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  • India vs West Indies T20: इंदौर पहुंचेंगी दोनों टीमें, शाम को होलकर स्टेडियम में प्रैक्टिस सेशन

    India vs West Indies T20: इंदौर पहुंचेंगी दोनों टीमें, शाम को होलकर स्टेडियम में प्रैक्टिस सेशन

    इंदौर

    होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले को लेकर इंदौर में तैयारियां तेज हो गई हैं। शनिवार को दोनों टीमों के खिलाड़ी चार्टर्ड फ्लाइट से दोपहर करीब 2:40 बजे इंदौर पहुंचेंगे।

    एयरपोर्ट से दोनों टीमें सीधे अपने-अपने होटलों के लिए रवाना होंगी। भारतीय टीम रेडिसन होटल में ठहरेगी, जबकि वेस्टइंडीज की टीम के लिए मैरिएट होटल में व्यवस्था की गई है। खिलाड़ियों की आवाजाही, सुरक्षा, अभ्यास और मैदान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    मैच को लेकर शहर में क्रिकेट का माहौल बनने लगा है। होलकर स्टेडियम के बाहर टीम इंडिया की जर्सी, टी-शर्ट और कैप की दुकानें सज गई हैं। क्रिकेट प्रेमी खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। वहीं, आयोजन से जुड़े विभाग खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शकों की सुविधाओं को लेकर तैयारियों में जुटे हैं।

    मैदान के बाहर भी तैयार कीं दो पिचें
    भारत और वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों के अभ्यास को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बल्लेबाजों की नेट प्रैक्टिस के लिए मैदान के बाहर अमय खुरासिया एकेडमी में दो पिचें तैयार की गई हैं। इन्हें होलकर स्टेडियम की पिचों के समान परिस्थितियां देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि बल्लेबाजों को अभ्यास के दौरान मैच जैसी स्थिति मिल सके।

    इसके अलावा होलकर स्टेडियम के अंदर गेंदबाजों के अभ्यास के लिए भी दो अलग पिचें तैयार की गई हैं। जरूरत के अनुसार खिलाड़ी इनका उपयोग कर सकते हैं। दोनों टीमों के लिए कोई अनिवार्य आधिकारिक अभ्यास सत्र निर्धारित नहीं है। ऐसे में अभ्यास करने या नहीं करने का फैसला खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट अपनी सुविधा के अनुसार लेंगे।

    एयरपोर्ट से होटल तक तय रूट, खिलाड़ियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
    दोनों टीमों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए एयरपोर्ट से होटल और होटल से स्टेडियम तक का रूट निर्धारित किया गया है। एयरपोर्ट से खिलाड़ियों को सुपर कॉरिडोर और एमआर-10 के रास्ते होटल पहुंचाया जाएगा। अभ्यास के लिए स्टेडियम जाते समय एबी रोड का इस्तेमाल किया जाएगा।

    खिलाड़ियों के ठहरने वाले होटलों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। स्टेडियम में भी खिलाड़ियों की सुरक्षा के साथ दर्शकों की आवाजाही और प्रवेश व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।

    सुरक्षा प्रबंधन में सीसीटीवी कैमरों के साथ टर्नस्टाइल और फेस रिकॉग्निशन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की तैयारी की जानकारी भी सामने आई है। इन व्यवस्थाओं के वास्तविक संचालन और लागू प्रोटोकॉल की पुष्टि संबंधित अधिकारियों से किया जाना जरूरी है।

    ओस की चुनौती से निपटने की कोशिश
    होलकर स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है। यहां कई मुकाबलों में बड़े स्कोर बने हैं। ऐसे में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मैच में भी बल्लेबाजों के प्रदर्शन के साथ गेंदबाजों की रणनीति और दूसरी पारी की परिस्थितियां अहम रहेंगी।

    मैदान की तैयारी में घास और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मैदान पर विशेष प्रकार की घास लगाई गई है, जिसका उद्देश्य ओस के असर को कम करना है। रात के टी-20 मुकाबलों में ओस गेंदबाजों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि गीली गेंद को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। हालांकि, घास के कारण ओस का असर कितना कम होगा, यह मैदान की वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

    टीम इंडिया में इंदौर का कोई खिलाड़ी नहीं
    भारतीय टीम में इस मुकाबले के लिए इंदौर का कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है, लेकिन मैच के तकनीकी संचालन में शहर की भागीदारी रहेगी। इंदौर के अंतरराष्ट्रीय अंपायर नितिन मेनन को भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह होलकर स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में थर्ड अंपायर की भूमिका निभाएंगे।

    थर्ड अंपायर टीवी रीप्ले और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मैदानी अंपायरों को फैसले लेने में सहायता करते हैं। पांच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज में मेनन अलग-अलग भूमिकाओं में भी नजर आ सकते हैं। इस तरह भारतीय टीम में स्थानीय खिलाड़ी नहीं होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के संचालन में इंदौर का प्रतिनिधित्व रहेगा।

    स्कोरिंग से लेकर DLS तक, मध्य प्रदेश के चार लोगों को जिम्मेदारी
    मुकाबले के आयोजन में मध्य प्रदेश के चार लोगों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बीसीसीआई ने इंदौर के जयंत वानखेड़े और मयंक थनवार को स्कोरर नियुक्त किया है। एमपीसीए ने इंदौर के अमित पारखे को मीडिया बॉक्स की जिम्मेदारी दी है, जबकि ग्वालियर के सुनील गुप्ता डीएलएस से जुड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।

    डीएलएस यानी डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति का इस्तेमाल बारिश या अन्य कारणों से प्रभावित सीमित ओवरों के मुकाबलों में संशोधित लक्ष्य तय करने के लिए किया जाता है। स्कोरिंग, मीडिया प्रबंधन और मैच की तकनीकी प्रक्रियाओं में प्रदेश के प्रतिनिधियों की भागीदारी आयोजन में स्थानीय योगदान को दर्शाती है।

    भारत की टीम में ये 15 खिलाड़ी शामिल
    भारत की घोषित टीम में संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, अर्शदीप सिंह, तिलक वर्मा, रवि बिश्नोई, नितीश कुमार रेड्डी, मयंक यादव, नमन धीर, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी के नाम शामिल हैं।

    स्टेडियम के बाहर सजीं जर्सी और कैप की दुकानें
    मैच से पहले होलकर स्टेडियम के बाहर क्रिकेट का उत्साह दिखाई देने लगा है। फुटपाथ पर टीम इंडिया की टी-शर्ट, जर्सी और कैप की दुकानें सज गई हैं। बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी यहां खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। मुकाबले को लेकर प्रशंसकों में उत्साह है और शहर में क्रिकेट का माहौल बनने लगा है।

    स्टेडियम की 30 हजार दर्शकों की क्षमता
    होलकर स्टेडियम का नाम मराठा होलकर राजवंश के नाम पर रखा गया है। इसकी स्थापना 1990 में हुई थी। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के स्वामित्व और संचालन वाले इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता करीब 30 हजार बताई जाती है। फ्लडलाइट्स और जल निकासी की व्यवस्था इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण मैदानों में शामिल करती है।

    यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा घरेलू क्रिकेट के कई मुकाबले भी आयोजित हो चुके हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 2016 में यहां पहला टेस्ट मैच खेला गया था। इसके साथ ही होलकर स्टेडियम भारत का 22वां टेस्ट स्थल बना। वर्ष 2017 में यहां भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे और भारत-श्रीलंका के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी खेले गए।

    कई रिकॉर्ड का गवाह रहा मैदान
    होलकर स्टेडियम में बड़े स्कोर का इतिहास रहा है। दिसंबर 2011 में वीरेंद्र सहवाग ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे मुकाबले में 219 रन की शानदार पारी खेली थी। उस समय यह वनडे क्रिकेट का दूसरा दोहरा शतक था। बाद में रोहित शर्मा ने 264 रन की पारी खेलकर वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

    स्टेडियम में पहला आईपीएल मुकाबला 13 मई 2011 को खेला गया था। वर्ष 2017 में किंग्स इलेवन पंजाब ने इसे अपने घरेलू मैदानों में शामिल किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल मुकाबलों के आयोजन ने होलकर स्टेडियम को इंदौर की क्रिकेट पहचान का अहम हिस्सा बना दिया है।

    11 अक्टूबर के मुकाबले पर टिकीं निगाहें
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी-20 मुकाबले से पहले अब सभी की निगाहें दोनों टीमों के इंदौर पहुंचने और अभ्यास की गतिविधियों पर हैं। खिलाड़ियों की सुरक्षा, पिच की तैयारी, मैदान की परिस्थितियां और दर्शकों की सुविधाएं आयोजन के प्रमुख पहलू हैं। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि होलकर स्टेडियम एक बार फिर रोमांचक मुकाबले का गवाह बनेगा और इंदौर में क्रिकेट का उत्साह चरम पर पहुंचेगा।

  • MP में कहीं आंधी-बारिश तो कहीं तेज धूप, रीवा संभाग में बरसेंगे बादल; पचमढ़ी सबसे ठंडा

    MP में कहीं आंधी-बारिश तो कहीं तेज धूप, रीवा संभाग में बरसेंगे बादल; पचमढ़ी सबसे ठंडा

    भोपाल
    मध्यप्रदेश में
    मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ लाइन के सक्रिय रहने से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई शहरों में धूप खिलने की संभावना है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, दिन के समय गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। बड़वानी के तालुन में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    रीवा संभाग में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में धूप
    मानसून की विदाई के बाद भी मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, भोपाल और इंदौर में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।आने वाले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। ऐसे में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक
    हाल के दिनों में हुई बारिश का असर रात के तापमान पर भी पड़ा है। अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में रातें अपेक्षाकृत ठंडी हो गई हैं।

    प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान

    पचमढ़ी: 16.4°C

    अमरकंटक: 17.9°C

    इंदौर: 17.9°C

    छिंदवाड़ा: 18.1°C

    कटनी (करौंदी): 18.8°C

    शाजापुर: 19°C

    वहीं, दिन के तापमान में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी जिले के तालुन में सबसे ज्यादा 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?
    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश होने की वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसी मौसम प्रणालियां हैं।अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस दौरान सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण मानसून की विदाई के बाद भी कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।इसलिए मानसून खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि प्रदेश में बारिश की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।

    इस बार सामान्य से 4% कम हुई बारिश
    मध्यप्रदेश में जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश का वितरण अलग-अलग रहा।

    पूर्वी मध्यप्रदेश: सामान्य से करीब 4% अधिक बारिश।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश: औसत से करीब 12% कम बारिश।

    जून में बारिश का कोटा 14 प्रतिशत कम रहने से पूरे मानसून सीजन के आंकड़ों पर असर पड़ा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से काफी हद तक भरपाई हुई, लेकिन शुरुआती सूखे के कारण कुल बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी
    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    इन प्रमुख जिलों में सामान्य से कम बारिश
    इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार सहित कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    आगे कैसा रहेगा मध्यप्रदेश का मौसम?
    मौसम के मौजूदा रुख के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में मौसम साफ रह सकता है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप निकलने का अनुमान है।रात के तापमान में गिरावट से सुबह और देर रात हल्की ठंडक महसूस हो सकती है, जबकि दिन में गर्मी बनी रहने की संभावना है। स्थानीय मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए।

     

  • जालंधर में 27 अक्टूबर से हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगे खास इंतजाम

    जालंधर में 27 अक्टूबर से हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगे खास इंतजाम

    चंडीगढ़
     पंजाब में होने वाली एशियाई हाकी चैंपियंस ट्राफी के लिए पंजाब सरकार विश्वस्तरीय प्रबंध करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए। टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह 27 अक्टूबर को जालंधर में होगा, जबकि मुकाबले 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक खेले जाएंगे।

    चैंपियनशिप में भारत, चीन, मलेशिया, जापान, बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया की टीमें भाग लेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की समृद्ध हॉकी विरासत को देखते हुए इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को यादगार बनाया जाना चाहिए। इससे प्रदेश को अपनी खेल उपलब्धियों, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    शहरों की सफाई और सौंदर्यीकरण पर जोर
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तैयारियां केवल स्टेडियम तक सीमित नहीं रहेंगी। जालंधर और मोहाली में व्यापक सफाई अभियान चलाने, सार्वजनिक स्थानों का रखरखाव करने और स्टेडियम तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विदेशी खिलाड़ियों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए बेहतर आवास, भोजन, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था करने को भी कहा गया है। होटलों और मैच स्थलों के बीच सुचारु यातायात सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

    विद्यार्थियों की भागीदारी और ट्राफी टूर
    मुख्यमंत्री ने स्कूलों और कालेजों के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले दिखाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिले और वे पंजाब की हॉकी विरासत से जुड़ें। टूर्नामेंट के प्रचार के लिए विशेष रूप से तैयार एसयूवी में ट्रॉफी या उसके मॉडल को प्रदर्शित करते हुए प्रदेशभर में ट्राफी टूर निकालने की योजना भी बनाई जाएगी। आयोजन की तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी।

     

  • नवरात्रि कलश स्थापना 2026: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ समय, राहुकाल में भूलकर भी न करें घटस्थापना

    नवरात्रि कलश स्थापना 2026: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ समय, राहुकाल में भूलकर भी न करें घटस्थापना

    Shardiya Navratri 2026
    शक्ति की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026, रविवार से आरंभ हो रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय महापर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दौरान घरों में घटस्थापना (कलश स्थापना), अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. नवरात्र के पहले दिन सही समय पर कलश स्थापना करना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे माता रानी की विशेष कृपा मिलती है.

    घटस्थापना की तिथि और पंचांग नियम
    हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात 09:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर 2026 की रात 09:30 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, कलश स्थापना 11 अक्टूबर को ही की जाएगी. इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना की जाती है.

    11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
    यदि आप 11 अक्टूबर को कलश स्थापित करने जा रहे हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखें:

    प्रातःकाल मुख्य मुहूर्त:
    समय: सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक
    अवधि: इस बार भक्तों को कलश स्थापना के लिए करीब 4 घंटे लंबा प्रात:काल मुहूर्त मिल रहा है, जो पूजा के लिए अति उत्तम है.

    अभिजित मुहूर्त (दोपहर का शुभ समय):
    समय: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

    महत्व: यदि किन्हीं कारणों से आप सुबह के समय घटस्थापना न कर पाएं, तो इस अभिजित मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है.

    शुभ चौघड़िया मुहूर्त (दिन के समय)
    चौघड़िया के अनुसार पूजा या शुभ कार्य करने के लिए ये समय भी बहुत अच्छे माने गए हैं:

    चर (सामान्य): सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:00 बजे तक

    लाभ (उत्तम): सुबह 09:00 बजे से सुबह 10:28 बजे तक

    अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 10:28 बजे से सुबह 11:56 बजे तक

    शुभ (उत्तम): दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:51 बजे तक

    इस समय भूलकर भी न करें घटस्थापना (राहुकाल)
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य में राहुकाल का त्याग करना चाहिए. 11 अक्टूबर को राहुकाल शाम 4:34 बजे से शाम 6:01 बजे तक रहेगा. इस समयावधि में कलश स्थापना या कोई भी नया कार्य करने से बचना चाहिए.

    मां दुर्गा का हाथी पर आगमन
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा का पृथ्वी लोक पर आगमन अलग-अलग वाहनों से होता है. इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ रविवार के दिन होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे बेहद शुभ, लाभकारी और उत्तम वर्षा-समृद्धि का प्रतीक माना गया है. वहीं, इस बार व्रत का समापन और मां की विदाई मुर्गे की सवारी पर हो रही है.

  • मुख्यमंत्री सेवा संकल्प कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को किया सम्मानित

    मुख्यमंत्री सेवा संकल्प कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को किया सम्मानित

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा सशक्त और विकसित भारत का सपना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    सेवा, सुशासन और जनकल्याण के 25 वर्ष देश के लिए प्रेरणादायी : मुख्यमंत्री

    विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

    नक्सलवाद के अंत के साथ बस्तर में खुल रहे विकास और समृद्धि के नए द्वार

    महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल : किसानों की समृद्धि और गरीबों के पक्के आवास के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

    मुख्यमंत्री सेवा संकल्प कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को किया सम्मानित

    रायपुर, 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर में समाचार चैनल एशियन न्यूज द्वारा आयोजित ‘सेवा संकल्प कॉन्क्लेव–जनसेवा का संकल्प, छत्तीसगढ़ का भविष्य’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा, देश में आए व्यापक बदलाव तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और संकल्पों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है। दुनिया में भारत की पहचान एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित हुई है। आर्थिक क्षेत्र में भी भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है और आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों में आत्मविश्वास जगाया है और भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे किए हैं। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने भूकंप की भीषण त्रासदी से जूझ रहे गुजरात को न केवल पुनर्निर्माण की राह पर आगे बढ़ाया, बल्कि विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसी सेवाभाव, संकल्प और दूरदृष्टि के साथ देश को आगे बढ़ाया।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का छत्तीसगढ़ से पुराना और आत्मीय जुड़ाव रहा है। उन्होंने प्रदेश के दूरस्थ अंचलों और बस्तर के क्षेत्रों में भी लंबा समय बिताया है और यहां की परिस्थितियों तथा जनजीवन को निकट से समझा है। वर्ष 2014 में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर कार्य करते हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का उनका मूलमंत्र देश की विकास यात्रा का आधार बना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को नए भारत के सामर्थ्य और संकल्प से परिचित कराया है। यह नया भारत किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा और स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना भी जानता है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से हमें सेवा की निरंतर प्रेरणा मिलती है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के कठिन दौर में भारत ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता और सेवा भावना का परिचय दिया। देश में विकसित वैक्सीन ने करोड़ों भारतीयों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ दुनिया के अनेक देशों तक मानवता और सहयोग का संदेश पहुंचाया। प्रधानमंत्री के इसी सेवाभाव से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सुख, समृद्धि और बेहतर भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

     बस्तर में पहुंच रही विकास की रोशनी

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा। मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक ली। उस समय देश में शेष नक्सल समस्या का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में केंद्रित था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय तथा हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य पहुंचाना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। बस्तर के लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि बस्तर शांति, विश्वास और विकास के नए युग का नेतृत्व करे।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के हृदय स्थल में स्थित छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, टिन सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं। प्रदेश में हीरा और सोना जैसे बहुमूल्य खनिजों की संभावनाएं भी मौजूद हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए राज्य में उद्योग, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते ढाई वर्षों में राज्य के खनिज राजस्व में  वृद्धि हुई है। शासन की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और राजस्व बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करते हुए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती उर्वरा है और यहां के लोग परिश्रमी हैं। ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ केवल एक कहावत नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों के सरल स्वभाव, परिश्रम और सामर्थ्य की पहचान है। इन्हीं विशेषताओं और उपलब्ध संसाधनों के बल पर छत्तीसगढ़ वर्ष 2047 तक अपने आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करेगा और विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी योगदान देगा।

    महतारी वंदन योजना ने माताओं-बहनों को दिया आर्थिक संबल

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। एक दिन पहले दुर्ग से योजना की 32वीं किस्त जारी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रवास के दौरान उन्हें माताओं-बहनों से संवाद का अवसर मिलता है। महिलाएं महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं, बचत और स्वरोजगार के लिए कर रही हैं। अनेक महिलाओं ने इस राशि को जोड़कर सिलाई मशीन सहित आजीविका के साधन खरीदे हैं और अब वे हर महीने अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। कुछ माताओं ने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में खाते खुलवाए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। माताओं-बहनों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी सरकार के लिए सबसे बड़ा संतोष है।

    किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और किसान हमारे अन्नदाता हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस दिया गया। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। खेती के लिए उन्नत बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का किसान समृद्ध हो और कृषि छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का और मजबूत आधार बने।

    गरीब के पक्के आवास का सपना हो रहा पूरा

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में सरकार की जिम्मेदारी संभालते ही स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित है। गरीब परिवारों के पक्के आवास, शौचालय, रसोई गैस सहित बुनियादी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इन योजनाओं ने विशेष रूप से महिलाओं के जीवन में सम्मान, सुविधा और सुरक्षा बढ़ाई है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गठन के बाद अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति देने का निर्णय लिया। आज प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों के केंद्र में गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सुशासन, पारदर्शिता, जनकल्याण और विकास को साथ लेकर छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को विकास के अवसरों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाए।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं और विशिष्टजनों को सम्मानित किया तथा उनकी उपलब्धियों की सराहना की।

    इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज सहित जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन तथा एशियन न्यूज के पदाधिकारी उपस्थित थे।

  • Starlink पर चीन का प्रतिबंध, भारत में एलन मस्क से टकराव क्यों? जानिए पूरा मामला

    Starlink पर चीन का प्रतिबंध, भारत में एलन मस्क से टकराव क्यों? जानिए पूरा मामला

     नई दिल्ली 
    भारत में स्टारलिंक के लाइसेंस का मामला बढ़ता जा रहा है. सैटकॉम कंपनी स्टारलिंक के बॉस Elon Musk ने भारत में मंजूरी ना मिलने को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है और कुछ गंभीर आरोप भी लगाए. अब Elon Musk से अब पूछा जा रहा है कि चीन में भी Starlink बैन है, तो वहां इतनी नारागजी क्यों नहीं जताते हैं। 

    दरअसल, भारतीय मूल के शोधकर्ता और लेखक राजीव मल्होत्रा ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया है और Elon Musk से सवाल किया है. पोस्ट में लिखा है कि Elon Musk चीन में स्टारलिंक पर प्रतिबंध है, उसके बावजूद वह वहां के खिलाफ इस तरह की नाराजगी जाहिर क्यों नहीं करते हैं। 

    दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक मस्क ने चीन में टेस्ला बिजनेस को लेकर भारी इनवेस्टमेंट की है. इसके बावजूद वहां स्टारलिंक की सर्विस को अभी तक परमिशन नहीं मिली है। 

    X पोस्ट में राजीव मल्होत्रा ने कहा, एलन, चीन में स्टारलिंक को परमिशन क्यों नहीं मिली है. क्या वहां पर भी कोई चीनी उद्योगपति (ओलिमार्क) इसके पीछे की वजह है. चीन के अंदर आपने टेस्ला में भारी इनवेस्टमेंट किया है, फिर भी वहां स्टारलिंक की सर्विस ब्लॉक हैं। 

    राजीव मल्होत्रा का पोस्ट 
    बीते बुधवार को सोशल मीडिया का पोस्ट सर्कुलेट हो रहा था जिसमें दावा किया है कि मस्क ने भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को रोकने के लिए 'ओलिगार्क' (कुछ प्रभावशाली उद्योगपति)  पर आरोप लगाए थे कि वे उनकी सर्विस को भारत में शुरू नहीं हो दे रहे हैं. हालांकि इस दौरान उन्होंने किसी भी शख्स का नाम नहीं लिया है। 

    अंंबानी का नाम और फिर राहुल का पोस्ट 
    इसके बाद उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की आलोचना की है और सवाल उठाया है कि क्या वह भारत के असली बॉस हैं. इसके बाद मस्क के पोस्ट के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दिया। 

    देश की संप्रभुता से स्टारलिंक का संबंध
    मल्होत्रा ने बताया है कि स्टारलिंक का पूरा मामला सिर्फ टेक्नोलॉजी और सर्विस की क्वालिटी तक सीमित नहीं है. उन्होंने आगे बताया है कि इसका संबंध देश की संप्रभुता से भी है. उन्होंने बताया है कि देरी होने के पीछे कई वजह हैं। 

    सरकार अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी है 
    मस्क के पोस्ट के बाद भारत सरकार भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी है. सरकार बता चुकी है कि भारत में नियम सभी के लिए एक समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है। 

    सरकार की तरफ से साफ किया जा चुका है कि सैटकॉम के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं. इन सभी को सुरक्षा संबंधी प्रोसेस को पूरा करना होगा और फाइनल अप्रूवल का इंतजार करना होगा। 

    सरकार जिन तीन कंपनियों को मेंशन कर चुकी हैं, जिसमें Elon Musk की स्टारलिंक, रिलायंस जियो का सैटकॉम और भारती ग्रुप समर्थित यूटेलसैट वनवेब का नाम शामिल है। 

  • करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं : युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का किया आह्वान

    करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं : युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का किया आह्वान

    करमा तिहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    कंवर समाज ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया अनुकरणीय उदाहरण

    जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

    करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं : युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का किया आह्वान

    कंवर समाज के सामाजिक भवनों एवं सांस्कृतिक मंच के लिए 90 लाख रुपए तथा राजधानी में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा

    रायपुर 
     करमा तिहार हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा, आस्था और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनुपम प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने के साथ प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिकता का संदेश देता है। बदलते समय के बीच कंवर समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और रीति-रिवाजों को सहेजकर नई पीढ़ी के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना ही किसी समाज की वास्तविक शक्ति है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज युवा प्रभाग महानगर इकाई द्वारा आयोजित भव्य करमा परब महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और करमा तिहार की खुशियां समाजजनों के साथ साझा कीं। उन्होंने भादो एकादशी व्रत एवं करमा तिहार की सभी समाजजनों और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कंवर समाज के लिए कोरबा जिले के मड़वारानी में सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपए, राजधानी रायपुर के टाटीबंध में सामाजिक भवन के लिए 25 लाख रुपए तथा कांकेर के ग्राम जेफरा में सांस्कृतिक मंच के लिए 15 लाख रुपए देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी रायपुर में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए कंवर समाज युवा प्रभाग और सभी सामाजिक पदाधिकारियों की सराहना की।

    प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंध का उत्सव है करमा तिहार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा तिहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच अटूट संबंध का उत्सव है। इस पर्व में करम डार की पूजा की जाती है। समाज के बेटे-बेटियां श्रद्धा और आस्था के साथ उपवास रखकर विधि-विधान से करम डार की पूजा-अर्चना करते हैं। रात्रि जागरण में पारंपरिक करमा गीत और नृत्य उत्सव में उल्लास भरते हैं। अगले दिन करम डार के विसर्जन के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा प्रकृति के प्रति हमारी श्रद्धा, विश्वास और संरक्षण की भावना को अभिव्यक्त करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को कभी केवल संसाधन नहीं माना, बल्कि उसे जीवन का आधार और हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग माना है। जल, जंगल और जमीन के साथ हमारा रिश्ता केवल आवश्यकता का नहीं, बल्कि आस्था और आत्मीयता का भी है। करमा तिहार जैसी परंपराएं इसी संबंध को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत करती आई हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रकृति संरक्षण की इसी भावना को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया है। देशभर में बड़ी संख्या में नागरिक इससे जुड़कर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पौधरोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    संस्कृति के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार भी जरूरी

    मुख्यमंत्री साय ने कंवर समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से नशामुक्ति को लेकर समाज के भीतर हो रही सार्थक पहल सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संस्कार, संगठन और जागरूकता आवश्यक हैं। हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़े, नए अवसरों का लाभ उठाए, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को भी हमेशा साथ लेकर चले। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा सामाजिक एकजुटता को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि करमा परब महोत्सव का आयोजन युवा प्रभाग द्वारा किया जाना विशेष प्रसन्नता की बात है। यह इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर सजग है और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रही है।

    जनजातीय समाज का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। यह पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

    मुख्यमंत्री साय ने आत्मीयता के साथ कहा कि आज छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी आपके बीच का आपका अपना ‘विष्णु भैया’ है। हमारी सरकार जनजातीय समाज के प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के आवास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इसी प्रकार धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास को गति दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ जनजातीय समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसके जीवन में वास्तविक बदलाव आए।

    युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, रोजगार और खेल पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय युवाओं सहित प्रदेश के सभी युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार कर रही है। बस्तर अंचल में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय युवाओं की सुविधा के लिए दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई है। इससे प्रदेश के अधिक युवाओं को देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिलेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य की नई औद्योगिक नीति में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि हमारे युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाले ही नहीं, बल्कि उद्यमी बनकर दूसरों को भी रोजगार देने वाले बनें।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जनजातीय अंचलों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सरकार का प्रयास है कि उन्हें उचित अवसर, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध हों।

    किसानों के हित में सरकार ने पूरे किए महत्वपूर्ण वादे

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार बनने के बाद किसानों से किया गया दो वर्षों के लंबित धान बोनस का वादा पूरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती, सुशासन दिवस पर प्रदेश के  किसानों के खातों में 3,716 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद रही है। किसानों की आर्थिक समृद्धि और कृषि क्षेत्र को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। सरकार का प्रयास है कि खेती लाभकारी बने और अन्नदाता किसान के जीवन में खुशहाली आए।

    वनांचल के परिवारों की आजीविका और सम्मान की चिंता

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वनांचल में रहने वाले परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक को 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। इससे प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक भाई-बहनों के सम्मान और सुविधा को ध्यान में रखते हुए चरण पादुका योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है। वनांचल के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

    महतारी वंदन से बढ़ा माताओं-बहनों का आत्मविश्वास

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत लाखों महिलाओं के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। यह राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति, बचत और छोटे स्तर पर आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ करने में सहायक बन रही है।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण पूरे परिवार और समाज को मजबूत करता है। महतारी वंदन योजना ने माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी नई मजबूती दी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को पूरा करना भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। सरकार गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। आज प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के माध्यम से पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

    अपनी जड़ों से जुड़कर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा तिहार जैसे पर्व हमारी सामाजिक एकता, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना से परिचित होने का अवसर मिलता है।

    उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए शिक्षा, सामाजिक सुधार, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ें। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक अवसरों का लाभ उठाएं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें।

    अखिल भारतीय कंवर समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कौशल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का सदैव पालन करना चाहिए। पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ प्राकृतिक असंतुलन का कारण बनती है, इसलिए प्रकृति का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष डॉ. नंद कुमार साय, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, पूर्व कैबिनेट मंत्री ननकी राम कंवर, प्रदेश कंवर समाज के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी, कंवर समाज रायपुर महानगर के अध्यक्ष मनोहर सिंह पैकरा सहित जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

  • नवरात्र से छठ महापर्व तक फील्ड में रहें अधिकारी, जनता से सीधा संवाद करें: मुख्यमंत्री

    नवरात्र से छठ महापर्व तक फील्ड में रहें अधिकारी, जनता से सीधा संवाद करें: मुख्यमंत्री

    जनशिकायतों का 24 घंटे में मिले संतोषजनक जवाब, निर्विवाद राजस्व मामलों का 15 दिन में हो निस्तारण: मुख्यमंत्री

    शारदीय नवरात्र से छठ महापर्व तक फील्ड में उतरें वरिष्ठ अधिकारी, जनता से सीधा संवाद करें: मुख्यमंत्री

    महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, मिशन शक्ति केंद्रों को प्रभावी बनाएं, स्टंटबाजी पर कार्रवाई और एंटी रोमियो स्क्वॉड की सघन चेकिंग के निर्देश

    मुख्यमंत्री का निर्देश, अतिवृष्टि प्रभावितों को तत्काल राहत, 48 घंटे में नुकसान और राहत वितरण की रिपोर्ट दें, क्षतिग्रस्त आवासों वाले पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिले

    नवरात्र, दशहरा और छठ पर होंगे सुरक्षा के व्यापक प्रबंध, प्रमुख मंदिरों में होगी 24×7 सीसीटीवी निगरानी

    शोभायात्रा मार्ग, पूजा पंडालों के समीप मांस-मदिरा की दुकानों पर होगा प्रतिबंध

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन के अधिकारियों को आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और उनके समयबद्ध समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि शारदीय नवरात्र से छठ महापर्व तक वरिष्ठ अधिकारी स्वयं क्षेत्र में उतरें, जनता से सीधा संवाद करें और उसकी समस्याओं के समाधान की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें। शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब मिलना चाहिए। जनपद स्तर के साथ शासन स्तर पर भी जनशिकायतों के निस्तारण की नियमित समीक्षा की जाए। दाखिल-खारिज, पैमाइश, वरासत तथा जाति और आय प्रमाणपत्र से जुड़े प्रकरणों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण हो। निर्विवाद राजस्व मामलों का निस्तारण अधिकतम 15 दिन में किया जाए और प्रत्येक तहसील में लंबित प्रकरणों की सूची सार्वजनिक की जाए। निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा न होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

    शुक्रवार को शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी पर्व-त्योहारों की तैयारियों और जनहित से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा, सुगम यातायात और जनसुविधाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीट आरक्षी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक प्रत्येक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी तत्परता और ईमानदारी से निभाए। कस्बों और नगरों में यातायात जाम की स्थिति न बने और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। शारदीय नवरात्र से छठ महापर्व तक जोन और रेंज स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक स्वयं क्षेत्र में भ्रमण करें, गश्त में शामिल हों और आमजन से सीधा संवाद स्थापित करें। संवेदनशील क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

    महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक थाने में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। महिलाओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ उन्हें आवश्यक सहायता, परामर्श और विधिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। स्टंटबाजी करने वालों के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाने और एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई तेज करने को भी कहा, ताकि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। कोई भी सहकारी समिति खाद के अभाव में स्टॉक विहीन न रहे। जिलाधिकारी स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप खाद आवंटन के लिए कृषि विभाग को समय से सूचित करें। निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में समुचित व्यवस्था बनाए रखने, पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने और सड़क कटिंग से जुड़ी समस्याओं का 31 अक्टूबर तक समाधान करने के निर्देश भी दिए।

    अतिवृष्टि से प्रभावित लोगों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगले 48 घंटे के भीतर वर्षा से हुए नुकसान और राहत वितरण की पूरी जानकारी राहत आयुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। जिन परिवारों के आवास पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने को कहा।

    आगामी पर्व-त्योहारों के शांति और सौहार्दपूर्ण आयोजन के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि, 18 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी, 19 अक्टूबर को महानवमी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और सुगम आवागमन के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। विंध्याचल धाम (मीरजापुर), देवीपाटन शक्तिपीठ (बलरामपुर), सिद्धपीठ मां शाकुंभरी देवी (सहारनपुर) और मां ललिता देवी शक्तिपीठ, नैमिषारण्य (सीतापुर) सहित सभी प्रमुख देवी मंदिरों में अतिरिक्त कार्मिक तैनात किए जाएं। इन स्थलों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदीय नवरात्र से छठ महापर्व तक विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सभी पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों, यह प्रशासन और पुलिस की सामूहिक जिम्मेदारी है। थाना, चौकी और जिला स्तर पर पीस कमेटियों की बैठकें आयोजित कर धर्मगुरुओं, आयोजन समितियों और स्थानीय नागरिकों से निरंतर संवाद बनाए रखा जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। दुर्गा पूजा पंडालों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो और डीजे का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए। प्रतिमाओं की ऊंचाई सुरक्षित मानकों के अनुसार रखी जाए। विजयादशमी पर पुतला दहन स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हों तथा माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

    उन्होंने शोभायात्रा और प्रतिमा विसर्जन मार्गों पर झूलते एवं ढीले विद्युत तारों को ठीक कराने, जर्जर खंभों और ट्रांसफार्मरों की जांच कराने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलियों और गड्ढों की मरम्मत के निर्देश दिए। मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश, साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नगर विकास एवं आवास विभाग नगरों में विशेष साफ-सफाई और साज-सज्जा कराए। प्रतिमा विसर्जन स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, नाव, कुशल गोताखोर और जल पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शोभायात्रा और विसर्जन मार्गों पर चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन और चिकित्सा दल उपलब्ध रहें। मेलों एवं विसर्जन स्थलों पर खोया-पाया केंद्र, सहायता केंद्र और जन उद्घोषणा प्रणाली स्थापित की जाए। प्रमुख स्थलों की सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी के साथ सोशल मीडिया पर भी सतर्क नजर रखी जाए। शोभायात्रा और विसर्जन मार्गों पर मांस और मदिरा की दुकानें न लगने दी जाएं। परिवहन विभाग यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन करे और बस स्टेशनों पर स्वच्छता बनाए रखे। भीड़ और वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए सुगम यातायात, प्रभावी डायवर्जन और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था में बाधा डालने वाले तत्वों से सख्ती से निपटा जाए।

  • स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से ग्रामीणों को राहत, CM मोहन यादव ने सौंपे रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से ग्रामीणों को राहत, CM मोहन यादव ने सौंपे रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को वितरित किये रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से मिला 10 हितग्राहियों को मालिकाना हक

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 के हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम गोंदागांव के ग्रामीण निर्भयदास एवं भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किये। इस दौरान अन्य आठ हितग्राहियों को भी रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीणजन को उसकी भूमि का अधिकार मिले। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिल रही है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। रजिस्ट्री मिलने से उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ेगी और वे शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे।

    रजिस्ट्री प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी भूमि का विधिवत मालिकाना हक मिलने से उन्हें अब बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी तथा अपनी भूमि पर वे निर्भय होकर निर्माण एवं अन्य कार्य कर सकेंगे। उन्होंने सरकार की इस योजना की प्रशंसा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को निर्देश दिये कि भू-स्वामित्व के अंतर्गत रजिस्ट्री के कार्य में गति बढ़ाएं एवं पटवारियों को बताए कि शासकीय कार्य निष्पादन में किसी के भी विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिसमें वह राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में निष्पादन अधिकारी घोषित है। रजिस्ट्री का निष्पादन अधिकार अभिलेख में उल्लेखित जानकारी के आधार पर ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व का निर्धारण अथवा नई जानकारी का सृजन नहीं किया जा रहा है।

    इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय सुदाम खाड़े तथा कमिश्नर नर्मदापुरम श्रीकांत बनोठ, आईजी चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, हितग्राही और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • नदियां सूख रहीं, ग्लेशियर पिघल रहे… WMO की रिपोर्ट ने बताया वैश्विक जल संकट का खतरनाक सच

    नदियां सूख रहीं, ग्लेशियर पिघल रहे… WMO की रिपोर्ट ने बताया वैश्विक जल संकट का खतरनाक सच

    नई दिल्ली
    दुनिया में पानी लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. कहीं नदियों का बहाव सामान्य से कम हो गया है तो कहीं कुछ ही समय में इतनी बारिश हो रही है कि बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट ने इसी बदलते जल पैटर्न को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 

    रिपोर्ट की मानें, तो 2025 में दुनिया के नदियों का प्रवाह पिछले 35 सालों में सबसे सूखा रहा. दूसरी तरफ 2014-16 के बाद से जमीन पर मौजूद कुल जल भंडारण में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 

    जानकारी के मुताबिक, 2025 में वैश्विक नदी बेसिन के करीब 36% हिस्से में सामान्य से कम जल प्रवाह दर्ज किया गया. लगातार सातवें साल सामान्य नदी प्रवाह वाले बेसिन बेहद कम रहे.  बेसिन वह इलाका होता है जहाँ बारिश का पानी नालों, छोटी नदियों और नदियों के जरिए एक मुख्य नदी में जाकर मिल जाता है। 

    1991-2020 के औसत में जहां करीब 46% बेसिन सामान्य स्थिति में रहते थे, वहीं 2021 से 2025 के बीच यह आंकड़ा सिर्फ 34 से 38% तक सिमट कर रह गया. एशिया में मिडिल एशिया और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में नदी प्रवाह सामान्य से कम दर्ज किया गया. हालांकि साउथ और साउथ ईस्ट एशिया के कई क्षेत्रों में 2025 के दौरान सामान्य से ज्यादा पानी दर्ज किया गया। 

    अब भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या भू जल और जल के भंडारण को लेकर है. रिपोर्ट में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम जल भंडारण दर्ज होने की बात कही गई है. उत्तर-पश्चिमी भारत में लगातार गिरता जलस्तर लंबे समय के जल संकट की ओर इशारा करता है. भारत की खेती, पानी और उद्योगों की बड़ी जरूरतें भूजल से पूरी होती हैं. ऐसे में कमजोर मानसून, बढ़ता तापमान से आने वाले समय में पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। 

    एशिया में बाढ़ और सूखे का दोहरा संकट
    WMO के मुताबिक, पिछले पांच सालों में एशिया और अफ्रीका पानी से जुड़ी समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे. इन घटनाओं से जुड़ी 80% से ज्यादा मौतें भी इन्हीं दोनों क्षेत्रों में हुईं. दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 2025 में चक्रवात और अत्यधिक मानसूनी बारिश कई देशों पर भारी पड़ी. श्रीलंका, पाकिस्तान, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस में ऐसी घटनाओं से हजारों लोगों की मौत हुई। 

    ग्लेशियर पिघलने से गहराया खतरा
    साल 2025 में दुनिया भर के ग्लेशियरों ने करीब 408 गीगाटन बर्फ पिघले. इससे समुद्र का पानी करीब 1.1 मिलीमीटर तक ऊपर आया. यह लगातार चौथा साल है जब सभी बड़े ग्लेशियर इलाकों में बर्फ की कमी हुई है। 

    हिमालयी ग्लेशियर भारत और पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम हैं. गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदीयों पर इनका सीधा असर पड़ता है. तेजी से पिघलते ग्लेशियर पहले अचानक बाढ़ और तेज बहाव का खतरा बढ़ा सकते हैं, जबकि लंबे समय में सूखे मौसम में पानी की कमी और गहरा सकती है।