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  • करवा चौथ पर बनेंगे 3 शुभ योग, जानें 29 अक्टूबर को पूजा और चंद्र दर्शन का सही समय

     Karva Chauth 2026 :हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे मुख्य माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं।

    करवा चौथ कब है?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस साल 2026 में चतुर्थी तिथि 29 अक्तूबर को पड़ रही है। इस तिथि का आरंभ 29 अक्तूबर की रात 1 बजकर 6 मिनट पर होगा और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, करवाचौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा।

    करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
    करवा चौथ वाले दिन व्रत रखने के साथ ही शाम के समय विधिवत रुप से पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, 29 अक्तूबर को करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहने वाला है। इस अवधि में महिलाएं करवा माता की पूजा करती हैं और व्रत की कथा सुनती है। पूजा में आप करवा, दीपक, रोली, अक्षत, फूल और अन्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    करवा चौथ में सरगी का समय
    दरअसल, करवा चौथ की सगरी सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है। खासकर इसे सुबह के समय सूर्योदय से पहले खाने की परंपरा है। इस बार सरगी के लिए सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच का शुभ समय माना जा रहा है। लेकिन स्थानीय सूर्योदय के अनुसार सरगा का समय बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के सूर्योदय के समय का ध्यान में रखकर सारगी ग्रहण करें। सरगी के बाद ही महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं।

    करवा चौथ चंद्रोदय का समय
    करवा चौथ व्रत में मुख्य रुप से चंद्रमा के दर्शन का महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं रात में चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद चंद्र देव को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 अक्तूबर 2026 को रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर चंद्रोदय होगा। लेकिन चंद्रमा के दिखाई देने का समय शहर और स्थान के अनुसार, अलग-अलग हो सकता है।

    करवा चौथ पर बन रहे हैं ये शुभ योग
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार करवा चौथ के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। इसलिए करवा चौथ पर  गौरी योग, परिधि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल रहने वाला है। लेकिन इन योगों का प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और स्थानीय पंचांग गणना के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

     

  • Gold Price Crash: क्या सोना ₹1 लाख पर आएगा? कीमतों में गिरावट की 4 बड़ी वजहें

    Gold Price Crash: क्या सोना ₹1 लाख पर आएगा? कीमतों में गिरावट की 4 बड़ी वजहें

    मुंबई 

    सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सोना करीब 27 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि भारतीय बाजार में जनवरी के शिखर से करीब 23 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं अगस्त के MCX हाई से देखें तो घरेलू बाजार में सोना 10 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है. ऐसे में त्योहारों और वेडिंग सीजन से पहले सोना खरीदने वालों के सामने सवाल है कि क्या कीमतों में अभी और गिरावट बाकी है।

    अगस्त के हाई से कितना सस्ता हुआ सोना?
    MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स अगस्त के आखिरी हफ्ते में 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था. इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और पिछले हफ्ते भाव 1,45,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक आ गया यानी अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से कीमत करीब 11 फीसदी नीचे आ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट आई है. स्पॉट गोल्ड अगस्त के करीब 4,698 डॉलर प्रति औंस के हाई से गिरकर पिछले हफ्ते करीब 4,130 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। 

    सोने में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
    सोने में हाल की गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर हैं. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से शुरुआत में कीमतों पर दबाव आया. इसके बाद अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने भी सोने की तेजी को कमजोर किया. अमेरिकी बॉन्ड की रियल यील्ड में तेज बढ़ोतरी से बिना ब्याज देने वाला सोना निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हुआ है. वहीं डॉलर में मजबूती ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा ऊंची महंगाई और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है।
     
    क्या 1.25 लाख तक गिरेगा सोना?

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. लेकिन 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अभी बेस केस नहीं है. जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड में 4,025-3,950 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट की गुंजाइश है. इसका असर MCX गोल्ड फ्यूचर्स पर पड़ने पर कीमत करीब 1,46,200-1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है. उनके मुताबिक 1.25 लाख रुपये का स्तर तभी देखने को मिल सकता है, जब अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेजी आए और अक्टूबर में अमेरिकी CPI महंगाई का आंकड़ा अनुमान से काफी ज्यादा रहे. फिलहाल उन्हें ऐसी स्थिति की संभावना कम लगती है।

    1.34 लाख रुपये तक गिर सकता है सोना?

    जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए 3,930-4,000 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट जोन अहम है. अगर ये सपोर्ट टूटता है तो अगला सपोर्ट 3,600-3,750 डॉलर प्रति औंस का हो सकता है. उनके मुताबिक इस सपोर्ट जोन तक पहुंचने की संभावना करीब 25 फीसदी है. ऐसी स्थिति में भारतीय बाजार में सोना करीब 1,34,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है. हालांकि ये कोई बेस केस अनुमान नहीं है, बल्कि उस स्थिति का आकलन है जब अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें मौजूदा सपोर्ट से और नीचे जाती हैं। 
        
    1 लाख रुपये तक गिरने की कितनी संभावना?

    1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिरावट को एक्सपर्ट्स फिलहाल बेहद असंभावित मान रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक घरेलू सोने को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2,800 डॉलर प्रति औंस तक गिरनी होगी. उनके मुताबिक सोने को अभी भी कई स्ट्रक्चरल फैक्टर से सपोर्ट मिल रहा है. इनमें डी-डॉलराइजेशन, जियोपॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और महंगाई को लेकर लंबी अवधि की चिंताएं शामिल हैं यानी 1 लाख रुपये का स्तर देखने के लिए मौजूदा परिस्थितियों में काफी बड़ा बदलाव जरूरी होगा।
           
    भारत में गिरावट कितनी सीमित रह सकती है?

    भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले सोने की गिरावट कुछ हद तक सीमित रह सकती है. इसकी एक बड़ी वजह रुपये की चाल है. डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने का घरेलू भाव रुपये की मजबूती या कमजोरी से भी प्रभावित होता है. इसके अलावा भारत में फेस्टिव और वेडिंग सीजन शुरू हो रहा है, जिससे सोने की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये डिमांड कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकती है. हालांकि ऊंची कीमतों का असर ज्वैलरी खरीदारी पर भी दिख रहा है. ग्राहक ज्यादा हल्की ज्वैलरी खरीदने पर जोर दे रहे हैं।

    क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

    मौजूदा संकेत बताते हैं कि शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के आसपास का सपोर्ट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आगे की दिशा के लिए अहम रहेंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा करेक्शन तत्काल अवधि में जारी रह सकता है, लेकिन इसे लंबी अवधि की तेजी के बीच एक कंसोलिडेशन फेज के तौर पर भी देखा जा सकता है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF में निवेश और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसे फैक्टर सोने को लंबे समय में सपोर्ट दे सकते हैं।

    विदेशी कनेक्शन 

    वहीं 1.25 लाख रुपये तक की गिरावट संभव जरूर है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेज बढ़ोतरी और अक्टूबर की महंगाई के अनुमान से काफी ऊपर आने जैसी परिस्थितियां बननी होंगी. फिलहाल एक्सपर्ट्स इसकी संभावना कम मान रहे हैं. इसलिए मौजूदा स्थिति में सोने की कीमतों को लेकर तस्वीर दोतरफा है. शॉर्ट टर्म में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, लेकिन 1 लाख रुपये जैसे बहुत निचले स्तर की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है।
     

  • CM योगी का दावा- ‘स्वस्थ प्रदेश-सक्षम प्रदेश’ बन रहा यूपी, स्वास्थ्य व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव

    CM योगी का दावा- ‘स्वस्थ प्रदेश-सक्षम प्रदेश’ बन रहा यूपी, स्वास्थ्य व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव

    'स्वस्थ प्रदेश-सक्षम प्रदेश' बना यूपी: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से साझा की स्वास्थ्य व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की तस्वीर

    2017 में मेडिकल कॉलेजों की संख्या थी मात्र 36, अब बढ़कर हुई 85 

    एमबीबीएस की सीटें 4690 से बढ़कर 13,600 से अधिक हुईं

    उपचार की विवशता से स्वास्थ्य सुरक्षा के विश्वास तक, स्वस्थ उत्तर प्रदेश की नई पहचान

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'स्वस्थ-सक्षम उत्तर प्रदेश' की कहानी अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' के जरिए शुक्रवार को प्रदेशवासियों से साझा की। मुख्यमंत्री ने उपचार की विवशता से स्वास्थ्य सुरक्षा के विश्वास को स्वस्थ उत्तर प्रदेश की नई पहचान बताया। 

    वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज के साथ नए मानक स्थापित कर रहा यूपी
    सीएम ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और अंत्योदय के संकल्प के साथ प्रदेश की डबल इंजन भाजपा सरकार ने वर्ष 2017 से पहले की स्वास्थ्य क्षेत्र की लचर व्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक गति से कार्य किया है। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है कि जिस उत्तर प्रदेश की पहचान कभी वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया से होती थी, वही उत्तर प्रदेश आज वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज के संकल्प के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

    उपचार की सुविधा का लगातार विस्तार
    मुख्यमंत्री ने बताया कि जहां प्रदेश में वर्ष 2017 में मेडिकल कॉलेजों की संख्या मात्र 36 थी, वहीं आज यह बढ़कर 85 हो गई है। साथ ही, एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक हो चुकी हैं। इससे एक ओर युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर आमजन के लिए घर के निकट गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा का विस्तार हुआ है।

    उपचार के खर्च की चिंता से मुक्त हैं प्रदेशवासी
    मुख्यमंत्री ने लिखा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से आच्छादित 10 करोड़ से अधिक प्रदेशवासी आज गंभीर बीमारी के उपचार के भारी खर्च की चिंता से मुक्त होकर बेहतर स्वास्थ्य, सम्मान और गरिमा के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। उपचार की विवशता से स्वास्थ्य सुरक्षा के विश्वास तक, स्वस्थ उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनी है।

  • CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर मौलाना का विरोध, कहा- यह अवैध है, लोग दूर रहें

    CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर मौलाना का विरोध, कहा- यह अवैध है, लोग दूर रहें

     नई दिल्ली

    जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में माहौल बदल रहा है. एक तरफ प्रशासन ने सीजेपी को प्रोटेस्ट के लिए अनुमति नहीं दी है तो इसी बीच एक मौलाना ने मस्जिद से ऐलान करके लोगों से प्रोटेस्ट में शामिल न होने के लिए कहा है। 

    उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में एक मस्जिद से मौलाना ने लोगों के लिए ऐलान किया है. मौलाना ने लोगों से अपील की है कि वे जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल न हों. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू की है और वहां होने वाला विरोध प्रदर्शन अवैध है। 

    मस्जिद से किए गए ऐलान में मौलाना ने कहा कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में कोई भी व्यक्ति शामिल न हो. उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। 

    मौलाना ने क्या कहा?
    मौलाना ने अपने ऐलान में कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर धारा 163 लगाई है. ऐसे में वहां किसी को नहीं जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल होने जाता है और उसके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति की होगी.मौलाना ने लोगों से 8, 9 और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर नहीं जाने की अपील की. उन्होंने दोहराया कि प्रस्तावित प्रदर्शन अवैध है और लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। 

    बता दें कि, दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. संयुक्त पुलिस आयुक्त नुपुर प्रसाद ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रदर्शन का आवेदन बहुत कम समय पहले मिला, जबकि नियम के मुताबिक कम से कम 10 दिन पहले पुलिस को सूचना देनी होती है. पुलिस ने यह भी कहा कि पहले जब पार्टी को अनुमति दी गई थी, तब उसने नियमों और अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया था. नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू है और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

  • मध्यप्रदेश में सियासी हलचल, जगदीश देवड़ा ने OSD दीपम रायचुरा को हटाया; रिश्वत के आरोपों की होगी जांच

    मध्यप्रदेश में सियासी हलचल, जगदीश देवड़ा ने OSD दीपम रायचुरा को हटाया; रिश्वत के आरोपों की होगी जांच

    भोपाल
     डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी दीपम रायचुरा को पद से हटा दिया है। साथ ही मामले में विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। दीपम रायचुरा पर शराब की दुकानों के ठेके को लेकर रिश्वत के आरोप लगे थे। डेप्युटी सीएम ने कहा कि ये आरोप जिस समय को लेकर लग रहे हैं, उस समय वे हमारे ओएसडी नहीं थे।

    मेरे ओएसडी के रूप में कार्यरत नहीं थे
    डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने आरोपों पर कहा कि आज न्यूज के माध्यम से वर्ष 2024-25 में शराब ठेकों से संबंधित अनियमितताओं का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस अवधि में दीपम रायचुरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। उस समय वे मेरे OSD के रूप में कार्यरत नहीं थे।

    जांच के दिए निर्देश
    उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही मैंने संबंधित विभाग को शीघ्र जांच के निर्देश दिए हैं। जांच निष्पक्ष रूप से संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए दीपम रायचुरा को OSD के प्रभार से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है।

     मोहित गोगिया के कथित बयान में गंभीर आरोप
    करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से प्रसारित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। कथित बयान में दीपम रायचूरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि ठेके हासिल करने के लिए बैंक गारंटी के तौर पर इस्तेमाल की गई फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी मदद की गई। बयान में कहा गया है कि ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये दिए गए। इसमें 50 लाख रुपये नकद देने और बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दावा किया गया है। कथित बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि दीपक दुबे के जरिए रकम ली गई थी। इसके अलावा बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद किए जाने के दावे भी किए गए हैं। 

    मुलाकात कराने और रकम देने का भी दावा
    कथित बयान के अनुसार, वर्ष 2022-23 में तनुज सेठी ने गोगिया की मुलाकात रायचूरा से कराई थी। इसके बाद रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया था। बयान में दावा किया गया है कि दुबे उनके कामकाज देखते थे।  फिलहाल उपमुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांच के निर्देश देने और ओएसडी को प्रभार से मुक्त करने की बात कही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि शराब दुकानों के ठेकों, एफडीआर और कथित लेनदेन के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।

    धोखाधड़ी के आरोपी ने लगाया था आरोपी
    जांच एजेंसियों ने 1000 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया को गिरफ्तार किया है। गोगिया ने पूछताछ के दौरान डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचुरा का नाम लिया था। उसने जांच एजेंसियों को बताया था कि शराब की दुकानों के ठेके लिए दीपम रायचुरा के आदमी को एक करोड़ रुपए दिए थे।

    उठ रहे थे सवाल
    इसे लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रही थी। साथ ही जांच की मांग हो रही थी। पहले भी दीपम रायचुरा पर आरोप लग चुके हैं। अब सरकार से इस मामले को लंबा खींचने की जगह दीपम रायचुरा को तुरंत हटा दिया है। हालांकि रायचुरा इन आरोपों को खारिज कर रहे थे।

     

  • UP News: जेवर एयरपोर्ट को मिला नया नाम, योगी सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव किया पास

    UP News: जेवर एयरपोर्ट को मिला नया नाम, योगी सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव किया पास

    लखनऊ
    Narendra Modi International Airport Jewer Greater Noida: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम अब नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शुक्रवार को कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर दिया है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद ने अभिनंदन प्रस्ताव पारित कर उनके नेतृत्व और जनसेवा की यात्रा की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रेटर नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम पर रखने का प्रस्ताव कैबिनेट ने पास किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सात अक्टूबर देश के इतिहास में गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है। प्रधानमंत्री की 25 वर्ष की अनवरत यात्रा जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास की अनूठी मिसाल है। उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री का हार्दिक अभिनंदन करती है।

    कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने खुद इस प्रस्ताव के पारित होने पर कहा कि प्रदेश के लिए यह विशेष गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी धरती से लोकप्रिय जनप्रतिनिधि और सांसद के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 'सेवा ही समर्पण' और 'राष्ट्र प्रथम' को अपना मूलमंत्र बनाते हुए राष्ट्र निर्माण को सर्वोच्च ध्येय बनाया है। उनकी 25 वर्ष की यात्रा जनकल्याण और जनभागीदारी के माध्यम से जनविश्वास मजबूत करने का उदाहरण है।

    काशी से गहरा हुआ प्रधानमंत्री का रिश्ता
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश का रिश्ता बेहद आत्मीय है। वर्ष 2014 में काशी आने पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। काशी और मां गंगा से शुरू हुआ यह आत्मीय संबंध समय के साथ निरंतर गहरा हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह रिश्ता आज प्रदेश के सर्वांगीण कायाकल्प का आधार बना है। केंद्र और राज्य के साझा संकल्प तथा 'टीम इंडिया' की भावना के साथ उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

    2017 के बाद बदली शासन की कार्यसंस्कृति
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश प्रशासनिक अस्थिरता, आमजन में असुरक्षा की भावना और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा था। प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता से प्रेरणा लेकर प्रदेश ने शासन की नई कार्यसंस्कृति अपनाई। इसके परिणामस्वरूप सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आधुनिक बुनियादी ढांचा और निवेश के अनुकूल वातावरण उत्तर प्रदेश की पहचान बनकर उभरे हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय तथा साझा प्रयासों से प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उत्तर प्रदेश अब नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

     

  • दिल्ली पुलिस के बॉडी कैमरों पर विवाद क्यों? जानें रिकॉर्डिंग से लेकर हाईकोर्ट के फैसले तक पूरी बात

    दिल्ली पुलिस के बॉडी कैमरों पर विवाद क्यों? जानें रिकॉर्डिंग से लेकर हाईकोर्ट के फैसले तक पूरी बात

     नई दिल्ली  

    दिल्ली में प्रदर्शनों का दौर जारी है. कांग्रेस की ओर से हो रहे लगातार प्रदर्शन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी भी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी में है. इसी बीच, दिल्ली पुलिस के जवानों की तस्वीरें शेयर हो रही हैं, जिसमें वो अपनी वर्दी पर एक डिवाइस लगाए हुए नजर आ रहे हैं. दिखने में ये पुलिस के वायरलैस जैसे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अब पुलिस के इस डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर काफी चर्चा हो रही है और मामला कोर्ट में भी पहुंचा है. ऐसे में जानते हैं कि ये डिवाइस है क्या और इसे लेकर क्या विवाद है?

    इस डिवाइस को लेकर क्या विवाद है, इसे जानने से पहले जानते हैं कि आखिर ये है क्या… 

    दरअसल, ये डिवाइस कोई वायरलैस नहीं हैं, जबकि कैमरे हैं. इन कैमरों को बॉडी वॉर्न कैमरा कहा जाता है. ये छोटे, पोर्टेबल वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस होते हैं, जिन्हें पुलिसकर्मी अपनी यूनिफॉर्म पर (आमतौर पर छाती, कंधे या कॉलर पर) पहनते हैं. ये आमतौर पर छोटे बॉक्स जैसे होते हैं, जो आप फोटो में देखकर समझ सकते हैं. इसमें हाई-रेजोल्यूशन वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होती है. इसे अधिकारी मैन्युअली ऑन/ऑफ कर सकते हैं, या कुछ मॉडल्स में ऑटोमैटिक एक्टिवेशन (जैसे हथियार निकालने, दौड़ने या झटके पर) की सुविधा होती है। 

    इसकी बैटरी लाइफ कई घंटों की होती है, और डेटा एन्क्रिप्टेड रहता है. पुलिस की ओर से इसका इस्तेमाल सबूत जुटाने के लिए किया जाता है, जिसमें घटनास्थल, बातचीत, गिरफ्तारी या प्रदर्शन के दौरान जो कुछ होता है उसका रियल-टाइम वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड रखा जाता है. पुलिस और आम नागरिक दोनों के व्यवहार का रिकॉर्ड रहता है. सीधे शब्दों में कहें तो इसका मकसद प्रदर्शन के दौरान होने वाली घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग रखना है, जिससे पुलिस पर अगर किसी तरह का कोई आरोप लगे तो पुलिस वीडियो सबूत के जरिए अपना पक्ष पेश कर सके। 

    अब सवाल है कि ये चर्चा में क्यों में है?
    हाल ही में एक जनहित याचिका पुलिस और आरएएफ के उन जवानों के लिए बॉडी कैमरा जरूरी करने की मांग को लेकर दाखिल की गई थी, जो भीड़ नियंत्रण, प्रदर्शन संभालने और भीड़ हटाने की कार्रवाई में तैनात होते हैं.याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे जवानों के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई जाए. इसके तहत ड्यूटी पर तैनाती के समय से लेकर ड्यूटी खत्म होने तक बॉडी कैमरा लगातार चालू रहे। 

    इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स  के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में फैसला सरकार पर छोड़ दिया है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल किया जाना सही है या गलत… इसे लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। 

  • अमेरिका में ‘गोल्डन केज’ में फंसे भारतीय कर्मचारी! TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन पर रोक

    अमेरिका में ‘गोल्डन केज’ में फंसे भारतीय कर्मचारी! TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन पर रोक

    नई दिल्ली
     अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव ने एक लाख से ज्यादा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को परेशानी में डाल दिया है. फेडरल अथॉरिटीज ने इंफोसिस और टीसीएस समेत कई प्रमुख कंपनियों को PERM एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है. लेबर सेक्रेटरी ने इन दिग्गज कंपनियों पर वीजा धोखाधड़ी और लेबर सर्टिफिकेशन प्रोसेस के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. इस वजह से एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों प्रोफेशनल्स के लिए परमानेंट रेजीडेंसी का रास्ता अचानक बंद हो गया है. यह फैसला मुख्य रूप से अमेरिकी वर्कर्स के अधिकारों को बचाने के लिए लिया गया है. यह बैन माइक्रोसॉफ्ट और अडोबी पर भी लागू हुआ है। 

    माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B फ्रॉड के आरोपों को नकारा, कहा- 80% आवेदन मौजूदा कर्मचारियों के लिए

    माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B वीजा सिस्टम के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया है. कंपनी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में दाखिल करीब 6,000 H-1B आवेदनों में 80% मौजूदा कर्मचारियों के स्टेटस बढ़ाने या बदलने के लिए थे। 

    कंपनी के मुताबिक इन आवेदनों का इस्तेमाल नए लोगों को नौकरी देने के लिए नहीं किया गया. बाकी आवेदन ऐसे कर्मचारियों के लिए थे जो पहले से अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे थे और माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े। 

    Microsoft ने कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी वर्कफोर्स का करीब 1% हैं. यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस ऐलान के कुछ घंटे बाद आया जिसमें माइक्रोसॉफ्ट को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया वाले एक सरकारी कार्यक्रम से निलंबित करने की बात कही गई थी। 

    ‘गोल्डन केज’ में कैसे फंस गए हजारों भारतीय टेक वर्कर्स?

        सस्पेंशन के कारण कंपनियां नए पर्म एप्लिकेशन फाइल नहीं कर सकती हैं. पेंडिंग सर्टिफिकेशन भी आगे नहीं बढ़ेंगे। 

    इससे ग्रीन कार्ड की लाइन वहीं रुक गई है. एच-4 वीजा वाले जीवनसाथियों के वर्क ऑथराइजेशन पर खतरा मंडराने लगा है. उम्र पूरी कर रहे बच्चों को डिपोर्टेशन का डर सता रहा है। 

    ग्रीन कार्ड बैन से क्या पड़ेगा असर?
        इस बैन का आर्थिक असर सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने वाला है. फंसी हुई ग्रीन कार्ड एप्लिकेशन वाले टेक वर्कर्स आसानी से कंपनियां नहीं बदल सकते। 
        वे नया प्रमोशन या टेक्निकल रोल भी स्वीकार नहीं कर सकते. ऐसा करने पर उनके कई सालों के फाइलिंग टाइमलाइन को रीसेट करना पड़ेगा। 
        ये इंजीनियर्स अपने मौजूदा रोल्स में लॉक हो गए हैं. परिवारों के लिए घर खरीदना या बच्चों की शिक्षा का फैसला लेना रिस्की हो गया है. उनका भविष्य अब प्रशासनिक अपीलों पर निर्भर है। 

    सबसे पहले समझिए आखिर PERM क्या है?
    बता दें कि यह अमेरिका में स्थायी निवास प्रक्रिया का एक बेहद अहम और शुरुआती चरण है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉंसर करती हैं।

    बात अब इसके नियम की करें तो, इस प्रक्रिया के तहत श्रम विभाग को यह प्रमाणित करना होता है कि किसी खास नौकरी के लिए पर्याप्त अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कंपनी किसी विदेशी नागरिक को रख रही है।

    अब जानिए कंपनियों पर क्यों लगाई गई रोक?
    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ये बड़ी कंपनियां इस प्रोग्राम का दुरुपयोग कर रही हैं। अमेरिकी स्थानीय नागरिकों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी कामगारों खासकर H-1B वीजाधारकों को कम वेतन पर रखा जा रहा है। प्रशासन का तर्क है कि इससे अमेरिकी युवाओं के रोजगार पर असर पड़ रहा है।

    अब जानिए भारतीयों पर इसका क्या असर होगा?
    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय, जो मुख्य रूप से H-1B वीजा पर वहां नौकरी कर रहे हैं और लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह एक बड़ा झटका है। इसका कारण है कि H-1B एक अस्थायी वर्क वीजा है, जिसकी एक तय समयसीमा होती है।

    इसके इतर, अमेरिका में हमेशा के लिए बसने के लिए PERM सर्टिफिकेट बेहद अहम सीढ़ी है। ऐसे में अब इस रोक के बाद, इन 8 कंपनियों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड की फाइलें आगे नहीं बढ़ पाएंगी।

    नौकरी तो कर सकते हैं, लेकिन बस नहीं सकते
    अच्छा, ऐसा भी नहीं है कि इस प्रतिबंध के बाद भारतीय या फिर किसी भी देश के वैसे कर्मचारी जो कि अमेरिका में रहते हैं, उनके वहां रहने में दिक्कतें आएंगी। राहत की बात यह है कि इस बैन से कर्मचारियों का मौजूदा H-1B वीजा तुरंत रद नहीं हुआ है।

    इस बात में कोई दोराय नहीं है कि वे अभी कानूनी रूप से अमेरिका में रहकर अपनी नौकरी कर सकते हैं। लेकिन, उनकी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए अटक गई है।

    अब क्या करेंगे भारतीय पेशेवर?
    देखिए, चूंकि भारत के लाखों आईटी पेशेवर विशेषकर टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL जैसे संस्थानों के कर्मचारी अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए बरसों-बरस का लंबा इंतजार करते हैं, ऐसे में इस रास्ते के बंद होने से उनके भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। उन्हें अब अमेरिकी वीजा नियमों के तहत अपने वर्क वीजा को बार-बार रिन्यू कराना पड़ेगा और लंबे समय तक अस्थायी स्थिति में रहना होगा।

    दूसरी तरफ मुश्किल बात यह भी है कि कंपनियों के लिए अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को रोकना और उन्हें स्थायी भविष्य का भरोसा देना कठिन हो जाएगा। इससे कई पेशेवर मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो उन्हें एक दिन अमेरिका छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है।

    आईटी सेक्टर पर इस बड़े फैसले के बाद अब आगे क्या विकल्प बचते हैं?
    यह बैन इमिग्रेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे ऑफशोर कंसल्टिंग स्ट्रक्चर पर अमेरिकी सरकार की निगरानी काफी बढ़ गई है. प्रभावित आईटी कंपनियां अब इसके कानूनी उपाय तलाश रही हैं। 

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय टेक टैलेंट अब दूसरे देशों का रुख कर सकता है. इसके साथ ही भारत के टेक इकोसिस्टम में वापसी की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. ग्रीन कार्ड रास्तों पर निर्भर रहना अब रिस्की हो गया है। 

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ी चिंता, 60 लाख पेड़ों की कटाई के दावे पर MP हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ी चिंता, 60 लाख पेड़ों की कटाई के दावे पर MP हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    याचिका में दावा किया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई होगी।

    कोर्ट ने रिपोर्ट में बताई गई कथित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और उस पर राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है।

    चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने ये निर्देश दिए। जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है और गुरुवार को स्वयं अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

    केन-बेतवा परियोजना पर कोर्ट ने क्या पूछा
        CEC की रिपोर्ट में परियोजना से जुड़ी कौन-कौन सी अनियमितताएं बताई गई हैं?
        सुप्रीम कोर्ट में परियोजना से संबंधित कार्यवाही की वर्तमान स्थिति क्या है?
        CEC की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है?

    वन्यजीवों और घड़ियाल अभयारण्य पर असर की आशंका
    याचिका में कहा है कि परियोजना के लिए होने वाले जलभराव से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इससे बाघ, तेंदुआ, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के गलियारों पर असर पड़ने की आशंका है।

    याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की CEC ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त आंकलन नहीं किया।

    याचिका में इसका स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की गई है।

    60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा
    याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान बताया है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे बुंदेलखंड के पर्यावरण, वर्षा चक्र और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही जल संकट और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है।

    याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, कई आधिकारिक एजेंसियों ने रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियों की ओर संकेत किया है।

    नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की विशेषज्ञ समिति की ओर से स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने की कथित मांग को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है।

    आदिवासियों और ग्रामीणों पर दबाव का आरोप
    याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सैकड़ों आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रतीकात्मक ‘चित्ता आंदोलन’ के जरिए विरोध जताया।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर दबाव बनाया। राशन, पानी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने तथा गांवों में आवाजाही प्रतिबंधित करने जैसी कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

    1980 के दशक में हुई थी परियोजना की परिकल्पना
    केन-बेतवा लिंक परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक में की गई थी। वर्ष 2014 में केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया।

    8 दिसंबर 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के वित्त पोषण और क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया है।

    परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है।

    परियोजना से मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों को सिंचाई और पेयजल सुविधा मिलने का दावा किया है। हालांकि, जनहित याचिका में इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र से CEC की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही की स्थिति पेश करने को कहा है।

     

  • वन्यजीव सप्ताह में युवाओं की अनूठी पहल, कला के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने की अपील

    वन्यजीव सप्ताह में युवाओं की अनूठी पहल, कला के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने की अपील

    कला और कल्पनाशीलता से युवाओं ने दिया वन्यजीव संरक्षण का संदेश

    वन्यजीव सप्ताह का समापन, कला और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों ने दिखाई पर्यावरण के प्रति जागरूकता

    रायपुर
     वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने वाली युवा प्रतिभाओं को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन के दंडकारण्य सभागार में पुरस्कृत किया गया। वन्यजीव सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में कला और ज्ञान आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

              वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा रायपुर वनमंडल द्वारा कलिंगा विश्वविद्यालय के हरित समूह एवं प्राणीशास्त्र विभाग के सहयोग से 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया गया। ‘जुड़ते प्राकृतिक आवास, फलते-फूलते वन्यजीव’ की थीम पर आयोजित इस सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के जरिए प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण का महत्व समझा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे।

               सप्ताहभर चले आयोजन में कागज की आकृतियां और घोंसलों के प्रतिरूप बनाने, बीजगोलक (सीड बॉल) निर्माण, वन्यजीव छायाचित्रण तथा प्रकृति भ्रमण जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

             शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता में कलिंगा विश्वविद्यालय के देवेश मिंज, सिद्धांत नागपुरे और वर्षा साहू क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे। निबंध प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय की श्रेया साहू, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उपरवारा की शैल्या साहू और पीएम स्वामी आत्मानंद विद्यालय माना कैंप के आकाश दास ने क्रमशः प्रथम तीन स्थान प्राप्त किए। पीएम जवाहर नवोदय विद्यालय माना कैंप की हेमा और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गनोद की दीपिका साहू को सांत्वना पुरस्कार मिला। वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं और प्रकृति आधारित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने तथा जैव विविधता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर दिया।