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  • फ्लाईदुबई फ्लाइट हाईजैक करने की कोशिश रोकी, भारतीय पायलट स्मित मछार को मिलेगा बड़ा सम्मान

    फ्लाईदुबई फ्लाइट हाईजैक करने की कोशिश रोकी, भारतीय पायलट स्मित मछार को मिलेगा बड़ा सम्मान

    नई दिल्ली/तेल अवीव

    30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक होने से बचाने वाले कैप्टन स्मित मछार को इजरायल सम्मानित करेगा. इजरायली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने  इस घटना से जुड़े नायकों को सम्मानित किया. उन्होंने येरुशलम में छह इजरायली नागरिकों- ताली मानेस, ज्विका मानेस, यानिव हायुन, डॉ. शोता मुसायेव, आसाफ राजुआन और ओर पारदिलोव को राष्ट्रपति नागरिक वीरता पदक प्रदान किया. इन लोगों ने हमलावर को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। 

    हर्जोग ने उसी मौके पर भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार को भी यही पुरस्कार देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि मछार की साहस, बहादुरी और पेशेवर रवैये ने इस बड़ी आपदा को टाल दिया. मछार के स्वस्थ होने के बाद उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा. हर्जोग ने मछार के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। 

    विमान में करीब 174 यात्री सवार थे, जिनमें ज्यादातर इजरायली नागरिक शामिल थे. उड़ान के दौरान कॉकपिट में अचानक हमला हुआ. ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने कैप्टन स्मित मछार पर क्रैश एक्स से हमला कर दिया. उनका मकसद विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे दुर्घटनाग्रस्त करना था. विमान तेजी से नीचे गिरने लगा और कुछ ही सेकंड में हजारों फीट की ऊंचाई खो बैठा. यात्री घबरा गए और स्थिति बेहद खतरनाक हो गई। 

    कैप्टन स्मित मछार गंभीर रूप से घायल हो गए. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. घायल अवस्था में भी उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की और सफल रहे. इससे यात्री अंदर घुस पाए. छह इजरायली नागरिकों ने हमलावर को काबू में कर लिया. विमान में मौजूद अन्य पायलटों की मदद से स्थिति संभाली गई. विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया. यह घटना आतंकवादी हमले के प्रयास के रूप में जांच के दायरे में है. मछार की बहादुरी और पेशेवर कौशल ने सैकड़ों जानें बचा लीं। 

    कैप्टन स्मित मछार फिलहाल अबू धाबी के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. वे रिकवरी कर रहे हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी उनकी हालत में सुधार की पुष्टि की है. इस घटना के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई नेताओं ने मछार को हीरो बताया. भारत और इजरायल के बीच मजबूत संबंधों का यह एक और उदाहरण बन गया है. यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उन सभी का है जिन्होंने मिलकर विमान को बचाया. मछार की बहादुरी दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है. उनके स्वस्थ होने और सम्मान समारोह का इंतजार सभी कर रहे हैं। 

  • वेस्ट पर रहेगा फोकस   भारत-वेस्टइंडीज मैच से दुनिया देखेगी इंदौर की स्वच्छता, टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी; तैयारियां पूरी

    वेस्ट पर रहेगा फोकस भारत-वेस्टइंडीज मैच से दुनिया देखेगी इंदौर की स्वच्छता, टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी; तैयारियां पूरी

    इंदौर
     देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के साथ स्वच्छता के संस्कारों की रोशनी दुनियाभर में फैलेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित होगा। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में संग्रहीत किया जाएगा। साथ ही विज्ञापन होर्डिंग भी पुन:उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाएंगे।

    मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट पृथक किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद बनेगी और इस प्रक्रिया का पहला चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके बाद इसे प्लांट भेजा जाता है।

    11 अक्टूबर की शाम होलकर स्टेडियम एक बार फिर भारत और वेस्टइंडीज की भिड़ंत का गवाह बनने जा रहा है। इस बार मुकाबला T20 इंटरनेशनल का है। मैच रात 7 बजे शुरू होगा और करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। मैच से पहले दैनिक भास्कर ने स्टेडियम की तैयारियों का जायजा लिया। ग्राउंड से लेकर दर्शक दीर्घा तक तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाई जा रही है, जबकि अंदर कुर्सियों की धुलाई और सफाई का काम जारी है।

    सबसे बड़ी राहत मौसम को लेकर है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक 8 से 12 अक्टूबर तक बारिश की संभावना नहीं है। तापमान सामान्य से कुछ अधिक चल रहा है, लेकिन न्यूनतम तापमान कम है। मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। यानी क्रिकेट प्रेमियों को बारिश के कारण मैच रुकने की चिंता फिलहाल नहीं है।

    MPCA के सीएओ रोहित पंडित ने बताया कि मैच की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लगभग सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। अचानक बारिश की स्थिति के लिए भी बैकअप प्लान तैयार है। जरूरत पड़ने पर पूरे ग्राउंड को कवर करने की व्यवस्था रहेगी।

    बारिश का खतरा नहीं, अब नजर ओस पर
    मैच रात में खेला जाना है, इसलिए बारिश के बाद अब मौसम को लेकर दूसरा सवाल ओस का है। मैच के दौरान तापमान, हवा और नमी की स्थिति गेंदबाजों के लिए अहम रहेगी।

    मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक फिलहाल बारिश के कोई संकेत नहीं हैं। मानसून का दौर समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम के ड्राई रहने की संभावना है।

    स्टेडियम के बाहर लग रही रेलिंग
    मैच से पहले होलकर स्टेडियम में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाने का काम चल रहा है। मैच के दिन बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे, ऐसे में प्रवेश द्वारों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करना अहम होगा। रेलिंग के जरिए दर्शकों की कतार और आने-जाने के रास्ते को व्यवस्थित किया जाएगा।

    स्टेडियम के अंदर कुर्सियों की सफाई और धुलाई भी की जा रही है। दर्शकों के लिए जरूरी होगा कि वे टिकट पर दर्ज प्रवेश गेट की जानकारी पहले से देख लें और पर्याप्त समय लेकर स्टेडियम पहुंचें।

    27,500 दर्शकों की भीड़ संभालना बड़ी चुनौती
    भारत का मुकाबला हो और वह भी इंदौर में, तो स्टेडियम के बाहर भी क्रिकेट का माहौल बनना तय है। करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद के चलते सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    सुरक्षा जांच में समय लग सकता है, इसलिए आखिरी समय में पहुंचने वाले दर्शकों को परेशानी हो सकती है। दर्शकों को टिकट, निर्धारित गेट और स्टेडियम की एंट्री गाइडलाइन पहले से देखनी चाहिए और मैच शुरू होने से काफी पहले पहुंचना बेहतर रहेगा।

    सुरक्षा में पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी से निगरानी, 160 CCTV कैमरे लगे
    मुकाबले के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। MPCA और स्थानीय पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के अंदर करीब 160 CCTV कैमरे लगे हैं। आसपास के क्षेत्रों में भी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी।

    इसके अलावा फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दर्शकों की एंट्री से लेकर स्टेडियम के अंदर आवाजाही तक पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस आपसी समन्वय से काम करेंगी।

    छोटी बाउंड्री यानी चौके-छक्कों का मैदान
    होलकर स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी छोटी बाउंड्री है। यहां चौकोर बाउंड्री करीब 56 मीटर और सीधी बाउंड्री करीब 68 मीटर बताई जाती है। बल्लेबाज अगर गेंद को सही टाइमिंग से कनेक्ट करता है तो बाउंड्री तक पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत नहीं होती।

    T20 क्रिकेट में छोटी बाउंड्री का महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि होलकर में दर्शकों को तेज रन, बड़े शॉट और लगातार बाउंड्री देखने की उम्मीद रहती है। इस मुकाबले के लिए पिच भी T20 के हिसाब से तैयार की जा रही है। ऐसे में टॉस के बाद कप्तानों का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

    ODI में 7 जीत के बाद पहली बार हार भी देख चुका है मैदान
    होलकर स्टेडियम लंबे समय तक वनडे में भारत के लिए अजेय मैदान रहा। भारत ने यहां लगातार सात ODI जीते, लेकिन जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर यह सिलसिला तोड़ा। अब यहां भारत का ODI रिकॉर्ड 8 मैचों में 7 जीत और 1 हार है।

    इस मैदान पर भारत का सबसे बड़ा ODI स्कोर 418/5 है, जो 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ बना था। इसी मुकाबले में वीरेंद्र सहवाग ने 219 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

    पोस्टर से बनाएंगे थैलियां 
    मैच के दौरान स्टेडियम में विज्ञापन पोस्टर प्लास्टिक या फ्लैक्स के बजाए पुन: उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाते हैं। मैच के बाद यह पोस्टर महिला स्व सहायता समूह को दिए जाते हैं, जिससे वे थैलियां और मोबाइल बैग बनाती हैं।

    प्रशंसकों को करेंगे जागरूक
    स्टेडियम परिसर में ही कचरे को रिसाइकल करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही घर के कचरे के सही तरीके से निस्तारण के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।

    अन्य शहरों को भी दी सीख
    श्रीगोपाल जगताप बताते हैं कि भारत में हुए महिला विश्व कप के दौरान इंदौर से सीखकर गुवाहाटी, मुंबई आदि शहरों में भी जीरो वेस्ट इवेंट किया गया था। गुवाहाटी में भी इंदौर की टीम ही गई थी।

    ऊर्जा संरक्षण
    होलकर स्टेडियम अपने दैनिक इस्तेमाल की अधिकांश बिजली सौर ऊर्जा से स्वयं उत्पादित करता है। स्टेडियम की छत पर 376 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे हर साल लगभग 2,77,400 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इससे प्रति वर्ष करीब 277 टन कार्बन उत्सर्जन की बचत होती है।

    जल संरक्षण
    स्टेडियम में जिस मैदान पर मैच होता है, उसके नीचे 12 कुएं बनाए गए हैं। वर्षा जल को इनमें संग्रहित किया जाता है, जिससे जमीन का जल स्तर बेहतर बना होता है। इससे भीषण गर्मी में भी पूरे क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं होती।

    2011 में सहवाग ने बनाया था रिकॉर्ड
    8 दिसंबर 2011 को भारत और वेस्टइंडीज आमने-सामने थे। उस दिन वीरेंद्र सहवाग ने ऐसी बल्लेबाजी की, जिसने होलकर स्टेडियम को क्रिकेट इतिहास में खास जगह दिला दी। सहवाग ने 149 गेंदों पर 219 रन बनाए। उन्होंने 25 चौके और 7 छक्के लगाए।

    सहवाग ने 41 गेंदों में अर्धशतक, 69 गेंदों में शतक, 112 गेंदों में 150 और 140 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया था। इस पारी के दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 200 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए वनडे में नया व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर बनाया।

    भारत ने उस मुकाबले में 50 ओवर में 418/5 का विशाल स्कोर बनाया और वेस्टइंडीज को 153 रन से हराया। सहवाग को मैन ऑफ द मैच चुना गया। अब 15 साल बाद उसी मैदान पर फिर भारत-वेस्टइंडीज की टीमें आमने-सामने होंगी। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मुकाबला 50 ओवर का नहीं, बल्कि 20 ओवर का है।

    सहवाग से कोहली तक… होलकर ने कई ऐतिहासिक पारियां देखीं
    होलकर सिर्फ सहवाग की 219 रन की पारी का मैदान नहीं है। यहां भारतीय क्रिकेट की कई यादगार पारियां दर्ज हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ विराट कोहली की 124 रन की पारी भी लंबे समय तक याद की जाती रही है। मैदान की छोटी बाउंड्री और बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों ने कई बार बड़े स्कोर की नींव रखी है।

    होलकर के ODI आंकड़ों में भारत का औसत पहली पारी का स्कोर 332 रन बताया गया है। मैदान पर अब तक का सर्वोच्च ODI स्कोर भी भारत के नाम है- 418/5

    अब ODI नहीं, T20 का मुकाबला
    11 अक्टूबर को होने वाला मुकाबला T20 इंटरनेशनल है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का यह तीसरा मैच है। मुकाबला रात 7 बजे शुरू होगा।

    T20 में बल्लेबाजों के पास शुरुआत से ही आक्रामक क्रिकेट खेलने का विकल्प रहता है। होलकर की छोटी बाउंड्री को देखते हुए पावरप्ले के छह ओवर खास हो सकते हैं।

    अगर शुरुआती छह ओवर में बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत मिलती है तो स्कोर तेजी से आगे बढ़ सकता है। दूसरी ओर, गेंदबाजों के लिए छोटी बाउंड्री पर रन रोकना बड़ी चुनौती होगी।

     

  • नवरात्र की अवधि क्यों बदलती है? तिथियों के फेर में छिपा है नौ दिनों का पूरा गणित

    नवरात्र की अवधि क्यों बदलती है? तिथियों के फेर में छिपा है नौ दिनों का पूरा गणित

    Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्र यानी मां दुर्गा की आराधना के नौ दिन। आमतौर पर श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग में तिथियों के फेर के कारण हर साल नवरात्र का क्रम एक जैसा नहीं रहता।

    कभी तिथि के क्षय से आठ दिनों में ही पूजा संपन्न हो जाती है, तो कभी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र दस दिनों तक चलता है। कई बार अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है।

    ऐसे में सवाल उठता है कि नौ दिनों का पर्व कभी आठ या दस दिनों का कैसे हो जाता है? इसका जवाब चंद्रमा की गति और पंचांग में तिथियों की अवधि में छिपा है।

    तिथि के क्षय-वृद्धि से बदलता है पूजा का क्रम
    ज्योतिषाचार्य डा. राघव नाथ झा के अनुसार, हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसलिए हर तिथि की अवधि समान नहीं होती।

    जब कोई तिथि सूर्योदय के समय नहीं आती और दूसरी तिथि के साथ एक ही दिन में समाहित हो जाती है, तो उसे तिथि का क्षय कहा जाता है।

    वहीं, जब कोई तिथि दो सूर्योदय तक बनी रहती है, तो उसकी वृद्धि मानी जाती है। नवरात्र में इसका सीधा असर कलश स्थापना से लेकर अष्टमी, नवमी और विजयादशमी के पूजन क्रम पर पड़ता है। यही वजह है कि अलग-अलग वर्षों में पर्व की अवधि और प्रमुख पूजन तिथियों में अंतर देखने को मिलता है।

    2014 और 2021 में एक दिन हुआ संयुक्त पूजन
    बीते वर्षों पर नजर डालें तो तिथियों के इस बदलाव के कई उदाहरण मिलते हैं। वर्ष 2014 में नवमी तिथि के क्षय के कारण अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन हुआ था।

    उस वर्ष 25 सितंबर को कलश स्थापना हुई और तीन अक्टूबर को विजयादशमी मनाई गई। इसी तरह 2021 में चतुर्थी तिथि के क्षय के कारण तृतीया और चतुर्थी का पूजन एक ही दिन करना पड़ा।

    इस वजह से नवरात्र का पूजा क्रम आठ दिनों में पूरा हुआ। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि धार्मिक अनुष्ठानों की तारीख तय करने में केवल दिनों की सामान्य गिनती नहीं, बल्कि पंचांग में तिथियों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

    2016 और 2025 में दस दिनों तक चला नवरात्र
    तिथि की वृद्धि भी पर्व की अवधि को प्रभावित करती है। वर्ष 2016 में द्वितीया तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र का क्रम दस दिनों तक चला।

    वहीं, 2025 में चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र दस दिनों का रहा। इसके उलट, जब दो तिथियों का पूजन एक ही दिन करना पड़ता है, तो पूजा के दिन कम हो सकते हैं।

    हालांकि, तिथि के क्षय या वृद्धि का अर्थ देवी की आराधना में कमी या बढ़ोतरी नहीं है। इसका संबंध पंचांग के अनुसार व्रत और पूजन की तारीखों के निर्धारण से है।
    कभी नौका, कभी हाथी पर देवी के आगमन की मान्यता

    नवरात्र में तिथियों के साथ देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पंचांग और परंपराओं में वार के आधार पर देवी के आगमन और गमन के वाहन का उल्लेख मिलता है।

    अलग-अलग वर्षों में हाथी, घोड़ा, नौका और डोली जैसे वाहनों का जिक्र किया जाता है। वर्ष 2018 में देवी के आगमन को नौका से, 2019 में हाथी से और 2020 में घोड़े से जोड़ा गया था।

    2021 में डोली पर आगमन की मान्यता रही, जबकि 2022 और 2023 में हाथी तथा 2024 में डोली पर आगमन बताया गया। इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक परंपराओं से है, जबकि नवरात्र की अवधि में बदलाव का आधार पंचांग की तिथियां हैं।

    अलग-अलग वर्षों में ऐसे बदला नवरात्र का क्रम
    वर्ष 2014 से 2025 तक नवरात्र की अवधि और तिथियों में अलग-अलग तरह के बदलाव देखने को मिले। कुछ वर्षों में नौ दिनों का सामान्य क्रम रहा, कुछ में तिथि के क्षय से संयुक्त पूजन हुआ, तो कुछ वर्षों में तिथि की वृद्धि से पूजा दस दिनों तक चली।

    इसलिए नवरात्र की सही तिथियों और व्रत के दिन का निर्धारण करने के लिए संबंधित वर्ष का पंचांग देखना जरूरी है। श्रद्धालुओं के लिए यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि इससे अष्टमी, नवमी, कलश स्थापना और विजयादशमी की तारीखों को लेकर होने वाली उलझन दूर हो सकती है।

    प्रमुख वर्षों में नवरात्र की अवधि
    वर्ष     कलश स्थापना तिथि     पूजन क्रम
    2014      25 सितंबर          नवमी तिथि के क्षय से अष्टमी-नवमी का पूजन एक दिन
    2015     13 अक्टूबर         नवमी-दशमी के संयोग से पूजन क्रम प्रभावित
    2016     1 अक्टूबर           द्वितीया तिथि की वृद्धि से दस दिनों का नवरात्र
    2017     21 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र
    2018     10 अक्टूबर         द्वितीया के क्षय और पंचमी की वृद्धि का प्रभाव
    2019     29 सितंबर          नौ दिनों का नवरात्र
    2020     17 अक्टूबर          नौ दिनों का नवरात्र
    2021     7 अक्टूबर           चतुर्थी के क्षय से तृतीया-चतुर्थी का संयुक्त पूजन; आठ दिनों का क्रम
    2022     26 सितंबर           नौ दिनों का नवरात्र
    2023     15 अक्टूबर         नौ दिनों का नवरात्र
    2024     3 अक्टूबर             चतुर्थी की वृद्धि और नवमी के क्षय से अष्टमी-नवमी का संयोग
    2025     22 सितंबर            चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने से दस दिनों का नवरात्र

  • स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    भोपाल 
    स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को प्रशासन ने अब 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। खासकर परिवीक्षाधीन पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपने पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें। ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं बिना किसी अतिरिक्त सूचना के समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

    मध्यप्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया है। पटवारियों के निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में साइन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश में 102 पटवारियों पर बर्खास्त।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व काम का शटडाउन रखा है। देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।

    इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर आरोप-पत्र दिए गए हैं।

    सीएम तक पहुंचा मामला, PRC की बैठक बेनतीजा

    पटवारियों का विरोध और जिलों में कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। विरोध के बीच गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

    संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश
    प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अवकाश के लिए प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना जरूरी है। संघ के माध्यम से सामूहिक अवकाश की सूचना देकर लगातार शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।

    अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का नहीं मिलेगा वेतन, 'ब्रेक इन सर्विस' की चेतावनी
    सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति सामूहिक अवकाश या हड़ताल में शामिल होने की अवधि का वेतन देय नहीं होगा। इस अवधि को अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का वेतन काटने की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पटवारी आगे भी अनधिकृत रूप से शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहते हैं तो संबंधित अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (ब्रेक इन सर्विस) मानने संबंधी प्रस्ताव विभागाध्यक्ष को भेजे जाएंगे।

    पहले तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों पर हो चुकी कार्रवाई
    बता दें कि प्रशासन की सख्ती के बीच तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। इसके विरोध में जिलेभर के पटवारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में 1000 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे।

    डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक भी टली
    पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में होने वाली बैठक भी टल गई। डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांग और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

    पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाया नहीं जाता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहा है।

    50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का मामला
    मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।

    स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है।

    पटवारी संघ ने कहा- कोर्ट में घसीटे जांएगे

    पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में काम करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।

     

  • CM भगवंत मान का बड़ा कदम, पंजाब में निवेश बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए नई पहल

    CM भगवंत मान का बड़ा कदम, पंजाब में निवेश बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए नई पहल

    चंडीगढ़
    कारोबार में सुगमता, पारदर्शिता और रोजगार पैदा करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए पंजाब निवेशकों के लिए प्राथमिकता वाले स्थान के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज इस दिशा में चंडीगढ़ में ‘हुनर पंजाब’ और ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल लॉन्च किए। उन्होंने कहा कि ये नए पोर्टल 45 दिनों के भीतर सिंगल विंडो के माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरियां सुनिश्चित करेंगे, निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहनों की पारदर्शी तरीके से निगरानी करने में सक्षम बनाएंगे और उद्योगों को कुशल युवाओं से सीधे जोड़ेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने वर्ष 2022 से अब तक 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं के लिए पंजाब में ही रोजगार के अवसर पैदा करना और फिर से ‘रंगला पंजाब’ का निर्माण करना है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों के दौरान पंजाब में 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। निवेशकों के इस विश्वास को बनाए रखने के लिए हमने आज दो प्रमुख पोर्टल लॉन्च किए हैं। ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल राज्य के युवाओं को उनके घरों के नजदीक रोजगार के अवसर प्रदान करने और उद्योगों को कुशल कामगार उपलब्ध करवाने के लिए शुरू किया गया है।

    इसके साथ ही निवेशकों को उपलब्ध सुविधाओं और वित्तीय रियायतों के बारे में पारदर्शी जानकारी प्रदान करने के लिए ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ का ‘फाइनेंशियल इंसेंटिव्स मॉड्यूल’ (पासबुक) लॉन्च किया गया है। हमारा लक्ष्य पंजाब के युवाओं को उनके अपने राज्य में रोजगार देना और पंजाब को एक बार फिर खुशहाल बनाना है। इंकलाब जिंदाबाद।”

    पोर्टल लॉन्च करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हुनर पंजाब और फास्ट-ट्रैक पंजाब की शुरुआत पंजाब के उद्योग और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम है। ‘हुनर पंजाब’ उद्योग और कुशल युवाओं के बीच की दूरी को कम करेगा और राज्य के भीतर हमारे युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करेगा।”

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल पर पहले ही लगभग 1,750 संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं और औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के लिए स्थानीय कुशल युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनियां अब इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुशल युवाओं से सीधे जुड़कर उन्हें नौकरी पर रख सकेंगी।

    उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने और सरकारी कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सभी विभागों में ई-ऑफिस और ऑनलाइन प्रणालियां लागू कर दी हैं। ये प्रणालियां अनावश्यक देरी को कम कर रही हैं और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक जवाबदेह बना रही हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब ने पिछले चार वर्षों में 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह पंजाब में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हुनर पंजाब युवाओं की प्रतिभा, नेटवर्किंग और रोजगार तक पहुंच के लिए सिंगल प्लेटफॉर्म है। यह प्रमुख कमियों जैसे उपलब्ध प्रतिभा के बारे में जानकारी का अभाव, उद्योग और संस्थानों की अलग-अलग आवश्यकताएं, मांग और आपूर्ति के बीच संपर्क की कमी तथा निर्धारित जवाबी समय-सीमा के अभाव को दूर करता है।”

    उन्होंने आगे कहा, “‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ के साथ-साथ ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल उद्योग के लिए कौशल विकास और रोजगार के प्रमुख केंद्र हैं। ये पोर्टल चार महत्वपूर्ण चरणों को एक ही मंच पर लाते हैं, जिनमें संस्थानों की खोज, भर्ती एवं रोजगार, इंटर्नशिप एवं औद्योगिक प्रशिक्षण तथा उद्योग-संस्थान सहयोग शामिल हैं।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “7 प्रशासनिक विभागीय श्रेणियों में 1,700 से अधिक संस्थान पहले ही इस पोर्टल का हिस्सा बन चुके हैं। इस व्यवस्था में निश्चित समय-सीमा और जवाबदेही तय की गई है, ताकि आवेदनों और अनुरोधों का निर्धारित समय के भीतर निपटारा किया जा सके।

    उद्योगों, संस्थानों और विभागों के लिए विशेष डैशबोर्ड तैयार किए गए हैं। यह प्लेटफॉर्म हेल्प-डेस्क सहायता के साथ-साथ सवालों और शिकायतों के निवारण की सुविधा भी प्रदान करेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया सभी हितधारकों के लिए आसान और अधिक पारदर्शी हो जाएगी।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “‘हुनर पंजाब’ पोर्टल उद्योगों, संस्थानों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और विभागों की साझेदारी से शुरू से अंत तक इंटर्नशिप और औद्योगिक प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करेगा। यह युवाओं को वास्तविक रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने के लिए व्यवस्थित ढांचा उपलब्ध करवाएगा।”

    उन्होंने बताया, “यह पोर्टल एम.ओ.यू. आधारित उद्योग-संस्थान साझेदारी को औपचारिक रूप देगा, जिसमें गैस्ट लेक्चर, फैकल्टी विकास, ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, पाठ्यक्रम संबंधी सुझाव, बुनियादी ढांचे एवं तकनीकी सहायता तथा सी.एस.आर. सहयोग शामिल हैं।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सरकार शुरू से अंत तक की प्रक्रियाओं, अलग-अलग यूजर लॉगिन, राज्य स्तर पर टैलेंट मैनेजमेंट एवं प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और सहयोग की विभागीय निगरानी के साथ सभी चार मॉड्यूल को पूरी तरह लागू करने की दिशा में काम कर रही है। पंजाब निवेशकों के लिए पसंदीदा स्थान के रूप में उभरा है, जहां सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरियां उपलब्ध हैं। ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने वाले निवेशकों को 45 दिनों के भीतर सभी मंजूरियां मिल जाएंगी।”

    उन्होंने कहा, “‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल निवेशकों को मिलने वाली वित्तीय रियायतों के बारे में भी पारदर्शी जानकारी देगा। निवेशक विभिन्न कार्यालयों और प्रक्रियाओं पर निर्भर रहने के बजाय पोर्टल के माध्यम से ही इन रियायतों को ट्रैक कर सकेंगे।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब के युवाओं को पंजाब के भीतर ही रोजगार उपलब्ध करवाना और पंजाब को फिर से ‘रंगला पंजाब’ बनाना है। सरकार चाहती है कि पंजाब की प्रतिभा को पंजाब में ही अवसर मिलें और वह राज्य की प्रगति में योगदान दे।”

    उन्होंने कहा, “यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब में वर्ष 2022 से अब तक 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। यह उस विश्वास का परिणाम है जो निवेशक पंजाब पर जता रहे हैं।”

    पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकारें निवेश सम्मेलन करवाती थीं और केवल एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर करती थीं, लेकिन कंपनियां वास्तव में पंजाब में निवेश नहीं करती थीं। आज हमारी सरकार द्वारा तैयार की गई निवेश-हितैषी नीतियों और माहौल को देखकर कंपनियां निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं।”

    उन्होंने कहा, “‘हुनर पंजाब’ और ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टलों की शुरुआत पंजाब के औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करेगी। ये पोर्टल राज्य में निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति देंगे।”

    इस दौरान उद्योग, वाणिज्य एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ये दोनों पोर्टल विभाग के कामकाज में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों पर उद्योग एवं निवेश पंजाब अपने पूरे कामकाज का डिजिटलीकरण कर रहा है, ताकि निवेश परियोजनाओं की मंजूरी या अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में कोई बाधा न आए।”

    उन्होंने कहा, “पंजाब की प्रगति और विकास में उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पोर्टल उद्योगों को कुशल मानव शक्ति तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेंगे कि पंजाब के युवाओं को उनके अपने राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर मिलें।”

    इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

     

  • उत्तर प्रदेश में 455 लेखपालों को मिली नई जिम्मेदारी, अब राजस्व निरीक्षक के पद पर करेंगे काम

    उत्तर प्रदेश में 455 लेखपालों को मिली नई जिम्मेदारी, अब राजस्व निरीक्षक के पद पर करेंगे काम

    योगी सरकार ने 455 लेखपालों को दी पदोन्नति, बने राजस्व निरीक्षक

    – राजस्व परिषद ने ऑनलाइन डीपीसी से पूरी की प्रक्रिया, जल्द जारी होंगे तैनाती के आदेश

    राजस्व निरीक्षक बनने से तहसील स्तर पर मजबूत होगा राजस्व कार्यों का पर्यवेक्षण

    लखनऊ
    योगी सरकार
    ने प्रदेश में राजस्व प्रशासन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने चयन वर्ष 2025-26 के तहत ऑनलाइन विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी करते हुए प्रदेश के 455 लेखपालों को राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के पद पर पदोन्नति प्रदान की है। पदोन्नत कार्मिकों की तैनाती के आदेश जल्द जारी किए जाएंगे।

    तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और होगा प्रभावी
    उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड के चेयरमैन बीएल मीणा ने बताया कि पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराई गई। निर्धारित पात्रता मानकों और सेवा अभिलेखों के आधार पर कार्मिकों का परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद 455 लेखपालों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया। ऑनलाइन डीपीसी के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने से विभागीय पदोन्नति में पारदर्शिता के साथ ही समयबद्धता को भी बढ़ावा मिला है। पदोन्नति से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी। इससे तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और प्रभावी होगा। वहीं, भूमि संबंधी मामलों, पैमाइश, राजस्व अभिलेखों और अन्य राजस्व कार्यों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है।

    राजस्व मामलों के निस्तारण पर जोर
    बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार राजस्व मामलों के त्वरित और न्यायसंगत निस्तारण के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में ऑनलाइन डीपीसी को कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

  • भोपाल न्यू मार्केट अग्निकांड: अतिक्रमण बना बाधा, आधे घंटे बाद पहुंची दमकल; दुकानदारों में हड़कंप

    भोपाल न्यू मार्केट अग्निकांड: अतिक्रमण बना बाधा, आधे घंटे बाद पहुंची दमकल; दुकानदारों में हड़कंप

    भोपाल

     बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ऊपर तक पहुंची और देखते ही देखते पास की 5-6 चार मंजिला दुकानों को चपेट में ले लिया। मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों में रखा दीवाली का स्टॉक जल गया।इनके आसपास लगी 10-12 रेहड़ियां भी पूरी तरह खाक हो गईं। दुकानदारों के मुताबिक नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है।

    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आग की वजह से ज्यादा न्यू मार्केट की तैयारी और पहुंच को लेकर है। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक छोले-भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और ऊपर लगे बैनर तक पहुंची। दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर रखे थे।

    सिलेंडर फटे या नहीं, इसकी पुष्टि फायर विभाग अभी नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आग बुझाने पहुंची दमकलों को संकरी सड़क, रेहड़ियों और अतिक्रमण के बीच रास्ता बनाकर घटना स्थल तक पहुंचना पड़ा। दुकानदार के मुताबिक इसमें 25 से 30 मिनट लग गए।

    जहां से आग शुरू हुई, वहीं सबसे बड़ा सवाल सिलेंडर को लेकर

    बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में बाहर की तरफ ही भट्ठी लगी है। प्रत्यक्षदर्शी नीलेश पाटिल के मुताबिक दोपहर में भटूरे बनाते समय अचानक आग भड़की। दुकान में उस समय करीब 50-60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही सभी बाहर भागे।

    नीलेश के मुताबिक दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर भी रखे थे और धमाके हुए। हालांकि, नगर निगम के फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की बात तो कही है, लेकिन इनके ब्लास्ट होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह तहस-नहस हो गई है और यह भी जांचा जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे या नहीं।

    मंदिर तक पहुंच सकती थी आग, दीवार ने बचाया
    आग की चपेट में दुकान से सटा खेड़ापति हनुमान मंदिर भी आ सकता था। हालांकि मंदिर की दीवार के कारण आग वहां तक नहीं पहुंच सकी और मंदिर सुरक्षित रहा।

    अतिक्रमण ने बढ़ाई दमकल की परेशानी
    इस घटना के बाद न्यू मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा भी सामने आया। बाजार में दुकान के बाहर और आसपास काफी अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को अंदर पहुंचने में परेशानी हुई आग तेजी से फैल रही थी, जबकि फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने के लिए सीमित जगह में काम करना पड़ा। इससे आग पर काबू पाने में चुनौती बढ़ गई।

    विधायक सबनानी ने कहा कि घटना से सबक लेते हुए न्यू मार्केट को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में दमकल और राहत वाहनों को आसानी से रास्ता मिलना जरूरी है।

    25 फीट की लपटों ने ऐसे पकड़ीं एक के बाद एक दुकानें
    छोले-भटूरे की दुकान से उठी आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे थे, जबकि ऊपरी हिस्से में फ्लैक्स और पोस्टर लगे थे। यही आग फैलने का जरिया बने। इसके बाद पास की मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों तक आग पहुंच गई।

    दुकानदार संजय कुमार जैन के मुताबिक इन दुकानों में दीवाली का स्टॉक भरा था, जो पूरी तरह जल गया। सजावटी सामान, मोबाइल एक्सेसरीज और खाने-पीने की रेहड़ियां भी आसपास थीं। इनमें से 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं।

    दुकानदारों के अनुसार कुल नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। इसकी अंतिम पुष्टि नुकसान के आकलन के बाद होगी।

    दमकल को आधा घंटा क्यों लगा, जबकि फायर स्टेशन करीब 1 किमी दूर?
    न्यू मार्केट के अंदर आने-जाने के करीब 10 रास्ते हैं। टीटी नगर थाने की ओर से दो और क्वॉलिटी रेस्टॉरेंट की ओर से एक प्रमुख रास्ते से वाहन आते-जाते हैं। आग वाली दुकानें टीटी नगर थाने के सामने वाले रास्ते की तरफ हैं।

    दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक फायर कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कर्मचारियों को घटना स्थल की लोकेशन समझाने में भी समय लगा।

    इसके बाद जब दमकलें अंदर पहुंचीं तो रास्ते में लगी रेहड़ियां और संकरी सड़क बड़ी बाधा बनीं। दुकानदार के मुताबिक दमकल को मौके तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग गए। माता मंदिर फायर स्टेशन यहां से करीब एक किलोमीटर दूर है।

    सामने आया अहम सवाल – अगर फायर स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर है और न्यू मार्केट में कई प्रवेश मार्ग हैं तो दमकल को घटना स्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? क्या अतिक्रमण और रेहड़ियां सिर्फ रास्ते में थीं या पार्किंग और संकरी सड़क भी उतनी ही बड़ी बाधा बनी?

    न्यू मार्केट में 900 दुकानें, करीब 400 रेहड़ियां
    न्यू मार्केट में करीब 900 रजिस्टर्ड दुकानें हैं। इसके अलावा करीब 400 रेहड़ियां लगती हैं। खेड़ापति हनुमान मंदिर के सामने शाम के समय इतना अतिक्रमण रहता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    आग वाली जगह के पास और सामने भी रेहड़ियां लगी थीं। आग में 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। हादसे के दौरान इन्हीं रास्तों से दमकलों को अंदर लाने के लिए पुलिस और अन्य टीमों को लगातार रास्ता खाली कराना पड़ा।

    न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी का कहना है कि हॉकर्स के अतिक्रमण के कारण दमकलों को अतिरिक्त समय लगा। उनके मुताबिक मल्टी लेवल पार्किंग पर एक स्टैंडिंग फायर ब्रिगेड रहती है, लेकिन न्यू मार्केट में दोपहिया फायर फाइटर की अतिरिक्त व्यवस्था भी होनी चाहिए।

    फायर सेफ्टी की तैयारी कितनी?
    न्यू मार्केट में कपड़े, सजावटी सामान, ज्वेलरी समेत कई तरह की दुकानें हैं। आग वाली लाइन में 10-12 छोले-भटूरे की दुकानें और रेस्टॉरेंट हैं। इनमें कई जगह भट्ठियां बाहर की तरफ लगी हैं।

    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानदारों को फायर सेफ्टी नियमों के पालन के लिए कहा जाता है और विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन हादसे ने अब यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ निरीक्षण और नोटिस से आगे बाजार में वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था कितनी है।

    जिस दुकान से आग शुरू हुई, उस पर पहले भी अतिक्रमण की कार्रवाई
    हादसे के बाद अतिक्रमण का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से आग शुरू हुई, उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदार से विवाद होने की बात भी सामने आई है।

    भवन अनुज्ञा शाखा की ओर से भी नोटिस दिए गए थे। भदौरिया के मुताबिक करीब एक महीने पहले अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दिए गए थे और रेहड़ियां भी हटाई गई थीं, यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज रास्ते में अतिक्रमण था या नहीं, बल्कि यह भी है कि जिस अतिक्रमण पर पहले कार्रवाई हुई, वह दोबारा कैसे खड़ा हो गया?

    अतिक्रमण हटेगा या फिर मामला ठंडा पड़ जाएगा?
    न्यू मार्केट व्यापारियों की ओर से लंबे समय से हॉकर्स और अतिक्रमण की समस्या उठाई जाती रही है। हादसे के बाद यह मुद्दा फिर केंद्र में है। समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

    अब सवाल यह है कि इस घोषणा के बाद कार्रवाई की समय सीमा क्या होगी? पहले दिए गए नोटिस और हटाए गए अतिक्रमण के बाद फिर से रेहड़ियां कैसे लग गईं? क्या पूरे बाजार का दोबारा सर्वे होगा और फायर एक्सेस के रास्ते स्थायी रूप से खाली रखे जाएंगे?

  • मुख्यमंत्री ने युवाओं से साझा किए अपने जीवन के संघर्ष और सफलता के अनुभव

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से साझा किए अपने जीवन के संघर्ष और सफलता के अनुभव

    युवा शक्ति ही करेगी विकसित और सशक्त भारत का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

    युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से साझा किए अपने जीवन के संघर्ष और सफलता के अनुभव

    विद्यार्थियों के सवालों के दिए सहज और रोचक जवाब, शिक्षा, रोजगार, जल संरक्षण और छत्तीसगढ़ के भविष्य पर खुलकर की चर्चा

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।

    अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य

    युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

    “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया”

    बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला।

    मुख्यमंत्री साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला।

    समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य

    छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए।

    “जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

    कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और यह आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘जल संचय-जनभागीदारी’ अभियान चलाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री साय ने कोरिया जिले में लागू 5 प्रतिशत मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया है। राजनांदगांव में सोक पिट निर्माण की दिशा में अच्छा काम हो रहा है।उन्होंने युवाओं से वर्षा जल संचयन को अपने घर, स्कूल और समाज में प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

    वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

    छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के कक्षा ग्यारहवीं के छात्र मितांश सिंह ने प्रदेश के आर्थिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है और इन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर प्रदेश की आय बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

    शिक्षा को संस्कार और रोजगार से जोड़ रही नई शिक्षा नीति

    छात्रा सानिया परवीन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित हैं। इन संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और अधोसंरचना को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएमयोजना में छत्तीसगढ़ के 341 स्कूल शामिल हैं। योजना के तहत इन विद्यालयों में अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखते हुए उसे संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों और युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे।

    युवाओं के साथ सुने भक्ति गीत, प्रतिभाओं का किया सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं के साथ ‘भजन क्लबिंग’ के अंतर्गत आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत भक्ति गीतों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

    इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ में बाढ़ पीड़ितों को राहत, लगातार बांटे जा रहे भोजन के पैकेट

    योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ में बाढ़ पीड़ितों को राहत, लगातार बांटे जा रहे भोजन के पैकेट

    योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी

    बाढ़ प्रभावितों तक लगातार पहुंचाए जा रहे भोजन के पैकेट, जरूरतमंदों को दोनों समय मिल रहा भोजन

    महापौर सुषमा खर्कवाल ने नाव से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नागरिकों से किया संवाद, जानीं समस्याएं

    बाढ़ पीड़ितों को भोजन, पेयजल और दवाएं उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

    एलडीए ने 26 पंपिंग सेट से तेज की जल निकासी

    एलडीए ने राहत कार्यों के लिए मैनपावर बढ़ाया, अधिकारी तीन शिफ्ट में कर रहे 24×7 निगरानी

    लखनऊ
     बाढ़ प्रभावित नागरिकों को राहत और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन, नगर निगम, एलडीए, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। इसी क्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया।

    महापौर सुषमा खर्कवाल ने जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसके अलावा जोन-6 के हयात नगर, सेहठा गांव और गुल्मी खेड़ा में नाव के माध्यम से पहुंचकर प्रभावित नागरिकों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं जरूरतों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट, पेयजल और आवश्यक दवाएं वितरित की। साथ ही अधिकारियों को राहत सामग्री की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    दाऊद नगर, मामा कॉलोनी और लोहरामऊ में 800 भोजन के पैकेट वितरित

    नगर निगम प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंद नागरिकों तक भोजन के पैकेट पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दाऊद नगर, मामा कॉलोनी और लोहरामऊ में लगभग 800 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रभावित बस्तियों एवं गलियों में दिन के दोनों पहरों में 1450 से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गए। प्रथम पहर में गृह निर्माण संस्था क्षेत्र में करीब 250 पैकेट, दौलत खेड़ा एवं मुन्नू खेड़ा में 180, हयात नगर एवं लक्ष्मी हॉस्पिटल वाली गली में 150, तांड खेड़ा में 185, बरावन कला एवं एमसी सक्सेना के पीछे वाली गली में करीब 50 तथा हयात नगर के अन्य हिस्सों में 80 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। वहीं, दूसरे पहर में करीब 650 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। आवश्यकता और मांग के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में दिन में दो समय भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    हेल्थ कैंप में व्यवस्थाओं की जांच

    निरीक्षण के दौरान महापौर ने प्रभावित क्षेत्र में स्थापित हेल्थ कैंप का भी निरीक्षण कर दवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य टीम से फीडबैक लेते हुए निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित नागरिकों को समय पर उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थापित कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से नागरिकों की ओर से प्राप्त सूचनाओं और राहत कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन के पैकेट तीनों समय नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाएं।

    एलडीए ने 26 पंपिंग सेट लगाए

    वहीं गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से इकाना स्टेडियम, प्लासियो मॉल और आसपास के क्षेत्रों में हुए जलभराव से निपटने के लिए एलडीए ने राहत अभियान तेज कर दिया है। जिस स्थान से गोमती का पानी योजना क्षेत्र में प्रवेश कर रहा था, वहां बोल्डर और मिट्टी डालकर मजबूत अस्थायी अवरोध बनाया गया है। जल निकासी के लिए 26 पंपिंग सेट लगाए गए हैं, जिससे गुरुवार शाम पांच बजे तक जलभराव की स्थिति में काफी सुधार दर्ज किया गया।

    लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और सचिव सुशील प्रताप सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद अलग-अलग पॉकेट में मैनपावर में डेढ़ गुना वृद्धि की गई है। निगरानी और आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए एलडीए के अधिकारी, अभियंता और कर्मचारी तीन शिफ्ट में 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सीजी सिटी अर्बन वेटलैंड और नौसेना शौर्य वाटिका को अग्रिम आदेशों तक आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया है।

  • मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलें, साफ-सफाई और जलभराव की समस्या न हो: मुख्यमंत्री

    मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलें, साफ-सफाई और जलभराव की समस्या न हो: मुख्यमंत्री

    औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा कराएं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    हर पात्र परिवार को योजनाओं का लाभ मिले, केवल चिन्हांकन तक सीमित न रहे जीरो पावर्टी अभियान: मुख्यमंत्री

    मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलें, साफ-सफाई और जलभराव की समस्या न हो: मुख्यमंत्री

    अतिवृष्टि के बाद जहां बिजली आपूर्ति बाधित है, उसे शीघ्र बहाल करें, 24×7 सक्रिय रहे टोल फ्री नंबर: मुख्यमंत्री

    कामकाजी महिला छात्रावासों के निर्माण में तेजी के निर्देश, संचालन के लिए बनेगी नीति

    स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की 8वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने की प्रदेश में संचालित परियोजनाओं की समीक्षा

    लखनऊ,
      मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को 'सीएम-समीक्षा' की 8वीं उच्चस्तरीय बैठक में विकास परियोजनाओं, औद्योगिक निवेश, ऊर्जा, कौशल विकास, श्रमिक कल्याण और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चल रही बड़ी परियोजनाओं को केवल प्रक्रियाओं तक सीमित न रखा जाए, उन्हें समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी हों या फील्ड में तैनात अधिकारी, औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा कराएं। भूमि अधिग्रहण, स्वीकृति, निविदा और अंतरविभागीय समन्वय से जुड़ी बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए।

    एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की समीक्षा में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए चार निविदाएं प्राप्त हो चुकी हैं और अक्टूबर में निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फर्रुखाबाद, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक, झांसी और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80 से 91 प्रतिशत तक भूमि उपलब्ध हो चुकी है। मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य-पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे के लिए सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए शेष भूमि संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    बैठक में ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की भी समीक्षा हुई। यहां 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक परियोजनाओं में आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। महिला श्रम सहभागिता बढ़ाने के लिए कामकाजी महिला छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इनके निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों के निर्माण के साथ उनके प्रभावी संचालन के लिए भी अच्छी और उपयोगी नीति तैयार की जाए।

    जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा में बताया गया कि चिन्हित 12.50 लाख परिवारों में से करीब 9 लाख आवास के पात्र पाए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 30,725 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। अभियान के तहत पात्र परिवारों को श्रमिक पंजीकरण, आयुष्मान कार्ड, अंत्योदय कार्ड, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान में केवल पात्र परिवारों का चिन्हांकन पर्याप्त नहीं है, प्रत्येक पात्र परिवार को संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडियों में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था हो, जलभराव की स्थिति न बने और किसानों को अपनी उपज के साथ किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंडी परिसरों की नियमित निगरानी और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

    हाल के दिनों में कई क्षेत्रों में हुई अतिवृष्टि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बिजली आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित है, उसे शीघ्र बहाल किया जाए। उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 24×7 सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक उपभोक्ता को सही और समय पर बिजली बिल उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाए। बिजली चोरी और लाइन लॉस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फीडरवार ऑडिट कर वास्तविक स्थिति सामने लाने के निर्देश दिए गए।

    अग्नि सुरक्षा की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और होटलों में वैध फायर एनओसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनओसी की अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कराने और अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

    लोक निर्माण विभाग की ₹50 करोड़ से अधिक लागत वाली 279 परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुबंध के अनुसार सभी कार्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की प्रगति की समीक्षा में बताया गया कि ₹454 करोड़ से 11,350 ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इनमें शत-प्रतिशत एनबीटी पुस्तकें और 96 प्रतिशत फर्नीचर पहुंच चुका है तथा 99 प्रतिशत लाइब्रेरी में पठन-पाठन शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष हार्डवेयर आपूर्ति में तेजी लाने और रियल टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित निगरानी के निर्देश दिए।