योगी सरकार अब आंगनबाड़ी कर्मियों को हर साल देगी तीन साड़ियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी
3.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिलेगा लाभ
अब दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी, अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार
प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से 19.02 करोड़ रुपये होंगे खर्च
लखनऊ
योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अभी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को साल में दो साड़ियां मिलती हैं। नई व्यवस्था से प्रदेश की 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। इस पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनके लिए 1,90,145 कार्यकत्रियों और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। सभी स्वीकृत पदों के आधार पर कुल 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक-एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार
वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी वाली योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तीसरी साड़ी राज्य सरकार अपने खर्च पर देगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।
नियमित इस्तेमाल और धुलाई की परेशानी होगी दूर
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना होता है। नियमित इस्तेमाल, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक गंदा या खराब होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया गया है।
प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के संचालन में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की अहम भूमिका है।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, सालाना 3 साड़ियां देने की तैयारी
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आगर में लगेगा ₹3,800 करोड़ का फूड प्लांट, CM मोहन यादव ने किया रोजगार बढ़ाने का ऐलान
आगर में 3800 करोड़ की मैक्केन फूड परियोजना होगी शुरू : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
2 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
पशुपालन, किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन है
मुख्यमंत्री ने आगर के बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से किया वर्चुअली संवादभोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियों कॉन्फ्रेसिंग से आगर में शुक्रवार को आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कृषक कल्याण वर्ष के तहत् आयोजित कार्यक्रमों में किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि के क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्यकताओं के संबंध में संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर में 3800 करोड़ की मैक्केन फूड परियोजना शुरू हो रही है, इसमें 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर-मालवा जिले के लालूखेड़ी में आलू प्रसंस्करण का 200 करोड़ का उद्योग स्थापित हो रहा है, लालूखेड़ी के साथ ही अब आगर-मालवा जिले के किसान भी आलू उगाऐंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर एवं सुसनेर का संतरा देश भर में भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के पशुपालक गौपालन के लिये भी विशेष रूप से जाने जाते है। जैविक दूध प्रदेश में कही मिलता है तो आगर में ही मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का दूध उत्पादन भी बढ़ेगा, सांची का दुग्ध ब्राण्ड भी बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगर जिला सौर उर्जा एवं विण्ड एनर्जी के लिये भी अपनी अलग पहचान रखता है। प्रदेश में पर्याप्त बिजली, सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध है और पांच लाख किलोमीटर की सड़कों का जाल भी है। उन्होंने ने कहा कि वर्ष 2027 तक गेहूं 2700 से के भाव में खरीदेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर जिला गौ-सेवा के लिये भी विशेष पहचान रखता है। गौ-अभयारण्य सालरिया एवं जिले की अन्य गौशालाओं में 20 हजार से अधिक गौवंश की समुचित देखभाल की जा रही है। सरकार प्रति गौवंश 40 रूपए प्रतिदिन की दर से गौवंश की देखभाल के लिये गौशालाओं को राशि प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन को बढ़ावा देने के लिये गौपालन पुरस्कार योजना के तहत् अच्छे पशुपालकों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। जिसमें प्रत्येक विकास खण्ड से प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले पशुपालक को एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार के लिये 50 हजार एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रूपए की राशि पशुपालक को प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिनायगा बड़ौद के प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसान राधेश्याम परिहार, आखाखेड़ी तनोडिया के प्राकृतिक अरहर खेती करने वाले किसान रोहित शर्मा एवं अन्य उपस्थित प्रगतिशील कृषकों से वर्चुअली संवाद कर उनके द्वारा की जा रही प्राकृतिक, जैविक एवं उन्नत कृषि के बारे में जानकारी ली तथा इससे होने वाले लाभ के बारे में भी चर्चा की।
सांसद रोड़मल नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेती को उद्यम बनाकर किसानों के लिये लाभ का धन्धा बना दिया है। आज उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी किसान पुत्र कृषि की ओर आकर्षित हो रहे है। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव और विधायक मधु गेहलोत ने भी संबोधित किया।
प्रगतिशील किसानों, मेधावी विद्यार्थियों और भूतपूर्व सैनिकों का किया सम्मान
कार्यक्रम मे उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील किसानों, किसान परिवार के मेधावी छात्र-छात्राओं और भूतपूर्व सैनिकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को कपिल यारदे, कप्तान सिंह यादव ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग एवं आधुनिक कृषि यंत्रों सहित अन्य विभागों की प्रदर्शनियों लगायी गई।
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टीसीएस, अडानी समूह और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण
युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की बड़ी पहल, चार संस्थाओं के साथ एमओयू
टीसीएस, अडानी समूह और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण
आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर विशेष जोर
पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से कराया गया थर्ड पार्टी मूल्यांकन
रायपुर,
छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल शैक्षणिक योग्यता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल से सशक्त बनाना है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू), तकनीकी शिक्षा में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।चार संस्थाओं के साथ एमओयू से युवाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण
दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला 2026 के समापन अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पहल की गई। इन समझौतों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सुविधा होगी।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सहयोग से इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और उद्योगों में उपयोग होने वाले व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त होगी।
इसी प्रकार अडानी समूह के सहयोग से आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और रोजगार क्षमता में वृद्धि के लिए नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सॉफ्ट स्किल, अंग्रेजी संवाद कौशल, साक्षात्कार की तैयारी एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पिछले वर्ष इस संस्था के माध्यम से छह हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया था। इस वर्ष भी आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं कौशल विकास से जुड़े विद्यार्थियों को लगभग 48 से 50 घंटे का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त जंगल सफारी में विभिन्न ट्रेडों से संबंधित कौशल प्रशिक्षण के लिए भी संस्थाओं के साथ एमओयू की पहल की जा रही है। इससे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।
पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने विशेष पहल
प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। इस मूल्यांकन में संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया है। मूल्यांकन की रिपोर्ट का रोजगार मेला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री साय, मंत्री तकनीकी शिक्षा साहेब, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने विमोचन किया। इसमें संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा।
आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे आधुनिक तकनीक आधारित रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम
राज्य सरकार ने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में पुराने एवं अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीक से संबंधित पाठ्यक्रमों को शामिल किया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की जानकारी और व्यावहारिक दक्षता प्राप्त होगी। इससे वे बदलते औद्योगिक परिवेश में रोजगार की नई संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
डिजिटल रोजगार पोर्टल को स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की तैयारी
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा डिजिटल रोजगार पोर्टल को भविष्य में स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस पोर्टल पर उद्योगों की आवश्यकताओं, विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों और रोजगार के इच्छुक युवाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है।
छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
इस व्यवस्था के माध्यम से युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वहीं उद्योग एवं नियोजक संस्थाएं अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का चयन कर सकेंगी। इससे रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगी। राज्य सरकार की इस पहल से प्रदेश में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, आधुनिक पाठ्यक्रम, डिजिटल रोजगार सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
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UP में पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी की राह आसान, पुलिस समेत 4 विभागों में 20% कोटा
पूर्व अग्निवीर युवाओं के लिए योगी सरकार ने आसान की सरकारी नौकरी की राह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भर्ती नियमावली में संशोधन को मंजूरी
पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण
अधिकतम आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 28 वर्ष की गई, युवाओं को मिलेगी तीन वर्ष की छूट
लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट, केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा
लखनऊ
सेना में देश की सेवा कर चुके पूर्व अग्निवीर युवाओं के लिए योगी सरकार ने सरकारी नौकरी की राह और आसान कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों की भर्ती संबंधी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सरकार ने अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने के साथ ही लिखित और शारीरिक परीक्षा से भी छूट देने का निर्णय लिया है। पूर्व अग्निवीरों को केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। इस व्यवस्था से सैन्य सेवा पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
कैबिनेट बैठक के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि वर्ष 2022 में अग्निवीर योजना के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन किया है।
चार विभागों की भर्तियों में 20 प्रतिशत आरक्षण
प्रदेश के पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी के अनुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा। इससे सैन्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं को प्रदेश की सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के बेहतर अवसर मिलेंगे।
28 वर्ष तक की आयु में कर सकेंगे आवेदन
पूर्व अग्निवीरों के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़ाकर 28 वर्ष कर दी गई है। तीन वर्ष की इस छूट से सैन्य सेवा के बाद सरकारी नौकरी के इच्छुक युवाओं को आवेदन के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा
पूर्व अग्निवीरों को इन विभागों में भर्ती के लिए लिखित और शारीरिक परीक्षा नहीं देनी होगी। उन्हें केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में यह महत्वपूर्ण रियायत होगी।
सैन्य सेवा के बाद प्रदेश की सेवा का अवसर
अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए सेवा अवधि पूरी होने के बाद रोजगार एक महत्वपूर्ण विषय है। योगी सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन कर ऐसे युवाओं के लिए प्रदेश की सरकारी सेवाओं में आगे बढ़ने की व्यवस्था को और सुगम बनाया है। इससे सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन का अनुभव रखने वाले युवाओं को देश की सेवा के बाद उत्तर प्रदेश में भी अपनी सेवाएं देने का अवसर मिलेगा। -

उच्च शिक्षा में बदलाव की तैयारी, शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंत्री टंक राम वर्मा का जोर
कागजों से निकलकर ज़मीनी स्तर पर दिखे शिक्षा नीति: उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को धरातल पर उतारने छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी पहल
विश्वविद्यालयों में बनेंगे 'NEP सेल', संभाग व जिला स्तर पर होंगी कार्यशालाएं
रायपुर,
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सुचारू, सुदृढ़ और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शासन स्तर पर प्रशासनिक एवं अकादमिक कसरत तेज हो गई है। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में NEP-2020 को बिना किसी व्यावहारिक बाधा के लागू करने और पिछले दो वर्षों के अनुभवों के आधार पर आई चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, श्रीमती रीता यादव, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के स्तर को उन्नत करने, विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने तथा नई शिक्षा नीति को राज्य में पूरी सुदृढ़ता के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लाभ तभी संभव है जब यह केवल कागजी निर्देशों, बैठकों और प्रशासनिक फाइलों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' और मुख्यमंत्री के 'विकसित छत्तीसगढ़' के संकल्प को साकार करने में इस नई शिक्षा नीति की अत्यंत निर्णायक भूमिका होगी।
मंत्री वर्मा ने कहा कि NEP-2020 का मूल ध्येय केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विद्यार्थियों को सीधे जोड़ने और उद्योग- अकादमिक समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया।
व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान: संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण
पिछले दो वर्षों में NEP-2020 के क्रियान्वयन के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों, क्रेडिट सिस्टम एवं विषय चयन से जुड़े भ्रम पर गहराई से मंथन किया गया। इस भ्रम और कठिनाइयों को दूर करने के लिए मंत्री वर्मा ने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
विशेष कार्यशालाओं का आयोजन
नई शिक्षा नीति की बारीकियों और प्रावधानों से प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को पूरी तरह अवगत कराने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र के हर सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश मंत्री वर्मा ने दिए।
संभाग एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षण
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने प्राध्यापकों और छात्रों के बीच समझ का दायरा बेहतर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालयों से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने नोडल अधिकारी और ब्रांड एंबेसडर होंगे नियुक्त
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, जमीनी निगरानी और त्वरित सूचना प्रसार को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नया ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी तथा दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी और एंबेसडर शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित कर जागरूकता फैलाने और मॉनिटरिंग का काम करेंगे। विद्यार्थियों को नीति से संबंधित आ रही शंकाओं, विषय चयन की समस्याओं और अन्य प्रशासनिक प्रश्नों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित 'NEP सेल' का गठन करने के निर्देश भी दिए।
पाठ्यक्रम में सरलता, भारतीय ज्ञान परंपरा और अनिवार्य इंटर्नशिप पर जोर
विद्यार्थियों के अध्ययन और परीक्षा की प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुधारों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनरल इलेक्टिव (GE) विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाया जाएगा, ताकि विषय चयन और परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा या मानसिक दबाव न झेलना पड़े।पाठ्यक्रमों में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत यानी 'भारतीय ज्ञान परंपरा' को प्रमुखता और अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री वर्मा ने छठे सेमेस्टर में लागू अनिवार्य इंटर्नशिप व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए अभी से प्रारंभिक तैयारियां शुरू करने तथा विभिन्न उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।
निजी विश्वविद्यालयों की मॉनिटरिंग और बीएड पाठ्यक्रमों के संचालन में तेजी
शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता लाने के लिए राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति और नई शिक्षा नीति के सही क्रियान्वयन की निगरानी के लिए अपर संचालक तथा कुलपतियों के समन्वय से एक विशेष निगरानी समिति बनाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने प्रदेश में बीएड कॉलेजों के त्वरित और सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन पात्र विश्वविद्यालयों और 'बी++' ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों से बीएड संचालन के आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन पर बिना किसी विलंब के शीघ्र कार्रवाई की जाए, इससे समय पर बीएड पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे और राज्य को भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बैठक के अंत में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सकारात्मक सुझावों पर तत्काल अमल करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी हितधारकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा ताकि छत्तीसगढ़ पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन सके।
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छत्तीसगढ़ में 26वीं राज्य स्तरीय जूडो चैंपियनशिप शुरू, सब-जूनियर और कैडेट खिलाड़ी दिखाएंगे दम
जूडो सिखाता है साहस, आत्मसंयम और अनुशासन का पाठ: राज्यपाल रमेन डेका
राज्यपाल ने किया 26वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं कैडेट जूडो चौम्पियनशिप का शुभारंभ
रायपुर,
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि जूडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि साहस, आत्मसंयम, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त माध्यम है। यह विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन के साथ चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। विशेषकर बालिकाओं के लिए जूडो आत्मरक्षा और मानसिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है। राज्यपाल डेका आज सरकंडा स्थित खेल परिसर में 26वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं कैडेट जूडो चौम्पियनशिप-2026 का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बालक-बालिका खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के तत्वाधान में बिलासपुर जूडो संघ द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में राज्य भर के 16 जिलो से 240 खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक भाग ले रहे है।सीखकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान
राज्यपाल डेका ने कहा कि खेल हमें प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना, जीत में विनम्र रहना और हार से सीखकर आगे बढ़ना सिखाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज राज्य स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं सहित एशियाई खेलों और ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।
खिलाड़ियों की उपलब्धियां अन्य युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत
राज्यपाल ने कोंडागांव जिले की जूडो खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि योगिता मंडावी को उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हेमवती नाग ने खेलो इंडिया नेशनल गेम्स और ओपन नेशनल प्रतियोगिता में पदक हासिल किए हैं। वहीं रंजीता कोरेटी ने ताइवान में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां अन्य युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
जूडो में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया
समारोह में राज्यपाल डेका ने जूडो में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले हेमवती नाग, अभिषेक जायसवाल, कुमारी शारदा गोस्वामी और योगिता मंडावी को सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास निरंतर जारी रखने की अपेक्षा की
राज्यपाल डेका ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों की खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास निरंतर जारी रखने की अपेक्षा की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को खेल भावना और अनुशासन के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी, महासचिव शम्भू सोनी, बिलासपुर जिला जूडो संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शुक्ला, सहित खेल संघ के पदाधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे।
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ज्वार (मालदांडी) का 4073 व ज्वार (हाईब्रिड) का 4023 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित
31 दिसंबर तक होगी मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद
33 जनपदों में बाजरा, 25 जनपदों में मक्का और 11 जनपदों में होगी ज्वार की खरीद
बाजरा का 2.20 लाख, ज्वार 50 हजार और 15 हजार मीट्रिक टन मक्का क्रय का लक्ष्य प्रस्तावित
ज्वार (मालदांडी) का 4073 व ज्वार (हाईब्रिड) का 4023 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित
बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये, मक्का का 2410 रुपये प्रति कुंतल तय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्देश- 48 घंटे के भीतर किसानों को किया जाए भुगतान
लखनऊ,
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत 'श्रीअन्न' (मोटे अनाज) की खरीद 31 दिसंबर तक चलेगी। खाद्य व रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय के मुताबिक 'मोटे अनाज' में शामिल ज्वार (मालदांडी) का 4073, ज्वार (हाईब्रिड) का 4023 रुपये, बाजरा का 2900 और मक्का का 2410 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।किसानों को 48 घंटे में भुगतान का निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 48 घंटे में किसानों को भुगतान कराने का निर्देश दिया है। किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। किसान अपनी किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं। इसके अलावा वे जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी।मक्का खरीद के लिए 25 जनपद प्रस्तावित
मक्का खरीद 25 जनपदों में होगी। यह जनपद बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मीरजापुर, सोनभद्र एवं ललितपुर हैं।बाजरा खरीद वाले 33 जनपद निर्धारित
बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट एवं हमीरपुर (कुल 33 जनपदों) में की जायेगी।इन 13 जिलों में होगी ज्वार की खरीद
बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, कानपुर नगर-देहात, फतेहपुर, उन्नाव, हरदोई, मीरजापुर, जालौन, झांसी, फिरोजाबाद में ज्वार की खरीद होगी।कुल क्रय केंद्र
बाजरा- 300 क्रय केंद्र
ज्वार-80 क्रय केंद्र
मक्का- 75 क्रय केंद्रखरीद का लक्ष्य
बाजरा खरीद-2.20 लाख मीट्रिक टन
ज्वार खरीद-50 हजार मीट्रिक टन
मक्का खरीद- 15 हजार मीट्रिक टन। -

UP में योगी कैबिनेट के बड़े फैसले, किसानों को रिकॉर्ड भुगतान; जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने का ऐलान
लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लखनऊ के लोकभवन में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक हुई. यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई. कैबिनेट बैठक के बाद सीएम योगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर यूपी को पहचान दिलाई है. यूपी लगातार विकास की राह भर रहा है. 42 नए राजमार्ग बने हैं. आज कारोबारियों के लिए राह खुल गई है. वहीं, ऐलान किया कि अब जेवर एयरपोर्ट का नाम नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा।सीएम योगी ने कहा कि 7 अक्टूबर को देश के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है. सरकार के प्रमुख रूप में अनवरत चल रही समर्पित सेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने पर उत्तरप्रदेश का मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री मोदी का हार्दिक अभिनंदन करती है. उत्तर प्रदेश के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश की धरा से ही लोकप्रिय जनप्रतिनिधि और सांसद के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने सेवा ही समर्पण, और राष्ट्र प्रथम को अपना मूलमंत्र मानते हुए राष्ट्र निर्माण को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाया है. प्रधानमंत्री जी की 25 वर्ष की अनवरत यात्रा जनसेवा से जनकल्याण, जनभागीदारी से जनविश्वास की अनूठी मिसाल है।
काशी और मां गंगा से गहरा संबंध
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का और उत्तर प्रदेश का रिश्ता बेहद आत्मीय है. जब प्रधानमंत्री 2014 में काशी आये थे तो उन्होंने कहा था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है. काशी और मां गंगा से आरंभ हुआ आत्मीय संबंध समय के साथ निरंतर गहरा हुआ और आज राज्य के सर्वांगीण कायाकल्प का आधार बना है. केंद्र और राज्य के साझा संकल्प और टीम इंडिया भावना के साथ उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है. सर्वविदित है 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश प्रशासनिक अस्थिरता जनजन में असुरक्षा की भावना और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा था. प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शिता से प्रेरणा लेकर उत्तर प्रदेश ने गवर्नेंस की नई कार्य संस्कृति को अपनाया. परिणाम स्वरूप सुसाशन सुदृढ कानून व्यवस्था, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण उत्तर प्रदेश की पहचान बनकर उभरे हैं. उत्तर प्रदेश नए आत्मविश्वास के साथ नए आयाम स्थापित कर रहा है।60,000 करोड़ रुपये की लागत से बने राजमार्ग
सीएम ने कहा कि राज्य के विकास को निरंतर अपनी प्राथमिकताओं में रखा है. प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच से आज उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का नया मॉडल बनकर उभरा है. प्रदेश में करीब 60,000 करोड़ रुपये की लागत से 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है. इसी दौरान दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेस में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण भी पूरा हुआ है।रेल, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित देश की पहली उच्च गति वाली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत ट्रेन आरआरटीएस का सफल संचालन शुरू हुआ है. इसके साथ ही लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में मेट्रो रेल नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार भी हुआ है।
देश का पहला फ्रेट विलेज बना
उन्होंने कहा कि नोएडा, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रदेश अब एयर कनेक्टिविटी की एक नई ऊंचाइयों को छू रहा है. पीएम के प्रयासों से लॉजिस्टिक और आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख केंद्र के रूप में उत्तर प्रदेश की पहचान स्थापित हुई है. दादरी में ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख जंक्शन स्थापित हुआ है, जिसका 1050 किलोमीटर से अधिक हिस्सा प्रदेश से गुजरता है. वाराणसी में राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर 1 पर भारत का पहला मल्टीमॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और 100 एकड़ में फैला देश का पहला फ्रेट विलेज विकसित हुआ है।उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सबका साथ सबका विकास का मूल मंत्र जमीनी धरातल पर पूरी प्रमाणिकता के साथ साकार किया है. प्रदेश के गरीब, वंचित, पिछड़ा, युवा, किसान सहित सर्व समाज के उत्थान के लिए पवित्र और परिणामोन्मुखी प्रयास सरकार द्वारा के द्वारा किए गए हैं. प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को बल मिला है. पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक आयोग का दर्जा प्राप्त हुआ है. वहीं आर्थिक रूप से कमजोर ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय भी इसी नेतृत्व द्वारा लिया गया है।
किसानों के खाते में गए 1 लाख करोड़
किसानों के कल्याण हेतु पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में अब तक 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधा हस्तांतरित हुई है. 5 करोड़ 50 लाख किसान क्रेडिट कार्ड से 13 लाख 42 हजार 978 करोड़ रुपए का फसल ऋण वितरण हुआ है. 79 लाख 51 हजार किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का भुगतान तथा गन्ना किसानों को 3 लाख 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है।जन कल्याणकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन से 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास, 3 करोड़ 67 लाख राशन कार्ड धारक परिवारों के लगभग 15 करोड़ नागरिकों को पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न प्रदान किया जा रहा है. जल जीवन मिशन के अंतर्गत 2 करोड़ 46 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल के कनेक्शन दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में दिया ये लाभ
स्वस्थ उत्तर प्रदेश के संकल्प के साथ हर नागरिक को सुलभ स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना माननीय प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में 6 करोड़ 8 हजार आयुष्मान कार्ड जारी कर 9 करोड़ 90 लाख से अधिक नागरिकों को सुरक्षा कवच मिला है. इसमें 1 करोड़ 9 लाख 52 हजार गंभीर रोगियों को 18 हजार 798 करोड़ रुपये का मुफ़्त इलाज भी प्रदान किया गया है. आरोग्य मेलों में 14 करोड़ 67 लाख नागरिकों को उपचार हुआ है. गोरखपुर और रायबरेली में दो एम्स भी संचालित हो चुके हैं।स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 3 करोड़ 37 लाख से अधिक शौचालयों और 59,183 सामुदायिक शौचालयों का भी निर्माण किया गया है. महिलाओं के सम्मान, उनके स्वावलंबन से लेकर श्रमयोगियों के कल्याण तक हर वर्ग का विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई है. महिला नेतृत्व वाले विकास के संकल्प के तहत लखपति दीदी योजना के माध्यम से 10 लाख स्वयं सहायता समूहों की 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई है।
रेहड़ी पटरी विक्रेताओं को वित्तीय सहायता तथा पीएम स्वामित्व योजना के तहत 91,000 से अधिक गांवों के 1 करोड़ 10 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को घरौनी संपत्ति प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति को काशी की गुलाबी मीनाकारी, जापान के प्रधानमंत्री को निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति को कन्नौज का इत्र तथा लखनऊ की जरी जरदोजी उपहार स्वरूप भेंट कर माननीय प्रधानमंत्री जी ने राज्य के हस्तशिल्पियों और श्रम साधकों का मान बढ़ाया है।
नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में डबल इंजन सरकार के निरंतर प्रयासों से आज प्रदेश के युवाओं की आकांक्षाओं को एक नया बल मिला है. स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 62 लाख से अधिक युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट प्रदान कर उन्हें डिजिटल क्रांति से जोड़ा गया है. श्री काशी विश्वनाथ धाम की और भगवान बुद्ध की पवित्र पिपरहवा अवशेषों की 127 वर्षों बाद भारत वापसी संभव हो पाई. प्रयागराज महाकुंभ में रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जिसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिला है।
एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत काशी तमिल संगमम्, भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर अभिधम्म दिवस, बौद्ध सर्किट का विकास, सीर गोवर्धन में संत गुरु रविदास जन्मस्थली विकास परियोजना नया संग्रहालय व प्रतिमा अनावरण गोरखपुर में चौरीचौरा शताब्दी समारोह तथा लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में राष्ट्र प्रेरणा स्थल की स्थापना ने उत्तर प्रदेश के गौरव को अभूतपूर्व विस्तार दिया है।
जेवर एयरपोर्ट का बदला नाम
उत्तर प्रदेश को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर की सौगात दी. जो उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट एवं भविष्य में देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने जा रहा है. मंत्रिपरिषद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम, नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा जेवर रखने का प्रस्ताव भी पास करती है। -

रायपुर में महिला T20 क्रिकेट का रोमांच, 16 से 20 अक्टूबर तक भारत-जिम्बाब्वे के बीच होंगे मुकाबले
रायपुर.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में क्रिकेट प्रेमियों को अंतरराष्ट्रीय महिला T20 क्रिकेट का रोमांच देखने का मौका मिलने जा रहा है।
नया रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 16, 18 और 20 अक्टूबर को भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच मुकाबले खेले जाएंगे। तीनों मैच शाम 7 बजे से शुरू होंगे। इन मैचों के लिए टिकटों की बिक्री 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे से शुरू होगी।
250 रुपए में देख सकेंगे मैच
मैच देखने के लिए दर्शकों को अलग-अलग श्रेणियों में टिकट उपलब्ध होंगे। लोअर स्टैंड के स्टैंड नंबर 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 के टिकट की कीमत 250 रुपए रखी गई है। वहीं, तीनों मैच देखने के इच्छुक दर्शकों के लिए 499 रुपए का सीरीज टिकट उपलब्ध होगा। इसके अलावा दो टिकटों के कॉम्बो की कीमत 350 रुपए बताई गई है।प्लैटिनम से कॉर्पोरेट तक, जानिए टिकटों की कीमत
आयोजकों की ओर से टिकटों की अलग-अलग श्रेणियां और उनकी कीमतें निर्धारित की गई हैं।- लोअर स्टैंड: 250 रुपए
- दो टिकटों का कॉम्बो: 350 रुपए
- तीनों मैचों का सीरीज टिकट: 499 रुपए
- सिल्वर: 2,000 रुपए
- गोल्ड: 2,500 रुपए
- प्लैटिनम: 3,500 रुपए
- सिंगल कॉर्पोरेट टिकट: 3,500 रुपए
- कॉर्पोरेट टिकट: 70,000 रुपए
पूरी तरह डिजिटल होगी टिकट व्यवस्था
दर्शकों को मैच देखने के लिए फिजिकल टिकट लेने की जरूरत नहीं होगी। टिकट पूरी तरह डिजिटल होंगे। टिकट के QR कोड को स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर स्कैन कराने के बाद दर्शकों को एंट्री मिलेगी। एक व्यक्ति एक आईडी से एक बार में अधिकतम छह टिकट बुक कर सकेगा। टिकटों की बिक्री 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे से शुरू होगी।ग्राउंड वाटर मामले में मिली क्लीयरेंस, स्टेडियम में लगा STP
स्टेडियम में मैचों के आयोजन को लेकर ग्राउंड वाटर के उपयोग से जुड़ा NGT प्रकरण भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मैच आयोजित करने के लिए न्यायालय से क्लीयरेंस मिल गई है। इसके साथ ही स्टेडियम में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किया गया है। ग्राउंड वाटर के उपयोग पर निगरानी रखने के लिए फ्लो मीटर भी लगाया गया है। इससे स्टेडियम में इस्तेमाल किए जा रहे पानी की मात्रा का पता लगाया जा सकेगा। -

भोपाल में गरबा आयोजन पर दो तरफ से विरोध, मुस्लिम धर्मगुरुओं की अपील और हिंदू संगठनों के रुख से बढ़ी चर्चा
भोपाल
नवरात्रि और गरबा का सीजन शुरू होने से पहले होते ही शहर का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। पिछले कुछ सालों से जहां हिंदू संगठन गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री का कड़ा विरोध करते रहे हैं, वहीं इस बार समीकरण एक नया मोड़ ले चुके हैं। अब हिंदू संगठनों के बाद खुद मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने भी मुस्लिम युवाओं के गरबा में शामिल होने पर पूरी पाबंदी का ऐलान कर दिया है।मुफ्ती ने जारी किया वीडियो
भोपाल के मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर हलचल मचा दी है। मुफ्ती नदवी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुस्लिम युवाओं का हिंदू रस्मों और गरबा में शिरकत करना सरासर 'हराम' है। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरी कौम की परंपराओं का अनुकरण करना समाज के लिए फितने (विवाद) का कारण बनता है, इसलिए युवाओं को अपने दोस्तों के साथ भी गरबा पंडालों में जाने से तौबा करनी चाहिए।मुस्लिमों से न जाने की अपील की
इसी कड़ी में ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी भी खुलकर सामने आ गई है। कमेटी ने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गरबा आयोजनों से पूरी तरह दूर रहें। अध्यक्ष शेख इस्माइल खान का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि आपसी विवादों से बचने और शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके लिए अब जिलों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।मध्य प्रदेश में पहले भी हुए हैं विवाद
मध्य प्रदेश में गरबा पंडाल हमेशा से सियासत का केंद्र रहे हैं। महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक और पहचान पत्र की जांच की कड़ी मांग उठा चुकी हैं। पिछले वर्षों में भी पहचान छिपाकर पंडालों में एंट्री को लेकर कई बड़े विवाद और हंगामे सामने आए थे।गौरतलब है कि अब स्थिति यह बन गई है कि एक तरफ हिंदू संगठन पंडालों के दरवाजे बंद करने पर अड़े हैं तो दूसरी तरफ मुस्लिम उलेमाओं ने भी अपने समाज के युवाओं के लिए पाबंदी का दायरा खींच दिया है। इस दोतरफा माहौल के बीच भोपाल का इस बार का गरबा सीजन तीखी बयानबाजी और गर्माहट के साथ सुर्खियों में आ गया है।