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  • शेयर बाजार में IT स्टॉक्स की धूम, ट्रंप के झटके के बाद भी हरे निशान में कारोबार

    शेयर बाजार में IT स्टॉक्स की धूम, ट्रंप के झटके के बाद भी हरे निशान में कारोबार

    मुंबई   
       अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिली. 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई. मार्केट खुलते ही सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में 200 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, रुपये में भी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखने को मिली. रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 96.74 प्रति डॉलर पर खुला. गुरुवार को कारोबार बंद होने के समय यह 96.78 प्रति डॉलर पर था। 

    शुरुआती कारोबार में TCS, इंफोसिस, HCLTech समेत प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए. शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयरों में 2.62%, टीसीएस के शेयरों में 3.39%, एचसीएल के शेयरों में 2.53% और विप्रो के शेयरों में 2.47% की तेजी देखने को मिली. अमेरिकी कार्रवाई के बीच विदेशी बाजारों में भी आईटी कंपनियों के शेयरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. नैस्डैक (Nasdaq) पर माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.35% तक लुढ़क गए, जबकि कॉग्निजेंट के शेयरों में 5.15% की तेजी दर्ज की गई. वहीं, पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में कैपजेमिनी के शेयर 0.045% की मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे. नैस्डैक पर एडोबी के शेयरों में भी 3.56% का उछाल दर्ज किया गया। 

    8 IT कंपनियों पर अमेरिकी एक्शन

    अमेरिकी सरकार की ओर से TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बाद माना जा रहा था कि इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है. वजह यह है कि प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट (PERM) अमेरिका में रोजगार के आधार पर विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. इस पर रोक से प्रभावित कंपनियों के जरिए स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे विदेशी कर्मचारियों के मामले अटक सकते हैं. इससे कंपनियों की रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी और कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। 

    हालांकि, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती चाल इसके उलट रही. भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला और प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे. इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने फिलहाल अमेरिकी फैसले को लेकर तत्काल बड़ी बिकवाली नहीं की. हालांकि, केवल शुरुआती तेजी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इस कार्रवाई का कंपनियों के कारोबार या शेयरों पर आगे कोई असर नहीं पड़ेगा. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनियों के बयानों, अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम और इस फैसले के वास्तविक कारोबारी असर पर रहेगी। 

    इस पूरे मामले में एक अहम बात यह है कि PERM से सस्पेंशन और कंपनियों के रोजमर्रा के कारोबार पर असर, दोनों अलग-अलग पहलू हैं. PERM मुख्य रूप से रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है. इस पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अमेरिका में कारोबार नहीं कर सकेंगी या वहां काम कर रहे सभी विदेशी कर्मचारियों के वीजा रद्द हो जाएंगे. यही वजह है कि इस फैसले का बाजार पर तत्काल असर नहीं दिखा. इसके साथ-साथ कंपनियों के कारोबार पर इसके वास्तविक प्रभाव को अगले कुछ कारोबारी सत्रों में देखना अहम रहेगा। 

    एक्शन पर IT कंपनियों ने दी प्रतिक्रया
    भारत में सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (NASSCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सरकार की ओर से आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का फैसला ग्रीन कार्ड पाने के एक खास रास्ते को प्रभावित करता है, न कि H-1B वीजा कार्यक्रम को. संगठन ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्तियां बढ़ाई हैं. ये कंपनियां अमेरिकी कारोबारों को सहयोग देने के साथ वहां जॉब क्रिएशन में भी योगदान दे रही हैं। 

    वहीं, TCS ने साफ किया है कि इस कार्रवाई से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति पर खास असर पड़ने की आशंका नहीं है. कंपनी अगले पांच साल में अमेरिका में 15,000 लोगों को नौकरी देने की योजना पर कायम है. TCS के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एक अंक में रहे हैं और अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है. माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने करीब 6,000 H-1B वीजा आवेदन किए थे। 

    इनमें से 80 फीसदी आवेदन पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों के वीजा की अवधि बढ़ाने या उनकी वीजा स्थिति में बदलाव के लिए थे, न कि नए लोगों को नौकरी देने के लिए. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, नए कर्मचारियों के लिए किए गए बाकी आवेदन उन लोगों के थे, जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और कंपनी में नौकरी करने का फैसला लिया था. कंपनी ने कहा कि ये आवेदन अमेरिका में उसके कुल कर्मचारियों की संख्या का महज एक फीसदी थे। 

     

  • निवेशकों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो, तय समयसीमा में पूरी हो प्रक्रिया: मुख्यमंत्री

    निवेशकों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो, तय समयसीमा में पूरी हो प्रक्रिया: मुख्यमंत्री

    जीबीसी@5.0 के लिए ₹7.55 लाख करोड़ की 7000 परियोजनाएं तैयार, सभी 75 जिलों को मिलेगा लाभ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की GBC@5.0 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेशकों को हर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश

    लगभग 7,000 परियोजनाओं में निवेश, पश्चिमांचल से बुंदेलखंड तक औद्योगिक विकास का विस्तार

    निवेशकों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो, तय समयसीमा में पूरी हो प्रक्रिया: मुख्यमंत्री

    हालिया सड़क हादसों पर मुख्यमंत्री ने जताया दु:ख, एक्सप्रेसवे पर 24×7 निगरानी और निजी क्षेत्र के सहयोग से ट्रॉमा सेंटर विकसित करने के निर्देश

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी@5.0 की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  उच्चस्तरीय बैठक में समारोह की तैयारियों के साथ प्रस्तावित निवेश परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। वर्तमान स्थिति के अनुसार जीबीसी@5.0 के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में लगभग 7,000 परियोजनाओं के जरिए ₹7.55 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं से जुड़ी स्वीकृतियों, भूमि, आधारभूत सुविधाओं और अन्य प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए।

    इन्वेस्ट यूपी की ओर से बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित परियोजनाओं में विभागों के माध्यम से लगभग साढ़े तीन हजार परियोजनाएं, जिलों के स्तर पर निवेश सारथी पोर्टल से जुड़ी साढ़े तीन हजार से अधिक परियोजनाएं तथा इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से 100 से अधिक बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिमांचल में करीब पौने पांच लाख करोड़ रुपये, पूर्वांचल में 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक, मध्यांचल में 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बुंदेलखंड में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। बड़ी परियोजनाओं में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली करीब 90 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें लगभग पौने पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

    सेक्टरवार निवेश में डेटा सेंटर, ऊर्जा, रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात एवं सीमेंट, फार्मा एवं रसायन, वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल और पर्यटन प्रमुख हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में करीब ₹1.8 लाख करोड़, ऊर्जा क्षेत्र में ₹1.15 लाख करोड़ से अधिक और रियल एस्टेट में ₹75 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हैं। विनिर्माण क्षेत्र में करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपये तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। 

    बैठक में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पहले से चौथे संस्करण तक की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि जीबीसी 1 से 4 के माध्यम से 16 हजार से अधिक परियोजनाओं में 8 हजार से अधिक परियोजनाएं वाणिज्यिक संचालन में आ चुकी हैं, जबकि 8 हजार से अधिक परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी केवल निवेश परियोजनाओं को प्रारंभ करने का अवसर नहीं है, यह प्रदेश में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं को जीबीसी@5.0 में शामिल किया जा रहा है, उनकी तैयारियों और आवश्यक अनुमतियों की विभागवार निगरानी की जाए। निवेशकों के साथ नियमित संवाद रखते हुए उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।

    निवेशकों को मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों के भुगतान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी निवेशक को स्वीकृत प्रोत्साहन राशि के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो तथा पात्र निवेशकों को निर्धारित समयसीमा में प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाए। बैठक में निवेश प्रोत्साहन के लिए स्वीकृत बजट, अब तक किए गए भुगतान और आगामी अवधि में होने वाले वितरण की भी समीक्षा की गई। 

    बैठक में प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे पर हाल के दिनों में हुई सड़क दुर्घटनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दुर्घटनाओं पर दु:ख व्यक्त करते हुए इनके कारणों की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट की पहचान, ओवरस्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण, कोहरे के दौरान दृश्यता प्रबंधन, सुरक्षा कैमरों और रडार की निगरानी तथा टोल प्लाजा पर वाहनों की फिटनेस और चालकों की सतर्कता की जांच को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। यूपीडा, परिवहन विभाग और पुलिस को समन्वित सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की कार्ययोजना पर भी काम करने को कहा गया।

  • सरकारी कर्मचारियों को झटका! 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद तुरंत नहीं बढ़ेगी सैलरी

    सरकारी कर्मचारियों को झटका! 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद तुरंत नहीं बढ़ेगी सैलरी

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी का फायदा आखिर कब से मिलना शुरू होगा। वेतन आयोग (Pay Commission) की प्रक्रिया सिर्फ रिपोर्ट तैयार होने तक सीमित नहीं है। आयोग को अपनी रिकमेंडेशन देने के बाद भी सरकार की समीक्षा, मंजूरी और नोटिफिकेशन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए रिपोर्ट जमा होने और सैलरी में वास्तविक बदलाव दिखने के बीच कुछ महीनों का अंतर हो सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    8th पे कमीशन को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में करीब 11 महीने पूरे हो चुके हैं और आयोग फिलहाल एम्पलायी व पेंशनर्स संगठन के साथ बातचीत कर रहा है। अब तक देश के कई शहरों में बैठकें हो चुकी हैं। अगली मीटिंग बेंगलुरु में 7-8 अक्टूबर और इसके बाद मुंबई में 22-23 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं।

    आयोग ने दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर, लखनऊ, श्रीनगर, हैदराबाद, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जयपुर, पुडुचेरी और चंडीगढ़ समेत कई स्थानों पर स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की है। हालांकि, रिपोर्ट कब जमा होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं है। कुछ एक्सपर्ट का अनुमान है कि बातचीत नवंबर तक पूरे होने पर रिपोर्ट फरवरी या मार्च 2027 में आ सकती है, जबकि एक अन्य अनुमान के मुताबिक आयोग अपनी रिपोर्ट मई 2027 की डेडलाइन तक जमा कर सकता है।

    कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि पे कमीशन की रिपोर्ट सबमिट होने का मतलब यह नहीं है कि अगले ही महीने सैलरी बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दी गई रिकमेंडेशन को पहले सरकार की तरफ से एग्जामिन किया जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से गठित मिनिस्टर्स का ग्रुप रिपोर्ट की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर आयोग से क्लेरिफिकेशन या बदलाव की मांग भी की जा सकती है।

    इसके बाद सरकार रिकमेंडेशन पर अंतिम फैसला लेगी और उन्हें लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यही वजह है कि रिपोर्ट सबमिशन और एक्चुअल इंप्लीमेंटेशन के बीच कई महीनों का गैप हो सकता है।

    इंप्लीमेंटेशन की अवधि को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के सी. श्रीकुमार के मुताबिक सरकार रिकमेंडेशन लागू करने में करीब 3 से 4 महीने ले सकती है। वहीं, केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और कामगार परिसंघ (Confederation of Central Government Employees & Workers) के एसबी यादव का अनुमान है कि रिव्यू और फाइनल डिसीजन की प्रक्रिया में करीब 4 से 6 महीने लग सकते हैं।

    इस हिसाब से अगर 8th पे कमीशन अपनी रिपोर्ट मई 2027 तक जमा करता है, तो सैलरी रिवीजन का एक्चुअल इंपैक्ट 2027 के दूसरे हिस्से या साल के अंत में देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम टाइमलाइन पूरी तरह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।

    8th पे कमीशन की नई पे स्केल को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी किए जाने की उम्मीद बताई जा रही है, लेकिन एक्च्युअल इंप्लीमेंटेशन बाद में हो सकता है। ऐसी स्थिति में इफेक्टिव डेट और इंप्लीमेंटेशन डेट के बीच की अवधि के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर मिल सकते हैं। हालांकि, एरियर की अवधि और भुगतान को लेकर अंतिम फैसला सरकार की नोटिफिकेशन के बाद ही स्पष्ट होगा।

    पुराने पे कमीशन को देखें तो रिकमंडेशन तैयार करने में अलग-अलग समय लगा है। 7th पे कमीशन का गठन फरवरी 2014 में हुआ था और उसने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट जमा की थी। वहीं, 6th पे कमीशन अक्टूबर 2006 में गठित हुआ और मार्च 2008 में report दी। इससे साफ है कि पे कमीशन की पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। इसलिए 8th CPC के मामले में भी कर्मचारियों को रिपोर्ट, सरकार अप्रूवल और नोटिफिकेशन तीनों चरणों को ध्यान में रखकर सैलरी हाइक की टाइमलाइन समझनी चाहिए।

  • UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    नई दिल्ली
    यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लगाने की योजना 15 अक्टूबर से लागू होनी है। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे 1 जनवरी तक टालने पर विचार किया जा रहा है। यानी फेस्टिव सीजन में इससे रिटेलर्स को राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकती है।

    इस रिपोर्ट से पेमेंट एग्रीगेटर्स पेटीएम के शेयर 10% गिर गए और कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया। इसी तरह मोबिक्विक और पाइन लैब्स में 8% तक की गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ देर के लिए 1,558.80 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। मार्केट खुलने के कुछ ही मिनटों में कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,972 करोड़ रुपये कम हो गया।

    पेटीएम शेयर
    पेटीएम का 52 हफ्ते का टॉप 1,856.50 रुपये है। मोबिक्विक के शेयर 8% से ज्यादा गिरकर 234.52 रुपये पर आ गए, जबकि पाइन लैब्स के शेयर 4% से ज्यादा फिसलकर 170.21 रुपये पर आ गए। मोबिक्विक का 52 हफ्ते का टॉप 290.35 रुपये है। इसी तरह पाइन लैब्स का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 283.70 रुपये है।

    ट्रेडर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन के इस बात पर चिंता जताई थी कि त्योहारों की सेल के दौरान MDR शुरू करने से बिजनेस के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य बुधवार को MDR टाइमिंग और दूसरी बातों पर चर्चा करने के लिए मिले।

    वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
     एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए। 

    वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए। 

    UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
    NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है. 

    इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। 

    ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है। 

    2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
    2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा। 

    रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा। 

    अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
    सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। 

    इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा। 

    नो यूपीआई डे
    इस महीने की शुरुआत में, होलसेल ट्रेडर्स और रिटेलर्स ने 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR के प्रस्तावित लागू होने के विरोध में 'नो UPI डे' मनाया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को MDR फीस से छूट देने पर भी विचार कर रही है। मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत 1 लाख रुपये तक के मंथली टर्नओवर वाले बिजनेस को रोलआउट के तहत छूट दी जानी थी।

     

  • दीपावली 2026 की तारीख हुई साफ, 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन; जानें शुभ मुहूर्त

    दीपावली 2026 की तारीख हुई साफ, 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन; जानें शुभ मुहूर्त

     Diwali 2026 : दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। रोशनी और खुशियों का यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच दिवाली की तारीख को लेकर उत्सुकता है। आइए जानते हैं 2026 में दिवाली किस दिन मनाई जाएगी और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

    कब है दिवाली?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इस साल दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन शाम के समय घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को दीपों और रंगोली से सजाते हैं।

    लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
    दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ करके सजाएं। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर देवी-देवताओं का ध्यान कर सकते हैं।

    दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तारीख
    धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
    छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी: 7 नवंबर 2026, शनिवार
    दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार
    गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर 2026, मंगलवार
    भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार

    दीपावली की पूजा विधि

    •     दिवाली की पूजा से पहले पूजा स्थल और पूरे घर की साफ-सफाई कर लें।
    •     इसके बाद पूजा की चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
    •     पास में कलश रखें और उस पर रोली से तिलक करें।
    •     इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आवश्यक पूजा सामग्री अर्पित करें।
    •     पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान और पूजन से करें।
    •     उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें।
    •     देवी को फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
    •     पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए दीप जलाएं।
    •     इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा और कथा कर सकते हैं।
    •     अंत में देवी-देवताओं की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।
    •     मान्यता के अनुसार, दिवाली की रात दीप जलाने और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य, सुख और समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने घर और पूजा स्थल को दीपों से सजाते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। भगवान गणेश को शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की आराधना करने की भी परंपरा है।

    दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान
        दिवाली के दिन पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
        पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा और शांत मन से शामिल हों।
        लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
        घर में दीप जलाते समय उनकी सुरक्षित जगह का ध्यान रखें, ताकि त्योहार के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

     

  • Navratri Ghatasthapana 2026: कलश स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

    Navratri Ghatasthapana 2026: कलश स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

    Sharadiya Navratri:शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से है। पहले दिन ही मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए। तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है।

    वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है। अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए जानते हैं कि कलसश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है?

    कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें?
    नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं। इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है। इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं। सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें।

    नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां
    1. कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें। इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए। इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें।

    2. नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो। कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो।

    3. नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें। इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें। ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो। बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए।

  • UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब नहीं होगा. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये थे. लेकिन आज नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद BJP के 8 और समाजवादी पार्टी (सपा) के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है. यानी अब इन 10 सीटों के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है. इसे देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर 16 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया था। 

    10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने दाखिल किया था नामांकन
    चुनाव प्रक्रिया के तहत 29 सितंबर से 6 अक्टूबर तक नामांकन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच तथा 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की समयसीमा तय है. जिसके तहत 10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। 

    सबसे पहले नामांकन कर बैकफुट पर आई सपा
    नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया. वहीं 1 अक्टूबर को कांते सयन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा. हालांकि इस दौरान सपा ने जल्द ही अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतारने का ऐलान कर दिया था. हालांकि बीते 6 अक्टूबर को नामांकन के अंतिम दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” पोस्ट कर अपना तीसरा उम्मीदवार ना उतारने का ऐलान कर BJP और सपा के सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन तय कर दिया था। 

    BJP के आत्मविश्वास से बैकफुट पर आये विपक्षी
    इस दौरान BJP ने अपने 8 उम्मीदवारो के नाम का ऐलान कर दिया था. जिसमें 7 को जिताने के लिए BJP के पास पर्याप्त संख्या थी. जबकि BJP ने अपना 8 वां उम्मीदवार विपक्षी विधायकों के समर्थन के भरोसेमंद मैदान में उतारा था. जिसके बाद एक ओर जहाँ विपक्ष बैकफुट पर नज़र आया. तो वही BJP पूरे आत्माविश्वास के साथ CM योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी CM के साथ संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ BJP ने अपने सभी 8 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराते हुए नज़र आई. जिसमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार शामिल रही. हालांकि इस दौरान ओमकार नाथ चौरसिया ने भी बिना आवश्यक 10 प्रस्तावको के ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. जिससे 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों के नामांकन हो गए। 

    दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज
    7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने कांते सयन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र खारिज कर दिए. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक दोनों निर्दलीय उम्मीदवार आवश्यक 10 प्रस्तावकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सके थे. जिसके चलते बिना 10 प्रस्तावको के ही नामांकन पत्र दाखिल कर देने के आधार पर इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारो का नामांकन ख़ारिज कर दिया गया है. अब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मैदान में केवल BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार रह गए हैं. ऐसे में इन सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। 

    9 को नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट
    अब 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी. यदि कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है. तो इसके बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी. और सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन का सर्टिफिकेट भी दें दिया जायेगा. और फिर उसके बाद बिना मतदान ही राज्यसभा चुनाव की समस्त प्रक्रियाओ को संपन्न करने की औपचारिकताओ को भी पूरा कर दिया जायेगा। 

    इन राज्यसभा सदस्यों का 25 नवंबर को खत्म होगा कार्यकाल
    उत्तर प्रदेश से जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी.एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा को बीते दिनों अंडमान निकोबार का उप राज्यपाल बना दिया गया है. जिसके चलते राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे जाने के चलते उनकी सीट बीते 11 सितंबर 2026 से रिक्त है। 

  • भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    बेंगलुरु 

     भारत के तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम को नई रफ्तार मिली है. अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ने देसी राफेल फाइटर जेट के नाम से मशहूर तेजस लड़ाकू विमान के लिए 4 F404 इंजन भेजा है. बता दें कि इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम पर प्रतिकूल असर पड़ा और यह प्रोग्राम तय समय से काफी पीछे चल रहा है. अब इसके रफ्तार पकड़ने की संभावना बढ़ गई है. अमेरिकी कंपनी ने तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन की आपूर्ति शुरू कर दी है. सितंबर महीने में 4 F404 भेजे गए. बताया जा रहा है कि ऐसे 20 जेट इंजनों की सप्‍लाई का प्‍लान ट्रैक पर है। 

    जानकारी के अनुसार, अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम के लिए सितंबर 2026 में 4 F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भेजे हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने न्‍यूज एजेंसी ANI को यह जानकारी दी है. इसके साथ ही जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 इंजनों की आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कंपनी की प्रगति जारी है. GE Aerospace के प्रवक्ता ने आगे बताया कि कंपनी भारत के तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति देने के लिए आवश्यक इंजनों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किए हुए है. कंपनी ने HAL और भारतीय वायुसेना के साथ अपनी साझेदारी पर भी जोर दिया. सितंबर की खेप से पहले अगस्त में तीन इंजन HAL को भेजे गए थे। 

    2021 में 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर
    पूर्व HAL चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में ANI को बताया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 F404 इंजन की आपूर्ति का आश्वासन दिया है. HAL ने तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए 2021 में GE से 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर दिया था. इस ऑर्डर के तहत पहला इंजन 25 मार्च 2025 को भारत पहुंचा था. GE के मुताबिक, अतिरिक्त ऑर्डर मिलने के समय F404-IN20 इंजन की उत्पादन लाइन करीब 5 वर्षों से बंद थी. कंपनी को उत्पादन दोबारा शुरू करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन को भी फिर से सक्रिय करना पड़ा. GE के कॉम्बैट एंड ट्रेनर इंजन कारोबार के महाप्रबंधक शॉन वॉरेन ने बताया था कि कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई थी। 

  • युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

    युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री  साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री  साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए।

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।

    अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य

    युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

    “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया”

    बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला।

    मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला।

    समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य

    छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए।

    “जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

    कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री  साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और यह आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘जल संचय-जनभागीदारी’ अभियान चलाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कोरिया जिले में लागू 5 प्रतिशत मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया है। राजनांदगांव में सोक पिट निर्माण की दिशा में अच्छा काम हो रहा है।उन्होंने युवाओं से वर्षा जल संचयन को अपने घर, स्कूल और समाज में प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

    वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

    छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के कक्षा ग्यारहवीं के छात्र मितांश सिंह ने प्रदेश के आर्थिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है और इन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर प्रदेश की आय बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

    शिक्षा को संस्कार और रोजगार से जोड़ रही नई शिक्षा नीति

    छात्रा सानिया परवीन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित हैं। इन संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और अधोसंरचना को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएम योजना में छत्तीसगढ़ के 341 स्कूल शामिल हैं। योजना के तहत इन विद्यालयों में अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखते हुए उसे संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों और युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे।

    युवाओं के साथ सुने भक्ति गीत, प्रतिभाओं का किया सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने युवाओं के साथ ‘भजन क्लबिंग’ के अंतर्गत आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत भक्ति गीतों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

    इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • फार्मा, टेक्सटाइल, सीमेंट, दूरसंचार, डेटा सेंटर और हरित अधोसंरचना क्षेत्र की परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    फार्मा, टेक्सटाइल, सीमेंट, दूरसंचार, डेटा सेंटर और हरित अधोसंरचना क्षेत्र की परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और औद्योगिक सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बनाती हैं। राज्य सरकार नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए आवश्यक सहयोग एवं अनुमतियां समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि, अधोसंरचनात्मक और कुशल कार्यबल निवेशकों को महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम में विभिन्न सेक्टर्स के निवेशकों से भी मुलाकात की। उन्होंने निवेश योजनाओं और औद्योगिक विस्तार पर चर्चा करते हुए प्रतिनिधियों को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : 2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मुम्बई रोड शो में विभिन्न उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ दिनभर हुई बैठकों में मध्यप्रदेश को लगभग 90 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।

    जेएसडब्ल्यू समूह ने सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार में दिखाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जेएसडब्ल्यू समूह के श्री पार्थ जिंदल ने प्रदेश में समूह की मौजूदा औद्योगिक उपस्थिति और विस्तार योजनाओं पर चर्चा की। समूह की गतिविधियों में ग्वालियर में पेंट, धार में इस्पात, पन्ना में चूना पत्थर खनन तथा दमोह के गैसाबाद और हटा में सीमेंट से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    बैठक में सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार, प्रगतिरत परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन तथा भविष्य के रणनीतिक निवेश अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने परियोजनाओं को गति देने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

    अक्षय ऊर्जा और भंडारण में अवादा का 22,156 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्ताव

    अध्यक्ष अवादा समूह श्री प्रशांत चौबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सौर, पवन, नियमित उपलब्धता वाली नवकरणीय ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर चर्चा की। समूह वर्ष 2013-14 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है। नीमच में 151 मेगावाट और आगर सोलर पार्क में 280 मेगावाट की सौर परियोजनाएं इसकी मौजूदा उपस्थिति का हिस्सा हैं।

    समूह ने कुल 2,362 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं के लिए 22,156 करोड़ रूपयेका प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसमें पचोरा में 6,616 करोड़ रूपये, ईशानगर में 3,250 करोड़ रूपये और नीमच में 12,290 करोड़ रूपये का निवेश शामिल है।

    बैठक में परियोजनाओं के शीघ्र पंजीकरण, समूह की कंपनियों एवं विशेष प्रयोजन संस्थाओं द्वारा पंजीकरण के उपयोग, शासकीय भूमि आवंटन और भूमि अधिकारों के पट्टे अथवा हस्तांतरण की अनुमति पर चर्चा हुई। आगर मालवा में पवन ऊर्जा पंजीकरण को 201.3 मेगावाट से बढ़ाकर 264 मेगावॉट करने तथा समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एकल-खिड़की सहयोग की अपेक्षा की गई।

    पीथमपुर में एनक्यूब एथिकल्स का 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एनक्यूब एथिकल्स प्रायवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री मेहुल मधुसूदन शाह ने फार्मास्यूटिकल विनिर्माण के विस्तार पर चर्चा की। कंपनी की मध्यप्रदेश में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क, पीथमपुर में इकाई है।

    कंपनी ने 2 फार्मा परियोजनाओं के लिए 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव दिया, जिनसे 800 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इनमें मौजूदा पीथमपुर इकाई का द्वितीय चरण का विस्तार और समीपवर्ती 20 एकड़ से अधिक भूमि पर स्टेराइल ऑफ्थैल्मिक अर्थात आंखों की दवाओं की नई विनिर्माण सुविधा शामिल है। नई इकाई के लिए भूमि आवंटित है। परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्य सरकार के सहयोग और मध्यप्रदेश को कंपनी के विनिर्माण एवं निर्यात आधार के रूप में विस्तार देने पर विचार-विमर्श हुआ।

    छिंदवाड़ा में हिंदुस्तान यूनिलीवर का 800 रूपये से 1,000 करोड़ रूपये का विस्तार प्रस्ताव

    हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक, सप्लाई चेन, दक्षिण एशिया, श्री योगेश मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से छिंदवाड़ा की लहगडुआ स्थित इकाई के विस्तार पर चर्चा की। दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र की कंपनी की यह इकाई देश में उसके बड़े विनिर्माण संयंत्रों में शामिल है।

    कंपनी ने सर्फ एक्सेल और व्हील के लिए नई स्प्रे-ड्राइड डिटर्जेंट विनिर्माण सुविधा में भूमि की लागत को छोड़कर 800 से 1,000 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। वर्ष 2027 से 2030 के बीच चरणबद्ध विकास और 5 से 8 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता प्रस्तावित है। इससे लगभग 700 प्रत्यक्ष और 1,500 अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों के सृजित होने की संभावना है।

    परियोजना के लिए 35 से 40 एकड़ भूमि, प्रतिदिन 1,000 किलोलीटर पानी और 5,000 केवीए विद्युत क्षमता की आवश्यकता बताई गई। शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन पद्धति अपनाने तथा मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना : 2025 के अंतर्गत अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और विस्तार में सहयोग पर भी चर्चा हुई।

    ग्वालियर में 200 करोड़ रूपये की दूरसंचार उपकरण इकाई का प्रस्ताव, महिला रोजगार पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंद्रा शेखर ने दूरसंचार उपकरण एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी ने ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में 200 करोड़ रूपये की एआई-संचालित, निर्यातोन्मुख दूरसंचार उपकरण विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    प्रस्तावित इकाई का 75 प्रतिशत से अधिक उत्पादन निर्यात के लिए निर्धारित करने की योजना है। लगभग 1,000 रोजगार अवसरों के साथ कार्यबल में 70 प्रतिशत महिलाओं और 10 प्रतिशत दिव्यांगजन की भागीदारी रखी गई है। बैठक में इकाई की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पर विचार-विमर्श हुआ।

    ब्लैक स्टोन और वनराज रियल्टी ने लॉजिस्टिक्स एवं रियल एस्टेट में तलाशीं निवेश की संभावनाएं

    ब्लैक स्टोन के प्रबंध निदेशक श्री आलोक जैन और वनराज रियल्टी एलएलपी के श्री राजीव अजमेरा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। ब्लैक स्टोन की प्रदेश में अभी उपस्थिति नहीं है।

    लगभग 500 से 1,000 करोड़ रूपये के संभावित निवेश के संदर्भ में प्रमुख स्थानों पर उपयुक्त राजस्व भूमि उपलब्ध कराने, प्रोत्साहन प्रक्रिया की स्पष्टता तथा आवश्यक अनुमतियों और स्वीकृतियों के शीघ्र निराकरण पर विचार-विमर्श हुआ।

    सिफी ने मध्यप्रदेश में हाइपरस्केल और एआई-रेडी डेटा सेंटर में दिखाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सिफी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के डेटा सेंटर व्यवसाय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शरद अग्रवाल ने प्रदेश में डेटा सेंटर अवसंरचना विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    कंपनी ने हाइपर स्केल, एआई-रेडी और एज डेटा सेंटर स्थापित करने में रुचि दिखाई। इसके लिए विश्वसनीय बिजली, नवकरणीय ऊर्जा, फाइबर कनेक्टिविटी और भविष्य में विस्तार की सुविधा वाली भूमि की आवश्यकता जताई गई। भूमि, पात्र प्रोत्साहनों और समयबद्ध प्रस्ताव के लिए एकल-खिड़की सहयोग पर भी संवाद हुआ।

    इन्फ्रा मार्केट का निर्माण सामग्री क्षेत्र में 200 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से हेला इन्फ्रा मार्केट लिमिटेड के सह-संस्थापक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं निदेशक श्री सौविक सेनगुप्ता ने निर्माण सामग्री क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी वर्ष 2016 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है।

    कंपनी ने 200 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिससे लगभग 250 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। विनिर्माण विस्तार, स्थानीय आपूर्ति शृंखला और उपयुक्त औद्योगिक स्थानों की पहचान पर विचार-विमर्श हुआ। भूमि, अधोसंरचनात्मक विकास, अनुमतियों और पात्र प्रोत्साहनों के संबंध में राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा की।

    डी एंड एच इंडिया का इंदौर के निकट 300 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से डी एंड एच इंडिया लिमिटेड के निदेशक श्री सौरभ वोरा ने वेल्डिंग सामग्री और सहायक विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार पर चर्चा की। कंपनी वर्ष 1974 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है और इसके कार्यालय मुंबई तथा इंदौर में हैं। कंपनी ने इंदौर के निकट लगभग 25 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इससे करीब 500 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन, भूमि, अधोसंरचना, आवश्यक स्वीकृतियों और पात्र प्रोत्साहनों पर विचार-विमर्श हुआ।

    ई-बस, बायोगैस और स्मार्ट मीटर परियोजनाओं में एवरसोर्स का 3,500 करोड़ रूपये का निवेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एवरसोर्स कैपिटल की कार्यकारी निदेशक सुश्री खुशबू शाहानी ने हरित अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश और नई संभावनाओं पर चर्चा की। समूह की परियोजनाएं इलेक्ट्रिक बसों, संपीड़ित बायोगैस और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

    प्रदेश में समूह का लगभग 3,500 करोड़ रूपये का प्रतिबद्ध निवेश प्रगतिरत है, जिससे करीब 6,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों की संभावना है। ग्रीनसेल के माध्यम से पीएम ई-बस सेवा के अंतर्गत 682 इलेक्ट्रिक बसों में लगभग 2,000 करोड़ रूपये का निवेश शामिल है। एवरएनवायरो के इंदौर और प्रस्तावित भोपाल बायोगैस संयंत्रों से लगभग 350 करोड़ रूपये का निवेश जुड़ा है। एनर्जी मार्क और अल्फानार के माध्यम से भोपाल एवं जबलपुर की बिजली वितरण कंपनियों के लिए 23 लाख स्मार्ट मीटर परियोजनाओं में करीब 1,200 करोड़ रूपये का निवेश है।

    बैठक में प्रगतिरत परियोजनाओं की क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान, निवेश विस्तार और नए अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।

    मीरा कॉटन का 2,000 करोड़ रूपये का टेक्सटाइल निवेश प्रस्ताव, 4 हजार रोजगार की संभावना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मीरा कॉटन एंड सिंथेटिक मिल्स प्रायवेट लिमिटेड के निदेशक श्री जय जयेश शाह ने अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री जयेश शाह के साथ टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी पॉलिस्टर टेक्सचर्ड यार्न, निटेड फैब्रिक और गारमेंट का एकीकृत विनिर्माण करती है। इसके संयंत्र भिवंडी और सिलवासा में हैं।

    कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2,000 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव रखा, जिससे लगभग 4,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। नई इकाई की स्थापना और संचालन को सुगम बनाने के लिए अधोसंरचना तथा पात्र प्रोत्साहनों से संबंधित सहयोग पर चर्चा हुई।

    सनटेक रियल्टी ने जीसीसी, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स में दिखाई निवेश की रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सनटेक रियल्टी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री कमल खेतान ने रियल एस्टेट और शहरी अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा की।

    कंपनी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र तथा लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग में रुचि व्यक्त की। बैठक में उपयुक्त राजस्व भूमि उपलब्ध कराने, पात्र प्रोत्साहनों की प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों एवं स्वीकृतियों के शीघ्र निराकरण पर विचार-विमर्श हुआ।

    इंडियन डायमंड सीमेंट का 3,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से इंडियन डायमंड सीमेंट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक श्री रुद्र प्रताप त्रिपाठी ने सीमेंट एवं अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी की मध्यप्रदेश के सतना में फैक्ट्री है।

    कंपनी ने 3,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत रखा, जिससे 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। पन्ना जिले की गुनौर तहसील में लगभग 1,000 एकड़ भूमि के स्वामित्व से जुड़े विषयों और खनिज ब्लॉक पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई। भूमि एवं पानी की उपलब्धता, परियोजना शीघ्र प्रारंभ करने के लिए एकल-खिड़की स्वीकृतियों तथा बिक्री कर एवं अन्य प्रोत्साहनों पर भी चर्चा हुई।