Tag: featured

  • बिहार बाढ़ से बेहाल! 13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर

    बिहार बाढ़ से बेहाल! 13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर

     पटना
    बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा आबादी सैलाब के बीच घिरी हुई है. पानी ने कहीं गांवों का संपर्क पूरी तरह काट दिया है, तो कहीं सड़कें डूबने से आवाजाही ठप हो चुकी है. कई इलाकों में लोगों के घरों और आंगनों तक दरिया बह रहा है. प्रशासन एक तरफ सुरक्षित ठिकानों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ बीमार लोगों तक इलाज पहुंचाने की मशक्कत चल रही है। 

    यह विकराल संकट पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल तक फैला हुआ है. इन जिलों के 77 प्रखंडों (ब्लॉक) की 438 ग्राम पंचायतों में जिंदगी ठहर सी गई है. हालांकि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा के धीमे पड़ने से कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की हल्की उम्मीद भी जगी है। 

    पटना में गंगा का पानी घटा, कई नदियां अब भी उफान पर

    पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा के जलस्तर में आई गिरावट से पटना में भी आगे राहत की उम्मीद है. हालांकि पुनपुन नदी अभी खतरे के निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है। 

    कटिहार में गंगा और कोसी के संगम पर बना दबाव 35 पंचायतों के करीब साढ़े तीन लाख लोगों को घेरे हुए है. खगड़िया के चौथम प्रखंड समेत दियारा इलाकों में बागमती का पानी नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है. उधर गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है। 

    भागलपुर में ढाई फीट पानी, मुंगेर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
    भागलपुर में नेशनल हाईवे-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है, जिसके चलते गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. अकेले इस जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग सैलाब से घिरे हैं. यही हाल मुंगेर के बरियारपुर का भी है, जहां गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बहने से सैकड़ों घरों में दरिया समा चुका है. वहीं, सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर निचले इलाकों को डुबो रही है। 

    पानी का यह दबाव भोजपुर के आरा तक पहुंच चुका है. बड़हरा इलाके में गंगा का फैलाव बढ़ते ही हालात बेकाबू हो गए, जहां धमार गांव में डूबने से 32 साल के एक युवक की जान चली गई. इसके अलावा, सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से आफत और बढ़ गई है. तेज बहाव के साथ पानी सीधा रिहायशी बस्तियों की ओर रुख कर रहा है। 

    दूसरी तरफ शेखपुरा में भी सैलाब का असर साफ दिखने लगा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैलने से घरों के अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र डूब चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बेपटरी हो गई है। 

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूल-पंचायत भवनों में इलाज
    पानी से घिरे लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी व्यवस्था शुरू की है. प्रभावित इलाकों में स्कूलों और पंचायत भवनों में इलाज की सुविधा दी जा रही है. यहां डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती के साथ जरूरी दवाइयों का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मौके पर ही इलाज देने की कोशिश की जा रही है. इस दौरान प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

    बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 

  • ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘सत्ता में तो कब्रिस्तान दिख रहा था, आज सम्राट अशोक की बात कर रहे हो’- अखिलेश पर बरसे ओपी राजभर

    ‘सिर्फ यादव जी और खान साहब ही चाहिए क्या PC में?’ अखिलेश से ओपी राजभर के तीखे सवाल

    'आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    लखनऊ
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगर कोई पत्रकार तीखा सवाल कर दे तो तिलमिला जाते हैं।

    पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या?

    ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पोस्ट के जरिए सवाल किया कि “क्या मित्र अखिलेश यादव जी, एसी में बैठकर अपने खासम-खास यूट्यूबर्स के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है और गलती से कोई ढ़ंग का पत्रकार कड़ा सवाल पूछ दें तो 'मिसरा जी-मिसरा जी' करने लगते हैं। क्या पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या? 

    राजभर ने 8 सितंबर को हुई अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा, “आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी। इसमें आप बहुत लंबा चौड़ा फेंक रहे थे कि सरकार आई तो सम्राट अशोक की जयंती पर अवकाश देंगे, बौद्ध स्थल वर्ल्ड क्लास बना देंगे।”

    सत्ता में थे तो क़ब्रिस्तान पर ख़र्च कर रहे थे- राजभर

    राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक-बुद्ध जी का नाम लेते हुए यह भी बता दिये होते कि जब आप सत्ता में थे तब आपको कब्रिस्तान दिख रहा था। तब तो जनता के सारे पैसे तो क़ब्रिस्तान में ख़र्च कर रहे थे। ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि जब सपा सरकार थी तब बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों और संस्थानों का नाम मिटाए जा रहे थे।

    यूपी कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा कि आपकी सरकार में भीम नगर, फुले नगर, कांशीराम नगर, रमाबाई नगर, संत रविदास नगर का नाम बदला गया। आंबेडकर जी के नाम पर चलने वाली सब योजना हटा दी गई।

    राजभर ने आरोप लगाया, “आप मंच पर बैठे रहे और आपके आजम खान बाबा साहब की प्रतिमा का मजाक उड़ाते रहे, तब आप किस नशे में थे? उन्होंने कहा कि यूपी जनता आपसे सवाल पूछ रही है कि आपने सत्ता में रहते बहुजनों के लिए क्या, जवाब ज़रूर दीजिए।

    इससे पहले राजभर बोल चुके हैं अखिलेश पर हमला

    बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमला बोला है। इससे पहले उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल खड़े किए थे। राजभर ने कहा था कि आखिर अखिलेश यादव कबतक हवाबाजी करेंगे और एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ेंगे? उन्होंने तंज कसते हुए सपा प्रमुख को जमीन पर आने की बात कही थी।

    इससे पहले राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा था कि आइए जमीन पर उतरिए और दो-दो हाथ हो जाएं। एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता है।'

  • बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई।

    इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं।

    लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।

    केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है।

    हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी
    योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया।

    यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं।

    दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

    हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर
    तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है।

    फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन
    अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

     

  • पुलिस कार्रवाई से भड़के इंटर्न डॉक्टर, स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाएं बंद

    पुलिस कार्रवाई से भड़के इंटर्न डॉक्टर, स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाएं बंद

    भोपाल

    MBBS इंटर्न डॉक्टर्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रदेशभर में फैलता नजर आ रहा है। सोमवार सुबह से चल रहे प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टर्स ने मंगलवार को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है।डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलती रहे। हालांकि OPD बंद रहने से सामान्य मरीजों की नियमित जांच और उपचार सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है।

    भोपाल में रातभर सड़क पर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर
    राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन रातभर जारी रहा। डॉक्टर कमला पार्क की सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। CM हाउस की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया गया है, जिससे प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    इंदौर और रतलाम में भी असर
    भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम समेत प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर्स के काम नहीं करने की बात सामने आई है। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को नियमित OPD सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि आंदोलन के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है।

    चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन
    जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने समर्थन जताते हुए मंगलवार को हमीदिया अस्पताल की नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे एमटीए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने इसे चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन करार दिया और मांग पूरी न होने पर पूरे डॉक्टर समुदाय के आंदोलन में उतरने की चेतावनी दी।

    प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी
    इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को खुद आंदोलन कर रहे डॉक्टरों के बीच आकर उनकी मांग सुननी चाहिए। पटवारी ने CM हाउस जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर बना दी गई है। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालने की अपील की।

    कमला पार्क की सड़क पर रातभर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर
    भोपाल में प्रदर्शन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टर पुलिस कार्रवाई के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कई इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ वाटर कैनन और बल प्रयोग का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रशासन ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग कर रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है।

    प्रदेशभर में OPD बंद, इमरजेंसी सेवा रहेगी चालू
    इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का समर्थन मिलने के बाद इसका असर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में दिखाई दे रहा है। भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम और अन्य शहरों में भी डॉक्टरों के काम से दूर रहने की जानकारी सामने आई है। जूनियर डॉक्टर ने साफ किया है कि जब तक इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर समाधान नहीं होता, तब तक नियमित OPD और तय इलेक्टिव ऑपरेशन सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को बंद नहीं किया गया है। गंभीर मरीजों को अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी। 

    स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
    जूनियर डॉक्टर मध्य प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट अनुराग भारती के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत हुई है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं। डॉक्टरों की मुख्य मांगों में स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी शामिल है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भी समर्थन में
    मामले को लेकर मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश ने भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का समर्थन किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय देर रात प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों से मिलने पहुंचे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किए जाने से डॉक्टरों में आक्रोश है। उन्होंने इस घटना को चिकित्सक समुदाय के लिए दुखद बताया और कहा कि यदि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो पूरा चिकित्सक समुदाय उनके साथ खड़ा रहेगा।

    डॉक्टरों पर बल प्रयोग की निंदा  
    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए घायल डॉक्टरों के नि:शुल्क इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं एफएआईएमए के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. आकाश सोनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सरकार को बल प्रयोग के बजाय बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।

    इंटर्न बोले- उप मुख्यमंत्री खुद आएं
    प्रशासनिक स्तर पर देर रात हुई कलेक्टर और सीएमई की वार्ता बेनतीजा रही। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह जब छात्रों को डिप्टी सीएम से मिलाने ले जाने पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने वहां जाने से साफ इंकार कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की दो टूक मांग है कि स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल स्वयं आकर उनसे बात करें और लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

    लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के विरोध में JDA भी उतरा
    इंटर्न डॉक्टर्स के समर्थन में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) भी सामने आया है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल का JDA ने विरोध किया है।

    स्टाइपेंड बढ़ोतरी के साथ कार्रवाई की मांग
    JDA मध्यप्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट  के मुताबिक, कलेक्टर और CME के साथ बातचीत हुई है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल इंटर्न डॉक्टर्स के आंदोलन और OPD बहिष्कार के चलते प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सामान्य चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।

     

  • दुबई में गूंजा मध्यप्रदेश का निवेश मंत्र, CM यादव बोले- आइए निवेश करें, हम साथ निभाएंगे

    दुबई में गूंजा मध्यप्रदेश का निवेश मंत्र, CM यादव बोले- आइए निवेश करें, हम साथ निभाएंगे

    दुबई से दुनिया को मध्यप्रदेश का संदेश: “निवेश कीजिए, हम साझेदारी निभाएंगे”

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई में विश्व के विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों के साथ एआईएम कांग्रेस-2026 के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने, मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन किया, "Invest in Madhya Pradesh, India" निवेश सत्र में राज्य की निवेश क्षमता का प्रस्तुतीकरण किया तथा यूएई और रूस के वरिष्ठ नेतृत्व एवं प्रमुख उद्योग समूहों के साथ कई महत्वपूर्ण वन-टू-वन और शासन-स्तरीय बैठकें कीं।

    दिन की शुरुआत ताज दुबई, बिजनेस बे में मीडिया संवाद से हुई, जहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों, उद्योग जगत और वैश्विक साझेदारों के बीच मध्यप्रदेश की बढ़ती आर्थिक शक्ति, औद्योगिक प्रगति और आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 की तैयारियों पर चर्चा की।

    मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआईएम कांग्रेस के प्रदर्शनी क्षेत्र में स्थापित मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन किया। पवेलियन को राज्य के प्रमुख निवेश एवं व्यापार प्रदर्शन मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां वैश्विक निवेशकों को मध्यप्रदेश की केंद्रीय अवस्थिति, विशाल लैंड बैंक, विकसित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, विश्वस्तरीय अवसंरचना, निवेशक-अनुकूल नीतियों तथा विनिर्माण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरते उद्योगों में अवसरों की जानकारी दी गई। साथ ही चंदेरी, महेश्वरी, ज़री-जरदोज़ी, बेल मेटल और ग्वालियर कारपेट जैसे जीआई टैग एवं ओडीओपी उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया।

    रास अलखैमाह के शासक से मुलाकात

    एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह से पूर्व, मुख्यमंत्री ने UAE सुप्रीम काउंसिल के सदस्य एवं रास अलखैमाह के शासक हिजहाइनेस शेख सऊद बिन सकरअलकासिमी से शिष्टाचार भेंट की। बैठक में सिरेमिक एवं निर्माण सामग्री, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज, पर्यटन एवं आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में भाग लेने का आमंत्रण भी दिया। दोनों पक्षों ने निवेश संवर्धन एवं बाजार पहुंच के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

    तातारस्तान गणराज्य के प्रमुख के साथ उच्चस्तरीय बैठक

    दोपहर में मुख्यमंत्री ने रूस के तातारस्तान गणराज्य के प्रमुख एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव के साथ शासन-स्तरीय बैठक की। बैठक का उद्देश्य तातारस्तान और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को मजबूत करना तथा सेक्टर-विशिष्ट साझेदारियों की पहचान करना था। वार्ता के दौरान उन्नत विनिर्माण, पेट्रोकेमिकल्स, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, प्रौद्योगिकी और नवाचार आधारित उद्योगों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    बैठक में “टाइम: रूस-भारत” फोरम में मध्यप्रदेश की भागीदारी, दोनों पक्षों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, संभावित संयुक्त परियोजनाओं तथा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में तातारस्तान की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।

    “Invest in Madhya Pradesh, India” सत्र ने बटोरा ध्यान

    दोपहर बाद आयोजित “Invest in Madhya Pradesh, India” निवेश सत्र AIM Congress का प्रमुख आकर्षण रहा। सत्र में दुबई के महावाणिज्यदूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने राज्य की निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। सत्र में पर्यटन क्षेत्र की निवेश संभावनाओं पर विशेष फिल्म भी प्रदर्शित की गई। UAE के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अलज़ेयौदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    निवेश सत्र में मुख्यमंत्री का विशेष संबोधन

    निवेश सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश केवल अवसरों का प्रदेश नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, स्थिर और विश्वसनीय निवेश साझेदारी का केन्द्र है। उन्होंने कहा कि नीति, नीयत और नेतृत्व ने मध्यप्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का भौगोलिक केंद्र है और यहां से देश के किसी भी हिस्से तक 24 से 36 घंटे के भीतर परिवहन संभव है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर, विकसित सड़क और रेल नेटवर्क तथा आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाएं इसे विनिर्माण एवं वितरण का स्वाभाविक केन्द्र बनाती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार उपकरण निर्माण, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश तेजी से मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भोपाल में अगले वर्ष आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में भाग लेने का आमंत्रण दिया।

    यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री के साथ बैठक

    निवेश सत्र के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने UAE के कैबिनेट सदस्य एवं अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री एच.ई. अब्दुल्ला बिन तौकअलमर्री से मुलाकात की। बैठक में नागरिक उड्डयन, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), भविष्य-केंद्रित संस्थानों, औद्योगिक पार्कों एवं निवेश सहयोग के विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में स्पेशल इंडस्ट्रियल जोन विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी और दुबई फ्यूचर फाउंडेशन जैसे संस्थानों की अवधारणा पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

    डॉ. थानी बिन अहमद अलज़ेयौदी के साथ वन-टू-वन बैठक

    शाम को मुख्यमंत्री ने UAE के विदेश व्यापार राज्य मंत्री एवं एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. थानी बिन अहमद अलज़ेयौदी के साथ अलग से एक विशेष वन-टू-वन बैठक की। बैठक में मध्यप्रदेश को UAE निवेशकों के लिए मध्य भारत का पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्यपालन एवं एक्वाकल्चर, कोल्ड चेन, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट विनिर्माण और निर्यात प्लेटफॉर्म में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने चयनित निवेश परियोजनाओं के लिए संयुक्त कार्य प्रणाली विकसित करने तथा भविष्य में मध्यप्रदेश-UAE निवेश राउंडटेबल आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

    लूलू ग्रुप के चेयरमैन युसूफ अली के साथ महत्वपूर्ण बैठक

    दिवस के अंतिम प्रमुख कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक युसूफ अली एम.ए. के साथ विस्तृत वन-टू-वन बैठक की। लूलू ग्रुप मध्य पूर्व का प्रमुख रिटेल, हाइपरमार्केट, खाद्य वितरण, कृषि निर्यात, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग समूह है, जिसकी वैश्विक उपस्थिति 250 से अधिक स्टोर्स और 65,000 से अधिक कर्मचारियों तक फैली हुई है।

    बैठक में मध्यप्रदेश से प्याज, गेहूं, सब्जियों सहित कृषि उत्पादों की प्रत्यक्ष खरीद को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करण, सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग, कृषि निर्यात और रिटेल नेटवर्क विस्तार के अवसरों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की कृषि क्षमता, खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना और निर्यातोन्मुखी नीतियों की जानकारी देते हुए लूलू ग्रुप को राज्य में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया।

    उद्योग एवं निवेश समुदाय के साथ नेटवर्किंग

    दिन का समापन दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्यदूत द्वारा आयोजित विशेष रात्रिभोज में हुआ, जिसमें इंडियन बिज़नेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल (IBPC) के अध्यक्ष सिद्धार्थ बालचंद्रन, UAE-India Business Council के अध्यक्ष नीलेश वेद, ट्रांसवर्ल्ड ग्रुप के अध्यक्ष रमेश एस. रामकृष्णन, डीपी वर्ल्ड के समूह मुख्य वित्तीय अधिकारी युवराज नारायण, लूलू ग्रुप के समूह निदेशक सलीम एम.ए. सहित खाद्य, लॉजिस्टिक्स, विमानन, वस्त्र, औद्योगिक विनिर्माण और व्यापार संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक संवाद कर उन्हें मध्यप्रदेश की विकास यात्रा का सहभागी बनने का आमंत्रण दिया।

     

  • यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार बढ़ाएगी अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी

    यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार बढ़ाएगी अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी

    योगी सरकार की पहल से यूपी-बिहार के यात्रियों को मिलेगी बेहतर अंतरराज्यीय बस सुविधा

    यूपी-बिहार के बीच और मजबूत होगा बस सेवा नेटवर्क, परिवहन मंत्रियों की अहम बैठक

    सीमावर्ती जिलों के यात्रियों को बड़ी राहत, यूपी-बिहार के नए बस मार्गों पर बनी सहमति

    यूपी-बिहार के बीच नए हाईवे पर दौड़ेंगी बसें, नए मार्ग तय करने की तैयारी, किराये में एकरूपता पर भी सहमति

    बिहार सरकार की तरफ से दिए गए कई आश्वासन, दूसरे चरण की बैठक जल्द, यात्रियों को होगा सीधा लाभ

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच आवागमन को और आसान बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। दोनों राज्यों की जनता, खासकर सीमावर्ती जिलों के यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें यूपी रोडवेज और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के बीच बस सेवाओं के विस्तार और नए मार्गों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

    नए मार्गों पर बस संचालन की तैयारी
    बैठक में वर्ष 2016 से प्रभावी उत्तर प्रदेश-बिहार अंतरराज्यीय परिवहन करार और मई 2026 में हुए उसके विस्तार के तहत निर्धारित 25 मार्गों पर बस संचालन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से बिहार के अलग-अलग जिलों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए बस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया।

    नए हाईवे से जुड़ेंगे नए बस मार्ग
    दोनों राज्यों के बीच हाल के वर्षों में कई नए हाईवे और सड़क मार्ग तैयार हुए हैं। इन्हें बस सेवा से जोड़ने के लिए नए मार्गों का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही दूसरे चरण की बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है। बिहार सरकार की ओर से प्रस्तावित मार्गों का मानचित्र सहित विस्तृत विवरण जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।

    यात्रियों की सुविधा और किराये में एकरूपता पर जोर
    बैठक में दोनों राज्यों की जनता को बेहतर परिवहन सुविधा देने पर विशेष जोर दिया गया। खासतौर पर सीमावर्ती जिलों के लोगों के लिए बस सेवाओं का विस्तार करने की दिशा में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। वहीं दोनों राज्यों की बस सेवाओं में किराये के निर्धारण में एकरूपता लाने पर भी सहमति बनी है। साथ ही नए मार्गों का दोबारा परीक्षण कर समान किलोमीटर के आधार पर परिवहन करार करने पर विचार किया गया।

    यूपी रोडवेज की बसों के संचालन में नहीं आएगी बाधा
    बिहार सरकार ने भरोसा दिलाया कि बिहार में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा या असुविधा नहीं होने दी जाएगी। दोनों राज्यों के परिवहन विभाग और परिवहन निगम के अधिकारी प्रस्तावित मार्गों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेंगे।

  • दुबई से हमारा सहज स्वाभाविक संबंध, मध्यप्रदेश अवसरों की सौगात लिए साथ खड़ा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    दुबई से हमारा सहज स्वाभाविक संबंध, मध्यप्रदेश अवसरों की सौगात लिए साथ खड़ा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश है निवेशकों का भरोसेमंद साथी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भारत का दिल है मध्यप्रदेश, हम निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए हैं
    दुबई से हमारा सहज स्वाभाविक संबंध, मध्यप्रदेश अवसरों की सौगात लिए साथ खड़ा है
    दुबई में एआईएम कांग्रेस में हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मध्यप्रदेश सत्र

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुबई से हमारे सहज और स्वाभाविक संबंध हैं। हम दुबई के भरोसेमंद साथी हैं और संभावनाओं और अवसरों की सौगात लेकर दुबई के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का दिल है और हम दुबई के सभी निवेशकों के दिल में जगह बनाने आए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बेहद पारदर्शी और निवेशक अनुकूल हैं। हमारी नीति, नीयत, नेतृत्व और पूरी सरकार निवेशकों के स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि निवेशक बिना किसी संकोच के मध्यप्रदेश में निवेश करें। हमारी सरकार आपको कभी भी निराश नहीं होने देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रवास के दूसरे दिन दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर में हो रही एआईएम कांग्रेस-2026 के दौरान विशेष रूप से आयोजित 'इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मध्यप्रदेश' सत्र को संबोधित कर रहे थे। सत्र में यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी, यूएई में भारत के उच्चायुक्त डॉ. दीपक मित्तल सहित बड़ी संख्या में देश-विदेश के उद्योगपति, इन्वेस्टर्स और इंडस्ट्री पार्टनर उपस्थित थे। सत्र के दौरान मध्यप्रदेश में हो रही औद्योगिक प्रगति, यहां की खूबियों, निवेश अवसरों और अनंत संभावनाओं पर केंद्रित एक ऑडियो-वीडियो फिल्म (एवी) का प्रदर्शन भी किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई वैश्विक निवेश और नवाचार का केंद्र है। मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि आज वैश्विक साझेदारी, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग, मजबूत और समृद्ध भविष्य का साझा रोडमैप एआईएम कांग्रेस के इस बड़े प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश-विदेश के सभी निवेशकों को दीर्घकालिक और विश्वस्तरीय साझेदारी के लिए नये अवसर उपलब्ध करा रहा है। भारत के सभी राज्यों में विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के बीच मध्यप्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो अपनी पारदर्शी नीतियों और आकर्षक योजनाओं के आधार पर औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। दुनिया में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए गंतव्यों की तलाश चल रही है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश निवेशकों और उद्योग समूहों को सभी सुगम अवसर उपलब्ध करा रहा है। नीति, नीयत और निवेश में मध्यप्रदेश ने निवेशकों का दिल जीता है। मध्यप्रदेश, देश का वह प्रदेश है, जिसने निवेशकों को आगे बढ़ने के लिए अवसर वर्तमान के सभी सेक्टर्स में अवसर उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रचुर प्राकृतिक और कुशल मानव संसाधन हैं। मध्यप्रदेश ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों, तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक अधोसंरचनाओं और दिनों-दिन बढ़ती अर्थव्यवस्था से देश में अपना एक अलग ही स्थान बनाया है।

    मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी अन्य राज्यों से बेहतर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है, जिसकी कनेक्टिविटी देश के सभी राज्यों से बेहतर है। मध्यप्रदेश 24 घंटे माल परिवहन की सुविधा प्रदान करता है। एक्सपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए राज्य सदैव अनुकूल है। देश में प्रमुख औद्योगिक केंद्र और बाजार तक पहुंच है, दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर, रेल नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर आदि सुविधाओं के कारण मध्यप्रदेश का विशेष स्थान बना है। कृषि, उद्योग, सेवाएं, नई औद्योगिक आधारित अर्थव्यवस्थाओं का केंद्र है। मध्यप्रदेश भारत के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। जहां की उत्पादकता, अनुकूलता, फूड प्रोसेसिंग के आधार पर हमें वैश्विक खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर सबसे तेजी से उभरता क्षेत्र है। इस सेक्टर में मध्यप्रदेश अब केवल प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा उद्योग हमारी समृद्ध औद्योगिक विरासत और आधुनिक औद्योगिक क्षमता का अनूठा संगम बन गया है। चंदेरी, महेश्वरी आदि वस्त्रों के लेकर आधुनिक वस्त्र निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर अवसर हैं। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फॉर्मास्यूटिकल और एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग हमारे राज्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीथमपुर, मंडीदीप जैसे औद्योगिक केंद्र राष्ट्रीय कंपनियों के पसंदीदा केंद्र बने हुए हैं। पारम्परिक उद्योगों सहित आज मध्यप्रदेश की नई पीढ़ी को भी आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए आगे बढ़कर भविष्य के व्यापार-व्यवसाय करने के लिए तैयार हैं। दूरसंचार निर्माण, डिजिटल मैन्यूफैक्चरिंग, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से हम मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं। हम जानते है कि निवेश सिर्फ संसाधन और अवसरों को देखने से ही नहीं आता, इसके लिए भरोसे की भी जरूरत होती है। मध्यप्रदेश निवेशकों का वो भरोसेमंद साथी है, जहां नीतियां सरल और पारदर्शी हैं, पर्याप्त संसाधन हैं और आपके उद्योगों-कारखानों के लिए आधुनिक संरचनाएं भी उपलब्ध हैं।

    हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश कृषि, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल्स, फॉर्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिन्युएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और व्यापार की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। राज्य को सभी क्षेत्रों में आगे लाकर यहां निवेश बढ़ाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत भविष्य की संभावनाओं वाला देश बन रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के कालखंड में भारत सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था वाला देश बना है, दुबई और अन्य सभी खाड़ी देशों से हमारे अच्छे संबंध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवाद सत्र के आयोजन के लिए यूएई ऑफिशियल्स के प्रयासों की सराहना की।

    म.प्र. में भरपूर है प्राकृतिक संसाधन और स्किल्ड मैन पॉवर : डॉ. थानी

    यूएई के फॉरेन ट्रेड मिनिस्टर डॉ. थानी ने कहा कि जुलाई 2025 में यूएई और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार और व्यवसाय में सहयोग बढ़ाने पर अहम चर्चा हुई थी। भारत अर्थव्यवस्था की दृष्टि से हमारा एक पुराना और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। पिछले साल भारत और यूएई का द्विपक्षीय तेल व्यापार 100 बिलियन डॉलर रहा। दोनों देश मिलकर द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथ निवेश और नागरिकों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बना रहे हैं। मुझे विश्वास है कि मध्यप्रदेश हमारी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों और स्क्ल्डि मैन पॉवर की कोई कमी नहीं है। यूएई मध्यप्रदेश की क्षमताओं को रेखांकित करता है। पिछले दौरे पर यूएई ने सेंट्रल इंडिया में सप्लाई चेन को मजबूत करने और उसे ग्लोबल मार्केट से जोड़ने पर सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दौरे में टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिए कॉरिडोर शुरू करने पर चर्चा हुई थी, इस पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इससे भारत और यूएई के बीच व्यापार और निवेश बढ़ेगा। हम मध्यप्रदेश के साथ वैश्विक निवेशकों और व्यापार को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आशा है कि आगामी जनवरी माह (जीआईएस 2027) में मध्यप्रदेश और यूएई के बीच व्यापारिक संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी।

    मध्यप्रदेश और यूएई नए समझौतों का गवाह बन रहा है : उच्चायुक्त डॉ. मित्तल

    यूएई में भारत के उच्चायुक्त डॉ. दीपक मित्तल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में मध्यप्रदेश ग्रोथ इंजन की भूमिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। यह वैश्विक स्तर पर जारी संकटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। इस विकास यात्रा में मध्यप्रदेश का बड़ा योगदान है। मध्यप्रदेश कई वर्षों से अपनी जीडीपी को 12 प्रतिशत से ऊपर बरकरार रखे हुए है। तेजी से बढ़ती भारतीय इकोनॉमी में यूएई भी एक अहम साझेदार के दौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। भारत और यूएई के बीच कई अहम समझौते हुए हैं और पिछले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 100 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। यह दोनों देशों नेतृत्वकर्ताओं की प्रतिबद्धता और मजबूत हो रहे रिश्तों का परिचायक है। यूएई भारत के लिए द्विपक्षीय कारोबार वाले शीर्ष 3 देशों में शामिल है। यह हमारे लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। आज मध्यप्रदेश और यूएई नए समझौतों का गवाह बन रहा है।

    दुबई और मध्यप्रदेश के बीच सीईपीए के माध्यम से मजबूत होंगे आर्थिक संबंध : एसीएस मंडलोई

    दुबई में आयोजित इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश निवेश सत्र में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मध्यप्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश अनुकूल नीतियों और मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि देश के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश 1,000 किलोमीटर के दायरे में देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी तक आसान पहुंच प्रदान करता है, जिससे उत्पादों को बड़े उपभोक्ता बाजार तक कम समय में पहुंचाना संभव है। प्रदेश की जीएसडीपी वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों में लगभग 12.7 प्रतिशत रही है। प्रस्तुतीकरण में खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल एवं परिधान, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, खनन और पर्यटन को निवेश के प्रमुख अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया। उन्होंने फूड से फार्म-टू-फैशन वैल्यू चेन, जैविक कपास, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब, आईसीडी, एमएमएलपी, नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन एवं भंडारण तथा खनिज संसाधनों में संभावनाओं की जानकारी दी। दुबई और मध्यप्रदेश के बीच व्यापारिक अवसरों को सीईपीए के माध्यम से और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

    सत्र में मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों, नीतियों और आधारभूत संरचना पर आधारित ऑडियो विजुअल का प्रदर्शन किया गया। सत्र के अंत में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के सचिव जॉन किंग्सली ने सभी निवेशकों और उद्योगपतियों का आभार जताया।

     

  • AIM कांग्रेस-2026 में सीएम यादव की अहम मुलाकात, मध्यप्रदेश-तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग पर जोर

    AIM कांग्रेस-2026 में सीएम यादव की अहम मुलाकात, मध्यप्रदेश-तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तातारस्तान के प्रमुख एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव से की मुलाकात

    दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री ने की शिरकत
    मध्यप्रदेश और रूसी गणराज्य तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग को मिलेगा नया आयाम
    एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में संयुक्त निवेश पर बनी सहमति
    तातारस्तान ने मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल को टाइम: रूस–भारत फोरम में सहभागिता के लिये किया आमंत्रित
    आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-27 के लिए दिया आमंत्रण

    भोपाल 

    दुबई विजिट- दूसरा दिन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की।

    बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को प्रगाढ़ करना, सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की पहचान करना तथा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 (GIS) में तातारस्तान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव को मध्यप्रदेश की समृद्ध औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराते हुए आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। तातारस्तान के प्रमुख ने इस निमंत्रण का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि वे एक सशक्त निवेशक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ समिट में भाग लेंगे तथा राज्य में निवेश की ठोस संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, कृषि एवं इनोवेशन-आधारित आधुनिक तकनीकों में सहयोग पर विस्तृत विमर्श हुआ। भारत और तातारस्तान के प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के साथ बीटूबी और जीटूजी स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

    तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्य के व्यापारिक प्रतिनिधियों को “टाइम: रूस–भारत” फोरम तथा संबंधित प्रदर्शनी में सहभागिता के लिये आमंत्रित किया गया। बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय बिजनेस मिशन आयोजित करने, संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को धरातल पर उतारने और त्वरित समन्वय के लिए अधिकृत नोडल ऑफिसर्स को नामित करने पर भी सहमति व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी से की वन-टू-वन मीटिंग

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी के साथ उच्च स्तरीय वन-टू-वन बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों के बीच भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-UAE CEPA) के तहत गैर-तेल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सीमा-पार निवेश को गति देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

    मध्यप्रदेश को यूएई निवेशकों के पसंदीदा गंतव्य के रूप में किया पेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश के निवेश अवसरों और आदर्श निवेश गंतव्य की विशेषताओं से अवगत कराया, जिनमें रणनीतिक केंद्रीय अवस्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, उपलब्ध औद्योगिक भूमि और स्थापित अवसंरचना को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख बाजारों तक सीधी और सुगम पहुंच प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और सिंगल विंडो सुविधा का उल्लेख करते हुए यूएई निवेशकों को समयबद्ध राज्य-स्तरीय सहायता का पूर्ण भरोसा दिलाया।

    प्राथमिकता वाले सेक्टर्स और खाद्य प्रसंस्करण में साझेदारी का आह्वान

    बैठक में मध्यप्रदेश में निवेश के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई, जिनमें विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्मार्ट विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड पार्क, मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर, कोल्ड चेन, हरित ऊर्जा और निर्यात प्लेटफॉर्म्स के विकास में यूएई की सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

    ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए दिया न्योता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री ने इस आमंत्रण को स्वीकारते हुए आश्वस्त किया कि वे यूएई के प्रमुख निवेशकों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ सहभागिता करेंगे।

    अगला कदम: 3 माह में समीक्षा और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति

    द्विपक्षीय संबंधों और औद्योगिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने के लिए 5 से 10 क्रियान्वयन-तैयार परियोजनाओं की पहचान करने और संयुक्त समीक्षा व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी। इसके तहत 'मध्यप्रदेश-यूएई इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल' का आयोजन किया जाएगा तथा चयनित परियोजनाओं के लिए समर्पित नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जिनकी पहली प्रगति समीक्षा तीन माह के भीतर सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बैंक के उपाध्यक्ष से की उच्च स्तरीय बैठक

    प्रदेश में एआई परियोजनाओं के लिए फंडिंग पर हुआ संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एआईएम कांग्रेस-2026' सम्मेलन के दौरान विश्व बैंक के डिजिटल एवं एआई (Digital and AI) मामलों के वाइस प्रेसिडेंट सांगबु किम तथा उनकी टीम के साथ बैठक की।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यप्रदेश में डिजिटल और तकनीकी विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद में विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार की नीतियों के तहत संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित परियोजनाओं में फंडिंग और वित्तीय सहयोग देने में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उभरती तकनीकों, नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण की जानकारी साझा करते हुए राज्य के विकास में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर बल दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री निवेश की संभावनाओं पर हुई बैठक

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दुबई स्थित अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्रालय में यूएई कैबिनेट सदस्य एवं अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एचई अल मर्री को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' (GIS) में सहभागिता के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने आश्वस्त किया कि होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंवेस्टमेंट के क्षेत्र में संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए दुबई से एक विशेष निवेश प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मध्यप्रदेश का दौरा करेगा।

    प्रमुख क्षेत्रों में निवेश और नीतिगत सहयोग पर गहन विमर्श

    उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के मध्य खनन (माइनिंग), टेक्सटाइल, वन (फॉरेस्ट) एवं पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियों, भूमि स्वामित्व नियमों, श्रम सुधारों और विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा तंत्र (प्रोटेक्शन मैकेनिज्म) से अवगत कराया। उन्होंने राज्य में पहले से सक्रिय यूएई कंपनियों के सकारात्मक अनुभवों को साझा करते हुए नए निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नई एविएशन पॉलिसी के प्रमुख प्रावधानों को रेखांकित किया। एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री, जो यूएई की जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी के चेयरमैन भी हैं, ने सिविल एविएशन मंत्री के रूप में भरोसा दिलाया कि वह मध्यप्रदेश और यूएई के मध्य एविएशन ऑपरेशन्स के विस्तार में पूरा सहयोग करेंगे। इस कदम से दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन, कार्गो और व्यापारिक आवागमन को उल्लेखनीय गति मिलेगी।

    हट्टा इकोनॉमिक ज़ोन और दुबई फ्यूचर फाउंडेशन मॉडल पर विमर्श

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के 'हट्टा इकोनॉमिक ज़ोन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (Hatta Economic Zone Development Project) और विशेष औद्योगिक पार्कों के विकास मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश भी आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर व विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके साथ ही, 'दुबई फ्यूचर फाउंडेशन' के सीईओ के रूप में एचई अल मर्री ने मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार के नवाचार और भविष्योन्मुखी फाउंडेशन स्थापित करने की दिशा में तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

     

  • मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में फिर मंथन, 12 साल पहले पत्नी ने उठाया था सवाल; अब कानून में बदलाव की उम्मीद?

    मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में फिर मंथन, 12 साल पहले पत्नी ने उठाया था सवाल; अब कानून में बदलाव की उम्मीद?

    नई दिल्ली

    करीब 12 साल पहले एक शादीशुदा महिला अदालत पहुंची. उसका आरोप था कि उसका पति उसकी इच्छा के खिलाफ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता है. लेकिन जब उसने न्याय की मांग की तो उसके सामने एक कानूनी दीवार खड़ी हो गई. कानून कह रहा था कि अगर ऐसा काम पति ने अपनी पत्नी के साथ किया है, तो उसे बलात्कार (Rape) नहीं माना जाएगा. यहीं से शुरू हुई बहस दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की नई तारीख तय करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार का पक्ष रिकॉर्ड पर आने दें. लेकिन कोर्ट की अगली तारीख आने से पहले बड़ा सवाल यह है कि आखिर Marital Rape पर बहस खत्म क्यों नहीं हो रही? क्यों यह मुद्दा हर कुछ साल बाद फिर देश के सामने खड़ा हो जाता है? 

    दिल्ली हाईकोर्ट के जजों का फैसला भी बंटा था
    इन सवालों का जवाब जानने से पहले एक चौंकाने वाला तथ्य समझिए भारत में अगर कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह बलात्कार हो सकता है. लेकिन यदि वही महिला उसकी पत्नी है, तो भारतीय कानून में लंबे समय से एक अपवाद (Exception) मौजूद रहा है. यही "Marital Rape Exception" है, जिस पर पूरी लड़ाई टिकी हुई है. याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि "अगर सहमति ही रेप और सेक्स के बीच का फर्क है, तो शादी के बाद सहमति की अहमियत कैसे खत्म हो सकती है?"

    इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जज भी एक राय नहीं बना पाए.  मार्च 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दिया. एक जज ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद संविधान के खिलाफ है. लेकिन दूसरे जज इससे सहमत नहीं थे। 

    जाहिर है कि अदालत के भीतर भी मतभेद था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहीं से साफ हो गया कि यह केवल कानून का मसला नहीं, बल्कि समाज और संविधान के बीच टकरा रहे दो विचारों का सवाल है. जो Marital Rape को अपराध बनाने की मांग कर रहे हैं, वे क्या कहते हैं?

    पक्ष में लोग ये तर्क देते हैं

        शादी किसी महिला की शारीरिक स्वायत्तता खत्म नहीं करती.
        संविधान सभी महिलाओं को समान सुरक्षा देता है.
        सहमति (Consent) हर रिश्ते में जरूरी है.
        पत्नी को कानून में कम सुरक्षा देना समानता के अधिकार के खिलाफ है.

    और विरोध करने वाले क्या कहते हैं?

        दूसरा पक्ष कई चिंताएं उठाता है:
        विवाह संस्था पर असर पड़ सकता है.
        झूठे मामलों की आशंका बढ़ सकती है.
        पति-पत्नी के निजी विवाद आपराधिक मुकदमों में बदल सकते हैं.

    29 फीसदी महिलाएं हुई हैं शिकार
    भारत में Marital Rape के अलग अपराध का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, इसलिए NCRB के पास इसका सीधा डेटा मौजूद नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ यौन या शारीरिक हिंसा का कोई अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट बताती है कि 18 से 49 वर्ष की आयु की करीब 29 फीसदी विवाहित महिलाओं ने अपने जीवन में कभी न कभी पति द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा झेलने की बात कही. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं ने यौन हिंसा की शिकायत की, उनमें अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं बल्कि उनका अपना पति था. यही आंकड़े बताते हैं कि Marital Rape पर बहस अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे वर्षों से मौजूद एक सामाजिक वास्तविकता है, जिस पर अब कानूनी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। 

    दूसरी तरफ कानून की किताब में ऐसे मामलों को अलग अपराध की श्रेणी नहीं मिली हुई है. यही विरोधाभास इस पूरी बहस का केंद्र है. सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मूल प्रश्न यही है कि अगर किसी महिला की सहमति के बिना सेक्स अपराध हो सकता है, तो क्या विवाह उस सहमति को स्थायी रूप से मान लेने का आधार बन सकता है?

    घर की चारदीवारी के भीतर भी होती है हिंसा
    अगर NCRB के व्यापक आंकड़ों को देखें तो भी एक तस्वीर सामने आती है. महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में हर साल सबसे बड़ी हिस्सेदारी 'पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' (IPC 498A) से जुड़े मामलों की रहती है। 

    दूसरे शब्दों में कहें तो महिलाओं के लिए खतरा हमेशा सुनसान सड़क या किसी अजनबी से नहीं जुड़ा होता, कई बार वह उसी व्यक्ति से जुड़ा होता है जिसके साथ वह अपना जीवन साझा कर रही होती है। 

    यही वजह है कि Marital Rape की बहस केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं रह जाती. यह बहस उस बुनियादी प्रश्न में बदल जाती है कि भारतीय समाज विवाह को कैसे देखता है. यह भारतीय समाज की उस सोच से जुड़ा है जहां शादी को कभी अधिकार, कभी जिम्मेदारी और कभी पवित्र संस्था के रूप में देखा जाता है. लेकिन नई पीढ़ी एक अलग सवाल पूछ रही है कि "क्या किसी भी रिश्ते में, चाहे वह शादी ही क्यों न हो, सहमति से बड़ा कुछ हो सकता है?" शायद इसी सवाल का जवाब आने वाले वर्षों में भारत के कानून और समाज दोनों को तलाशना होगा। 

  • 15 सितंबर के बाद नहीं ले पाएंगे UPI पेमेंट? QR Code वाले दुकानदारों पर Re-KYC की मार, जानें पूरा मामला

    15 सितंबर के बाद नहीं ले पाएंगे UPI पेमेंट? QR Code वाले दुकानदारों पर Re-KYC की मार, जानें पूरा मामला

    नई दिल्ली
    भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। 

    RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं। 

    क्या है पूरा मामला?
    रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है। 

    आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
    अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है। 

    कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित?
    इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं। 

    क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम?
    इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है। 

    क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए?
    फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है।