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  • Cancer Medicine Price: कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का शिकंजा, मुनाफे की सीमा 30% तय करने की तैयारी

    Cancer Medicine Price: कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का शिकंजा, मुनाफे की सीमा 30% तय करने की तैयारी

    नई दिल्ली
    कैंसर का इलाज सिर्फ मरीज की सेहत की परीक्षा नहीं लेता. कई बार यह पूरे परिवार की जमा-पूंजी भी खत्म कर देता है. अस्पताल के चक्कर और जांच के खर्च के बीच महंगी दवाएं खरीदना भी बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से कैंसर की दवाओं की कीमत घटाने की दिशा में उठाया गया कदम लाखों मरीजों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है. सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. अनुमान है कि इससे कई दवाओं की कीमत 20 से 70 प्रतिशत तक घट सकती है. सरकार के मुताबिक मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। 

    हालांकि, अभी सभी कैंसर दवाओं की कीमतें एक साथ कम नहीं होंगी. यह फैसला सिर्फ उन कैंसर दवाओं पर लागू होगा, जिन्हें सरकार तय की जाने वाली अंतिम सूची में शामिल करेगी. ये ऐसी दवाएं हैं जिनकी कीमतों पर फिलहाल सरकार की ओर से तय सीमा लागू नहीं है. विशेषज्ञों की एक समिति तय करेगी कि किन दवाओं को इस नियम के दायरे में लाया जाए. इसके बाद NPPA अधिसूचना जारी करेगा और कीमतों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी. इस नियम में ब्रांडेड और जेनेरिक के साथ देश में बनी और विदेश से मंगाई जाने वाली दवाएं भी शामिल हो सकती हैं. सरकार का मकसद कैंसर के इलाज का खर्च कम करना और दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना है। 

    कैंसर की दवाओं पर कितना घट सकता है खर्च?
    NPPA के अनुमान के मुताबिक इस फैसले से दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP में 20 से 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. हालांकि हर दवा की कीमत में एक जैसी कटौती नहीं होगी. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि फिलहाल उसकी कीमत में निर्माता से लेकर थोक और खुदरा विक्रेता तक कितना मार्जिन जुड़ता है. सरकार ने मरीजों के लिए सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की संभावित बचत का अनुमान लगाया है. कैंसर दवाओं का भारतीय बाजार करीब 12,500 करोड़ रुपए सालाना का बताया गया है. इसमें गैर-अनुसूचित दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। 

    क्या होता है व्यापारिक मार्जिन?
    जब कोई दवा निर्माता से निकलकर वितरक और दुकानदार के जरिए मरीज तक पहुंचती है तो बीच की कड़ियों पर भी कमाई का हिस्सा जुड़ता है. इसी अंतर को व्यापारिक मार्जिन कहा जाता है. NPPA की बैठक के विवरण के मुताबिक गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं में औसत व्यापारिक मार्जिन करीब 170 प्रतिशत तक पाया गया. कुछ मामलों में यह 700 प्रतिशत तक होने का अनुमान है. नई व्यवस्था का मकसद इसी तरह के ऊंचे मार्जिन पर लगाम लगाना है. प्रस्ताव के तहत व्यापारिक मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। 

    विशेषज्ञ समिति तय करेगी किन दवाओं पर लागू होगा फैसला
    दवा मूल्य नियामक ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है. अब विशेषज्ञ समिति उन कैंसर दवाओं की सूची तैयार करेगी जिन्हें नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. फार्मास्युटिकल विभाग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं यानी DGHS के तहत समिति गठित करने को कहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक समिति से 14 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट देने को कहा गया है. सूची को जरूरत के मुताबिक समय-समय पर अपडेट भी किया जा सकता है. अंतिम सूची और अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चलेगा कि कौन-सी दवा कितनी सस्ती होगी। 

    2019 में भी घटाई गई थीं कैंसर दवाओं की कीमतें
    सरकार ने इससे पहले 2019 में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की थी. उस समय 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित किया गया था. NPPA के मुताबिक इस कदम से 526 ब्रांड की कीमतों में कमी आई थी. कुछ ब्रांड की MRP में 91 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी. उस फैसले से सालाना करीब 984 करोड़ रुपए की बचत का अनुमान लगाया गया था. अब नए प्रस्ताव को उसी तरह की पहल का अगला कदम माना जा रहा है। 

    सुप्रीम कोर्ट भी उठा चुका है महंगी दवाओं का मुद्दा
    कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है. 22 सितंबर को अदालत ने आवश्यक कैंसर दवाओं की ज्यादा कीमतों पर कड़ी टिप्पणी की थी. 29 सितंबर की सुनवाई के दौरान एक दवा का उदाहरण भी सामने आया जिसकी खुदरा विक्रेताओं को आपूर्ति कीमत करीब 2,700 रुपए बताई गई जबकि उसकी MRP लगभग 27,000 रुपए थी. अदालत ने दवाओं पर खुदरा मार्जिन को लेकर सवाल उठाए थे. इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की गई है। 

  • 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे।

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी

    शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है।

    विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

    विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

     

  • सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

    सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम, 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

    रायपुर

      डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
     
    डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री  मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

    सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है।

    अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।

    रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार

    मुख्यमंत्री  साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है।

    डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।

     शर्मा ने कहा कि पुलिस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल खाते खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी की दर में भी वृद्धि हुई है।

    उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान जनभागीदारी और नवाचार से ही संभव है। इसी सोच के साथ ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने अनेक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं।

    सात विषयों के माध्यम से गांव-शहर तक पहुंची साइबर जागरूकता

    छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित साइबर जागृति अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

    अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों पर विशेष रूप से नागरिकों को जागरूक किया गया।

    विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों को पहचानने के तरीके बताए गए।

    अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर उनके माध्यम से परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।

    सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

    साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

    भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी कई पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच को और व्यापक बनाया।

    जिलों के नवाचारों ने साइबर जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ा

    अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनेक अभिनव प्रयोग किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई।

    दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर जिले में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

    जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के माध्यम से संचालित विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

    ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए भविष्य की यातायात व्यवस्था के समाधान

    ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के ओवरऑल विजेता  कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ की अवधारणा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।

    उन्होंने उपलब्ध सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारण तथा यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।

    हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित राजधानी के प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग तथा यातायात जाम कम करने से संबंधित समाधान प्रस्तुत किए।

    एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव

    युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी अभिनव सुझाव प्रस्तुत किए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी परिकल्पनाएं शामिल रहीं।

    ट्रैफिक हैकाथॉन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में परीक्षण कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

    विधायक  राजेश मूणत ने कहा कि राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना होगा। यातायात से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष  प्रह्लाद रजक, विधायक  राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर मती मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक  अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

  • जनकल्याणकारी योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने का माध्यम है मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान: राज्यमंत्री गौर

    जनकल्याणकारी योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाने का माध्यम है मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान: राज्यमंत्री गौर

    मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने का सशक्त माध्यम: राज्यमंत्री गौर

    गोविन्दपुरा विधानसभा में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान कार्यक्रम का हुआ आयोजन

    भोपाल 

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि 7 अगस्त से प्रारंभ हुआ मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उत्कृष्ट, संवेदनशील एवं दूरदर्शी सोच का परिणाम है। प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित होने वाले ये शिविर केवल गोविंदपुरा ही नहीं, अपितु पूरे प्रदेश में जन-कल्याण का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए संकल्पित है। यह अभियान एक आदर्श सरकार के सुशासन का सबसे बड़ा परिचायक है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर गोविंदपुरा विधानसभा में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं ।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि एम्स चिकित्सालय, ग्लोबल स्किल्स पार्क, सांदीपनी विद्यालय तथा भेल संस्थान क्षेत्र की प्रगति की संकेतक हैं। आगामी समय में अयोध्या बायपास में आकार लेने वाला 10 लेन मार्ग प्रदेश की विशिष्ट पहचान बनेगा, वहीं नगर निगम द्वारा सीवेज नेटवर्क का निर्माण कराया जा रहा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक नागरिक की समस्याओं का संवेदनशीलता से त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

    मास्टर प्लान में गोविंदपुरा के समग्र विकास के प्रावधान: कलेक्टर श्री मिश्रा

    कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का मूल उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर आमजन तक शासन की कल्याणकारी नीतियों का पारदर्शी लाभ पहुँचाना है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे शिविरों में अपने आवेदनों का पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि उनका त्वरित और व्यवस्थित निराकरण किया जा सके। कलेक्टर श्री मिश्र ने बताया कि हाल ही में जारी भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में गोविंदपुरा क्षेत्र में स्किल्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से संबंधित अनेक महत्वाकांक्षी विकास कार्यों के प्रस्ताव समाहित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा रेखांकित जन-समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।

    कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गौर एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राहियों श्रीमती गिरजा राय, श्री संजीव कुमार मालवीय, श्री अशोक परमार, श्री प्रवेश कन्हारे, सुश्री सीमा परमार तथा श्री केवल बारके को हितलाभ वितरित किए। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में नगर निगम आयुक्त श्रीमती संस्कृति जैन, एसडीएम श्रीमती निधि चौकसे, श्री प्रकाश चंद्र पांडे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • भारतीयों के अपमान पर भारत का सख्त रुख, अमेरिका को जवाब- ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं

    भारतीयों के अपमान पर भारत का सख्त रुख, अमेरिका को जवाब- ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं

    नई दिल्ली/वाशिंगटन 
     भारत ने H-1B वीजा हायरिंग पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की बात की कड़े शब्दों में आलोचना की है और उनके दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।विदेश मंत्रालय ने कहा, 'इससे भारतीयों के लिए मौके तो बनते ही हैं, साथ ही यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, प्रोडक्टिविटी, कॉम्पिटिटिवनेस और नौकरियां पैदा करने में भी मदद करता है, और अमेरिका में शेयरहोल्डर्स की संपत्ति भी बढ़ाता है।'जेडी वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले विदेशियों को बंधुआ मजदूर कहा था। वेंस ने अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को सबसे ज्यादा विदेशी बंधुआ मजदूर रखने वाली कंपनी भी बताया था।

    विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को जारी अपने बयान में कहा कि भारत अमेरिकी श्रम विभाग के उस फैसले से अवगत है, जो कुछ कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से संबंधित है। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होता है।

    भारत ने यह भी कहा किया कि अमेरिका का इतिहास ही विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और इनोवेशन से बना है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के योगदान को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की ओर से की गई टिप्पणियां अनुचित हैं और ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल गहरी आपत्ति पैदा करता है, जिसका संबंध दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से रहा है। भारत ने साफ किया कि वह इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

    अमेरिका ने क्या फैसला लिया है, जिससे भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ी?
    भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी पेशेवरों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर सख्ती कर रहा है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर को आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में कथित गड़बड़ियों और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच कर रहा है। हालांकि, सभी कंपनियों के खिलाफ आरोपों के विस्तृत सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस फैसले का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं। उनके मुताबिक, H-1B वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है।

    वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के साथ बड़ी संख्या में H-1B वीजा का इस्तेमाल किया। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को ‘इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ यानी बंधुआ सेवकों जैसी स्थिति में बताया। उनका तर्क था कि वीजा धारक अपनी नौकरी खोने पर अमेरिका में रहने का अधिकार भी गंवा सकते हैं, जिससे वे अपने नियोक्ता पर अधिक निर्भर हो जाते हैं। यही शब्दावली भारत की आपत्ति की वजह बनी है। भारत का कहना है कि विदेशी पेशेवरों के सामने मौजूद वीजा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन भारतीय प्रतिभाओं के योगदान को इस तरह की अपमानजनक शब्दावली से जोड़ना उचित नहीं है।

    ‘इंडेंचर्ड लेबर’ कहने पर भारत को आपत्ति क्यों?
    ‘इंडेंचर्ड लेबर’ का संबंध ऐसी श्रम व्यवस्था से है, जिसमें कोई व्यक्ति एक निश्चित अवधि तक काम करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट से बंधा होता है। ऐतिहासिक रूप से इस व्यवस्था का इस्तेमाल गुलामी दौर में भी हुआ था। भारत सहित कई देशों के लोगों को कॉन्ट्रैक्ट लेबर के रूप में दूसरे देशों में काम करने के लिए भेजा गया था। कई मामलों में उन्हें शोषण, कठिन परिस्थितियों और सीमित स्वतंत्रता का सामना करना पड़ा।

    H-1B वीजा धारकों की स्थिति ऐतिहासिक अनुबंधित मजदूरों के समान नहीं है। यह अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को रोजगार देने के लिए बनाया गया अस्थायी वर्क वीजा कार्यक्रम है। हालांकि, इस वीजा पर काम करने वाले व्यक्ति की नौकरी और इमिग्रेशन स्थिति के बीच महत्वपूर्ण संबंध होता है। वेंस की टिप्पणी में इसी निर्भरता को आधार बनाया गया है। लेकिन भारत की आपत्ति इस बात पर है कि इस समस्या को समझाने के लिए ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया, जिसका ऐतिहासिक संदर्भ बेहद संवेदनशील है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका का विकास भी उन प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और नवाचार से जुड़ा है, जो अलग-अलग पीढ़ियों में वहां पहुंचे। इसलिए भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणी को भारत ने अनुचित बताया और कहा कि दर्दनाक ऐतिहासिक तथा औपनिवेशिक विरासत से जुड़ी शब्दावली गहरी आपत्ति पैदा करती है।

    जेडी वेंस के बयान की भारत ने की आलोचना
    मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस की टिप्पणियों का भी खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा, 'उनकी बातें बेबुनियाद हैं और इस सच्चाई को नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में बहुत पढ़े-लिखे और कुशल योगदानकर्ता हैं।'

    मंत्रालय ने कहा, 'असल में, अमेरिका का इतिहास खुद कई पीढ़ियों के प्रवासियों से बना है, जिनकी मेहनत, उद्यम और इनोवेशन ने इसकी तरक्की और खुशहाली में योगदान दिया है। ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना, जो दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाती हो, बहुत अपमानजनक है।'

    विदेश मंत्रालय ने कहा, 'PERM, H-1B वीजा प्रोग्राम से अलग है, लेकिन भरोसा दिलाया कि इस प्रोग्राम के तहत एप्लीकेशन सस्पेंड होने से मौजूदा H-1B वीजा की वैलिडिटी या H-1B वीजा होल्डर्स और उनके आश्रितों (डिपेंडेंट्स) के स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।'

    अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों पर आधारित हालिया अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।

  • PERM के जरिए भारतीय IT कंपनियों पर शिकंजा? जानें ट्रंप प्रशासन क्यों कर रहा सख्ती

    PERM के जरिए भारतीय IT कंपनियों पर शिकंजा? जानें ट्रंप प्रशासन क्यों कर रहा सख्ती

    नई दिल्‍ली
     अमेरिका में बसने और अमेरिकन ड्रीम को पूरा करने का सपना संजोए बैठे हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को ट्रंप प्रशासन ने तगड़ा झटका दिया है. अमेरिकी सरकार ने आठ कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (Permanent Labor Certification-PERM) से सस्‍पेंड कर दिया है. जिन कंपनियों को इस प्रोग्रोम से सस्‍पेंड किया गया है, उनमें टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), एचसीएल टेक्‍नोलॉजी (HCL Technologies) , कॉग्जिनेंट (Cognizant), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), कैंपजैमिनी (Capgemini) और अडोब शामिल हैं. परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन क्‍या है, ट्रंप प्रशासन ने इसे क्‍यों सस्‍पेंड किया है और इस फैसले का भारतीय आईटी कंपनियों और कर्मचारियों पर क्‍या असर होगा, आइये जानते हैं। 

    अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) ने इन आठ कंपनियों को H-1B वर्कर वीजा सिस्टम के गलत इस्तेमाल और वीजा धोखाधड़ी के आरोप लगाकर परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन से सस्‍पेंड किया है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये कंपनियां विदेशी नागरिकों को नौकरी देने में प्राथमिकता देती हैं और अमेरिकी नागरिकों से रोजगार के अवसर छीन रही हैं. लेकिन, जानकारों का कुछ और ही कहना है. बहुत से लोग मानते हैं कि अमेरिका में अब ट्रंप की स्थिति अच्‍छी नहीं है. मिडटर्म चुनाव सिर पर हैं. उनके समर्थक उनसे नाराज हैं. इसलिए अब आईटी कंपनियों पर तलवार भांजकर सस्‍ती लोकप्रियता हासिल करने के फेर में हैं. भारतीय कंपनियां ट्रंप के निशाने पर लंबे समय से हैं। 

    PERM क्या है?
    PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा चलाई जाने वाली एक प्रक्रिया है. यह किसी भी विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की पहली और सबसे अनिवार्य सीढ़ी है. इसके बिना कोई भी कंपनी ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया (Form I-140) शुरू नहीं कर सकती. PERM वह प्रक्रिया है जिसके जरिए अमेरिकी नियोक्ता यह साबित करता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार पर गलत असर नहीं पड़ेगा. इसके बाद यह प्रक्रिया रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की दिशा में आगे बढ़ती है। 

    PERM के तहत कंपनियों को क्या साबित करना होता है?
    कंपनी को विज्ञापन देकर यह कानूनी रूप से साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई भी योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी नागरिक नहीं मिला. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी वर्कर को रखने से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी शर्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। 

    किन-किन कंपनियों पर हुई है कार्रवाई?

    कुल 8 बड़ी आईटी और टेक कंपनियों पर बैन लगा है. ये हैं-

        टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS),
        इंफोसिस (Infosys)
        विप्रो (Wipro)
        एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies)
        कॉग्निजेंट (Cognizant)
        माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)
        कैपजेमिनी (Capgemini)
        अडोब (Adobe).

    अमेरिकी प्रशासन ने 8 कंपनियों का PERM क्‍यों सस्‍पेंड किया?
    अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने H-1B वीजा सिस्टम और लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया का दुरुपयोग किया. अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग के अनुसार, वर्ष 2009 से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए, 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा मंजूर करवाए और 1 लाख से अधिक PERM हासिल किए, जिससे लाखों योग्य अमेरिकी नागरिक नौकरियों से वंचित रह गए। 

    PREM संस्‍पेशन का क्या असर होगा?
    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अब इन आठों कंपनियों से जुड़े किसी भी नए PERM आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसके अलावा, जो आवेदन पहले से प्रक्रिया में थे, उनका काम भी तुरंत रोक दिया जाएगा. इससे H-1B वीजा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का रास्ता पूरी तरह ठप हो गया है। 

    भारतीय आईटी कर्मचारियों पर इसका क्‍या असर होगा?
    टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक जैसेी भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका भेजती हैं. PERM रुकने से इन कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बंद हो गया है. इससे लगभग एक लाख से अधिक प्रोफेशनल्स का भविष्य अधर में लटक गया है। 

    H-1B धारकों के लिए यह ‘रेड अलर्ट’ क्यों है?
    H-1B वीजा सामान्यत: अधिकतम 6 साल के लिए वैध होता है. नियम यह है कि यदि 6 साल पूरे होने से काफी पहले कंपनी ने कर्मचारी के लिए लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) फाइल कर दिया हो, तभी उसे 6 साल से आगे वीजा एक्सटेंशन मिलता है. अब चूंकि इन कंपनियों का PERM सस्पेंड हो चुका है, इसलिए जो कर्मचारी 6 साल की सीमा के करीब हैं और जिनका PERM फाइल नहीं हुआ था, उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। 

    जिन कर्मचारियों का I-140 पहले से अप्रूव है, क्या उन पर भी असर पड़ेगा?
    नहीं, उन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा. जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड याचिका (Form I-140) पहले ही मंजूर हो चुकी है और जो केवल ग्रीन कार्ड नंबर (प्रायोरिटी डेट) मिलने का इंतजार कर रहे हैं, वे मौजूदा नियमों के तहत एक बार में 3 साल तक का H-1B एक्सटेंशन लेने के पात्र बने रहेंगे। 

  • टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़ी है और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्परता से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से जनविश्वास अभियान के माध्यम से सरकार घर-घर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रत्येक वर्ग को राहत देने तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर योजनाएं संचालित कर रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला चिकित्सालय पहुंचकर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया तथा मरीजों से चर्चा कर उनके उपचार एवं अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली बच्चों को निःशुल्क चश्में वितरित किए। साथ ही क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मरीजों को पोषण सहायता के उद्देश्य से फूड बास्केट प्रदान की।

    बुजुर्ग महिला से ली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, बच्चों को किया दुलार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों से चर्चा करते हुए उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उनका संवेदनशील अंदाज भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने एक बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बुजुर्ग महिला से चर्चा करते हुऐ कुशलक्षेम पूछा, बुजुर्ग महिला ने बताया कि इलाज बहुत अच्छा मिल रहा है और अब पहले से आराम है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से दुलार करते भी नजर आए। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बच्चों के सर पर दुलार से हाथ फेरते हुए उनका भी हाल-चाल पूछा।

    अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री द्वारा स्कूली बच्चों को वितरित किए गए निःशुल्क चश्में

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव बच्चों के बीच पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों को निशुल्क चश्में वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा शासकीय कन्या शाला की कक्षा 12वी की छात्रा कु. शिवानी, कु. छाया एवं शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा कु. मुस्कान को चश्मा वितरित किया।

    हरदा में जिला अन्धत्व निवारण कार्यक्रम के अन्तर्गत 135 स्कूलों में 20320 बच्चों की जांच की गई जिसमें 1156 बच्चों में दृष्टिदोष पाए जाने पर उन्हें निशुल्क चश्में वितरित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण आहार की टोकरी भी वितरित की। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से युक्त लगभग 8 किलोग्राम की प्रत्येक फूड बास्केट में आटा, मूंगफली दाना, दाल और चना आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने हरदा जिले के ग्राम झिरी की रामबाई धुर्वे, उषा गिनारे तथा टिमरनी के परसराम लोवंशी को पोषण आहार की टोकरी प्रदान की।

    उल्लेखनीय है कि नि-क्षय पोषण योजना के अंतर्गत क्षय रोगियों को पोषण सहायता के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में व्यापक स्तर पर जांच एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक हरदा जिले के हाईरिस्क ग्रामों एवं मोहल्लों को कवर करते हुए घर-घर जाकर 1 लाख 86 हजार 332 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाईरिस्क ग्रामों एवं वार्डों में एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन और बलगम (स्यूटम) जांच के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से टीबी मरीजों को पोषण आहार की फूड बास्केट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल को मिला आईएसओ सर्टिफिकेट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राप्त आईएसओ सर्टिफिकेट भी कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह को प्रदान किया। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों का किया सम्मान, वृद्धजनों ने दिया स्नेह और आशीर्वाद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम अंतर्गत हरदा में सार्थक सेवा वृद्धजन आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों से आत्मीय भेंट की। उन्होंने वृद्धजनों को शाल, फल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। वृद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों से उनकी कुशलक्षेम जानी तथा आश्रम में उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धाश्रम का भ्रमण किया तथा सेवा संकल्प अभियान के तहत आश्रम में आयोजित विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आश्रम में आयोजित भ्रमण, भेंट एवं सम्मान सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।

    सार्थक सेवा आश्रय समिति को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संस्था के रूप में शासन स्तर से मान्यता प्रदान की गई है। समिति द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशन में वृद्धाश्रम का आधिकारिक संचालन किया जा रहा है। संस्था द्वारा वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को ऐसा पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उन्हें अपनापन, सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाएं, पौष्टिक भोजन एवं मानसिक शांति का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में 50 सीटर वृद्धाश्रम में 37 वृद्धजन निवासरत हैं, जिनमें 19 महिलाएं एवं 18 पुरुष शामिल हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल, पूर्व विधायक  संजय शाह, जिला पंचायत अध्यक्ष  गजेंद्र शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दर्शन सिंह गहलोत,  राजेश वर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष  अंशुल गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष टिमरनी  देवेन्द्र भारद्वाज,  विशाल सिंह बघेल, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री सुदाम खाड़े, कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर जताई नाराजगी, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदंड लगाने के निर्देश

    सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर जताई नाराजगी, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदंड लगाने के निर्देश

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा में समाधान ऑनलाइन में जनसमस्याओं के निराकरण की समीक्षा करते हुए पाँच आवेदकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजनों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए तथा अधिकारी जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हुए जमीनी स्तर पर पहुंचकर समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करें। शासन और प्रशासन जनता की सेवा के लिए हैं, इसलिए नागरिकों की शिकायतों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    समाधान ऑनलाइन के दौरान कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में अनावश्यक विलंब और शिकायत के निराकरण में लापरवाही बरतने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। समाधान ऑनलाइन के दौरान सामने आया कि रसोई कार्य करने वाले महिला कर्मचारी का मानदेय दस माह से अधिक समय से लंबित था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित शिकायत के लंबित रहने का कारण पूछा। इस पर जिला संयोजक प्रमोद माथुर द्वारा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक विलंब और शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संदीप गौर से चर्चा कर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी से संबंधित उनकी शिकायत सुनी। इसी प्रकार सतीश उइके की विद्युत बिल से संबंधित समस्या पर चर्चा करते हुए महाप्रबंधक विद्युत विभाग को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बिजली बिल से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए मीटरों की सेम्पल विवरण कर जानकारी लेने के निर्देश भी दिए। विद्युत बिल संबंधी शिकायतों के समय पर निराकरण में देरी पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने शबाना, रेखा यादव और अरविंद इवने सहित अन्य आवेदकों से की समस्याओं को सुना तथा मौके पर ही उनके निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

    समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण नहीं होने पर होगी कार्रवाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण नहीं करने वाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अर्थदंड अधिरोपित करने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सीएम-हेल्पलाइन की शिकायतों का निराकरण तय समय-सीमा में किया जाना सुनिश्चित करें। शिकायतों की जांच और उनके निराकरण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी कर्मचारी का वेतन भुगतान लंबित नहीं रहे। नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

    शिकायतों की मानिटरिंग करे

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों का निराकरण इस स्तर पर किया जाए कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए समाधान ऑनलाइन तक पहुंचने की आवश्यकता न पड़े। इसके लिए कलेक्टर सभी शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करें। शिकायतों की विवेचना और निराकरण में देरी या लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

    पुलिस विभाग से संबंधित 100 दिवस से अधिक समय से लंबित 27 शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि वे स्वयं इन शिकायतों की समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि निराकरण में कहां और किस स्तर पर शिथिलता बरती जा रही है। लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, राजस्व और गृह विभाग से संबंधित 100 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता बरतें और आवेदकों को समय पर राहत प्रदान करें।

    नल-जल योजनाओं की निरंतर निगरानी के निर्देश

    इस अवसर पर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि हस्तांतरित नल-जल योजनाओं की निरंतर निगरानी की जाए। योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। मुख्य सचिव ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश दिए कि पूर्ण हो चुकी नल-जल योजनाओं का हस्तांतरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी संचालन और आमजन को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। जिले में विद्युत संबंधी समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले में विद्युत ट्रिपिंग जैसी समस्याएं ना आए यह सुनिश्चित किया जाये।

    विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित

    विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हरदा जिला छोटा जिला है। इसे बहुत आदर्श बनाया जा सकता है। सभी मिलकर जिले को संवारने का कार्य करें। नर्मदा परिक्रमा पथ का शीघ्रता से विकास हो, जिले में उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा कि जिले में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए जिले में नए औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।

    वरिष्ठ नागरिकों से किया संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के वरिष्ठ नागरिक  सरगम जैन और  विक्रान्त अग्रवाल से चर्चा की। इस दौरान वरिष्ठ नागरिक  सरगम जैन ने जिले के विकास के संबंध में सुझाव दिये। उन्होने नाभि कुण्ड के विकास के संबंध में भी अनुरोध किया। इसी तरह  विक्रान्त अग्रवाल द्वारा जिले में ओपन स्टेडियम बनाने की बात कहीं।

    इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री  सुदाम खाड़े, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल तथा कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने जिले के ‘मिशन कोड शक्ति’ नवाचार की सराहना

    उद्यमियों, युवाओं और किसानों से मुख्यमंत्री डॉ यादव ने किया संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास, आधुनिक तकनीक, शिक्षा और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उद्यमियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने तथा ई-कॉमर्स और डिजिटल माध्यमों से देश-दुनिया के बाजार तक पहुंच बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को भी परंपरागत खेती के साथ पशुपालन, प्राकृतिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित नवाचार अपनाकर आय के नए स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर हरदा के आत्मनिर्भर बन रहे उद्यमी, युवा और किसान आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की मजबूत तस्वीर है और प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बन रहें हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत हरदा जिले के जिला पंचायत सभागार में आयोजित उद्यमी, युवा एवं किसान संवाद में विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हरदा में स्थानीय स्तर पर विकसित उत्पादों और नवाचारों को बाजार से जोड़ने के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे है। संवाद में सामने आई सफलता की कहानियां अन्य युवाओं और किसानों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हरदा जिले के उद्यमियों ने अपने परिश्रम और नवाचार से स्थानीय संसाधनों को रोजगार और व्यवसाय के अवसरों में बदला है। युवाओं ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं, वहीं किसानों ने प्राकृतिक खेती, पशुपालन और कृषि आधारित नवाचारों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं का प्रभावी लाभ लेकर व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार और विकास के अवसर तैयार कर सकता है।

    रजाई निर्माण से 72 लोगों को रोजगार

    उद्यमी  पलाश करोड़े ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिले 25 लाख रुपये के बैंक ऋण एवं सवा 6 लाख रुपये के अनुदान से उन्होंने रजाई निर्माण का व्यवसाय स्थापित किया है। उनके उत्पाद मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई हो रहे हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बिक्री की जा रही है तथा इसमें लगभग 72 लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रॉ मटेरियल, लागत एवं टर्नओवर की जानकारी लेते हुए उनके प्रयास की सराहना की।

    बायो सीएनजी प्लांट से आय के साथ पर्यावरण संरक्षण

    खिरकिया निवासी  गौरव माहेश्वरी ने गोवर्धन योजना एवं मुख्यमंत्री जैव ईंधन योजना के माध्यम से स्थापित होने वाले बायो सीएनजी प्लांट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्लांट से आय में वृद्धि के साथ पराली का उपयोग होने से पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    30 हजार लैंड लेवलर का निर्माण

    टिमरनी निवासी  गुरचरण लाल ने लैंड लेवलर कृषि उपकरण और मशीनरी निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 30 हजार लैंड लेवलर का निर्माण किया जा चुका है तथा 12 जिलों में इसकी बिक्री हो रही है। यह मशीन नरवाई को चूर करने, बखरी हुई जमीन के ढेलों को बारीक करने तथा जमीन की उर्वरता बनाए रखने में उपयोगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिले ऋण एवं अनुदान के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरदा जिले में लेण्ड लेवलर का उपयोग को बढ़ाया जाए, जिससे पराली जलाने की समस्याओं का स्थाई समाधान मिल सके।

    मूंगदाल इकाई के उत्पाद चीन, दुबई, अमेरिका सहित देश के बड़े शहरों तक पहुंच रहे

    ग्राम कनारदा निवासी उद्यमी  दीपक उपाध्याय ने लिंक अनुदान योजना से प्राप्त 70 लाख 77 हजार रुपये की सहायता से स्थापित मूंगदाल एवं मूंग पॉलिश इकाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद चीन, दुबई, अमेरिका सहित देश के बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं। वहीं टिमरनी निवासी  महेंद्र सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना से मिले 10 लाख रुपये के अनुदान से स्थापित खाद्य प्रसंस्करण और मसाला उद्योग की जानकारी दी। उनके ‘निर्मल स्पाइसेज’ उत्पाद प्रदेश के 12 जिलों में पहुंच रहे हैं तथा ऑनलाइन बिक्री और डिजिटल मार्केटिंग भी की जा रही है।

    मिशन कोड शक्ति से 2500 विद्यार्थी हो रहे आधुनिक तकनीकी में दक्ष

    यशस्वी संवाद में शासकीय हाई स्कूल मांदला की कक्षा 10वीं की मेधावी छात्रा टीना नगरे ने मिशन कोड शक्ति नवाचार के माध्यम से वेबसाइट डिजाइनिंग, वेब बेसिक्स एवं प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने के अनुभव साझा किए। कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन ने बताया कि जिले में मिशन कोड शक्ति नवाचार के माध्यम से 2500 विद्यार्थी आधुनिक तकनीकी में दक्ष हो रहे हैं।

    एक हजार जनजातीय महिलाओं से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘बरगंडी बाग’

    सिरकंपा निवासी उद्यमी मती अर्चना नागर ने अपने अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘बरगंडी बाग’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अफ्रीकी मूल के रोसेले पौधे से स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं तथा करीब एक हजार जनजातीय महिलाओं को उत्पाद निर्माण से जोड़ा गया है। ब्रांड को एमएसएमई, एपीडा, फिक्की और यूएस एफडीए जैसे प्रमाण-पत्र प्राप्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्पाद का अवलोकन कर इसे पर्यटन विभाग से जोड़कर विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने टिमरनी के अंतरराष्ट्रीय रैपिड चेस प्रतियोगिता विजेता  यश पचौरी से भी संवाद किया।

    प्राकृतिक खेती, गो आधारित उत्पादों और पशुपालन से किसानों की बढ़ी आय

    सिराली निवासी किसान  आनंद यादव ने शासकीय योजना से मिली एक लाख रुपये की सहायता से स्थापित बायो रिसोर्स सेंटर तथा जीवामृत-बिजामृत के माध्यम से प्राकृतिक खेती और गौ आधारित उत्पादों से होने वाले लाभ की जानकारी दी। टिमरनी निवासी किसान  नवनीत जैन ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत स्थापित साइलेज निर्माण इकाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इससे हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित एवं पौष्टिक रूप से भंडारित किया जा रहा है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य एवं दूध उत्पादन में सुधार और पशुपालन की लागत कम करने में सहायता मिलेगी।

    कामधेनु योजना से डेयरी व्यवसाय

    खिरकिया तहसील निवासी  सूर्य प्रताप ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का लाभ लेते हुए 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता से 9 उच्च नस्ल की मुर्रा भैंसें खरीदने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने के बाद डेयरी व्यवसाय को विस्तार मिला और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी हितग्राहियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    इस दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल, पूर्व विधायक  संजय शाह, नगर पालिका अध्यक्ष मती भारतीय राजू कमेड़िया,  राजेश वर्मा, तथा मुख्य सचिव  अशोक वर्णवाल, सचिव  सुदाम खाड़े, कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • उत्तर प्रदेश में धान खरीद की तैयारी तेज, 62 लाख टन का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय

    उत्तर प्रदेश में धान खरीद की तैयारी तेज, 62 लाख टन का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय

    इस बार देश में धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगी योगी सरकार
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में धान क्रय नीति को मंजूरी
     
    पिछले वर्ष देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था उत्तर प्रदेश ने, इस बार 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
     
    आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से 4500 केंद्रों पर होगी खरीद, किसानों को मिलेगा बढ़ा समर्थन मूल्य
     
    सामान्य धान 2441 और ग्रेड-ए धान 2461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा
     
    फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट, यथासंभव 48 घंटे में होगा भुगतान
     
    लखनऊ

    धान की सरकारी खरीद में पिछले वर्ष देश में पहला स्थान हासिल करने वाली योगी सरकार इस बार देश में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति को मंजूरी दी गई। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इस बार सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश में 4500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे। किसानों को उनकी उपज का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। खरीद के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे बैंक खातों में कराया जाएगा।
     
    कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश ने 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इस बार उससे तीन लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था के साथ भुगतान और धान की ढुलाई की निगरानी के भी प्रावधान किए हैं।
     
    पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर, पूर्वी यूपी में एक नवंबर से खरीद
    धान खरीद के लिए प्रदेश में दो अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक खरीद होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक धान खरीदा जाएगा। जिलों में धान की पैदावार और आवक के आधार पर क्रय केंद्रों का स्थान तय किया जाएगा।
     
    धान के समर्थन मूल्य में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
    भारत सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से इसी दर पर धान खरीदा जाएगा।
     
    आठ एजेंसियां करेंगी खरीद, डीएम तय करेंगे केंद्रों का स्थान
    खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद एवं उससे संबद्ध एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड तथा भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से धान की खरीद होगी। कुल 4500 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। संबंधित जिलाधिकारी जिले में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्रय संस्थाओं के बीच केंद्रों का स्थल आवंटन करेंगे।
     
    फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट

    धान की सरकारी खरीद के लिए इस बार फार्मर आईडी वाले किसानों को अलग से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराना होगा। भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत प्रदेश में बनाई गई किसान पहचान के आधार पर ही उनकी उपज खरीदी जाएगी। इससे किसानों को विभागीय पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
     
    48 घंटे में भुगतान, देरी पर तय होगी जिम्मेदारी
    किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
     
    जीपीएस से धान की ढुलाई, क्यूआर कोड से निगरानी
    धान खरीद में पारदर्शिता के लिए प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से संबंधित चावल मिलों तक धान भेजने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा पायलट परियोजना के तहत चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड के माध्यम से खाद्यान्न की आवाजाही और बिलिंग की निगरानी की जाएगी।
     
    धान खरीद के लिए बोरों की भी व्यवस्था
    धान खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी तैयारी की गई है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 80 हजार बोरों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार ने खरीद के दौरान पैकिंग सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है।

  • लखनऊ के नौसेना संग्रहालय को मिलेगी नई पहचान, 2027 तक विस्तार का लक्ष्य; छात्रों को सस्ते टिकट पर एंट्री

    लखनऊ के नौसेना संग्रहालय को मिलेगी नई पहचान, 2027 तक विस्तार का लक्ष्य; छात्रों को सस्ते टिकट पर एंट्री

    लखनऊ स्थित नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार, 6.8 एकड़ में होगा वाटर बॉडी का विकास

    योगी कैबिनेट ने तीसरे चरण की परियोजना को दी मंजूरी, संग्रहालय के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा एलडीए

    नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल गैलरी होंगे आकर्षण

    छात्रों को रियायती दर पर मिलेगा प्रवेश, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

    युवाओं को राष्ट्रीय विरासत से जोड़ता है पर्यटन- जयवीर सिंह

    प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करेःं जयवीर सिंह

    लखनऊ, 

    लखनऊ में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में संग्रहालय के तीसरे चरण के तहत वाटर बॉडी विकसित करने के लिए करीब 6.8 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही संग्रहालय परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपने का भी निर्णय लिया गया।

    वाटर बॉडी विकसित करने के लिए एलडीए संबंधित 6.8 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो के साथ जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से जुड़ी प्रदर्शनियां विकसित की जाएंगी। इससे नौसेना शौर्य संग्रहालय को एक ऐसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां लोग देश के समुद्री इतिहास और नौसेना की तकनीक को करीब से जानने के साथ मनोरंजन का भी आनंद ले सकेंगे।

    इतिहास, विज्ञान और तकनीक से रूबरू होंगे पर्यटक
    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग भारतीय नौसेना के सहयोग से नौसेना शौर्य संग्रहालय विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को देश की समुद्री विरासत और नौसेना की सामरिक ताकत से रूबरू कराने के साथ अनुभवात्मक व ज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है। संग्रहालय में नौसेना के उपकरणों, समुद्री इतिहास और देश की रक्षा क्षमताओं की झलक देखने को मिलेगी। डिजिटल तकनीक, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और सिमुलेशन के जरिये पर्यटक नौसेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे।

    'संग्रहालय विस्तार से बढ़ेंगे पर्यटन और रोजगार'
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करने के साथ युवाओं को देश की राष्ट्रीय विरासत से जोड़ें। अनुभवात्मक और ज्ञान आधारित पर्यटन के जरिए विद्यार्थियों के लिए इतिहास, विज्ञान और तकनीक को अधिक रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नौसेना शौर्य संग्रहालय के विस्तार से परिवारों को लखनऊ घूमने का एक नया विकल्प मिलेगा। साथ ही पर्यटन से जुड़े कारोबार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।'

    मई में हुआ था पहले चरण का उद्घाटन
    परियोजना के पहले चरण के तहत विकसित नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन 30 मई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया था। वाटिका में भारतीय नौसेना की ओर से उपलब्ध कराए गए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के हिस्से, नौसैनिक तोपें, लंगर और प्रोपेलर प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से पर्यटक समुद्र से दूर स्थित लखनऊ में भी भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली और उसकी सामरिक क्षमताओं को करीब से समझ सकते हैं।

    आधुनिक तकनीक से रूबरू कराएगा एक्सपीरियंस सेंटर
    परियोजना के तहत प्रस्तावित क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर में भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यहां डिजिटल गैलरी, इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां और सिमुलेशन विकसित किए जाएंगे। इनके जरिए प्राचीन समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक नौसैनिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा तकनीक तक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। केंद्र में भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भूमिका की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त यहां एक्वेरियम विकसित करने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों और शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को समुद्री जीवन तथा उससे जुड़ी तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा।

    वाटर बॉडी में बोटिंग और लाइट एंड साउंड शो
    परियोजना के तीसरे चरण में विकसित होने वाली वाटर बॉडी संग्रहालय परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। यहां नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियों के साथ बोटिंग की सुविधा विकसित की जाएगी। लाइट एंड साउंड शो तथा जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से संबंधित प्रदर्शनियां भी प्रस्तावित हैं। इससे संग्रहालय को शैक्षणिक भ्रमण के साथ परिवारों के मनोरंजन के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा।

    69.10 करोड़ की परियोजना, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
    संग्रहालय भवन, नौसेना शौर्य वाटिका और क्यूरेशन से जुड़े कार्यों के लिए अब तक करीब 69.10 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस तीन चरणों वाली परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी होगी। विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों के लिए रियायती दरों पर प्रवेश की व्यवस्था होगी। इससे स्कूलों के शैक्षणिक भ्रमण को प्रोत्साहन मिलने और विद्यार्थियों को इतिहास, विज्ञान, तकनीक तथा राष्ट्रीय सेवा से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

    पूरे परिसर का संचालन करेगा एलडीए
    नौसेना शौर्य वाटिका के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एलडीए संभालेगा। क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर और वाटर बॉडी का निर्माण पूरा होने के बाद उनका संचालन भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इससे पूरे परिसर में रखरखाव, सुरक्षा, टिकट और पर्यटक सुविधाओं का प्रबंधन एक ही एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा।