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  • एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती, सरगुजा कलेक्टर से फोन पर सीधे की बात

    एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती, सरगुजा कलेक्टर से फोन पर सीधे की बात

    सरगुजा एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री हुए सख्त: जिला  कलेक्टर से की फोन पर सीधी बात

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा – बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं

    जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश

    विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देश

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

    मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। 

    मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।

    मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

  • सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बोले- ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति गंभीर चिंता का विषय

    सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बोले- ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति गंभीर चिंता का विषय

    नई दिल्ली

    दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले पर एमकिस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अदालत को हादसे की जानकारी दी. उन्होंने सत्य निकेतन में अप्रैल 2022 में भी बिल्डिंग गिरने का हवाला देते हुए राजधानी के सभी PG हॉस्टलों, निजी हॉस्टलों की सुरक्षा जांच और ऑडिट- निरीक्षण करने की सिफारिश की। 

    एमिक्स क्यूरी की रिपोर्ट में कहा गया है?
    सत्‍य निकेतन में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं.
    सत्य नितेकन दिल्ली यूनिविर्सिटी साउथ कैंपस के पास स्थित है, यह छात्रों के रहने के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है। 
    यहां बड़ी संख्या में पीजी, प्राइवेट होस्टल, मेस खाने-पीने की दुकानें और दूसरे व्यवसायिक संस्थान चल रहे हैं। 
    अप्रैल 2022 में यहां एक बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी और 4 लोग घायल हुए थे। 

     अब दोबारा ऐसी घटना होने से यह गंभीर सवाल उठता है कि इमारतों की नियमित जांच, खतरनाक इमारतों की पहचान और भवन नियमों को लागू करने की व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। 
    रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास मौजूद सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के रहने की ऐसी जगहों की समय सीमा के अंदर सुरक्षा जांच की जानी चाहिए। 

    – बिल्डिंग का नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन का उपयोग, मजबूती, आग से सुरक्षा और आने-जाने के रास्ते जैसे सुरक्षा मानकों की जांच होनी चाहिए। 

    रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में बहुमंजिला इमारत ढह गई थी.  करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं. इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze' नाम से बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी गई है। 

    रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे की सटीक वजह की जांच जारी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और हादसे से ठीक पहले वहां पानी भरने की भी सूचना थी.  दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 290 और 125 के तहत FIR दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान में गिरफ्तार कर लिया गया। 

    हादसे के सिलसिले में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। 

    अमीकस क्यूरी ने बताया है कि सत्य निकेतन से सटी एक अन्य इमारत P-213 को भी खतरनाक पाया गया है और MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं। 

    दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों की जांच की सिफारिश
    रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल और अन्य छात्र आवास चल रहे हैं. कई बार रिहायशी संपत्तियों में अतिरिक्त निर्माण, बदलाव या उपयोग में परिवर्तन कर इन्हें संचालित किया जाता है.
    इसलिए इनकी जांच में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, वास्तविक निर्माण और मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, भूमि उपयोग, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रवेश-निकास की जांच होनी चाहिए। 

    रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई हुई.  हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह बताना होगा कि PG हॉस्टल वाली इमारतें जरूरी अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन तो नहीं हुआ। 

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक की नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि निर्माण और मरम्मत का काम बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप कराना संबंधित प्राधिकरण का दायित्व है। 

    कोर्ट ने MCD को यह भी जांचने को कहा है कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनी थीं या नहीं. अगर निर्माण बिना अनुमति या बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है.  मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। 

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में हुए अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई कर रहा है. इससे पहले अदालत दिल्ली, जयपुर और पटना समेत कई इलाकों में अवैध निर्माणों को लेकर कड़े आदेश जारी कर चुका है। 

  • टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी लिखेगा विकास की नई कहानी, ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ को लेकर बोले CM योगी

    टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी लिखेगा विकास की नई कहानी, ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ को लेकर बोले CM योगी

    यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026

    यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन, यूपी टेक मित्र पोर्टल तथा हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ

    टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट, 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण

    सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें

     कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।
     
    मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

    फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।
     
    यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक
    मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

    यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग
    सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

    अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

    यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी
    सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं। पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

    नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी
    उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • इंदौर की 132 KV बिजली लाइनों का होगा अपग्रेड, HTLS कंडक्टर से करीब तीन गुना बढ़ेगी क्षमता: मंत्री तोमर

    इंदौर की 132 KV बिजली लाइनों का होगा अपग्रेड, HTLS कंडक्टर से करीब तीन गुना बढ़ेगी क्षमता: मंत्री तोमर

    इंदौर के पावर नेटवर्क को मिलेगी नई ताकत, एम पी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन- ऊर्जा मंत्री तोमर

    मौजूदा 132 केवी लाइनों की क्षमता होगी करीब तीन गुना, बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा पावर ट्रांसफर

    इंदौर

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर के महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नयन कार्य शुरू कर दिया है। इस कार्य में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों के एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग   एच टी एल एस कंडक्टरों से बदला जा रहा है।

     ऊर्जा मंत्री ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता मौजूदा पैंथर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक विद्युत पावर ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा रही है।

    इंदौर साउथ जोन से चंबल तक दोनों सर्किट का उन्नयन

    उन्नयन कार्य की शुरुआत खंडवा रोड स्थित 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन तक जाने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में की गई है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स तथा सत्य साईं सर्किट शामिल हैं।

    साथ ही 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, सांवेर रोड से 132 केवी चंबल सबस्टेशन, पोलोग्राउंड को जोड़ने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में भी एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को एचटीएलएस कंडक्टरों से बदलने का कार्य शुरू किया गया है।

    14 फीडर बे भी होंगे अपग्रेड

    ट्रांसमिशन लाइनों के कंडक्टर बदलने के साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े 14 फीडर बे के उन्नयन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। इनमें 132 केवी चंबल सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, 132 केवी इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स सबस्टेशन तथा 132 केवी सत्य साईं सबस्टेशन से संबंधित फीडर बे शामिल हैं।

    ट्रांसमिशन लाइनों की बढ़ी हुई करंट वहन क्षमता के अनुरूप संबंधित स्विचयार्ड एवं फीडर बे उपकरणों को भी अपग्रेड किया जाएगा। इससे केवल कंडक्टर की क्षमता बढ़ने तक सीमित न रहकर उससे जुड़े नेटवर्क में भी बढ़ी हुई विद्युत क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    अधिक तापमान पर भी कम सैग के साथ काम करते हैं एचटीएलएस  कंडक्टर

    एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। यही तकनीकी विशेषता इन्हें मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाती है।

    कंडक्टर की बढ़ी हुई थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण किया जा सकता है। इससे नई ट्रांसमिशन लाइन के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम होती है और मौजूदा लाइन के माध्यम से ही अधिक पावर फ्लो संभव होता है।

    बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मौजूदा कॉरिडोर का होगा बेहतर उपयोग

     ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि इंदौर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण गतिविधियों के कारण नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे  (आर ओ डब्ल्यू )उपलब्ध कराना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के कॉरिडोर में ही कंडक्टर की क्षमता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है।

    एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से मौजूदा 132 केवी नेटवर्क में अधिक विद्युत शक्ति के पारेषण के साथ महत्वपूर्ण लाइनों पर लोडिंग का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे पावर फ्लो के लिए अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन भी उपलब्ध होगा।

    इस क्षमता उन्नयन से इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।

  • शारजाह के उद्योग जगत से MP की बढ़ेगी साझेदारी? CM डॉ. यादव की चेयरमैन से मुलाकात में निवेश पर चर्चा

    शारजाह के उद्योग जगत से MP की बढ़ेगी साझेदारी? CM डॉ. यादव की चेयरमैन से मुलाकात में निवेश पर चर्चा

    दुबई विजिट "तीसरा दिन"

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन से की भेंट, एमपी में बड़े निवेश की संभावना

    शारजाह और मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक साझेदारी सुदृढ़ करने पर गहन विचार-विमर्श
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह के प्रतिनिधिमंडल को जीआईएस 2027 के लिए किया आमंत्रित
    फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित 'एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग' (एआईएम कांग्रेस-2026) के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से सौजन्य भेंट की। बैठक में मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओवैस को अगले साल होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2027') में सहभागिता के लिये मध्यप्रदेश आमंत्रित किया।

    व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और बी-2-बी फोरम का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर के साथ एक सुव्यवस्थित और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्यप्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। साथ ही, दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों के बीच सेक्टर-आधारित बी-2-बी बैठकों के आयोजन हेतु 'मध्यप्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम' का प्रस्ताव भी रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के एमएसएमई और निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों व वितरकों से जोड़ने के लिए शारजाह चैंबर से सहयोग का आह्वान किया। बैठक में शारजाह की अग्रणी कंपनियों को प्रदेश के फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाओं में पूंजी निवेश के लिए आमंत्रित किया गया।

    मध्यप्रदेश में निवेश-अनुकूल नीतियां और सुदृढ़ इंफ्रॉस्ट्रक्चर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी रणनीतिक केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, विशाल औद्योगिक लैंड बैंक, विश्वस्तरीय इंफ्रॉस्ट्रक्चर और देश के बड़े बाजारों से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के साथ देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल-विंडो सिस्टम और उद्योग-अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को संपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। शारजाह का विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

    शारजाह-भारत के मजबूत आर्थिक संबंध

    शारजाह-भारत के व्यापारिक संबंधों को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी और सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। चैंबर ने भारत में मुंबई सहित, ट्रेड मिशन और बिज़नेस फोरम आयोजित किए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्रीज़, टूरिज़्म और रियल एस्टेट शामिल हैं। गौरतलब है कि अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, फूड प्रोडक्शन, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और द्विपक्षीय बिज़नेस संस्थाओं में नेतृत्व का व्यापक अनुभव है।

     

  • CM योगी के नेतृत्व में यूपी में निवेश का माहौल मजबूत, सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा उद्योग जगत का भरोसा: रामी रेड्डी

    CM योगी के नेतृत्व में यूपी में निवेश का माहौल मजबूत, सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा उद्योग जगत का भरोसा: रामी रेड्डी

    यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026

    यूपी में बड़े निवेश के लिए उद्योग जगत उत्साहित: रामी रेड्डी

    रामकी समूह के चेयरमैन ने कहा- सीएम योगी के नेतृत्व में अनुशासन, सुरक्षा और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश बनेगा वस्त्रोद्योग का प्रमुख केंद्र

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश को वस्त्रोद्योग क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए उद्योग जगत बड़े निवेश को लेकर उत्साहित है। 'यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026' के उद्घाटन समारोह में पूर्व राज्यसभा सदस्य, उद्योगपति, समाजसेवी तथा रामकी समूह के फाउंडर एवं चेयरमैन अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण की जमकर सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हो रहे तेज विकास और बेहतर औद्योगिक वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब उद्योगों के लिए निवेश और विकास की संभावनाओं वाला महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभरा है।

    रामी रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस गति से देश आगे बढ़ रहा है, उसी दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उत्तर प्रदेश को नई सोच, अनुशासन और नियंत्रण के साथ आगे ले जा रहे हैं। प्रदेश में अनुशासन, नियंत्रण और सुरक्षा का वातावरण उद्योगपतियों में निवेश का भरोसा पैदा करता है। उद्योगपति अपना पैसा वहीं लगाना चाहते हैं, जहां उन्हें सुरक्षा के साथ स्थिर और भरोसेमंद वातावरण मिले। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ ही संसाधनों से समृद्ध है। प्रदेश में मजबूत राजनीतिक नेतृत्व और सक्षम प्रशासनिक नेतृत्व उद्योग जगत को यह विश्वास दे रहा है कि यहां आकर निवेश किया जा सकता है और कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    रेड्डी ने कहा कि वस्त्रोद्योग देश के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस क्षेत्र का विकास हो रहा है, लेकिन तमिलनाडु ने वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनाने के लिए तमिलनाडु जैसे राज्यों के सफल अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ठोस दृष्टि और कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा।

    उन्होंने कहा कि लखनऊ के आसपास तथा पूरे प्रदेश में चार-पांच स्थानों पर बनाए जा रहे वस्त्रोद्योग केंद्र और पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि योगी सरकार वस्त्रोद्योग को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक विकास की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से स्थिर वातावरण, बेहतर आधारभूत ढांचा और सस्ती उपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण है। 'वॉक टु वर्क' कॉसेप्ट के साथ निजी क्षेत्र की श्रेष्ठ औद्योगिक इकाइयों को इन केंद्रों में लाए जाने स उद्योग व श्रमिक, दोनों को लाभ होगा तथा वस्त्रोद्योग का समग्र विकास तेजी से हो सकेगा।

    रामी रेड्डी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता है और उद्योग जगत इसके लिए प्रतिबद्ध है। देशभर का उद्योग जगत उत्तर प्रदेश के वस्त्रोद्योग क्षेत्र में होने वाले विकास को लेकर आशान्वित है और इस विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश न केवल देश बल्कि वस्त्रोद्योग के वैश्विक मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

    भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग का बाजार 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य: अश्विन चंद्रन
    इस अवसर पर प्रीकॉट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के उपाध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के बीच खरीदार अब लागत के साथ गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, स्थिरता, उत्पादकता और समय पर आपूर्ति को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक, पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला और विशाल घरेलू बाजार मौजूद है। अगले पांच वर्षों में भारतीय वस्त्र एवं परिधान बाजार को मौजूदा करीब 180 अरब डॉलर से बढ़ाकर लगभग 350 अरब डॉलर और निर्यात को करीब 37 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए बड़े पैमाने पर विस्तार, एकीकृत औद्योगिक तंत्र, तकनीकी उन्नयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स का उपयोग बढ़ाना होगा।

    चंद्रन ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास युवा कार्यबल, मजबूत एमएसएमई आधार, वस्त्र एवं परिधान समूह, हथकरघा-हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा और विशाल घरेलू बाजार है। प्रदेश तकनीकी वस्त्र, टिकाऊ एवं रीसाइकिल्ड उत्पाद तथा उच्च मूल्य वाले घरेलू वस्त्रों के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उद्योग के विस्तार के लिए स्थिर नीतियां, तैयार आधारभूत ढांचा, प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली-पानी, बेहतर परिवहन, कुशल मानव संसाधन और त्वरित स्वीकृतियां आवश्यक हैं। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता, स्थिरता, आपूर्ति की निगरानी और अनुपालन पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआईटीआई भारत सरकार के साथ समर्थ योजना के तहत वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास पर काम कर रहा है। इसी अनुभव के आधार पर संगठन उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर मौजूदा औद्योगिक समूहों और नई निवेश परियोजनाओं के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने में सहयोग करने को तैयार है।

  • इंदौर मेट्रो का रीजनल विस्तार तेज, उज्जैन-देवास-महू-पीथमपुर जुड़ेंगे; बनेगा बड़ा मेट्रो नेटवर्क

    इंदौर मेट्रो का रीजनल विस्तार तेज, उज्जैन-देवास-महू-पीथमपुर जुड़ेंगे; बनेगा बड़ा मेट्रो नेटवर्क

    इंदौर

    मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, देवास जैसे शहरों को मेट्रो या रैपिड मेट्रो कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है. मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ लगभग 84 से 95 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए DPR और सर्वे का काम तेज कर दिया है. वहीं इंदौर-उज्जैन रैपिड रेल कॉरिडोर को सिंहस्थ 2028 के पहले पूरा करने का लक्ष्य है. वहीं इंदौर-पीथमपुर मेट्रो, इंदौर-महू मेट्रो और देवास-मक्सी मेट्रो रूट भी प्लान में है। 

    इंदौर मेट्रो का रिंग कॉरिडोर
    इंदौर मेट्रो में येलो लाइन का 31.55 किमी लंबा रिंग कॉरिडोर है, जिसमें 29 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इसमें गांधी नगर और सुपर कॉरिडोर के प्रारंभिक चरण के बाद सुपर कॉरिडोर-3 में मालवीय नगर (रेडिसन चौराहा) तक लगभग 17 किमी लंबे और ₹2,850 करोड़ की लागत वाले नए खंड को मेट्रो नेटवर्क 5 सितंबर को जोड़ा गया है. जबकि लवकुश चौराहे से बड़ा गणपति, राजवाड़ा और रेलवे स्टेशन होते हुए राजेंद्र नगर तक का हिस्सा घनी आबादी में भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे। 

    1. इंदौर-उज्जैन रीजनल रैपिड मेट्रो कॉरिडोर
    मध्य प्रदेश सरकार इंदौर और मालवा क्षेत्र के चारों प्रमुख शहरों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड मेट्रो नेटवर्क की तैयारी भी कर रही है. यह मध्य प्रदेश का सबसे हाई प्रायोरिटी रीजनल मेट्रो यानी नमो भारत रैपिड रेल प्रोजेक्ट है. 48 किलोमीटर के रूट पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च आ सकता है.महाकुंभ सिंहस्थ 2028 (मार्च–मई 2028) से पहले इसे शुरू करने का लक्ष्य है. इंदौर के लवकुश चौराहा, एयरपोर्ट से यह इंदौर-उज्जैन 4-लेन हाईवे के समानांतर उज्जैन महाकाल मंदिर तक जाएगा। 

    प्रस्तावित स्टेशन 
      1. लवकुश चौराहा (इंदौर इंटरचेंज)
      2. भंवरसला, सांवेर रोड
      3. बारोली
      4. धरमपुरी, सांवेर
      5. निनौरा
      6. त्रिवेणी घाट
      7. नानाखेड़ा ISBT बस स्टैंड
      8. उज्जैन रेलवे स्टेशन
      9. श्री महाकालेश्वर मंदिर स्टेशन (उज्जैन)

    एमपी के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि इंदौर मेट्रो परियोजना का विस्तार किया जाएगा. इसमें पीथमपुर, महू, देवास, मक्सी, उज्जैन शामिल होगा. इंदौर मेट्रो में अगले 10-15 साल में काफी विस्तार हो सकता है। 

    2. इंदौर-पीथमपुर मेट्रो 
    इंदौर-पीथमपुर मेट्रो मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल, फार्मा और इंडस्ट्रियल हब को जोड़ने वाला रूट बनेगा. ये 30 से 35 किलोमीटर लंबा है. फिजिबिलिटी रिपोर्ट और सर्वे के बाद 2029-2030 तक ये तैयार हो सकता है. इंदौर मेट्रो की येलो लाइन (राजेंद्र नगर, एबी रोड) से होकर राऊ होते हुए पीथमपुर सेज (SEZ) तक एलिवेटेड ट्रैक बनाने की योजना है। 

    प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन
      1. राजेंद्र नगर स्टेशन (इंटरचेंज)
      2. राऊ चौराहा
      3. पिगडंबर
      4. पीथमपुर एंट्री गेट, इंडस्ट्रियल एरिया-1
      5. पीथमपुर सेज (SEZ)
      6. स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क स्टेशन
    3. इंदौर-महू मेट्रो विस्तार 

    इंदौर के मास्टर प्लान (फेज-2) के तहत सैन्य छावनी और डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर (महू) को मेट्रो कॉरिडोर जोड़ेगा. 18 से 20 किलोमीटर ये रूट 2029-2031 तक पूरा किया जाना है. देवास नाका, जूनी इंदौर से आगे एबी रोड के साथ वाई शेप ट्रैक के जरिए महू छावनी तक पहुंचेगा। 

    प्रस्तावित स्टेशन 

      1. राजेंद्र नगर
      2. रेती मंडी
      3. आईपीएस एकेडमी 
      4. श्रमिक कॉलोनी
      5. इंदौर बाईपास-2
      6. पिगडंबर, उमरिया
      7. मां वैष्णोदेवी हॉस्पिटल
      8. हरण्याखेड़ी, IIT  इंदौर 
      9. चिनार रेजीडेंसी
      10. महू (डॉ. अंबेडकर नगर स्टेशन)
    4. देवास-मक्सी रैपिड मेट्रो विस्तार 

    औद्योगिक शहर देवास, विक्रम उद्योगपुरी और रेलवे जंक्शन मक्सी को इंदौर रीजनल मेट्रो ग्रिड से जोड़ने की योजना है. इसमें 50 से 55 किलोमीटर लंबा रूट होगा. ये 2031-2033 के रीजनल मेट्रोपॉलिटन मास्टर प्लान का आखिरी चरण का प्लान है. इंदौर के देवास नाका से मांगलिया, क्षिप्रा होते हुए देवास शहर, चामुंडा माता टेकरी की तलहटी, विक्रम उद्योगपुरी औद्योगिक क्षेत्र और मक्सी रेलवे जंक्शन तक ये कॉरिडोर बनेगा। 

    प्रमुख प्रस्तावित स्टेशन

      1. देवास नाका (इंदौर)
      2. मांगलिया गांव
      3. क्षिप्रा
      4. देवास इंडस्ट्रियल एरिया (टाटा एक्सपोर्ट, रसूलपुर)
      5. देवास बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन
      6. विक्रम उद्योगपुरी SEZ (उज्जैन-देवास बॉर्डर)
      7. मक्सी जंक्शन 

  • हाई-सिक्योरिटी वेन्यू में फर्जी PMO कार्ड से एंट्री, युवक हिरासत में; साथ चल रहे बॉडीगार्ड के पास बंदूक

    हाई-सिक्योरिटी वेन्यू में फर्जी PMO कार्ड से एंट्री, युवक हिरासत में; साथ चल रहे बॉडीगार्ड के पास बंदूक

    मुंबई
    पीएम नरेंद्र मोदी के मुंबई में कार्यक्रम स्थल से दो लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिए गए लोगों में से एक के पास से फर्जी आईडी कार्ड बरामद किया गया है. पकड़ा गया शख्स खुद को पीएमओ का अधिकारी होने का दावा कर रहे थे. एक अन्य पकड़े गए शख्स के पास से बंदूक भी बरामद हुई है.

    शख्स के पास से मिला फर्जी ID कार्ड
    पकड़े गए एक व्यक्ति के पास से बंदूक बरामद हुई है. मुंबई पुलिस ने BKC स्थित नीता अंबानी सांस्कृतिक केंद्र से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है.पकड़ा गया शख्स खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी होने का दावा कर रहा था. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम रोहन पारेख है और उसकी उम्र 24 वर्ष है. सूत्रों के मुताबिक, रोहन के पास प्रधानमंत्री कार्यालय का फर्जी पहचान पत्र भी था. सुरक्षा जांच के दौरान उसका पहचान पत्र फर्जी पाया गया. रोहन एक अंगरक्षक के साथ घूमता था, जिसके पास बंदूक थी. मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस पूरे मामले की आगे जांच कर रही है.

    पीएम मोदी का मुंबई दौरा
    प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार शाम को मुंबई में करीब 5.45 बजे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 का उद्घाटन करेंगे. ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का सातवां संस्करण 8 से 11 सितंबर तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है. 2020 से, जीएफएफ एक अंतरराष्ट्रीय विचार नेतृत्व मंच के रूप में उभरा है जो नीति निर्माताओं, नियामकों, केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों, फिनटेक कंपनियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, निवेशकों, शिक्षाविदों और अन्य वैश्विक हितधारकों को वित्त के भविष्य को आकार देने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाता है.

    जानिए आखिर हुआ क्या था
    पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख नामक व्यक्ति एक बॉडीगार्ड के साथ इस हाई-सिक्यॉरिटी वेन्यू के आसपास घूम रहा था. सुरक्षा जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि रोहन पारेख एक फर्जी पीएमओ यानी प्रधानमंत्री कार्यालय का पहचान पत्र लेकर घूम रहा था. कार्ड की जांच करने पर वह फर्जी पाया गया, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. पुलिस का कहना है कि रोहन पारेख और उसका बॉडीगार्ड दोनों पुलिस हिरासत में हैं, और इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है. अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि वे कार्यक्रम परिसर के अंदर कैसे दाखिल हुए और वहां मौजूद रहने के पीछे उनका कोई खास मकसद या साजिश तो नहीं थी. दोनों आरोपियों को जल्द ही अदालत में पेश किए जाने की संभावना है, जहां पुलिस उनके इस उच्च सुरक्षा वाले इलाके में मौजूदगी के पीछे के बड़े कारणों का पता लगाने के लिए पूछताछ कर रही है.

  • वस्त्र उद्योग में यूपी की बढ़ती ताकत, योगी सरकार की नीतियों से टेक्सटाइल सेक्टर को मिला बड़ा बढ़ावा: राकेश सचान

    वस्त्र उद्योग में यूपी की बढ़ती ताकत, योगी सरकार की नीतियों से टेक्सटाइल सेक्टर को मिला बड़ा बढ़ावा: राकेश सचान

    योगी सरकार की नीतियों से यूपी का वस्त्र उद्योग नई ऊंचाइयों पर: राकेश सचान

    यूपी में वस्त्र उद्योग को मिल रहा नया विस्तार, 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर

    लखनऊ-हरदोई के बीच 1,000 एकड़ में बन रहा पीएम मित्र पार्क, बुनकरों को डिजाइन से डिजिटल मार्केटिंग तक मदद 

    अमरोहा से बनारस तक पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन उपलब्ध, सस्ते दर पर निवेश का अवसर

    निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी से स्टांप ड्यूटी तक राहत, यूपी को टेक्सटाइल हब बनाने की तैयारी

    लखनऊ
     वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल से प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उद्योगों को भी नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश से करीब 35 हजार करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ है, जबकि 2 लाख से अधिक हथकरघा बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और 110 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जा रहा है। कहा कि यूपी के वस्त्र उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

    5,354 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर
    राकेश सचान ने बताया कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार निवेशकों को प्रोत्साहन दे रही है। आज 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। वर्ष 2017 और 2022 की वस्त्र उद्योग नीतियों के तहत करीब 116 निवेशकों को 322 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया गया है। इसके अलावा करीब 96 करोड़ रुपये का इंसेंटिव भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उद्यमियों को कैपिटल सब्सिडी, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी में छूट और 60 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी समेत जमीन आवंटन और बिजली में भी छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

    प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग
    मंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद का गारमेंट क्षेत्र, कानपुर का होजरी उद्योग, वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही-मिर्जापुर की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, पिलखुवा के घरेलू वस्त्र, मेरठ के खेल परिधान और फर्रुखाबाद की वस्त्र छपाई प्रदेश की पहचान बन चुके हैं। प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। योगी सरकार बुनकरों को डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में मदद दे रही है। वाराणसी में 443 विद्यार्थियों को 84 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया गया है। इससे पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क
    राकेश सचान ने बताया कि लखनऊ-हरदोई के बीच 1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके लिए योगी सरकार 1,100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पार्क में सिक्स लेन सड़क, 125 केवी की विद्युत लाइन और पानी की सप्लाई पहुंच चुकी है। मास्टर डेवलपर भी तय हो गया है।

    पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन
    उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का लक्ष्य दिया है। इसके तहत अमरोहा, बिजनौर, संत कबीर नगर, बरेली और बनारस में शिल्प पार्क के लिए जमीन उपलब्ध हो चुकी है। करीब 400 एकड़ क्षेत्र में उद्यमियों को निवेश का अवसर मिलेगा और विभाग उन्हें सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराएगा। कानपुर समेत अन्य स्थानों पर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्क के लिए भी जमीन चिन्हित की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि 2022 की तरह ही 2027 में बनने वाली नई नीति में भी प्रदेश के उद्यमियों के सुझावों को शामिल किया जाएगा। पर्यटन के बढ़ते दायरे और 25 करोड़ की आबादी वाले घरेलू बाजार को देखते हुए वस्त्र एवं ओडीओपी उत्पादों में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए उद्यमियों को यूपी में बड़े स्तर पर निवेश के लिए आमंत्रित किया।

  • गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।