानी का बड़ा ऐलान, Jio बना रहा स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक; 6G के लिए तैयारी शुरू

    मुंबई 

    रिलायंस जियो अब सिर्फ 5G नेटवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहता. कंपनी अगली पीढ़ी की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी यानी 6G की तैयारी में अभी से जुट गई है. रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि कंपनी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने पर काम कर रही है और प्री-6G टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पेटेंट भी फाइल कर चुकी है। 

    आकाश अंबानी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में जियो की भविष्य की टेक्नोलॉजी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित वॉयस और डेटा सर्विस, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 6G जैसी नई तकनीकों पर है। 

    भारत की अपनी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा Jio
    आकाश अंबानी ने कहा कि जियो सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ऐसी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी विकसित करने पर काम कर रही है, जिसे भारत से बाहर भी इस्तेमाल किया जा सके। 

    इसका मतलब साफ है कि जियो आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस तक अपनी तकनीक को सीमित नहीं रखना चाहता. कंपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र में भी अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने की तैयारी कर रही है। 

    6G में भारत को आगे ले जाने की तैयारी
    आकाश अंबानी ने कहा कि भारत ने 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखा है और जियो इस दिशा में रिसर्च, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के जरिए योगदान देगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 6G के मामले में भारत को दुनिया का नेतृत्व करने की बात कही है और भारत से आने वाले 6G पेटेंट में 10 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है. अंबानी के मुताबिक, जियो इस लक्ष्य में बड़ा योगदान देने की तैयारी कर रहा है। 

    6G लॉन्च होने से पहले ही पेटेंट पर काम
    जियो ने 6G के व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल में आने से पहले ही इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है. आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी ने प्री-6G के दौर में ही पेटेंट के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है. यानी जियो का फोकस सिर्फ मौजूदा नेटवर्क को बेहतर बनाने पर नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर भी है। 

    AI से बदल सकती है मोबाइल की वॉयस और डेटा सर्विस
    आकाश अंबानी ने कहा कि जियो पारंपरिक टेलीकॉम सेवाओं को एआई की मदद से और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है. कंपनी वॉयस और डेटा सेवाओं में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है। 

    उनके मुताबिक, एआई की मदद से वॉयस और डेटा सर्विस में नए तरह के इनोवेशन किए जा सकते हैं, जिसका फायदा भारत के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को मिल सकता है। 

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखा Jio का अगला विजन
    7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली में चल रहे 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जियो अपनी डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े विजन को प्रदर्शित कर रहा है. इस आयोजन में 5G, 6G, एआई आधारित नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है। 

    आकाश अंबानी के मुताबिक, जियो यहां अपने पूरे डिजिटल सोसाइटी विजन को सामने रखने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का जोर आने वाले वर्षों में कनेक्टिविटी, एआई और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई डिजिटल सेवाएं तैयार करने पर है.

  • नमो भारत में सफर के साथ मिलेगा संस्कृति का अनुभव, स्टेशनों पर दिखेगी भारतीय कला और विरासत

    नमो भारत में सफर के साथ मिलेगा संस्कृति का अनुभव, स्टेशनों पर दिखेगी भारतीय कला और विरासत

     नई दिल्ली
     नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही यात्रा के दौरान भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का अनूठा अनुभव मिलेगा।नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने नमो भारत स्टेशनों के माध्यम से लोगों को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

    इस पहल के तहत नमो भारत स्टेशन प्रदर्शनियों, साहित्यिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने का प्रयास
    दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दो शहरों को आपस में जोड़ता है। एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली देश की राजनीतिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रमुख केंद्र रही है।

    वहीं, मेरठ मेंमहाभारतकालीन धरोहर के साथ-साथ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की जननी रहा है। इस समृद्ध पृष्ठभूमि में एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए के बीच हुआ यह समझौता यात्रियों को उनकी रोजमर्रा की यात्रा के दौरान देश की विविधता और सांस्कृतिक पहलुओं से रूबरू कराएगा।

    स्टेशन परिसरों में आयोजित होंगी कला प्रदर्शनियां और वर्कशॉप
    इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान नमो भारत स्टेशन परिसरों में सार्वजनिक जुड़ाव से जुड़ी कई गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। इसमें विशेष कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, विरासत से जुड़ी झलकियां, साहित्यिक कार्यक्रम, व्याख्यान, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक परंपराओं को दैनिक आवाजाही के सार्वजनिक स्थानों तक लाकर आम जनमानस से सीधे जोड़ना है।

    रोजाना 1.1 लाख से अधिक यात्री कर रहे हैं सफर
    वर्तमान में नमो भारत कॉरिडोर पर दैनिक रूप से लगभग 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं, जबकि यह सेवा अब तक 4.5 करोड़ से अधिक 'कम्यूटर ट्रिप्स' का आंकड़ा पार कर चुकी है। यात्रियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि नमो भारत स्टेशन अब केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक और सामाजिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

    कलाकारों और छात्रों को मिलेगा नया मंच
    यह पहल छात्रों, युवा कलाकारों, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों के लिए भी बड़े अवसर प्रदान करेगी। एनसीआरटीसी स्टेशनों को एक जीवंत 'सोशल हब' के रूप में विकसित कर रहा है।

    वहीं, आईजीएनसीए अपनी विशेषज्ञता के जरिए देश की कला और परंपराओं को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाएगा। इस प्रयास से नमो भारत के स्टेशन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों के संवर्धन का एक प्रमुख जरिया बनेंगे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुम्बई में इंटरेक्टिव सेशन को किया संबोधित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुम्बई में इंटरेक्टिव सेशन को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ऐसा एकमात्र राज्य है, जहां उद्योगों की स्थापना के लिए अनेक तरह की अनुकूलताएं मौजूद हैं। जनवरी 2026 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के 30 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतारे जा चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश उद्योग, व्यापार और व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सर्वाधिक अनुकूल राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुम्बई में 'इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फार्मा और मेडिकल डिवाइस सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश आने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी उद्योगपतियों को जनवरी-2027 में भोपाल में होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पधारने के लिए भी आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का संबंध एक मां की दो संतानों की तरह है। जहां मुंबई, निवेश और वित्त क्षेत्र की सबसे अच्छी समझ रखने वाला महानगर है, वहीं मध्यप्रदेश निवेश की संभावनाओं वाला राज्य है। एक बार कोई निवेशक मध्यप्रदेश आता है तो उसे भूल नहीं पाता है। मध्यप्रदेश भारत में औद्योगिक निवेश का सबसे तेजी से बढ़ता और सबसे पसंदीदा गंतव्य स्थल बनता जा रहा है। महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक घरानों ने मध्यप्रदेश को अपना निवेश स्थान बनाया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा के साथ स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस सत्र में वेलस्पन ग्रुप, सनफार्मा और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। उद्योग और कार्पोरेट जगत की लगभग सभी हस्तियां उपस्थित हैं, जो बदलते दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की क्षमताओं को जानती हैं। देश के साथ सभी राज्य आगे बढ़ रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बताया कि राज्यों के बीच सौहार्द्र पूर्ण संबंधों के आधार पर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है। मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा पर बना सरदार सरोवर बांध इसी का उदाहरण है। इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों को पर्याप्त जल मिला बल्कि राजस्थान के हितों का भी ध्यान रखा गया। राज्यों के मध्य उन्होंने सौहार्द्रपूर्ण संबंध स्थापित करने का कार्य किया। उन्होंने सकारात्मक दृष्टि के साथ कार्य किया है। वर्तमान समय में दुनिया के सामने भारत की पहचान एक ऐसे देश की बन रही है, जहां वैश्विक स्तर के नेता हैं। बदलते दौर में भारत दुनिया की सशक्त अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा के साथ देश को स्वाभिमान से जीना सिखाया है। आज हमारा पासपोर्ट भी दुनिया में मजबूत हुआ है। वर्ष 2014 के पहले भारत कहां था, सभी जानते हैं। गत 12 वर्ष में कितना बदलाव आ सकता है, वो आज सबके सामने है। देश में जीएसटी से लेकर व्यापार-व्यवसाय की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। जी20 के वैश्विक समूह में भारत अपने टारगेट पूरा करते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।

    वी विल डू इट का नया मंत्र, आत्मविश्वास का नया परिचायक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'वी विल डू इट' का मंत्र दिया है। हम दुनिया में सब कुछ कर सकते हैं। उन्होंने कठिनाइयों से निकलकर एक आदर्श जीवन जीया है। आजादी के बाद पहली बार 2015-25 के बीच एक दशक में कृषि क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। भारत की निर्माण, नवाचार, नेतृत्व और प्रतिभा की शक्ति दुनिया के सामने है। भारत मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, ईवी, बैटरी, सोलर हमारी पहचान बन चुके हैं। खेल क्षेत्र की बात करें तो हमारे खिलाड़ी अब वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीत रहे हैं। हाल ही में एशियन गेम्स में भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा है। एशियाड हो या ओलम्पिक भारत कहीं भी सफलता प्राप्त कर सकता है। भारत के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ डील होगी, लेकिन इसमें भारतीय नागरिकों के आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह भारत के स्वाभिमान के साथ वैश्विक संबंधों के निर्वहन का प्रमाण है।

    मध्यप्रदेश जहां एक नहीं, अनेक अनुकूलताएं हैं, निवेशकों को हर प्रकार की सुविधा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी राज्य में निवेश तभी आ सकता है। जब प्रदेश में स्थाई नेतृत्व हो, नीतियां स्पष्ट हों, पर्याप्त लैंड बैंक हो, उद्योग अनुकूल वातावरण हो, प्रदेश में छोटे-बड़े सभी निवेशकों का पूरा सम्मान है। मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति है। यहां प्रत्येक निवेशक को लाभ मिलता है। राज्य सरकार ने जीआईएस, रोडशो और अनेक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से अपार निवेश पाया है। हम सभी निवेशकों को उनके हक की प्रोत्साहन राशि समय पर दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है। एक लाख एकड़ का लैंड बैंक मौजूद है। खनिज, वन, ऊर्जा सहित सभी तरह के छोटे-बड़े और मध्यम श्रेणी के उद्योगों की स्थापना हमारी प्राथमिकता है।

    फाइलों की बजाए फैसलों पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सरलीकृत 25 नीतियां लागू की गईं, जो उद्योगों की स्थापना में मददगार बन रही हैं। फाइलों की बजाए फैसलों पर जोर दिया गया है। भोपाल से दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, रायपुर, बैंगलोर और अन्य नगरों के लिए सीधी विमान सेवाएं हैं। मध्यप्रदेश एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत वीजीएफ प्रदान करता है। प्रदेश में हेलीकॉप्टर और हवाई सेवाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है। मध्यप्रदेश से खाड़ी देशों के लिए सीधी हवाई सेवा की शुरुआत की गई है। धार जिले में विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क में विभिन्न इकाइयों को 4 रूपए यूनिट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुम्बई में ढाई वर्ष में यह आठवीं यात्रा है, जिसमें उद्योगपति मित्रों से भेंट हो रही है। आज हुई मुलाकातों के फलस्वरूप 90 हजार करोड़ रूपए के निवेश का आश्वासन भी मिला है, यह हमारे प्रयासों की सफलता है।

    निवेशकों की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड पैकेज और औद्योगिक सुविधाएं देगा मध्यप्रदेश

    अपर मुख्य सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए पर्याप्त भूमि, जल, बिजली, प्राकृतिक संसाधन, कुशल श्रमबल और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध है। प्रदेश के भौगोलिक केंद्र में होने से बड़े उपभोक्ता बाजारों तक आसान पहुंच है। राज्य में 8 एयरपोर्ट, 22 प्रमुख रेल जंक्शन, एक लाख एकड़ से अधिक तैयार औद्योगिक भूमि तथा 50 हजार एकड़ से अधिक विकसित की जा रही भूमि उपलब्ध है। निवेशकों की जरूरत के अनुसार राज्य सरकार कस्टमाइज्ड जोन, निवेश पैकेज और सेक्टर आधारित औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए तैयार है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18 से अधिक सेक्टर आधारित नीतियां लागू हैं। फार्मा और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में विशेष संभावनाएं हैं। प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा इकाइयां, 30 से अधिक एपीआई एवं बल्क ड्रग निर्माता तथा 57 से अधिक मेडिकल डिवाइस निर्माता कार्यरत हैं। फार्मा क्षेत्र में इन-हाउस आरएंडडी, परीक्षण सुविधाओं और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। प्रदेश में 2,700 से अधिक निजी अस्पताल और 12,100 से अधिक शासकीय स्वास्थ्य सुविधाएं भी इस क्षेत्र के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध कराती हैं।

    श्री मंडलोई ने बताया कि इन्वेस्ट मध्यप्रदेश पोर्टल 3.0 के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को डिजिटल, सरल और पारदर्शी बनाया गया है। एआई आधारित प्रणाली, जीआईएस लैंड बैंक, सिंगल कम्प्लायंस, फेसलेस इंसेंटिव डिस्बर्सल और इंसेंटिव कैलकुलेटर जैसी सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध हैं। उन्होंने टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल-ईवी, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, टेलीकॉम, पर्यटन, फार्मा और मेडिकल डिवाइस सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया।

    इप्का फार्मा के एमडी अजीत जैन ने मध्यप्रदेश में निवेश के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहाकीकहा कि मध्य प्रदेश निवेश के लिए आदर्श गंतव्य है मुझे 40 साल में यहां कोई समस्या नहीं आई और यदि कोई छोटी-मोटी समस्या आई भी तो उसका त्वरित निराकरण शासन प्रशासन द्वारा प्रोएक्टिव होकर किया गया। उन्होंने कहा कि यहां संसाधनों की प्रचुरता के साथ प्रोएक्टिव गवर्नमेंट है एवं उद्योग विभाग का सकारात्मक रवैया, स्किल्ड मैनपॉवर की उपलब्धता एवं तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण के संस्थाओं की उपलब्धता के साथ यहां उद्योग लगाना एकदम आसान है। यहां तक कि हमारे लेबर के लिए आवासीय व्यवस्था करने में भी सरकार ने हेल्प की है। सन फार्मास्यूटिकल्स के दिलीप सांघवी ने भी संबोधित किया।

    इस अवसर पर उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी के डीएमआईसी फेस-2 में निवेश के लिये 5 इकाईयों को आशय पत्र प्रदान किये गये।

     

  • देश के प्रमुख निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश, नए निवेश और औद्योगिक विस्तार में मिलेगा पूरा सहयोग

    देश के प्रमुख निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश, नए निवेश और औद्योगिक विस्तार में मिलेगा पूरा सहयोग

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई गति देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के शीर्ष नेतत्व के साथ वन-टू-वन बैठकें की। फार्मा, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, औद्योगिक गैस, ट्रांसमिशन, टायर, आईटी और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर हुई इन बैठकों में उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में नई इकाईयाँ स्थापित करने और मौजूदा निवेश के विस्तार में रूचि दिखाई।

    कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक समूहों द्वारा नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, केमिकल तथा अन्य क्षेत्रों में लगभग 90 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तावों से प्रदेश में 14,375 रोजगार सृजित होने की संभावना है।

    निवेश प्रस्तावों में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 71 हजार 289 करोड़, टेक्सटाइल्स में 5 हजार करोड़, फार्मास्यूटिकल्स में 2 हजार 280 करोड़, रियल एस्टेट एक हजार करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी में 200 करोड़, केमिकल उद्योग के क्षेत्र में 400 करोड़ का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, विकसित हो रही अधोसंरचना और कुशल कार्यबल उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को भूमि, बिजली, पानी, सड़क, ऊर्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुगमता से उपलब्ध हों। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने उद्योग जगत को मध्यप्रदेश में नए निवेश और विस्तार के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया कि उन्हें इकाइयाँ लगाने में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम अंतर्गत आरपीजी, वेलस्पन, आईनॉक्स, भिलोसा, इप्का और सन फार्मा के प्रमुखों से वन-टू-वन चर्चा की। बैठकों में विभिन्न क्षेत्रों की निवेश योजनाओं, संभावित स्थलों, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यक प्रोत्साहनों पर विचार-विमर्श हुआ।

    आरपीजी समूह ने ट्रांसमिशन, टायर और आईटी क्षेत्र में दर्शाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका की मुलाकात में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयनका ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा व्यक्त की। प्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति और निवेश-अनुकूल नीतियों के आधार पर नई इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित स्थलों के रूप में चर्चा में आए। समूह ने इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यकताओं का आंकलन करने में रुचि दिखाई। उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग तथा संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर व्यावसायिक संभावनाओं का आंकलन करने पर भी संवाद हुआ।

    समूह की प्रमुख कंपनियों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। आरपीजी समूह का मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव है और केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश की विद्युत पारेषण अधोसंरचना के विकास में योगदान दिया है।

    वेलस्पन समूह टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में निवेश की संभावनाएं तलाशेगा

    वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से चर्चा में पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचनात्मक क्षेत्र की निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश तथा प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। स्थल का निरीक्षण करने के लिए समूह अपनी टीम भेजेगा।

    बैठक में वेलस्पन कॉर्प के एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में 150 करोड़ रूपये के निवेश और सिंटेक्स के 700 करोड़ रूपये के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा हुई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति तथा पाइप निर्माण एवं टेक्सटाइल गतिविधियों पर संवाद हुआ। वेलस्पन समूह प्रदेश में सड़क एवं राजमार्ग निर्माण सहित अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं से भी जुड़ेगा। जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं में समूह की सहभागिता की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    अति उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर – ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र करेगा स्थापित

    आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जैन से औद्योगिक गैस एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार मध्यप्रदेश में 1,260 करोड़ रूपये के निवेश से देश का पहला अति-उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर-ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र स्थापित करने की योजना है। अप्रैल 2029 से उत्पादन प्रारंभ करना प्रस्तावित है। परियोजना से लगभग 350 करोड़ रूपये के आयात प्रतिस्थापन और 320 से अधिक स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

    संवाद में नवीनतम तकनीक से सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाली विशेष गैसों के उत्पादन के लिए लगभग 1,200 करोड़ रूपये के संभावित निवेश पर भी चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 40 एकड़ भूमि की आवश्यकता जताई गई। प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और गेल के आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से गैस की आपूर्ति से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    निवेश प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, ब्याज अनुदान, प्रति यूनिट 2 रूपये की बिजली सब्सिडी, विद्युत शुल्क में छूट, अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और समयबद्ध स्वीकृतियों जैसे विषय चर्चा में रहे। कंपनी वर्ष 2000 से इंदौर और भोपाल में कार्यरत है। जून 2023 में प्रदेश में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के साथ कंपनी नई ऑन-साइट गैस उत्पादन इकाइयों और नर्मदापुरम में सौर ऊर्जा से जुड़ी नाइट्रोजन पाइपलाइन की दिशा में भी कार्य कर रही है।

    भिलोसा ने 7,500 करोड़ रूपये के चरणबद्ध निवेश की प्रस्तुत की योजना

    प्रबंध निदेशक भिलोसा इंडस्ट्रीज संदीप जैन ने पीएम मित्र पार्क, धार को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश में चरणबद्ध रूप से कुल 7,500 करोड़ रूपये के निवेश और करीब 3,750 रोजगार के अवसरों की योजना प्रस्तुत की। कंपनी ने प्रारंभिक रूप से लगभग 2,500 करोड़ रूपये के पूंजीगत निवेश से कार्य शुरू करने तथा समग्र निवेश को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की जानकारी दी।

    पीएम मित्र पार्क में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ भूमि के संबंध में चर्चा हुई। भूमि के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई गई। कंपनी ने वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा है।

    धार–इंदौर क्षेत्र में पॉलिस्टर यार्न, फायबर, निटेड फैब्रिक और मैन-मेड फायबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक के एकीकृत विनिर्माण तथा सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों के विकास की संभावनाओं पर भी संवाद हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समूह को अनुकूल नीतियों, पारदर्शी प्रक्रियाओं और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

    इप्का के देवास और उज्जैन में 1,080 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव

    इप्का लैबोरेटरीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी अजीत कुमार जैन से देवास और विक्रम उद्योगपुरी, उज्जैन में प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। कंपनी का देवास में लगभग 1,000 करोड़ रूपये और विक्रम उद्योगपुरी में लगभग 80 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव है। दोनों परियोजनाओं से लगभग 1,500 रोजगार सृजन की संभावना है, जिनमें देवास से लगभग 1,000 और विक्रम उद्योगपुरी से लगभग 500 रोजगार शामिल हैं।

    बैठक में रतलाम में विकसित हो रहे बायोटेक पार्क से कंपनी के जुड़ने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। क्षेत्र में बड़ा भूमि बैंक उपलब्ध है और पास से ही 8 लेन एक्सप्रेस-वे गुजरता है। प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सहयोग पर भी संवाद हुआ। इप्का की मध्यप्रदेश में रतलाम, पीथमपुर, इंदौर, भोपाल और देवास में 7 विनिर्माण सुविधाएं हैं, जिनसे लगभग 7,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं।

    सन फार्मा की पीथमपुर परियोजना और सौर ऊर्जा प्रकल्प पर हुई विस्तृत चर्चा

    सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप सांघवी से पीथमपुर में लगभग 3,000 करोड़ रूपये की ग्रीनफील्ड परियोजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। परियोजना के अंतर्गत भारत, अमेरिका, यूरोप और अन्य बाजारों के लिए औषधि फॉर्मूलेशन की विनिर्माण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे 1,750 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें लगभग 1,250 प्रत्यक्ष और 500 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

    पीथमपुर के सेक्टर-7 में भूमि संबंधी विषयों, स्थानीय बाधाओं के निराकरण, आवश्यक अनुमतियों और अधोसंरचना पर विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित प्रक्रियाओं को सुगम बनाने तथा दिसंबर 2026 तक जल, बिजली और सड़क जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। प्लॉट हस्तांतरण एवं पुनःपंजीकरण शुल्क में छूट तथा प्रोत्साहन संबंधी आदेश में आवश्यक संशोधन पर भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी के बड़े सौर ऊर्जा प्रकल्प के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान और आवंटन में सहयोग का आश्वासन दिया। सौर ऊर्जा परियोजना के प्रोत्साहनों, अधोसंरचना और अनुमतियों पर भी संवाद हुआ। कार्यकारी अध्यक्ष सांघवी ने रतलाम में प्रस्तावित फार्मा पार्क में रुचि जताते हुए पार्क की स्थापना होने पर निवेश की संभावनाओं पर विचार करने की इच्छा व्यक्त की। सन फार्मा देवास में वर्ष 1984 से कार्य कर रही है और मध्यप्रदेश के फॉर्मूलेशन एवं एपीआई संयंत्रों में लगभग 3,958 कर्मचारी कार्यरत हैं।

     

  • 5 हजार से अधिक युवाओं का अंतिम चयन, मुख्यमंत्री ने लगभग 1,100 चयनित युवाओं को सौंपे ऑफर लेटर

    5 हजार से अधिक युवाओं का अंतिम चयन, मुख्यमंत्री ने लगभग 1,100 चयनित युवाओं को सौंपे ऑफर लेटर

    रायपुर 

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे। 

    इस अवसर पर उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री के करकमलों से लगभग 1,100 चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए।
    7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री  साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

    युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ रही सरकार

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘प्रयास’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक अवसर छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। इसके लिए शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    95 से अधिक नियोक्ता संस्थानों ने युवाओं को दिए रोजगार के अवसर

    राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की। आयोजन स्थल पर लगभग 50 स्टॉल स्थापित किए गए, जहां विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, साक्षात्कार और चयन किया गया।

    मेले में आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, स्नातक सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। रोजगार विभाग के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी शिक्षा विभाग, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण की भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही।

    कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं ने भी बड़ी संख्या में रोजगार मेले में हिस्सा लिया। इस तरह रोजगार मेला केवल नियुक्तियों का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधे संवाद और समन्वय का प्रभावी मंच भी बना।

    ई-रोजगार पोर्टल बनेगा ‘स्किल मार्केट’

    रोजगार मेले में अभ्यर्थियों के पंजीयन, आवेदन, उपस्थिति और चयन संबंधी प्रक्रियाओं को ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया गया। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायता मिली।

    राज्य सरकार द्वारा ई-रोजगार पोर्टल को आगे ‘स्किल मार्केट’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उद्योगों की आवश्यकताओं और उपलब्ध रिक्त पदों के साथ रोजगार के इच्छुक युवाओं की शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे एक ओर युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर खोजने में आसानी होगी, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

    जिन्हें आज अवसर नहीं मिला, उनके लिए आगे भी खुलेंगे रोजगार के द्वार

    मुख्यमंत्री  साय ने रोजगार मेले में शामिल उन युवाओं का भी उत्साहवर्धन किया, जिन्हें इस बार रोजगार का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार आगे भी रोजगार मेलों, कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ समन्वय के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करती रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने रोजगार मेले के सफल आयोजन के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रदेश एवं अन्य राज्यों से आए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों के प्रतिनिधियों को बधाई दी।

    तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को रोजगार और आजीविका के वास्तविक अवसरों से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में प्रदेशभर से युवाओं की व्यापक भागीदारी उनके उत्साह और बेहतर भविष्य की आकांक्षा को दर्शाती है। उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।

    पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधार के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार थर्ड पार्टी मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।

    रिपोर्ट में पॉलिटेक्निक संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और गुणवत्ता सुधार की संभावनाओं का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर संस्थानों के समग्र विकास तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सेवा संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रोजगार मेला भी युवाओं को सीधे अवसरों से जोड़ते हुए सेवा और जनकल्याण की इसी भावना को आगे बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार मेले में आने से पहले वे दुर्ग में आयोजित ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त जारी करने के साथ विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला, युवा, किसान, श्रमिक और गरीब सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  टंकराम वर्मा, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मती वर्णिका शर्मा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, विधायक  सुनील सोनी, विधायक  रोहित साहू सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • ‘इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    ‘इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं दोनों राजकुमार', बीजेपी MLC सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया', कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज

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    ‘राजतंत्र और परिवारतंत्र में विश्वास करते हैं राहुल और अखिलेश’, सुभाष यदुवंश ने साधा निशाना

    सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला, बोले- ‘दोनों राजकुमार एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते’

    'अखिलेश को यूपी की सत्ता मिली तो उन्होंने प्रदेश को सिरफुटौव्वल का अड्डा बना दिया था', बीजेपी MLC का सपा पर हमला

    लखनऊ
    बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सुभाष यदुवंश ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव को नहीं बुलाए जाने का जिक्र करते हुए यदुवंश ने दोनों नेताओं को ‘राजकुमार’ बताया और कहा कि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

    'अखिलेश को बुलाया ही नहीं गया'

    सुभाष यदुवंश ने कहा, 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव जी को बुलाया ही नहीं गया।' उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव लखनऊ आ गए, तब राहुल गांधी के किसी ‘शिष्य’ का फोन उनके पास आया। यदुवंश ने कहा कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव के इशारे पर ही एक सपाई सांसद ने कहा कि कांग्रेस की हैसियत तो 10 सीटों की भी नहीं है। 

    'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार'

    यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'ये जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार हैं, ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।' यदुवंश ने कहा कि इन दोनों नेताओं में अनुशासन नहीं है, टीम भावना नहीं है और समन्वय नहीं है। अखिलेश और राहुल दोनों ही किसी व्यवस्था को चला नहीं सकते।

    'डेढ़ साल मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा'

    अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘युवराज’ को सत्ता मिली, तो डेढ़ साल तक मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तर प्रदेश को 'सिरफुटौव्वल का अड्डा' बना दिया गया।

    'राजतंत्र पर भरोसा करते हैं राहुल गांधी'

    राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यदुवंश ने कहा कि जब कांग्रेस के ‘युवराज’ को सत्ता मिली थी, तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का तैयार किया हुआ मसौदा राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। उन्होंने कहा, 'युवराज ने मसौदा फाड़ करके बताया कि देखो, मैं राजतंत्र में बिलीव करता हूं, संविधान मानता नहीं हूं, संविधान को जेब में रख करके चलता हूं।'

    बता दें कि 2013 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दोषी सांसदों-विधायकों को तत्काल अयोग्यता से बचाने के लिए लाए गए जनप्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘पूरी तरह बकवास’ बताते हुए सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था।

    अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमला करते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि इन पर भरोसा करना, इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है। ये दोनों परिवारतंत्र पर भरोसा करने वाले नेता हैं।

  • 350 करोड़ की FD को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा पर दिग्विजय सिंह का निशाना, आर्थिक स्थिति पर किया सवाल

    350 करोड़ की FD को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा पर दिग्विजय सिंह का निशाना, आर्थिक स्थिति पर किया सवाल

    सीहोर
     प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर सीहोर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा को लेकर तंज कसा है। दिग्विजय सिंह ने बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर कथावाचक द्वारा बताए जाने वाले उपायों पर सवाल उठाते हुए उनकी संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    वीडियो में दिग्विजय सिंह कहते नजर आ रहे हैं कि आजकल धार्मिक गुरु और कथावाचकों की खूब चल रही है। उन्होंने सीहोर वाले कहावाचक का जिक्र छेड़ा और कहा कि वे बच्चों से कहते थे कि तुम्हें पढ़ाई करने की जरूरत नहीं, भगवान शिव को शहद लगाकर बेल पत्र चढ़ा दो और तुम पास हो जाओगे। दिग्विजय यहीं नहीं रुके। उन्होंने कथावाचक पर चुटकी लेते हुए कहा कि सुनने में आया है कि उनका बेटा ही परीक्षा में फेल हो गया।

    350 करोड़ की एफडी का जिक्र
    दिग्विजय सिंह ने सीहोर के कथावाचक की पिछले कुछ सालों में उपजी आर्थिक संपन्नता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीहोर के स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि महज दो साल में उनके (पं. प्रदीप मिश्राा) पास करीब 350 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट हो गई है। इसी को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देखना चाहिए कि पिछले दो साल में वे क्या से क्या हो गए।

    हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट किया कि 350 करोड़ रुपये की एफडी होने का दावा वे स्वयं नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सीहोर के स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही बातों का उल्लेख कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    बयान की सोशल मीडिया में चर्चा
    दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।